Category: बिहार

  • क्या राष्ट्रपति शासन की तरफ बढ़ रहा है बिहार ?

    कोरोना महामारी के कारण बिहार में राजनीतिक अस्थिरता के हालात बनते नजर आ रहे हैं। बिहार में कोरोना संक्रमण के लगभग 900 केस दर्ज किये जा चुके हैं और ये आँकड़ें लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अप्रवासी कामगारों की आवक बढ़ने से यह संक्रमण आने वाले समय में तेजी से बढ़ेगा। पूरे राज्य के अफसर इस महामारी से जूझने में हलकान हैं। अन्य राज्यों की तुलना में टेस्टिंग के मामले में बिहार अभी भी कमतर साबित हो रहा है। कॉम्प्रिहेन्सिव टेस्टिंग , ट्रेसिंग और ट्रीटमेंट के बगैर राज्य इस महामारी से पार न पा सकेगा और लम्बे समय तक इसके दंश से जूझता रहेगा। जिस तरह से राज्य का पूरा महकमा इससे जद्दोजहद कर रहा है , फिर भी सबके चेहरे पर पसीने की बूँदे टपक रही है , इससे राज्य के किसी आपात हालात से निबटने की तैयारी का सहज ही अंदाजा हो जाता है। आइसोलेशन सेंटरस और कोरंटीन सेंटर्स की बदइंतजामी राज्य सरकार के सब चंगा सी वाले दावे की पोल खोल रही है।

    इस सबके बीच बिहार के राजनीतिक हलकों में इस बात के चर्चे शुरू हो गए हैं कि इस साल बिहार के विधानसभा चुनाव निश्चित समय पर हो सकेंगे ?
    29 नवंबर 2020 को मौजूदा बिहार विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इसका अर्थ यह है कि इस तारीख से पहले बिहार विधानसभा का चुनाव संपन्न होकर नयी विधानसभा का गठन हो जाना चाहिए अन्यथा राज्य एक नए राजनीतिक संकट का सामना करेगा। आधा मई बीत चुका है। AIIMS के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया का कहना है कि भारत जून -जुलाई तक कोरोना के चरम को छूएगा और फिर इसका ग्राफ नीचे आना शुरू होगा। रेलवे ने 30
    जून तक के सभी प्री बुक्ड टिकट्स रद्द कर दिए हैं। इसका मतलब यह है किसी भी कीमत पर अगस्त से पहले स्थितियाँ सामान्य की तरह नहीं होंगी। और तब चुनाव आयोग और सरकारी अमलों के पास महज 2 महीने ही बच जायेंगे जिसमें उन्हें चुनाव संपन्न कराने की पूरी तैयारी करनी होगी। ऐसे में जब सारा सरकारी महकमा कोरोना से निबटने में व्यस्त है , क्या शेष बचे मात्र 2 महीने में चुनाव संपन्न करवा सकेंगे , यह अहम सवाल है। सिर्फ इतना ही नहीं , राजनितिक दलों को भी चुनावी मैदान में जाने के लिए , प्रचार के लिए कम से कम 3 महीने से अधिक का समय चाहिए जिसमें वे अपनी तैयारी को मुकम्मल कर सकें।

    क्या कहते हैं बिहार सरकार के मंत्रीगण और राजनीतिक जानकार ?

    इस संबंध में बिहार सरकार के परिवहन मंत्री संतोष कुमार निराला से जब किसी पत्रकार ने इस बाबत सवाल पूछा तो उनका जबाव था कि अभी सरकार के सामने प्राथमिकता कोरोना वायरस से निपटने की है। चुनाव आते और जाते रहेंगे. हमारे सामने प्राथमिकता बिहार की जनता है। वहीं, बीजेपी नेता और श्रम संसाधन मंत्री विजय सिन्हा ने कहा है कि आने वाले दिनों में चुनाव और रहन-सहन तमाम क्रियाकलाप में भारी बदलाव होने वाले हैं। फिलहाल दो-तीन महीने तो ऐसी संभावना नहीं है कि हम चुनाव में जाने की सोच सकते हैं। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम माँझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता दानिश रिजवान का कहना है कि हमारे लिए पहले लाखों मजदूरों को बचाने की प्राथमिकता है, जहां तक सवाल चुनाव कराने की है तो राष्ट्रपति शासन लगना तय है। तो मुख्य विपक्षी दल राजद की इस मामले में क्या राय है ? इस पर आरजेडी पूरे मसले पर गोलमोल जवाब दे रही है पार्टी के मुख्य प्रवक्ता भाई वीरेंद्र का कहना है कि चुनाव के बारे में अंतिम फैसला चुनाव आयोग को लेना है. सरकार के सामने राष्ट्रपति शासन समेत विधानसभा के कार्यकाल को बढ़ाने का विकल्प मौजूद है। तो दूसरी तरफ राजनीतिक विश्लेषक डीएम दिवाकर का मानना है कि कोरोना वायरस के चलते बिहार में राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति उत्पन्न हो गई है और यह लंबा खींचने वाला है. ऐसी स्थिति में समय पर चुनाव होगा, इसकी संभावना कम है। एक विकल्प तो है कि बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू हो जाए और दूसरा विकल्प यह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर दे और वह कार्यकारी मुख्यमंत्री के तौर पर काम करते रहें। बिहार में कब चुनाव होंगे, यह सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि कोरोना वायरस के संक्रमण पर किस तरीके से काबू पाया जाता है और चुनाव आयोग पूरे मसले पर किस तरीके का रुख अपनाती है। इस तरह यह तो साफ हो चूका है कि बिहार एक बार राजनीतिक संकट की तरफ बढ़ चुका है , यह तय है।

