Category: राजस्थान

  • कोविड-19 से निपटने मे सरकार संसाधनों की कमी नही आने देगी।

    अशफाक कायमखानी।
    जयपुर।कोरोना संक्रमण को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि कोरोना महामारी से बचाव के लिए जयपुर में युद्ध स्तर पर काम किया जाए। यह ऐसी महामारी है जिसका आकलन करना बहुत मुश्किल है, ऐसे में हर परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्थाएं करें कि इस चुनौती से हम सफलतापूर्वक निपट सकें।

    राज्य सरकार संसाधनों में कोई कमी नहीं रख रही है। अधिकारी मिशन के साथ जयपुर को कोरोना मुक्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे है। क्वारेंटाइन के लिए अधिक से अधिक स्थान चिन्हित कर वहां बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराएं। जेडीए तथा हाउसिंग बोर्ड इन स्थानों पर बिजली-पानी, बिस्तर, भोजन सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था जल्द से जल्द करें ताकि आवश्यकता पड़ने पर वहां लोगों को क्वारेंटाइन किया जा सके। चारदीवारी में जिन 13 क्षेत्रों में संक्रमण के ज्यादा मामले सामने आए हैं, वहां विशेष फोकस किया जाए।

    इसकी अतिरिक्त राशन व खाद्य सामग्री वितरण की समीक्षा भी की। प्रदेश के एवं बाहर के फंसे दिहाड़ी मजदूरों को भूखे नही मरने दिया जायेगा। उनके खाने का इंतजाम करनी की बात मुख्यमंत्री ने दोहराई। इसके साथ ही प्रदेश मे बाहर के व प्रदेश के अन्य प्रदेशों मे फंसे हुये लोगो की समस्याओं को सूनकर उनका निपटारा करने के लिये भारतीय प्रशासनिक व पुलिस सेवा के अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त किये है।

  • सरकार की अधिकाधिक जांच कराने की रणनीति,ताकि समय रहते पोजेटिव मरीजों का पता लगकर इलाज हो सके।

    अशफाक कायमखानी।
    जयपुर।मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी रणनीति अधिक से अधिक जांच करने की है ताकि पॉजिटिव मरीजों का समय रहते पता लगाया जा सके। 2 लाख रैपिड टेस्टिंग किट आ चुके हैं और जल्द ही रैपिड टेस्ट शुरू कर दिए जाएंगे। अब ज्यादा संख्या में लोगों का टेस्ट होने से संक्रमण को फैलने से रोकने में मदद मिल सकेगी।
    यहां निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मीडिया के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता में कहा कि राज्य सरकार कुल 10 लाख किट मंगवाएगी और आने वाले दिनों में हमारी टेस्टिंग क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। एसएमएस हॉस्पिटल की लैब में कोरोना की नियमित जांच की क्षमता में बढ़ी है तथा प्रदेश के 6 संभागीय मुख्यालयों के मेडिकल कॉलेजों की लैब में भी इसकी जांच हो रही है।

    एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि सवाई मानसिंह अस्पताल, जयपुर में सबसे पहले भर्ती हुए कोरोना पॉजिटिव रोगियों के इलाज के लिए बनाए गए दवाओं के कॉम्बिनेशन की दुनिया के कई देशों में सराहना हुई है। यह हमारी बड़ी उपलब्धि है कि हमारे अनुभवों को दुनियाभर में मान्यता मिली है और इसका लाभ वहां के मरीजों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले स्वाइन फ्लू का सामना करते हुए हमें जो अनुभव मिले वो आज कोविड-19 के मरीजों को ठीक करने में काम आ रहे हैं।

    संक्रमण रोकने के लिए अपनाई जा रही रणनीति से जुड़े सवाल पर कहा कि राज्य सरकार भीलवाड़ा मॉडल को अपनाते हुए ‘रूथलेस कन्टेनमेंट’ में जुटी हुई है। यह एक महामारी है और इसका मुकाबला करने में किसी तरह की कोताही नहीं बरती जाएगी। पुलिस प्रशासन को भी लॉकडाउन एवं कर्फ्यू की पालना सख्ती से कराने के निर्देश दिए गए हैं। संक्रमित व्यक्ति के एक-एक सम्पर्क की पहचान कर उस तक पहुंचा जा रहा है। रामगंज क्षेत्र में केवल एक मौहल्ले में ही अधिक संक्रमण फैला है, जिसे रोकने में हम कामयाब होंगे, चिंता की कोई बात नहीं है। इसी प्रकार, बासंवाड़ा के कुशलगढ़ में भी एक क्षेत्र विशेष में संक्रमण हुआ है, जिस पर तयशुदा प्रोटोकॉल के तहत निगरानी की जा रही है।

