Category: पश्चिम बंगाल

  • बंगाल में 72 लोगों की मौत,कोलकाता एयरपोर्ट पानी में डूबा;प्रधानमंत्री मोदी कल तूफान प्रभावित इलाकों का करेंगे दौरि

    कोलकाता. पश्चिम बंगाल और ओडिशा में बुधवार को तबाही मचाने के बाद भीषण चक्रवाती तूफान अम्फान अब धीमा पड़ने लगा है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बताया कि तूफान की वजह से बंगाल में 72 लोगों की मौत हुई है। राज्य में 5500 घर तबाह हो गए, हजारों करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। उन्होंने कि ऐसी तबाही कभी नहीं देखी। ममता ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री मोदी से अपील करूंगी कि वे खुद बंगाल आएं और यहां के हालात देखें।” ममता की अपील के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साइक्लोन प्रभावित इलाकों का हवाई दौरा करने जाएंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे शुक्रवार सुबह कोलकाता पहुंचेंगे।

    प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा- बंगाल में तूफान से हुई तबाही की तस्वीरें देखीं। पूरा देश मजबूती के साथ बंगाल के साथ खड़ा है। राज्य के लोगों की सलामती के लिए प्रार्थना कर रहा हूं। प्रभावितों की मदद में कोई कसर बाकी नहीं रखी जाएगी।

    कोलकाता में 190 किमी/घंटा की रफ्तार से चली थीं हवाएं

    मौसम विभाग के मुताबिक, तूफान 27 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-उत्तरपूर्व की ओर बढ़ रहा है। इसके और कमजोर होने के आसार हैं। तूफान की वजह से असम, मेघालय में आज हल्की बारिश और 30-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। तूफान की वजह से बुधवार को पश्चिम बंगाल में हवा की रफ्तार 190 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई थी।

    तूफान के चलते कोलकाता एयरपोर्ट पर भारी तबाही हुई है। पूरा एयरपोर्ट पानी से भर गया है। शेड गिरने से कई विमान भी क्षतिग्रस्त हो गए। अब एयरपोर्ट अथॉरिटी पानी निकालने की कोशिश में जुटा हुआ है। तूफान से हुए नुकसान का आंकलन भी किया जा रहा है।

    6.6 लाख लोग पहले ही सुरक्षित जगह पहुंचा दिए थे

    तूफान बुधवार दोपहर करीब ढाई बजे कोलकाता पहुंचा। शाम साढ़े सात बजे हवा की रफ्तार धीमी हुई। इन 5 घंटों में तूफान काफी तबाही मचा चुका था। तूफान आने से पहले ही 6.6 लाख लोग सुरक्षित जगहों पर पहुंचा दिए गए थे। बंगाल में पिछले तीन दिन में 5 लाख लोग तटीय इलाकों से हटाकर शेल्टर होम पहुंचा दिए थे। ओडिशा में 1.6 लाख लोग रेस्क्यू किए गए। मौसम विभाग के डीजी मृत्युंजय महापात्रा का कहना है कि तूफान के रास्ते और समय का सही आकलन होने से रेस्क्यू में काफी मदद मिली।

    तूफान से ओडिशा और बंगाल में कितने जिले प्रभावित?

    ओडिशा के 9 जिले पुरी, गंजम, जगतसिंहपुर, कटक, केंद्रापाड़ा, जाजपुर, गंजाम, भद्रक और बालासोर प्रभावित हैं। पश्चिम बंगाल के तटीय जिले पूर्वी मिदनापुर, 24 दक्षिण और उत्तरी परगना के साथ ही हावड़ा, हुगली, पश्चिमी मिदनापुर और कोलकाता पर तूफान का असर रहा।

