Category: राजस्थान

  • आसिफ व आमिर ने इंडियन आयल कारपोरेशन मे चयनित होकर युवाओं को नया पैगाम दिया।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    हालांकि भारत भर की तरह राजस्थान के मुस्लिम समुदाय को भी शैक्षणिक तौर पर अतिपिछड़े होने के तौर पर देखा जाता रहा है। लेकिन सालो पहले मोटेराव चोहान नामक राजपूत के पुत्रों द्वारा इस्लाम धर्म अपनाने के बाद उनसे पैदा होने वाली मुस्लिम समुदाय की कायमखानी बीरादरी का शेक्षणिक तौर पर जरा ठीक ठाक होने के कारण इस बीरादरी के बेटे व बेटीयो का सरकारी व प्राईवेट सेक्टर की अच्छी नोकरीया पाने मे कामयाबी पाना अक्सर सूनने व देखने को मिलता रहता है। अभी कायमखानी बीरादरी के जालंधर एनआईटी पास आमिर सुवैल व आसिफ खान नामक दो युवको का करीब उन्नीस उन्नीस लाख के पेकेज पर गेट मे अच्छी रेंक आने पर इण्डियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड मे चयनित होने से आने वाली युवा पीढी को आगे बढने का संदेश मिला है।

    डीडवाना तहसील के अलखपुरा गावं के आसिफ खान व फतेहपुर तहसील के बलोद भाखरा गावं के आमिर सोहेल जिन्होंने NIT जालंधर से बी.टेक करने के बाद गेट परीक्षा मे 31 वी 59 वी रेंक हासिल करने के बाद भारत की नामी कम्पनी इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) में चयन हुवा है। GATE में आमिर की 59 वी आसिफ की 31 वी रेक आल इण्डिया स्तर पर आना अच्छी बात बताई जा रही है।

    शिक्षक महबूब अली खा के पूत्र आसिफ़ पुत्र ने अपनी पढ़ाई दसवीं में 90% व बारवीं मे पीसीएम मे 94 प्रतिशत अंक हासिल किये। उसके बाद IIT JEE की कोचिंग उन्होंने सीकर में करने के बाद जालंधर एनआईटी से बी.टेक किया।! आसिफ की तरह बलोद बाकरा के शिक्षक लियाकत अली के बेटे आमिर सुवेल ने भी जालंधर एनआईटी से बी.टेक किया है। एवं जेईई की कोचिंग भी सीकर से की थी। यानि दोनो के पिता शिक्षक व माता ग्रहणी है। एवं दोनो युवको ने जेईई की कोचिंग सीकर से व जालंधर एनआईटी से बी.टेक किया है।

    कुल मिलाकर यह है कि आसिफ व आमिर की उक्त कामयाबी से व्यक्तिगत उन दोनो युवको व उनके परिवारजनों का सम्मान सबकी नजर मे तो बढा ही है। लेकिन दोनो युवको की उपलब्धि से अनेक युवा सबक लेकर इंशाअल्लाह सबक लेकर कामयाबी पाकर बुलन्दियों को छूने की भरपूर कोशिश करेगे।

  • मुद्दे को लेकर आंदोलन चलाने के माहिर कोमरेड अमरा राम को सीकर पुलिस ने फिर एक बढिया मुद्दा थमा दिया।

    अशफाक कायमखानी।सीकर।
    राजस्थान मे अनेक दफा जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार व प्रशासन को छकाकर सफल आंदोलन चलाकर अपनी मांग मनवाने के माहिर पूर्व विधायक अमरा राम को सीकर की पुलिस ने छात्र-छात्राओं पर बीना वजह बरबरता पूर्वक लाठीचार्ज करके अनेक छात्र-छात्राओं को गम्भीर रुप से घायल करने के साथ अनेक छात्रो व माकपा नेताओं की गिरफ्तारी करने के अतिरिक्त छात्राओं को पुरुष पुलिसकर्मियों व अधिकारियों द्वारा सरेआम पीटने व पकड़कर घसीटने के वीडियो वायरल होने के बाद से माकपा को जनता की काफी हद तक हमदर्दी व पुलिस के खिलाफ नकारात्मक छवि बनती जा रही है।

    28-अगस्त को सीकर गलर्स कालेज छात्रसंघ चुनाव की मतगणना फिर से करवाने की मांग को लेकर ज्ञापन देने जा रहे वामपंथी छात्र शाखा एसएफआई के छात्र-छात्राओं पर पहले कल्याण सर्किल पर पुलिस लाठीचार्ज करने के बाद पुलिस के आला अधिकारियों ने माकपा कार्यलय पर धावा बोलकर वहां बेठे माकपा नेताओं व छात्रो को पीटते हुये बाहर लाकर गिरफ्तार करने को आमजन के पुलिस ज्यादती मानने के बाद जनता से आ रही सकारात्मक प्रतिक्रिया को भांपकर अगले ही दिन अमरा राम ने कलेक्ट्रेट के सामने सभा मे विशाल भीड़ जमा करके सरकार के सामने मुश्किल हालात पैदा कर दिये है।

    हालांकि कोमरेड अमरा राम के सक्रीय होते ही पुलिस ने गिरफ्तार छात्रो को देर रात रिहा कर दिया था। पूर्व विधायक कामरेड पेमाराम सहित कुछ नेताओं को गिरफ्तार करके न्यायालय मे पेश करके न्यायालय के आदेश पर जैल भेज दिया था। जिन नेताओं की अगले दिन जमानत पर रिहाई के आदेश न्यायालय द्वारा होने पर वो नेता रिहा हो गये। पुलिस ने आंदोलन की लगी आग मे पानी डालने की कोशिश करते हुये छात्रा के साथ मारपीट करते विडीयों मे नजर आ रहे सब इंस्पेक्टर व सिपाही को लाईन हाजिर करने के आदेश भी जारी किये थे।

