Category: राजस्थान

  • उमर ख़ालिद की गिरफ़्तारी पर जयपुर में विरोध प्रदर्शन, उठी UAPA रद्द करने की गूंज।

    जयपुर। भारत की राजधानी दिल्ली में फ़रवरी में हुए नागरिकता कानून (CAA) के विरोध प्रदर्शन के बाद नॉर्थ ईस्ट दिल्ली के कई इलाकों में भड़के सांप्रदायिक दंगों के मामले में दिल्ली पुलिस ने बीते रविवार जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को गिरफ्तार कर लिया। खालिद पर अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के अलावा 18 अन्य धाराएँ लगाई गई हैं जिसके बाद उन्हें सोमवार को 10 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।

    उमर की गिरफ्तारी के बाद देश के कई हिस्सों से तमाम जानी मानी हस्तियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुलिस की इस कार्यवाही के खिलाफ विरोध दर्ज करवाया, इसी क्रम में मंगलवार (15 सितंबर) को जयपुर के गांधी सर्किल पर प्रदेश की स्टूडेंट कम्युनिटी की तरफ से विरोध प्रदर्शन किया गया।

    प्रदर्शन में विरोध दर्ज कराने पहुंची CPI नेता निशा सिद्धू ने कहा कि, दिल्ली दंगों में पुलिस की कार्यवाही पूर्वाग्रह से ग्रसित है, जिसको गिरफ्तार करना चाहिए वो तो खुलेआम घूम रहे हैं। पुलिस तमाम छात्रों और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर हमारी आवाज़ दबाना चाहती है, जो लोकतंत्र में संभव नहीं है।

    वहीं मजदूर किसान शक्ति संगठन के मुकेश गोस्वामी ने कहा कि, देश के प्रधानमंत्री तानाशाह की तरह व्यवहार कर रहे हैं और दिल्ली पुलिस दंगा भड़काने वालों की चापलूसी कर रही है जिसकी आड़ में निर्दोष लोगों को जेलों में भरा जा रहा है. उन्होंने राजस्थान पुलिस पर सवाल उठाते हुए कहा कि” अशोक गहलोत और अमित शाह की पुलिस में कोई फ़र्क़ नहीं रह गया. कांग्रेस को समझ लेना चाहिए कि उन्हें अब प्रताड़ितों के साथ खड़ा होना ही होगा”। इसके साथ ही राजस्थान समग्र सेवा संघ के सवाई सिंह का कहना था कि देश में लोकतंत्र का गला घोटा जा रहा है, विरोध की आवाज़ उठाने वाले देशद्रोही बनाये जा रहे हैं।

    मालूम हो कि उमर खालिद पर CAA के खिलाफ दिल्ली में दंगा फैलाने की साजिश के आरोप लगे हैं। पुलिस के मुताबिक खालिद ने अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की यात्रा के दौरान लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की थी। हालाँकि दिल्ली पुलिस की दंगों पर की जा रही जाँच पर सवाल उठ रहे हैं।

    सामाजिक कार्यकर्ता राशिद हुसैन ने कहा की “ नागरिकता संशोधन अधिनियम के ख़िलाफ़ पूरे देश में शांति पूर्वक विरोध प्रदर्शन हुए जिसमें सभी धर्मों की संविधान संरक्षण की वकालत करने वाले लोग शामिल हुए. लेकिन भाजपा नेताओं ने अनर्गल बयान दिए जिससे साम्प्रदायिकता बढ़ी और दंगे भड़क उठे.” वहीं विरोध प्रदर्शन में नागरिक मंच से अनिल गोस्वामी, CPM नेता संजय माधव, AIRSO नेता रितांश आज़ाद, राशिद हुसैन, विजय स्वामी, मानस भूषण, अहमद कासिम जैसे कई सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

  • मुख्यमंत्री अशोक गहलोत धीरे धीरे सचिन पायलट खेमे को कमजोर करने मे कामयाब होते नजर आ रहे है!

    अशफाक कायमखानी।

    जयपुर।राजस्थान कांग्रेस मे पीछले दो महीनों की उठा-पटक के बाद कांग्रेस हाईकमान द्वारा गहलोत-पायलट खेमे को एकजुट करने का संकेत देने के बावजूद दोनो नेताओं मे चली आ रही अदावत का रुप बदलने के बावजूद उसी तरह अदावत आज भी जारी है। पहले उक्त दोनो नेताओं मे मुकाबला उन्नीस-बीस का था लेकिन जब से पायलट से उपमुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष पद छीना गया है तब से मुख्यमंत्री गहलोत का पलड़ा काफी भारी होता नजर आ रहा है।

    पार्टी कार्यकर्ताओं व जनता की भावनाओं के विपरीत केवल मात्र विधायकों को खुश रखकर उनके बल पर अपनी सरकार चलाकर जैसे तैसे करके पूरे पांच साल मुख्यमंत्री पद पर चिपके रहने के माहिर अशोक गहलोत पीछले अपने दो मुख्यमंत्री कार्यकाल के बाद आम चुनाव मे कांग्रेस के बूरी तरह हारने से कोई सबक लिये बीना इस दफा भी उन सब पुरानी गलतियों से बढकर अब भी गलती कर रहे है जो पहले करते आये है। गहलोत सरकार के गठन को करीब दो साल होने को आने के बाद भी आम जनता मे इस बात पर एक राय है कि अगले आम विधानसभा चुनाव मे कांग्रेस का बूरी तरह हारना तय है केवल बहस इस बात पर हो रही है कि कांग्रेस दस सीट तक जीत पायेगी या नही।