    एनडीआरएफ की टीम के सामने कई चुनौती

    एनडीआरएफ चीफ एसएन प्रधान ने कहा कि कोरोनाकाल में ओडिशा और पश्चिम बंगाल में राहत बचाव कार्य करना बड़ी चुनौती है। तूफान से आई तबाही से लोगों के घर बर्बाद हो गए हैं। सड़कों पर बड़े-बड़े पेड़ और बिजली के खंभे टूटकर गिरे हैं। इन सब को साफ किया जा रहा है। सोशल डिस्टेंसिंग और सैनिटाइजेशन के नियमों का पालन भी किया जा रहा है।

    गृह मंत्रालय की टीम दोनों प्रदेश जाएगी
    कैबिनेट सेक्रेटरी राजीव गाबा ने गृह मंत्रालय के अफसरों को निर्देश दिए हैं कि वह दोनों प्रदेशों के सरकार के संपर्क में रहें। किसी भी तरह की जरूरत पड़ने पर मदद करें। यह भी तय हुआ कि जल्द ही गृह मंत्रालय की एक टीम दोनों प्रदेशों का दौरा करेगी और तूफान से होने वाले नुकसान का आंकलन करेगी।(इनपुट भास्कर)

  • बंगाल साइक्लोन अम्फान,कहीं बादल बरसे तो कहीं 190 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं

    कोलकाता. सुपर साइक्लोन अम्फान बुधवार दोपहर ढाई बजे के करीब कोलकाता से टकराया। अम्फान की वजह से पश्चिम बंगाल के साथ-साथ ओडिशा में भी तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हो रही है। इस दौरान, कहीं तेज बारिश हुई तो कहीं पर 190 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। तूफान की वजह से बंगाल में दो लोगों की मौत हो गई। इससे पहले प्रशासन ने तटीय इलाकों से लोगों को निकाला। बंगाल में करीब 5 लाख और ओडिशा में 1.58 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है।

  • पश्चिम बंगाल में एनआरसी लाने से पहले नागरिकता संशोधन विधेयक लाएंगे: अमित शाह

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि केंद्र राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का विस्तार पश्चिम बंगाल तक करेगा लेकिन इससे पहले सभी हिंदू, सिख, जैन, ईसाई और बौद्ध शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने के लिए नागरिकता (संशोधन) विधेयक पारित किया जाएगा.

    विवादास्पद एनआरसी पर एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस एनआरसी के बारे में लोगों को गुमराह कर रही है.

    उन्होंने कहा, ‘एनआरसी के बारे में बंगाल के लोगों को गुमराह किया जा रहा है. मैं सभी हिंदू, बौद्ध, सिख, जैन, ईसाई शरणार्थियों को आश्वस्त करता हूं कि उन्हें देश छोड़ना नहीं पड़ेगा, उन्हें भारतीय नागरिकता मिलेगी और उन्हें एक भारतीय नागरिक के सभी अधिकार मिलेंगे.’

    https://twitter.com/ANI/status/1178979318971555841

    इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक शाह ने तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘ममता दीदी कह रही हैं कि बंगाल में कोई एनआरसी नहीं होगी, लेकिन हम एक-एक घुसपैठिये की पहचान कर सभी घुसपैठियों को देश से बाहर किया जाएगा।’

    उन्होंने आगे कहा, ‘जब ममता बनर्जी विपक्ष में थीं. तब उन्होंने घुसपैठियों को निकालने की बात की थी, उन्होंने इसी मुद्दे पर स्पीकर के मुंह पर शॉल फेंक दिया था. अब जब वे घुसपैठिये उनका वोट बैंक बन गए हैं, तो वे उन्हें निकालना नहीं चाहतीं। मैं ममता दीदी को उनका 4 अगस्त 2005 को दिया गया भाषण याद दिलाना चाहूंगा जहां उन्होंने ऐसे घुसपैठियों को निकलने की बात की थी. लेकिन राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को देश हित से ऊपर नहीं रखा जाना चाहिए।’

    अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं से बंगाल के लोगों को नागरिकता संशोधन विधेयक के बारे में जागरूक करने को भी कहा.