    प्रवासी मजदूरों की स्थिति बहुत बड़ी समस्या है कि उनकी आजीविका छिन गई है और कई जगह उन्हें राहत शिविरों में रहना पड़ रहा है। मजदूर इस देश के विकास की रीढ़ हैं। 70 साल के दौरान देश में उद्योगों को खड़ा करने में उनकी बड़ी भूमिका है। मेरा व्यक्तिगत विचार है कि अब जोे लोग रास्ते में अटके पड़े हैं, उन्हें एक बार घर जाने की छूट दी जानी चाहिए। विभिन्न राज्यों में फंसे मजदूरों के सहयोग और उनकी शिकायतों के समाधान के लिए सभी सरकारों ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं तथा कुछ अधिकारियों को सिर्फ इसी काम के लिए नियोजित किया है। राजस्थान में भी दो आईएएस अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई है, जो दूसरे राज्यों के अधिकारियों से निरंतर सम्पर्क में हैं। राज्य की अर्थव्यवस्था के सवाल पर कहा कि लॉकडाउन की अवधि आगे बढ़ने के बावजूद प्रदेश में कुछ उद्योगों को शुरू करने की योजना पर विचार किया गया है। इस पर विशेषज्ञों की राय भी ली गई है। अर्थव्यवस्था के मिसिंग लिंक को जोड़ने, लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाने और रोजगार की व्यवस्था करने सहित सभी उपायों पर प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संदेश के बाद ही विस्तार से चर्चा की जाएगी।

    कोविड-19 महामारी को रोकने के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार ने जो कदम उठाए हैं, उनके बारे में प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी मीडिया ने बखूबी निभाई है। साथ ही आमजन में संक्रमण से बचाव के बारे में जागरूकता पैदा करने में भी मीडिया की भूमिका सराहनीय रही है।

    कृषि जिन्सों की न्यूनतम समर्थन मूल्य एवं खुली खरीद प्रक्रिया के जरिए 15 अप्रैल से चरणबद्ध तरीके से खरीद के निर्देश राज्य सरकार ने दिए थे। कोटा मण्डी में 16 अप्रैल से एमएसपी पर खरीद शुरू हो जाएगी। प्रोसेसिंग से जुड़ी कम्पनियों को किसानों से सीधे खरीद में प्राथमिकता दी जाएगी ताकि राशन और भोजन सामग्री की उपलब्धता में मदद मिल सके। सरसों और चने की खरीद के लिए भी 677 खरीद केन्द्र बनाए गए हैं, जबकि गेहूं की खरीद की लिए गौण मण्डियां स्थापित की गई हैं।

  • राजस्थान:निजी अस्पतालों में चिकित्सकीय सेवाएं जारी रखने के निर्देश।

    अशफाक कायमखानी।

    जयपुर।अतिरिक्त मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के रोहित कुमार सिंह ने प्रदेश के सभी निजी चिकित्सालयों में चिकित्सकीय सेवाएं प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि निर्देशों की पालना नहीं होने की स्थिति में अस्पताल संचालकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जा सकती है।

    उन्होंने ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान यह बात सामने आई कि कुछ निजी अस्पतालों ने सामान्य ओपीडी, आईपीडी सहित आपातकालीन सेवाएं बंद कर दी हैं। इससे मरीजों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्थान स्टेट हैल्थ एश्योरेंस एजेंसी ने एक अप्रेल को ही ओपीडी सेवाएं निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए थे । इसके उपरान्त भी कई निजी अस्पतालों द्वारा मरीजो को आवश्यक सेवाएं प्रदान नही की जा रही हैं और सरकारी अस्पताल में मरीजों को रैफर किया जा रहा है। इससे मरीजों को भी परेशानी हो रही है और राजकीय चिकित्सालयों पर भी अनावश्यक रूप से कार्यभार बढ़ रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए निजी अस्पतालों को पुनः स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

  • राजस्थान मे कोविड-19 महामारी कम्यूनिटी संक्रमत की स्थिति मे नहीं।

    अशफाक कायमखानी।
    जयपुर।राजस्थान में अभी तक कोविड-19 महामारी कम्यूनिटी संक्रमण की स्थिति में नहीं पहुंची है। जयपुर के रामगंज में बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हैं, लेकिन स्थिति अभी भी नियंत्रण में है। राज्य सरकार वहां ज्यादा से ज्यादा लोगों के सैंपल टेस्ट और पॉजिटिव रोगियों के संपर्क में आये अन्य लोगों को क्वारंटाइन करने पर जोर दे रही है। लॉकडाउन के अगले चरण की रूपरेखा को विशेषज्ञों की समिति अंतिम रूप दे रही है।

    मुख्यमंत्री जयपुर निवास से वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से विभिन्न मीडिया माध्यमों के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की। एक प्रश्न के जवाब में बताया कि रामगंज में स्वास्थ्य विभाग तथा प्रशासन युद्ध स्तर पर स्क्रीनिंग तथा टेस्टिंग की कार्यवाही को अंजाम दे रहा है, जिससे जल्द संक्रमित लोगों की सही संख्या पता चल जाएगी। घनी आबादी के कारण इस क्षेत्र में लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण एक बड़ी चुनौती है, लेकिन सरकार के विभिन्न विभाग उसी गंभीरता के साथ संक्रमण को रोकने के प्रयास में जुटे हैं। ‘भीलवाड़ा मॉडल‘ का मतलब ही ‘सख्ती‘ है। रामगंज सहित पूरे प्रदेश में जहां भी कोरोना पॉजिटिव मरीज मिल रहे हैं, वहां तयशुदा प्रोटोकॉल का कड़ाई के साथ प्रभावी रूप से पालन कर स्क्रीनिंग, संदिग्ध मरीजों का सर्वे और सैम्पल लेने का काम किया जा रहा है।

    एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्वे और स्क्रीनिंग का मकसद घर-घर जाकर इस बात का पता लगाना है कि कहीं कोई बीमार तो नहीं है या किसी में इस वायरस से संबंधित लक्षण पाये जाये तो वहां मेडिकल टीम भेजी जा सके। भीलवाड़ा में करीब 6 लाख घरों की स्क्रीनिंग हुई थी जिनमें से 14000 लोगों में फ्लू के लक्षण पाये गये थे, जिनकी आगे जांच कर पॉजिटिव रोगियों का पता लगाया गया। प्रदेश में निरोगी राजस्थान अभियान पहले से ही चल रहा है, जिससे लोगों में जागरूकता है।

    एक अन्य सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कोरोना के मरीजों का इलाज कर रहे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए समुचित प्रबन्ध हैं। पीपीई किट सहित उपकरणों की वर्तमान में कोई कमी नहीं है। किसी भी संवर्ग के कार्मिक की कोरोना योद्धा के रूप में काम करते समय संक्रमित होकर मृत्यु की स्थिति में प्रदेश सरकार ने परिजनों को 50 लाख रूपये की मुआवजा राशि देने की घोषणा की है। संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ने पर आवश्यकता के अनुसार और अधिक क्वारंटाइन सेंटर्स तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

    एक मीडिया प्रतिनिधि के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन के कारण काम-धंधे बंद होने के चलते एक भी व्यक्ति को भूखा नहीं सोने देने के संकल्प की पूरी पालना की जा रही हैं। कुछ अपवाद को छोड़कर राजस्थान में कहीं से भी प्रवासी मजदूरों और उनके परिजनों के भूखे रहने की शिकायत नहीं मिली हैं। जहां से भी सूचना मिलती है वहां तुरन्त राशन, सूखी भोजन सामग्री अथवा पका हुआ भोजन पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। जयपुर में रोजाना भोजन के एक लाख पैकेट बांटे जा रहे हैं। इसी प्रकार, अन्य शहरों और प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भोजन व्यवस्था की जा रही है। बेघर लोगों, दिहाड़ी मजदूरों, ठेले-थड़ी वालों का सभी जिलों में विशेष सर्वे करवाकर उन्हें सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है।
    राज्य सरकार के निर्देश हैं कि फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों का वेतन फैक्ट्री मालिकों की ओर से लॉकडाउन के कारण नहीं रोका जाये। उन्होंने कहा कि फैक्ट्री मालिकों को चाहिए कि जिन मजदूरों के खून-पसीने से उनकी फैक्ट्री चलती है उन्हें परिवार का सदस्य मानकर विपदा की इस घड़ी में उनका साथ देने को मुख्यमंत्री ने कहा।

    एक अन्य प्रश्न के उत्तर में कहा कि देश के सभी राज्यों की आर्थिक स्थिति पहले से ही ठीक नहीं थी। कोरोना के संक्रमण और इसके क्रम में लॉकडाउन के कारण हालात और खराब हो गये हैं। हमने सभी राज्यों की इस बेहद चिंताजनक स्थिति के मद्देनजर प्रधानमंत्री से एक लाख करोड़ रूपये की राशि अनुदान के रूप में देने का आग्रह किया है। राज्य के जीडीपी के 3 प्रतिशत तक की राजकोषीय घाटे की सीमा को 5 प्रतिशत करने, राज्यों को वेज एण्ड मीन्स की स्थिति में ब्याज-मुक्त ऋण उपलब्ध कराने तथा प्रोत्साहन पैकेज देने की मांग भी रखी गई है। अभी तक राजस्थान में वेज एण्ड मीन्स की स्थिति नहीं बनी है, लेकिन 15 राज्य वर्तमान में इस संकट से जुझ रहे हैं। इन राज्यों को तुरन्त ब्याज मुक्त ऋण के रूप में केन्द्रीय सहायता की आवश्यकता है।

    प्रदेश के आर्थिक हालात सुधारने के लिए भविष्य की रणनीति के विषय में पूछे गये सवाल पर कहा कि इस संदर्भ में प्रधानमंत्री के साथ वीडियो कॉन्फ्रेस के दौरान भी सुझाव दिये गये हैं। राजस्थान की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिये सलाहकार श्री अरविंद मायाराम की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की टास्क फोर्स बनाई गयी है। विशेषज्ञों की इस रिपोर्ट के प्राप्त होने पर जो भी सुझाव आयेंगे उनके अनुसार काम किया जाएगा।
    मुख्यमंत्री का प्रयास रहेगा कि वे समय-समय पर मीडिया कर्मियों से वीसी के माध्यम से चर्चा करें ताकि कोविड-19 का संक्रमण रोकने के लिये राज्य सरकार द्वारा उठाये गये कदमों एवं लॉकडाउन की स्थिति के बारे में आमजन द्वारा दिया जा रहा फीडबैक मिल सके।

    वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ रघु शर्मा ने कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के लिये उठाये जा रहे कदमों के बारे में प्रारंभिक जानकारी दी। सूचना एवं जनसम्पर्क आयुक्त महेन्द्र सोनी ने मीडिया प्रतिनिधियों से सवाल पूछकर वीडियो कॉन्फ्रेंस वार्ता का संचालन किया। इस दौरान मुख्य सचिव डी.बी. गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्री रोहित कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

