Category: बिहार

  • नज़रिया – मुस्लिम प्रतिनिधित्व को कुचलने के लिए बेक़रार कन्हैया कुमार

    मौसम के रूख के साथ राजनीति का रूख भी बदलना शुरू हुआ है। जैसे-जैसे सर्दी से बसंत की तरफ बढ़ रहे है तापमान भी बढ़ता जा रहा है। सर्दी तो छंट चुकी है और गर्मी के मौसम मे क़दम रख चुके है। मौसम के साथ-साथ चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद राजनीति का तापमान भी बढ़ना शुरू हुआ है। टिकट एवं सीट बँटवारे को लेकर बैठक पर बैठक हो रहे है। गठबंधन को लेकर भी उधेड़-बुन शुरू है। सभी जाति-विशेष के नेता एवं मतदाता अपनी प्रतिनिधित्व को लेकर बेचैन है। छोटी-छोटी पार्टियां दांवा ठोककर मजबूती के साथ अपना प्रतिनिधित्व माँग रही है। लेकिन बिहार मे लगभग 20 प्रतिशत की आबादी वाले मुसलमानों के प्रतिनिधित्व को समाप्त करने की लगातार कोशिश हो रही है।

    सबसे मज़ेदार बात बेगूसराय को लेकर है। बेगूसराय लेनिनग्राद के नाम से मशहूर है। बेगूसराय क्षेत्र कम्यूनिस्ट पार्टी का गढ़ समझा जाता है। लेकिन यह एक भ्रम से अधिक कुछ भी नहीं है। अभी भी उसी भ्रम को आधार मानकर कम्यूनिस्ट पार्टी बेगूसराय पर अपनी दावेदारी पेश करती है। आज भी महागठबंधन मे कम्यूनिस्ट पार्टी हिस्सेदार बनना चाहती है और बेगूसराय की सीट पर दावा ठोक रही है। जबकि बेगूसराय सीट मुसलमान समुदाय के हिस्से की सीट समझी जाती रही है। पूर्व मे भी जदयु से डॉ मोनजीर हसन सांसद निर्वाचित हुए है। जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव मे राजद की टिकट पर पूर्व विधानपरिषद डॉ तनवीर हसन मोदी लहर मे भी मजबूत लड़ाई लड़े थे। अभी महागठबंधन होने की स्थिति मे कम्यूनिस्ट पार्टी की टिकट पर जेएनयू के पूर्व छात्रनेता कन्हैया कुमार की नज़र बेगुसराय सीट पर है।

    अभी तक यह भ्रम फैलाया जाता रहा है की बेगूसराय कम्यूनिस्ट पार्टी का गढ़ रहा है और इसलिए ही बेगूसराय को लेनिनग्राद के नाम से जानते है। मैं जब कम्यूनिस्ट पार्टी की बात कर रहा हूँ तब सामूहिक रूप से सभी कम्यूनिस्ट पार्टी की बात कर रहा हूँ। लेकिन स्वतन्त्रता से लेकर आजतक केवल 1967 के लोकसभा चुनाव मे ही बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र से कम्यूनिस्ट पार्टी के योगेन्द्र शर्मा चुनाव जीतने मे सफल रहे थे। जबकि 1962 के लोकसभा चुनाव मे मुस्लिम समुदाय से आने वाले अख़्तर हाशमी, 1971 के लोकसभा चुनाव मे योगेन्द्र शर्मा और 2009 के लोकसभा चुनाव मे शत्रुघ्न प्रसाद सिंह कम्यूनिस्ट पार्टी की टिकट से दूसरे स्थान पर रहे थे। 1977 के चुनाव मे कम्यूनिस्ट पार्टी के इन्द्र्दीप सिंह 72096 मत, 1998 मे रमेन्द्र कुमार 144540, 1999 के चुनाव मे सीपीआई(एमएएल) के शिवसागर सिंह 9317 और 2014 के लोकसभा चुनाव मे कम्यूनिस्ट पार्टी के राजेन्द्र प्रसाद सिंह जदयु गठबंधन से 192639 मत प्राप्त करके तीसरे स्थान पर रहे थे। जब्कि 1980, 1984, 1989, 1991, 1996, 2004 के लोकसभा चुनावों मे कम्यूनिस्ट पार्टी बेगूसराय से अपना उम्मीदवार तक नहीं उतार सकी थी। फिर सवाल है की बेगूसराय कम्यूनिस्ट पार्टी का गढ़ कैसे हो गया?

    बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत चेरिया बरियारपुर, साहिबपुर कमाल, बेगूसराय, मठियानी, तेघरा, बखरी और बछवाड़ा विधानसभा का क्षेत्र आता है। चेरिया बरियारपुर से केवल एकबार 1980 के विधानसभा चुनाव मे कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के सुखदेव महतो विधायक चुने गये थे। साहिबपुर कमाल विधानसभा क्षेत्र से अभी तक एक बार भी कम्यूनिस्ट पार्टी चुनाव जीतने मे सफल नहीं रही है। बेगूसराय विधानसभा क्षेत्र से आज़ादी के बाद से अबतक केवल तीन बार ही कम्यूनिस्ट पार्टी चुनाव जीतने मे सफल रही है और आखिरी बार कम्यूनिस्ट पार्टी के राजेन्द्र सिंह 1995 का विधानसभा चुनाव जीते थे। मठियानी विधानसभा क्षेत्र से कम्यूनिस्ट पार्टी तीन बार चुनाव जीतने मे सफल रही है लेकिन सन 2000 मे हुए विधानसभा चुनाव के बाद आजतक कम्यूनिस्ट पार्टी यहाँ से चुनाव नहीं जीत सकी है। तेघरा विधानसभा क्षेत्र मे कम्यूनिस्ट पार्टी लगातार 2010 से ही विधानसभा का चुनाव हार रही है।