    सफल लम्बा आंदोलन चलाकर सरकार व प्रशासन को थकाकर अपनी मांग मनवाने के माहिर कामरेड अमरा आराम ने छात्र जीवन से लेकर सरपंच काल को पार करते हुये विधायक व अब माकपा राज्य सचिव के पद पर रहते हुये अनेक आंदोलन चलाये है। जिनमे 1987 मे किसान छात्रवास गोलीकांड (छात्र कानाराम का शहीद होना) के अलावा जयपुर मे किसान पड़ाव के बाद करीब दो सप्ताह सीकर सहित प्रदेश के अधिकांश जिलो मे महापड़ाव सहित अनेक आंदोलन चला कर सफल आंदोलन कर्ता के तौर पर पहचान बना चुके है।

    तीस अगस्त को कामरेड अमरा राम द्वारा जनता व अनेक दलो द्वारा मिली सहानुभूति का ठीक ठीक इस्तेमाल करते हुये माकपा के विधायकों व नेताओं की मोजूदगी मे सीकर कलेक्ट्रेट पर विशाल सभा करके पुलिस अधीक्षक व उप पुलिस अधीक्षक सौरव तिवारी सहित दोषी पुलिस अधिकारियों व कर्मियो के खिलाफ निलम्बन की कार्यवाही करने की मांग उठाने के बाद अगले दस दिन का समय देते हुये आठ सितंबर को आंदोलन का बडा रुप देखने का संकेत दिया है। माकपा की आज की सभा मे मुस्लिम समाज के भी बडी तादाद मे लोग कामरेड अमरा राम को समर्थन देने सभा स्थल पहुंचे ओर जुमा की विशेष नमाज भी वही सभा स्थल पर अदा की गई।

    सूत्र बताते है कि पूर्व विधायक अमरा राम आंदोलन को हमेशा लम्बा चलाते है। मध्य मे मिलने वाले समय मे वो आम जनता को आंदोलन के प्रति भावूक व सजग करते है। ताकि आंदोलन मे जरूरत के मुताबिक लोग हर तरह की आहुति देने को तत्पर रहे। आज की सीकर सभा मे प्रशासन व सरकार को दस दिन का समय देने के पीछे भी यही राज छुपा हुवा बताते है कि वामपंथी कार्यकर्ता गावं-गांव, ढाणी-ढाणी व घर घर जाकर आमजन को पुलिस ज्यादती की ठीक से तस्वीर सामने रखकर आंदोलन के लिये अधिकाधिक समर्थन जुटायेगे।

    हालांकि सीकर जिले मे माकपा के एक एक दफा कामरेड त्रिलोक सिंह व पेमाराम विधायक रहे एवं चार दफा कामरेड अमरा राम विधायक रह चुके है। कामरेड त्रिलोक सिंह माकपा के फाऊंडर थे वही अमरा राम ने माकपा को विस्तार दिया है। वैचारिक तौर पर भाजपा की माकपा सख्त विरोधी है। लेकिन चुनाव मे मतो के हिसाब से जिले मे माकपा का मुकाबला कांग्रेस से होता आया है। अक्सर माकपा को हराने भाजपा व कांग्रेस एक साथ छात्र यूनियन व विधानसभा चुनाव मे नजर आते है। तभी कांग्रेस व भाजपा जैसी दोनो पार्टियों की सरकार मे पुलिस माकपा के सीकर दफ्तर पर धावा बोलती रहती है। 28-अगस्त को तो पुलिस से वरिष्ठ अधिकारी भी माकपा दफ्तर पर धावा बोलने पुलिस कर्मियों के साथ पहुंच जाने की चर्चा आमजन की जबान पर आ चुकी है।

    कुल मिलाकर यह है कि विधानसभा व लोकसभा चुनाव मे हार जाने के बाद से माकपा नेता शांत नजर आ रहे थे। लेकिन 28-अगस्त को पुलिस द्वारा कल्याण सर्किल पर छात्र-छात्राओं पर बरबरता पूर्वक बीना वजह लाठीचार्ज करके पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष नवदीप शेखावत के हाथ पैर तोड़ने के अलावा अनेको को घायल करने के बाद पुलिस के सीनियर अधिकारियों द्वारा फोर्स के साथ माकपा दफ्तर पर धावा बोलने के वीडियो वायरल होने के बाद माकपा के प्रति जनता मे हमदर्दी पैदा होना देखा जा रहा है। छात्रा के साथ पुरुष पुलिस अधीकारी व सिपाही द्वारा पकड़ कर मारपीट करने की तस्वीरे अखबारात मे छपने व सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लगता है कि पुलिस कार्यवाही ने पंचायत व स्थानीय निकाय चुनाव के पहले कामरेड अमरा राम को आंदोलन के लिये एक बढिया मुद्दा हाथ मे थमा दिया है। पुलिस कार्यवाही पर कांग्रेस विधायकों की चुप्पी की भी आमजन की जबान पर खासी चर्चा है। दूसरी तरफ माकपा तहसील सचिव राम रतन बगड़ीया ने अनेक पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कोतवाली मे रपट दर्ज कराने अर्जी भी पेश की है।

  • राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने आठ सरकारी विश्वविद्यालयों के आज वीसी नियुक्त किये।

    जिनमें मुस्लिम समुदाय ना तीन मे ओर ना तेराह मे।
    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान मे कांग्रेस सरकार बनवाने के लिये मुस्लिम समुदाय द्वारा एकतरफा कांग्रेस के पक्ष मे मतदान करके भाजपा के बढते कदम को रोकते हुये दोसो विधानसभा सीटो मे से सो सीट जीतवाने के बावजूद सरकारी नियुक्तियों मे उनको ना तीन मे गीना जा रहा ओर नाही तेराह मे शामिल किया जा रहा है।

    राजस्थान सरकार की अनुशंसा पर राज्यपाल कल्याण सिंह ने आज आठ सरकारी वाईस चांसलर की नियुक्तियो के आदेश जारी किये।

