Category: बिहार

  • बिहार:बोधगया मे होली के मौके पर दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प

    अनिल कुमार पांडे,बोधगया बिहार:बोधगया थाना क्षेत्र अंतर्गत धधवा गांव में हिंदू – मुस्लिम बंधुओं के बीच जमकर विवाद हो गया था ! विवाद का मुख्य वजह है कि हिंदू जाति के लोगों ने भी होलिका दहन की रात्रि ही मुस्लिम बंधुओं के खिलाफ जमकर टोन बाजी की ! लेकिन होलिका दहन की रात्रि तो मुस्लिम बंधुओं ने हिंदू जातियों के साथ कोई विवाद नहीं किया ! इसके बावजूद दूसरे दिन यानी होली के दिन संध्या करीब 3:00 बजे के लगभग पुन हिंदू समुदायों के लोगों ने उसी प्रकार टोन बाजी करने लगे !

    नतीजतन मुस्लिम समुदाय के लोग भी बर्दाश्त नहीं होने के कारण उत्तेजित हो गए और दोनों समुदायों के बीच जमकर बहसा – बहसी, अश्लील शब्दों का प्रयोग हुआ ! लेकिन अच्छी बात रही कि स्थानीय प्रशासन को जब इस बात की जानकारी मिली तो मामले को गंभीरता से लेते हुए काफी संख्या में पुलिस बल के साथ गांव में पहुंच कर कैंप करते हुए शांति व्यवस्था कायम की ! दोनों पक्षों के बीच शांति समझौता कराया ! लेकिन सबसे बड़ा सवाल उठता है कि चाहे हिंदू बंधुओं का कोई भी पर्व हो या मुस्लिम बंधुओं का ! एक दूसरे समुदाय के खिलाफ अनाप-शनाप टोन बाजी करना किस ग्रंथ में लिखा है ? ऐसे टोन बाजी करने के लिए भारत के किस संविधान में किसी भी समुदाय के लिए खुली छूट दे दी गई है ! ऐसी परिस्थिति में प्रशासन को भी चाहिए कि कुछ बहके लोगों को चिन्हित कर कानूनी रूप से सबक सिखाएं ताकि भविष्य में पुन ऐसा कार्य न कर सके!

  • लोकसभा:बिहार महागठबंधन में हुआ सीटोंका बंटवारा,जानिए कौन पार्टी कितने सीटों पर लड़ेगी चुनाव

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:-लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2019) को लेकर बिहार महागठबंधन (Bihar Mahagathbandhan) में सीटों बंटवारा हो गया. बिहार में राजद (RJD) 20 सीटों पर चुनाव लड़ेगी वहीं, कांग्रेस (Congress) को 9 सीटें दी गई है. इसके अलावा उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) की पार्टी RLSP को 5, जीतनराम मांझी (Jitan Ram Manjhi) की पार्टी ‘हम’ पार्टी को 3 और सन ऑफ मल्लाह मुकेश सहनी (Mukesh Sahni) की वीआईपी (VIP) को 3 सीटें दी गई हैं.
    इसके अलावा सीपीआई माले को राजद के कोटे से एक सीट दी गई है. इसके अलावा पहले दौर के उम्मीदवारों की सूची भी जारी की गई. प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया गया कि शरद यादव आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे. वहीं जीतनराम मांझी (Jitan Ram Manjhi) के भी चुनाव लड़ने की बात कही गई है. जीतनराम मांझी गया से चुनाव लड़ेंगे.

  • शेखपुर ढाब में बसे सैकड़ों परिवार की झोपड़ी में आग लगने की घटना में बालू माफिया और अहियापुर थाना की मिलीभगत की आशंका:माले

    आग लगाने की घटना और सैकड़ों विस्थापितों की झोपड़ी जलने की उच्चस्तरीय जांच कराए सरकार

    भाकपा माले ,इंसाफ मंच और आइसा इनौस की 14 सदस्य टीम ने शेखपुर गांव का किया दौरा

    मिल्लत टाइम्स,मुजफ्फरपुर 20 मार्च 2019:भाकपा माले इंसाफ मंच आइसा और इनौस की 14 सदस्य टीम में शेखपुर का दौरा किया पिछली रात आग लगने से बर्बाद सैकड़ो महिला पुरुषों ने रोते बिलखते हुए जांच टीम को बताया कि आग लगने की घटना के पीछे बालू माफिया दलालों औरै अपहयिपुर थाना की मिलीभगत है। पिछले दिनों अहियापुर थाना और बालू माफिया ने आग लगाने की धमकी दीया था 2 दिन पहले पुलिस पर हमला करने के आरोप में पुलिस ने बस्ती की झोपड़ी में ड़फोड़ की और आग लगाने की धमकी के साथ एक महिला सहित दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया था इन लोगों ने बताया कि पुलिस पर हमला का मुकदमा और सैकड़ों घरों में आग लगाने की घटना के पीछे एक बड़ी साजिश है ।