    नीतीश कुमार के सामने क्या -क्या विकल्प हैं ?

    इन हालातों में बहुत सीमित विकल्प बच जाते हैं। पहला विकल्प तो यह हो सकता है कि राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाय। यह विकल्प सबसे ज्यादा मुफीद किसके लिए लगता है ? मैं समझता हूँ भाजपा के लिए यह सबसे अधिक लाभकारी स्थिति है। क्यूँकि ऐसे में राज्य की सारी सत्ता और ताकत केंद्र एन्जॉय करने लगता है और राज्यपाल के जरिये पूरी मशीनरी का चुनाव में अपनी सुविधा के हिसाब से इस्तेमाल करना निश्चय ही उसे स्कोर सेट करने में मदद करेगा। लेकिन नीतीश कुमार इस विकल्प से असहज महसूस कर सकते हैं। राष्ट्रपति शासन में चुनाव होने पर एक पार्टी के तौर पर जदयू का नुकसान होना तय है और भाजपा बार्गेन करने के पोजीशन में आ सकती है। लेकिन नीतीश कुमार को नाराज कर भाजपा राष्ट्रपति शासन के विकल्प को अपनाना अफ़्फोर्ड कर सकती है ? इसकी सम्भावना कम लगती है। क्यूँकि बिहार में सत्ता का मजा लेने के लिए भाजपा को अभी नीतीश कुमार रुपी बैसाखी की दरकार है।

    ऐसे में दूसरा विकल्प यह भी हो सकता है कि नीतीश कुमार विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर दें और राज्यपाल के आग्रह पर विधानसभा चुनाव होने तक कार्यकारी मुख्यमंत्री बने रहें। इसमें नीतीश कुमार भी ज्यादा रुष्ट नहीं होंगे हालाँकि एक कार्यकारी मुख्यमंत्री के पास नीतिगत फैसले लेने के लिए बहुत अधिक शक्तियाँ नहीं बची रह जाती हैं। फिर भी नीतीश कुमार इस विकल्प के लिए हामी भर सकते हैं।

    एक तीसरा विकल्प भी है कि विधानसभा का कार्यकाल को ही बढ़ा दिया जाय। हालाँकि यह 6 महीने से ज्यादा के लिए नहीं हो सकता। संविधान के अनुच्छेद 143 के क्लॉज़ 1 के तहत राष्ट्रपति को यह ताकत हासिल है कि असामान्य परिस्थितियों में जब विधानसभा का चुनाव करवा पाना समय पर बिलकुल संभव न हो तो एक बार में विधानसभा के कार्यकाल को 6 महीने के लिए बढ़ा सकता है।

    ऐसे में क्या तय होगा , यह तो आने वाले समय में पता चलेगा लेकिन इतना तय है कि बिहार एक बड़े राजनितिक संकट की तरफ बढ़ चुका है।

    लालबाबू ललित, लेखक सुप्रीम कोर्ट के वकील है. ये लेखक के निजी और व्यक्तिगत विचार हैं अतः इसे पढते समय पाठक जन अपने विवेक का प्रयोग करें, और इस लेख को पढने के बाद अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।

  • सीतामढ़ी:फेसबुक पर एक धर्म विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले युवक को पुलिस ने किया गिरफ्तार