    गहलोत जब जब मुख्यमंत्री बनकर सत्ता मे आये है तब तब उन्होंने अपनी विपक्षी पार्टी भाजपा को कमजोर करने की बजाय अपने ही दल मे उनके स्वयं के मुकाबले उभरने वाले नेताओ को कमजोर करने मे सत्ता के पावर की ताकत का भरपूर उपयोग करते आये है। गहलोत अपने इस वर्तमान कार्यकाल मे भी पुराने इतिहास को दोहराते हुये शूरुआत से ही सचिन पायलट को राजनीतिक तौर पर कमजोर करने मे अपनी पुरी ताकत लगाते आ रहे। सचिन पायलट को कमजोर करने मे अशोक गहलोत को अब तक काफी कामयाबी भी मिलती नजर आ रही है।

    1998 मे अशोक गहलोत के पहली दफा मुख्यमंत्री बनने के बाद उनको अब तक प्रदेश अध्यक्ष के रुप मे केवल सीपी जोशी व सचिन पायलट से ही चेलेंज मिल पाया था। वर्तमान अध्यक्ष डोटासरा सहित बाकी सभी बने अध्यक्ष गहलोत की दया के पात्र के तौर पर ही साबित हुये व हो रहे है। यानि जोशी व पायलट को छोड़कर बाकी सभी की स्वयं विवेक अनुसार राय ना होकर वही राय रही जो मुख्यमंत्री गहलोत की राय रही व है।

    मुख्यमंत्री गहलोत अपने मुकाबिल कांग्रेस मे खड़े होने वाले सचिन पायलट को कमजोर करने मे तब से लगे हुये थे जब वो प्रदेश अध्यक्ष बने थे। अभी दो महीने पहले सम्पन्न राज्यसभा चुनाव के समय सचिन पायलट को कमजोर करने का मुख्यमंत्री गहलोत का पहला प्रयास विफल होने के बावजूद लगातार मोके की तलाश मे गहलोत रहे। दुसरा प्रयास पायलट व कुछ विधायको के दिल्ली जाने की खबर के साथ अपने खास महेश जोशी द्वारा ऐसीबी व एसओजी मे 124-A सहित अन्य गम्भीर आरोपो मे प्राथमिकी दर्ज करने के बाद अपने समर्थक विधायकों की बाड़ेबंदी करके अपने पक्ष व पायलट के विरोध मे माहोल बना कर अचानक पायलट को उपमुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर अपने पिछलग्गू गोविंद डोटासरा को अध्यक्ष बनाकर बडी कामयाबी हासिल करके पायलट खेमे की कमर तोड़ दी। इसके बाद पायलट, रमेश मीणा व विश्वेंद्र सिंह के मंत्री पद से हटने के बाद 13-सितम्बर को जिले के प्रभारी मंत्रियों का जिला बदलकर इस तरह कामयाबी पाई कि पायलट व उनके समर्थक विधायकों के प्रभुत्व वाले जिलो का प्रभारी मंत्री उनको बना दिया जो मुख्यमंत्री के खासम खास है।जो अब मुख्यमंत्री की मंशा अनुसार रिपोर्ट तैयार करते रहने के साथ साथ पायलट खेमे पर नजदीक से नजर रख पायेंगे।इससे उन जिलो मे धीरे धीरे पायलट समर्थक विधायकों का प्रभाव भी कम किया जा सकेगा।

    मुख्यमंत्री गहलोत द्वारा अब तमाम राजनीतिक नियुक्तियों का कार्य भी जल्द पुरा कर लेने की सम्भावना है। पहले प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट राजनीतिक नियुक्तियों के मनोनयन मे गहलोत से अलग मत रखकर हिस्सेदारी की बात करते थे। अब डोटासरा के अध्यक्ष बनने के बाद गहलोत की बल्ले बल्ले है। अब मुख्यमंत्री स्तर पर होने वाले तमाम फैसलो मे डोटासरा की केवल मात्र हां होगी , किसी तरह की ना नुकर किसी हालत मे डोटासरा की नही होना माना जा रहा है।

    कांग्रेस के केन्द्रीय स्तर पर सगठन मे पीछले दिनो हुये बदलाव मे सचिन पायलट को दूर रखकर अशोक गहलोत को बडी सफलता मिलना माना जा रहा है। अब मुख्यमंत्री राजस्थान मे होने वाली राजनीतिक नियुक्तियों मे पायलट समर्थकों को पूरी तरह किनारे लगाते हुये अपने खास लोगो का मनोनयन करके करने जा रहे है। मुख्यमंत्री स्तर पर चयनित नामो पर हां कहना ही वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष के पास केवल मात्र विकल्प माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर यह है कि मुख्यमंत्री गहलोत अपना बचा कार्यकाल भी जनता की भावनाओं की परवाह किये वगैर केवल मात्र विधायकों को खूश रखने के वो सब काम करेगे जो जरुरी है। साथ ही वो अब पार्टी की मजबूती के बजाय सचिन पायलट को निचले पायदान पर धकेलने के प्रयास को तेजी देगे। फिर भी देखते है कि गहलोत-पायलट मे तू ढाल ढाल मै पात पात की जंग मे कोन कितना एक दुसरे को कमजोर कर पाते है।

  • प्रभारी महामंत्री अजय माकन के राजस्थान के फीडबैक कार्यक्रम मे पीसीसी सदस्य शरीफ की आवाज से कांग्रेस हलके मे हड़कंप।

