Category: बिहार

  • प्रेम विवाह कर घर वालों के साथ पति ने पत्नी को जिंदा जलाया,श्री राम के घर को मुस्लिम बहू नहीं थी पसंद

    फोटो का प्रयोग संकेतिक रुप मे किया गया है

    फजलुल मोबीन,मोतिहारी:मोतिहारी के ढाका प्रखंड के चन्दनबारा गाँव मे एक बच्चे की माँ को ससुराल वालो द्वारा जिन्दा जलाने से ग्रामीणो मे भारी आक्रोश है। चन्दनबारा निवासी श्रीराम ने अपने परिवार के सहयोग से बुधवार की रात्रि अपनी पत्नी गुडिया के उपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी, गुडिया को बृहस्पतिवार की सुबह मोतिहारी हस्पताल लाया गया जहा उसकी मृत्यु हो गई। पूलिस इस मामले मे गुड़िया के पति श्री राम और उसकी सास को गिरफ्तार कर मामले की जांच कर रही है। इस घटना के बाद चन्दनबारा के लोगो मे आक्रोश पाया जा रहा है

    लोगो ने घन्टो चन्दनबारा मदनी चौक पर ढाका बैरगनीया पथ को जाम रखा। मौके पर पहुंच कर सर्किल इंस्पेक्टर अमरेन्द्र कुमार और ढाका थानाध्यक्ष अजय कुमार ने लोगो को बताया कि गुड़िया के पति और सास को गिरफ्तार कर लिया गया है तब जाकर लोगो ने जाम हटाया। विद्वित हो कि गुड़िया हरदीया गाँव निवासी मुस्लिम समुदाय के वहाब आलम की पुत्री है जिसे वरगला कर चन्दनबारा निवासी भदई के पुत्र श्रीराम ने शादी की और लडक़ी को लेकर मुम्बई चला गया लडक़ी ने एक बच्चे को जन्म दिया। श्री राम गुडिया और बच्चे को लेकर चन्दनबारा आया। श्री राम के घर वाले इसे बर्दाश्त न कर सके और श्री राम के घर वालो ने गुडिया को जिन्दा जला दिया। लोगो का कहना है कि गुड़िया को न्याय मिले। बतौर डीएसपी मौके पर पहुंचे सर्किल इंस्पेक्टर अमरेन्द्र कुमार ने बताया कि गुड़िया को न्याय मिलेगा।

  • उत्तर बिहार के मशहूर सर्जन और दुखियों के मसीहा डॉ.अब्दुल वहाब हुए सुपूर्द ए खाक

    मिल्लत टाइम्स,दरभंगा:उत्तर बिहार के चर्चित सर्जन गरीब परवर डॉ. अब्दुल वहाब (90) का बुधवार को निधन हो गया। उच्चस्तरीय इलाज के लिए ले जाने के दौरान मुजफ्फरपुर टॉल प्लाजा के पास अचेतावस्था में चले गए। परिजनों ने उन्हें मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वे अपने पीछे पत्नी, तीन पुत्र और पांच पुत्री सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। गुरुवार की दोपहर मिल्लत कॉलेज के मैदान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया

    डॉ. वहाब 1965 में डीएमसीएच में सर्जन के रूप में योगदान दिए। 1982 में यहां से अरब देश चले गए। कुछ वर्षों बाद लौटकर एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर में सर्जरी के एचओडी के रूप में योगदान दिए। शिक्षा के क्षेत्र में उनका बड़ा योगदान रहा। अपनी जमीन पर सोगरा गर्ल्स हाईस्कूल की स्थापना की। बाद में भूमि मिलने पर स्कूल का स्थानांतरण हुआ।

    बीवी पाकड़ में अल्लामा इकबाल उर्दू लाइब्रेरी एवं शोध संस्थान की स्थापना की। समाज में व्याप्त कुरीतियों को लेकर लोगों को जागरूक करते रहे। उनके निवास स्थान रहमखान मोहल्ला में अंतिम दर्शन करने के लिए लोगों का तांता लगा रहा। लोगों ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया है। उनके पुत्र सर्जन डॉ. आरजू ने बताया कि पिछले दो माह से बीमार चल रहे थे।

    जदयू के राष्ट्रीय महासचिव संजय झा, पूर्व केंद्रीय मंत्री मो. अली अशरफ फातमी, डीएमसीएच के प्राचार्य डॉ. एचएन झा, अधीक्षक डॉ. आरआर प्रसाद, डॉ. रमण कुमार वर्मा, डॉ. अजीत कुमार चौधरी, आइएमए के अध्यक्ष डॉ. सीएम झा, डॉ. हरेंद्र कुमार, शिक्षाविद एसएचए आब्दी, राजद नेता राशिद जमाल आदि ने पहुंचकर अपनी संवेदना व्यक्त की।

  • सीतामढ़ी:अल्पसंख्यक आयोग पहुंचा दो मुस्लिम युवाओं की पुलिस हिरासत में हुई मौत का मामला

    सीतामढ़ी संघर्ष समिति ने किया निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग

    मिल्लत टाइम्स,सीतामढ़ी। सीतामढ़ी संघर्ष समिति के अध्यक्ष मो. शम्स शाहनवाज ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष श्री जी.एच. रिजवी से डुमरा थाना में दो मुस्लिम युवाओं की पुलिस हिरासत में हुई मौत की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।