    मुजफ्फर‌ आलम, सीतामढ़ी:दो समुदायों के बीच में तनावपूर्ण माहौल बनाने वाले पोस्ट को लगातार करने वाला युवक नानपुर थाना के मोहनी महुआ गाछी गांव के दवा दुकानदार श्री उमेश कुमार गुप्ता का पुत्र मणि भूषण कुमार सुमन है पिछले काफी दिनों से यह युवक लगातार फेसबुक पर एक धर्म के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करते आ रहे थे इसकी सूचना जब नानपुर थाना अध्यक्ष को मिली तो उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए इनके घर पर छापा मारा और इसे गिरफ्तार कर लिए

    वही पुलिस द्वारा इन्हें गिरफ्तार करने पर स्थानीय लोग बहुत खुश है लोगों का कहना है कि समाज में ऐसे लोगों को सजा मिलनी चाहिए जो समुदायों के बीच में लड़ाने का काम कर रहे हैं इससे हमारे समाज पर बुरा प्रभाव पड़ेगा,ऐसे जो भी लोग हैं उन सभी पर प्रशासन कार्रवाई करे तो समाज में कभी कोई तनावपूर्ण स्थिति पैदा नहीं होगी

    इनके फेसबुक प्रोफाइल खोलने से पता चलता है कि यह किसी ऐसे संगठन से जुड़ा है जो इसके दिमाग में एक धर्म विशेष के खिलाफ जहर भरता जा रहा है या फिर इसके जो संबंध है वह अच्छे लोगों के साथ नहीं है जो कि इनके दिमाग को एक धर्म विशेष के खिलाफ भड़काया हुआ दिखाई दे रहा है सभी लोगों को पता है कि किसी धर्म विशेष के खिलाफ कोई भी आपत्तिजनक पोस्ट करना अपराध है फिर भी लोगों के दिल में डर नहीं है है लोग लगातार गलत पोस्ट करते नजर आ रहे हैं

    जब इसकी सूचना थाना अध्यक्ष ने जिला प्रशासन को दी तो उन्होंने कहा कि जो भी लोग इस तरह की हरकत कर रहे हैं आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले लोगों पर स्पीडी ट्रायल के जरिए मुकदमा चलाया जाएगा और उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी ताकी आगे किसी और युवक की सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने की हिम्मत ना करें

  • भाकपा-माले व इंसाफ मंच ने सांप्रदायिक बयान देने पर मुजफ्फरपुर भाजपा सांसद अजय निषाद का जलाया पुतला

    *कोरोना संकट के दौरान भाजपा सांसद सांप्रदायिक नफरत फैलाना बंद करें – माले*

    *सामाजिक सौहार्द व एकता के बल पर ही कोरोना महासंकट से लड़ाई संभव – इंसाफ मंच*

    प्रेस‌ रिलीज, *मुजफ्फरपुर,13मई 2020*:भाकपा-माले व इंसाफ मंच के कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रूप से हरिसभा चौक स्थित पार्टी कार्यालय में मुजफ्फरपुर भाजपा सांसद अजय निषाद का पुतला जला कर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान माले जिला सचिव कृष्णमोहन व इंसाफ मंच के राज्य उपाध्यक्ष आफताब आलम ने कहा कि कोरोना महासंकट के दौरान मुजफ्फरपुर सांसद अजय निषाद सामाजिक एकजुटता व सामाजिक सौहार्द मजबूत करने के बदले सांप्रदायिक नफरत फैलाने वाला बयान दे रहें हैं। भाकपा-माले व इंसाफ मंच सांसद द्वारा सांप्रदायिक नफरत फैलाने वाले बयान की तीखी भर्त्सना करता है। सांसद को इसके लिए मुजफ्फरपुर की जनता से माफी मांगनी चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि यदि सांसद अभी भी अपने बयान पर कायम हैं तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उनपर कोरोना महामारी के दौरान सांप्रदायिक घृणा फैलाने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराना चाहिए।

    सांसद अजय निषाद का पुतला जला कर प्रतिवाद करने में माले जिला सचिव कृष्णमोहन व इंसाफ मंच के राज्य उपाध्यक्ष सहित मंच के राज्य प्रवक्ता असलम रहमानी, माले कार्यालय सचिव सकल ठाकुर, प्रो अरविंद कुमार डे, राजकिशोर प्रसाद, इंसाफ मंच के अकबर आजम सिद्दीकी, शफीकुर रहमान, मो.रिजवान, महिला संगठन ऐपवा की जिला अध्यक्ष शारदा देवी व उपाध्यक्ष प्रमिला देवी सहित कई कार्यकर्ता शामिल थे।