    जारी आदेश मे वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा में रतनलाल गोदारा, आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर में अभिमन्यु कुमार रामानंद राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में डॉक्टर अनुला मौर्य को वीसी बनाया गया है। इनके अलावा राज्य की पांच कृषि विश्वविद्यालय में भी वीसी नियुक्त किये गये है। जिनमें कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर में रक्षपाल सिंह,उदयपुर में नरेंद्र सिंह राठौड़, कोटा में दिनेश चंद जोशी, जोधपुर में बागड़ा राम चौधरी और जोबनेर कृषि विश्वविद्यालय में जीत सिंह संधू को वीसी नियुक्त किया।

    ज्ञात रहे इससे पहले राजस्थान की हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय का वीसी भी अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी को वीसी नियुक्त किया था। इसके अतिरिक्त अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद राजस्थान मे सोलह अतिरिक्त महाअधिवक्ता व एक महाअधिवक्ता की नियुक्ति के आदेश जारी हुये थे। जिनमे एक भी मुस्लिम ऐडवोकेट को जगह नही मिल पाई थी.

  • राजस्थान मे राजनीतिक व सवैधानिक पदो पर जल्द नियुक्तियों का सीलसीला शूरु होगा।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर:राजस्थान मे गहलोत सरकार के गठन के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश की बाध्यताओं के तहत एक दो समितियों व बोर्ड का गठन होने के बाद अब अगस्त माह के आखिर तक राजनीतिक व संवेधानिक पदो पर नियुक्तियों का सीलसीला शुरु होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    सूत्रोनुसार लोकायुक्त, चेयरमैन मानवाधिकार आयोग,अध्यक्ष-पुलिस जवाबदेह समिति सहित ऐसे अनेक पद ऐसे है जहां सदस्यों को छोड़कर बाकी उच्च पद पर हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश का ही मनोयन होना है। लेकिन सुचना आयुक्त व पब्लिक सर्विस कमीशन, विभिन्न ट्रियूबनलस व उपभोक्ता कोर्ट के सदस्यों सहित अनेक संवेधानिक पद पर सरकार एक सिस्टम की कुछ बाध्यताओं के अनुसार मनोनयन करती है।

    राजस्थान मे सरकारी स्तर पर करीब पेंतीस बोर्ड/आयोग/समिति व निगम के प्रदेश स्तर पर गठन करते समय अध्यक्ष व सदस्यों का मनोनयन करती है। ताकि राजनीतिक वर्कर मे सीधा संदेश जाये कि सत्ता मे उनकी भी भागीदारी है। सुत्र बताते है कि जिन जिन पदो पर नियुक्ति होनी है उन पदो की तफसीली रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। एवं उनमे से कुछ पदो पर सम्भावित लोगो के नामो की एक रिपोर्ट भी तैयार हो चुकी बताते है।

    कांग्रेस की राजनीति मे आये बदलाव के बाद सोनिया गांधी के कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को काफी मजबूती मिलना माना जा रहा है। अब गहलोत द्वारा उक्त नियुक्तियों के करने मे शायद कोई बडी दिक्कतो का सामना उन्हें नही करना पड़ेगा। प्रदेश मे चल रहे दो पावर सेंटर मे से अब गहलोत का एक ही पावर सेंटर होना राजनीतिक पंडित मानकर चल रहे है।

    हालांकि राजनीतिक व संवेधानिक पदो पर नियुक्तियों की चल रही प्रक्रिया के मुख्यमंत्री गहलोत ने पते किसी भी स्तर पर अभी तक खोले नही है। लेकिन सूत्रोनुसार यह काम प्राथमिक स्तर पर मुकम्मल हो गया बताते है। एक एक करके नियुक्तियों का पीटारा अगस्त माह के आखिर तक शूरु होने की उम्मीद बताते है। जिनमे संवेधानिक पदो पर नियुक्तियों का सीलसीला पहले शूरु हो सकता है।

  • ट्रिपल तलाक़ बिल के खिलाफ कोटा मे होगा विशाल रैली

    प्रेस विज्ञप्ति:कोटा 8 अगस्त, केंद्र सरकार द्वारा देश के संविधान के विपरीत शरीयत क़ानून के खिलाफ ट्रिपल तलाक़ क़ानून के नाम पर जो क़ानून बनाया है उसका सभी आम मुसलमानों सहित, अमन पसंद संविधान पर भरोसा रखने वाले विरोध करते है। कोटा के अमन पसंद लोग केंद्र सरकार के इस क़ानून के खिलाफ शनीवार 10 तारीख़ को विशाल मौन जुलुस निकालकर इसका विरोध करेंगे।

    कोटा शहर क़ाज़ी अनवार अहमद ने आज एक पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया की आगामी 10 अगस्त शनिवार को सुबह 10 बजे अमन पसंद आम नागरिक, मल्टीपरपज़ स्कूल में इकट्ठे होंगे, जहाँ से सभी लोग एक जुट होकर अनुशासित तरीके से मौन जुलुस के रूप में गुमानपुरा, केनाल रोड, गीताभवन, सरोवर टाकिज़, लक्की बुर्ज, अग्रसेन चैराहा, नयापुरा थाने से होकर केक्ट्रेट पहुंचेंगे। जहाँ महामहिम राष्ट्रपति महोदय के नाम ट्रिपल तलाक़ क़ानून को वापस लेने व पुनर्समीक्षा की मांग को लेकर जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन दिया जाएगा।

    शहर क़ाज़ी अनवार अहमद ने पत्रकारों को बताया के इस मामले में सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी है, सभी अमन पसंद समाज के लोगों से इस जुलुस में शांतिपूर्ण तरीके से सफ़ेद लिबास में अनुशासित तरीके से शामिल होने की अपील की गयी है। सभी समाजों के अध्यक्ष, ज़िले के सभी मस्जिदों के इमाम, आलिमों, सहित ज़िम्मेदार लोगों से इस मामले में अपील की गयी है। सभी वोलेन्टियर की बैठक कर उन्हें टेªफिक, पार्किंग, सुरक्षा व्यवस्था एवं पानी की उचित व्यवस्था के लिये और जुलूस को अनुशासित तरीके से निकालने की ज़िम्मेदारियाँ दी गयी है, जो व्यवस्थित तरीके से अपने काम में जुटे रहेंगे।