    अपनी शिकायत में शम्स ने कहा कि है कि सीतामढ़ी जिला के डुमरा थाना में 06-03-2019 को पूर्वी चंपारण जिला के चकिया थाना के रमडीहा निवासी गुफरान (28 वर्ष) पिता- मनाऊल तथा तस्लीम आलम (30 वर्ष) पिता- मुलाजिम की पुलिस हिरासत में संदिग्ध स्थिति में मौत हो गई है। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक पुलिस का कहना है कि इन दोनों युवाओं को हाईवे पर लूट एवं हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था। लेकिन अचानक दोनों ही युवाओं 6 मार्च 2019 को शाम करीब साढे चार बजे सदर अस्पताल सीतामढ़ी में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने 5 बज कर 5 मिनट पर गुफरान और 5 बजकर 20 मिनट पर तस्लीम को मृत घोषित कर दिया। हालांकि पोस्टमार्टम के दौरान इन दोनों युवाओं के शरीर पर करंट लगने एवं चोट के दाग मिले हैं।

    शम्स ने इस संबंध में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जी एच रिजवी से फ़ोन पर हुई बातचीत के बारे में बताया कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अध्यक्ष ने कहा कि मामला गंभीर है और निश्चित रूप से कार्यवाही की जाएगी।

    शम्स ने कहा कि एक तरफ तो पुलिस दोनों ही आरोपियों पर किसी भी तरह की शारीरिक यातना देने की बात को खारिज कर रही है, वहीं डुमरा थाना के आठ अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया है, जोकि मामले को और भी संदेहास्पद बना रहा है। यह उच्च स्तरीय जांच का विषय है कि आखिरकार कैसे और किस तरह दो आरोपियों की एक ही समय में पुलिस हिरासत में मौत हो जाती है?

    शम्स ने कहा कि सीतामढ़ी संघर्ष समिति यह मांग करती है कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अपने स्तर पर दोनों ही मुस्लिम नौजवानों की पुलिस हिरासत में हुई मौत की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराए और उनके परिवारों को न्याय दिलाए।(इंपुइ पुर्वांचल)

  • सीतामढ़ी:गुफरान और तस्लीम को पुलिस ने थाना मे पिट-पिट कर ली जान,एसपी ने थानाध्यक्ष समेत 8 को किया निलंबित

    (फोटो मिल्लत टाइम्स)

    एसपी ने डुमरा थाना अध्यक्ष समेत आठ पुलिसकर्मियों को किया निलंबित

    बेहोशी की हालत में करवाया गया सदर अस्पताल में भर्ती चिकित्सकों ने घोषित किया मृत

    एसडीपीओ सदर ने पुलिस की पिटाई से किया इंकार दंडाधिकारी की मौजूदगी में हुआ पोस्टमार्टम

    शाकिब रजा/मिल्लत टाइम्स,सीतामढ़ी: पुलिस की पिटाई से दो लड़कों पर लूट हत्या कांड का आरोप लगने के बाद बुधवार की शाम को डुमरा थाना पुलिस ने पीट-पीटकर मार दिया गया इनकी पहचान पूर्वी चंपारण जिले के चकिया थाने के राम विहार निवासी मनाउल के पुत्र गुफरान (28) और मुलाजिम के पुत्र तस्लीम आलम (30) के रूप में की गई है मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी अमर केस जीने डुमरा थाना अध्यक्ष चंद्र भूषण कुमार सिंह समेत आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है एसडीपीओ सदर वीर धीरेंद्र से मामले की रिपोर्ट मांगी गई है दूसरी ओर जोनल आईजी नैयर हसनैन खान ने तिरहुत के डीआईजी रविंद्र कुमार को सीतामढ़ी पहुंचकर कैंप करने का निर्देश दिया है इस बीच सदर अस्पताल पहुंचे परिजनों ने शव लेने से इंकार कर दिया है उनका आरोप है कि पोस्टमार्टम से पहले पुलिस ने शव देखने नहीं दिया डीएम रंजीत कुमार ने मामले की जांच के लिए एसडीओ सदर के नेतृत्व में एक टीम गठित की है

    मुजफ्फरपुर के युवक की हत्या तथा बाईक की लूट के आरोप के शक में किया गया था गिरफ्तार 20 फरवरी को सीतामढ़ी मुजफ्फरपुर हाईवे पर उक्त लुटेरों ने लूट के दौरान मुजफ्फरपुर के औराई थाना क्षेत्र के जीवाजोर गांव निवासी सत्यनारायण साह के पुत्र राकेश कुमार की गोली मारकर हत्या कर बाइक लूट ली थी मामले में मंगलवार को क्योंरिटी ने चकिया पुलिस के सहयोग से गुफरान और तस्लीम को गिरफ्तार किया था तस्लीम के पास पूछताछ के लिए डुमरा थाना में रखा गया था थाने में पुलिसकर्मियों ने उन्हें बेरहमी से पिटाई कर अधमरा कर दिया गया स्थिति बिगड़ने पर बुधवार की शाम 4:25 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया वहां चिकित्सकों ने 5:05 गुफरान और 5:20 तस्लीम को मृत घोषित कर दिया इसकी सूचना पर एसडीपीओ सदर डॉ कुमार वीर धीरेंद्र समेत कई अधिकारी सदर अस्पताल पहुंचे दंडाधिकारी की मौजूदगी में शवों का पोस्टमार्टम कराया गया शवों पर करंट लगने जैसे निशान पाए गए हैं इधर एसडीपीओ सदर ने पुलिस की पिटाई से मौत की बात को खारिज कर दिया है कहा है कि दोनों से हाजत में मिलने कई लोग आए थे किसी मुलाकाती द्वारा कुछ खिला दिया गया होगा बताया कि मामला संदेह स्पसद हैं पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई होगी

    आईजी ने मांगी रिपोर्ट सीतामढ़ी में डीआईजी कर रहे हैं कैंप:
    पुलिस की गिरफ्त में दो लड़कों की मौत के मामले पर जोनल आईजी नैयर हसनैन खान ने गंभीरता से संज्ञान लिया है फिलहाल थानाध्यक्ष समेत आठ पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है साथ ही तिरहुत रेंज के डीआईजी रविंद्र कुमार को सीतामढ़ी पहुंचकर कैंप करने का निर्देश दिया है आईजी ने बताया कि पूरे घटनाक्रम पर डीआईजी से रिपोर्ट मांगी गई है फाइनल रिपोर्ट के आधार पर घटना में शामिल अन्य सभी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी पूरे मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के मापदंड के तहत ही सारी कार्यवाही होगी