    केंद्रीय गृहमंत्री ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की और जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जिक्र करते हुए कहा कि मुखर्जी के बलिदान के कारण ही आज पश्चिम बंगाल भारतीय गणराज्य का हिस्सा है.

    हालांकि अमित शाह के एनआरसी से जुड़े बयान को लेकर विपक्ष इस समय उन पर हमलावर है.

    माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने एनआरसी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताए जाने संबंधी गृह मंत्री अमित शाह के बयान को गैरजरूरी बताते हुए कहा है कि भारत में किसी आस्था को अलग थलग करने वाला कोई कानून वजूद में नहीं रह सकता है, इसलिए शाह को देश में विभाजन का पोषण करने वाली प्रवृत्ति को रोकना चाहिए.

    येचुरी ने बीते मंगलवार को शाह को विभाजन का पोषक नहीं बनने की नसीहत देते हुए कहा, ‘सभी आस्थाओं का मतलब सभी प्रकार की आस्थाएं हैं, इनमें यहूदी, पारसी, मुस्लिम, बौद्ध, जैन और हिंदूओं के अलावा सभी आस्थाओं को मानने वाले इसमें शामिल हैं. गृह मंत्री को विभाजन को बढ़ावा देने, देश को नुकसान पहुंचाने और भारतीयों का दिल दुखाने की कोशिशों को रोकना चाहिए..

    https://twitter.com/SitaramYechury/status/1179012322557194241

    येचुरी ने शाह द्वारा एनआरसी के मुद्दे पर कोलकाता में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए दिए गए उस बयान पर यह प्रतिक्रिया व्यक्त की जिसमें उन्होंने कहा है कि एनआरसी जो अभी असम तक सीमित है, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए यह पूरे देश के लिए जरूरी है और इसे देश भर में लागू किया जायेगा.

    येचुरी ने ट्वीट कर कहा, ‘जिन्ना और सावरकर द्वारा उठाए गए द्विराष्ट्र के सिद्धांत को भारत पहले ही नकार चुका है और यह हमारा संवैधानिक सिद्धांत है. जाति, संप्रदाय, लिंग, आस्था, खानपान, व्यवसाय और राजनीतिक आस्थाओं से परे हटकर सभी भारतीय भारत में समाहित हैं.’

    उन्होंने पश्चिम बंगाल पुलिस को तृणमूल कांग्रेस की कठपुतली पुलिस करार देते हुए कोलकाता पंहुचने पर शाह को काले झंडे दिखा रहे माकपा की राज्य इकाई के नेता पलाश दास सहित 17 नेताओं को हिरासत में लेने का आरोप लगाया.

    उन्होंने कहा कि शाह के आगमन पर विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे माकपा के 17 नेताओं को अभी भी हिरासत में रखा गया है. येचुरी ने भाजपा और तृणमूल कांग्रेस में मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि सत्तारूद्ध तृणमूल कांग्रेस ने सिर्फ भाजपा को विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति दी है. INPUT(THE WIRE)

  • ममता बनर्जी ने कहा कि अगर भाजपा ने NRC के नाम पर बंगाल में एक भी व्यक्ति को छुआ, तो हम उन्हें सबक सिखा देंगे.

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने एनआरसी (NRC) के मुद्दे पर एक बार फिर बीजेपी पर हमला बोला है. ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) को आगाह किया कि वह NRC के नाम पर ‘आग से नहीं खेले.’ बता दें कि असम में जारी NRC के खिलाफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री आज सड़कों पर उतरीं. जुलूस में ममता बनर्जी के साथ तृणमूल कांग्रेस के कई बड़े नेता, मंत्री और कार्यकर्ता भी शामिल हुए. TMC का कहना है कि बंगाल की जनता राज्य में एनआरसी लागू नहीं होने देगी. इससे पहले एनआरसी के ख़िलाफ़ तृणमूल ने 7 और 8 सितंबर को भी ज़िलों में विरोध प्रदर्शन किया था.

    तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ने भाजपा नेताओं को राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के नाम पर पश्चिम बंगाल के एक भी नागरिक को ‘छू कर दिखाने की चुनौती दी.’ एनआरसी के विरोध में निकाली गई रैली में उन्होंने कहा, ‘हम बंगाल में एनआरसी को कभी इजाजत नहीं देंगे. हम उन्हें धार्मिक एवं जातिगत आधार पर लोगों को बांटने की इजाजत नहीं देंगे. हम असम में एनआरसी को स्वीकार नहीं करेंगे. उन्होंने पुलिस प्रशासन का इस्तेमाल कर असम के लोगों को चुप कराया है, लेकिन वे बंगाल को चुप नहीं करा सकते..

    ममता के इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी की तरफ से भी रिएक्शन आया. पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष (Dilip Ghosh) ने कहा कि बंगाल में भी एनआरसी को लागू करेंगे और घुसपैठियों को बाहर का रास्ता दिखाएंगे. उन्होंने ममता सरकार पर बांग्लादेशी मुसलमानों को बचाने का भी आरोप लगाया. दिलीप घोष ने कहा, ‘ममता बनर्जी सरकार बंगाल में एक करोड़ से अधिक बांग्लादेशी मुसलमानों, रोहिंग्या को बचा रही है.

  • बंगाल सरकार ने माॅब लिंचिंग कानून किया तैयार:उम्रकैद और 5 लाख रुपये का होगा जुर्माना

    कोलकाता : वेस्ट बंगाल सरकार ने राज्य विधानसभा में एक नए एंटी-लिंचिंग बिल की तालिका तैयार की है, जिसमें दोषियों को अधिकतम सजा के रूप में आजीवन कारावास और 5 लाख रुपये का जुर्माना, और पीड़ितों के लिए मुफ्त कानूनी और चिकित्सीय सहायता दी गई है। वेस्ट बंगाल प्रिवेंशन ऑफ लिंचिंग बिल, 2019, एक स्टेट टास्क फोर्स के गठन का प्रस्ताव करता है, जिसमें स्टेट को-ऑर्डिनेटर के साथ IG-रैंक और नोडल ऑफिसर न हों ताकि लिंचिंग की घटनाओं को रोका जा सके।

    सूत्रों ने कहा कि कानून का उद्देश्य, जो शुक्रवार को पेश किया जा सकता है, “कमजोर व्यक्तियों के संवैधानिक अधिकारों के प्रभावी संरक्षण के लिए प्रदान करना और लिंचिंग को रोकना और राज्य में लिंचिंग के कृत्यों को दंडित करना है”। धर्म, जाति, जाति के आधार पर भीड़ द्वारा हिंसा, या किसी भी तरह की हिंसा, या किसी भी तरह की घटना को अंजाम देना, चाहे वह दो या दो से अधिक व्यक्तियों का समूह हो, किसी भी अधिनियम या श्रृंखला के रूप में लिंचिंग को परिभाषित करता है। सेक्स, जन्म स्थान, भाषा, आहार व्यवहार, यौन अभिविन्यास, राजनीतिक संबद्धता, जातीयता या कोई अन्य आधार हो”।

    यह तीन श्रेणियों की सजा का प्रस्ताव करता है: अधिकतम तीन साल की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना, यदि अधिनियम पीड़ित को “दुख पहुंचाने” की ओर ले जाता है; “दुखद चोट” के मामले में 10 साल और 3 लाख रुपये तक; और मृत्यु के मामले में “आजीवन कारावास और 1 लाख रुपये से कम और 5 लाख रुपये तक का कठोर कारावास”।

