Category: राजस्थान

  • ऐडवोकेट सैयद फरजंद अली राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस बने।

    अशफाक कायमखानी जयपुर।
    राजस्थान हाईकोर्ट के लिये ऐडवोकेट कोटे से आज नो ऐडवोकेट के जस्टिस बनने के आदेश जारी हुये। जिनमे चित्तौड़गढ़ के मुल निवासी व जोधपुर हाईकोर्ट मे वकालत कर रहे सैयद फरजंद अली भी बनने वालो मे एक जस्टिस है। नवनियुक्त जस्टिस सैयद फरजंद अली राजस्थान के न्यायीक इतिहास मे एडवोकेट कोटे से बनने वाले दूसरे व वैसे छठे मुस्लिम जस्टिस है।

    राजस्थान हाईकोर्ट मे मुस्लिम जस्टिस बनने वालो मे पहले राजस्व मण्डल सदस्य रहते सर्विसेज कोटे से मालपुरा निवासी जस्टिस फारूक हसन नकवी फिर सर्विसेज कोटे से ही यूपी निवासी जस्टिस मोहम्मद असगर अली चोधरी व जस्टिस मोहम्मद यामिन थे। उनके बाद एडवोकेट कोटे से पहले सुजानगढ़ निवासी जस्टिस मोहम्मद रफीक व फिर सर्विसेज कोटे से झाड़ोद डीडवाना निवासी जस्टिस भंवरु खा थे। अब जाकर ऐडवोकेट कोटे से जस्टिस सैयद फरजंद अली बतोर हाईकोर्ट जस्टिस नियुक्त किये गये है। उक्त बने जस्टिस साहिबानो मे जस्टिस फारुक हसन व मोहम्मद यामीन अली के सेवानिवृत्ती के बाद निधन हो चुका है। एवं जस्टिस मोहम्मद असगर अली चोधरी व जस्टिस भंवरु खा सेवानिवृत्ती के बाद खिदमत ऐ खल्क मे लगे हुये है। जबकि जस्टिस मोहम्मद रफीक राजस्थान हाईकोर्ट मे सीनियर जस्टिस क तौर पर कार्यरत है।

  • एसओजी की कार्रवाई नौकरी लगाने के नाम पर 66 लाख की धोखाधड़ी का अभियुक्त गिरफ्तार

    अशफाक कयामखानी,जयपुर
    सीकर: एसओजी ने रविवार को नये मेडिकल कॉलेजों में नौकरी दिलवाने एवं टेन्डर दिलवाने के नाम पर 66 लाख की धोखाधड़ी करने वाले एमबीबीएस डाक्टर पारूल शर्मा को सीकर से गिरफ्तार किया है।

    अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, एटीएस एवं एसओजी श्री अनिल पालीवाल ने बताया कि परिवादी पूरण यादव ने एक रिपोर्ट पेश की कि वर्ष 2017 में आलोक शर्मा व संजय शर्मा के मार्फत पारूल शर्मा नाम के व्यक्ति से सचिवालय की सरस पार्लर की कैंटीन में मुलाकात हुई, जिसने अपने आप को सीकर मेडिकल कॉलेज में नोडल ऑफिसर व एमबीबीएस डाक्टर होना बताया व राजनीतिक पहुॅच का हवाला दिया तथा परिवादी को झांसा दिया कि मैं सात नये मेडिकल कॉलेज में एल्यूमिनियम व ग्लास कार्य हेतु टेण्डर दिलवाने व लैब टैक्नीशियन व एलडीसी के पदों पर नियुक्ति करवा दूंगा। इस प्रकार परिवादी से अलग अलग तारीखों में करीब 66 लाख रूपये ले लिये और परिवादी को चिकित्सा विभाग, राजस्थान सरकार के फर्जी नियुक्ति आदेश व कागजात दे दिये। टेंडरों के लिए भी इण्डियन मेडिकल सर्विसेज कॉपरेशन लिमिटेड के फर्जी वर्क आर्डर दे दिये।

    आरोपी पारूल शर्मा पुत्र श्री प्रेम प्रकाश शर्मा निवासी रामलीला मैदान के पास, सीकर को रविवार को एसओजी के पुलिस निरीक्षक श्री धर्मवीर सिंह द्वारा सीकर से गिरफ्तार किया गया।