  • सीतामढ़ी में इमारत ए शरिया की ओर से विशेष तरबियाती इजलास जारी

    अमीरे शरीअत मौलाना मोहम्मद वली रहमानी साहब ने सुनी लोगों की समस्या एँ
    मिल्लत टाइम्स,सीतामढ़ी:सीतामढ़ी में इमारत शरिया की निगरानी में दो दिवसीय विशेष सत्र चल रहा है, अमीर शरीयत , हज़रत मौलाना सैयद मुहम्मद वली रहमानी की अध्यक्षता में इजलास का पहला सत्र 6 मार्च बुधवार को सुबह 10:30 बजे मदरसा रहमानीया मेहसौल के समीप मैदान मे शुरू हुआ। इस इजलास में अपने विचार रखते हुए अमीरे शरीयत ने शिक्षा पर ज़ोर देते हुए कहा की माँ बाप की ज़िम्मेदारी है की अपने बच्चों के शिक्षा का प्रबन्ध करें एवं उन्हें नैतिक शिक्षा भी दिलाएँ । उन्होंने आपस के झगड़ों को समाप्त करने एवं मिल जुल कर आपसी प्रेम , भाई चारा एवं अमन चैन से रहने की अपील की ।

    उन्होंने कहा की इमारत शरीया के इस इजलास का मकसद यह है कि गाँव गाँव से इमारत शरिया के संमबंध को मजबूत किया जाए एवं आप से आप की समस्याएँ सुनी जाएँ एवं उन के समाधान कि कोशिश की जाए ।
    इमारत शरीया के सचिव मौलाना अनिसुर रहमान कासमी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि इस्लाम की बुनियादी शिक्षाएँ सभी के लिए समान हैं जिस तरह एक मुसलमान की जान व माल इज्ज़त व आबरू कि हिफाज़त करना हमारे लिए ज़रूरी है उसी प्रकार एक गैर मुस्लिम की जान माल इज्ज़त व आबरू की रक्षा करना हमारा धर्म है । उन्होंने समाजिक बुराइयों , दहेज, तिलक कि रस्म, शराब एवं सूद की बुराई बयान करते हुए समाज को इन बुराइयों से पाक करने का आह्वान किया । इमारत शरिया के उप सचिव मौलाना स्नाउल होदा कासमी ने अपने वक्तव्य में इमारत शरिया के विभिन्न कामों पर विस्तार से चर्चा की और कहा कि इमारत शरिया एकता , अमन एवं भाई चारे की तालीम देता है और मिल जुल कर रहने एवं सामाजिक विकास के लिए काम करने पर ज़ोर देता है। इमारत शरिया के उप सचिव मौलाना शिबली अल कासमी ने इमारत शरिया के प्रतिनिधियों की जिम्मेदारियों को बयान किया और कहा कि इमारत शरीया के प्रतिनिधि कि ज़िम्मेदारी है कि वह अपने गाँव एवं सामज की चहुमुखी विकास एवं उनके नैतिक , शैक्षिक एवं आर्थिक बेहतरी के लिए कोशिश करे । इस पहले सत्र का संचालन इमारत शरीया के उप सचिव मौलाना मुफ़्ती सोहराब नदवी ने किया। इस इजलास मे मौलाना मुफती नजर तौहीद मुजाहिरी काजी ए शरीयत चतरा झारखंड एंव काजी इमरान साहब बालासाथ, मौलाना कमर अनीस कासमी भी उपस्थित थे। वहीं इजलास मे शहर के गणमान्य मदरसा रहमानिया मेहसौल के अध्यक्ष मो अरमान अली,सचिव जफर कमाल अलवी, मौलाना इजहार,मो कमर अखतर, शफीक खान,मो मुर्तुजा,अनवारुल्लाह फलक सबीह अहमद,मो आरिफ हुसैन, मो असद, डॉ साजिद अली खान ,शमस शाहनवाज ,हाजी मो हसमत हुसैन, हाजी मोख्तार आलम, हाजी अब्दुल्लाह रहमानी, बसारत करीम गुलाब, पत्रकार मो सदरे आलम नोमानी, मुन्ना तसलीम ,फैयाज आलम बबलू, सिफ्फत हबीबी, मो मुराद, सिकन्दर हयात,मो मजहर अली राजा समेत हजारो लोग शामिल थे।

  • सीतामढ़ी में दो दिवसीय खुसूसी इजलास की तैयारियां मुकम्मल आज रात पहुंचेंगे अकाबिर इमारत शरिया

    शाकिब रजा/मिल्लत टाइम्स,सीतामढ़ी: बिहार के सीतामढ़ी जिला में दो दिवसीय खुशुसी तरबीती इजलास की तैयारियां मुकम्मल हो गई है सीतामढ़ी जिला में इमारत शरिया फुलवारी शरीफ पटना के द्वारा किया जा रहा है यह प्रोग्राम 6 तथा 7 मार्च को दो दिवसीय होगा आपको बता दें कि यह प्रोग्राम इमारत ए शरिया की तरफ से क्या जा रहा है

    बिहार के कई जिलों में किया गया है और कल यानी 6 तथा 7 मार्च को सीतामढ़ी जिला में भी किया जा रहा है बता दें कि इस प्रोग्राम की सदारत अकाबिर इमारत ए शरिया मौलाना सैयद मोहम्मद वली रहमानी साहब करेंगे औ‌र आज रात किसी भी समय उनका यहां आगमन हो सकता हैं