    इसके अलावा, विधेयक के अनुसार, जो लोग लिंचिंग करने के लिए एक साजिश का हिस्सा पाए गए या लिंचिंग के एक अधिनियम को समाप्त कर दिया गया है, उन्हें “उसी तरह से दंडित किया जाएगा जैसे कि उन्होंने खुद ही लिंचिंग किया हो”। विधेयक में अधिकतम एक साल की जेल अवधि और “आक्रामक सामग्री” फैलाने या प्रकाशित करने या संचार करने वालों के लिए 50,000 रुपये तक का जुर्माना भी प्रस्तावित है; और अधिकतम तीन साल और “एक व्यक्ति या एक व्यक्ति के समूह के लिए शत्रुतापूर्ण वातावरण” बनाने वालों के लिए 1 लाख रुपये तक का जुर्माना।

    नए विधेयक के अनुसार, राज्य पीड़ितों को सुरक्षा प्रदान करेगा, जो कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के तहत कानूनी सहायता पैनल से किसी भी वकील को चुन सकते हैं। राज्य नि: शुल्क चिकित्सा उपचार भी प्रदान करेगा और मुआवजा योजना के अनुसार मुआवजा प्रदान करेगा। विधेयक में कहा गया है कि लिंचिंग के मामलों की जांच केवल “विशेष परिस्थितियों” को छोड़कर निरीक्षक के पद से ऊपर के पुलिस अधिकारियों द्वारा की जाएगी।

    यह सोशल मीडिया पोस्ट को ट्रैक करने के लिए नोडल अधिकारियों को भी अनिवार्य करता है, और महीने में कम से कम एक बार सतर्कता, भीड़ हिंसा या लांछन की प्रवृत्ति की पहचान के लिए जिलों और पुलिस कमिश्नरेट की स्थानीय खुफिया इकाइयों के साथ मिलेंगे”…” पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ महीनों में कई तरह के उत्पात देखने को मिले हैं, जिनमें से विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर उत्तर बंगाल में फैले “बच्चा चोर” की अफवाहें।

  • तृणमूल सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा-बचपन में मेरा यौन शोषण हुआ

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने बताया कि वह जब 13 साल के थे,तब कोलकाता में एक बस में उनके साथ छेड़छाड़ की घटना हुई थी। उन्होंने कहा- राज्यसभा में प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफेंसेस (संशोधन) बिल 2019 का मजबूती से समर्थन करते हैं। ब्रॉयन के मुताबिक यौन शोषण के खिलाफ ज्यादा से ज्यादा लोगों को आवाज उठानी चाहिए।

    ब्रायन ने कहा-नया संशोधन बिल बच्चों के यौन शोषण के दोषियों के लिए मौत की सजा का प्रावधान देता है। हमें चाहिए कि हम बच्चों को ऐसी किसी भी अप्रिय घटना के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रोत्साहित करें। मैं बेहद भारी मन के साथ आपको बताना चाहता हूं कि 13 साल की उम्र में कोलकाता में एक बस में मेरे साथ यौन शोषण हुआ था। यह घटना तब की है जब मैं टेनिस खेलकर घर लौट रहा था।

    अच्छे और बुरे स्पर्श के बारे में बताना जरूरी

    ब्रायन के मुताबिक-इस घटना के बारे में वह कई सालों तक चुप रहे लेकिन बाद में उन्होंने माता-पिता को इस बारे में बताया। सदन में कई अन्य सदस्यों ने भी बच्चों को अच्छे और बुरे मकसद से स्पर्श करने के बारे में जागरूक करने की जरूरत पर बल दिया।

  • शहीद दिवस रैली में ममता ने कहा-देश में लोकतंत्र की हो बहाली,बैलेट से चुनाव करवाए जाएं

    मिल्लत टाइम्स,कोलकाता:ममता बनर्जी ने रविवार को शहीद दिवस रैली में कहा कि देश में लोकतंत्र बहाल करने की जरूरत है। चुनाव मशीन (ईवीएम) नहीं बल्कि बैलेट से कराए जाने चाहिए।