    श्री पालीवाल ने बताया कि पूछताछ में आरोपी पारूल शर्मा ने वर्ष 2008 में एसएमएस मैडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करना बताया है। आरोपी से धोखाधड़ी की रकम व इसके अन्य साथियों के बारे में पूछताछ जारी है।

  • शेखावाटी के सपूत विवेक कुमार प्रधानमंत्री व अजय भादू‌‌ राष्ट्रपति के निजी सचिव बनने से जनपद को काफी उम्मीद

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    हालांकि शेखावाटी जनपद के सियासी जन नेताओ के भारतीय स्तर पर अहम पदो पर रहने के अलावा अहम जिम्मेदारी निभाने का रिकार्ड बनाया है। लेकिन जनता मे अक्सर रुक रुक कर एक बात सूनने मे मिलती रहती थी कि असल राज तो ब्यूरोक्रेट्स चलाते है। अब जाकर शेखावाटी के झूंझुनू के सपूत व भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी विवेक कुमार को भारत के प्रधानमंत्री व सीकर के सपूत व भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अजय भादू को राष्ट्रपति का निजी सचिव बनाया गया है।

    भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अजय भादू 1996 बैच के गुजरात कैडर मे नियुक्त होने के बाद गुजरात की तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदी बेन के सचिव भी रह चुके है। जबकि भारतीय विदेश सेवा के लिये 2004 मे चयनित विवेक कुमार रसिया व आस्ट्रेलिया मे सेवाऐ देने के बाद 2014 मे प्रधानमंत्री कार्यलय मे सेवा देने के बाद अब प्रधानमंत्री के निजी सचिव नियुक्त हुये है।

    सीकर की बहु प्रतिभा पाटिल भारत की राष्ट्रपति व बेटा भैरोसिंह शेखावत उपराष्ट्रपति पद पर रहने के अलावा तत्तकालीन समय मे सीकर के सांसद चोधरी देवीलाल उप प्रधानमंत्री व बलराम जाखड़ लोकसभाध्यक्ष के अलावा केंद्र मे मंत्री रहे। शेखावाटी के शीशराम ओला, दोलतराम सारण, अय्यूब खान, जगदीप धनखड़, सुभाष महरिया, महादेव सिंह, भी केंद्र मे मंत्री का ओहदा पाया है। भारत के प्रधानमंत्री बने चंद्रशेखर के वंशक का निकास भी उदयपुरवाटी के गुढा क्षेत्र से था। इसके अलावा शेखावाटी की बेटी कमला बेनीवाल राज्यपाल रह चुकी है। वही बेटे जगदीप धनखड़ को अभी अभी पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया है।

    अढाणी, रिलायंस, टाटा , गोदरेज व वीपरो को छोड़कर बाकी बिड़ला, बांगड़, गोयनका, पौद्दार, रुईया, मोदी, खेतान, तोदी, मित्तल, एमडीएच, तापड़िया, बजाज, साबू, सोभासरीया, सिंघानिया, मोररका, गोयनका सहित अनेक नामी उधोगपति भी शेखावाटी जनपद के रहने वाले है।

    भारत सियासत मे अहम किरदार अदा करने वालो के अलावा अधीकांश नामी उधोगपतियो का तालूक शेखावाटी की धरती से होने के बावजूद आज भी विकास के नाम पर वो सबकुछ नही हो पाया जिसकी उम्मीद व आवश्यकता शेखावाटी जनपद की अवाम को थी। जब जब विकास व ओधोगिक क्रांति की बात जनपद मे उठती थी तो लोग कहते थे कि असल सरकार तो ब्यूरोक्रेट्स ही पर्दे के पिछे से चलाते है। अब जाकर शेखावाटी के सपूत ब्यूरोक्रेट्स बनकर भारत के प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति के निजी सचिव बनने के बाद जनपद मे कितना बदलाव आता है। उसको देखना होगा।

  • भीड़ के सामने पीट पीटकर शहीद किये गये हेड कांस्टेबल अब्दुल गनी को सुपुर्द ऐ खाक किया गया।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान के राजसमंद जिले के भीम कस्बे के गावं मे सरकारी डयूटी निभा रहे हेड कांस्टेबल अब्दुल गनी की पीट पीट कर हत्या करने को लेकर तीन सूत्रीय मांगो को लेकर चल रहा घटनाक्रम का पटाक्षेप आज शाम हो जाने के शहीद की मयत गमगीन माहोल के मध्य सुपुर्द -ए-खाक उनके आबाई गावं मे कर दिया गया।