    इस प्रोग्राम में सीतामढ़ी जिला के तरफ से भी सभी लोगों ने भी खूब तावून किया है जिसमे इस्तकबालया कमेटी के सभी लोग इस काम को बखूबी अंजाम दे रहे हैं इस प्रोग्राम मे 25 से 30000 हजार लोगों के आने की संभावना है

  • सरस्वती पूजा का चंदा वसूलने पर बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर के डिप्टी रजिस्ट्रार प्रोफेसर आतिफ को पिटा

    मिल्लत टाइम्स,बिहार:पूर्व JNU स्कॉलर और वर्तमान में बी.आर. अम्बेडकर विश्वविद्यालय मुज़फ्फ़रपुर (बिहार) के Deputy Registrar प्रोफेसर आतिफ़ रब्बानी भाई को कल सरस्वती पूजा के लिए चंदा वसूलने के लिए मारा-पीटा गया!
    जब से बिहार में नीतीश कुमार बनाम (शुशाशन बाबु) मोदी और अमित शाह कि गोदी में जाके बैठा है तब से ही हर दिन बिहार में किसी ना किसी का हत्या, बलातकार, खुले आम मार पीट की वारदातें होती रहती है।

    नीतीश सरकार में बिहार में इतना दंगा हुआ, भागलपुर ,दरभंगा , छपरा, रोसड़ा दलसिंहसराय, औरंगाबाद, सीतामढ़ी में जिंदा जला दिया गया लेकिन शुशाशन बाबु चु तक नहीं बोले।

    हाजीपुर में अभी तक कुल 21 हत्या हुई…..कितनो का आँसू पोछा नीतीश जी ने?

    अभी चन्द दिनों पहले रेल हादसा में सेकङो लोगों की जाने चली गई, कई लोग अस्पताल में भर्ती हुए लेकिन शुशाशन बाबु गूँगा बने रहें।
    ना शिक्षा, न स्वास्थ,न रोजगार और न हिं भ्रष्टाचार पर कुछ बोलते हैं नीतीश जी आखिर क्यों?
    …ना ही बिहार के लिए कोई नई सोच..

    अभी पिछले हफ़्ते इन्ही गुण्डों ने आतिफ़ भाई को ऊँचा चंदा देने के लिए धमकाया था! इसका मतलब साफ़ है कि कल वो जान बूझकर निशाना बनाये गये! क़ानून व्यस्था इतनी अप्रभावी है कि एक हफ़्ते पहले धमका कर जाते हैं और फिर आकर बुरी तरह पीट जाते हैं! ज्ञात हो कि तीन-चार महीने पहले प्रोफेसर संजय कुमार (पूर्व JNU स्कॉलर) को महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, मोतिहारी में लगभग जान से मार हीं दिया गया था!

    ध्यान रहे कि पूजा के नाम पर चंदा वसूलने को वहाँ के एसएसपी ने रंगदारी घोषित कर रखा है फिर भी गुंडई का आलम ये है कि यूनिवर्सिटी के डिप्टी रजिस्ट्रार तक को गुण्डे ख़ुलेआम पीट दे रहे हैं तो आम दूकानदारों और लोगों का क्या होता होगा! कहने को तो सरस्वती शिक्षा की देवी मानी जाती हैं, और ये गुण्डे उन्हीं ‘शिक्षा की देवी’ की पूजा के नाम पर शिक्षक को ही पीट रहे हैं!

    आतिफ़ भाई एक शानदार स्कॉलर हैं. वो अख़बारों, मैगजीनों और शोध पत्रिकाओं में आर्टिकल लिखते रहते हैं और निहायत सेक्युलर और हँसमुख इंसान हैं!

    रात में जब पता चला तब से चिंतित और गुस्से में हूँ! ऐसी घटनाओं के ख़िलाफ़ हमें खुलकर आना होगा! धर्म के नाम पर हिंसा और गुंडई पहले से अधिक जस्टिफाई होने लगी है!

    आतिफ़ भाई हम सब आपके साथ हैं! पुरा जे एन यू आपके साथ हैं इस देश कि आम जनता आपके साथ हैं।
    तबरेज हसन।
    पुर्व संयुक्त सचिव छात्र संघ जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली।

  • बिहार:कल से शुरू होगी इंटर की परीक्षा,13 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं होंगे शामिल

    मिल्लत टाइम्स,पटना:बिहार बोर्ड द्वारा आयोजित इंटर की वार्षिक परीक्षा बुधवार से शुरू होगी। परीक्षा के लिए राज्यभर में 1339 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इस परीक्षा में कुल 13,15,371 छात्र-छात्राएं शामिल होंगे, जिसमें 7,62,153 छात्र एवं 5,53,198 छात्राएं हैं। इसमें कला संकाय में 5,63,311 , विज्ञान संकाय में 6,87,059, वाणिज्य संकाय में 64,267 विद्यार्थियों तथा वोकेशनल में 734 विद्यार्थी शामिल हैं।

    इंटर की परीक्षा के लिए पटना जिला में कुल 82 परीक्षा केन्द्र बनाये गये हैं, जिसमें शामिल होने के लिए कुल 71,313 छात्र हैं। इनमें 31,847 छात्राएं एवं 39,466 छात्र हैं। पटना जिला में कुल 82 परीक्षा केन्द्रों पर 41,252 विद्यार्थी विज्ञान संकाय में, 22,562 विद्यार्थी कला संकाय में, 7,363 विद्यार्थी वाणिज्य संकाय में एवं 137 विद्यार्थी वोकेशनल में शामिल होंगे।

    सभी परीक्षा केन्द्रों पर 200 मीटर की परिधि में किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। सभी परीक्षा केन्द्रों पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल एवं दण्डाधिकारी की व्यवस्था की गई है पूरे राज्य में महिला परीक्षार्थियों के लिए कुल 573 परीक्षा केन्द्र बनाये गये हैं।

