Category: दिल्ली

  • दिल्ली की महिलाओं का मांग पत्र आज ईमेल के माध्यम से मुख्यमंत्री का उप राज्यपाल को भेजा गया।

    प्रैस विज्ञप्ति
    आज दिल्ली के विभिन्न महिला संगठनों की दिल्ली की महिलाओं का मांग पत्र मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल अनिल बैजल को सौंपा गया ।दोनों ही कार्यालयों से महिला संगठनों के प्रतिनिधियों को मिलने का समय मांगा गया परंतु जब समय नहीं दिया गया तो यह मांग पत्र ईमेल द्वारा भेजा गया । अधोहस्ताक्षरी संगठनों द्वारा जारी किए गए मांग पत्र में मांग की गई है कि:

    1.बेरोजगार , बेघर , आश्रय घरों इत्यादिमें रहने वाली महिलाओं को खाना ​लगातार मुहैया कराया जाए 2.दिल्ली में सभी जरूरतमंद परिवारों को फिलहाल दिसंबर महीने तक मुफ्त राशन दिया जाएl​ ​3दिल्ली में सभी जरूरतमंद परिवारों की महिलाओं को ₹10000 की विशेष राहत राशि प्रदान की जाए। यह राशि प्रति माह उनके बैंक खाते में दी । जिन महिलाओं का बैंक खाता नहीं है उनका खाता बिल्कुल सरल व सहज प्रक्रिया द्वारा बैंकों द्वारा स्वयं खोला जाए। एसडीएम कार्यालय ,रिहायशी इलाकों में इसके लिए विशेष कैंप लगाए जाएं। इस खाते मेंन्यूनतम बैलेंस रखने की शर्त ना हो।लॉकडाउन की अवधि सहित करोना काल में यह आर्थिक सहायता जारी रहे।4.सभी महिला पेंशनधारकों को रुकी हुई पेंशन के साथ-साथ ₹5000 की लॉकडाउन अवधि की सहायता दी जाएदिल्ली सरकार द्वारा घोषित₹1000 की अतिरिक्त राशि सभी दिव्यांग वृद्ध विधवा एकल महिला पेंशनधारियों के खाते में अविलंब हस्तांतरित की जाए।

    5.छात्राओं को विशेष अनुदान दिया जाए जिससे वे मोबाइल नेटवर्क संबंधी डाटा रिचार्ज संबंधी जरूरतों को पूरा कर सकें।6.शिक्षा के लिए जो कर्ज लिए गए हैं उन्हें माफ किया जाए। 7.छात्राओं को किताबें खरीदने के लिए विशेष अनुदान राशि दी जाए। 8.निजी स्कूलों में, व कॉलेजों को ट्यूशन फीस के अलावा दूसरी फीस ना लेने की निर्देश दिया जाए औरउसकाउल्लंघन करने की स्थिति में उन पर कारवाई की जाए।9.स्कूलों में मिड डे मील तथा स्वास्थ्य सुविधाएं जैसेआयरन टेबलेट सैनिटरी पैड्स देने के कार्यक्रम को लगातार जारी रखा जाए10.प्रत्येक मोहल्ला क्लीनिक, डिस्पेंसरी तीन शिफ्ट में चलाई जाए में विशेषज्ञों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। प्रत्येक व्यक्ति को मुफ्त व् गुणवत्तापूर्ण इलाज कराया जाए। तथा कोविड-19 निशुल्क जांच यहां पर सुनिश्चित की जाए।11.सभी फ्रंटलाइन करोना कर्मियों को अविलंब पीपी ई किट दी जाए। सफाई कर्मचारियों व चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को भी करोना के खिलाफ अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं के रूप में शामिल किया जाए।सभी को समय पर तनख्वाह मिले। पर्याप्त छुट्टी मिले, काम के दौरान पर्याप्त अवकाश मिले यह सुनिश्चित किया जाए. मृत्यु की स्थिति में उनके परिवार की जिम्मेदारी सरकार उठाए। 12आशा कार्यकर्ताओं को कुशल कामगार का दर्जा दिया जाए13गर्भवती महिलाओं की सभी अस्पतालों में जांच की उचित व्यवस्था की जाए14 गर्भवती महिलाओं को मातृत्व सहायता राशि अविलंब उपलब्ध करवाई जाए बिना किसी शर्त के अभी केवल पहली प्रसूति के लिए ही यह राशि उपलब्ध है ।15गर्भवती महिलाओं को ,स्तनपान कराने वाली महिलाओं को कोविड जांच के नाम पर अस्पतालों में भटकाना बंद किया जाए.व उनके लिए यह जांच प्रसूति केंद्र पर ही उपलब्ध करवाई जाए।16बड़े निजी व कॉर्पोरेट अस्पतालों को सरकार अपने अधीन ले ताकि दिल्ली की महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध हो सके।17असहमति (dissent) के अधिकार पर प्रहार बंद करो ।18सी ए ए विरोधी प्रदर्शनकारियों को अविलंब रिहा करो। 19यूएपीए रद्द करो। 20जेल में कैदियों को स्वास्थ्य की सुरक्षा की गारंटी करो।​