  • राजस्थान में नहीं थम रहा कोरोना का कहर,96 नए काेरोना संक्रमित मिले,जयपुर ने फिर चौंकाया

    *जयपुर*:- राजस्थान में रविवार को कोरोना पॉजिटिव के 96 नए मामले सामने आने के बाद संक्रमितों की संख्या बढ़कर 796 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से दोपहर दो बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार जयपुर में 35, बांसवाड़ा में 15, बीकानेर में 8, चूरू में एक, जैसलमेर में एक, जोधपुर में 8, सीकर में एक, टोंक में 11, कोटा में 7, नागौर में 5 और पहली बार हनुमानगढ़ में दो पॉजिटिव पाए गए हैं। इसके साथ ही राज्य के 25 जिले कोरोना वायरस के प्रभाव में आ चुके हैं।

    विभाग के अनुसार अब तक अजमेर में पांच, अलवर में सात, बांसवाड़ा में 52, भरतपुर में नौ, भीलवाड़ा में 28, बीकानेर में 34, चूरु में 12, दौसा में आठ, धौलपुर में एक, डूंगरपुर में पांच, जयपुर में 336, जैसलमेर में 29, झुंझुनू में 31, जोधपुर में 51, करौली में तीन, पाली में दो, सीकर में दो, टोंक में 58, उदयपुर में चार, प्रतापगढ़ में दो, नागौर में 6, कोटा में 40, झालावाड़ में 14, बाड़मेर में एक और हनुमानगढ़ में दो पॉजिटिव पाए गए हैं।

    विभाग के अनुसार अब तक 28 हजार 505 सैम्पल की जांच की गई जिनमें 796 पॉजिटिव पाए गए हैं जबकि 25 हजार 150 निगेटिव हैं। 2559 की रिपोर्ट आनी शेष है। अब तक पॉजिटिव में 121 स्वस्थ होकर कोरोना मुक्त हो चुके हैं। इनमें 63 को छुट्टी दे दी गई है।

  • कोराना संकट के समय मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना शुरू।

    अशफाक कायमखानी।
    जयपुर।कोरोना के कारण मुश्किल और विषम परिस्थितियों का सामना कर रहे ग्रामीण क्षेत्रों के लोक कलाकारों के लिए ‘मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना‘ की अनूठी पहल की गई है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे अनेक लोक कलाकार हैं, जो लोक कलाओं की सुरभि बिखेर कर अपनी आजीविका चलाते हैं। कोरोना के संकटकाल में उनकी यथासम्भव सहायता और सम्मान देने के लिए कला एवं संस्कृति विभाग ने यह अनूठी योजना तैयार की है। यह योजना राजस्थान के उन कलाकारों के लिये है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करते हैं तथा अपनी आजीविका के लिए पूर्णरूप से लोक कला के प्रदर्शन पर निर्भर है। इस योजना के लिए कलाकारों के आधार कार्ड में दर्ज पता ग्रामीण क्षेत्र तय करने का आधार होगा। योजना में शामिल होने के पात्र कलाकार राजस्थान की कोई भी प्रदर्शनकारी लोक कला, लोक वाद्ययंत्र वादन, एकल नृत्य, एकल लोक गायन आदि का अपनी प्रविष्टी के रूप में चयन कर सकेंगे। लोक कलाकारों को अपनी कला से सम्बंधित प्रस्तुति का 15 से 20 मिनट का वीडियो अपने घर से ही तैयार करके विभाग द्वारा निर्धारित ई-मेल cmfolkartdoac@gmail.com पर अटेचमेंट के रूप में अपलोड कर भिजवाना होगा। लोक कलाकारों द्वारा बनाए जाने वाले वीडियों की कुल अवधि 15-20 मिनट से अधिक नहीं होगी।
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    सभी लोक कलाकरों को योजना के तहत अपनी प्रस्तुति की रिकार्डिंग के समय सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ही कोरोना की रोकथाम और बचाव के लिए सरकार द्वारा जारी की गई गाईडलांइस की पूर्ण पालना करनी होगी। इच्छुक लोक कलाकार यथासम्भव ऐसी प्रविष्टियों का चयन करे जिसमें एक से अधिक व्यक्ति (लोक कलाकर) उस प्रस्तुति में सम्मिलित ना हों।

    योजना में सम्मिलित होने वाले कलाकारों को ई-मेल पर वीडियो भेजते समय पूर्ण विवरण के साथ स्वयं के बैंक खाते का विवरण अंग्रेजी में देना होगा, इसमें बैंक एवं शाखा के नाम के साथ ही आईएफएससी कोड का भी उल्लेख करना होगा। साथ ही आधार कार्ड की फोटो तथा चैक की फोटो (यदि उपलब्ध हो तो) भी भेजनी होगी।
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    योजना में प्रविष्टि के लिए भेजे जाने वाले वीडियो की रिकॉर्डिंग किसी भी मोबाईल कैमरे या किसी भी अच्छे कैमरे से की जा सकती है। वीडियो कम से कम इस स्तर का हो कि लोग उसको देखकर उस प्रस्तुति का आनंद लें सके।

  • राजस्थान:अति आवश्यक सेवायें जैसे फूड्स,दवां,दूध एफसीआई के व्हीकल्स को अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है