    परीक्षा के बेहतर संचालन के लिए बिहार बोर्ड के (माध्यमिक प्रभाग) में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। कंट्रोल रूम ने मंगलवार से ही काम करना शुरू कर दिया। 16 फरवरी तक कंट्रोल रूम 24 घंटे काम करेगा। परीक्षा संचालन के क्रम में किसी प्रकार की समस्या होने पर समिति के नियंत्रण कक्ष के दूरभाष संख्या- 0612-2230009 तथा फैक्स नं॰- 0612-2222726 पर फोन कर समस्या का समाधान पाया जा सकता है। इसके अलावा वाट्सएप ग्रुप के जरिए भी अधिकारी ऑनलाइन रहेंगे और परीक्षा के संचालन का काम करेगे।

    परीक्षार्थी को दोनों पालियों में परीक्षा प्रारम्भ होने के 10 मिनट पहले तक परीक्षा केन्द्र पर प्रवेश दिया जाएगा। पहली पाली में सुबह 9.30 बजे से शुरू होगी, इसके लिए 9.20 बजे तक प्रवेश दिया जाएगा जबकि दूसरी पाली 1.45 बजे से शुरू होगी इसके लिए 1.35 बजे तक प्रवेश दिया जाएगा।

    पहले दिन बायोलॉजी, फिलॉस्फी की परीक्षा
    इंटर परीक्षा के पहले दिन पहली पाली में साइंस के परीक्षार्थियों के लिए बायोलॉजी विषय की परीक्षा है जबकि वोकेशनल कोर्स के छात्रों के लिए आरबी हिंदी विषय की परीक्षा है। दूसरी पाली में आर्ट्स के छात्रों के लिए फिलॉस्फी तथा कॉमर्स के छात्रों के लिए एंटरप्रेन्योरशिप विषय की परीक्षा है। परीक्षा की सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं

    एडमिट कार्ड में गड़बड़ी वाले भी दे सकेंगे परीक्षा
    बिहार बोर्ड ने निर्देश दिया है कि एडमिट कार्ड में गड़बड़ी वाले छात्र भी परीक्षा दे सकेंगे। खासकर लिंग में गड़बड़ी वाले परीक्षार्थियों के लिए कहा गया है कि उन्हें प्रवेश पत्र में अंकित परीक्षा केंद्र पर ही परीक्षा में शामिल कराया जाएगा। केंद्राधीक्षक महिला एवं पुरुष परीक्षार्थियों को अलग-अलग बैठने की व्यवस्था करके उन्हें परीक्षा में शामिल कराएंगे। गड़बड़ी में सुधार से संबंधित निर्णय बाद में लिया जाएगा। इसके अलावा कॉपियों में नाम में प्रिटंग में गड़बड़ी, ओएमआर रोलशीट में डाटा में गड़बड़ी होने पर भी छात्र को परीक्षा में शामिल कराया जाएगा। बिहार बोर्ड ने इसके लिए विस्तृत निर्देश सभी केंद्राधीक्षकों को भेजा है।

  • पटना आकांक्षा रैली:राहुल का मोदी पर वार कहा किसान को 17 रुपये देकर संसद मे 5 मिनट बजाई तालियां

    मिल्लत टाइम्स,पटना:कांग्रेस बिहार में ‘जन आकांक्षा रैली’ के बहाने अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी है. इसके तहत ही पार्टी ने 30 साल बाद आज पटना के गांधी मैदान में रैली का आयोजन किया. इस रैली में राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव समेत महागठबंधन के अन्य नेता शामिल हुए. इस रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने बजट में किसानों के लिए की गई घोषणाओं को उनका अपमान बताया. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार पूंजीपतियों के लिए तो खूब पैसे देती है, लेकिन किसानों को 17 रुपये देती है. यह किसानों का अपमान है.

    राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नोटबंदी दुनिया का सबसे बड़ा घोटाला है. मोदी कहते हैं कि हर आदमी को 15 लाख देंगे, लेकिन यहां कोई ऐसा है जिसे मिला है. उन्होंने कहा कि बिहार में विपक्ष की सरकार आने वाली है. इसके गहरे कारण हैं. मोदी जी जहां जाते हैं बड़े बड़े वादे कर जाते हैं. नीतीश जी की भी यही आदत है. लेकिन वादे पूरे नहीं किए जाते हैं. कांग्रेस नेता ने कहा कि किसान को 17 रुपये देना उनका अपमान करना है.

    तंज कसते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि बजट में मोदी सरकार ने बड़ी घोषणा की. बीजेपी के नेताओं ने कहा कि ऐतिहासिक निर्णय लिया है, और पांच मिनट तक उन्होंने धड़ाधड़ तालियां बजाईं. किसानों के लिए उन्होंने ऐतिहासिक काम किया. मोदी जी यूं ताली बजा रहे हैं. पता है उन्होंने क्या ऐतिहासिक काम किया है? किसानों को 17 रुपये दिए और किसान के परिवार के लिए दिन के साढ़े तीन रुपये दिए…तो मोदी जी की सरकार ने किसानों को ये दिए और बीजेपी के मंत्री धड़ाधड़ संसद में ताली बजाते हैं.

    राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार अंनिल अंबानी को 30 हजार करोड़ रुपये देती है, नीरव मोदी को 35 हजार करोड़ रुपये और विजय माल्य को 10 हजार करोड़ देती है, लेकिन हिन्दुस्तान के किसानों को साढ़े तीन रुपये देती है. मोदी सरकार का यही ऐतिहासिक फैसला है? राहुल गांधी ने कहा कि मोदी जी ने देशवासियों से 15 लाख रुपये देने का वादा किया था, लेकिन किसी के खाते में ये पैसे आए क्या? मोदी सरकार ने 17 रुपये देकर किसान का अपमान किया है.