    कोटा शहर क़ाज़ी अनवार अहमद ने बताया के भारत देश का एक संविधान है, इस संविधान से भारत का हर नागरिक, हुकूमत, मंत्री सभी बंधे हुए है और प्रचलित संविधान की भावना के अनुरूप ही देश में व्यवस्थाएं है, जबकि भारत के संविधान में देश के हर नागरिक को अपने सामाजिक रीति रिवाजों में अपने निजी मज़हबी क़ायदे क़ानून की पलना करने का खुला अधिकार है। इसके बावजूद भी संविधान की इस मूल भावना को ताक में रखकर एक वर्ग को टारगेट बनाकर, बार बार लोकसभा, राज्यसभा में इस क़ानून को पेश किया गया। दो बार यह क़ानून राज्यसभा में हारा, फिर भी केंद्र सरकार में बैठे कुछ ज़िम्मेदारों ने हठधर्मिता दिखाते हुए इस क़ानून को पारित कराने की ज़िद में राज्य सभा में जो खेल खेला है उसे देश ने देखा है।

    कोटा 8 अगस्त, केंद्र सरकार द्वारा देश के संविधान के विपरीत शरीयत क़ानून के खिलाफ ट्रिपल तलाक़ क़ानून के नाम पर जो क़ानून बनाया है उसका सभी आम मुसलमानों सहित, अमन पसंद संविधान पर भरोसा रखने वाले विरोध करते है। कोटा के अमन पसंद लोग केंद्र सरकार के इस क़ानून के खिलाफ शनीवार 10 तारीख़ को विशाल मौन जुलुस निकालकर इसका विरोध करेंगे।

    कोटा शहर क़ाज़ी अनवार अहमद ने आज एक पत्रकार वार्ता में जानकारी देते हुए बताया की आगामी 10 अगस्त शनिवार को सुबह 10 बजे अमन पसंद आम नागरिक, मल्टीपरपज़ स्कूल में इकट्ठे होंगे, जहाँ से सभी लोग एक जुट होकर अनुशासित तरीके से मौन जुलुस के रूप में गुमानपुरा, केनाल रोड, गीताभवन, सरोवर टाकिज़, लक्की बुर्ज, अग्रसेन चैराहा, नयापुरा थाने से होकर केक्ट्रेट पहुंचेंगे। जहाँ महामहिम राष्ट्रपति महोदय के नाम ट्रिपल तलाक़ क़ानून को वापस लेने व पुनर्समीक्षा की मांग को लेकर जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन दिया जाएगा।

    शहर क़ाज़ी अनवार अहमद ने पत्रकारों को बताया के इस मामले में सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी है, सभी अमन पसंद समाज के लोगों से इस जुलुस में शांतिपूर्ण तरीके से सफ़ेद लिबास में अनुशासित तरीके से शामिल होने की अपील की गयी है। सभी समाजों के अध्यक्ष, ज़िले के सभी मस्जिदों के इमाम, आलिमों, सहित ज़िम्मेदार लोगों से इस मामले में अपील की गयी है। सभी वोलेन्टियर की बैठक कर उन्हें टेªफिक, पार्किंग, सुरक्षा व्यवस्था एवं पानी की उचित व्यवस्था के लिये और जुलूस को अनुशासित तरीके से निकालने की ज़िम्मेदारियाँ दी गयी है, जो व्यवस्थित तरीके से अपने काम में जुटे रहेंगे।

    कोटा शहर क़ाज़ी अनवार अहमद ने बताया के भारत देश का एक संविधान है, इस संविधान से भारत का हर नागरिक, हुकूमत, मंत्री सभी बंधे हुए है और प्रचलित संविधान की भावना के अनुरूप ही देश में व्यवस्थाएं है, जबकि भारत के संविधान में देश के हर नागरिक को अपने सामाजिक रीति रिवाजों में अपने निजी मज़हबी क़ायदे क़ानून की पलना करने का खुला अधिकार है। इसके बावजूद भी संविधान की इस मूल भावना को ताक में रखकर एक वर्ग को टारगेट बनाकर, बार बार लोकसभा, राज्यसभा में इस क़ानून को पेश किया गया। दो बार यह क़ानून राज्यसभा में हारा, फिर भी केंद्र सरकार में बैठे कुछ ज़िम्मेदारों ने हठधर्मिता दिखाते हुए इस क़ानून को पारित कराने की ज़िद में राज्य सभा में जो खेल खेला है उसे देश ने देखा है।

    शहर क़ाज़ी अनवार अहमद ने कहा, सभी समाजों, सभी धर्मों को अपनी आज़ादी का हक़ इस देश के क़ानून इस देश के संविधान ने दिया हैं लेकिन इस बार तो हदे पार हो गयी, एक क़ानून को लाने के लिए बार बार मशक़्क़त की गई। जिससे किसी को भी फायदा नहीं। क़ाज़ी ए शहर कोटा ने साफ़ किया शरीअ़त में शादी, ब्याह का एक मुकम्मल क़ानून है। इसमें दो पक्षों के बीच में शादी एक काॅन्ट्रेक्ट है और शरीअ़त में तलाक़ का भी एक इस्लामिक तरीक़ा है। इसलिये इस ट्रिपल तलाक़ कानून का सभी विरोध करते आये है, यह तलाक़ अपने आप में सुप्रीमकोर्ट में भी अवैध घोषित हुआ है। क़ाज़ी ए शहर कोटा अनवार अहमद ने कहा, एक शौहर को अगर जेल हुई तो वह अपनी बीवी को खर्च कहाँ से देगा, इससे उसके परिवार व बच्चों की स्थिति खराब होगी। शौहर जिसको की पत्नि ने जेल भिजवा दिया, फिर वही शोहर उस बीवी को क्यों रखेगा? जबकि ट्रिपल तलाक़ अगर होती है तो फिर बीवी अपने शोहर से कोई ताल्लुक़ रख भी नहीं सकती, ऐसे में यह क़ानून मज़हबी आजादी में दख़लअंदाजी है। महिलाओं और बच्चों के साथ अत्याचार है। उनके भविष्य को बर्बाद करने वाला है। इसलिये ट्रिपल तलाक़ के नाम पर इस काले कानून को वापस लेने की मांग व इसकी पुनर्समीक्षा कर इस क़ानून को वापस लेने का निर्देश देने के लिए राष्ट्रपति महोदय को जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन दिया जायेगा|

