Category: बिहार

  • सरकार के द्वारा लाए गए प्रस्ताव ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए पूरे भारत में पहला प्रस्ताव है

    प्रेस विज्ञप्ति*आज बिहार विधानसभा में पारित प्रस्ताव की भूरी भूरी प्रशंसा किन्नर/ट्रांसजेंडर समुदाय करती है माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव का दिल से अभिनंदन करती है*

    सरकार के लाए गए प्रस्ताव का समर्थन विपक्ष के द्वारा मिला कि ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए पूरे भारत में पहला प्रस्ताव है तथा नेशनल पापुलेशन रजिस्टर में ट्रांसजेंडर समुदाय को जेंडर कॉलम में ट्रांसजेंडर शामिल करने का है|

    2011 में अदर ऑप्शन का कॉलम था | माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश तथा भारत सरकार के द्वारा पारित ट्रांसजेंडर बिल के उपरांत बिहार भारत का पहला राज्य है जहां पर नेशनल पापुलेशन रजिस्टर में ट्रांसजेंडर कॉलम जोड़ने की प्रस्ताव पारित विधानसभा से हुई है|
    दोस्तानासफर पूर्व में इसके लिए बिहार सरकार के जनगणना विभाग को पत्र लिख चुका था

    हम माननीय मुख्यमंत्री के हार्दिक अभिनंदन ट्रांसजेंडर समुदाय की तरफ से करती है तथा नेता प्रतिपक्ष का भी अभिवादन करती है कि इस प्रस्ताव के पक्ष में उन्होंने ध्वनि मत से सहयोग दिया
    शुक्रिया धन्यवाद

    रेशमा प्रसाद
    सदस्य, बिहार राज्य किन्नर कल्याण बोर्ड |
    सचिव,दोस्तानासफर,बिहार

  • NRC के खिलाफ एवं पुराने फार्मेट में NPR प्रस्ताव पारित कराने वाला NDA शासित पहला राज्य बना बिहार

    मिल्लत टाइम्स,पटना:बिहार में एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन) लागू नहीं होगा। बजट सत्र के दूसरे दिन विधानसभा में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित कराया गया। वहीं, राज्य में 2010 के फॉर्मेट पर ही एनपीआर (नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर) होगी। इसमें सिर्फ ट्रांसजेंडर का कॉलम जोड़ा जाएगा। एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पारित कराने वाला एनडीए शासित बिहार पहला राज्य है। मंगलवार को विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद ही विपक्ष इस बात को लेकर लगातार हंगामा कर रहा था कि सरकार एनपीआर को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करे। सुशील मोदी के बजट भाषण के बाद विधानसभा अध्यक्ष विजय चौधरी ने एनआरसी लागू नहीं करने संबंधी प्रस्ताव दिया, जिस पर सभी दलों ने सहमति जताई।

    ‘2020 के फॉर्मेट पर एनपीआर होना कुछ लोगों के खिए खतरा’
    इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि 2020 के फॉर्मेट पर एनपीआर होना कुछ लोगों के खिए खतरा है। अगर एनपीआर में कुछ खास जानकारी ली जाती है और भविष्य में कभी एनआरसी होती है तो उन्हें परेशानी होगी। इसलिए 2020 के फॉर्मेट पर एनपीआर नहीं होना चाहिए।

    एनआरसी का कोई तुक नहीं
    नीतीश ने कहा कि एनआरसी की कोई जरूरत नहीं है। इस पर अभी कोई बात नहीं हुई है। खुद देश के प्रधानमंत्री ने कहा है- एनआरसी पर कोई चर्चा नहीं हुई है। जब इस पर कोई फैसला हुआ ही नहीं है तो चिंता क्यों करते हैं। एनआरसी का कोई तुक नहीं है। जहां तक सीएए का मुद्दा है तो यह मामला सुप्रीम कोर्ट के पास है। सबको सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए।

    नीतीश कुमार की घोषणा पर कोई संदेह नहीं: मोदी
    उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा कि बिहार में एनपीआर 2010 के फॉर्मेट पर ही होगा। नीतीश कुमार की घोषणा पर कोई संदेह नहीं है। जब 2010 में कोई दस्तावेज नहीं मांगा गया तो 2020 में भी नहीं मांगा जाएगा। किसी को कोई पेपर दिखाने की जरूरत नहीं है।

  • दरभंगा दौरा पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ब्यान गुमराह करने वाला- नजरे आलम

    प्रेस-विज्ञप्ति/24.02.2020*जनता धोके में नहीं आने वाली, पहले विधानसभा में एनपीआर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित करें- बेदारी कारवां*