    मांगे को लेकर कलेक्टर राजेन्द्र भट्ट और एस पी हरेन्द्र महावर शहीद हेड कांस्टेबल अब्दुल गनी के निवास पर पहुंच कर शहीद के परिजनों से बात कर उन्हे आश्वासन दिया की ड्यूटी के दौरान मौत होने पर सरकार की और से निर्धारित राशि मिल जाएगी और एक सदस्य को नौकरी मिलेगी। इसके अलावा कलेक्ट्रेट और पुलिस विभाग के कर्मी एक दिन की तनख़्वाह शहीद गनी के परिवार को स्वेच्छा से देंगे। इसके अलावा शहीद हेड कांस्टेबल के एक बेटी व एक बेटे को बालिग़ होने तक एक का कलेक्टर व एक का एसपी पढाई का खर्चा वहन करेंगे। कलेक्टर राजेंद्र भट्ट शहीद गनी के परिवार को यूआईटी से मकान आवंटित करने के लिए राज्य सरकार को शिफारिश करेंगे। राजसमंद पुलिस टीम के प्रतिनिधि डीप्टी राजेंद्र सिंह भीलवाड़ा पहुँचे । शहीद हेड कांस्टेबल गनी के अंतिम संस्कार (सुपुर्दे ख़ाक ) में होंगे शामिल हुये।

    कुल मिलाकर यह है कि मोबलिंचीग की घटनाओं व डयूटी पर तैनात मुस्लिम पुलिस अधिकारी की भीड़ द्वारा हत्या करने का सीलसीला सरकार रोक पाने मे सक्षम साबित नही हो पा रही है। अशोक गहलोत की सरकार मे ही सवाईमाधोपुर जिले के सूरवाल कस्बे मे डयूटी पर तैनात थानेदार फूल मोहम्मद को सरे आम जींदा जलाकर मार दिया गया था।

  • सिपाही अब्दुल गनी की हत्या का फिर लगा कांग्रेस सरकार के माथे पर दाग।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान मे करीब सात मोबलिंचीग की घटनाओं के अलावा अशोक गहलोत के पीछले मुख्यमंत्रीकाल मे गोपालगढ मस्जिद मे नमाजियों पर गोली चलाकर मारने के अतिरिक्त थानेदार फूल मोहम्मद को डयूटी पर जींदा जला देने के घाव अभी भरे भी नही थे कि अब अशोक गहलोत के नेतृत्व मे कांग्रेस सरकार बनने के बाद कोटा मे रमाजान खां नामक कैदी को गार्डों द्वारा पीट पीटकर मारने के बाद अब सिपाही अब्दुल गनी को राजसमंद जिले के भीम उपखंड के बरार पंचायत मे सरकारी डयूटी करते हुये मौत के घाट उतारने के बावजूद सरकर की कुम्भकर्णी नींद अभी तक टूटी नही है। सिपाही अब्दुल गनी से पहले राजसमंद जिले मे ही अफराजूल नामक मजदूर को मौत के घाट उतारा जा चुका है।

    राजसमंद जिले के भीम उपखंड की बरार ग्राम पंचायत के रातिया थाक गांव में हेड कांस्टेबल अब्दुल गनी पर हमला सोच-समझकर किया गया। वारदात को अंजाम देने के लिए हमलावरों ने सुनसान जगह चुनी, जो गांव से बाहर करीब एक किलोमीटर दूर है। इस हत्या से पूरे क्षेत्र मे सनसनी फैली हुई है।

    जानकारी अनुसार शाम के वक्त घटनास्थल पर सड़क किनारे घायलावस्था में पड़े हेड कांस्टेबल अब्दुल गनी को जब आते-जाते किसी ने देखकर पुलिस थाने में सूचने देने के बाद एम्बुलेंस मंगवाकर घायल हेड कांस्टेबल को भीम के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचाया। वारदात की सूचना मिलने पर पूरे इलाके में सनसनी फैलने के साथ पूरा पुलिस प्रशासन भी सकते में आ गया बताते है।