    पुतला दहन के दौरान माले व इंसाफ मंच के कार्यकर्ताओं ने कहा कि मुजफ्फरपुर सांसद को कोरोना महासंकट से लड़ने के दौरान लोगों को भड़काने वाला बयान देने के बदले लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाने के अभियान में जुटना चाहिए।मुजफ्फरपुर के गांवों में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर लौट रहें हैं। लौट रहे मजदूरों के प्रति भी घृणा और नफरत फैलाने की साजिश चल रही है। अफवाह फैलाया जा रहा है। इससे समाज में तनाव पैदा होगा। इस पर रोक लगाने की मांग भी कार्यकर्ताओं ने की है।

  • लॉकडाउन में दरभंगा वरीय पुलिस अधीक्षक का मानवीय चेहरा आया सामने

    दरभंगा 9/मई/2020:सेव लाइफ फाउंडेशन के शाह अज़मतुल्लाह अबुसईद को काशी ठाकुर पिता स्व० कपलेश्वर ठाकुर मोहल्ला हसन चौक दरभंगा ने काशी ठाकुर लकवा ग्रसित होने की सूचना उसकी पड़ोसी विनिता भारती द्वारा दी गई।*
    विनिता ने बताया कि काशी ठाकुर की औषधि *एक माह से समाप्त है।*
    औषधि के न होने के कारण उसकी इस्थिति चिंता जनक होती जारही है।
    *लॉकडाउन के कारण रोगी डॉक्टर के पास न जा सकता है ना दवा मंगवाई जा सकी है।*
    *ऐसी परिस्थिति में दवा की उपलब्धता कैसे संभव हो इसके लिए आप लोग कुछ करें।* ताकि रोगी की जीवन की रक्षा हो सके।
    इसकी सूचना मिलते ही *सेव लाइफ फाउंडेशन ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस महानिदेशक श्री गुप्तेश्वर पांडेय पटना एवं वरीय पुलिस अधीक्षक दरभंगा श्री बाबू राम को मेल एवं व्हाट्सएप किया।

    दरभंगा पुलिस को सूचना मिलते ही शीघ्र *सेव लाइफ फाउंडेशन से संपर्क साधा दवा की पर्ची मांगी गई और उसके अगले तीसरे दिन समस्तीपुर से दवा लेकर अखिलेश कुमार पुलिस निरीक्षक दरभंगा एवं मिर्तुंजय कुमार दवा लेकर रिंकू देवी पत्नी काशी ठाकुर के घर पर जाकर दवा सौंपी। दवा मिलते ही रोगी एवं उसका परिवार हर्षोल्लास से भर गया।और दुआ देने लगा। अपनी दवा देख काशी ठाकुर की आंखे नम हो गई।दवा मुफ्त में ही उपलब्ध कराई गई।
    काशी ठाकुर साइकिल मरम्मत का कार्य करता है

  • मज़दूरों की घर वापसी के लिए बिहारी एन जी ओ ने 50 ट्रेनों का किराया अदा करने की पेशकश की

    प्रेस विज्ञप्ति,एक तरफ केंद्र सरकार अप्रवासी मज़दूरों के लिए भारतीय रेल के ज़रिए मुफ्त घर वापसी के दावे कर रही है, वहीं इस मुद्दे पर अब राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी के बाद अब मुंबई में बिहार की एक संस्था ने सरकार को पत्र लिखकर कहा है कि अगर सरकार ट्रेन मुहैया कराए तो वो किराया चुकाने को तैयार हैं।

    बिहार नवनिर्माण युवा अभियान नाम की संस्था ने रेल मंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि महाराष्ट्र में अप्रवासी मज़दूर और छात्रों की एक बड़ी संख्या लॉक डाउन की वजह फंसी है। इन लोगों में बड़ी तादाद बिहार के लोगों की है। इन लोगों के परिजन तनाव में जीने को मजबूर हैं क्योंकि यहां ये प्रवासी कष्ट, भय और आशंकाओं से घिरे हुए हैं। पत्र में दावा किया गया है कि मुम्बई के स्लम क्षेत्रों में कष्ट और परेशानी बहुत ज़्यादा है क्योंकि यहां अधिकतर लोग सार्वजनिक शौचालय इस्तेमाल करते हैं। जहां लोग एक छोटे कमरे में 10-20 लोग रहते हैं वहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना नामुमकिन है। एक ही शौचालय का अनगिनत लोगों द्वारा रोज़ इस्तेमाल करना कोरोना संक्रमण के ख़तरे को और ज़्यादा बढ़ा देता है।