    दरभंगा- नीतीश कुमार और उनके चमचे से धोका मत खाइए। नीतीश कुमार के तोते की जान सत्ता में है, सत्ता बचाने के लिए उन्हे अपनी जरूरत के हिसाब से सक्यूलर और कम्यूनल होने में कोई दिक्कत नहीं है। फिलहाल भाजपा से रिश्ता बनाए रखने में सत्ता महफूज लग रहा है इसलिए वो उससे हर हाल में इश्क निभाऐंगे। इन्की किसी बातों पर भरोसा करना बेवकूफों की जन्नत नुमा होगा। यह वही व्यक्ति है जिस व्यक्ति ने विधानसभा में कहा था कि मिट्टी में मिल जाऐंगे लेकिन दोबारा कभी भाजपा से हाथ के साथ नहीं जाऐंगे। उक्त बातें आॅल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवां के अध्यक्ष श्री नजरे आलम ने प्रेस-काॅन्फ्रेंस में कही। श्री आलम ने कहा कि बिहार के मुखिया नीतीश कुमार के कल के दरभंगा दौरा पर उन्होंने जो कुछ कहा उससे कुछ लोग खुशफहमी में मुबतला हो गए है और उन्के मुस्लिम चमचे इसे ऐसे बढ़ा चढ़ा कर पेश कर रहे हैं जैसे सीएए वापस हो गया हो जब्कि मुख्यमंत्री ने सिर्फ इतना कहा है कि एनपीआर पुराने फारमेट पर होना चाहिए,

    यह हरगिज नहीं कहा है कि पुराने फारमेट पे होगा जब्कि इस के लिए नोटिफिकेशन पहले ही जारी हो चुका है इसलिए किसी मुगालते में पड़ने की जरूरत नहीं है यूँ भी उन्हें पता है कि राज्य की बहुसंख्यक आबादी एनपीआर का बाइकाट करेगी। हमारी मांग बरकरार है कि आज से चलने वाले विधानसभा सत्र में इसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास किया जाए। अगर यह हो भी जाता है तब भी सीएए का समर्थन करके उन्होंने जो गुनाह किया है वह माफी के लायक नहीं है। नीतीश कुमार अपने ब्यानात से जनता को गुमराह करने के लिए भी मशहूर हैं और एनपीआर के सिलसिले में यह उनका कोई पहला ब्यान नहीं है जिसे जदयू0 और उसके मफादपरस्त मुस्लिम नेताओं और कुछ मिडिया बढ़ा चढ़ा कर पेश कर रही है, ऐसे ब्यानात से जनता तो गुमराह नहीं होगी, हां ऐसे ब्यानात से राजनीति में अपनी खोई हुई साख बचाने वाले नेताओं के लिए वक्ति तौर पर आॅक्सीजन का काम करता है। नजरे आलम ने कहा कि दरभंगा में यह ब्यान मुख्यमंत्री की मजबूरी थी क्योंकि खुदको मुसलमानों को हमदर्द साबित करने के लिए ही आए थी मुख्यमंत्री। फिर ये के संविधान बचाओ संघर्ष मोर्चा, लालबाग सत्याग्रह कमिटि, दरभंगा ने संविधान प्रेमियों और दरभंगा शहर के अमन पसंद नागरिकों के समर्थन से जिस तरह दरभंगा शहर में नीतीश के दौरा से दो दिन पैदल मार्च निकाला गया और हजारों पुरूष एवं महिलाओं ने दौरा कर जिस तरह से विरोध करने का एलान किया इसके नतीजा में उन्हें ना सिर्फ शहर और ग्रामीण क्षेत्र के अपने दौरा को रद्द करना पड़ा बल्कि मात्र एक जगह पहुँचने के लिए हेलिकाॅप्टर का सहारा लेना पड़ा।

    पहले इनका शहर में कई जगहों पर कार्यक्रम चाए और काफी पीने का तय था। बदकिस्मती की बात यह है कि कुछ गोदी मिडिया भी मुख्यमंत्री के इस ब्यान का गलत प्रचार करके जनता को गुमराह कर रहा है। लेकिन हम इस ब्यान से गुमराह होने वाले नहीं हैं और हम मांग करते हैं कि चल रहे विधानसभा सत्र में सीएए, एनपीआर और एनआरसी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास किया जाए और मुख्यमंत्री विधानसभा में एलान करें के इनपीआर पुराने फारमेट के मुताबिक होगा। हमें इससे कम कुछ भी मंजूर नहीं है। हमारी मांग ये भी है कि जदयू0 ने सीएए का समर्थन जरूर किया है लेकिन अब वह जनता के अंदर पाए जाने वाले गुस्से को देखते हुए केन्द्र सरकार से इसे वापस लेने के लिए प्रधानमंत्री पर दबाव डाले नही ंतो राज्य सरकार के खिलाफ भी आन्दोलन तेज किया जाएगा।