    जांच टिम में भाकपा माले नेता शत्रुघन सहानी, मनोज यादव, परशुराम पाठक ,रामबालक पासवान, वीरेंद्र पासवान,बिंदेश्वर शाह ,इंसाफ मंच के राज उपाध्यक्ष आफताब आलम ,राज्य प्रवक्ता असलम रहमानी सह सचिव अकबर आज़म, नौजवान सभा के संयोजक राहुल कुमार सिंह, आजम हुसैन ,आइसा के दीपक कुमार, मविकेश कुमार,अजय कुमार शामिल थे।
    जांच टीम ने मांग की है कि सरकार शेरपुर गांव में आग लगने की बर्बर घटना और सैकड़ों विस्थापितों की झोपड़ी जलने की उच्च स्तरीय जांच कराए सरकार जांच के दायरे में अहियापुर थाना और बालू माफिया की मिलीभगत को सामने लाया जाए तथा अहियापुर थाना अध्यक्ष समेत सभी पुलिस पर कार्रवाई की जाए पिछले दिनों पुलिस पर पथराव करने के आरोप में लोगों पर मुकदमे को वापस लिया जाए तथा गिरफ्तार महिला सहित नौ लोगों को रिहा किया जाए एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला अधिकारी से मील कर शेरपुर गांव में बसे परिवारों को बासगीत पर्चा देने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अस्थाई आवास निर्माण कराने घर जलने से बर्बाद परिवारों को 3 महीने तक भोजन तत्काल रहने की व्यवस्था दस-दस लाख रुपये मुआवजा तथा पर्याप्त सुरक्षा देनी की भी मांग की है ।

    भाकपा-माले जिला सचिव कृष्ण मोहन गखेम्स जिला सचिव शत्रुघ्न सहनी और इंसाफ मंच बिहार के उपाध्यक्ष आफताब आलम ने कही नीतीश मोदी सरकार में दलितों और गरीबों को बसाने के बदले उन्हे उजारा जारहा है ।पुलिस की मिलीभगत से बालू माफिया और दबंग लोग उनके घरों में आग लगा रहे हैं चुनाव की घोषणा होने के साथ दलितों, गरीबों और आम लोगों को मुकदमा में फंसा कर गिरफ्तार कर जेल में डाला जारहा है

    सकल ठाकुर

    कार्यालय सचिव भाकपा-माले मुजफ्फरपुर

  • लालू यादव ने सुलझाया महागठबंधन के सीटों का बंटवारा,9 सीटों पर कांग्रेस हुआ राजी

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:बिहार में महागठबंधन में पड़ी रार को खत्म करने के लिए आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव आगे आए हैं. उन्होंने कांग्रेस को महागठबंधन में रहने का अल्टीमेटम दिया है जिसके बाद कांग्रेस का रुख नरम नजर आ रहा है. अब कांग्रेस महागठबंधन में 9 सीटों के साथ लोकसभा चुनाव में उतरने को तैयार हो गई है. लालू यादव की दखल से पहले कांग्रेस बिहार में अपने लिए 11 सीटों की मांग पर अड़ी हुई.

    महागठबंधन में पिछले कई दिनों से मुख्य रूप से आरजेडी और कांग्रेस के बीच सीटों के तालमेल पर पेच फंसा हुआ था जिसके बाद आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद ने कांग्रेस से मंगलवार को कहा कि वह 2 बजे दिन तक अपनी स्थिति साफ करे. साथ ही लालू यादव की तरफ से कहा गया कि अगर कांग्रेस 9 सीटों पर नहीं मानती है तो महागठबंधन के अन्य सहयोगी दल बुधवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सीटों के तालमेल का ऐलान कर देंगे.

    सीटों का फॉर्मूला तय?

    सूत्रों के अनुसार महागठबंधन में सीटों के तालमेल को लेकर विवाद अब खत्म होने की ओर है. तय फॉर्मूले के मुताबिक आरजेडी बिहार में 20 सीटों पर चुनाव लड़ेगी जबकि कांग्रेस को 9 सीटें दी गई हैं. पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी को 4 सीटें दी गई हैं जबकि पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को 3 सीटें दी गई हैं. मल्लाह नेता मुकेश साहनी की विकासशील इंसान पार्टी और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव की लोकतांत्रिक जनता दल को दो-दो सीटें दी गई हैं.

    सूत्रों के मुताबिक बुधवार सुबह पटना के एक होटल में महागठबंधन की प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया है जिसमें आरजेडी नेता तेजस्वी यादव समेत बिहार कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा, उपेंद्र कुशवाहा, जीतन राम मांझी और मुकेश साहनी सीटों के तालमेल का ऐलान करेंगे. बता दें कि कांग्रेस पहले बिहार की 15 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए आरजेडी पर दबाव बना रही थी जिसके बाद उसने कम से कम 12 सीटों की मांग की थी.

    जानकारी के मुताबिक कांग्रेस भले ही 9 सीटों पर मान गई है लेकिन छोटे दल अपने खाते की सीटें कम होने से नाराज चल रहे हैं. कांग्रेस अपनी सीटें बढ़ाने के लिए जीतन राम मांझी को 5 सीटों पर चुनाव न लड़ने के लिए मना रही है. साथ ही कांग्रेस ने उपेंद्र कुशवाहा से सीटों का ऐलान आज न करने के लिए भी कहा था. मांझी को फिलहाल गठबंधन में 3 सीटें मिली हैं, लेकिन उनकी पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा 5 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है(इनपुट आजतक)

  • बिहार:100 रुपए के 10 नोट को 3 बार में भी नहीं गिन सका दूल्हा,दुल्हन ने बारात लौटा दी