    सभी महिला संगठनों में मांगों पर दिल्ली में विभिन्न बस्तियों में लगातार संघर्ष के कदम उठाने का निर्णय करते हुए 2 अक्टूबर को जंतर मंतर पर एक केंद्रीय कार्यक्रम करने का भी निर्णय लिया है।
    जारीकर्ता
    दीप्ति भारती _नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वुमन दिल्ली इकाई,
    पूनम कौशिक _प्रगतिशील महिला संगठन दिल्ली,
    आशा शर्मा_अखिलभारतीय जनवादी महिला समिति,
    आरती__संघर्षशील महिला केंद्र,
    रितु कौशिक _अखिल भारतीय सांस्कृतिक महिला संगठन,
    कुसुमलता सहगल _स्वास्तिक महिला समीति ।
    दिल्ली
    सितंबर 21,2020

  • दिल्ली के सभी स्कूल 5 अक्टूबर तक बंद रहेंगे, सरकार ने आदेश जारी किया

    दिल्ली में 9 से 12वीं क्लास के छात्रों के लिए आंशिक रूप से स्कूल खोलने का आदेश भी रद्द हो गया, कोरोना वायरस महामारी के चलते दिल्ली में मार्च से स्कूल बंद

    नई दिल्ली: दिल्ली (Delhi) में सभी स्कूल (Schools) 5 अक्टूबर तक बंद रहेंगे. दिल्ली सरकार (Delhi Governemnt) ने इस बारे में आदेश जारी किया है. दिल्ली सरकार के इस आदेश का यह मतलब है कि 21 सितंबर से जो 9 से 12वीं क्लास के छात्रों के लिए आंशिक रूप से स्कूल खोलने की बात कही थी, वह भी रद्द कर दी गई है. अब केवल ऑनलाइन क्लास जारी रहेंगी. कोरोना वायरस महामारी के चलते दिल्ली में मार्च से स्कूल बंद हैं.

    इससे पहले दिल्ली सरकार ने 5 सितंबर को दिल्ली में 30 सितंबर तक सभी स्कूलें बंद रखे जाने का आदेश जारी किया था. आदेश में कहा गया था कि ऑनलाइन पढ़ाई पहले की तरह ही जारी रहेगी. आदेश में कहा गया था कि 20 सितंबर तक छात्रों को किसी भी तरह की एक्टिविटी के लिए स्कूल ना बुलाया जाए.

    सरकार ने कहा था कि 21 सितंबर से अगर 9वीं से 12वीं क्लास के छात्र अपने स्कूल जाना चाहें और टीचर की सलाह लेना चाहें तो वे अपने पेरेंट की लिखित सहमति के साथ जा सकते हैं. हालांकि अगर स्कूल और छात्र का घर कन्टेनमेंट जोन में नहीं है तो ही इजाजत होगी. लेकिन यह स्वैच्छिक होगा.

    दिल्ली सरकार ने कहा था कि 21 सितंबर से स्कूल एक समय में अपने 50% टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को ऑनलाइन पढ़ाई/ आदि के लिए बुला सकते हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय स्कूलों/छात्रों और टीचर आदि के लिए लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर जारी करेगा जिसका पालन करना होगा.