    संस्था के संयोजक तनवीर आलम ने रेल मंत्रालय से उचित संख्या में ट्रेनों का परिचालन शुरू कराने की मांग की है। संस्था की तरफ से भेजे गए पत्र कॉपी साझा करते हुए उन्होंने कहा है कि अगर धन की वजह से ट्रेन चलाने में कोई बाधा है तो उनकी संस्था बिहारी समाज से चंदा करके 50 ट्रेनों का ख़र्च/किराया चुकाने को तैयार है। उन्होंने आगे लिखा है कि ज़रूरत के पड़ने पर अगर ट्रेनों की संख्या बढ़ानी पड़ती है वह आपसी सहयोग से और ज़्यादा राशि जुटा सकते हैं।

    महाराष्ट्र में बिहार के हज़ारों लोग अभी भी फंसे हुए हैं। अनुमान है कि इनमें तक़रीबन 2-3 लाख लोग अपने घर लौटना चाहते हैं। कोरोना नियमों की वजह से एक ट्रेन में औसतन 1200 लोग ही सफर कर सकते हैं। ऐसे में इन लोगों की घर वापसी के लिए कम से कम 200-250 ट्रेनों की ज़रुरत पड़ेगी। इनमें से अधिकतर लोग वो हैं जो काम बंद होने और रहने का सही ठिकाना न होने की वजह से मुंबई में फिलहाल रुकना नहीं चाहते।

    ये पूछे जाने पर कि संस्था इतने पैसे कहां से चुकाएगी, बिहार नव निर्माण युवा अभियान के संयोजक ने दावा किया कि मुंबई में कई कारोबारी और बिहारी समाज के लोग फंसे हुए प्रवासियों की मदद करने को तैयार हैं और इतना पैसा जुटाना उन लोगों के लिए मुश्किल काम नहीं है।

  • लाॅक डाउन के बिच फासिस्ट बर्बरता जारी,फाशिज़म के विरुद्ध 10 मई को 11 बजे से होगा पाॅपुलर फ्रंट आॅफ इंडिया का ग्राउंड काॅन्फ्रेंस

    प्रेस विज्ञप्ति पटना
    इस समय पुरा देश और पुरी दुनिया क्रोना से देश और दुनिया को जीत दिलाने के लिए खुद से नज़र बंद हो चुकी है। यहां तक कि सभी शैक्षणिक संस्थानों की गतिविधियों को भी रुक गई हैं। न्यायालय की गतिविधियों को भी महदुद रखा गया है।
    इन बातों का इजहार पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के प्रदेश महासचिव मोहम्मद सनाउल्लाह ने किया और उन्होंने कहा कि जनता इस जंग में किसी भेदभाव के सरकार का पुरा साथ दे रही हैं मगर अफसोस का मुक़ाम ये है कि सरकार ने इस बीच बेशर्मी के साथ जनता में से उन लोगों को जो उनके विचारधारा और पालीसी से इखतिलाफ रखतें हैं और खासकर विद्यार्थी समुह और अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाना प्रारंभ कर दिया है।

    लाॅक डाउन के प्रारंभ में ही जामिया स्कालर *मिरान हैदर* की गिरफ्तारी से शुरू हुआ ये सिलसिला जामिया के कइ विद्यार्थी के साथ (जे एन यू) अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के भी कई विद्यार्थी को निशाना बना चुका है। जामिया की ही विद्यार्थी *सफुरा जरग़र* जोकि महिना की गर्भवति थीं उन्हें भी मानव अधिकार की धज्जियां उड़ाते हुए गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल में बंद कर दिया गया और ये सिलसिला अभी भी जारी है तो वहीं दिल्ली पुलिस ने इस वजह कर के उनके द्वारा की जा रही अवेध गिरफ़्तारीयों व दिल्ली दंगा में उनकी नाकामी और शिकायतों पर अल्पसंख्यक आयोग ने उन्हें नोटिस भेज कर जवाब मांगा गया था परन्तु एक फेसबुक पोस्ट का से बुंयाद बहाना बना आयोग के चेयरमैन *जफरुल इसलाम ख़ान* साहब पर जोकि एक कानूनी पद पर होने के साथ-साथ दुनिया में हिंदुस्तान का नाम रौशन करने वाले बूध्धिजिवियों में से एक है पर देशद्रोह जैसा सिंगीन आरोप लगा दिया गया है