  • CAA और NPR के खिलाफ विधानसभा से प्रस्ताव पारित करे नितीश कुमार, नही तो होगा आन्दोलन तेज़- नजरे आलम

    एनपीआर-सीएए- एनआरसी के खिलाफ आज 37वां दिन भी सत्याग्रह जारी है। इस अवसर पर आज बिहार के मुखिया नीतीश कुमार के दरभंगा आगमन पर लालबाग सत्याग्रह के द्वारा हजारो गुब्बारा उड़ाकर अपना विरोध दर्ज किया। तथा नीतीश कुमार गो बैक, एनपीआर को खारिज करो, नीतीश कुमार होश में आओ, सीएए पर रोक लगाओ नारा के साथ दरभंगा शहर में भारी संख्या में मार्च निकाला गया।

    मार्च का नेतृत्व नजरे आलम, सबा प्रवीण, नाजिया हसन, साहिबा प्रवीण, मोतिउर रहमान, बदरूलहोदा खान, राजा खान, प्रिंस राज, इस्माईल अख्तर, शाहनवाज, अब्दुल्लाह, मो0 बशर, ज़ीशान अख्तर, हीरा नेजामी, मो0 मुन्ना, साजिद कैसर आदी ने किया।

    मार्च में अमानुल्लाह अमन, सोनू मिकरानी, मो0 तमन्ने समेत भारी तादाद में पुरुष एवं महिलाएं शामिल हुईं।

    मार्च के बाद सभा को संबोधित करते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवां के राष्ट्रीय अध्यक्ष नजरे आलम ने कहा कि नीतीश कुमार को शर्म नहीं आती हैं कि वो मुसलमान का वोट लेकर मुसलमान से गद्दारी कर रहे हैं। उनका कोई अल्पसंख्यक योजना जमीन पर लागू नहीं होता है।
    श्री आलम ने कहा कि पूरा देश अभी एनआरसी-एनपीआर- सीएए की आग में झुलसा हुआ है। और नीतीश कुमार वोट की रोटी सेक रहे हैं। पहले नीतीश कुमार विधानसभा से इस काला कानून के खिलाफ प्रस्ताव पारित करें फिर ये वोट की रोटी सेंके, नीतीश कुमार अगर एनपीआर पर अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं करते हैं तो जनता नीतीश कुमार को कुर्सी पर से उतारना भी जनती है। जनता इस बार किसी भी लुभाने वाले योजना के बहकावे में आने वाले नहीं हैं।

    श्री आलम ने कहा कि अगर नीतीश कुमार काला कानून पर रोक नहीं लगाए तो आने वाले समय में जनता उनको सबक सिखाएगी।

  • दरभंगा में नीतीश का एलान,बिहार में नहीं होगा NRC,NPR भी 2010 के पैटर्न पर होगा लागू

    मिल्लत टाइम्स,दरभंगा: देशभर में सीएए, एनआरसी और एनपीआर को लेकर मचे घमासान के बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में एनआरसी लागू नहीं करने का एलान किया है.

    आज दरभंगा में मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्व विद्यालय सेटेलाइट कैंपस चंदन पट्टी हायाघाट में अल्यसंख्यक कल्याण विभाग की योजनाओं का शिलान्यास करने के बाद सभा को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि बिहार में एन पी आर भी 2010 के नियम के अनुसार ही लागू होगा.

    अल्पसंख्यक इलाके में इस विवादित मामले पर एलान कर नीतीश ने साफ संदेश दे दिया है कि वे बिहार में अपने विरोधियों को जबाव देने की तैयारी शुरू कर दी है. नीतीश ने अपने शासन काल में अल्पसंख्यकों के लिये किये जा रहे विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए अल्प संख्यक समुदाय को यह भरोसा दिलाया है वे उनके हितो की रक्षा करने के लिये सदैव तैयार है.

    गौरतलब है कि सोमवार से बिहार विधान मंडल का जहां बजट सत्र शुरू हो रहा है और इस सत्र में विरोधी दलों ने सीएए और एनआरसी के मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की योजना बनाई है वहीं 27 फरवरी को जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार के द्वारा पटना के गांधी मैदान में जनगण मन रैली का आयोजन किया गया है और आज से ही बिहार विधान सभा में विरोधी दल के नेता तेजस्वी यादव ने बेरोजगारी हटाओ रैली की शुरूआत की है. ऐसे में नीतीश का यह एलान विरोधियों की राजनीति पर पानी फेरने की कोशिश है.