    मिल्लत टाइम्स,बिहार:मधुबनी जिले के पंडौल गांव में एक दुल्हन ने दूल्हे के अशिक्षित होने पर शादी करने से इनकार कर दिया। उसने यह फैसला वरमाला होने के बाद लिया। लड़की के इस फैसले का गांव वालों ने स्वागत किया। वहीं, शादी में मौजूद एक व्यक्ति ने उसकी हिम्मत की तारीफ कर अपने पढ़े-लिखे बेटे से शादी का प्रस्ताव रखा, जिसे लड़की ने मान लिया।

    यह पूरा मामला 13 मार्च का है। पंडौल प्रखंड के ब्रह्मोत्तरा गांव के लड़के की शादी रहिका प्रखंड के मोमीनपुर गांव की लड़की के साथ तय हुई थी। शादी के दिन तय कार्यक्रम के मुताबिक बारात पहुंची। इसके बाद वरमाला हुई। फिर मंडप में रस्म के दौरान दुल्हन की सहेलियां दूल्हे से बात कर रही थीं। तभी उन्हें दूल्हे के शिक्षित होने पर शक हुआ। सहेलियों ने उनसे कई सवाल पूछे। दूल्हा एक भी सवाल का जवाब सही नहीं दे पाया।

    सौ-सौ के नोट गिनने को दिए
    दुल्हन की सहेलियों ने दूल्हे को सौ-सौ के दस नोट गिनने को दिए, जिसे वह सही तरीके से गिन नहीं पाया। इस दौरान उसने तीन कोशिशें कीं।सभी में गिनती गलत की।इसके बाद उससे उसकानाम और गांव का नाम पूछा गया। फिर जिले का नाम पूछा गया तो उसने जवाब में पंडौल कहा। इन सारे सवालों के जवाब के बाद यह पता चला कि वह पढ़ा लिखा नहीं है। इसके बाद लड़की ने हिम्मत दिखाई और उसने शादी से इनकार कर दिया।

    फिर पढ़े-लिखे लड़के से शादी की
    दुल्हन के इस फैसले से सभी प्रभावित थे। बारात में मौजूद एक व्यक्ति ने भी तारीफ की और अपने बेटे से शादी करने का प्रस्ताव रखा। उसने कहा कि मेरा बेटा पढ़ा-लिखा है क्या आप उससे शादी करेंगी? लड़की वालों ने इस प्रस्ताव पर हामी भर दी।(इनपुट भास्कर)

  • कन्हैया बेगूसराय से ही चुनाव क्यों लड़ना चाहते हैं?

    Anamika Singh

    जबकि वो अबतक वामपंथी चेहरे के रूप पूरे देश में प्रसिद्ध हो चुके हैं.दिल्ली, गुजरात से लेकर वे केरल तक भाषण देने पहुँच गए. तो ये पूरे देश मे कहीं से भी चुनाव लड़ सकते हैं.

    आइये थोड़ा सा मामला समझते.

    कहा जाता है बेगूसराय वामपन्थियों का अड्डा है, लेकिन वामदल वहाँ मात्र एक बार चुनाव जीती है.
    जबकि नवादा, नालन्दा जैसे निर्वाचन क्षेत्रों में दो या दो अधिक बार वामदल चुनाव जीतकर आयी है.

    2014 में राजद(लालू यादव) से मुसलमान नेता लड़े थे लेकिन हार गए.उससे पहले में जदयू(नीतीश कुमार) से मुसलमान नेता लड़े और जीत गए.
    इस बार महागठबंधन से मुसलमान उम्मीदवार खड़ा करने की तैयारी है. तो मुसलमानो का सीट खाने पर क्यों तुले है कन्हैया.

    बिहार में कन्हैया की सच्चाई सभी भूमिहारो को पता है, वहां के सवर्ण लंठ नहीं है बाकी राज्यों के सवर्णो की तरह जो कन्हैया को देशद्रोही कह दे.
    बिहार के सवर्ण चाहते हैं कि मोदी जीते पर कन्हैया भी बेगूसराय से चुनाव लड़े और जीते.
    ये बात आपको खुलेआम बिहार के सवर्ण कहते हुए मिल जाएंगे.
    दरअसल ये लोग सदा सदा के लिए मुसलमानो की राजनीति बेगूसराय से खत्म कर देना चाहते हैं.
    बेगूसराय 20% मुसलमानो की आबादी से भरी है.

    यहां पर वामदल मात्र एक बार लोकसभा चुनाव 1967 में जीतती है,जबकि 1980,1984, 1989,1991,1996 और 2004 में तो वामपंथी दलों ने अपना उम्मीदवार भी नहीं उतारा.

    हालांकि इसबार भी बेगूसराय में वामदल अकेले चुनाव जीत ले तो बिल्कुल सम्भव नहीं.इसलिए मीडिया जबरदस्ती बेगूसराय को वामपंथ का अड्डा और लेनिनग्राद कह कर प्रचारित किया जा रहा है.और बार बार वामदल तथा राजद से गठबंधन की फ़र्ज़ी खबरे चलाई जाती हैं.

    अगर कन्हैया को वाकई वामपंथी विचारधारा पर चुनाव लड़ना है तो नवादा चुनाव क्षेत्र से लड़े जोकि भूमिहारो और यादव दबंगो का गढ़ रहा है.(यहां का यादवो में लालू यादव का कोई क्रेज नहीं है)
    जय भीम और लाल सलाम का नारा भी बुलन्द होगा.
    यहाँ 30% जनसंख्या दलितो की है. उन्हें कुछ बेहतर लाभ हो कन्हैया के वामपंथी विचारधारा से.