    जो कि लोकतंत्र के लिए बहुत ही खतरनाक कर्तव्य है परन्तु अभी है कि पुरे भारत की सेकुलर जनता मज़बूती के साथ अविलंब जफरुल इसलाम ख़ान साहब के साथ लाॅक डाउन के बीच हो रही फासिस्ट ताकतों के खिलाफ हो जाएं। मोहम्मद सनाउल्लाह ने बताया कि इस मुद्दे के तहत आने वाले 10 मई को सुबह 11 बजें से पाॅपुलर फ्रंट आफ इंडिया की तरफ से एक अहम आॅन लाईन जनसभा होने जा रहा है उन्होंने सभी सेकुलर जनता और खासकर मुसलमानों से अपील किया है कि इस आॅनलाईन जनसभा का हिस्सा ज़रुर बनें जिसे फ्रंट के फेसबुक पेज //Popular Front of India Official पर और अन्य आॅनलाईन वेबसाईट पर दिखाया जाएगा।

  • पाॅपुलर फ्रंट आफ इंडिया दिल्ली पुलिस द्वारा डॉ.जफरुल इस्लाम खान के खिलाफ लगाए गए आपराधिक आरोपों की निंदा करता है

    प्रेस विज्ञप्ति
    दरभंगा बिहार:पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के बिहार प्रदेश अध्यक्ष महबूब आलम ने एक बयान में दिल्ली पुलिस द्वारा जाने-माने इस्लामी विद्वान, पत्रकार और दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष डॉ. जफरुल इस्लाम खान के खिलाफ लगाए गए देशद्रोह और अन्य मनगढ़ंत आपराधिक आरोपों की कड़ी निंदा की है।

    डॉ. जफरुल इस्लाम खान के एक ट्वीट को कुछ साम्प्रदायिक तत्वों द्वारा उनके संदर्भ में विकृत, भड़काऊ सामग्री के रूप में दर्शाया गया। इसके बाद मीडिया और सामाजिक माईका हैंडलर्स के एक वर्ग द्वारा उसके खिलाफ एक शातिर अभियान चलाया गया। अब यह बताया गया है कि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने डॉ खान को देशद्रोह (सेक्शन 124 ए) और सांप्रदायिक विभाजन (सेक्शन 153 ए) के तहत डॉ. खान पर प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। डा. खान पर लगाया गया केस भाजपा सरकार के संरक्षण में देश में चल रहे व्यक्तिगत लक्ष्य और चरित्र हत्या के बहुत निम्न स्तर का संकेत है। डॉ. जफरुल इस्लाम खान, एक विशेष व्यक्तित्व के धनी हैं, और मानव अधिकारों और अल्पसंख्यक अधिकारों के एक मजबूत समर्थक हैं तथा दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष के रूप में एक अनुकरणीय काम कर रहे हैं। आयोग द्वारा प्राप्त कई शिकायतों के कारण दिल्ली पुलिस को जवाबदेह बनाया गया था।

    इस कारण से शासन और पुलिस में सांप्रदायिक विभाजनकारी तत्वों ने उन्हें सत्ता के दुरुपयोग के लिए खतरा समझा और इसलिए उनके खिलाफ अभियान चलाया। हिंदुत्व वादी तत्त्वों द्वारा इस घटना को दुर्भावनापूर्ण अभियान के रूप में प्रचारित किया और एक वैधानिक अल्पसंख्यक आयोग के प्रमुख के खिलाफ केंद्र शासन की मिलीभगत से डा. खान के खिलाफ केस दर्ज कराया। केन्द्र शासन और दिल्ली पुलिस के कदाचार ने पहले ही विदेशों में भारत की छवि खराब कर रखी है।

    पाॅपुलर फ्रंट आफ इंडिया ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के इस खौफनाक अभियान को रोकने और डॉ खान के खिलाफ आधारहीन आपराधिक आरोपों को वापस लेने का आह्वान किया है। पाॅपुलर फ्रंट आफ इंडिया के बिहार प्रदेश अध्यक्ष महबूब आलम ने डॉ. खान के साथ एकजुटता व्यक्त की और सभी कानूनी और लोकतांत्रिक माध्यमों से उनका समर्थन सुनिश्चित किरने का फैसला लिया है।

  • गाड़ी रोकने पर भड़के कृषि अधिकारी,उठक बैठक के बाद पैर छूकर पुलिस से मंगवाया माफ़ी