    कम्यूनिस्ट पार्टी का पूर्ण रूप से दबदबा केवल दो विधानसभा क्षेत्रों क्रमशः बखरी और बछवाड़ा पर रहा है। लेकिन बखरी सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र से कम्यूनिस्ट पार्टी आखिरी बार 2005 मे चुनाव जीतने मे सफल रही थी। जब्कि बछवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से कम्यूनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार चार बार विधायक चुने गये है और आखिरी बार 2010 का विधानसभा चुनाव जीतने मे सफल रहे थे। सबसे हास्यास्पद बात तो यह है की वर्तमान विधानसभा मे बिहार मे कम्यूनिस्ट पार्टी के मात्र तीन विधायक है और तीनों मे से एक भी बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र से जीतकर नहीं आते है। यानि 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव मे बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सात विधानसभा क्षेत्रों मे से एक भी क्षेत्र से कम्यूनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार चुनाव जीतने मे सफल नहीं रहे थे। प्रश्न फिर वही है की जिस लोकसभा क्षेत्र मे एक भी विधायक नहीं है वह कम्यूनिस्ट पार्टी का गढ़ कैसे हो गया?
    2014 के लोकसभा चुनाव मे बेगूसराय से राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार डॉ तनवीर हसन को कुल 369892 मत प्राप्त हुए थे। जब्कि जदयु समर्थित कम्यूनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार राजेंद्र प्रसाद सिंह को 192639 मत प्राप्त हुआ था। वही 2009 के लोकसभा चुनाव मे कम्यूनिस्ट पार्टी के शत्रुघ्न प्रसाद सिंह को 164843 मत प्राप्त हुआ था। यदि कम्यूनिस्ट पार्टी द्वारा 2009 और 2014 मे प्राप्त किए गये कूल मतों को एकसाथ जोड़ भी देते है फिर भी डॉ तनवीर हसन साहब द्वारा 2014 के मोदी लहर मे प्राप्त किए गये मतों से भी कम है।

    उपरोक्त आँकड़े यह बताने के लिए काफी है की बेगूसराय कभी भी कम्यूनिस्ट पार्टी का मजबूत क़िला नहीं रहा है। बल्कि पूर्वी चम्पारण(मोतीहारी), नालंदा, नवादा, मधुबनी, जहानाबाद इत्यादि ऐसे लोकसभा क्षेत्र है जहाँ से दो या दो बार से अधिक कम्यूनिस्ट पार्टी के सांसद निर्वाचित हुए है। जब्कि बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र से मात्र एकबार ही कम्यूनिस्ट पार्टी को सफलता प्राप्त हो सकी है। लेकिन प्रश्न यह है की आख़िर कम्यूनिस्ट पार्टी क्यों बेगूसराय की सीट ही लेना चाहती है? जब कम्यूनिस्ट पार्टी सामाजिक न्याय और समानुपातिक प्रतिनिधित्व को लेकर इतना चिंतित रहती है तब फिर क्यों बेगूसराय मे मुसलमानों के प्रतिनिधित्व को कुचलने का अथक प्रयास कर रही है?

    एक तर्क है की कन्हैया कुमार राष्ट्रीय स्तर के नेता है इसलिए बेगूसराय की सीट कम्यूनिस्ट के खाते से कन्हैया को मिलनी चाहिये। यह बात सही है की कन्हैया कुमार राष्ट्रीय स्तर के नेता है और कम्यूनिस्ट विचारधारा के ऊर्जावान पथिक है। वह जब राष्ट्रीय स्तर के नेता है तब भारत के किसी भी क्षेत्र से चुनाव लड़ सकते थे। मोतीहारी, नवादा, नालंदा, मधुबनी, जहानाबाद तो कम्यूनिस्ट का गढ़ रहा है और पहले से भी पार्टी के सांसद निर्वाचित होते रहे है फिर बेगूसराय पर ही नज़र क्यों है? अरविंद केजरीवाल दिल्ली से चलकर प्रधानमंत्री मोदी के विरुद्ध बनारस चुनाव लड़ने आये थे। दलित नेता चंद्रशेखर आज़ाद पश्चिमी उत्तरप्रदेश से चलकर मोदी के विरुद्ध बनारस लड़ने का एलान कर चुके है। हार्दिक पटेल ने भी कुछ ऐसा ही मंशा जाहीर किया है। फिर राष्ट्रीय स्तर के नेता कन्हैया कुमार मुसलमान समुदाय के हिस्से मे जाने वाली सीट से ही चुनावी मैदान मे उतरने के लिए क्यों उतावले है? क्या सिर्फ इसलिए की मुसलमानों का समर्थन प्राप्त करके खुद की जीत सुनिश्चित कर सके? यानि की मुसलमानों के गर्दन पर चाकू चलाकर कन्हैया को सुरक्षित किया जा रहा है।

    लेखक़- तारिक अनवर चंपारणी, टाटा सामाजिक विज्ञान संस्था (TISS), मुम्बई से मास्टर डिग्री है और वर्तमान मे बिहार के किसानों के साथ काम कर रहे है

  • रात के अंधेरे में प्रवेश कर पुलिस ने महिलाओं के साथ की बेज्जती एक बुजुर्ग को लात मार खटिया से गिराया निचे,टूटा कमर

    सीतामढ़ी में पुलिस के जरिए दो लड़कों के कत्ल पर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट

    चकिया थाना के रमडिहा गांव के दो मुस्लिम नौजवान को पुलिस के जरिए कत्ल कर दिए जाने के मामले की जांच के लिए पॉपुलर फ्रंट की टीम रंगीला पहुंची जहां टीम ने पाया के या कत्ल पूरी तरह मंसूबा बंद था लोगों ने बताया कि 5 मार्च की रात 12:30 बजे साथ गारी गुफरान पिता मुनव्वर अली के घर पहुंची जिसमें पांच गाड़ी पुलिस की थी दो गाड़ी आम थे पुलिस वालों में करीब 8 ने वर्दी लगाई हुई थी बाकी लोग शादी ड्रेस में थे सभी के हाथ में पिस्तौल था इस ग्रुप को चकिया थाना का इंचार्ज संजय सिंह लीड कर रहा था वह गुफरान के घर गए और उसे वहां से उठा लिया जबकि पुलिस के पास वारंट भी नहीं था इसके बाद करीब 1:30 बजे वह लोग तस्लीम पिता मुलाजिम के घर पहुंचे इसके घर का दरवाजा तोड़ कर अंदर घुसे वह वहां नहीं मिला क्योंकि वह मदरसा में सोया था तो उसके घर से 3 मोबाइल 6 में इमरजेंसी लाइट और साढ़े ₹12000 छीन लिए घर की महिलाओं के साथ बेइज्जती क्या और इसके बाप जिनका पैर और कमर टूटा हुआ है स्टील लगा हुआ है वह खटिया पर सोए थे तो खटिया पर लात मारकर नीचे गिरा दिया उसके पड़ोसियों के घर पर भी बदमाशी की इसके बाद तस्लीम को मदरसा से उठा कर निकल गए जबकि इसके खिलाफ भी वारंट नहीं था सुबह जब फैमिली और गांव के लोग चकिया थाना गए तो थाना इंचार्ज संजय ने सबके साथ बदतमीजी किया और कहा कि वह लोग हमारे पास नहीं है इसी तरह सैदपुर व डुमरा थाना गए वहां भी लोग इंकार करते रहे बाद में किसी तरह पता चला तो लोग सदर अस्पताल सीतामढ़ी पहूंचे जहां पुलिस वालों ने अंदर जाने नहीं दिया और पता चला के पोस्टमार्टम चल रहा है यहां पर भी पुलिस ने कानून से खेलते हुए फैमिली से बगैर इजाजत ही दोनों का पोस्टमार्टम कर दिया जिसे पोस्टमार्टम के बाद चकिया थाना ही लेकर घर आई लाश को देखकर साफ लग रहा था कि पुलिस ने बहुत बर्बरता के साथ इन्हें मारा है यहां तक कि कील और बिजली के करंट का इस्तेमाल भी इनके जिस्म के साथ हुआ था लोगों ने बताया कि इन दोनों में से गुफरान सऊदी रहकर काम करता था अभी घर आया हुआ था फिर सऊदी ही जाने वाला था किसी तरह के गलत काम में वह कभी नहीं रहा था हा तस्लीम एक मर्डर के मामला में कनाल सिंह के साथ मुजफ्फरपुर जेल गया था जहां से अभी जमानत पर रिहा हुआ था 8 मार्च की गिरफ्तारी पर मिल्लत टाइम्स ब्यूरो चीफ सैफुर रहमान ने डुमरा थाना से बात किया तो थाना ने कहा कि इन लोगों को शक की बुनियाद पर पूछताछ के लिए लाया गया था लोगों ने तस्लीम के बारे में कहा कि वाह बेहद गरीब घर का था कामकाज को लेकर कुणाल सिंह जैसे कुछ दबंगों से ताल्लुक था जिसकी वजह से मर्डर मामला में फस गया था लोगों ने बताया कि 5 मार्च की रात उन दोनों की गिरफ्तारी के वक्त कुणाल सिंह को पुलिस के साथ देखा गया था और पुलिस ने अपनी हिफाजत में इसे गांव से भगाया है

    पॉपुलर फ्रंट के राज्य जनरल सेक्रेट्री रियाज मारीफ ने उनके फैमिली से कहा कि अगर आप आगे बढ़ने को तैयार हैं तो फ्रंट आप को मुकम्मल लीगल मदद करेगी और लड़ाई को आखिर तक ले जाएगी दोनों मृतक की फैमिली ने फ्रंट की टीम से कहा कि पुलिस वाले को हमारे बच्चे को मारना ही था तो गोलियों से भून देते हैं लेकिन इस तरह पीट पीट कर ना मार देते उन्होंने कहा कि हमें मुआवजा नहीं इंसाफ चाहिए और हम इसके लिए लरेंगे इस मौके पर टीम में रियाज मारीफ साहब के अलावा अल मोमिनीन फाउंडेशन के चेयरमैन सर्फुद्दीन कासमी एसडीपीआई के मुजफ्फरपुर जिला सेक्रेट्री जावेद इकबाल, पॉपुलर फ्रंट के मुजफ्फरपुर एरिया सदर एहतेशाम ताबिश, पॉपुलर फ्रंट के डॉक्टर , मास्टर मुमताज, मोहम्मद अजीज, मोहम्मद इरशाद, सैयद नासिर साहब शामिल थे

  • सीतामढ़ी:सांसद रामकुमार शर्मा ने किया आचार संहिता का उल्लंघन FIR दर्ज

    मिल्लत टाइम्स,सीतामढ़ी:बिहार के सीतामढ़ी से RLSP (राष्ट्रीय लोक समता पार्टी) के सांसद रामकुमार शर्मा ने आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए सोमवार (11 मार्च) को एम्बुलेंस सेवा की शुरुआत रिबन काटकर की। जिसके बाद सांसद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। गौरतलब है कि रविवार (10 मार्च ) को दिल्ली के विज्ञान भवन में चुनाव आयोग ने आगामी लोकसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा की थी जिसके साथ ही पूरे देश में आचार संहिता लागू हो गई थी। सासंद का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी शेयर किया जा रहा है।
    आचार संहिता लागू होने के बाद नहीं कर सकते उद्घाटन: एम्बुलेंस सेवा की शुरुआत करने के बाद रामकुमार ने एंबुलेंस के साथ खड़े होकर फोटो भी खिंचवाए। बता दें चुनाव आचार संहिता लागू हो जाने के बाद उद्घाटन या शिलान्यास करने की किसी भी नेता को इजाजत नहीं है। साथ ही किसी भी प्रकार की रैली और सभा करने के लिए भी प्रशासन से मंजूरी ली जाती है।

    लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के थोड़ी देर बाद ही सीतामढ़ी से RLSP सांसद रामकुमार शर्मा ने आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए एम्बुलेंस योजना की शुरुआत की। पत्रकारों ने जब उनसे सवाल पूछा तो सांसद जी ने कैमरा बंद करवा दिया, फिलहाल सांसद के खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी है।
    https://twitter.com/UtkarshABP/status/1105329245142896640?s=20

    मीडिया ने किया सवाल तो बंद करवा दिया कैमराः आचार संहिता का उल्लंघन कर जब सांसद से मीडिया ने सवाल किया तो पहले तो उन्होंने किसी भी तरह का जवाब देने से इनकार कर दिया। उसके बाद कैमरे पर हाथ रखकर कवरेज करने से मना कर दिया। हालांकि यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई। आचार संहिता का उल्लंघन करने के बाद डीएम डॉ रंजीत कुमार सिंह ने बताया कि सांसद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

    इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने 10 मार्च की शाम 5 बजे लोकसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है.बहुत सारी परीक्षाएं और महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रमों की तारीखों को आगे-पीछे कर दिया गया है ताकि हर कोई अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सके