    जनधन खातों में जमा राशि बहुत ज्यादा आवश्यकता होने पर ही निकालें

    अशफाक कायमखानी।
    सीकर।अतिरिक्त जिला कलेक्टर जयप्रकाश ने बताया कि सीकर जिले में और सीकर जिले के बाहर आवागमन के संबंध में लगातार एपलीकेशन वाहनों की अनुमती के लिए आवेदन प्राप्त हो रहे है जिसके संबंध में लगातार हमने समाचार पत्रों के माध्यम से किस स्तर की अनुमति कहा से ली जा सकती है की जानकारी दी है।

    उन्होंने बताया कि सर्वप्रथम तो अति आवश्य सेवायें जैसे फूड्स, दवां,दूध एफसीआई के व्हीकल्स को अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंनेे बताया कि अतिआवश्यक परिस्थति में जहां नीजी और वाणिज्यक वाहन से किसी व्यक्ति को आवागमन करना है तो उसमें दो केटेगरी है एक तो व्यक्ति जिले से बाहर जाना चाहता है या जिले के बाहर से आना चाहता ह या एक राज्य के बाहर जाना चाहता है दूसरी कैटगरी सीकर जिले के अन्दर ही एक तहसील से दूसरी तहसील, एक गांव से दूसरे गांव वह व्यक्ति अतिआवश्यक परिस्थिति में एक तो मेडिकल कारण होता है या परिवार में निकट व्यक्ति की मृत्यु हो गई हो जहां पर पहुंचना उनका अतिआवश्यक है तो मानवीय दृष्टिकोण रखते हुए वह संबंधित एसडीएम के पास आवेदन करें और इसी तरह से आरटीओ ऑफिस में आवेदन करें। जिले के अन्दर जितनी भी परमीशन है वो संबंधित एसडीएम व आरटीओ के द्वारा जारी होगी वो ही मान्य होगी । अगर जिले से बाहर जाना है या राज्य से बाहर जाना है इन्हीं अतिआवश्यक और मेडिकल इमरजेंसी में तो वह व्यक्ति आवेदन एसडीएम ऑफिस व आरटीओ ऑफिस में ही करेगा क्योंकि एसडीएम ऑफीस व आरटीओ ऑफिस में आवेदन की जांच होगी और उनकी स्पष्ट अभिशंषा के बाद ही में वो आवेदन जिला कार्यालय को भेजा जायेगा जहां से जिला कलक्टर कार्यालय से पास जारी होगा।

    अतिरिक्त जिला कलेक्टर जयप्रकाश ने बताया कि सरकारी कर्मचारी राजकीय कार्य से आवागमन करता है तो वो अपने कार्यालय की आईडी दिखाये वो आईडी उनके लिए मान्य होगी लेकिन अगर वह व्यक्ति उस आईडी से जिले के बाहर जाने की कोशिश करता है तब उसको अनिवार्य रूप से उसकों रोका जायेंगा क्योंकि कोई भी कार्यालय का परिचय पत्र जिले के बाहर जाने की अनुमत नहीं है साथ ही यह भी ध्यान में रखा जाये की दूसरे जिले के कर्मचारी जो अवकाश लेकर अपने मुख्यालय से इस जिले में आ गये है अभी उनकी ड्यूटी वहां लग रही है तो इस संबंध में संबंधित जिले के अधिकारियों को भी आग्रह किया है कि जहां भी इनकी ड्यूटी लगती है वहां से हमारे जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पर एक सूची आ जायेगी की इस जिले में इस कर्मचारी की ड्यूटी है तो उनकों पास जारी कर देंगे । उन्होंने जिले के सभी नागरिकों से आग्रह किया है कि यह परमीशन अतिआवश्यक व इमरजेंसी के लिए किया गया है जिसको वास्तविक रूप से जरूरत हो वहीं आवेदन करें। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा गरीब, जरूरतमंद व्यक्तियों के खातों में जो सहायता राशि उनके सीधे बैंक खातों में डाली गई है तो उसके बारे में आम-जन में यह अफवाह हो रही है कि जो सहायता राशि राज्य सरकार ने जारी की है उसे नहीं निकालने पर वापीस निकाल ली जायेगी यह कतही सही नहीं है । यह राशि आपकी है आपकी ही रहेगी जब आपको आवश्यकता हो तब आप इस राशि को ले सकते है।

    अतिरिक्त जिला कलेक्टर जयप्रकाश ने जिले के आम नागरिकों से स्पष्ट किया है कि आपके खाते में चाहे भारत सरकार या राज्य सरकार द्वारा जो भी सहायता राशि के रूप में जमा होगी वो आपके ही खाते में जमा रहेगी और उसको आप वर्तमान में कोई जरूरीनहीं है कि आप अभी निकाले जब बहुत ज्यादा आवश्यकता हो या आपके पास पैसे नहीं है तब आप बैंक और एटीएम से अपने पैसे निकाले।

  • राजस्थान:मुख्यमंत्री सहायता कोष कोविड-19 मे अब तक 182 करोड़ 31लाग रुपये जमा।

    अशफाक कायमखानी।
    जयपुर। राजस्थान प्रदेश में कोरोना संक्रमण के संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार को मुख्यमंत्री सहायता कोष कोविड-19 राहत कोष के माध्यम से आज शनिवार तक कुल 182 करोड़ 31 लाख रूपये की सहायता राशि प्राप्त हुई है।