    ।अशफाक कायमखानी।
    जयपुर।राजस्थान के नव मनोनीत प्रभारी कांग्रेस के राष्ट्रीय महामंत्री अजय माकन द्वारा प्रदेश के अलग अलग सम्भाग के फीडबैक कार्यक्रम के तहत 10-सितंबर को जयपुर सम्भाग के जिलेवार फीडबैक लेने के सिलसिले मे सीकर जिले के नेताओं व वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिये जाते समय पीसीसी सदस्य मोहम्मद शरीफ द्वारा मुस्लिम समुदाय के सम्बन्धित सवाल खड़े करने के साथ माकन को दिये गये पार्टी हित मे उनके सुझावों के बाद वायरल उनके वीडियो से राजस्थान की कांग्रेस राजनीति मे हड़कंप मचा हुवा है।

    कांग्रेस कार्यकर्ता मोहम्मद शरीफ ने प्रभारी महामंत्री अजय माकन, अचानक बने प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा व प्रभारी सचिव एवं अन्य सीनियर नेताओं की मोजूदगी मे कहा कि मुस्लिम समुदाय चुनावो के समय बडी तादाद मे कांग्रेस के पक्ष मे मतदान करके कांग्रेस सरकार के गठन मे अहम किरदार अदा करता है। लेकिन सरकार बनने के बाद उन्हे सत्ता मे उचित हिस्सेदारी नही मिलती है। प्रदेश मे कांग्रेस के नो मुस्लिम विधायक होने के बावजूद केवल मात्र एक विधायक शाले मोहम्मद को मंत्री बनाकर उन्हें अल्पसंख्यक मंत्रालय तक सीमित करके रखना ठीक नही। शरीफ द्वारा मुस्लिम विधायकों मे से दो केबिनेट व दो राज्य मंत्री बनाने की मांग करते हुये उन्हें मेन स्टीम वाले विभागों का प्रभार देने की मांग कर डालने के बाद एक तरह से उस समय हाल मे सन्नाटा पसर गया।

    मोहम्मद शरीफ ने अपनी बात माकन को सम्बोधित करते हुये जारी रखते हुये कहा कि जब वो जनता मे जाते है तो मुस्लिम समुदाय के लोग उनसे सवाल करते है कि कांग्रेस सरकार राजनीतिक नियुक्तिया करते समय मुस्लिम को उनके सम्बन्धित बोर्ड-निगम तक ही महदूद क्यों रखती है। जबकि मुस्लिम समुदाय के नेताओं व कार्यकर्ताओं का मनोनयन भी मेन स्टीम वाले बोर्ड-निगम व संवेदानिक पदों पर भी मनोनयन होना चाहिए। इसके साथ ही जिला परिषद व पंचायत समिति निदेशक एवं प्रधान व जिला प्रमुख की टिकट देने मे मुस्लिम समुदाय के लिये बरती जा रही कंजूसी के बजाय उनको उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग कर डाली।

    शरीफ ने कांग्रेस संगठन मे प्रतिनिधित्व पर बोलते हुये मांग कर डाली की प्रदेश कांग्रेस कमेटी से लेकर ब्लॉक स्तर तक मुस्लिम समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए ताकी समुदाय को लगे की उनको भी भागीदार माना जा रहा है। उन्होंने सत्ता व संगठन मे मुस्लिम समुदाय को प्रयाप्त हिस्सेदारी देनी तक की वकालत तक कर डाली। सितंबर माह की शूरुआत मे तृतीय भाषा के अध्यापक पद को समाप्त करने के लिये जारी आदेश के मुद्दे को शरीफ ने माकश के सामने उठाकर उस आदेश से कांग्रेस को नुकसान होने की सम्भावना की तरफ इशारा किया तो गोविन्द डोटासरा तूरंत उस पर सफाई देते नजर आये।

    कुल मिलाकर यह है कि कांग्रेस के खूले मंच पर सीनियर नेताओं के सामने खूलकर मुस्लिम नेताओं द्वारा समुदाय के हक व राजनीतिक हिस्सेदारी की मांग रखने का सिलसिला कांग्रेस पार्टी मे कतई नही रहा है। लेकिन हिम्मत करके जिस तरह से शरीफ ने कांग्रेस नेताओं के सामने अपनी जायज मांग रखी है। उन मांगो के वीडियो का सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने से कांग्रेस मे हड़कंप मचा हुवा है कि उक्त तरह से मुस्लिम नेता पार्टी मंच पर बात रखने लगे तो परिपाटी मे बदलाव आ सकता है। देखते है कि उक्त आवाज उठाने के बाद कांग्रेस राजनीति मे शरीफ को किनारे लगाया जाता है।

  • लाईफ इन्श्योरेंस पॉलिसी के नाम पर करोड़ो की ठगी करने वाले गिरोह के मास्टर माइंड समेत 6 आरोपी गिरफ्तार