    जाति की बात आते ही कन्हैया छटपटाने लगते हैं.
    बीबीसी द्वारा ‘बोले बिहार’ में दिए गए उनके इंटरव्यू में तो यही दर्शाता है.
    इस प्रोग्राम को मोडरेट कर रही है रूपा झा जब उनसे जाति को लेकर सवाल करती हैं तो वे लेनिन की कथा सुनाने लगते हैं.
    वरिष्ठ पत्रकार मणिकांत ठाकुर भी जब उनसे जाति से मिलने वाली प्रिविलेज की बात करते हैं तो कन्हैया की छटपटाहट साफ नजर आती है.

    सवर्ण आरक्षण पर भी बिना कोई टिप्पणी नहीं है.
    13 पॉइंट रोस्टर पर चुप्पी.

    “रवीश कुमार ने एक बात कही थी. जो जाति के मसले पर बात नहीं करना चाहता है वो सबसे बड़ा जतिवादी है”

    पता नही इनका जय भीम और लाल सलाम कैसा है।

    सम्वेदनाओं को हथियार बनाकर इन्होंने चुनाव लड़ने की सोची है तो जनता के लिए ये भी मोदी साबित होंगे.
    रोहित वेमुला या नजीब की माँ इनके लिए वाकई बड़ा मुद्दा हैं तो इन्हें बेगूसराय से कम से कम चुनाव नहीं लड़ना चाहिए.

  • जैनुल अंसारी की तरह ही तसइम और गुफरान अंसारी की हत्या को दबा रही है राज्य सराकरःनजरे आलम

    सी0बी0आई0 जाँच, एक एक करोड़ मुआवजा और पिड़ित परिवार को सरकारी नौकरी नहीं तो होगा आन्दोलनः बेदारी कारवाँ*

    प्रेस-रिलीज,दरभंगा- पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार आॅल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ की टीम बिहार के पूर्वी चम्पारण के चकिया थाना क्षेत्र के रामडीहा गाँव का दौरा किया। टीम की अध्यक्षता कारवाँ के राष्ट्रीय अध्यक्ष नजरे आलम ने की। मृतक दोनों युवक मो0 तसइम अंसारी एवं मो0 गुफरान अंसारी के परिवार से मिलने एवं ग्रामीणों की बातों को सुनने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि दोनों युवक बेकसूर थे। साजिश के तहत दोनों युवक की हत्या पुलिस हिरासत में कर दी गई है। इस पूरे प्रकरण में डुमरा थाना प्रभारी, रूनी सैदपुर थाना प्रभारी (सितामढ़ी), चकिया थाना प्रभारी (पूर्वी चम्पारण), सितामढ़ी के पूर्व पुलिस अधीक्षक उपेन्द्र शर्मा एवं वत्र्तमान जिलाधिकारी रंजीत कुमार सिंह की संलिप्ता है जिसे प्रशासनिक पदाधिकारी एवं राज्य सरकार दबाने का प्रयास कर रही है। इतना ही नहीं इस हत्या में स्थानीय जद यू0 नेता की भी संलिप्ता बताई जा रही है। सरकार इसे भी दबाने का पूरा प्रयास कर रही है जिस में को कामयाबी नहीं मिलने वाली है। बेदारी कारवाँ शुरू से ही पूरे मामले की सी0बी0आई0 जाँच की माँग कर रहा है। क्योंकि सी0बी0आई0 जाँच नहीं कराया गया तो राज्य सरकार इस मामले को दबा देगी और हत्या की सच्चाई सामने नहीं आ पायगी।

    उक्त बातें आॅल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने प्रेस ब्यान जारी कर कही। श्री आलम ने कहा कि सितामढ़ी पुलिस लगातार अल्पसंख्यकों को टारगेट करके मार रही है और राज्य सरकार संरक्षण देने का काम कर रही है। राज्य सरकार एवं राज्य सरकार के मुखिया अल्पसंख्यक विरोधी निती पर काम कर रहे हैं यही कारण है कि पुलिस हिरासत में देर रात मुस्लिम युवकों को उठाकर थर्ड डिग्री देकर पुलिस के भेस में आतंकवादियों से हत्या करवाया जा रहा है। श्री आलम ने कहा कि इस प्रकार की घटना को अल्पसंख्यक समुदाय किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेगा। श्री आलम ने यह भी कहा कि हमारी 11 सदस्यी टीम जब रामडीहा गाँव पहुँची तो वहाँ के अल्पसंख्यकों में खौफ एवं दहशत का माहौल था और सभी एक साथ कह रहे थे के दोनों युवक निर्दोष है पुलिस ने बहुत बुरा सलुक किया है,