    चुनाव आयुक्त ने की चुनावी तारीखों की घोषणाः बता दें बीते रविवार (10 मार्च) को चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने आगामी लोकसभा चुनावों की घोषणा का ऐलान किया था और बताया था कि इस बार के लोकसभा चुनाव सात चरणों में संपन्न होंगे। चुनाव के पहले चरण का आगाज 11 अप्रैल होगा और 19 मई को चुनाव समाप्त होंगे। इस बार उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार में सभी सातों चरणों में चुनाव होगा, वहीं 23 मई को वोटो की गिनती की जाएगी। लोकसभा चुनाव के साथ ही इस बार आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और ओडिशा में विधानसभा चुनाव भी संपन्न कराए जाएंगे।(इनपुट जनसत्ता)

  • सीतामढ़ी मामला:RJD ने सीएम नीतीश को किया बेनकाब ,कहा-अल्पसंख्यकों को किया जा रहा टारगेट

    मिल्लत टाइम्स, पटना:सीतामढ़ी में पुलिस हिरासत में दो युवकों की मौत के मामले में राजद ने नीतीश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. आज राष्ट्रीय जनता दल के विधायक और प्रदेश प्रवक्ता अख्तरुल इस्लाम शाहीन ने कहा कि गुफतान और तसलीम चकिया थाना मोतिहारी के रहने वाले थे. जिनकी सीतामढ़ी पुलिस ने लॉकअप में हत्या कर दी, जो मानवता को शर्मसार करने वाला काम है. मानव अधिकार की हत्या की गई है.
    राजद प्रवक्ता अख्तरुल इस्लाम शाहीन बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब नीतीश कुमार भाजपा के साथ गए है. तब से ही अल्पसंख्यक और दलितों समुदाय के लोगो को टारगेट किया जा रहा है.

    उन्होंने आगे कहा कि पिछले साल राम नवमी के समय भाजपा के द्वारा भारी संख्या में तलवारों की बिक्री की गई थी. उसके बाद से ही सामाजिक सदभाव को बिगाड़ने की कोशिश चल रही है.
    वहीं, उन्होंने हिरासत में हुए युवकों की मौत की न्यायिक जांच करने की मांग की है. यदि इस मामले में 72 घंटों के अंदर कोई त्वरित कार्यवाई नहीं की जाती है तो आचार संहिता लगने के बाद भी हम अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरेंगे. इसी को लेकर आज राजद नीतीश कुमार का अर्थी यात्रा एवं पुतला दहन करेगी.

    राजद ने मांग किया कि –
    उपरोक्त घटना की न्यायिक जांच कराई जाए.
    मृतक के परिजनों को एक – एक करोड़ मुआवजा दिया जाए.
    मृतक के आश्रितों को सरकारी नौकरी दी जाए.
    इस तरह की घटना का किसी के साथ फिर न हो, ऐसा सुनिश्चित किया जाए.(इनपुट सिटी)

  • सीतामढ़ी में पुलिस हाजत में दो मुस्लिम युवकों की हत्या की न्याायिक जांच करायें:माले

    बिहार में कानून का नहीं बल्कि पुलिस राज

    अल्पसंख्यकों के प्रति घृणा की राजनीति का नतीजा है उपर्युक्त घटना.

    भाकपा-माले की राज्यस्तरीय टीम ने किया मृतक के गांव रमडीहा का दौरा.

    12 मार्च को भाकपा-माले व इंसाफ मंच का राज्यव्यापी प्रतिवाद.

    प्रेस रिलीज़, पटना 10 मार्च 2019:भाकपा-माले के वरिष्ठ नेता रामेश्वर प्रसाद ने आज पटना में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सीतामढ़ी के डुमरा पुलिस हाजत में दो मुस्लिम युवकों की बर्बर तरीके से की गई पिटाई के कारण हुई मौत नेे साबित कर दिया है कि बिहार में कहीं से भी कानून का नहीं बल्कि पुलिस राज चल रहा है. भाजपा द्वारा पूरे देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणा का जो माहौल बनाया गया है, उसी का नतीजा है कि अल्पसंख्यकों को कहीं माॅब लिंचिंग का शिकार होना पड़ रहा है तो कहीं हाजत में ही हत्या कर दी जा रही है. आज बिहार में अपराध व हत्याएं आम बात हो गई हंैै, तमाम कानूनी प्रक्रियाओं को अब प्रशासन व पुलिस ने ही किनारे लगा दिया है. बिहार मंे आज पूरी तरह पुलिस व अपराधियों का आतंक राज चल रहा है. सवंाददाता सम्मेलन में उनके साथ इंसाफ मंच के नेता कयामुद्दीन अंसारी व नसीम अंसारी उपस्थित थे.

    उन्होंने कहा कि पूर्वी चपंारण के चकिया थाना के रमडीहा गांव से विगत 5 मार्च की रात्रि में चकिया और सीतामढ़ी के डुमरा थाने की पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए दो मुस्लिम युवकों की हिरासत में हुई मौत की घटना की जांच करने 9 मार्च को भाकपा-माले की जांच टीम रमडीहा गांव पहुंची. इस जांच टीम में पूर्व सांसद रामेश्वर प्रसाद के अलावा इंसाफ मंच के राज्य उपाध्यक्ष आफताब आलम, इंसाफ मंच के  राज्य प्रवक्ता असलम रहमानी,  किसान महासभा के नेता उमेश सिंह, भाकपा-माले के पूर्वी चंपारण जिला सचिव प्रभुदेव यादव, जिला कमिटी के सदस्य विष्णुदेव यादव, जीतलाल सहनी, भाग्य नारायण चैधरी, रसोइया संघ के नेता दिनेश कुशवाहा शामिल थे. जांच टीम ने रमडीहा में मृतक परिजनों व ग्रामीणों से बातचीत की.

    माले की जांच टीम ने मृतक के परिजनों व ग्रामीणों से मुलाकात की. जांच-पड़ताल से साबित होता है कि तसलीम व गुरफान की पुलिस हाजत में हत्या की गई. 5 मार्च की आधी रात में दर्जनों पुलिस जवान दरवाजा तोड़कर घर में घुसे. दोनों को पकड़कर पीटा और फिर थाने में भी बर्बरता से पिटाई की गई. दोनों युवकों की हत्या में भाजपा-जदयू के बड़े नेताओं के हाथ होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है.