     

  • जामिआ मिल्लिया इस्लामिआ के साथ भेदभाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम खुला खत .

    सेवा,
    श्री नरेंद्र मोदी,
    माननीय प्रधान मंत्री,
    साउथ ब्लॉक,
    रायसीना हिल्स
    नई दिल्ली -110001

    आदरणीय प्रधानमंत्री साहब,

    मैं एक गंभीर मामले की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं जो हमारे देश के भविष्य के सम्बंध में है।

    जामिया मिलिया इस्लामिया, एक केंद्रीय विश्वविद्यालय जिसका सपना स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देखा गया था और आंदोलन के कर्ता-धर्ताओं द्वारा इसे एक निश्चित रूप दिया गया था, इस वर्ष यह शताब्दी वर्ष मना रहा है।
    चौतरफा उत्कृष्टता हासिल करने में जामिया के अथक प्रयासों का फल मिला है और विश्वविद्यालय ने MHRD मूल्यांकन में पहला स्थान हासिल किया है। जामिया ने अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग में अपनी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है। ये उपलब्धियां छात्रों, शिक्षकों, प्रशासन और कर्मचारियों की कड़ी मेहनत के कारण संभव हो पाई हैं।
    इस तरह के प्रभावशाली एवं उल्लेखनीय उपलब्धियों के बावजूद, यह जानकर निराशा होती है कि केंद्र सरकार उस संस्था को सहयोग नहीं दे रही है, जो न केवल शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करती है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी योगदान देती है।

    सौ साल पूरे करने वाली संस्था को 100 करोड़ रुपये का विशेष अनुदान देने का हमारे देश में चलन रहा है।  इस फंड का उपयोग शैक्षिक बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने के लिए किया जाता है। हालांकि, जामिया मिलिया इस्लामिया को 100 साल की एक बहुत ही सफल और ऐतिहासिक पारी को पूरा करने के अवसर पर कोई भी शताब्दी वित्तीय अनुदान नहीं मिला। शिक्षक दिवस के अवसर पर, जामिया टीचर्स एसोसिएशन (JTA) ने भी विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक और शोध सुविधाओं में सुधार के लिए 100 करोड़ रुपये के अनुदान को जारी करने के लिए आपसे अनुरोध किया था। हालाँकि इस सम्बंध में आप की तरफ़ से आज तक कोई पहल नहीं हुई है।

    जामिया से एक और महत्वपूर्ण अनुरोध है जो लंबे समय से सरकार के पास लंबित है। विश्वविद्यालय ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया था कि वह मेडिकल कॉलेज और अस्पताल स्थापित करने की अनुमति दे।  मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की स्थापना से राष्ट्रीय स्वास्थ्य क्षेत्र को बेहतर बनाने के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाले डॉक्टरों को तैयार करने में मदद मिलेगी। मैं आपसे जामिया को मेडिकल कॉलेज और अस्पताल स्थापित करने की अनुमति देने का अनुरोध करूंगा। यह निर्णय राष्ट्रीय राजधानी में सस्ती कीमत पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं के लिए लगातार बढ़ती आवश्यकता को संभालने में मदद करेगा।

    जामिया भी MHRD/ UGC द्वारा नियमित धन जारी करने में लंबे समय से संघर्ष कर रहा है। इसके बकाया बिलों का एक अंबार लगा हुआ है, जिसमें चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिल शामिल हैं जो करोड़ों की राशि के हैं। शिक्षक बड़ी मुश्किल में हैं क्योंकि सरकार उनके वास्तविक मुद्दों की लगातार अनदेखी कर रही है। धन की कमी ने जामिया को विशेष विषयों के लिए रिक्त पदों / पदों को भरने से रोक दिया है।  वित्तीय संकट के कारण विश्वविद्यालय वर्तमान सत्र में लगभग 200 शिक्षकों, अतिथि / संविदात्मक संकायों की भर्ती नहीं कर सका। जामिया प्रशासन को अनुसंधान विद्वानों को शिक्षण भार सौंपने के लिए मजबूर किया गया है। आप इस बात को मानेंगे कि ऐसा ज़्यादा समय तक नहीं चल पाएगा क्योंकि यह विश्वविद्यालय में अध्येताओं के शिक्षण और शोध की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। Covid-19 के बीच यह पीएचडी के छात्रों पर एक अतिरिक्त मनोवैज्ञानिक बोझ डालेगा। छात्र: शिक्षक अनुपात और आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालय की रैंक पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