    हमारे बच्चे को गोली मार देता तो उतना दुख नहीं होता जिस प्रकार से सरकारी थाने में टार्चर करके मारा गया है। बेदारी कारवाँ की टीम रामडीहा जाकर ग्राउण्ड जीरो रिपोर्ट तैयार की है जिसे बिहार के मुखिया नीतीश कुमार, अपर मुख्य सचिव, बिहार, अध्यक्ष अल्पसंख्यक आयोग, बिहार सरकार, डी0जी0पी0 बिहार, गृह सचिव, बिहार एवं गृह सचिव भारत सरकार, मानवधिकार आयोग, बिहार एवं राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, महामहिम राज्यपाल, बिहार के साथ साथ भारत के अल्पसंख्यक मंत्री, प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति महोदय को सौंपा है और अविलंब इन दोनों युवकों की निर्मम हत्या की सी0बी0आई0 से निष्पक्ष जाँच की माँग की है। साथ ही दोनों युवक के परिवार के एक एक सदस्य को सरकारी नौकरी एवं एक एक करोड़ रूपये की आर्थिक सहायता अविलंब देने की राज्य सरकार के मुखिया नीतीश कुमार से माँग की गई है। श्री आलम ने कहा कि सितामढ़ी दंगा में जिस प्रकार से जैनुल अंसारी की हत्या कर दी गई थी और सरकार ने उस पूरे मामले को दबा दिया और हत्यारे खुलेआम घुम रहे हैं अगर उसी प्रकार से मो0 तसइम अंसारी एवं मो0 गुफरान अंसारी की हत्या को दबाने का प्रयास करेगी तो पूरे बिहार में हमारा संगठन आन्दोलन तो करेगा ही आगामी चुनाव में इस हत्या को मुद्दा बनाकर जनता के बीच ले जाकर सरकार की दोगली पालिसी एवं अल्पसंख्यक विरोधी निती को उजागर करेगा। बेदारी कारवाँ के रामडीहा दौरा पर मकसूद आलम पप्पु खान, असद रशीद नदवी, कारी मो0 सुलतान अखतर, अधिवक्ता सफिउर रहमान राईन, मौलाना समिउल्लाह नदवी, मोतिउर रहमान मोती, मो0 हीरा कुरैशी के नाम शामिल हैं। 

  • “कन्हैया कुमार खायें-पीयेँ-अघायेँ हुए सवर्णों के नेता है”

    पटना का मौर्यालोक मार्केट राजनीतिक प्राणियों का चारागाह है। प्रति दिन शाम में लेखक, पत्रकार, छात्रनेता, राजनेता, शिक्षक, समाजसेवी, डॉक्टर, व्यापारी, बयूरोक्रेट इत्यादि का लगने वाला जमावड़ा बिहार की राजनीति को समझने के लिए पर्याप्त है। उस जमावड़े में शामिल कुछ लोग केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनाने की बात करते हैं साथ में कन्हैया कुमार की जीत की भी कामना करते हैं। आप जब उनलोगों की जाति जानने का प्रयास करेंगे तब आप बखूबी समझ जायेंगे की वह किस जाति समूह के लोग हैं।
    एक दिन पटना के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की ऑफिस में बेगूसराय मंडल भाजपा के महामंत्री से भेंट हुई। वह भी जाति से भूमिहार थे। बातचीत में ऐसा लगा कि उनकी भी इच्छा थी कि कन्हैया बेगूसराय से चुनाव लड़े। आप निजि जीवन में भाजपा से सहानुभूति रखने वाले कुछ भूमिहार जाति के लोगों से बात करें। बात करने के दौरान एक बात सभी मे कॉमन होगा वह यह कि सबकुछ के बावजूद कन्हैया भाषण अच्छा करता है।

    मैंने यह उदाहरण इसलिए दिया है ताकि यह समझा जा सके कि कन्हैया कुमार के भूमिहार जाति से होने और बेगूसराय से चुनाव लड़ने के बीच का सम्बन्ध समझ सके। वह भले ही आवेदन देकर भूमिहार जाति में जन्म नहीं लिए हो मग़र बेगूसराय में उनकी जाति उनकी पहचान बनती जा रही है।
    बीबीसी के एक कार्यक्रम में कन्हैया जाति के प्रश्न पर जवाब देते हुए कहते है कि क्या वह अपने माता-पिता बदल ले। मेरा मानना यह है कि जातीय श्रेष्ठता के प्रश्न पर इतना घुमाकर जवाब देने की ज़रूरत ही नहीं है। बल्कि यह स्थापित सत्य है कि सवर्ण जाति में जन्म लेने पर लॉबी, नेटवर्किंग, मनोवैज्ञानिक श्रेष्ठता इत्यादि स्वयं से विकसित होता जाता है।
    इसी 15 मार्च को बिहार की राजधानी पटना में बीबीसी हिंदी के द्वारा “बोले बिहार” नाम से एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। उस कार्यक्रम के एक हिस्सा में कन्हैया कुमार को बतौर वक्ता बुलाया गया। कार्यक्रम को वरिष्ठ पत्रकार रूपा झा मॉडरेट कर रही थी। इस पूरे कार्यक्रम में कन्हैया कुमार ने जिस तरह से जाति के प्रश्न का उत्तर दिया वह बिल्कुल ठहलाने जैसा था।