    राजसमन्द के व्यक्ति से 85 लाख व भीलवाड़ा के व्यक्ति से ठगे करीब 1 करोड़

    अशफाक कायमखानी।

    राजसमन्द 07 सितम्बर। इन्श्योरेंस पॉलिसी कराने व एजेंट बन लोगों की पॉलिसी करने पर मोटा कमीशन व अन्य लुभावने ऑफर देकर लोगों से करोड़ों की ठगी करने वाले मास्टर माइण्ड समेत गिरोह के 6 ठगों को थाना राजनगर पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। जिनसे इस तरह की धोखाधडी और कितने लोगो के साथ की गई,के बारे मे पुछताछ जारी है।
    एसपी राजसमन्द भुवन भूषण यादव ने बताया कि गिरफ्तार मोहम्मद जावेद पुत्र मोहम्मद मुबीन (31), रवि कुमार पुत्र मुन्ना शाह (32), राहुल गर्ग पुत्र निरंजन प्रसाद (33), गौरव बंसल पुत्र राम प्रताप (31), संजय चौधरी पुत्र केहर सिंह चौधरी (31) तथा सोनू बघेल पुत्र भगवान सिंह, दिल्ली के विभिन्न इलाकों के रहने वाले है। गिरोह का मास्टर माईण्ड जावेद है जो अपने साथियो के साथ मिलकर फर्जी सिम कार्ड से अलग-अलग व्यक्ति बनकर लोगो का कॉल करते है। उन्हे विभिन्न पॉलिसियो के लुभावने प्रलोभन देकर उनसे अलग- अलग बैक खातो में पैसे ट्रान्सफर करवा लेते है। सोनू खाता अरेन्ज करता था, जिसका उसे 7 प्रतिशन कमीशन मिलता था। ठगी की रकम पांचों के बैंक खातों में होती हुई अंत मे जावेद के पास जाती। जावेद सबका कमीशन सोनू के मार्फत देता।

    एसपी यादव ने बताया कि 31 अगस्त को थाना राजनगर निवासी नरेन्द्र प्रकाश जैन ने उनके सम्मुख एक रिपोर्ट पेश की जिसके अनुसार इन्श्योरेंस पॉलिसी कराने व एजेंट बन लोगों की पॉलिसी करने पर विभिन्न प्रकार के लुभावने ऑफर देकर उससे 2017 से अब तक 85 लाख रूपये की ठगी की गई है। इस पर थाना राजनगर पर मुकदमा दर्ज कर एएसपी राजेश गुप्ता के निर्देशन, सीओ गोपाल सिह भाटी के सुपरविजन में प्रशिक्षु आरपीएस नोपा राम व थानाधिकारी प्रवीण टांक के नेतृत्व में टीमे गठित कर टीमे दिल्ली रवाना की गई। गठित टीम छहों ठगों को दिल्ली से डिटेन कर राजनगर थाने लेकर आई। प्रारम्भिक पूछताछ में राजनगर के केस के अलावा भीलवाड़ा निवासी मोहन लाल पाटीदार के साथ करीब 1 करोड रूपये की धोखाधडी की जानकारी मिली है जिसका प्रकरण साईबर थाना जयपुर में भी दर्ज है।

  • अचानक रक्त दान स्थल बदलने जाने के बावजूद सचिन पायलट के जन्मदिन पर फतेहपुर मे 250 से अधिक यूनिट रक्तदान।

    अशफाक कायमखानी।
    फतेहपुर (सीकर)।
    राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के तेयालिसवे जन्मदिन पर राजस्थान भर के अतिरिक्त लगते प्रदेशो मे जगह जगह उनके राजनीतिक समर्थकों व उनके चाहने वालो ने कोराना काल मे रक्त की कमी को भांपकर जगह जगह रक्दान शिविर लगाकर रक्त दान करने के सिलसिले मे सीकर जिले के फतेहपुर कस्बे मे पहले से तय रक्त दान स्थल सरकारी धानुका अस्पताल प्रशासन द्वारा उक्त स्थल उपलब्ध करवाने को लेकर पहली रात अचानक नो बजे मना करने के बावजूद पायलट के नजदीक माने जाने मोहम्मद शरीफ ने अपने निवास स्थान पर आज पुख्ता इंतेजाम करके रक्तदान शिविर लगाकर उसमे 250 से अधिक यूनिट रक्तदान करवाने के बाद क्षेत्र मे अनेक तरह की राजनीतिक चर्चाओं चलने लगी है।

    उक्त रक्त दान शिविर संयोजक मोहम्मद शरीफ ने बताया कि खासतौर पर क्षेत्र के युवाओं मे सचिन पायलट के जन्मदिन पर रक्त दान करने को लेकर काफी उत्साह था लेकिन अचानक स्थल बदले जाने पर आई अड़चनो को पार करके भी शिविर में 250 से अधिक यूनिट रक्त एकत्र किया गया। काफी अन्य ओर लोग रक्त दान करना चाहते थे पर वो स्थल बदलाव के कारण बने हालात के कारण कर नही पाये।

    इस रक्त दान शिविर के अवसर पर हाजी हुसैन खाँ, यूथ कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश भाकर, आसिफ जलालसर, लियाकत खाँ फोरेस्टर, आरीफ खाँ सरपंच, एडवोकेट नयूम हुसैन, मुबारिक खाँ गारिन्डा, रफीक खाँ सामदखानी, मुबारिक अली जाजोद, अय्यूब खाँ बलोदी, असलम खाँ, गोविन्द ढाका, नरेन्द्र झुरीया, पार्षद सुरेश चिरानिया सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। शिविर में गेटवेल ब्लड बैंक सीकर की टीम ने सेवाएं दी।

    एन वक्त पर शिविर का स्थान बदला राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दिया।