    जांच-पड़ताल के बाद भाकपा-माले ने अपनी रिपोर्ट पेश की है. जांच टीम ने सबसे पहले मृतक तसलीम अंसारी, उम्र  – 32 वर्ष, पिता-मोलाजिम अंसारी के घर पहुंची. मृतक तसलीम अंसारी के परिजन, ग्रामीण तनवीर अहमद, पूर्व मुखिया चंदेश्वर सिंह सहित सैंकड़ों गा्रमीणों ने बताया कि 5 मार्च की रात करीब 1 बजे चकिया थाने के इंसपेक्टर संजय कुमार के नेतृत्व में 20-25 पुलिसकर्मियों ने घर का दरवाजा खटखटाया. बाहर से वे कह रहे थे कि तसलीम से मिलना है. तसलीम घर पर नहीं थे. वे मदरसा में सोए हुए हैं. वे मदरसा के चैकीदार थे. इसके बावजूद पुलिस दरवाजा तोड़कर घर में घुस गई और तलाशी लेने लगी. घर से 3 मोबाइल पुलिस ने उठा लिया. फिर वह मदरसा गई और वहां भी तोड़-फोड़ कर मदरसे के अंदर दाखिल हो गई और तसलीम को उठा लियाा. ग्रामीणों ने बताया कि उसपर कुछ मुकदमे अवश्य थे. वे अरब जाने के लिए पासपोर्ट भी बना चुके थे और होली के बाद वहां जाने वाले थे. उक्त बातों की पुष्टि ग्रामीणों ने भी की. 

    सुबह तसलीम के घर वाले चकिया थाना पहुंचे लेकिन उन्हें कुछ भी नहीं बताया गया. दूसरे स्रोत से पता चला कि तसलीम को  सीतामढ़ी के डुमरा थाने की पुलिस रात में ही लेकर चली गई है. 6 मार्च की दोपहर में जब ये लोग डुमरा पहुंचे तो थाने पर महज 2-3 महिला पुलिसकर्मी थीं. जिनसे कोई्र जानकारी नहीं मिली. जब ये लोग सदर अस्पताल पहंुचे तो पता चला कि यहीं पर दोनों युवक हैं और इलाज चल रहा है. अस्पताल में 20-25 पुलिसकर्मी तैनात थे लेकिन अंदर किसी को नहीं जाने दे रहे थे. बाद में डुमरा थानाध्यक्ष द्वारा बताया गया कि दोनों की मौत हो गई है और पोस्टमार्टम के बाद लाश मिलेगी. यह सब मीडिया वालों को भी खबर मिल गई और वे लोग पहुंचने लगे. वरीय पुलिस अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचने लगे और डीएसपी, एसपी और आईजी की उपस्थिति में परिजनों के बयान दर्ज कराए गए.

    उसी रात गांव के दूसरे टोेले से पुलिस ने 27 वर्षीय गुरफान को उठा लिया. गुरफान पहले अरब में रहते थे और विगत 4 महीने से गांव में रह रहे थे. उनपर कोई मुकदमा भी नहीं था. फिर भी पुलिस ने उन्हें उठा लिया. रात्रि में गिरफ्तार कर अज्ञात स्थान पर रखा गया. पुलिस ने यह कहकर उठाया कि उनसे कुछ पूछताछ करनी है. बार-बार प्रयास के बावजूद पुलिस ने परिजनों को गिरफ्तारी के संबंध में कोई ठोस जानकारी नहीं दी. 

    गुरफान के चाचा सनौवर आलम ने रात में ही थाने पर जाकर मालूम करना चाहा लेकिन उन्हें कुछ भी पता नहीं चला. बाद में इसंपेक्टर के करीबी पप्पु कुशवाहा से मिलकर मामले की जानकारी लेनी चाहिए. क्योंकि उन्हें शक था कि पप्पू को सबकुछ पता है. पहले तो पप्पू ने कुछ नहीं बताया, कहा कि मामले की तहकीकात करते हैं. 12 बजे के लगभग गुफरान के चाचा सनौवर आलम को बताया कि उनका भतीजा डुमरा थाना-सीतामढ़ी में पुलिस हिरासत में है. वहां जाने पर लोगों को बताया गया कि दोनों युवक अब सदर अस्पताल में हैं. वहां पहुंचने पर पता चला कि दोनों युवकों की मृत्यु हो चुकी है. डीएसपी, एसपी और आईजी की उपस्थिति में मृतकों के परिजनों के बयान दर्ज कराए गए और फिर लाश का पोस्टमार्टम किया गया.

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डेड बाॅडी देखने से साफ-साफ पता चलता है कि दोनों युवकों की पीट-पीट कर बेदर्दी से हत्या की गई. उनके पैरोें में कील ठोकने की निशानें थीं और शरीर जगह-जगह से जला हुआ भी था. 

    सीतामढ़ी के रून्नी सैदपुर में कुछ दिन पहले मोटरसाइकिल लूट कांड हुआ था, पुलिस का कहना है कि उसी मामले में वह दोनों युवकों से पूछताछ करने ले गई थी. लेकिन उन दोनों की हत्या कैसे और क्यों हुई, इसका कोई जवाब पुलिस के पास नहीं है. इस मामले में चकिया, डुमरा व रून्नी सैदपुर के थानों और पप्पु कुशवाहा जैसे जदयू के स्थानीय नेताओं की मिलीभगत स्पष्ट रूप से दिखती है. एक जिले सेे दूसरे जिले के थाने में भेजने के बावजूद कहीं भी किसी भी प्रकार की कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.

     इसपर पूर्वी चंपारण के एसपी का बयान है कि वे इस मामले में क्या कर सकते हैं़.

    इसके पहर्ले भी सीतामढ़ी के रून्नी सैदपुर के हाजत में माले नेता अशोक साह की हत्या कर दी गई थी. हाजत में हत्या के मामले में सीतामढ़ी के थाने पहले ही बदनाम रहे हैं. लेकिन उनपर कोई कार्रवाई नहीं हुई. यह बिहार में तथाकथित सुशासन का असली चेहरा है.

    दबाव में डुमरा थाना प्रभारी व अन्य पुलिसकर्मियों पर मुकमदा दर्ज हुआ है लेकिन आश्चर्यजनक तरीके ये लोग रून्नी सैदपुर में समर्पण करने गए, जहां उन्हे भगा दिया गया. इस मामले में रून्नी सैदपुर के थाना प्रभारी को भी सस्पेंड किया गया है लेकिन यह बहुत अपर्याप्त कार्रवाई है. इस मामले में बड़े अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए.