    वरिष्ठ पत्रकार मणिकांत ठाकुर ने जब जातीय पहचान के संदर्भ में प्रश्न किया तब कन्हैया कुमार रूस के लेनिन का उदाहरण देकर और रूस के विघटन की बात करके प्रश्न को टाल गये। जब्कि सच्चाई यही है कि रूस के भौगोलिक एवं सामाजिक संरचना में जमीन-आसमान का फ़र्क़ है। भूगोल एवं समाज का राजनीति में बड़ा हस्तक्षेप होता है।
    रूस के विघटन में रूस की भौगोलिक संरचना सबसे बड़ी वजह थी। भारत के संदर्भ में उसी रूस की थ्योरी को फिट करके नहीं देखा जा सकता है। बल्कि रूस की सामाजिक संरचना में जाति जैसा कोई कॉन्सेप्ट ही नहीं था मग़र वहाँ की जो सामाजिक संरचना थी उसको कम्युनिस्ट सही से एड्रेस नहीं कर सकी जिसका परिणाम हुआ कि रूस से कम्युनिस्ट की सरकार चली गयी। इसलिए भारत के राजनीतिक बदलाव को रूस के सन्दर्भों में जस्टिफाई करना एक प्रबुद्ध स्कॉलर का काम नहीं है।

    वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार हमेशा कहते है कि जो जाति के मुद्दें पर बहस नहीं करना चाहता है वही असल जातिवादी है। इस पूरे एपिसोड में कन्हैया कुमार ने जाति वाले सवाल को टाल दिया। रूपा झा के सवाल को भी कन्हैया ने टालने का प्रयास किया। वह मानने को तैयार ही नहीं थे कि एक विशेष जाति वर्ग के होने के कारण बेगूसराय में उनको लाभ मिल रहा है। बल्कि जाति के सवाल को रात में सड़कों पर निकलने वाली महिलाओं की छेड़खानी से तुलना करके जवाब दिया।

    महिला तो स्वयं में एक शोषित वर्ग है और उसी वर्ग को उदाहरण मान लेना तर्कपूर्ण नहीं है। देश भर के दर्जनों प्रतिष्ठित संस्थानों में सैकड़ों रिसर्च से साबित हो चुका है कि महिला स्वयं में शोषित वर्ग है और यदि महिला दलित समुदाय से है तब दोहरा शोषण झेलती है। फिर कन्हैया जैसे प्रबुद्ध व्यक्ति जाति जैसे संवेदनशील मुद्दें को इतने हल्के में लेकर कैसे चल सकते है? ग़ज़ब तो तब लगा जब हॉल में बैठें लोग कन्हैया के जवाब के बाद ताली पीट रहे थे।
    जहाँ तक सवाल भारत मे कम्युनिस्ट पार्टी के कमज़ोर होने का है तब कन्हैया ने बड़ी ईमानदारी से स्वीकारा की कम्युनिस्ट पार्टी समाज के बदलते स्वरूप को समझकर आंदोलन का रूप नहीं बदल सकी है। मैं कन्हैया की इस बात से भी सहमत नहीं हूँ। भारत कल भी जातिवादी समाज था और आज भी जातिवादी समाज है। भारत की राजनीतिक सच्चाई को तबतक नहीं समझा जा सकता है जबतक जातियों की आंतरिक राजनीति को नहीं समझ लिया जाये।
    भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ने हमेशा वर्ग (Class) विभेद को मुद्दा बनाकर राजनीति किया है। जबकि होना यह चाहिए था कि कार्ल मार्क्स की उस थ्योरी को भारत में जाति में फिट करके देखना चाहिये था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बाबा साहब अम्बेडकर मार्क्स और हेगेल की थ्योरी को जाति की संरचना पर फिट करके देखना चाहते थे। क्योंकि उच्च जाति में जन्म लेना एक एडवांटेज रहा है।

    कम्युनिस्ट आंदोलन में सबसे अधिक सहभागिता दलित एवं अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की रही है। लेकिन प्रतिनिधित्व हमेशा सवर्ण एवं ब्राह्मणों के हाथ में रहा। उदाहरण के रूप में बेगूसराय, चम्पारण, जहानाबाद, गया, आरा इत्यादि जिलों में भूमिहार जाति का दबदबा रहा है। बिहार में भूमिहार ही सबसे अधिक जमीन के मालिक है। दलितों का सबसे अधिक शोषण यही जाति वर्ग के लोग भी किये है। लेकिन सबसे अधिक चौंकाने वाली बात यही है कि कम्युनिस्ट आंदोलनों के अग्रणी नेता भी शोषक समुदाय के लोग है।
    समाजवादी आंदोलन के बाद लालू, मुलायम, नीतीश, पासवान जैसे नेताओं का जब उभार हुआ तब दलितों, पिछड़ों एवं मुसलमानों में प्रतिनिधित्व को लेकर एक चेतना का विकास हुआ। यही से दलित, पिछड़े एवं अल्पसंख्यक समुदाय के लोग कम्युनिस्ट आंदोलन से निकलकर समाजवादी राजनीति की तरफ़ शिफ़्ट हुए और नेतृत्व परिवर्तन का यही दौर था जिसे कम्युनिस्ट लोग जंगलराज से पुकारते है।
    कम्युनिस्ट पार्टी में प्रतिनिधित्व के प्रश्न पर कन्हैया ने रामावतार शास्त्री को बड़ी चालाकी से एक यादव नेता के प्रतीक के रूप में पेश कर दिया। आज भी दूरस्थ भारत की एक बड़ी आबादी कन्हैया कुमार और रवीश कुमार को दलित समझती है। भला उस आबादी को 1967 में चुने गये सांसद राम अवतार शास्त्री की जाति कैसे मालूम होगी? हाँ, मगर 1967 के समय के लोगों को मालूम था कि राम अवतार शास्त्री यादव समुदाय से आते थे।