    शिविर संयोजक मोहम्मद शरीफ के अनुसार स्थानीय राजनैतिक दबाव के चलते प्रशासन ने एन वक्त पर रात्री नो बजे पहले से मिली इजाजत अनुसार धानुका अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में तय रक्त दान शिविर का आयोजन करने से मना कर दिया। शरीर के मुताबिक रात्रि नौ बजे अस्पताल प्रभारी एसएन सबल ने कहा कि ट्रॉमा सेंटर में शिविर का आयोजन नहीं हो सकता। कारण पूछने पर बताया कि हम मजबूर है हमारी नोकरी का सवाल है। युवाओं की काफी समझाइस के बाद भी बात नहीं बनी, सूचना पर शहर कोतवाल उदयसिंह यादव को हस्तक्षेप करना पड़ा। एन वक्त पर शिविर को मोहम्मद शरीफ को अपने निवास पर शिफ्ट करना पड़ा। शिविर में सैनिटाइजर ओर मास्क वितरण भी किया गया तथा कोरोना गाइड लाइन का पूरा खयाल रखा गया।

  • शहीद को राजकीय सम्मान से दी अंतिम विदाई,हर आंख नम, फिर भी देश सेवा का दिखा जज्बा

    झुंझुनूं।जिले का एक ओर लाडला शनिवार को देश सेवा के लिए अपना इतिहास रच गया। सैनिकों और शहीदों के इस जिले की वीर गाथा आज देश में किसी से छिपी हुई नहीं है। जब देश सेवा की बात आती है तो झुंझुनू जिले का नाम बडे फर्क और सम्मान से लिया जाता है और यह संभव होता है यहां के जाबाज लाडलों की बदौलत। ऐसा ही इतिहास को दोहराता हुआ जिले का एक ओर बेटा शनिवार को अंतिम विदाई ले गया।शनिवार को जिले के उदयपुरवाटी तहसील के हुक्मपुरा गांव के लाडले नायब सुबेदार शहीद समशेर अली खान को सुपुर्द ए खाक किया गया। जैसे ही शहीद का प्रार्थिव देह गुढागौडजी कस्बें पंहुचा वहां गगनभेदी नारों के बीच लोगों ने नम आखों से अपने लाडले के अंतिम दर्शन किये।

    यहां से युवाओं ने तिरंगा यात्रा निकाल कर अपने लाडले को सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव तक लेकर गयें। इस दौरान देश भक्ति से ओत-प्रोत नारों से माहौल्ल देशभक्तिनुमा बन चुका था। जैसे ही बेटे का शव घर के आंगन पंहुचा वैसे ही वहा पर परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल हो चुका था, वहां खडे हर व्यक्ति की आंख नम थी, परन्तु ऐसे दुख के माहौल्ल में भी देश सेवा के लिए लगाए जा रहे नारों से यह साफ नजर आ रहा था कि दुख की घडी में भी यहां के लोग देश सेवा के जज्बें को हमेशा सजोकर रखते है।

    सामाजिक रिवाजों के बाद शहीद की अंतिम विदाई की गई। यहां पर शहीद के पिता को तिरंगा भेट किया गया तथा सेना व पुलिस की टूकडी की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। शहीद का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनकी प्रार्थिव देह पर वहां उपस्थित लोगों ने पुष्पचक्र अर्पित किये। *यह रहे उपस्थित*: शहीद को अंतिम विदाई देने वालों में जिले के सांसद नरेन्द्र कुमार, जिला कलेक्टर उमर दीन खान, पुलिस अधीक्षक जगदीश चन्द्र, विधायक राजेन्द्र गुढा,एसडीएम उदयपुरवाटी,फतेहपुर विधायक, सीकर नगर परिषद सभापति, सैनिक कल्याण अधिकारी कमाण्डर परवेज अहमद, नवलगढ डीवाईएसपी, करणी सेना शेखावाटी प्रभारी गोविंदसिंह सुलताना,जिलाध्यक्ष गिरवरसिंह तंवर सहित बडी संख्या में जनप्रतिनिधि,गणमान्य नागरिक एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे। *यहां हुऐ शहीद*:42 वर्षीय समशेर अली वर्तमान में अरूणाचल प्रदेश के टंेगा में 24 ग्रेनेडियर यूनिट में तैनात थे। वे 9 अप्रेल 1997 को जबलपुर में सेना में भर्ती हुए थे।वे भारत-चीन सीमा पर पेट्रोलिंग के दौरान शहीद हुए। वे उनकी प्रार्थिव देह शनिवार को उनके पैतृक गांव पंहुची,जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनको सुपुर्द ए खाक किया गया। *यह है परिवार* परिवार में शहीद के पिता सलीम अली,मां नथी बानो, पत्नी सलमा बानो,दो बेटे एक 16 वर्षीय आलम शेर व दूसरा 12 वर्षीय गुलशेर तथा आठ साल की बेटी शाहीन है,तीनों बच्चे अभी पढाई कर रहे है। *चार पीढी से कर रहे है देश सेवा* : समशेर अली अपने तीन भाईयों में सबसे बडे थे। उनसे छोटा भाई जंगशेर अली भी सेना में सेवारत है। शहीद के परिवार की चार पीढियों सहित कुल 17 जने देश सेवा में है। इनमें से तीन रिटायर्ड हो चुके है। समशेर अली के पिता सलीम अली भी सेना में नायब सुबेदार के पद से रिटायर्ड है।सलीम के पिता फैज मोहम्मद भी फौज में सेवा दे चुके है व उनके पिता बागी खां भी देश सेवा में रहे।

  • राजस्थान की गहलोत सरकार का अल्पसंख्यक विरोधी चेहरा एक दफा फिर बेनकाब हुवा।

    मुख्यमंत्री गहलोत व शिक्षा मंत्री डोटासरा के प्रति 2-सितम्बर 2020 के आदेश से अल्पसंख्यकों मे भारी आक्रोश।