    इसलिए, मैं आपसे जामिया मिलिया इस्लामिया को देय धनराशि जारी करने के लिए एमएचआरडी को निर्देशित करने का अनुरोध करता हूं।

    जामिया का महात्मा गांधी के साथ एक लंबा और ऐतिहासिक संबंध रहा है। जनवरी 1925 में, जब जामिया को धन की कमी के कारण बंद होने का खतरा था, तो गांधीजी ने हकीम अजमल खान से कहा, “आप को रूपये की दिक़्क़त है तो मैं भीख माँग लूँगा लेकिन जामिया बंद नहीं होनी चाहिये।” हमारे राष्ट्रपिता जामिया को चलाने के लिए भीख मांगने के लिए तैयार थे, लेकिन दुर्भाग्य से आज इस संस्था को आर्थिक रूप से घुटन देने का प्रयास किया जा रहा है।
    मैं यह सुनिश्चित करने के लिए आपके हस्तक्षेप की मांग करता हूं कि जामिया मिलिया इस्लामिया के साथ भेदभाव नहीं किया जाए और उसे इसका हक दिया जाए क्योंकि एक राष्ट्र का भविष्य उसके युवा को दी जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता पर निर्भर करता है जो हमारे द्वारा स्थापित और चलाए जा रहे संस्थानों की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। एक शैक्षिक संस्थान में निवेश एक राष्ट्र के भविष्य में निवेश है।

    आशा है कि आप विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और शोध केंद्रों को समयबद्ध तरीके से धनराशि जारी करने को सुनिश्चित करके एक शिक्षित समाज के निर्माण करने की अपनी प्रतिबधिता को प्रदर्शित करेंगे।

    हार्दिक शुभकामनाओं सहित,

    सादर,

    (कुंवर दानिश अली)

  • उर्मिला मातोंडकर का कंगना रनौत पर निशाना, बोलीं-फिल्म इंडस्ट्री नशेड़ी है तो पीएम मोदी ने मिलने के लिए क्यों बुलाया

    उर्मिला मातोंडकर (Urmila Matondkar) ने कंगना रनौत (Kangana Ranaut) के बयानों को अशोभनीय करार देते हुए उनपर निशाना साधा.

    नई दिल्ली: सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) के निधन के बाद से ही समूचे बॉलीवुड गलियारे पर निशाना साधा जा रहा है. एक्ट्रेस कंगना रनौत (Kangana Ranaut) के बयान लगातार मीडिया की सुर्खियों में हैं. हाल ही में जया बच्चन (Jaya Bachchan) ने बॉलीवुड को निशाना बनाए जाने पर संसद में बयान दिया. उन्होंने बिना नाम लिए कहा था कि कुछ लोग जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं. जया बच्चन के इस बयान पर कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने ट्वीट कर कहा कि कौन सी थाली दी है जया जी और उनकी इंडस्ट्री ने? ये मेरी अपनी थाली है जया जी आपकी नहीं. अब इस पूरे मामले पर बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्मिला मातोंडकर (Urmila Matondkar) ने एनडीटीवी से खास बातचीत की है और अपने विचार रखे हैं.