  • राजस्थान में अब’मॉब लिंचिंग’करने वालों की खैर नहीं,मिलेगी उम्र कैद की सजा

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली(6 अगस्त):मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं के बीच राजस्थान सरकार ने इस रोक लगाने के बड़ा कदम उठाया है। राजस्थान में अब मॉब लिंचिंग करने वालों को आजीवन कैद की सजा तक मिल सकती है। दरअसल सोमवार को अशोक गहलोत सरकार ने राजस्थान विधानसभा में मॉब लिंचिंग की रोकथाम के खिलाफ लाया। यह बिल सोमवार को विधानसभा में ध्वनिमत से पास हो गया। इस कानून के लागू होने सेराजस्थान में अब ऑनर किलिंग पर मौत या पूरे जीवन का कारावास और उन्मादी भीड की हिंसा में किसी व्यक्ति की मौत पर आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा हो सकती हैं। ऑनर किलिंग पर विधेयक लाने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य होगा।

    इस बिल के तहत मॉब लिंचिंग की घटनाओं में पीड़ित की मौत पर दोषी को कठोर आजीवन कारावास और एक से पांच लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। राजस्‍थान लिंचिंग से संरक्षण विधेयक 2019 पिछले सप्ताह ही संसदीय कार्यमंत्री शांति कुमारी धारीवाल ने सदन में पेश किया था। बिल पर चर्चा के दौरान संसदीय कार्यमंत्री शांति कुमारी धारीवाल ने कहा कि भारतीय दंड संहिता और आपराध प्रक्रिया संहिता में मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त कानून नहीं है जिसके चलते यह बिल लाया गया है।

    ऑनर किलिंग के खिलाफ लाए गए राजस्थान सम्मान और परंपरा के नाम पर वैवाहिक संबंधों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का प्रतिषेध विधेयक में कड़े प्रावधान किए हैं, प्रेमी जोड़ों को समाज, परिवार या कुटुंब की इज्जत के नाम पर परेशान करने के लिए किया जाने वाला कोई भी जमावड़ा या खाप पंचायत भी गैर कानूनी होगी, ऐसी पंचायत में शामिल होने वालों को 5 साल तक की सजा का प्रावधान होगा। प्रेमी जोड़ों को शादी के बाद परेशान करने पर भी सजा का प्रावधान किया है। मॉब लिचिंग को लेकर नए विधेयक में कड़े प्रावधान किए हैं। दो व्यक्ति भी अगर किसी को मिलकर पीटते हैं तो वह मॉब लिचिंग की श्रेणी में आएगा। मॉब लिचिंग को गैर जमानती और संज्ञेय अपराध बनाया गया है। मॉब लिचिंग में सहयोग करने वालों को भी बराबर सजा मिलेगी। मॉब लिंचिंग में मौत पर दोषियों को आजीवन कठोर कारावास और एक से पांच लाख तक का जुर्माने का प्रावधान किया है। घायल करने पर सात साल तक की सजा का प्रावधान किया है।(इनपुट न्यूज २४)

  • चर्म-ऐ-कुर्बानी को लेकर सीकर मे असमंजस बरकरार।

    चर्म-ऐ-कुर्बानी को जमा करने से संस्थाऐदूर जाने लगी।

    अशफाक कायमखानी।सीकर।
    भारत भर मे छाई बंदी की मार के कारण आगामी 12-अगस्त को मनाई जाने वाली ईद-उल-अजहा जैसे पवित्र त्योहार पर होने वाली चर्म ऐ कुर्बानी जमा करने वाली इस्लामीया स्कूल संस्थान गणित को समझते हुये इस दफा चर्म (खाल) जमा करने से अपने हाथ खींच लिये है। पर इस्लामीया स्कूल संस्थान ने इसके बदले मे सभी से जुड़े रहने के लिये कुर्बानी करने वालो से सो-दोसो रुपये प्रति कुर्बानी के हिसाब से जमा करने की कोशिश जरुर करेगी।

    चर्म ऐ कुर्बानी के एक व्यापारी ने बताया कि आज के पांच साल पहले ईद उल अजहा के अवसर पर जमा होने वाली खाल जो तीनसो से लेकर साडे तीनसौ रुपयो मे बीक जाती थी। जो अब मात्र पच्चास से पचेतर रुपयो मे बीकने की सम्भावना जताई जा रही है। उस स्थिति मे खाल जमा करके उनके नमक लगाकर बेचने तक सूरक्षित रखने मे खर्चा आमद से अधिक होने के कारण इनको जमा करने से संस्थाऐ दूर भागने लगी है। हालांकि सीकर शहर की चर्म ऐ कुर्बानी पहले सो प्रतिशत व पीछले कुछ सालो से कुछ मदरसो द्वारा जमा करने के कारण करीब नब्बे प्रतिशत खाल इस्लामीया स्कूल संस्थान के जमा होती आ रही है। लेकिन अब उक्त संस्था के जमा करने से दूर हटने के कारण उन मदरसो को ही पूरी की पूरी चर्म ऐ कुर्बानी जमा करनी होगी। चाहे उन्हे इसमे फायदा होता है या नही। कुछ संस्थाऐ इस बात पर भी अमल करने पर विचार कर रही है कि उक्त जमा चर्म ऐ कुरबानी को बेचने की बजाय सामुहिक रुप से अलग अलग जगह दफन कर दिया जाये। ताकि ईद उल जुहा के मोके पर बहुत कम दर पर खरीद करके बडे मुनाफे मे बेच कर बडा लाभ कमाने वालो के मंसूबों पर पानी फेरा जा सके।