  • देश के तिरंगा की रक्षा हम करेंगे,हम डराते नहीं प्यार से समझाते

    देश के तिरंगा की रक्षा हम करेंगे
    हम डराते नहीं प्यार से समझाते हैं

    “खेत में मरते किसान , बार्डर पर मरते जवान और तुम करते हिन्दू मुसलमान”

    कामरेड कन्हैया कुमार, ने किया हज़ारों अररियावासीयों को संबोधित।

    प्रेस विज्ञप्ति: आज अररिया काॅलेज के प्रांगन में सी ए ए , एन आर सी, एन पी आर के खिलाफ NPR-NRC-CAA विरोधी संघर्ष मोर्चा द्वारा आयोजित विशाल प्रतिरोध सभा को संबोधित करते हुए सी पी अाई के नेता और जे एन यू पूर्व अध्यक्ष कन्हैया ने कहा कि हमारी विरासत किसी से डरने की नहीं है और ना ही किसी को डराने की नहीं है। हम मुहब्बत करने वाले लोग हैं। हमारी इस यात्रा का मकसद है अपने संविधान की रक्षा करना। उन्होंने कहा कि ये कानून किसी एक धर्म और संप्रदाय से जुड़ा नहीं है। आज इस देश में जो राजनीति हो रही है वो इंसान से इंसान को बांटने की राजनीति है। जिसमें हमारे राम की छवि को भी बांटने की कोशिश की है। ये राजनीति इसलिए कर रहे है ताकि हम उनके झूठे वादों पर सवाल नहीं कर सकें। आज देश के 16 लाख से ज्यादा लोगों की नौकरी चली गई है। पर ये सरकार इन सवालों पर बात नहीं कर रही है।

    सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस के विधायक शकील अहमद खान ने कहा कि पहले दिन से ही बिहार में चल रही इस यात्रा पर कई बार हमले हुए पर हमारा कांरवा चलता रहा। जन स्वास्थ्य अभियान से जुड़े डाक्टर शकील ने कहा कि जो लोग समझते है कि इस मुल्क की गंगा जमुनी तहजीब को वे मिटा देंगे और इस देश के मुसलमानों को बाहर कर देंगे तो वे इस मुगालते में नहीं रहें । इस देश के मुसलमानों ने तो विभाजन के समय ही ये तय किया कि उनका देश हिंदुस्तान है वे यहां से नहीं जाएंगे। हम इस मिट्टी में जन्में है और इसी मिट्टी में दफन होंगे। एन ए पी एम के कन्वीनर आशीष रंजन ने कहा की ये कानून हमारे देश के नागरिकता पर प्रहार करता है। हमारे संविधान पर प्रहार करता है। उन्होंने कहा कि ये कानून गरीब विरोधी, आदिवासी विरोधी, दलित विरोधी है। उन्होंने कहा कि हम जानते है कि हमारे देश के लोग इस जुल्म के खिलाफ लड़ेंगे और जुल्म की ये रात खत्म होगी।

    जो लोग नफ़रत बांट रहें हैं उसके खिलाफ पूरा देश खड़ा होगा और हम सब अमन के गीत गाएंगे। लेकिन ये भी कहना होगा कि हमें अगर दूसरों का तोगड़िया पसंद नहीं है तो हमें अपने तोगड़िया से भी लड़ना होगा। आज की सभा में सामाजिक कार्यकर्ता दीपक दास, मजदूर नेता महेश कुमार ,सी पी एम के राम विनय ने संबोधित किया। इसके पूर्व सभा का संचालन करते हुए जाहिद और कामायनी स्वामी ने कहा कि ये लड़ाई देश के नागरिकों को न्याय देने की लड़ाई है। ये महिलाओं के हक़ की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि इस झंडे की कुर्बानियां हम सब देते रहे हैं और ये हमारा मुल्क है कोई हमें इससे बाहर नहीं कर सकता। बिहार महिला समाज कि कार्य कारी अध्यक्ष निवेदिता झा ने कहा कि किसी भी कीमत पर इस देश के संविधान पर हमला नहीं सहेंगे। इस मुल्क में बीजेपी और आरएसएस के लोग धर्म के आधार पर विभाजन करना चाहती है पर हम्साब उनकी इस साजिश को नाकाम करेंगे और इस कानून को वापस करना होगा।