    स्थानीय भीम थाने के सीआई, उप अधीक्षक और राजसमंद से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेश गुप्ता सुचना मिलते ही मौके के लिए रवाना हो गए। प्रशासनिक अधिकारी भी घटनास्थल पहुंचे। भीम अस्पताल में चिकित्सकों ने घायल हेड कांस्टेबल का उपचार शुरू किया ही था कि थोड़ी देर बाद उनका दम टूट गया। यह खबर फैलते ही बड़ी संख्या में अस्पताल परिसर में लोग एकत्र हो गए। उधर, गांव के के बाहर घटनास्थल पर भी पुलिस पहुंची।

    मौके के हालात बता रहे थे कि पुलिस अधिकारी पर किसी भारी वस्तु से सिर पर वार किए गए। देर रात पता चला कि 12 जुलाई को जमीन विवाद में दर्ज मारपीट के एक मामले में बयान दर्ज कर मोटरसाइकिल से लौट रहे थे। रास्ते में अज्ञात मोटरसाइकिल सवार लोगों ने चलती बाइक पर उनके सिर पर लट्ठ से हमला कर दिया, जिससे वह बीच रास्ते में ही गिर पड़े और आरोपी भाग गये। पुलिस अधिकारी की हत्या होने पर पुलिस जांच में तो जुटी रही, लेकिन देर रात तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। आला अधिकारी मामले की तहकीकात में जुटे रहे। हालांकि देर शाम एक व्यक्ति को पुलिस जीप में बैठाकर लाई और हिरासत में लिया, मगर उसे लेकर कोई खुलासा नहीं किया गया। देर रात पुलिस अधीक्षक भुवन भूषण यादव भी मामले की गम्भीरता को देखते हुए भीम पुलिस थाने पहुंचे तथा अनुसंधान के दिशा-निर्देश दिए।

    मृतक हेड कांस्टेबल अब्दुल गनी के परिवार में चार पुत्रियां और एक पुत्र तथा पत्नी है, जो इन दिनों कुंवारिया में ही रह रहे थे। ये सभी देर रात भीम पहुंच गए। अब्दुल गनी फरवरी 1995 में राजस्थान पुलिस सेवा में आए थे। पुलिस कांस्टेबल के तौर पर कुंवारिया, आमेट, देवगढ़, राजसमंद में सेवाएं दी। देवगढ़ मुस्लिम महासभा ने आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है।

    कुल मिलाकर यह है कि गाय के नाम पर होने वाली मोबलिंचीग मे हत्यायों का सीलसीला जो भाजपा सरकार मे जारी था वो आज कांग्रेस सरकार मे भी जारी है। जबकि अशोक गहलोत की पीछली सरकार के समय थानेदार फूल मोहम्मद को सरकारी ड्यूटी पर जींदा जलाने के बाद अब हेड कांस्टेबल अब्दुल गनी को भी सरकारी ड्यूटी निभाते समय मौत के घाट उतार दिया गया है।

  • ट्यूबवेल मे जब पानी नही निकला तो-पशु-पक्षियों को पानी पीलाने की दुवाओ के बाद दूसरे टयूबवेल मे पानी आया।

    काजी सेयद जहरुद्दीन उस्मानी चेरिटेबल ट्रस्ट अब वाटर हारवेस्टिंग के जरिये पानी का स्तर बढाने मे लगा।

    अशफाक कायमखानी।सीकर।
    राजस्थान के सीकर जिले के खण्डेला कस्बे के गूरारा रोड़ स्थित शाहील फार्म हाऊस के मालिको ने हरियाली के लिये तकरीबन बाराह साल पहले फार्म हाऊस पर गहरी निचाई तक ट्यूबवेल (बोरिंग) कराने के बावजूद जब उस ट्यूबवेल मे पानी नही आया तो एक दफा सभी निरास तो हुये लेकिन सबने मिलकर पाक परवरदिगार से दुवा कि चाहे उनको पानी ना मिले पर वो सब चाहते है कि इस फार्म पर दूसरी कोशिश के रुप मे बनने वाले टयूबवेल से पानी पशू-पक्षियों व राह चलते एवं जरुरतमंद इंसानो को पीने के पानी निकले तो अल्लाह पाक तेरा करम होगा। सभी जानकारो ने उस क्षेत्र मे पानी नही होने व ट्यूबवेल पर खर्चा नही करने की हिदायत करने के बावजूद पशू-पक्षियों व जरुरतमंद इंसानो के पीने का पानी उपलब्ध करवाने की नियत के साथ पाक परवरदिगार से कि गई दुवाओ के बाद दूसरी ट्यूबवेल उसी फार्म हाऊस मे खोदने पर पानी आया ओर उसके बाद से आज तक पशु -पक्षियो के लिये खेल व इंसानो के लिये प्याऊ (वाटर हट) का इंतेजाम नियमित रुप से साल के तीन से पेसंठ दिन शाहील फार्म हाऊस पर रहता आ रहा है।