    अशफाक कायमखानी।
    जयपुर।:राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व मे जब जब कांग्रेस सरकार बनी है तब तब अल्पसंख्यकों को उदासीन व उनके हको पर चोट पहुंचाने के अलावा उनके सम्बंधित सरकारी इदारों को पंगू बनाने के लिये लगातार एक के बाद एक प्रयास होते रहे है। अब जाकर मुख्यमंत्री गहलोत के साथ शिक्षा मंत्री गोविद सिंह डोटासरा ने भी अल्पसंख्यक विरोधी विचारधारा का खुला प्रदर्शन करते हुये उनके तहत आने वाले शिक्षा विभाग के निदेशक सौरभ स्वामी ने 2 सितंबर 2020 को एक आदेश जारी कर स्कूली शिक्षा मे इच्छुक स्टुडेंट्स के लिये तृतीय भाषा उर्दू, सिंधी, व पंजाबी भाषा के सरकारी स्कूलो मे पढने का रास्ता बंद कर दिया है।

    राजस्थान मे जारी नई शिक्षा नीती मे सरकार द्वारा किये जाने वाले बडे बडे दावो के विपरीत सरकार द्वारा जारी आदेश अनुसार स्टाफिंग पैटर्न 28 मई 2019 के प्रावधान अनुसार प्रत्येक राउप्रावि मे एक ही तृतीय भाषा का संचालन किया जा सकता है। इसमे तृतीय भाषा के किसी एक ही शिक्षक पद का प्रावधान है। इसी तरह साल 2004 के नियम मुताबिक़ प्रारंभिक कक्षाओं (6-8 कक्षाओं मे) किसी भी एक कक्षा मे दस विधार्थी होने पर तृतीय भाषा (उर्दू, सिंधी, पंजाबी) के शिक्षक का पद जिला शिक्षा अधिकारी स्वीकृत कर सकते थे। जिसके तहत उर्दू, पंजाबी व सिंधी भाषा के शिक्षकों के पद स्वीकृत होते थे। जो अब 2-सितम्बर 2020 के नये आदेश मुताबिक उक्त तरह के सभी पद समाप्त हो जायेगे। जिसकी शुरुआत झालावाड़ जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश से हो चुकी है।

    राजस्थान मे संस्कृत विषय को मेनस्ट्रीम (मुख्यधारा) का विषय माना जाता है। जिसके शिक्षक तो विधालय स्वीकृति के साथ ही अन्य विषयो के शिक्षक पदो के साथ स्वीकृत हो जाते है। जबकि तृतीय भाषा के तौर पर उर्दू, सिंधी व पंजाबी भाषा के शिक्षक 2004 के आदेश अनुसार स्वीकृत होते रहे है। अब तृतीय भाषा उर्दू, सिंधी व पंजाबी के शिक्षक पद उसी विधालय मे ही स्वीकृत हो पायेगे जहां शत प्रतिशत स्टुडेंट उसी भाषा को पढने वाले उस विधालय मे होगे।
    राजस्थान की कांग्रेस सरकार द्वारा तृतीय भाषाओ को सरकारी स्कूलो से समाप्त करने के लिये जारी 2-सितम्बर 2020 के आदेश के खिलाफ अल्पसंख्यक समुदाय मे गहलोत व डोटासरा के प्रति भारी आक्रोश व्याप्त होना देखा जा रहा है। उर्दू शिक्षक संघ राजस्थान के अध्यक्ष आमीन कायमखानी सहित अनेक सामाजिक संगठनो ने उक्त आदेश के खिलाफ मजबूत आंदोलन छेड़ने का ऐहलान कर दिया है। इसके अतिरिक्त बसपा से कांग्रेस मे आये नगर विधायक वाजिब अली भी मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री से उक्त मामले मे तूरंत सज्ञान लेकर मामले का हल निकालने की अपील की है।
    कुल मिलाकर यह है कि मुख्यमंत्री गहलोत व शिक्षा मंत्री के अलावा अचानक बने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद पर काबिज गोविंद डोटासरा को उक्त मामले पर तूरंत संज्ञान लेकर अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे अन्याय पर रोक लगाने की तरफ बढना चाहिए। वर्ना राजस्थान भर मे उक्त आदेश को लेकर पनप रहे भारी आक्रोश को ठंडा करना मुश्किल हो सकता है।

  • कोरोना पोजिटिव रोगी के लिए पानीपत से जयपुर आकर किया प्लाज्मा डोनेट।

    पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया की पहल पर हुई प्लाज्मा की व्यवस्था।

    जिले के फतेहपुर तहसील के गावं लावंडा के सुभाष प्रजापत ने पेश की मानवता की मिसाल
    सीकर 2 सितम्बर-

    सीकर जिले के फतेहपुर तहसील के ग्राम लावंडा निवासी सुभाष प्रजापत ने दुर्लभजी हॉस्पिटल जयपुर में भर्ती सीकर निवासी अर्जुन घासोलिया को प्लाज्मा डोनेट कर मानवता की बड़ी मिसाल पेश की है |

    सुधीर महरिया स्मृति संस्थान के निदेशक एवं नेहरू युवा संस्थान सचिव बी एल मील ने बताया कि सीकर निवासी अर्जुन घासोलिया कोरोना पॉजिटिव होने के कारण दुर्लभजी हॉस्पिटल जयपुर में भर्ती थे | रोगी की स्थिति बिगड़ने पर चिकित्सकों ने प्लाज्मा चढ़ाने की सलाह दी | रोगी के परिजनों द्वारा जब सुधीर महरिया संस्थान नेहरू युवा संस्थान से संपर्क कर एबी पॉजिटिव प्लाज्मा डोनर भेजने को कहा |