    स्थानीय सांसद, विधायक, मुखिया तीनों भाजपा से है, लेकिन इनमें कोई भी पीड़ितों का हाल जानने तक नहीं आए. ग्रामीणों ने बताया कि उक्त मोटरसाइकिल लूट कांड में 10 लोगों को पुलिस ने पकड़ा था जिसमें यही दो मुस्लिम थे. ऐसा लगता है कि पुलिस ने पूरी तरह सांप्रदायिक भावना से ग्रसित होकर काम किया और मुस्लिम युवकों की सचेत हत्या कर दी.

    इस जघन्य अपराध के खिलाफ भाकपा-माले व इंसाफ मंच ने आगामी 12 मार्च को पूरे बिहार में प्रतिवाद मार्च आयोजित करने का निश्चय किया है.

    भाकपा-माले की जांच टीम मांग करती है –

    1 पूरी घटना की सच्चाई सामने लाने और दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने के लिए मामले की न्यायिक जांच कराई जाए.

    2.घटना की लीपापोती की नियत से विसरा जांच की बात हो रही है लेकिन पोस्टमार्टम से स्पष्ट है कि दोनों युवकों की मौत निर्मम पिटाई की वजह से हुई है. इसके जख्म पूरे शरीर पर पाए गए. जांच प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिशों व साजिशों पर रोक लगाई जाए.

    3.चकिया थाना प्रभारी अन्य दोनों थाना प्रभारियों व दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए.

    4.गैरजिम्मेवाराना बयान देने के लिए पूर्वी चंपारण व सीतामढ़ी के एसपी को बर्खास्त किया जाए.

    5.मृतक परिजन को 25-25 लाख का मुआवजा दिया जाए तथा दोनों परिवारों में एक-एक सरकारी नौकरी दी जाए.

    6.मोटरसाइकिल लूट कांड में मारे गए मोटरसाइकिल सवार के परिजन को भी मुआवजा व नौकरी दी जाए.

    7.नैतिकता के आधार पर बिहार के मुख्यमंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए.

  • ढाका: सरेह से मिला शव,गोली मारकर फेंका गया था शव

    फजलुल मोबीन,ढाका: ढाका प्रखंड के हनुमान नगर गाँव के पुर्वी सरेह से एक 45 वर्षीय आदमी का शव पूलिस ने बरामद किया है। शव की पहचान सरुपा गाँव निवासी अभय कान्त सिंह उर्फ मीनटु पिता राजमंगल सिंह के रुप मे हुई है। शव के शरीर मे दो गोली लगी है एक गोली कान के बगल मे दूसरी गोली पोर मे है। मृतक अभय कान्त सिंह ढाका ब्रह्मस्थान स्तिथ छोटे लाल झा की बालु गिट्टी दूकान पर मजदूरी करता था। अभय कान्त सिंह उर्फ मिनटु सिंह कल दो पहर मे अपने घर से निकला था घर के लोग यह समझ रहे थे कि ढाका मे होगा। इस बीच शनिवार की दो पहर को पूलिस को सूचना मिली कि हनुमान नगर के सरेह मे एक शव है पूलिस पहुंची शव को थाने लाई इस बीच परीजन थाना फर पहुंचे। पूलिस परिजनो से पुछताछ कर रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। शव के परिजन भी अब तक अभय कान्त सिंह की मृत्यु और गोली मारने वाले या फिर मृत्यु के कारण से अनभिज्ञ है। पुलिस परिजनो से पुछताछ कर कातिल तक पहुँचने की कार्रवाई मे जुटी है।

  • सितामढ़ी:जिलाधिकारी एवं पूर्व पुलिस अधीक्षक पर हो हत्या का मुकदमा दर्जःबेदारी कारवाँ

    जाँच रिपोर्ट आने के बाद भी आरोपी पुलिस वालों पर 302 का मुकदमा क्यों नहीं? असद रषीद/समिउल्लाह

    मृतक के परिजन को एक-एक करोड़ मुआवाजा एवं परिवार के एक सदस्य को नौकरी दे नीतीश सरकार

    प्रेस विज्ञप्ति: मधुबनी- आॅल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ, मधुबनी ने पूर्वी चम्पारण के चकिया थाना क्षेत्र के रामडिहा निवासी मो0 गुफरान एवं मो0 तसलीम की पुलिस हिरासत में टार्चर कर निमर्म हत्या के विरोध में मधुबनी थाना मोड़ पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं राज्य सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान बेदारी कारवाँ के लोगों ने नीतीश सरकार मुर्दाबाद, अल्पसंख्यक विरोधी नीतीश सरकार हाय हाय, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा नहीं तो वोट नहीं, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करो, बिहार एवं सितामढ़ी के मुसलमानों को टारगेट करना बन्द करो,

    सितामढ़ी जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक पर हत्या का मुकदमा दर्ज करो, मृतक के परिवार को एक एक करोड़ मुआवजा एवं एक एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दो आदि जमकर नारा लगा रहे थे और नीतीश सरकार को अल्पसंख्यक विरोधी सरकार भी बता रहे थे। विरोध प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, सितामढ़ी वर्तमान जिलाधिकारी एवं पूर्व पुलिस अधीक्षक का थाना मोड़ पर पुतला दहन किया गया। प्रतिवाद मार्च एवं पुतला दहन कार्यक्रम का नेतृत्व संयुक्त रूप से बेदारी कारवाँ के मधुबनी महासचिव समिउल्लाह नदवी एवं असद रशीद नदवी कर रहे थे। विरोध प्रदर्शन के द्वारा यह मांग की गई कि दोनों युवकों की हत्या की निष्पक्ष सी0बी0आई0 जाँच कराई जाए और सभी दोषी पुलिस कर्मी, जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए। अगर ऐसा नहीं किया गया तो हमारा संगठन मिथिलाँचल में बड़ा आन्दोलन तो करेगा ही पटना के गर्दनीबाग में भी विरोध प्रदर्शन करेगा और तबतक करता रहेगा