    बिहार को फिर गौरवशाली बनाएंगे
    राहुल गांधी ने कहा कि मैं झूठा वादा नहीं करता. आज पटना यूनिवर्सिटी की हालत खराब है. हम सत्ता में आते ही पटना यूनिवर्सिटी को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देंगे. उन्होंने कहा कि पहले बिहार शिक्षा का केंद्र होता था, आज बेरोजगारी का केंद्र है. आप गुजरात जाते हो, महाराष्ट्र जाते हो तो बीजेपी के लोग आपको मार कर भगाते हैं. हम बिहार को फिर गौरवशाली बनाएंगे.

    कांग्रेस नेता ने कहा कि पहले हरित क्रांति पंजाब-हरियाणा से शुरू हुई थी, अब मैं चाहता हूं कि अगली हरित क्रांति राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में हो और इसमें बिहार का नाम भी शामिल हो. मैंने राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों को कह दिया है कि किसान के लिए फ़ूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाइए. अगर आप हमें मौका दोगे तो हम बिहार के किसानों को भी समृद्ध बनाएंगे.

    तेजस्वी बोले-राहुल गांधी बनेंगे PM
    वहीं तेजस्वी यादव ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की जिम्मेदारी है कि किस तरह से सहयोगी दलों को साथ लेकर चलना है. क्योंकि सबको मिलकर बीजेपी को हराना है. इस दौरान तेजस्वी यादव मोदी सरकार और बीजेपी पर जमकर बरसे. उन्होंने कहा कि मेरे पिता शेर हैं. वह उनकी (बीजेपी) गीदड़ भभकी से डरने वाले नहीं हैं. राजद नेता ने कहा कि लोग हमसे पूछते हैं कि आप राहुल गांधी को पीएम के तौर पर स्वीकार करेंगे. मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री के योग्य हैं. वह योग्य नेता है. लेकिन उन्हें सहयोगियों को लेकर कैसे चलना है, इसकी भी उनकी जिम्मेदारी है.

    गौरतलब है कि मंच पर पहुंचने से पहले राहुल गांधी ने महात्मा गांधी की मूर्ति पर पुष्प अर्पित किए. इसके बाद वह मंच पहुंचे, जहां बिहार कांग्रेस और महागठबंधन के नेताओं ने उनका स्वागत किया.

    बता दें कि 30 साल बाद कांग्रेस ने पटना में अपने बलबूते इस रैली का आयोजन किया था. इससे पहले 1989 में कांग्रेस के दिवंगत नेता राजीव गांधी ने इसी गांधी मैदान में रैली का आयोजन किया था. कांग्रेस ने इस रैली को कामयाब बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी. पटना की सड़कों और चौराहों को पोस्टरों व बैनरों से पाट दिया गया. कांग्रेस के विधायक से लेकर बिहार के कई विपक्षी सांसद इस रैली को सफल करने में जुटे रहे.

    कांग्रेस की रणनीति
    आम चुनाव 2019 में अब बहुत थोड़ा वक्त बचा है. कांग्रेस बिहार में महागठबंधन के साथ मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश की जोड़ी को शिकस्त देने के लिए बिसात बिछा रही है. बीजेपी और जेडीयू ने पहले ही 17-17 सीटों पर बंटवारा करके अपनी चाल चल दी है. अब कमान राहुल के पास है. राहुल नई रणनीति के साथ मैदान में हैं. रैली की कामयाबी कांग्रेस के लिए एक साथ कई मोर्चों पर मददगार होगी. लिहाजा पार्टी के 27 विधायकों ने पूरी ताकत झोंक दी है. इससे न सिर्फ बिहार में मतदाताओं को एक नया संदेश जाएगा बल्कि सहयोगियों के साथ सीटों की सौदेबाजी में भी ताकत बढ़ेगी. इस शक्ति प्रदर्शन पर एनडीए की निगाहें तो जमी ही है. लेकिन साथ ही महागठबंधन के दलों की नजरें टिकी हैं. दरअसल कांग्रेस का जनाधार लौटा तो उसका सीधा असर विरोधियों के साथ ही सहयोगी दलों पर भी पड़ेगा.(इनपुट आजतक)

  • पटना:लिटरेचर फेस्टिवल मे रहा प्रवासी भारतीयों,प्रर्यावरण,कला,संस्कृति और शहरों की कहानियों के नाम

    पटना के लेखक अरुण सिंह की किताब “पटना एक खोया हुआ शहर” और गगन गिल की कविता संग्रह “थपक थपकत दिल”और “मैं जब तक आई बाहर”का किया गया विमोचन

    मिल्लत टाइम्स,पटना:पटना लिटरेचर फेस्टिवल के तीसरे दिन आज की शुरुआत हर शहर कुछ कहता है सत्र से हुआ। सत्र में पटना कलम पर लिखने वाले पत्रकार अरुण सिंह, पत्रकार विकास झा और हिमाचल के साहित्यकार प्रत्युष गुलेरी और पत्रकार चिंकी सिंहा ने किया। विकास झा ने केदारनाथ अग्रवाल की किताब धरतीपुत्र के बारे में बताते हुए कहा कि जिस शहर में रहते है सिर्फ वही हमारी जिम्मेदारी नही है। बल्कि पूरी वसुंधरा हमारी है। मेरा जन्म दरभंगा में हुआ मैं सीतामढ़ी का हुआ अब किस शहर को मैं अपना कहूँ। डोमनिक लोपियर ने कोलकाता पर सिटी ऑफ जॉय लिखा। अब सोचिये इतनी दूर से कोई आकर कोलकाता पर लिखता है जो उस शहर का पर्याय हो जाता है। पटना फल्गु नदी की तरह है जहाँ ऊपर केवल रेत ही रेत है और नीचे पानी ही पानी। पत्रकार और साहित्यकार अवधेश प्रीत ने अशोक राजपथ के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि मैं अपने घर से जहाँ भी जाता हूँ अशोक राजपथ मेरे साथ जाता है। पटना एक वाहिद शहर और अशोक राजपथ एक वाहिद शहर है। इसपर एक ओर तो तमाम कॉलेज है वही दूसरी ओर उनसे जुड़ी हुई बाजार है। मैं ढूंढता रहा कि क्या ऐसा कोई शहर जहा एक तरफ तमाम कॉलेज है और दूसरी ओर आबादी। बिहार में जितने आंदोलन हुए उसका गवाह रहा है।