    ज्ञात रहे दोनों संस्थाएं संयुक्त रूप से पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया पूर्व विधायक नंदकिशोर महरिया के सहयोग एवं निर्देशन में कोरोना पॉजिटिव से नेगेटिव हुए लोगों से संपर्क कर प्लाज्मा डोनेट करने के लिए मोटिवेट करती है |संस्थान सचिव द्वारा मोटिवेटेड निवासी सुभाष प्रजापत से बात करने पर पता चला कि वह अपने गांव से पानीपत नौकरी करने चला गया था | रोगी के गंभीर होने पर प्लाज्मा की ज़रूरत हेतु मोटिवेट करने पर तुरंत पानीपत से कार किराए पर लेकर लगभग 6 घंटे के सफर के बाद 400 कि.मी.से ज्यादा का सफर कर दुर्लभजी हॉस्पिटल जयपुर जाकर आवश्यक जांच के बाद तुरंत प्लाज्मा डोनेट कर मानवता की बड़ी मिसाल पेश की है | श्री मिल ने 18 से 55 साल के कोरोना पॉजिटिव से नेगेटिव हुए व्यक्ति जिनका वजन 60 किलो से ज्यादा है से अपील की है कि वे कोरोना के गंभीर रोगी जिनको प्लाज्मा की जरूरत है को प्लाज्मा डोनेट करने के काम में आगे आए |

  • मुख्यमंत्री अशोक गहलोत धीरे धीरे अपने ही तत्तकालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को राजनीतिक तौर पर कमजोर करने मे सफल होते जा रहे है!

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।

    करीब पोने दो साल पहले जब राजस्थान सरकार का गठन हुवा था तब से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजस्थान कांग्रेस मे अपने मुकबील नेता सचिन पायलेट को कमजोर करके अपनी राह से हटाने के लिये मौके की तलाश मे लगातार प्रयत्न कर रहे थे। मुख्यमंत्री गहलोत अपनी आदत के अनुसार अपनी सरकार बीना किसी दखल के अपने अनुसार चलाकर अपने लोगो को राजनीतिक व संवेधानिक पदो पर नियुक्ति देने के अलावा मंत्रीमण्डल विस्तार व बदलाव मे अपने लोगो को तरजीह देना चाहते थे। लेकिन तत्तकालीन समय के प्रदेश अध्यक्ष पायलट के होने से उनको काफी दिक्कतों का सामना होने के चलते उनकी लाख कोशिशो के चलते यह सबकुछ तब तक सम्भव नही हो पा रहा था, जब तक पायलट प्रदेश अध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री पद पर आसीन थे।
    सरकार के चलने के एक अर्शे बाद मुख्यमंत्री गहलोत अपना मंसूबा पूरा करने की कोशिश पहले राज्यसभा चुनाव मे कुछ विधायको के बगावती होने की सम्भावना का काल्पनिक माहोल बनाकर विधायको व मंत्रियों की होटल मे बाड़ेबंदी करके की। पर राज्यसभा चुनाव मे कांग्रेस उम्मीदवारों के 123 मत आने से वो सचिन पायलट को हाईकमान की नजर मे सदिग्ध बना नही पाये। पर जनता मे एक चर्चा जरूर चल पड़ी थी की क्या वास्तव मे कुछ कांग्रेस विधायक भाजपा के सम्पर्क मे थे या नही। यानि शंका का वातावरण जरुर उस समय बन गया था।

    मुख्यमंत्री गहलोत सरकार गठन होने के बाद से लगातार पायलट को राजनीतिक तौर पर ठिकाने लगाने मे लगातार मोके की तलाश मे लगे रहे। अचानक जब मुख्यमंत्री को पता लगा कि पायलट के नेतृत्व मे कुछ कांग्रेस विधायक दिल्ली मे उनके नेतृत्व के खिलाफ हाईकमान से मिलने गये हुये है तो उनको भाजपा के करीब व भाजपा के इशारे पर काम करता दिखाने के लिये ऐसीबी व एसओजी मे दो शिकायत देकर विभिन्न धाराओं सहित 124-A मे रपट दर्ज करवा कर दिल्ली गये विधायको को जयपुर आते ही गिरफ्तार होने का उनके मनो मे डर का माहोल पैदा करने मे कामयाब हो गये। मुख्यमंत्री के ओएसडी के नम्बर से पत्रकारों के पास एक ओडीयो क्लिप भी सरकुलेटिंग करने के बाद आम जनता मे सीधा संदेश जाने लगा कि सचिन पायलट भाजपा के साथ मिलकर सरकार गिराना चाहते है। बने इस तरह के वातावरण से सचिन पायलट को राजनीतिक तोर पर नुकसान होने के साथ साथ वो सदिग्ध भी बन गये तो मुख्यमंत्री गहलोत ने उस वातावरण का फायदा उठाते हुये हाईकमान के कुछ नेताओं को विश्वास मे लेकर सचिन पायलट को प्रदेश अध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री पद से हटाने मे कामयाब हो गये। पायलट व उनके दो समर्थक मंत्रियों की बरखास्तगी से एक दफा तो पायलट धरातल पर आ गये यानी गहलोत उन्हें कमजोर करने मे कामयाब हो गये। गहलोत ने पायलट को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर व सीनियर जाट नेताओं को दरकिनार करके कमजोर से कमजोर व जूनियर नेता गोविंद डोटासरा को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाकर एक तीर से अनेक शिकार एक साथ कर डाले।