    जबतक सितामढ़ी जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर जेल में नहीं डाला जाता। पिछलेे दिनों पूर्वी चम्पारण के चकिया थाना क्षेत्र के रामडिहा निवासी मो0 गुफरान एवं मो0 तसलीम को सितामढ़ी के डुमरा थाना की पुलिस ने उठाकार पुछताछ के दौरान थर्ड डिग्री का इस्तेमाल कर मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने पहले तो इस मामले को दबाने की पूरी कोशिश की लेकिन नाकाम रहे। इस मामले पर परिवार के सदस्यों ने साफ साफ पुलिस पर आरोप लगाया है कि जबरन हमारे लड़के से जुर्म कबूल करवाने के लिए डुमरा थाना पुलिस ने थर्ड डिग्री का प्रयोग किया है जिस कारण दोनों युवकों की मृत्यु हुई है। जाँच रिपोर्ट ने भी यह साबित कर दिया है कि टार्चर के कारण ही दोनों युवक की जान गई है। कुछ पुलिस कर्मी को सस्पेंड भी किया गया है, कुछ पर केस भी दर्ज किया गया है, पुलिस अधीक्षक का भी तबादला कर दिया गया है। जब्कि पुलिस अधीक्षक एवं जिलाधिकारी भी उतने ही दोषी हैं जितना पुलिस कर्मी। फिर सरकार ऐसे लोगों को क्यों बचा रही है? आखिर नीतीश कुमार की किया मजबूरी है कि दंगाई एवं हत्यारा जिलाधिकारी का तबादला नहीं कर पा रहे हैं? वर्तमान जिलाधिकारी के संरक्षण में ही पिछले दिनों सितामढ़ी में हुए दंगा में जैनुल अंसारी की निर्मम हत्या कर सरेआम पुलिस की मौजूदगी में जला दिया गया था तब से लगातार नीतीश सरकार अंधी बनी हुई है और साजिश के तहत अल्पसंख्यकों की हत्या करा रही है। सितामढ़ी दंगा के आरोपियों को खुली छूट दे दी गई है किसी पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है, फिर भी नीतीश कुमार सुशासन, न्याय के साथ विकास और फर्जी कानून का राज का माला जपते नहीं थकते हैं। पिछले कुछ दिनों से अल्पसंख्यक में डर एवं खाफै का माहौल पैदा कर एकबार फिर से वोट की राजनीति कर रहे हैं

    नीतीश कुमार जिसमें वह किसी भी हाल में कामयाब नहीं होंगे। मुस्लिम तुष्टिकरण के मामले में नीतीश कुमार एक नम्बर के नेता हैं मुसलमानों में फुट डालो राज करो की नीति पर इन दिनों अधिक काम कर रहे हैं, लेकिन बिहार हीं नहीं देश के अल्पसंख्यक समुदाय अब और अधिक मुर्ख बनने वाले नहीं हैं, अगर सुरक्षा नहीं तो वोट नहीं, अधिकार नहीं तो वोट नहीं, शिक्षा नहीं तो वोट नहीं की नीति पर अल्पसंख्यक समुदाय भी अब काम करना शुरू कर दिया है जिसका परिणाम नीतीश गठबंधन को 2019-2020 के चुनाव में जरूर दिखेगा। अल्पसंख्यक समुदाय सत्ता सौंप सकता है तो उखाड़ने में भी अधिक समय नहीं लेता। विरोध प्रदर्शन में उपाध्यक्ष मकसूद आलम पप्पु खान, खालिद हुसैन आदि बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

  • सीतामढ़ी:थर्ड डिग्री टॉर्चर से हुई मौत के मामले में SP पर गिरी गाज रातों रात हुआ तबादला

    सीतामढ़ी से(जियाउद्दीन अहमद अली सिद्दीकी)संवाददाता की रिपोर्ट बिहार के सीतामढ़ी में पुलिस की पिटाई से हुई दो लोगों की मौत मौत के बाद वहां के एसपी पर गाज गिरी है विभाग ने पिटाई करने के आरोपी 8 पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद एसपी अमरकेश डी का भी तबादला कर दिया है अमरकेश डी की जगह अनिल कुमार को सीतामढ़ी का एसपी बनाया गया है इस संबंध में गृह विभाग की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है.

    सीतामढ़ी में हुई इस घटना की हाई लेवल जांच चल रही है और आईजी डीआईजी इस मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं सीतामढ़ी पुलिस ने 6 मार्च को हत्या और लूट के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया था गिरफ्तार किए गए दोनों लोगों की हाजत में मौत हो गई थी मामले की जांच के दौरान इस बात के भी आरोप लगे थे कि पुलिस कस्टडी में थर्ड डिग्री टॉर्चर किया गया जिसमें दोनों की मौत हो गई.ये भी पढ़ें पहले भेजी चिट्ठी फिर कॉल कर मांगी रंगदारी रकम का इंतजाम करो वरना उड़ा देंगे भेजाइस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आठ पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया था जांच के दौरान ये भी बात सामने आई थी कि सस्पेंड किए गये सभी पुलिसवाले गिरफ्तारी की डर से फरार चल रहे हैं इस घटना के बाद पुलिस मुख्यालय से लेकर सरकार तक को सफाई देनी पड़ी थी घटना के बाद मृतक के गांव वालों ने भी जमकर बवाल काटा था पूरे मामले की जांच अभी भी जारी है

  • सीतामढ़ी:पुलिस द्वारा दो मुस्लिम कि हत्या के विरोध मे धरना प्रदर्शन कर की गई कार्रवाई मांग