    पटना एक खोया हुआ शहर” के बारे में बताते हुए अरुण सिंह ने कहा कि 1541 में जब शेरशाह ने अपना फोर्ट बनवाया उस समय के बाद पटना का पुनरुथान हुआ । इस किताब में 1541 से लेकर अब तक पटना के बदलने की कहानी है। 1641 के बाद यह शहर तेजी से बदलने लगा। पहले इसका नाम पट्टन था । पटना नाम शेरशाह का दिया हुआ है। मुगल काल मे पटना व्यापर का केंद्र बना। पटना की शोहरत बढ़ गयी थी ईरान इराक से भी यात्री पटना आने लगे थे। यह से सिल्क पर्शिया जाता था । पटना का 2500 सालों का इतिहास रहा है। यहां जो ट्रेवलर आये अलग अलग देशों के मिर्ज़ा मोहम्मद बहबहानी थॉमस सादिक, अल त्रिवनिंग, मनूची, एम्मा रोबर्टा थॉमस जैसे यात्रियों ने जो लिखा उनसे तात्कालिक पटना का पता चलता है। यह किताब उन्हीं संस्मरणों को आधार बना का लिखी गई है।

    त्रिपुरारी शरण ने कहा की आज प्रकृति को बचाना बहुत जरुरी हैं क्लामेट चेंज के परिवर्तन को रोकने के लिए सभी को प्रयास करना चाहिए. रत्नेश्वर सिंह ने कहा की प्रकृति में बदलाव स्वत :होता हैं . सुभाष शर्मा ने कहा की जलवायु दीर्घकाल देखा जा सकता हैं लेकिन मौसम को कुछ दिनों तक ही !उन्होंने कहा की विश्व में 42 लाख लोग सालाना प्रदुषण से मरते हैं और भारत में 20 लाख लोग. निर्देश निधि ने कहा की नदी की अपनी संस्कृति होती हैं . अपना जीवन होता हैं .उन्होंने ये भी कहा नदियों को साफ करने का जिम्मा सिर्फ सरकारों का ही नहीं बल्कि देश के हरेक नागरिकों का भी होता हैं।
    कानून ,समाज और स्वतंत्रता के सत्र के दौरान छतीसगढ़ से आई रवीना बरिहा ने कहा कि मानव का प्राकृतिक व्यवहार होता है कि सभी चीजों को धारणाओं में ही देखता है! ज्ञान के दायरे के विकास नहीं होने के कारण हमारे किन्नर समाज को नजरंदाज किया जाता है! स्वतंत्रता की नीव पर ही कोई स्वच्छ समाज का निर्माण हो सकता है! भारत में जब जब बौद्धिक विकास हुआ है किंनरो को स्थान मिला है. रवीना ने किन्नरों के हालात पर एक कविता सुनाया छोटा सा एक बच्चा जनमा आचल की छांव में . पटना की ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट रेशमा प्रसाद ने कहा कि वे आठ सालो से साहित्य, आर्थिक, कला में अपने समुदाय को अधिकार दिलाने के लिए लर रही हूं !साहित्य में किन्नर विमर्श को अधिक से अधिक शामिल किया जाया जानी चाहिए! अभी भी हमारी सामाजिक आजादी पथ पर ही है! हक की लड़ाई का कोई अंत नहीं होता है।

    कविताएं कुछ कहती है नामक सत्र में मगही कवि उमाशंकर, बज्जिका कवि पराशर जी और अंगिका से आरोही जी ने अपनी बात रखी। इस सत्र का संचालन आराधना प्रधान ने किया। उमाशंकर जी ने अपना परिचय देते हुवे कहा कि ‘धरती के की हाल बतइयो,पूछ ल जाके सविता से हमरा से हमार हाल न पूछही,पूछ ल जाके कविता से’. उन्होंने अपनी अंतिम बात रखते हुए मथुरा प्रसाद और रामनरेश वर्मा की कविता को पढ़ते हुए अपनी बात खत्म की. पराशर जी ने कहा कि भक्तिकाल किसी भी भाषा के लिए स्वर्णिम काल है. उन्होंने कहा कि बज्जिका भाषा के लिए 20वीं शताब्दी ही उसकी आधुनिक काल है. रहमत उल्ला पहला महाकाव्य हैं बज्जिका के लिए जिनका पहला महाकाव्य जमुनामा जो 1950 में आई. उन्होंने बताया कि बज्जिका में दो रामायण लिखी गईं हैं एक डॉ०अवधेश और दूसरा डॉ०नवल किशोर श्रीवास्तव के द्वारा. उन्होंने कहा कि बाजारवाद के दौर के पिछड़ा हुआ है. ‘तेजाब शाम के बर्साइह हमरा गाँव मे’ कविता को पढ़ते हुए अपनी बात को खत्म किये. आरोही जी ने अंगिका के बारे में बताते हुए कहा कि अंगिका के पुनर्जन्म हो रहा है लेकिन मीडिया उसे आगे नही बढ़ने दे रही है. अपनी “पोती”शीर्षक नामक कविता को पढ़ते हुए आरोही जी अपनी बातों को खत्म किया.