    शहनवाज हुसैन,अररिया / बिहार पुलिस के 55 वर्षीय सिपाही को उस समय दिल से खून का आंसू निकल गया होगा जब वो एक नौजवान जिला कृषि अधिकारी के सामने बेधरक उठक बैठक किया .सिपाही गोनू तत्मा आज अपने ड्यूटी के चलते रो रहे होंगे चूँकि आम तौर पर कर्तव्यनिष्ठ होने वाले कर्मी को सरकार ,विभाग सहित पूरा समाज सलाम करता है लेकिन इस सिपाही को कर्तव्यनिष्ठता से ड्यूटी करना भारी पड़ गया.लॉक डाउन के दौरान बैरगाछी में तैनात गोनू तत्मा ने जब अनजाने में जिला कृषि पदाधिकारी को रोक दिया तो साहब भड़क गये और पैर छूकर माफ़ी मंगवाया ,फिर भी दिल न भरा तो उठक बैठक भी करवाया .

    मामला बिहार के अररिया का है.जिला कृषि पदाधिकारी अररिया मनोज कुमार बैरगाछी से गुजर रहे थे जहाँ पुलिस विभाग के वरीय अधिकारी के निर्देशानुसार गोनू तत्मा अपने ड्यूटी पर तैनात थे.उसने सामने से गुजर रहे गाडी को रोकवा के पास माँगा तो गाड़ी में सवार अररिया जिला कृषि पदाधिकारी मनोज कुमार भड़क गये. अपने वरीय पद का हनक दिखाते हुए कृषि अधिकारी ने उन्हें न केवल डांटा बल्कि खूब सुनाया.वहीँ पुलिस विभाग के एक दारोगा जो वहीँ तैनात थे अपने सिपाही द्वारा जिला कृषि अधिकारी के रोकने को बर्दाश्त नही कर पाए .उसने तुरंत आदेश दिया कि तुमने वरीय अधिकारी का गाड़ी रोका इससे हमारी बेइज्जती हुई है तुरंत पैर छूकर माफ़ी मांगो ,आदेश का पालन करते हुए सिपाही गोनू तत्मा तुरंत पैर छूकर माफ़ी मांगा ,इससे भी दारोगा जी का दिल न भरा तो उसने उठक बैठक का फरमान दिया उसे भी उस बुजुर्ग पुलिस बल ने पूरा किया.

    अब बड़ा सवाल है कि पुलिस के जवान कैसे ड्यूटी करे.कई बार ये होता है कि कनीय अधिकारी कई वरीय अधिकारी को नही पहचान पाते है .इसी कड़ी में आज अररिया के इस सिपाही ने इन्हें नही पहचान पाया तो क्या इसे जो सजा मिली वो जायज है ?डीजीपी गुप्तेश्वर पाण्डेय खुद चौकीदार ,सिपाही ,दारोगा को फोन कर मुस्तैदी से ड्यूटी करने का निर्देश देते है और प्रोत्साहित करते है लेकिन इस कृषि अधिकारी और दारोगा ने बिहार पुलिस के टोपी को जुत्ती के नीचे दबा दिया.उस दारोगा ने तो पुलिस के इस वर्दी को कृषि अधिकारी के चमचई करने में नत मस्तक कर दिया.

    बड़ा सवाल है कि अगर ऐसे मामले में पुलिस के जवान को इस तरह झेलना पड़े तो क्या वो डीजीपी के आदेश का पालन कर पायेंगे,क्या बिहार को सुशासन युक्त कायम कर पाएंगे ? अब देखना दिलचस्प होगा कि इस खबर के बाद उस दारोगा और कृषि अधिकारी मनोज कुमार पर क्या कार्रवाई होती है.

  • आपसी रंजिश में युवक की गोली मार कर हत्याःआरोप छात्र राजद जिलाध्यक्ष सहित अन्य पर

    शहनवाज हुसैन,मधेपुरा

    मधेपुरा शहर के वार्ड नं. 3 के अधिक लाल
    मध्य विद्यालय के पास रविवार को आपसी रंजिश
    में एक युवक को गोलीमार कर हत्या कर दी गई।
    पीड़ित परिवार ने हत्या का आरोप मृतक के दोस्त
    छात्र राजद जिलाध्यक्ष सहित अन्य पर लगाया है ।
    पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर कर
    पोस्टमार्टम के लिए के लिए सदर अस्पताल भेज
    दिया है. घटना को लेकर फिलहाल मामला दर्ज नही
    हो सका है।