    मैसर्स वेदान्ता लिमिटेड ने कोविड-19 राहत कोष के बैंक खाते में 5 करोड़ रूपये की राशि जमा कराई है। मैसर्स टोरेन्ट पॉवर लिमिटेड ने 3 करोड़ रूपये तथा मैसर्स टोरेन्ट फार्मास्यूटिकल्स ने 2 करोड़ रूपये राहत कोष में सीधे जमा कराए हैं।

    बाड़मेर स्थित मैसर्स बालोतरा वाटर पॉल्यूशन कन्ट्रोल एण्ड रिसर्च फाउण्डेशन ट्रस्ट बालोतरा ने जिला कलक्टर के माध्यम से 1 करोड़ रूपये का चेक कोविड-19 राहत कोष के लिए दिया है। इसी प्रकार, होण्डा इण्डिया फाउंडेशन की ओर से 50 लाख रूपये और होण्डा में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा अपने वेतन में से कुल 56 लाख 2 हजार रूपये से अधिक की राशि कंपनी के उप प्रबंधक भारत भूषण यादव के माध्यम से राहत कोष के लिए दी है।

  • मुख्यमंत्री अशोक गहलोत नै प्रधानमंत्री से वीडियो कोंफ्रेंसिंग मे अनेक सकारात्मक अपील की ।

    अशफाक कायमखानी।

    जयपुर।मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री की वीडियो कांफ्रेंसिंग करते हुये मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आग्रह किया है कि कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के लिए घोषित लॉकडाउन के कारण कचरा बीनने वाले, रेहड़ी/रिक्शा चलाने वाले, घुमंतू एवं अन्य असहाय लोगों के जीविकोपार्जन पर खतरा मंडराने लगा है। ऐसे में भारत सरकार को ’काम के बदले अनाज’ योजना, जो कि वर्ष 2002 में अकाल-सूखे के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय लाई गई थी और बहुत लोकप्रिय एवं सफल साबित हुई थी, उसी की तर्ज पर एक योजना पुनः नये रूप में लाने पर विचार करना चाहिए। ऐसी योजना के संचालन के लिए अनाज भारत सरकार के पास बहुतायात में उपलब्ध है।

    राजस्थान सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन के दायरे में नहीं आने वाले जरूरतमंद वर्गों के 31 लाख से अधिक परिवारों को 2500 हजार रूपये की अनुग्रह राशि उपलब्ध कराई है। केन्द्र सरकार की ओर से भी इस श्रेणी लोगों के लिए अनुग्रह राशि की योजना लाई जानी चाहिए, ताकि उन्हें आर्थिक रूप से संबल मिल सके।
    2008 की आर्थिक मंदी के दौरान तत्कालिन वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने एक बड़ा प्रोत्साहन पैकेज घोषित किया था। उसी तर्ज पर एक बड़ा पैकेज उद्योगों के लिए दिया जाए, जिससे आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सके।

    प्रधानमंत्री को मुख्यमंत्री गहलोत ने अवगत कराया कि कोविड-19 के संक्रमण के बाद लॉकडाउन से प्रभावित राजस्थान के होटल एवं पर्यटन व्यवसाय को राहत देने के लिए हमारी सरकार ने स्टेट जीएसटी का अगले 3 माह तक पुनर्भरण करने का निर्णय लिया है। ऐसे में, भारत सरकार को भी इस चुनौती पूर्ण समय में उद्योगों की गिरती हुई स्थिति को संभालने के लिए केन्द्रीय जीएसटी में रियायत देने पर विचार करना चाहिए।

    प्रधानमंत्री को यह भी अवगत कराया गया कि राजस्थान सरकार ने कोविड-19 महामारी को रोकने के लिए सभी संभव उपाय किए हैं। भीलवाड़ा में संक्रमण पर सफलतापूर्वक काबू पाने के बाद प्रदेश के अन्य जगहों पर संक्रमण फैलने से रोकने के लिए सभी उपाय किए जा रहे हैं। रैपिड टेस्ट किट उपलब्ध होते ही व्यापक स्तर पर टेस्ट शुरू किए जाएंगे, ताकि संक्रमित रोगियों का समय पर पता लगाकर उन्हें क्वारंटाइन किया जा सके और संक्रमण दूसरे लोगों में फैलने से रोका जा सके।

    राज्य सरकार द्वारा सभी जरूरतमंद वर्गों को राहत पहुंचाने के लिए किए गए उपायों से प्रधानमंत्री को अवगत कराया और कहा कि कोरोना जैसी आपदा का सामना करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को पर्याप्त सहयोग मिलना बेहद जरूरी है। उन्होंने लॉकडाउन के संबंध में फैसला राज्यों की परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें विश्वास में लेकर सामूहिक तौर पर करने पर जोर दिया। इस संबंध में केन्द्र सरकार द्वारा लिए गए फैसले को राज्य सरकार लागू करेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा संकल्प है कि लॉक डाउन के कारण प्रदेश में एक भी व्यक्ति भूखा नहीं सोए तथा लोगों की परचेजिंग पावर बनी रहे। हमने हर वर्ग को अपने फैसलों से राहत पहुंचाई है। 78 लाख लाभार्थियों को सामाजिक सुरक्षा के तहत मिलने वाली पेंशन का फरवरी एवं मार्च माह का भुगतान कर दिया गया है। राज्य सरकार इस पर 1500 करोड़ रूपए वहन कर रही है। राज्य सरकार ने हर जरूरतमंद तक खाना एवं राशन सामग्री पहुंचाने के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं।