    कुल मिलाकर यह है कि सालो साल से सीकर शहर की चर्म ऐ कुर्बानी लगातार तीन दिन जमा करके उसको बेचने वाली इस्लामीया स्कूल संस्थान के दूर हटने से अब स्थानीय मदरसो पर खाल जमा करने की जिम्मेदारी आहत होती है। जो किस हद तक निभाने को तैयार है। यह सब कुछ समय आने पर पता चलेगा। वही खाल जमा करके उसके नमक लगवा कर उसको बेचने तक सूरक्षित रखने मे आमद से अधिक खर्च आने से संस्थाऐ जमा करने से कतरा रही है। जिसके कारण अवाम मे अलग अलग भाव उठते नजर आ रहे है।

  • राज्यसभा की एक सीट पर उम्मीदवार को लेकर कांग्रेस मे असमंजस बरकरार।

    राजस्थान से लोकसभा व राज्यसभा मे कांग्रेस का कोई सदस्य नही।
    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सदस्य मदनलाल सैनी के देहांत के बाद खाली हुई रिक्त सीट पर 26-अगस्त को चुनाव आयोग के चुनाव कराने की घोषणा करने के बाद कांग्रेस पार्टी मे उम्मीदवार को लेकर असमंजस बरकरार होने के अलावा एक तबका मानकर चल रहा है कि अंतिम समय मे पूर्व प्रधानमंत्री सरदार मनमोहन सिंह उम्मीदवार बनकर आयेगे। जबकि दूसरा तबका यह कह रहा है कि राजस्थान से राज्यसभा की कुल दस सीटो मे से एक रिक्त सीट को छोड़कर बाकी सभी नो सीटो व लोकसभा की सभी पच्चीस सीटो पर भाजपा के सदस्य चुने हुये है। ऐसी हालत मे मोका मिलने पर कांग्रेस राजस्थान के किसी मजबूत जाती के जनाधार नेता को राज्यसभा मे भेजना चाहिए ताकि राज्य मे जल्द होने वाले दो विधानसभा चुनावों के अलावा नवम्बर मे स्थानीय निकाय व जनवरी-फरवरी मे होने वाले पंचायत चुनाव मे कांग्रेस पार्टी को फायदा मिल सके।

    सात अगस्त को अधिसूचना जारी होने के बाद नामजदगी व 19-अगस्त को नामजदगी वापसी के बाद आवश्यक हुवा तो 26-अगस्त को होने वाले चुनावों मे विधायको के आंकड़ों के चलते राज्यसभा के लिए कांग्रेस उम्मीदवार का चुनाव जीतना तय माना जा रहा है। दोसो विधानसभा सदस्यों वाली राजस्थान विधानसभा के दो सदस्य हनुमान बेनीवाल व नरेन्द्र खीचड़ के सांसद बनने के बाद अब कुल 198 सदस्यों की तादाद मे से सो सदस्य कांग्रेस के व एक सदस्य लोकदल का समझोते के तहत कांग्रेस के साथ है। छ बसपा के व कुल तेराह निर्दलीय विधायको मे से बारह विधायको का कांग्रेस सरकार को समर्थन मिला हुवा है। जबकि दो माकपा के विधायक है। भाजपा के 73-विधायक है उन्हे यह सीट जीतने के लिये 28-अन्य मतो का जुगाड़ करना होगा, जो काफी मुश्किल माना जा रहा है। इसलिए यह सीट कांग्रेस के खाते मे जाती निश्चित लग रही है।

    राजस्थान के कुल दस राज्यसभा सदस्यों मे से एक सदस्य मदनलाल सैनी के देहांत से एक सीट रिक्त होने के बाद भी नारायण लाल पंचारिया, रामनारायण डूडी, विजय गोयल, ओमप्रकाश माथुर, रामकुमार वर्मा, हर्षवर्धन सिंह, अलफोस कनान्थम, भुपेन्द्र यादव व किरोड़लाल मीणा सहित सभी नो सदस्य भाजपा के चुने हुये है। जबकि कांग्रेस के एक सदस्य का अब अगस्त महिने मे चुनकर जाने की पूरी संभावना है। राज्यसभा के अलावा लोकसभा मे भी कांग्रेस का सदस्य राजस्थान से एक भी नही है।

    हालांकि आसाम व तमिलनाडु से पूर्व प्रधानमंत्री सरदार मनमोहन सिंह के राज्यसभा से चुनकर आने की सम्भावनाओं पर पानी फिरने के बाद अब उन्हे राजस्थान से चुनकर राज्यसभा भेजने की सम्भावना अधिक प्रबल मानी जा रही है। फिर भी कांग्रेस का एक तबका दबी जूबान से अपनी बात हाईकमान तक पहुंचाने मे लगा है कि राजस्थान मे जल्द होने वाले दो विधानसभा उपचुनाव के अलावा स्थानीय निकाय व पंचायत चुनाव मे फायदा पाने के लिये राजस्थान के किसी नेता को राज्य सभा मे चुनकर भेजना चाहिए। राजस्थान से मजबूत आधार वाली जातियो मे से कुछ जातियों के नेताओं के नाम भी डा. सरदार मनमोहन सिंह के अलावा चर्चा मे चल रहे है उनमे मीणा समाज के पूर्व केंद्रीय मंत्री नमोनारायण मीणा, मुस्लिम समुदाय से पूर्व राज्यसभा सदस्य रहे दूरुमिया व जाट समाज के पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया व रामेश्वर डूडी का ना बताते है। राजस्थान की जाट बहुल खींवसर व मण्डावा विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने है। उक्त दोनो सीटो पर 2018 के चुनाव मे कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव हार चुके थे। अब उपचुनाव मे कांग्रेस यहां से अपने उम्मीदवार जीताने की भरसक कोशिश करेगी। मण्डावा सीट से लगती फतेहपुर सीट से सुभाष महरिया के छोटे भाई नन्दकिशोर महरिया 2013 से 2018 तक विधायक रह चुके है। जिसका असर भी मण्डावा क्षेत्र मे देखा गया है।