    मंच से बोले – जन स्वास्थ्य अभियान के डॉ शकील, कदवा विधायक और जन गण मन यात्री शकील अहमद खान, एनपीआर-NRC-CAA विरोधी संघर्ष मोर्चा की मीडिया प्रभारी और महिला नेत्री निवेदिता झा, , NAPM के राष्ट्रीय कन्वेनर और jjss के आशीष रंजन, हम हैं भारत के दीपक दास, अररिया विधायक अबिदुर रहमान, खेत मज़दूर यूनियन के महेश कुमार, CPM के राम विनय, सामाजिक कार्यकर्ता लड्डू जी। डॉ एस आर झा शामिल थे।

    JJSS सांस्कृतिक टीम के शिवनारायण, डोली, तनमय, चांदनी, क्रिस्चम।

    यात्रा का स्वागत मुज़म्मिल के नारे “हम ज़िंदा हैं” से किया गया।

    तौसीफ, सिबतेन और ज़ाहिद अनवर द्वारा यात्रियों को मोमेंटो भेंट किये गए जिसमें भारत का संविधान शामिल था।

    कार्यक्रम का संचालन ज़ाहिद अनवर और कामायनी स्वामी ने किया।

  • शिक्षकों की हालत के लिए वर्तमान एमएलसी जिम्मेवार:केदार पांडे पूर्व एमएलसी

    शिक्षकों के वर्तमान हालात के लिए पूर्व एमएलसी केदार पांडे भी समान रूप से दोषी हैं. अगर वे सक्रिय रहे होते तो शिक्षा और शिक्षकों का यह हाल कभी नहीं हुआ रहता. यह बातें पूर्व एमएलसी चंद्रमा सिंह ने मढौरा में आयोजित प्रेस वार्ता में कही.उन्होंने कहा कि बिहार में 3.20 लाख प्राथमिक और मध्य विद्यालय के नियोजित शिक्षक हड़ताल पर है और 24 अप्रैल से 33 हजार हाई स्कूल के शिक्षक भी हड़ताल पर जाने की घोषणा कर चुके है. विद्यालय में तालाबंदी से शिक्षा व्यवस्था भी बेपटरी हो चुकी है. पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा ने विकास का सबसे बड़ा आधार शिक्षा को माना था. उन्होंने समाज के विकास के लिए शिक्षकों को सम्मान दिया था. अपने कार्यालय में सैकड़ों स्कूल-कॉलेज को अंडरटेक कर शिक्षकों को वेतनमान दिया.
    वर्तमान में हजारों स्कूल कॉलेज के रहते सरकार मध्य विद्यालय को अपग्रेड कर हाई स्कूल बना रही है. शिक्षकों की उपेक्षा कर समाज की बेहतरी बेमानी है. सरकार व्यवस्था को पटरी पर लाने का प्रयास करें.

  • हड़ताली शिक्षकों पर हुई बड़ी कार्रवाई हुए बर्खास्त तो उग्र हुए शिक्षकों ने दे दी बड़ी धमकी

    हड़ताली शिक्षकों पर हुई बड़ी कार्रवाई हुए बर्खास्त तो उग्र हुए शिक्षकों ने दे दी बड़ी धमकी।

    इस वक्त की सबसे बड़ी खबर आ रही हैं ,बतादे बिहार सरकार ने हड़ताली शिक्षकों पर बड़ी कार्रवाई कर दी है. दो शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया है. इसके बाद शिक्षकों ने भी बिहार सरकार को उग्र आंदोलन की धमकी दी है. बिहार सरकार ने हड़ताली शिक्षकों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए दो हड़ताली शिक्षकों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है.बिहार सरकार ने हड़ताली शिक्षकों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए जिन दो हड़ताली शिक्षकों को सेवा से बर्खास्त किया है. वे दोनों शिक्षक पटना सिटी स्थित स्कूल के हैं ,बतादे पटना सिटी स्थित नुरूद्दीनगंज और चकारम मध्य विद्यालय के हड़ताली शिक्षकों पर बिहार सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शिक्षकों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है.

    बतादे नुरूद्दीनगंज और चकारम मध्य विद्यालय के शिक्षकों पर कार्रवाई करते हुए शिक्षक मनोज कुमार और मुस्तफा आजाद को सेवा से शिक्षा विभाग ने बर्खास्त कर दिया है. वही बतादे की दोनों शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है. वही शिक्षकों ने भी इस मामले को लेकर बिहार सरकार को धमकी दे दी हैं.।बतादे नियोजित शिक्षकों पर हुई कार्रवाई पर शिक्षक संघ शिक्षक संघर्ष समिति के नेता मार्कण्डेय पाठक ने कहा हैं की सरकार बर्खास्तगी वापस ले वर्ना और उग्र आंदोलन होगा।

  • कन्हैया की जन मन गण यात्रा का निशाना – मोदी या तेजस्वी ?