    रबी सीजन की फसलें बिक्री के लिए बाजार में आने को तैयार है। पीएम आशा योजना में फसल की कुल पैदावार का 25 प्रतिशत हिस्सा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाता है, जो अपर्याप्त है। इस कठिन समय में किसानों को राहत देते हुए इसे बढाकर 50 प्रतिशत तक किया जाना चाहिए। साथ ही एफसीआई एवं नैफेड द्वारा समर्थन मूल्य पर चरणबद्ध रूप से खरीद शुरू की जानी चाहिए। प्रदेश के लिए उधार लेने की क्षमता एवं एफआरबीएम एक्ट में उल्लेखित राजकोषीय घाटे की सीमा जीडीपी के 5 प्रतिशत तक बढ़ाने की अनुमति प्रदान करने की मांग रखी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल ही में वेज एण्ड मीन्स एडवान्स में 30 प्रतिशत की सीमा बढ़ाई है लेकिन विशेष संकटकाल को देखते हुए राज्य सरकारों को ब्याज रहित वेज एण्ड मीन्स एडवान्स की सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि वे कोविड-19 महामारी से ज्यादा प्रभावी तरीके से निपट सकें। साथ ही उन्होंने मांग रखी कि भारतीय रिजर्व बैंक एवं केन्द्र के अधीन अन्य वित्तीय संस्थानों के बकाया ऋण की आगामी किश्तों के भुगतान का पुनर्निधारण करते हुए ब्याज मुक्त आधार पर 6 माह का मोरेटोरियम उपलब्ध कराया जाए। इसमें राज्य सरकारों के बोर्ड कॉर्पोरेशन एवं कंपनियां भी शामिल की जाएं।

    वैश्विक महामारी कोविड-19 से निपटने के लिए राज्य सरकारों को एक लाख करोड़ रूपए की अनुदान राशि शीघ्र उपलब्ध करवाई जाए। इस अनुदान राशि की पहली किश्त का भुगतान जनसंख्या के आधार पर एवं तत्पश्चात अन्य किश्तों का भुगतान जीएसटी कांउसिल या इन्टर स्टेट कांउसिल द्वारा निर्धारित फॅार्मूले के आधार पर किया जाना चाहिए।
    राज्यों को वित्तीय पैकेज के निर्धारण के लिए केन्द्रीय वित्त मंत्रालय और आरबीआई के अधिकारियों से चर्चा के लिए राजस्थान की ओर से शीर्ष अधिकारियों का एक दल भेजा जा सकता है। सरकार के आदेशों पर उद्योगों एवं व्यावसायिक संस्थानों में मार्च माह का वेतन अपने कार्मिकों एवं मजदूरों को पूरा दिया है, लेकिन भविष्य में भी उन्हें यह वेतन मिलता रहे यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी है क्योंकि लॉकडाउन के दौरान उनके पास अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए दूसरा कोई आय का साधन नहीं है।
    मुख्यमंत्री द्वारा सुझाव दिया गया कि लॉकडाउन खुलने के बाद वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में रिकवरी होगी ऐसे में भारत के लिए निर्यात के नये अवसरों की संभावना को देखते हुए हमें अभी से ही निर्यात को बढावा देने के लिए एक्जीम बैंक के माध्यम से ब्याज सब्सिडी एवं अन्य इंसेंटिव देने पर विचार करना चाहिए।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आग्रह किया कि राजस्थान मुख्यमंत्री सहायता कोष ’कोविड-19 राहत कोष’ में राजस्थान राज्य में संचालित कंपनियों द्वारा आर्थिक मदद दिए जाने को पीएम केयर्स फण्ड की तर्ज पर सीएसआर के तहत पात्र गतिविधि मान्य करने के लिए संबंधित मंत्रालय को आवश्यक आदेश जारी करने के निर्देश दिए जाएं। इस राशि से राज्य सरकार को इस महामारी को रोकने के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाने में मदद मिल सकेगी।

    राजस्थान इस महामारी को लेकर पूरी तरह सतर्क और सजग है। हम इस चुनौती का सामना करने में किसी तरह की कमी नहीं आने देंगे। वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा, मुख्य सचिव डीबी गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह राजीव स्वरूप, पुलिस महानिदेशक भूपेन्द्र सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव चिकित्सा रोहित कुमार सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • मुख्यमंत्री गहलोत के लिये प्रदेश वासियों के जीवन की रक्षा सर्वोपरि।