    कोई बतलाये की हम बतलाये क्या-ग़ालिब सत्र में शीन काफ निज़ाम ने कहा कि ग़ालिब को उनके शायरी से ज्यादा उनके खतों से जाना जा सकता है . उनकी शायरी तो उनके खतों से निकली है . जगजीत सिंह ग़ालिब के ग़ज़लों को गाना चाहते थे लेकिन गाने से ही पहले उनकी मृत्यु को गयी। उन्होंने हँसते हुए कहा कि ग़ालिब के शायरी को पढ़ते वक्त लगता है की वो टेलीविज़न देख-देख के लिखे हैं। कासिम खुर्शीद ने कहा कि ग़ालिब साहब कहते थे कि ये जो मेरे कलम की खरखराहट है वो खरखराहट नही कोई फरिस्ता है जो मेरे कलम को आगे बढ़ा रहा है. उन्होंने कहा कि अच्छा शायर वो है “जो सवाल पूछता है, सवाल खत्म नही होते और जवाब खत्म हो जाते हैं”और ग़ालिब साहब सवाल पूछते थे इसीलिए वो मुझे पसंद हैंउन्होंने कहा कि ग़ालिब साहब को मोमिन की एक शायरी बहुत पसंद थी “तुम मिरे पास होते हो गोया,जब कोई दूसरा नही होता”और इसीलिए ग़ालिब को मोमिन पसंद थे, ग़ालिब ये भी कहते थे कि ये जो मोमिन ने लिखा है वो मुझे लिखना था।
    मीडिया में उभरती प्रवासी की छवि मारिसश से आए रामदेव धुरंधर ने कहा भारत की मीडिया और हमारे देश मीडिया में काफी अंतर हैं !भारत की मीडिया काफी हद तक स्वतंत्र होकर काम करती हैं लेकिन हमारे देश में मीडिया हमेशा फ़्रांसिसी के हाथों में रहा हैं . उन्होंने ये भी कहा हमारे यहाँ प्रधानमंत्री भी भारतीय मुल के ही हैं . पुष्पेंद्र ने मीडिया में प्रवासी की छवि पर बोलते कहा की हमारी मीडिया प्रवासीयों कोई लेकर चर्चा ही नहीं करता हैं . हमारी मीडिया प्रवासीयों, रिलीफ कैंपो के मुद्दे पर फर्क ही नहीं समझता हैं . अनंत विजय ने कहा की प्रवासियों को लेकर मीडिया क्यों नहीं बात करता हैं !इसका समाधान क्या हैं? और इसको बहस का मुद्दा बनाना चाहिए !
    साहित्य और कला का संरक्षण और नैतिकक मूल्यों पर उसका प्रभाव सत्र में इम्तियाज अहमद ने कहा कला और साहित्य हमारे नैतिक मूल्यों से जुड़े हुए हैं हिंदुस्तान की परम्परा समावेशी रही हैं .उनको संरक्षण की जरुरत हैं . शक्ति सिंह ने कहा भारत में दर्शन में कई रूप हैं .भारत में इतिहास और साहित्य हमेशा साथ साथ चलता हैं .साहित्य अपने शब्दो से विचारों को व्यक्त करता हैं .साहित्यकार और इतिहासकार तथ्य के आगे नहीं जाते हैं. व्यास जी ने कलाओ, साहित्य का संरक्षण पर जोड़ दिया. उन्होंने यूरोप के रेनेशा पर चर्चा की व्यास जी ने यह भी कहा अगर मनुष्यता को बचाना हैं तो सभ्यता और साहित्य का संरक्षण बहुत जरूरी हैं . विनोद ने कहा हमारे देश में सांस्कृतिक भूख ज्यादा ही हैं और हिंदुस्तान का लेखक हमेशा गरीब ही रहा हैं ! रंगकर्मी अनीश अंकुर ने कहा की बहुत जरूरी हैं कला और साहित्य का संरक्षण करके आने वाली पीढ़ी को उनसे अवगत कराना. कैलाश झा ने मधुबनी पेंटिंग, पंजी आदि पर चर्चा की

    मैथिली एक संस्कृति सत्र में तारानंद वियोगी- ने कहा कि विद्या और व्यक्तित्व ही मिथिला की पहचान है। मैथिली समुदाय अतीत का मारा हुआ समाज है। 1910 में अंग्रेज सरकार मैथिली को राष्ट्रीय अधिकार दे रही थी लेकिन यादव महासभा के विरोध पर बिल पास न हो सका। रविन्द्र नाथ टैगोर ने मैथिली को अपनी मौसी भाषा कहा था। वर्तमान की मैथिली पुरुस्कार वितरण बेहद चिंता जनक। मिथिला पेंटिंग में युवाओं के प्रवेश से यह कला अब ग्लोबल हो चुका है, मैथिली की बुलंद आवाज जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल तक पहुंचा जिसमें मैथिली के लिए सत्र रखा गया था . डॉ उषा किरण खान ने कहा कि मैथिली संस्कृति समावेशी नहीँ है इसलिए मैथिली संस्कृति का विस्तार नही हुआ। कालजयी रचना को भाषा कभी नहीं भूलती है, जो धरती पर है वही तो संस्कृति है। भाषा अस्मिता अपने आप मे इतनी बड़ी बात है कि बांग्लादेश राष्ट्र का निर्माण हो गया था। मैथिली पुस्तकों का अनुवाद होना चाहिए और अनुवाद विभाग का गठन करके अपने बेहतरीन पुस्तकें विश्व साहित्य में जाय. कार्यक्रम में गगन गिल के पुस्तक का लोकार्पण उषा किरण खान आलोक धन्वा, राम बचन राय शीन काफ निज़ाम के द्वरा किया गयालेखकों ने गगन गिल और उनके लेखन शैली पे प्रकाश डाला। गगन गिल ने अपने चुनिंदा कविताओं का पाठ किया।