    बिहार में इन दिनों कन्हैया कुमार की जण गण मन यात्रा चल रही है। कन्हैया की इस यात्रा का फलितार्थ उसके चाहने वाले बता रहे हैं की मोदी सरकार के द्वारा लाये गए नागरिकता संशोधन कानून का विरोध और साथ में बेरोजगारी , अशिक्षा और केंद्र सरकार की विभिन्न मोर्चों पर नाकामी को लोगों के बीच सामने लाना है। लेकिन वास्तविकता इतनी मात्र है ? मैं मानता हूँ ऐसा नहीं है। मैं ऐसा क्यों मानता हूँ , इसे समझने के लिए इस यात्रा के चरित्र ,मंच पर उठने -बैठने वाले लोग ,यात्रा को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने वाली दृश्य -अदृश्य ताकतें और इस यात्रा के साथ -साथ यात्रा कर रहे छिपे हुए निहितार्थों से होकर गुजरते हैं।

    इस यात्रा में आने वाले लोग या तथाकथित भीड़ कौन है ?
    कन्हैया की इस यात्रा में अब तक हुई सभाओं की पड़ताल करने पर यह देखा गया है कि औसतन 5000 लोगों की मौजूदगी रहती है। संयोगवश मधुबनी के जयनगर में हुई सभा का प्रत्यक्षदर्शी मैं भी था। 4 फरबरी को मैं जयनगर अपने निजी काम से गया था तभी नेशनल हाईवे के किनारे एक मैदान में लोगों के जमावड़े देखकर पता चला कि कन्हैया कुमार की सभा होने वाली है। मुश्किल से दो से ढाई हजार लोग होंगे। संयोगवश उसी दिन बिहार के छात्रों की इंटरमीडिएट की परीक्षा भी चल रही थी और वे लोग भी जयनगर के 3 -4 परीक्षा केंद्रों से निकल कर सड़क पर खड़े थे यह जानकर कि कन्हैया कुमार आने वाला है। इसलिए सोशल मीडिया पर चालाकी से अलग -अलग कोनों से खींची गयी तस्वीरों को डालकर भारी हुजूम दिखाने की कारीगरी उसकी पी आर टीम का हिस्सा है , कुछ और नहीं।
    अब बात करते हैं भीड़ की प्रकृति पर। इसकी सभा में आने वाले लोग कौन हैं ? शीशे की मानिंद साफ़ है कि कन्हैया की सभा में आये लोगों 70 -80 % मुस्लिम हैं। इसका कारण यह है कि सिर्फ बिहार में ही नहीं , देश भर में NRC ,CAA के विरोध में स्वतःस्फूर्त आंदोलन चल रहा है। अलग -अलग जगहों पर लोग महीना भर से ऊपर से लोग धरने पर बैठे हुए हैं जिसमें अधिकतर मुस्लिम हैं। और मीडिया के द्वारा कन्हैया की गढी हुई तथाकथित क्रांतिकारी और मोदी विरोध का चेहरा ऐसे में सभा के आसपास धरने पर बैठे लोगों को अनायास ही ले जा रहा है। आज मोदी CAA और NRC वापस ले ले और फिर सीपीआई के बैनर तले कन्हैया कोई सभा करे , लोग ढूँढ़ने से भी नहीं मिलेंगे। बाकी जो 20 % लोग उस सभा के हिस्सा बन रहे हैं , वह यूथ है। उस यूथ का कोई स्पेसिफिक चेहरा नहीं है। उस यूथ में वे लोग भी हैं जिसे कन्हैया में कनहैवा देशद्रोही दीखता है , वे लोग भी हैं जिसे कन्हैया में क्रांतिकारी दीख रहा है और वे बेरोजगार युवा भी जो कन्हैया के द्वारा बेरोजगारी के खिलाफ की गयी तक़रीर को सुनकर यह समझ बैठते हैं कि क्रांति अब आने ही वाली है और बेरोजगारी अब बीते दिनों की बात होगी।

    इस यात्रा का मंच कैसे सज रहा है ?