    काजी सैयद जहरुद्दीन उस्मानी चेरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंध निदेशक व मुम्बई मे मुकीम अब्दुल रहीम उस्मानी ने बताया कि उन्होने खण्डेला की सरजमी पर पैदा होकर यहां की हवा-पानी व अन्न का उपयोग करके पला व बडा होने का कर्ज उनके उपर आज खण्डेला की सरजमीं का है। वो व ट्रस्ट के सभी सदस्य चाहते है कि किसी ना किसी रुप वो खण्डेला की सरजमीं का कर्ज चुकाने की हरदम कोशिश करते रहे।

    काजी सैयद जहरुद्दीन उस्मानी चेरिटेबल ट्रस्ट मुम्बई के ट्रस्टी अफजल उस्मानी ने बताया कि खण्डेला कस्बे मे पानी का तल काफी नीचे होने के अलावा बरसाती पानी के पहाड़ो व नालियों से बहते हुये बरबाद होते देखकर उनके जेहन मे बरसाती पानी को वाटर हारवेस्टिंग के जरिए फिर से जमीन मे मोजूद पानी के तल तक भेज कर जलस्तर उपर उठाने की कोशिश की तरफ कदम आगे बढाने का निश्चय करके पहली शुरुआत शाहील फार्म हाऊस मे वाटर हारवेस्टिंग पलांट लगाकर इस बरसाती मोसम से शूरु कर रहे है।

    ट्रस्ट के प्रबंध निदेशक रहीम उस्मानी ने कहा कि जल ही जीवन है ओर जल बचाओ-जीवन बचाओ की निती पर चलते हुये उन्होंने शूरुआत मे शाहील फार्म हाऊस मे वाटर हारवेस्टिंग प्लांट के तहत करीब चार सो पचास फीट की गहराई तक ट्यूबवेल खोदकर उसकी सिस्टेमेटिक चिनाई करके बहते बरसाती पानी को उसको जमीनी पानी के तल तक भेजकर खण्डेला का जल स्तर ऊंचा उठाने की कोशिश कर रहे है। रहीम उस्मानी ने यह भी कहा कि खण्डेला नगर पालिका या राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उनके ट्रस्ट को ट्रस्ट के खर्च पर इस तरह के वाटर हारवेस्टिंग लगाने की इजाजत दे तो वो अन्य सरकारी या सार्वजनिक जगह पर भी वाटर हारवेस्टिंग पलांट लगाने को तैयार है।

    रहीम उस्मानी के जीवन आठ साल पहले एक दिन ऐसा भी आया जब वो फार्म हाऊस पर बैठे हुये थे उनके पास पड़ोस की महामाया गौमाता गौसाला के महंत आकर बोले कि उन्होंने दिवार बना ली है पर पानी का इंतजाम ना होने के कारण वो गौसाला शूरु नही कर पा रहे। महंत की बात सूनकर तपाक से रहीम उस्मानी ने गौसाला मे ट्यूबवेल खुदवा कर जनरेटर उपलब्ध करवाने के बाद आज आठ साल से वहां गौशाला चल रही है। रहीम उस्मानी उस गौशाला समिति के आजीवन सदस्य भी है।

    कुल मिलाकर यह है कि अपने लिये तो सभी इंसान जीवन अच्छा व बूरा जीते रहे है। कुछ लोग दिखावे व दूनीया मे नाम बडा करने की नीयत से इंसानो के लिये कुछ करने की कोशिश भी करते है। लेकिन वो लोग बडे खूशनसीब होते है जो अपने जीवनकाल मे पशू-पक्षियों व मानव जाती के लिये साथ साथ राहत देने का काम अंजाम दे जाते है। काजी सैयद जहरुद्दीन उस्मानी चेरिटेबल ट्रस्ट के ओहदेदारान को लाखो सलाम। उक्त ट्रस्टियों के अलावा कफील उस्मानी, शमशुद्दीन उस्मानी, हसन उस्मानी व लतीफ उस्मानी भी ट्रस्ट की गतिविधियों के संचालित मे भागीदारी निभा रहे है।