    घटना की सूचना मिलते थानाध्यक्ष सुरेश कुमार
    सिंह सहित पुलिस बल और कमांडो दस्ता घटना
    स्थल पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे कर
    पोस्टमार्टम के सदर अस्पताल भेज दिया।
    मृतक के भाई वार्ड नंबर 5 निवासी मो० नसीम के
    अनुसार दो बजे दिन में मृतक मो० अरशद उर्फ
    मिस्टर को खाने के लिए फोन किया तो मिस्टर ने
    बताया कि वे वार्ड नंबर 3 स्थित सोनू यादव के घर
    पर हैं, बाद में आयेंगे।

    उन्होने बताया कि 3 बजे के आसपास मृतक के एक
    दोस्त साहुगढ़ निवासी रोनक यादव ने फोन पर
    बताया कि मिस्टर को गोली लगी और उनकी मौत
    हो गई है. उनकी लाश बाहर में रखी है । घटना की
    सूचना मिलते ही हम लोग सोनू यादव के घर पर
    पहुंचे तो देखा घर को मकान मालिक ने पानी से धो
    दिया था और गोबर से पुताई कर दिया था. लेकिन
    वहां मिस्टर नहीं दिखा तो आसपास खोज करने पर
    स्कूल के पिछवाड़े जंगल में देखा कि मृतक को एक
    चादर से ढंक दिया था। जब सोनू के घर पहुंचे थे तब
    हम लोग को देखकर तीन चार युवक बाइक पर
    सवार हो कर भाग निकले।

    उन्होने बताया कि छात्र राजद का जिलाध्यक्ष सोनू
    यादव जिले के शंकरपुर थाना क्षेत्र का रहने वाला है.
    वह मधेपुरा वार्ड नम्बर 3 में चन्द्र किशोर यादव का
    मकान किराये पर लेकर रह रहा था। उन्होने छात्र
    राजद अध्यक्ष पर आरोप लगाते हुए आपत्तिजनक
    काम में संलिप्त होने का भी आरोप लगाया है।

    घटना की खबर शहर में आग की तरह फैल गई और
    देखते ही देखते भारी भीड़ सदर अस्पताल में जमा
    हो गई। घटना को लेकर लोगों में भारी आक्रोश
    दिखा । मृतक के परिजन शव का पोस्टमार्टम कराने
    का विरोध करते हुए हत्यारे की गिरफ्तारी करने की
    मांग शुरू की लेकिन थानाध्यक्ष ने समझा बुझाकर
    शान्त करते शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

    इसी बीच कमांडो हेड विपिन और कमांडो दस्ता
    कथित आरोपी सोनू यादव के मोबाइल लोकेशन
    ट्रेस पर मिठाई, साहुगढ़ सहित अन्य जगह पर पहुंची
    लेकिन आखिरकार बाद में उसका मोबाइल स्विच
    ऑफ हो गया और आरोपी हाथ नहीं आया।

    थानाध्यक्ष सुरेश कुमार सिंह ने बताया कि हत्यारे ने
    घटना को अंजाम किसी अन्यत्र जगह दिया और
    शव को सुनसान जगह स्कूल के पिछवाड़े जंगल में
    ठिकाने लगा दिया. घटना स्थल काफी सुनसान का
    इलाका है जहां दिन में भी घटना हो जाय तो पता
    चलना कठिन है। आपसी रंजिश में हत्या होने की
    बात सामने आ रही है। कारण का पता लगाया जा

    फिलहाल पीड़ित परिवार की ओर से मामला दर्ज
    __करने का आवेदन नहीं प्राप्त हुआ है।

  • बिहार के 27 जिला ग्रीन जोन में,20 अप्रैल के बाद मिल सकती है राहत,यहां एक भी कोरोना पॉजिटिव नहीं

    बिहार: बिहार के 27 जिले ऐसे हैं जहां मंगलवार तक कोरोना का कोई संक्रमित नहीं मिला है। ऐसा ही रहा तो इन जिलों में 20 अप्रैल के बाद राहत मिल सकती है। बिहार के 27 जिले ग्रीन जोन में हैं। प.चंपारण, पू.चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार, बांका, जमुई, शेखपुरा, जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर, बक्सर और आरा जिले में कोरोना को कोई रोगी नहीं मिला है। 20 अप्रैल तक अगर इन जिलों में कोरोना का मरीज नहीं मिलता है तो राहत मिल सकती है। राज्य के आठ जिले ऑरेंज जोन में हैं। गोपालगंज, सारण, पटना, नालंदा, गया, लखीसराय, मुंगेर और भागलपुर में कोरोना के मरीज मिले हैं।