    यह सवाल भी लाजिमी है कि इस यात्रा के तहत हुई अलग -अलग सभाओं में कौन से चेहरे प्रमुखता से दीखते गए और वे किन मकसदों से जुड़े हुए हैं ? पूरी यात्रा में 3 तरह के लोगों के द्वारा मंच के इर्द -गिर्द जगह बनायी जा रही है या यूँ कहें कि ये ही लोग सभाओं के आयोजक और संचालक की तरह दीख रहे हैं। पहले किस्म के लोगों में मुस्लिम सोशल एक्टिविस्ट जो अलग -अलग जगहों पर NRC /CAA के विरोध में आंदोलन को संचालित कर रहे हैं। इस प्रकार आपको अररिया से कटिहार तक की सभाओं में जाहिद अनवर भी नजर आते हैं जो एक रिसर्च स्कॉलर तो हैं ही , NRC /CAA के विरोध में चल रहे आंदोलन के सीमांचल कोआर्डिनेशन कमिटी के प्रेजिडेंट भी हैं। वहीँ ओवैसी की पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इस्लाम भी दीखते हैं तो कदवा के कांग्रेसी विधायक शकील अहमद खान भी दृष्टिगोचर होते हैं । श्री खान हर तरह से मददगार हैं। इस तरह 40 -50 लोगों की टीम में वैसे मुस्लिम युवा , राजनेता या अन्य लोग हैं जिसे लगता है कि कन्हैया के साथ दीखती तस्वीर कहीं उसे कहीं से वैतरणी पार करा दे। इसमें से कई आनेवाले बिहार विधानसभा चुनाव के टिकटार्थी हैं , इससे इंकार नहीं किया जा सकता।

    मंच को दूसरे तरह के लोगों ने भी कब्जाया हुआ है। शिवहर जिले में हुई सभा में मंचासीन कुछ लोगों पर नजर डालिये। श्री नारायण सिंह जो जिला पार्षद भी हैं या रह चुके हैं। बड़े ठसक से मंच पर मौजूद हैं। उनकी छवि उस इलाके में किसी दबंग से कम नहीं। भाजपा से स्वाभाविक जुड़ाव है। शास्वत पांडेय भी दीखते हैं। जदयू के पूर्व विधायक मदन तिवारी भी नजर आ जाते हैं। सबके सब दक्षिण खेमे से हैं और उन्हें कन्हैया में अब सवर्णों का भावी तारणहार नजर आने लगा है। इसलिए वोट भले वो भाजपा को दें और दिलायें , लेकिन कन्हैया के लिए माहौल बनाने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। अब जब राजनीति में हैं तो इच्छा भी होगी कि कांग्रेस , सीपीआई या अन्य जगहों से टिकट दिलाने में कन्हैया मददगार हो तो मदद लेने और बदले में मदद देने में क्या ऐतराज हो। तो इधर भी टिकटार्थियों की लम्बी कतार है।
    टीम में तीसरे किस्म के लोग में सीपीआई की कल्चरल विंग इप्टा के लोग हैं। कमोबेश सभी सभाओं में यही पैटर्न है।

    आगामी बिहार विधानसभा चुनाव और जण -गण -मन यात्रा।

    कन्हैया से जब पत्रकार पूछता है कि आपकी इस यात्रा को क्या विधानसभा चुनाव की तैयारी समझा जाय ? वह सिरे से इंकार करता है और बेरोजगारी , गरीबी ,अशिक्षा, फलाना -ढिमकाना कहकर निकल लेता है। लेकिन यह सच नहीं है। सच यह है कि इस यात्रा के जरिये बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी और अपनी पार्टी का क्लेम और शेयर चाह रहा है जो बुरा नहीं है। ऐसे कई लोग यह कहते मिल जायेंगे जिसमें राजद के समर्थक अधिक हैं कि वह संघ और भाजपा द्वारा प्लांटेड है ताकि अधिक से अधिक मुस्लिम वोट्स को तीतर -बीतर कर सके। मैं फ़िलहाल यह नहीं मानता कि उसे संघ ने प्लांट किया है। लेकिन आगे बढ़ते हैं।
    कन्हैया का सारा फोकस मुसलमानों और दलितों में हैं। ज्यादा मुस्लिम वोट्स पर , उसमें भी खासकर मुस्लिम युवाओं पर। आंबेडकर और आरक्षण से दशकों तक छत्तीस का रिश्ता रखने वाली वामपंथी दलों ने अब चोला बदला या बदलने को मजबूर हुआ और लाल सलाम से चलकर नील सलाम तक पहँच गया। जय भीम और जय मीम गाये जाने लगे हैं। तो इसका साफ़ -साफ़ सन्देश है मुस्लिम और दलित वोटों में सेंधमारी कर राजद को समझौते की टेबल पर लाना और अपना अधिक से अधिक शेयर क्लेम करना। वामपंथी दलों की आखिरी उम्मीद अब कन्हैया से ही है जो बीते कई सालों से सत्ता और संसद की चासनी से महरूम है। कन्हैया में अब उसके अपनी बिरादिरी के लोगों को भी भविष्य नजर आने लगा है जो बीते 30 सालों से सत्ता से या तो दूर रहा है या सीधे तौर पर मजा न लेकर नितीश कुमार की मदद से मजा लेने को मजबूर हुआ। इसलिए दल चाहे भाजपा हो , जदयू हो या कांग्रेस हो , कान्हा की बिरादिरी के नेता कान्हा की अदा पर लहालोट हैं।