    कुल मिलाकर यह है कि सात अगस्त से सोलह अगस्त तक राजस्थान की एक राज्यसभा सीट के चुनाव के लिये नामजदगी के पर्चे भरे जाने है। उसमे कांग्रेस की तरफ से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम सबसे ऊपर माना जा रहा है। लेकिन मनमोहन सिंह के ना आने पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री नमोनारायण मीणा, पूर्व राज्यसभा सदस्य दूर्रु मियां व पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया व रामेश्वर डूडी का नाम भी चर्चा मे है। लेकिन जिस नाम पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मुहर लगेगी वोही राज्यसभा मे कांग्रेस उम्मीदवार तय होगा।

  • सीकर के राजनीतिक महरिया परिवार ने गैर राजनीतिक तरीके से ग्यारह हजार से अधिक छायादार व फलदार पोधे लगाये।

    अशफाक कायमखानी। जयपुर।
    हालाकि आम मान्यता है कि राजनेताओ द्वारा किये जाने वाले हर पब्लिक काम मे किसी ना किसी रुप मे राजनीति का तड़का लगना हर हाल मे माना जाता रहा है। लेकिन सीकर मे पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया व पूर्व विधायक नंदकिशोर महरिया जैसे दिग्गज राजनेताओं द्वारा अपने वालदेन (माता-पिता) की पूण्यतिथि पर 28 व 29 जुलाई को सीकर के स्मृति वन के अलावा जिले की स्कूल, शमशान भूमि व कब्रिस्तान के साथ साथ सार्वजनिक जगह पर बीना किसी राजनीतिक तड़का लगाये केवल मात्र खिदमत-ऐ-खल्क की भावना से ओतप्रोत होकर ग्यारह हजार से अधिक विभिन्न तरह के पोधे लगा कर उनकी सालो तक पूरी सम्भाल करके उनको पेड़ के रुप मे विकसित करने का निश्चय दोहरा कर समाज मे प्रर्यावरण को शुद्ध बनाये रखने के लिये एक बदलाव की बयार बहा दी है।

    महरिया परिवार के सुधीर महरिया स्मृति संस्थान नामक सामाजिक संस्था के बेनर तले 28-जुलाई को सीकर शहर स्थित स्मृति वन मे हजारों वन व प्रर्यावरण प्रेमियों की मोजूदगी मे पहले वन एवं प्रर्यावरण के महत्व पर एक गोष्ठी आयोजन हुवा एवं उसमे वन व प्रर्यावरण प्रेमियो को सम्मानित भी किया गया। उसके बाद वही स्मृति वन मे चार हजार पोधे लगाकर ब्रज-शांति वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत करके अगले दिन तक जिले भर मे ग्यारह हजार से अधिक पेड़ लगाकर पेड़ ही जीवन होने का संदेश दिया। उक्त कार्यक्रम मे पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया व पूर्व विधायक नंदकिशोर महरिया व उनके परिवारजन आम आदमी की तरह वृक्षारोपण करते नजर आये। इसके अतिरिक्त स्मृति वन मे लगे छायादार व फलदार पोधो की ठीक से सम्भाल करने के लिये सभी पेड़ों तक पानी पहुंचने के लिये पुरे क्षेत्र मे डरीप सिस्टम लगाने के अलावा उनकी देखभाल के लिये अपने स्तर पर आदमियों का इंतजाम भी किया गया है।

    सुधीर महरिया स्मृति संस्थान की तरफ से लगने वाले करीब बाईस तरह के सभी छायादार व फलदार पोधो की खरीद संस्था के अपने स्तर पर करने के साथ साथ सभी पोधो की लम्बाई चार से छ फूट होने के कारण पोधो के लगने की सम्भावना वन प्रेमी अधिक बता रहे है।

    कुल मिलाकर यह है कि अक्सर देखा गया है कि राजनेताओं द्वारा आयोजित किसी भी तरह के कार्यक्रम मे किसी ना किसी रुप मे किसी ना किसी स्तर पर राजनीति का तड़का लगे बीना रह नही सकता है। लेकिन सीकर के दिग्गज राजनीतिक महरिया परिवार द्वारा 28 व 29 जुलाई को सीकर जिले मे सुधीर महरिया स्मृति संस्थान के बेनर तले ब्रज-शांति वृक्षारोपण अभियान के तहत जिले भर मे ग्यारह हजार से अधिक छायादार व फलदार पोधे खरीद कर लगाने के अलावा उनमे से स्मृति वन मे लगे चार हजार पोधो को बडे होकर विशाल वृक्ष का रुप धारण करने तक पानी पहुंचाने के लिये डरीप सिस्टम लगाने के अलावा खाद का इंतजाम के साथ साथ किड़ो से बचाने के लिये दवाईयों का पूख्ता इंतजाम करने का जो नैक काम किया है। उसका अनूशरण करने की प्रेरणा अन्य भारतीय को भी मिलती रहेगी।

  • राजस्थान मदरसा पैराटीचर्स के सुव्यवस्थित आंदोलन का सरकार पर कोई असर नही।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान के हजारो मदरसा पैराटीचर्स पिछले पांच दिन से कांग्रेस पार्टी के अपने चुनावी घोषणा पत्र मे किये वादो के मुताबिक अपनी वेतन वृद्धि व नियमतीकरण की मांग को लेकर प्रदेश के जिला व तहसील स्तर पर सुव्यवस्थित आंदोलन चलाकर धरना, शवयात्रा, प्रदर्शन व रेलीया निकालकर अशोक गहलोत सरकार को किये वादे को याद दिलाने के बावजूद सरकार के कान पर अभी तक किभी तरह की जूं तक नही रेंग रही है।