    उर्मिला मातोंडकर (Urmila Matondkar) ने कहा: “अगर हमारी इंडस्ट्री नशेड़ियों का अड्डा है तो इतने सालों तक कैसे देश की सबसे बड़ी इंडस्ट्री रह पाई. इस इंडस्ट्री में बड़े-बड़े लोग आए और फिल्मों के जरिए देश को नई दिशा दी. राज कपूर और दिलीप कुमार जैसे कई बड़े कलाकारों ने देश के लिए शानदार फिल्में बनाईं. बॉलीवुड पूरे विश्व में सबसे बड़ी इंडस्ट्री है. तनी बड़ी नशेड़ी इंडस्ट्री इस मुकाम पर पहुंची है तो जरूर कोई बात होगी. पीएम मोदी (PM Modi) ने इसी नसेड़ी इंडस्ट्री को मिलने के लिए बुलाया था. उन्होंने कलाकारों से महात्मा गांधी के विचारों को आदगे बढ़ाने के लिए कहा था. अगर इंडस्ट्री में सब नशेड़ी हैं तो पीएम मोदी ने उनका साथ क्यों मांगा था.”

    उर्मिला मातोंडकर (Urmila Matondkar) ने कंगना रनौत (Kangana Ranaut) के बयानों को अशोभनीय करार देते हुए उनपर निशाना साधा. उन्होंने  कहा: “मुझे लगता है कि उन्होंने कई बार गलत टिप्पणी की हैं, जो अशोभनीय है. उन्होंने मुंबई को पीओके कहा और साथ ही मुंबई पुलिस पर भी सवाल उठाया. जया बच्चन ने उनके जन्म से पहले काम किया है. उन्होंने हमेशा समाज के लिए आवाज उठाई है और सही बात की है. अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए. लोग समझेंगे और सच्चाई जानेंगे.”

    उर्मिला मातोंडकर (Urmila Matondkar) ने आगे कहा कि फिल्म इंडस्ट्री पर सवाल उठा है तो मैं सामने आई हूं. जिनके करोड़ों रुपये लगे होते हैं वो डर से पीछे हटे हैं इसलिए वो बात नहीं कर रहे हैं. कुछ लोगों से निजी दुश्मनी की वजह से पूरी इंडस्ट्री को बदनाम करना गलत बात है. उर्मिला मातोंडकर ने कहा कि अगर कंगना के पास कोई ड्रग मामले में सबूत है तो नारकोटिक्स डिपार्मेंट को सौंपना चाहिए.

  • कंगना रनौत ने किया जया बच्चन पर पलटवार तो स्वरा भास्कर बोलीं- शर्मनाक, बड़ों की इज्जत करना…

    कंगना रनौत (Kangana Ranaut) को अब स्वरा भास्कर (Swara Bhasker) ने जवाब दिया है. स्वरा भास्कर ने कंगना रनौत के ट्वीट का जवाब देते हुए कहा कि शर्मनाक कमेंट. बड़ों की इज्जत करना भारतीय संस्कृति का पहला सबक है और तुम तो कथित राष्ट्रवादी हो.

    नई दिल्‍ली: जया बच्चन (Jaya Bachchan) ने बीते दिन बीजेपी सांसद रवि किशन और कंगना रनौत (Kangana Ranaut) को आडे़ हाथों लेते हुए कहा था कि जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं. जया बच्चन के इस बयान को लेकर कंगना रनौत ने भी उनपर पलटवार किया. उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि कौन सी थाली दी है जया जी और उनकी इंडस्ट्री ने? ये मेरी अपनी थाली है जया जी आपकी नहीं. कंगना रनौत की इस बात पर अब स्वरा भास्कर (Swara Bhasker) ने भी जवाब दिया है. स्वरा भास्कर ने कंगना रनौत के ट्वीट का जवाब देते हुए कहा कि शर्मनाक कमेंट. बड़ों की इज्जत करना भारतीय संस्कृति का पहला सबक है और तुम तो कथित राष्ट्रवादी हो.

    कंगना रनौत (Kangana Ranaut) के ट्वीट पर स्वरा भास्कर (Swara Bhasker) ने उन्हें जवाब देते हुए लिखा, “शर्मानक कमेंट, कृप्या बस करो अब. अपने जहन की गंदगी खुद तक सीमित रखो. गाली देनी है तो मुझे दो. मैं तुम्हारी बकवासें खुशी-खुशी सुनूंगी और यह कीचड़ कुश्ती लड़ूंगी तुम्हारे साथ. बड़ों की इज्जत भारती संस्कृति का पहला सबक है- और तुम तो कथित राष्ट्रवादी हो.” स्वरा भास्कर का यह ट्वीट खूब वायरल हो रहा है, साथ ही लोग इसपर जमकर कमेंट भी कर रहे हैं. बता दें कि स्वरा भास्कर ने कंगना रनौत के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए यह जवाब दिया.