    राजनीतिक हलको से मिल रही खबरो के मुताबिक राजस्थान कांग्रेस मे आये उभाल को लेकर हाईकमान द्वारा बनाई तीन सदस्यीय कमेटी को अपने रसूको के आधार से काफी हदतक मुख्यमंत्री ने इस बात के लिये तैयार कर लिया है कि सचिन पायलट को राष्ट्रीय संगठन मे पद देकर एक तरह से उसे राजस्थान की राजनीति से दूर कर पावरलेस कर दिया जाये। ताकि पायलट की लोबी प्रदेश मे फिर से खड़ी हो ना पाये। एक एक महीने तक बाड़ेबंदी मे साथ रहे विधायको व नेताओं से मिलने नव मनोनीत राष्ट्रीय महामंत्री अजय माकन का तीस अगस्त से पांच दिन प्रदेश मे आकर मिलने का प्रोग्राम बना है। पांच दिन कांग्रेस विधायको व नेताओं से माकन मिलकर एक रिपोर्ट तैयार करके फिर उसको ठण्डे बस्ते मे रख दिया जायेगा।

    कुल मिलाकर यह है कि पीछले दो-तीन महीने से राजस्थान कांग्रेस मे मुख्यमंत्री गहलोत व तत्तकालीन उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट धड़े के मध्य चले शह व मात के खेल मे मुख्यमंत्री ने सचिन पायलट की प्रदेशाध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री पद से छुट्टी करवा कर उन पर एक तरह से तरजीह हासिल कर ली है। इसके बाद अजय माकन को प्रभारी महासचिव बनवाने व तीन सदस्यीय कमेटी के गठन मे भी गहलोत का पलड़ा भारी होना माना जा रहा है। हां यह सच है कि पायलट की वापसी, प्रभारी महांमत्री मे बदलाव व तीन सदस्यीय कमेटी के गठन सहित बहुत कुछ होने के बावजूद गहलोत व पायलट मे आपसी टकराव आगे भी जारी रहेगा। एवं गहलोत सरकार पर तलवार बराबर लटकती रहेगी ओर मोका मिलते ही गहलोत सरकार गिरा दी जायेगी। वही अब सरकार मे गहलोत समर्थक विधायको की बल्ले बल्ले होकर वो अपने विधानसभा क्षेत्र के सर्वसर्वा रहेगे वही पायलट समर्थक विधायको की सरकार के हिसाब से चवनी घिसी नजर आयेगी।

  • राजस्थान कांग्रेस विवाद को लेकर बनी तीन सदस्यीय हाईपावर कमेटी के जयपुर आने को लेकर गहलोत भारी पड़ रहे है।

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    ढेड महीने पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व तत्तकालीन उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट मे मध्य खींची राजनीतिक तलवारों के बाद चले घटनाक्रमों के अंतिम पड़ाव पर सचिन पायलट की कांग्रेस मे वापसी होने के समय तय शर्तों मे से एक शर्त के अनुसार तीन सदस्यीय हाईपावर कमेटी के गठन होने के बाद जयपुर आकर मुद्दों की सुनवाई करने व कमेटी के जयपुर ना आकर दिल्ली मे ही सुनवाई करने को लेकर की जारी पायलट व गहलोत खेमे की कोशिश मे मुख्यमंत्री गहलोत खेमा भारी पड़ता नजर आ रहा है।

    हालांकि पायलट की वापसी के समय बनी सहमति को लेकर कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राजस्थान की कांग्रेस राजनीति मे घटे घटनाक्रमों व सरकार के कामकाज को लेकर अपने राजनीतिक सलाहकार व कांग्रेस के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अहमद पटेल, संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल व प्रभारी महामंत्री अजय माकन को मिलाकर तीन सदस्यीय हाईपावर कमेटी का गठन किया है। उक्त कमेटी के गठन होने के बाद सचिन पायलट की कोशिश के अनुसार उक्त कमेटी का जयपुर आकर आंकलन करने की भनक ज्योहीं मुख्यमंत्री गहलोत को लगी तो उन्होंने कमेटी का जयपुर आकर आंकलन करने की बजाय दिल्ली मे ही राजस्थान के नेताओं व विधायको को बूलाकर आंकलन करने का दवाब बनाया जिसमे अभी तक गहलोत भारी पड़ते नजर आ रहे है।

    राजस्थान को लेकर बनी तीन सदस्यीय हाईपावर कमेटी के जयपुर आकर सरकार के कामकाज व धड़ेबंदी का आंकलन करने के मुख्यमंत्री गहलोत सख्त खिलाफ बताते है। वो चाहते है कि वो कमेटी दिल्ली रहकर केवल पायलट समर्थक विधायको से ही मिलकर आंकलन करे। कमेटी के जयपुर आने से सरकार की स्थिति पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है उससे बागी हुये विधायको का मनोबल बढ सकता है। जबकि सचिन पायलट उक्त कमेटी का जयपुर आकर सुनवाई करने मे दम लगा रखा है।

    कुल मिलाकर यह है कि पीछले दिनो तीन सदस्यीय कमेटी का जयपुर आकर सूनवाई करने को लेकर घटे घटनाक्रमोंक्षके बाद लगता है कि मुख्यमंत्री गहलोत की कोशिशों का पलड़ा सचिन पायलट की कोशिशों पर भरी पड़ रहा है। कमेटी का जयपुर आकर आंकलन करने की सम्भावना क्षीण होती नजर आ रही है।