    इनसब मुद्दों पर बहस करने से पूर्व कन्हैया कुमार को थोड़ा राजनीतिक प्रतिनिधित्व (Political Representation) और राजनीतिक सहभागिता (Political Participation) के बीच के अंतर को समझना चाहिये। यह तो स्थापित सत्य है कि कम्युनिस्ट आंदोलन में शोषितों के नाम पर सबसे अधिक सहभागिता (Participation) पिछड़ी जाति, दलित, अल्पसंख्यकों की रही है।

    मगर क्या सहभागिता (Participation) के अनुपात में दलित, पिछड़े एवं अल्पसंखयकों को प्रतिनिधित्व (Representation) मिला? कन्हैया ने दबे लफ़्ज़ों में यह मैसेज देने का प्रयास किया कि कम्युनिस्ट पार्टी यादव जाति के लोगों को सांसद बनाती रही है। इसलिए महागठबंधन के अगुआ तेजस्वी यादव को चाहिये कि बेगूसराय से भूमिहार कन्हैया कुमार को उम्मीदवार बनाने के बारे में विचार करें।
    एक युवा ने कन्हैया कुमार से पूर्व छात्रनेता चंद्रशेखर उर्फ चंदू और बाबहुली नेता शहाबुद्दीन साहब के संदर्भ में प्रश्न किया। कन्हैया ने एक अप्रत्याशित उत्तर दिया जिसकी उम्मीद कोई नहीं कर सकता था। कन्हैया बार-बार यह बताने का प्रयास करते रहे कि चन्द्रशेखर सीपीआई के नहीं थे बल्कि सीपीआई (एमएल) के नेता थे। अब जब चारों तरफ से वाम एकता की बात हो रही है उस समय चंदू के प्रश्न पर चंदू को सीपीआई (एमएल) से जोड़कर स्वयं को चंदू से अलग कर लेना कितना न्यायसंगत है? जब सीपीआई और सीपीआई (एमएल) आपस में मिलने को तैयार नहीं है फिर कन्हैया किस तरह के महागठबंधन में शामिल होने की कल्पना कर रहे है?

    क्या वह सिर्फ़ इसलिए चंदू के सवाल को टाल गये की महागठबंधन के प्रत्याशी बनने के रूप में उन्हें शहाबुद्दीन साहब के परिवार का अनैतिक समर्थन करना पड़ेगा? चन्द्रशेखर उर्फ चंदू 1990 में एमफिल के लिए जेएनयू गये। वह जेएनयू जाने से पूर्व पटना यूनिवर्सिटी के छात्र थे। वह पटना यूनिवर्सिटी में सीपीआई की छात्र विंग AISF के सक्रिय सदस्य थे। वह जब जेएनयू गये तब सीपीआई(एमएल) की छात्र विंग आल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (AISA) के ढाँचा को अपनी परिश्रम से खड़ा किये थे। कन्हैया कुमार भी सीपीआई की विंग AISF के नेता है। इसलिए कन्हैया द्वारा चंदू को सीपीआई से सिरे से खारिज़ कर देना किसी भी प्रकार से उचित नहीं है।
    भक्त का विरोध करते-करते लोग कब अंधसमर्थक की फ़ौज खड़ी कर लेते है पता भी नहीं चलता है। जब जेएनयू घटना के बाद कन्हैया कुमार जेल से छूटकर कैंपस पहुँचे तब एक जोरदार भाषण दिया। कन्हैया का कहना था कि संयोग से जेल में उनको खाना लाल और नीलें रँग के कटोरे में परोसा गया। मालूम नहीं उनकी यह बात कितनी सत्य पर आधारित है, वही जाने।

    दरअसल, वह यह बताना चाहते थे कि भगत सिंह और बाबा साहब अम्बेडकर के विचारों को साथ लेकर आगे बढ़ा जायेगा। मग़र भगतसिंह और अम्बेडकर के विचारों को एकसाथ लेकर कैसे चला जा सकता है? जब्कि भगतसिंह और अम्बेडकर के विचारों में नार्थ पोल और साउथ पोल का फ़र्क़ है। उदाहरण के रूप में (1) भगतसिंह साइमन कमीशन का विरोध कर रहे थे। जब्कि अम्बेडकर पूरा एक ड्राफ़्ट लेकर साइमन कमीशन से दलितों की हिस्सेदारी माँगने चले गये।
    (2) अम्बेडकर हमेशा डेमोक्रेटिक तऱीके से क़लम को हथियार बनाकर लड़ाई लड़ने की बात करते थे। जब्कि भगतसिंह सेंट्रल हॉल पर बम फेंक रहे थे। (3) शूद्रों पर हो रहे अत्याचार के लिए अम्बेडकर ने सवर्णों एवं ब्राह्मणों को दोषी ठहराते थे इसलिए उनका मत था कि ब्रिटिश भारत में सामाजिक न्याय ब्राह्मण भारत से अधिक मिलने की संभावना है। लेकिन भगतसिंह इसबात को नकारते थे।

    ऐसे अनेकों वैचारिक विरोधभास है जिससे साबित होता है कि कन्हैया कुमार के सामाजिक रूप से विशेष सुविधा प्राप्त सवर्णों के नेता है। यदि ऐसा नहीं होता तब वह सामाजिक न्याय को मज़बूती प्रदान करने के लिए बेगूसराय से मुहिम छेड़ते और कम्युनिस्ट पार्टी की टिकट पर ही किसी दलित या पिछड़े या अल्पसंख्यक समाज के किसी नेता को मज़बूती से समर्थन देकर चुनाव लड़ाते। इससे सहभागिता के अनुपात में प्रतिनिधित्व भी बढ़ता और सामाजिक न्याय की विचारधारा भी मज़बूत होती। साथ में कम्युनिस्ट पार्टी की विश्वसनीयता भी वापस लौटती।