    बता दें कि स्वरा भास्कर और कंगना रनौत (Kangana Ranaut) एक साथ फिल्म ‘तनु वेड्स मनु’ में एक साथ नजर आई थीं. वहीं, कंगना रनौत की बात करें तो उन्होने जया बच्चन (Jaya Bachchan) पर पलटवार करते हुए लिखा, “कौन सी थाली दी है जया जी और उनकी इंडस्ट्री ने? एक थाली मिली थी, जिसमें दो मिनट के रोल आइटम नम्बर्ज़ और एक रोमांटिक सीन मिलता था. वो भी हेरो के साथ सोने के बाद, मैंने इस इंडस्ट्री को फेमिनिज्म सिखाया, थाली देश भक्ति नारीप्रधान फिल्मों से सजाई, यह मेरी अपनी थाली है जया जी आपकी नहीं.” बता दें कि बीते दिन जया बच्चन ने बॉलीवुड को लेकर राज्यसभा में बयान दिया था.

     

     

  • मॉनसून सत्र: प्रश्नकाल पर नाराज़ विपक्ष को सरकार का जवाब, हम बहस से भाग नहीं रहे हैं

    “ये एक असाधारण परिस्थिति है. जब विधानसभाओं की बैठक एक दिन के लिए नहीं हो पा रही है, हम 800-850 सांसद यहां मिल रहे हैं. सरकार से सवाल पूछने के कई रास्ते हैं. सरकार बहस करने से बच नहीं रही है.”

    प्रश्नकाल के बिना संसद की कार्यवाही चलाने का मुद्दा सोमवार को शुरू हुए मॉनसून सत्र के पहले दिन इतना गर्म रहा कि संसदीय मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी को विपक्ष को समझाने के लिए सामने आना पड़ा.

    लोकसभा में कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने प्रश्नकाल ख़त्म करने पर कहा, “प्रश्नकाल तो स्वर्णकाल होता है लेकिन आप कह रहे हैं कि हालात के कारण इसे नहीं किया जा सकता. आप संसद की कार्यवाही तो चला रहे हैं लेकिन प्रश्नकाल को ख़त्म करके. आप लोकतंत्र का गला घोंटने की कोशिश कर रहे हैं.”

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी नाराज़ सदस्यों को भरोसा दिलाने की कोशिश करते हुए संकेत दिया कि शून्य काल का इस्तेमाल सरकार से सवाल पूछने के लिए किया जा सकता है.

    उन्होंने कहा, “ज़्यादातर राजनीतिक दलों के नेता इस बात पर सहमत थे कि प्रश्न काल न हो और शून्यकाल के लिए 30 मिनट का समय रहे. हम अध्यक्ष महोदय की इस फ़ैसले के लिए सराहना करते हैं. मेरी अपील है कि वे सत्र चलाने में सहयोग दें क्योंकि इसका आयोजन एक असाधारण समय में किया जा रहा है.”

    संसद का मॉनसून सत्र आज से शुरू हो गया है और उससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मीडिया के सामने आए. उन्होंने वहां मौजूद मीडियाकर्मियों से कहा कि लंबे अंतराल के बाद सब दिखाई दे रहे हैं और पूछा, “आप सब ठीक है ना, आप और आपके परिवार पर कोई संकट तो नहीं आया?

    लेकिन इससे पहले कि कोई कुछ बोलता, नरेंद्र मोदी संसद सत्र के बारे में बताने लगे. उन्होंने कहा कि “कोरोना भी है और कर्तव्य भी. सभी सांसदों ने कर्तव्य को चुना है इसके लिए उनका अभिनंदन और धन्यवाद करता हूं.”