  • चोलूखां गावं का एक अनोखा मदरसा जिसमे स्टुडेंटस के चाहत समयानुसार तालीम का पूख्ता इंतजाम है।

    अशफाक कायमखानी।चोलूखां (डीडवाना)!
    राजस्थान के डीडवाना सीकर रोड़ पर स्थित नागोर जिले के कायमखानी मुस्लिम बहुल ऐतिहासिक गावं चोलूखां स्थित “मकतब-ऐ-अमन” मदरसे मे तीन से लेकर सतर साल के तालीम याफ्ता स्टुडेंटस के लिये मदरसा इंतेजामिया की चाहत के बजाय पढने वालो की सहुलियत के मुताबिक अलग अलग समय तय होने वाला प्रदेश का एक पहला व अनोखे मदरसे के रुप मे संचालित हो आ रहा है।

    राजस्थान केडर से भारतीय पुलिस सेवा के सिनीयर अधिकारी व आईजी पद से रिटायर्ड कुवंर सरवर खान द्वारा अपनी पेंसन से संचालित उक्त मदरसे मे छोटे बच्चो के तालीम पाने का समय दिन मे बच्चों की सहूलियत के हिसाब से तय है। वही शिक्षा के लिये स्कूल मे जाकर वापिस आकर अपने फ्री समय मे धार्मिक शिक्षा पाने का समय अलग उनकी दिगर शेक्षणिक संस्थान के स्टूडेंट्स की सहुलियत के मुताबिक़ तय है। घर के जिम्मेदार लोगो के दिन मे खेती या अन्य कारोबार करने की व्यस्तता के कारण शाम के बाद रात के किसी समय मे व महिलाओं के उनकी सहुलियत के मुताबिक उनके घर के काम से फारिग होने पर दोपहर व शाम बाद उनके अलग से पढने का इंतजाम कायम है। खास बात यह है कि सुबह से देर रात तक संचालित होने वाले आधुनिक सुविधाओं युक्त मकतब-ऐ- अमन मे तालीम हासिल करने के लिये अलग अलग उम्र के महिलाओं व पुरुषों के अलावा बच्चों के लिये महिला व पुरुष के तौर पर अलग अलग उस्ताद की उपलब्धा है।

    जानकारी अनुसार गुजरे माहे रमजान मे सेंकड़ो महिलाऐ रात को जमा होकर अपनी इबादते महिला उस्ताद की मोजूदगी मे करने के अलावा ताक रातो को रात भर मदरसे मे एक साथ जमा होकर महिलाएं इबादत करती रही है। जिसका पूरा इंतजाम मदरसे की तरफ से होता बताया जाता है।

    कुल मिलाकर यह है कि चोलूखां की सरजमी का जो हो सके वो कर्ज चुकाने के लिये व खिदमत ऐ खल्क की नीयत के साथ आईजी पुलिस रहे सरवर खान उक्त मदरसे के तमाम अखरात अपने स्तर पर उन्हें मिलने वाली पेंसन के तय एक हिस्से से बरदाश्त सालो से करते आ रहे है। राजस्थान मे उक्त तरह का यह पहला व अलग तरह का अनोखा मदरसा है जहा स्टूडेंट्स की सहुलियत के अनुसार तालीम का पूख्ता इंतजाम कायम है।

  • चोलूखां गावं का एक अनोखा मदरसा जिसमे स्टुडेंटस के चाहत समयानुसार तालीम का पूख्ता इंतजाम है।

    अशफाक कायमखानी।चोलूखां(डीडवाना)!
    राजस्थान के डीडवाना सीकर रोड़ पर स्थित नागोर जिले के कायमखानी मुस्लिम बहुल ऐतिहासिक गावं चोलूखां स्थित “मकतब-ऐ-अमन” मदरसे मे तीन से लेकर सतर साल के तालीम याफ्ता स्टुडेंटस के लिये मदरसा इंतेजामिया की चाहत के बजाय पढने वालो की सहुलियत के मुताबिक अलग अलग समय तय होने वाला प्रदेश का एक पहला व अनोखे मदरसे के रुप मे संचालित हो आ रहा है।