    तारिक़ अनवर चम्पारणी
    (लेखक, टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान, मुम्बई से दलित एंड ट्राइबल स्टडीज में मास्टर इन सोशल वर्क, MSW, हैं और वर्तमान में बिहार में किसानों के साथ काम कर रहे हैं)

  • लोकसभा चुनाव:बिहार मे NDA सीट का झगरा खत्म, जानिए किस पार्टी कहां से मिला सीट

    मिल्लत टाइम्स,बिहार: बिहार में एनडीए की सीट को लेकर चल रहे विवाद अब खत्म हो गए हैं बता दे कि यह मामला फंसा हुआ था कि किस पार्टी को कौन सा सीट मिलेगा जिसे अंतिम रूप दे दिया गया है सभी पार्टियों का सीट का झगड़ा खत्म हो गया है यहां देखें किस पार्टी को कौन सा सीट मिला

    *एनडीए की सीटें:*
    *भाजपा -*
    पटना साहिब, भागलपुर, पाटलिपुत्र, बेगूसराय, सासाराम, कटिहार, मुजफ्फरपुर, आरा, बक्सर, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गया, अररिया, सीवान, सारण, मधुबनी, उजियारपुर

    *जेडीयू -*
    मुंगेर, वाल्मीकिनगर, बांका, मधेपुरा, सुपौल, किशनगंज, सीतामढ़ी, काराकाट, जहानाबाद, पूर्णिया, नालंदा, शिवहर, औरंगाबाद, दरभंगा, झंझारपुर, महाराजगंज और गोपालगंज

    *लोजपा -*
    हाजीपुर, जमुई, समस्तीपुर, खगड़िया, वैशाली और नवादा

  • बिहार बोर्ड से फोन कर परीक्षार्थीयों से मांगा जा रहा है रूपया,कहा रुपया भेजो वरना फेल कर देंगे

    मिल्लत टाइम्स,बिहार: बिहार बोर्ड के खेत की ओर से कई लोगों को किया जा रहा है फोन फोन पर कहा जा रहा है कि अगर आप हमें रुपया नहीं भेजेंगे तो आप फेल हो जाएंगे अगर आप मुझे रुपया भेजेंगे तो हम आपको पास कर देंगे यह मामला कई लोगों के साथ आया है वही एक व्यक्ति ने मिल्लत टाइम्स को बताया कि हमें बिहार बोर्ड की ओर से फोन किया जा रहा है और हम से रुपया का डिमांड किया जा रहा है उन्होंने बताया कि एक कॉल आया है उन्होंने कहा कि अब आप कई सब्जेक्ट में फेल हो रहे हैं अगर आप हमें पैसा देंगे तो हम आपको पास कर देंगे,उन्होंने कहा पहले तुम मुझे विश्वास ही नहीं हुआ कि बिहार बोर्ड की ओर से मुझे कॉल आएगा वह भी रुपए का डिमांड करेंगे पास करने के लिए फिर जब इनको उन्होंने पूरा डिटेल्स बताया इन का रोल नंबर नाम पिता का नाम और सभी डीटेल्स दिए तब जाकर इन्हें विश्वास हुआ कि यह कोई फ्रॉड कॉल नहीं है यह सही में बिहार बोर्ड का ही कॉल है तब जाकर उन्होंने उनसे रूपए की डील करने लगे उन्होंने पूछा कि हम आपको कितना और कैसे पेमेंट करेंगे तो उन्होंने कहा कि आप मुझे तीन हजार पांच सो (3500) रूपए अकाउंट पर भेज देंगे श्री उन्होंने पूछा क्या आप कहां से टीचर हैं तो उन्होंने कहा कि हम लखीसराय से टीचर हैं पूछा किस कॉलेज से तो उन्होंने कहा कि सटन हाई स्कूल से हम टीचर हैं

    AUD-20190314-WA0004
    (फोन पर की गई बात की रिकार्डिंग)

    फिर उन्होंने पूछा कि आपका नाम क्या है हम पेमेंट करेंगे तो उस फोन पर आपका नाम भी लिखना पड़ेगा तो उन्होंने कहा कि आप मैडम के नाम पर भेजेंगे मैडम का क्या नाम है तो फिर उन्होंने कहा कि मैडम का नाम कविता मैडम है


    (उसके द्वारा दिया गया बैंक खाता विवरण)


    इस नं से किया गया था काॅल

    आपको बता दें कि यह कॉल बिहार के सीतामढ़ी जिला में नानपुर ब्लॉक के रायपुर गांव में क्या गया है मोहम्मद दानिश अंसारी ने मिल्लत टाइम्स को बताते हुए कहा कि मुझे 2 दिन से यह कॉल करके परेशान कर रहा है और रूपए की डिमांड कर रहा है मोहम्मद दानिश अंसारी की बहन ने 2019 मे मैट्रिक की परीक्षा दी थी और अब मैट्रिक परीक्षा के कॉपी की जांच चल रही है ,