    सीतामढ़ी.मो.सदरे आलम नोमानी
    सीतामढ़ी जिला के डुमरा थाना के हाजत मे दो मुस्लिम युवाओ मो. सलीम व मो.गुफरान की पुलिस ने पीट पीट कर हत्या कर दी एस मामले में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस उपाधीक्षक (सदर) पर धारा 302 के तहत हत्या का मुकदमा दर्ज करने तथा मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग को लेकर जिला की आम लोगो के द्वारा मेहसौल चौक पर धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने बिहार के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की।
    करीब तीन घंटे तक नाराज लोगों द्वारा जारी विरोध प्रदर्शन के बाद मौके पर एसडीओ सदर एवं एएसपी अभियान पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से संबंधित मामले में मांग पत्र देकर धरना समाप्त करने का आग्रह किया, जिसके बाद लोगों ने शांतिपूर्ण ढंग से जारी विरोध-प्रदर्शन को प्रशासन द्वारा उचित कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद समाप्त कर दिया।
    सीतामढ़ी जिला की अवाम की ओर से माननीय राज्यपाल को समर्पित एक पांच सूत्री मांग पत्र एसडीओ सदर एवं एएसपी अभियान को सौंपा गया है, जिसमें डुमरा थाना में दोनों युवाओं की पुलिस हिरासत में हुई हत्या के मामले में सीतामढ़ी के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस उपाधीक्षक (सदर) पर धारा 302 के तहत हत्या का मुकदमा दर्ज करने, डुमरा थाना के निलंबित अधिकारियों को अविलंब नौकरी से बरखास्त (Dismiss) करने, पीड़ित परिवारों को 50-50 लाख रुपए मुआवजा दिलाने, साथ ही परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने, मामले की स्पीडी ट्रायल सुनिश्चित कर दोषी पुलिस अधिकारियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने की मांग की गई है।
    धरना प्रदर्शन में सीतामढ़ी के विधायक सुनील कुमार कुशवाहा, राजद जिला अध्यक्ष मो. शफीक खान, जन अधिकार पार्टी के जिला अध्यक्ष सैयद एहतेशामुल हक, लोजद के प्रदेश महासचिव मो. जुनैद आलम, सीपीआई के जिला अध्यक्ष जय प्रकाश राय, कांग्रेस नेता परवेज आलम अंसारी, युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष मो. शम्स शाहनवाज, विश्व जागरण मंच के संस्थापक अमित चौधरी उर्फ माधव चौधरी, गोपाल झा, अभिराम पांडे, मनीष चौधरी, अल्पसंख्यक एकता मंच के संस्थापक मो. तनवीर आलम, मो. उजाले, शाकिब रजा, मोहम्मद तबरेज एआईएमएम के जिला अध्यक्ष हामिद रजा खान, रालोसपा नेता आरिफ हुसैन, मो. नौशाद, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष जलालुद्दीन खान, मोहम्मद गुलाम रसूल, सीताराम झा, सेराज अहमद, इंसाफ मंच के अध्यक्ष नियाज सिद्दीकी, सिकंदर हयात खान, मो. मुर्तुजा मेहसौलवी, मोबीन अशरफ, मो. इमरान अफरोज आलम, शाह आलम, मो. अजीज खान, पूर्व मुखिया नन्हे अंसारी, इरशाद अशरफ, कांग्रेस नेता संजय शर्मा, मो. तौकीर अनवर, अफजल राणा, नैयर अंसारी, जुबैर अंसारी, अबुल हसन अंसारी सहित सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद थे।

  • सीतामढ़ी:पोस्‍टमार्टम रिपोर्ट से पुलिस का टाॅर्चर साबित होते ही पुलिस हो गई नौ दो ग्यारह

    मिल्लत टाइम्स,सीतामढ़ी:बुधवार की शाम बिहार के सीतामढ़ी में दो युवकों की पुलिस हिरासत में मौत की खबर सामने आई. परिजनों के हंगामें के बाद डीएम ने जांच का आदेश दे दिया. आज मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. इससे जुड़े मेडिकल बोर्ड ने शुक्रवार को रिपोर्ट सीतामढ़ी के जिलाधिकारी को सौप दी. मृतकों की पोस्‍टमॉर्टम रिपोर्ट से मौत का कारण पुलिस टॉर्चर साबित हो गया है. मामले में थानाध्‍यक्ष सहित आठ पुलिसकर्मियों पर एफआइआर हुआ है.

    मालूम हो कि 20 फरवरी को सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर हाईवे पर प्रेमनगर के पास लुटेरों ने मुजफ्फरपुर निवासी एक युवक की गोली मारकर हत्या करने के बाद उसकी बाइक लूट ली थी. मामले में मंगलवार की रात सीतामढ़ी की डुमरा पुलिस ने पूर्वी चंपारण जिले के चकिया थाना क्षेत्र के रमडीहा गांव से गुफरान और तस्लीम को गिरफ्तार किया था. पूछताछ के दौरान दोनों की पिटाई की गई. हालत बिगडऩे पर बुधवार की शाम दोनों को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई थी. दोनों की मौत का कारण परिजनों ने पुलिस टॉर्चर बताया. पुलिस पर हत्या का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग पर अड़े रहें.

    गुरुवार को डीआइजी रवींद्र कुमार ने मामले की जांच की. इसके बाद निलंबित डुमरा थानाध्यक्ष चंद्रभूषण कुमार सिंह समेत आठ पुलिसकर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है. इस बीच सभी आरोपित फरार हो गए. चर्चा है कि आरोपित पुलिसकर्मियों को रून्नीसैदपुर थाने में हिरासत में रखा गया था, जहां से वे भाग निकले. हालांकि, डुमरा के नए थानाध्यक्ष नवलेश कुमार आजाद और रून्नीसैदपुर थानाध्यक्ष भूदेव दास ने इससे इनकार किया.

    आपको बता दें कि परिजन पुलिस पर हत्या का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग पर अड़े थे. वे शव लेने से इनकार कर सदर अस्पताल परिसर में ही धरने पर बैठ गए थे. इसी बीच आइजी नैयर हसनैन खान ने बुधवार देर रात डुमरा थानाध्यक्ष समेत आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया. डीआइजी रवींद्र कुमार रात डेढ़ बजे सदर अस्पताल पहुंचे थे. परिजनों को आश्वासन देकर शव सौंपा. इसके बाद आक्रोशित लोगों ने शवों के साथ पूर्वी चंपारण के चकिया में सड़क जाम कर दिया. इस बीच पुलिस लीपापाेती की कोशिश में लगी रही. पुलिस ने हिरासत में युवकाें के साथ ज्‍यादती से इनकार किया. लेकिन मामले ने तूल पकड़ लिया. फ़िलहाल पुलिस ने पोस्‍टमार्टम करा शवों को परिवार वालों को सौंप दिया.

    गुफरान और तस्लीम के हत्यारों पर उचित कार्रवाई की मांग करते हुए अल्पसंख्यक एकता मंच की ओर से आज मेहसौल ओपी से लेकर राजोपट्टी तक निकाला गया कैंडल मार्च जिसमें अल्पसंख्यक एकता मंच के संस्थापक मोहम्मद तनवीर आलम प्रदेश सचिव शाकिब रजा के साथ सैंकड़ों लोग शामिल हुए

    वही गुफरान और तस्लीम की हत्या करने वाले दोषियों पर उचित कार्रवाही करने को लेकर मदनी मुसाफिरखाना, सीतामढ़ी में सर्वदलीय बैठक हुई। कल 9 मार्च को सुबह 10 बजे मेहसौल चौक गोलंबर पर लोग देंगे धरना।