    तृणमूल कांग्रेस हर साल 21 जुलाईको कोलकाता में शहीद दिवस रैली कराती है। 1993 में इसी दिन पश्चिम बंगाल की तत्कालीन कम्युनिस्ट सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दिया था। इसमें 13 यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मौत हो गई थी। ममता उस वक्त युवा कांग्रेस की नेता थीं।

    ‘मेरी शहीदों कोश्रद्धांजलि’
    ममता ने कहा- 21 जुलाई शहीद दिवस ऐतिहासिक है। 26 साल पहले आज के ही दिन 13 युवा कार्यकर्ताओं की पुलिस फायरिंग में मौत हो गई थी। तब से इस दिन को हम शहीद दिवस के रूप में मनाते हैं। मैं उन सभी शहीदों को श्रद्धांजलि देती हूं, जो 34 साल के लेफ्ट के शासनकाल में मारे गए।

    ‘बैलेट पेपर वापस लाओ’
    बंगाल की मुख्यमंत्री ने ईवीएम पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘‘21 जुलाई 1993 को प्रदर्शनकारियों की मांग थी- आईडी कार्ड नहीं तो वोट नहीं। इस साल हम लोकतंत्र बहाली की मांग करते हैं। मशीन नहीं, बैलेट पेपर वापस लाओ। #21जुलाईशहीददिबस पर यही प्रण लें कि लोकतंत्र की बहाली के लिए संघर्ष करेंगे।’’

    ‘‘यह नहीं भूलना चाहिए कि इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी और अमेरिका ने भी ईवीएम से चुनाव कराए थे लेकिन बाद में इसे रोक दिया। तो हम बैलेट पेपर पर क्यों नहीं लौट सकते? 1995 से मैं चुनाव सुधारों की मांग कर रही हूं। अगर चुनाव में कालेधन का इस्तेमाल रोकना है और लोकतंत्र बचाना है तो राजनीतिक दलों को पारदर्शिता लानी होगी।’’

    शहीद दिवस रैली को आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। इस बार लोकसभा चुनाव में राज्य में भाजपा का जोरदार प्रदर्शन रहा। पार्टी ने बंगाल की 42 सीटों में से 18 जीत लीं। जबकि तृणमूल को 22 सीटों पर कब्जा किया।

  • सनाउल शेख की पीट-पीटकर हत्या करने वाला मुख्य आरोपी को पुलिस ने दबोचा

    मिल्लत टाइम्स,कोलकाता,पश्चिम बंगाल में मालदा जिले के वैष्णवनगर थाना क्षेत्र में बाइक चोरी के संदेह में 24 वर्षीय सनाउल शेख की पीट-पीटकर हत्या के मामले में मुख्य आरोपित को पुलिस ने झारखंड से गिरफ्तार किया है।
    रविवार को मालदा जिला पुलिस अधीक्षक आलोक राजोरिया ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैष्णवनगर लिंचिंग मामले में झारखंड के पाकुड़ इलाके से बप्पा घोष नाम के आरोपित को गिरफ्तार किया गया है। उसी ने सबसे पहले सनाउल को पकड़ा था और मारने पीटने की शुरुआत की थी। उसी ने लोगों को सामूहिक पिटाई के लिए उकसाया भी था। उसकी गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले में गिरफ्तार लोगों की संख्या बढ़कर चार हो गई है।

    पीड़ित सनाउल शेख पर 26 जून को बाइक चोरी करते पाए जाने के बाद बैष्णबनगर बाजार में कुछ स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर हमला किया था।पुलिस ने उसकी मां की शिकायत के बाद मामला दर्ज किया था। हमले का एक कथित वीडियो वायरल हो गया था और इसके आधार पर कुछ दोषियों की पहचान की गई थी। 30 जून को दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था और एक अन्य को तीन जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। 26 जून की रात घटना के बाद सामूहिक हमले के पीड़ित शेख को पहले बेदराबाद के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया गया, जहां से उसे मालदा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में रेफर कर दिया गया। बाद में उसे कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां 29 जून को उसकी मृत्यु हो गई।