    राजस्थान केडर से भारतीय पुलिस सेवा के सिनीयर अधिकारी व आईजी पद से रिटायर्ड कुवंर सरवर खान द्वारा अपनी पेंसन से संचालित उक्त मदरसे मे छोटे बच्चो के तालीम पाने का समय दिन मे बच्चों की सहूलियत के हिसाब से तय है। वही शिक्षा के लिये स्कूल मे जाकर वापिस आकर अपने फ्री समय मे धार्मिक शिक्षा पाने का समय अलग उनकी दिगर शेक्षणिक संस्थान के स्टूडेंट्स की सहुलियत के मुताबिक़ तय है। घर के जिम्मेदार लोगो के दिन मे खेती या अन्य कारोबार करने की व्यस्तता के कारण शाम के बाद रात के किसी समय मे व महिलाओं के उनकी सहुलियत के मुताबिक उनके घर के काम से फारिग होने पर दोपहर व शाम बाद उनके अलग से पढने का इंतजाम कायम है। खास बात यह है कि सुबह से देर रात तक संचालित होने वाले आधुनिक सुविधाओं युक्त मकतब-ऐ- अमन मे तालीम हासिल करने के लिये अलग अलग उम्र के महिलाओं व पुरुषों के अलावा बच्चों के लिये महिला व पुरुष के तौर पर अलग अलग उस्ताद की उपलब्धा है।

    जानकारी अनुसार गुजरे माहे रमजान मे सेंकड़ो महिलाऐ रात को जमा होकर अपनी इबादते महिला उस्ताद की मोजूदगी मे करने के अलावा ताक रातो को रात भर मदरसे मे एक साथ जमा होकर महिलाएं इबादत करती रही है। जिसका पूरा इंतजाम मदरसे की तरफ से होता बताया जाता है।

    कुल मिलाकर यह है कि चोलूखां की सरजमी का जो हो सके वो कर्ज चुकाने के लिये व खिदमत ऐ खल्क की नीयत के साथ आईजी पुलिस रहे सरवर खान उक्त मदरसे के तमाम अखरात अपने स्तर पर उन्हें मिलने वाली पेंसन के तय एक हिस्से से बरदाश्त सालो से करते आ रहे है। राजस्थान मे उक्त तरह का यह पहला व अलग तरह का अनोखा मदरसा है जहा स्टूडेंट्स की सहुलियत के अनुसार तालीम का पूख्ता इंतजाम कायम है।

  • बत्तीस मीटर ऊंचे नये भवनो के निर्माण पर राजस्थान हाईकोर्ट की रोक।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    सूरत के एक कोचिंग मे आग लगने के कारण स्टुडेंट्स के जलकर मारे जाने के बाद देश भर मे अग्निशमन विभाग के पास आग बूझाने वाले उपलब्ध साधनो मे खासतौर पर आखिरी मंजिल तक फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों के पहुंचने को लेकर छिड़ी बहस के बाद राजस्थान हाईकोर्ट मे दायर एक जनहित याचिका के बाद विद्वान जस्टिस मोहम्मद रफीक खान व जस्टिस एन एस ढड्ढा की बेंच ने आदेश देकर आग बूझाने के लिए 32-मीटर से ऊंची हाईड्रोलिक सीढी की व्यवस्था होने तक जयपुर सहित सभी सम्भाग मुख्यालयों पर इससे अधिक ऊंचे नये निर्माण की अनुमति देने पर रोक लगा दी है। साथ ही दो माह मे सम्भाग मुख्यालयों पर बहुमंजिले भवन, कोचिंग सेंटर, माल, व छात्रावासों मे उपलब्ध बचाव के साधन की जांच व अग्निशमन से जुड़े खाली पदो को भरने को भी सरकार को कहा है।

    न्यायालय मे सरकार द्वारा पेश जवाब मे अग्निशमन कर्मियों के 1203 पद खाली होना स्वीकारते हुये जयपुर, व कोटा मे बत्तीस मीटर ऊंची हाईड्रोलिक सीढी होना मानने के साथ साथ सतर मीटर लम्बी सीढी लाने की प्रक्रिया मे होना बताया। अलवर जिले के भीवाड़ी मे साठ मीटर सीढी उपलब्ध होना बताया गया। न्यायालय ने जयपुर मे 18 अप्रेल 2018 को हुये अग्नि हादसे के मलबे के हटने पर तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने के लिये अधिवक्ता अमितोष पारीक को कोर्ट कमिश्नर भी नियुक्त किया गया है।