    नीतीश की मुस्कुराहट और तेजस्वी की त्योरियाँ।

    स्वाभाविक है नितीश मंद -मंद मुस्कुरा रहे होंगे कान्हा की चपल चालों को देखकर। वर्तमान हालात में जब देश भर में NRC /CAA के विरोध में आंदोलन चल रहा है , यह तो तय है कि मुसलमानों का एक भी वोट जदयू और नितीश कुमार को नहीं जाने वाला जिन्हें इस समुदाय के अच्छे -खासे वोट मिल जाते थे । तब इनका वोट जायगा किसे ? स्वाभाविक है जदयू -भाजपा को हराने में जो सबसे ज्यादा सक्षम होगा उसे ही। और आज की तारीख में भी राजद ही वह दल है और मुसलमानों का एक मुश्त वोट राजद और सहयोगी दलों को ही जाना है। और यह स्थिति नितीश कुमार की पेशानी पर बल लाने के लिए काफी है। ऐसे में कान्हा जब मुसलमानों के घर सेंधमारी करेंगे तो नितीश जी का मुस्कुराना और तेजस्वी की त्योरियाँ चढ़ना लाजिमी है। नितीश बहुत सादगीपसंद और किफायती व्यक्ति हैं। वह बिना मतलब के न तो मुस्कुराते हैं , न गुस्सा होते हैं , न किसी को पुचकारते हैं। इसलिए यदा -कदा जब कान्हा को दुलार कर देते हैं तो उसके निहितार्थ हैं। पश्चिमी चंपारण में जब पुलिस कान्हा को रोकने और डिटेन करने गयी तो आनन -फानन में नितीश जी का अपनी पुलिस का फटकारना बस यूँ ही नहीं था। जब भाजपा और जदयू को यह लग जायगा कि कान्हा उसकी राजनीति के लिए खतरा है , अंदर करने में सेकंड भर की देर नहीं करेगी। लेकिन भाजपा को यह पता है कि कान्हा मुस्लिमों के घर जितना अधिक सेंध मारेंगे , राजद का उतना अधिक नुकसान होगा। ऊपर से कन्हैया को देशद्रोही का ख़िताब देकर उसे मिडिल क्लास हिन्दूओं को एक जगह रखने में उतनी ही अधिक सहूलियत होगी। और यह स्थिति राजद और तेजस्वी की राजनीति के लिए निश्चित तौर पर खतरे वाली है।

    लालबाबू ललित
    अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट

  • बिहार के चार लाख शिक्षकों के हड़ताल का आज दूसरा दिन।

    परवेज आलम, पटना।बिहार के चार लाख शिक्षकों ने बिहार सरकार से लम्बे समय से सामान्य काम के बदले सामान्य वेतन की मांग करते आरहे है लेकिन बिहार सरकार शिक्षकों की बात को अनसुना करते हुए शिक्षकों का दोहन करने का काम करते आरही है।जिस कारण वश सरकार को अल्टीमेटम देते हुए 17 फवरी से अनिश्चित कालीन हड़ताल पर जाने के लिए निर्णय लिया था।

    सरकार शिक्षकों की मांगों को नही मानी जब कि शिक्षकों को ये उम्मीद थी कि शिक्षकों की मांग सरकार द्वारा मान लि जायेगी क्यों कि 17 फवरी से बिहार में मैट्रिक का परीक्षा भी प्रारंभ हो चुका है।सरकार भी हठ धर्मिता दिखाते हुए चार लाख हड़ताली शिक्षकों को बर्खास्त करने का अल्टीमेटम दिया है।लेकिन सभी हड़ताली शिक्षको ने भी सरकार को अल्टीमेटम देदिया है कि हम सभी चार लाख शिक्षकों का जब तक हमारा वाजिब हक़ सामान्य काम के बदले सामान्य वेतन नही मिल जाता है तबतक हम लोग हड़ताल पर ही रहेंगे।अब देखना ये है सरकार के मुखिया श्री नीतीश कुमार जी शिक्षकों की मांगो के सामने घुटने टेकती है या हड़ताली शिक्षकों पर कार्यवाई करती है।