    अशफाक कायमखानी।
    जयपुर।मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार के लिए प्रदेशवासियों के जीवन की रक्षा सर्वोपरि है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार लॉकडाउन के संबंध में उचित कदम उठाएगी। कोराना महामारी से निपटने तथा लॉकडाउन में आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई चैन को सुचारू बनाए रखने में उद्यमियों तथा कारोबारियों ने सरकार का आगे बढ़कर सहयोग किया है। कोरोना से लड़ाई जारी बताते हुये गहलोत ने उम्मीद जताई है कि। आगे भी सभी से इसी तरह का सहयोग मिलता रहेगा। सरकार संकट की इस घडी में उद्यमियों के साथ खड़ी है। आवश्यक वस्तुओं से संबंधित ऎसे उद्योग जो लॉकडाउन में खोलने के लिए अनुमत थे, उन्हें अपना कार्य सुचारू रूप से संचालित करने में किसी प्रकार की अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी।

    मुख्यमंत्री वीडियो कांफ्रेंस के जरिए प्रदेश के औद्योगिक संगठनों, खाद्य पदार्थ एवं किराना संघों, सब्जी विक्रेता संघ, दवा एसोसिएशन, आढ़तिया व्यापार संघ, डेयरी संघ, होटल, खनन एवं ज्वैलरी व्यवसायी तथा बिल्डर्स आदि से चर्चा की। इन सभी से आवश्यक वस्तुओं की सुचारू आपूर्ति, इसमें आ रही बाधाओं को दूर करने तथा लॉकडाउन खोलने को लेकर उनके सुझाव लिए। आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति में ‘पास‘ को लेकर आ रही परेशानियों का समाधान भी जल्द कर दिया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना से लड़ाई में राजस्थान सरकार ने आगे बढ़कर निर्णय किए हैं। ‘कोई भी भूखा नहीं सोए‘ यह हमारा मूलमंत्र रहा है। इस संकल्प को पूरा करने में सामाजिक कार्यकर्ताओं, भामाशाहों के अलावा उद्यमियों एवं व्यापारी वर्ग सहित सभी लोगों ने खुले मन से सरकार को सहयोग किया है। जिन उद्योगों में उत्पादन चल रहा है, वहां श्रमिकों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग और हैल्थ प्रोटोकॉल की पूरी पालना सुनिश्चित की जाए। फैक्टि्रयों में मास्क एवं सेनेटाइजर उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही मंडियों में भी भीड़ एकत्र न हो। स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा जाए।

    वीडियो कांफ्रेंस के दौरान उद्यमियों एवं व्यापारियों ने राजस्थान में कोरोना संक्रमण को रोकने तथा जरूरतमंदों को राहत देने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की मुक्तकंठ से सराहना की। देश और दुनिया में भीलवाड़ा मॉडल की चर्चा हो रही है और कई राज्यों ने इसे अपनाया है। यह पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है। उद्यमियों एवं सभी संगठनों ने एक स्वर में कहा कि कोई भी निर्णय हो, जीवन की रक्षा पहली प्राथमिकता है। लॉकडाउन के संबंध में सरकार जो भी निर्णय करेगी, हम सभी उसकी पूरी पालना सुनिश्चित करेंगे।

    नगरीय विकास मंत्री श्री शांति धारीवाल ने कहा कि राजस्थान ने सबसे पहले लॉकडाउन कर इस महामारी की रोकथाम की दिशा में जो पहल की उसी का परिणाम है कि हम इसकी कम्यूनिटी स्प्रेडिंग रोकने में काफी हद तक कामयाब रहे हैं। लोगों की जीवन की रक्षा सर्वोपरि है।
    चर्चा के दौरान उद्योग मंत्री श्री परसादीलाल मीणा ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान आपूर्ति श्रृंखला सुचारू रहने के कारण लोगों को आवश्यक वस्तुओं के लिए किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी गई। पर्यटन मंत्री श्री विश्वेन्द्र सिंह ने कहा कि अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए लॉकडाउन को चरणबद्ध रूप से खोलने की दिशा में विचार किया जा सकता है।

    खाद्य मंत्री रमेश मीणा ने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप विभाग ने एनएफएसए के तहत लाभार्थियों को निशुल्क गेहूं का रिकॉर्ड समय में वितरण किया है। मास्क एवं सेनेटाइजर को पीडीएस श्रेणी के तहत बेचने के लिए अनुमत किया गया है। कृषि मंत्री लालचन्द कटारिया ने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए कटाई एवं थ्रेशिंग कार्यों के लिए किराए पर निशुल्क उपकरण उपलब्ध करवाने, बिजली के बिल स्थगित करने सहित कई कदम उठाए हैं।

    गौपालन मंत्री प्रमोद भाया ने कहा कि वे पंजीकृत गौशालाएं जिन्होंने सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर ली है, उन्हें तीन माह का तथा जिन पंजीकृत गौशालाओं ने सत्यापन नहीं कराया है, उन्हें एक माह का अनुदान उपलब्ध कराया गया है। सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने कहा कि 15 अप्रेल से मण्डियों में चरणबद्ध रूप से कृषि जिन्सों की खरीद शुरू होगी। खरीद कार्य में सक्षम ग्राम सेवा सहकारी समितियों का भी सहयोग लिया जाएगा। उद्योग राज्यमंत्री अर्जुन सिंह बामनिया ने भी विचार व्यक्त किए।

    इस अवसर पर चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा, मुख्य सचिव डीबी गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह राजीव स्वरूप, अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग सुबोध अग्रवाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य रोहित कुमार सिंह सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।