  • ओसीया से कांग्रेस विधायक दिव्या मदेरणा व सूरजगढ़ से भाजपा विधायक सुभाष पुनिया अपनी परम्परागत जिलापरिषद सीट बचा नही पाये।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान मे पंचायत राज के हुये उपचुनाव मे ओसीया से कांग्रेस विधायक दिव्या मदेरणा व सुरजगढ़ से भाजपा विधायक सुभाष पुनिया के त्याग पत्र के बाद रिक्त हुई सीटो पर हुये उपचुनाव मे दोनो ही विधायको के उम्मीदवारों के हारने की चर्चा अन्य चुनाव परिणामो के मुकाबले राज्य भर मे खूब हो रही है।

    राजस्थान मे पंचायत राज उपचुनाव मे चाहे कांग्रेस ने अधिक सीट जीतकर कांग्रेस नेताओं द्वारा बाजी मारने का दावा किया जा रहा हो। हकीकत यह है कि कांग्रेस के दिग्गज मदेरणा जैसे राजनीतिक परिवार की बेटी दिव्या मदेरणा के जोधपुर जिले के ओसीया विधानसभा क्षेत्र से विधायक बनने के बाद उनके जोधपुर जिलापरिषद के वार्ड-25 सदस्य पद से त्यागपत्र देने के बाद खाली हुये पद पर हुये उपचुनाव मे कांग्रेस के बूरी तरह हार कर तीसरे नम्बर पर चले जाने के बाद लगता है कि विधायक के प्रति छ महीने मे ही जनता मे नाराजगी पनपने लगी है। जोधपुर जिले के जाट बहुल्य जिलापरिषद वार्ड-25 उपचुनाव परिणाम मे नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की पार्टी रालोपा उम्मीदवार अनीता खोजा ने कुल 7504 मत लेकर 831 मतो से जीत दर्ज की है। दूसरे नम्बर पर भाजपा उम्मीदवार रामप्यारी ग्वाला 6677 मत व तीसरे नम्बर रही पर कांग्रेस उम्मीदवार धन्नीदेवी चोधरी को 6628 मत मिले। खास बात यह है कि मदेरणा परिवार की बेटी दिव्या मदेरणा के विधायक बनने पर खाली हुई उक्त सीट के उप चुनाव मे कांग्रेस विधायक दिव्या मदेरणा ने पूरी ताकत झोंककर घर घर एक एक मत पाने के लिए प्रचार करने के बावजूद उनका उम्मीदवार तीसरे नम्बर पर रहा ओर सांसद हनुमान बेनीवाल की पार्टी के पंचायत चुनाव मे पहली दफा चुनाव लड़ने के बावजूद उसका उम्मीदवार भाजपा व कांग्रेस को हराकर चुनाव जीत गया।

    झूंझुनू जिले की सूरजगढ़ विधानसभा से सुभाष पुनिया के भाजपा के निशान पर विधायक बनने के बाद उनके त्याग पत्र देने के बाद जिलापरिषद वार्ड-12 की रिक्त हुई सीट पर हुये उपचुनाव मे निर्दलीय उम्मीदवार ओमप्रकाश ने कुल 2448 मत लेकर 126 मतो से जीत दर्ज की। भाजपा के बलवान सिह को 2322 मिले। कांग्रेस नेताओ ने कांग्रेस के निशान पर उम्मीदवार उतारने की बजाय अपनी लाज बचाये रखने के लिये निर्दलीय उम्मीदवार ओमप्रकाश को समर्थन देने का दावा कर रहे थे। उक्त चुनाव मे भाजपा विधायक पुनिया व भाजपा कार्यकर्ताओं ने एक एक वोट पाने के लिये जी जान लगा रखी थी। लेकिन छ महिने के अंदर ही जनता यह परिणाम देगी इसका आइडिया शायद विधायक पूनीया व उसके साथियों को भी नही रहा होगा।

    कुल मिलाकर यह है कि राजस्थान मे पंचायतराज के हुये उपचुनाव मे कोई भी दल आंकड़ों का खेल दिखाकर बढत का दावा कितना भी करे लेकिन असलियत इससे काफी अलग है। सत्ता पक्ष व विपक्षी दल के विधायक अपने द्वारा रिक्त की गई सीट को बचाने मे विफल साबित हुये है। तो कुछेक जगह सत्ता पक्ष को उम्मीदवार तक नही मिले है।