    न्यूनतम मजदूरी से भी कम वेतन पर कार्यरत वेल क्वालीफाईड मदरसा पैराटीचर्स का पिछले दस साल मे किसी भी तरह से वेतनवृद्धि नही होने के बाद जब इन कर्मियो ने अपनी मांग सरकार के सामने रखी तो सरकार ने इनके बजाय इनसे कम शैक्षणिक योग्यता रखने वाली आंगनबाड़ी वर्करस का वेतन बढाकर इनसे अधिक वेतन करने की बजट मे घोषणा जरुर की लेकिन मदरसा पैराटीचर्स के साथ न्याय नही किया तो मजबूरन राजस्थान मदरसा पैराटीचर्स संघ ने 21-जुलाई से मदरसा छोड़कर सड़क पर आकर लोकतांत्रिक तरिके से आंदोलन का रुख अख्तियार करने पर भी सरकार व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इनको न्याय देने के बजाय आज तक अपने अड़यल रुख पर कायम है।

    राजस्थान मदरसा पैराटीचर्स संघ के अध्यक्ष मसूद अख्तर व उर्दू टीचर्स संघ के अध्यक्ष आमीन कायमखानी ने बताया कि पूरे राजस्थान के सभी मदरसा पैरा टीचर्स 21-जुलाई से आंदोलन पर है। वो झाड़ू लगाकर, धरना देकर, पुरुष टीचर्स टोपलेस होकर, भीख मांगकर मुख्यमंत्री राहत कोष मे इकठ्ठा हुई भीख जमा कराकर, शवयात्रा निकालकर, पुतला दहन करके सरकार से लोकतांत्रिक तरिके से अपनी मांगे मानने की अपील कर रहे है। जबकि 26-जुलाई को पूरे राजस्थान मे जगह जगह एक साथ आक्रोश रैली निकाल कर सरकार को मदरसा पैराटीचर्स संघ के साथ किया वादा याद दिलाया है।

    राजनीति का मुल सिद्धांत है कि सरकारें उसी तबके की मांगो पर अधिक ध्यान देती है जो मतो की ताकत से सरकार व राजनीतिक पार्टी को नूक्सान पहुंचा सकते है। राजस्थान के मदरसा पैराटीचर्स मे अधीकांश मुस्लिम तबके से आते है। जो मुस्लिम तबका बीन मांगे चुपचाप चलकर वोटबैंक की तरह कांग्रेस पार्टी को ही हर हाल मे प्रत्येक चुनाव मे मतदान करने आना तय है। राजस्थान मे भाजपा व कांग्रेस के मध्य ही मुकाबला होता रहा है। तीसरा विकल्प मोजूद नही होने के कारण भाजपा की तरफ मुस्लिम मतदाता के नही जाने के कारण एकमात्र विकल्प के तौर पर उनके पास कांग्रेस के पक्ष मे मतदान करना रहता है। इसी मजबूरी व लाचारी के कारण अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार मुस्लिम समुदाय की जायज मांगो से भी बराबर किनारा करती आ रही है।

    हालांकि राजस्थान मे मोबलिंचीग की बढती घटनाओं पर सरकार की उदासीनता के अलावा अशोक गहलोत की पीछली सरकार मे गोपालगढ मे मस्जिद मे नमाजियों पर गोली चलाकर मारने के अलावा सूरवाल मे थानेदार फूल मोहम्मद को डयूटी पर जींदा चलाकर मारने के अतिरिक्त अभी इसी महिने सिपाही अब्दुल गनी को भी राजसमंद मे डयूटी पर भीड़ द्वारा लाटियो से पीट पीटकर मारने के अतिरिक्त कोटा मे बांरा के कैदी रमजान खान को पुलिस गार्डो द्वारा मारने की घटना के सहित अनेक घटनाओं से मुस्लिम पिडिंत हो चुके है। सिपाही अब्दुल गनी को मोत के बाद उसे शहीद का दर्जा ना देने के साथ उनकी शवयात्रा मे सरकार के किसी भी जनप्रतिनिधि का शामिल ना होने के अलावा किसी तरह का ब्यान तक ना आना बडा अफसोसजनक माना जा रहा है।

    राजस्थान मदरसा पैराटीचर्स की जायज मांगो के पक्ष मे सत्ता पक्ष सहित अनेक निर्दलीय विधायको के जोरदार ढंग से विधानसभा मे आवाज उठाने के अलावा सड़क पर चल रहे आंदोलन मे आम जनता के जुड़ाव को देखते हुये आंदोलन विशाल रुप अख्तियार करता नजर आ रहा है। अगले चार माह मे राजस्थान मे स्थानीय निकाय व पंचायत चुनाव होने वाले है। अगर मदरसा पैराटीचर्स की जायज मांगो के प्रति सरकार की बेरुखी के चलते जनता का कांग्रेस से जरा सा भी मोहभंग होता है तो कांग्रेस पार्टी की इन चुनावो मे लूठीया डूबना तय है। हालांकि मदरसा पैराटीचर्स का राजस्थान के इतिहास मे एक मात्र नियमतीकरण भाजपा की वसुंधरा राजे सरकार के समय होकर उस समय के मदरसा पैराटीचर्स सरकारी अध्यापक बनाये गये थे। लेकिन कांग्रेस की अशोक गहलोत के नेतृत्व मे बनी तीसरी दफा सरकार मे आज तक कभी भी मदरसा पैराटीचर्स का नियमतीकरण नही हो पाया है। जिसका मात्र कारण हर हाल मे समुदाय का वोटबैंक बने होना माना जा रहा है। जबकि पहली दफा अब जाकर मदरसा पैराटीचर्स ने बडा आंदोलन छेड़कर सरकार के सामने मुश्किल हालात बनाये है।