    माकपा विधायक दल के नेता सुजन चक्रवर्ती और राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता अब्दुल मन्नान के नेतृत्व में वाम मोर्चा और कांग्रेस के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को बैष्णबनगर का दौरा किया और पीड़ित परिवार से बात की।

  • जय श्री राम का इस्‍तेमाल लोगों को पीटने में हो रहा,इसका बंगाली संस्‍कृति से कोई नाता नहीं:अमर्त्‍य सेन

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्‍ली:पश्चिम बंगाल में जय श्री राम नारे को लेकर मचे घमासान के बीच नोबेल पुरस्‍कार विजेता अमर्त्‍य सेन ने भी टिप्‍पणी की है. उन्‍होंने शुक्रवार को कोलकाता में कहा, ‘मैंने पहले कभी जय श्री राम का नारा नहीं सुना. इस समय इसका इस्‍तेमाल लोगों की पिटाई करने में हो रहा है.’ उन्‍होंने आगे कहा, ‘मेरा मानना है कि जय श्री राम नारे का बंगाली संस्‍कृति से कोई नाता नहीं है. मौजूदा दौर में कोलकाता में रामनवमी अधिक मनाई जाती है. इसके बारे में मैंने पहले कभी नहीं सुना.’

    कोलकाता में नोबेल पुरस्‍कार विजेता अमर्त्‍य सेन ने कहा, ‘मैंने अपनी चार वर्षीय पोती से पूछा कि उसकी पसंदीदा भगवान कौन से हैं? इस पर उसने जवाब दिया मां दुर्गा. उन्‍होंने कहा कि मां दुर्गा के महत्‍व की तुलना रामनवमी से नहीं की जा सकती.

    बता दें कि पिछले कई दिनों से पश्चिम बंगाल में जय श्री राम के नारे को लेकर बीजेपी और टीएमसी के कार्यकर्ताओं में गतिरोध चल रहा है. यह एक बड़ी राजनीतिक बहस बन गया है. इसे लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी की भी कई बार आलोचना हो चुकी है

  • केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के नाम में बदलाव को किया नामंजूर,ममता ने मोदी को लिखा पत्र

    मिल्लत टाइम्स,कोलकाता:केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के नाम को बदलकर “बांग्ला’ करने के राज्य सरकार के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखकर इस बदलाव को मंजूरी देने का निवेदन किया।

    केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार कोराज्यसभा में बताया कि केंद्र ने राज्य के नाम में बदलाव को मंजूर नहीं किया। इसके लिए संविधान संशोधन की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री बनर्जी ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में कहा- ‘वेस्ट बंगाल’ अंग्रेजी का शब्द हैऔर पश्चिम बंगाल ‘बंगाली’ का,इसलिए यह हमारे राज्य के इतिहास को प्रमाणित नहीं करता।

    हालिया सत्र में ही पारित करें: बनर्जी

    बनर्जी ने कहा- मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि इस संविधान संशोधन को हालिया सत्र में ही पारित करें। राज्य के शीर्ष अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार ने पश्चिम बंगाल के नाम में बदलाव को शीघ्र मंजूरी देने के लिए केंद्र से अनुरोध करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में मसौदा तैयार है।इसे गुरुवार को भेजा जाएगा।
    बांग्ला नाम को स्वीकृति दी जाए: सचिव

    राज्य मंत्रिमंडल ने 8 सितम्बर 2017 को अंग्रेजी, हिंदी और बंगाली में “बांग्ला’ नाम को मंजूरी प्रदान की थी। ममता बनर्जी ने कहा था कि विधानसभा 26 जुलाई 2018 से इस प्रस्ताव को मानेगा। पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव नेकेंद्रीय गृह सचिव से संपर्क कर पश्चिम बंगाल के नाम को अंग्रेजी, हिंदी और बंगाली में “बांग्ला’ नाम को स्वीकृति देने की मांग की थी।