    उन्होंने सेना को लेकर सांसदों से आग्रह किया, “इस सत्र की एक विशेष ज़िम्मेदारी है कि आज जब हमारी सेना के वीर जवान सीमा पर डटे हुए हैं, बुलंद हौसलों के साथ दुर्गम पहाड़ियों में डटे हुए हैं और कुछ समय बाद बर्फ़ भी गिरेगी.”

    “जिस विश्वास के साथ वो खड़े हैं, मातृभूमि की रक्षा के लिए डटे हुए हैं, ये सदन भी, सदन के सभी सदस्य एक स्वर से, एक भाव से ये संदेश देंगे कि सेना के जवानों के पीछे देश खड़ा है, संसद और सांसदों के माध्यम से खड़ा है, ऐसा मेरा विश्वास है.”

    उन्होंने कोरोना महामारी को लेकर पत्रकारों से भी कहा कि “ख़बरें तो आपको मिल जाएंगी लेकिन खुद को ज़रूर संभालना, ये मेरी आपको पर्सनल प्रार्थना है.”

  • चीन की नज़र मोदी समेत 10 हज़ार भारतीय शख्सियतों पर – प्रेस रिव्यू

    अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी दो महीने तक चली पड़ताल में पाया कि चीन की एक कंपनी 10 हज़ार भारतीय लोगों और संस्थाओं पर नज़र रखे हुई है.

    ‘जुनख्वा डेटा इंफोर्मेशन टेक्नॉलॉजी को लिमिटेड’ नाम की ये कंपनी शेनज़ेन में स्थित है और इसके संबंध चीन की सरकार और चाइनीज़ कॉम्युनिस्ट पार्टी से हैं.

    राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके परिवार, ममता बनर्जी, अशोक गहलोत, नवीन पटनायक, उद्धव ठाकरे से लेकर कैबिनट मंत्री राजनाथ सिंह, रवि शंकर प्रसाद, निर्मला सीतारमण, स्मृति इरानी इस लिस्ट में शामिल हैं.

    इतना ही नहीं, चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ बिपिन रावत, आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के 15 प्रमुखों से लेकर मुख्य न्यायाधीश शरद बोबडे, लोकपाल पीसी घोष, कैग प्रमुख जीसी मुर्मु, ‘भारत पे’ के संस्थापक निपुण मेहरा, उद्योगपति रतन टाटा और गौतम अडानी को भी ये कंपनी मॉनिटर कर रही है.

    इनके अलावा कई बड़े पद वाले नौकरशाह, जज, वैज्ञानिक, पत्रकार, कार्यकर्ता और धार्मिक शख़्सियतों पर भी नज़र रखी जा रही है. ये कंपनी खुद दावा करती है कि ये चीन की खुफ़िया एजेंसी, सेना और सुरक्षा एजेंसियों के साथ काम करती है.

    इंडियन एक्सप्रेस ने दिल्ली स्थित चीनी दूतावास के एक सूत्र से सवाल किया तो जवाब आया कि चीन ने किसी कंपनी या व्यक्ति से दूसरे देशों के डेटा या इंटेलिजेंस के बारे में जानकारी ना ही मांगी है और न मांगेगा.

    अख़बार ने एक सितंबर को कंपनी की वेबसाइट पर मौजूद ईमेल आईडी पर सवाल भेजे थे लेकिन कोई जवाब नहीं आया बल्कि नौ सितंबर से वेबसाइट बंद कर दी गई.

    इस तरह से कंपनी का डेटा रखना ‘हाईब्रिड वारफेयर’ का हिस्सा है जहां ग़ैर-सैन्य तरीकों को प्रभुत्व और प्रभावित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

  • MP: उपचुनाव के प्रचार अभियान में जुटी BJP, ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने उड़ी सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ-साथ राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी शिरकत की.

    मध्यप्रदेश में 27 सीटों पर उपचुनाव (Bypolls) के लिये सत्ताधारी बीजेपी (BJP) चुनाव प्रचार में जुट गई है. खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) मैदान में उतर चुके हैं. चुनावी सभाओं व रैलियों में राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. शनिवार को मुरैना में 73 करोड़ के कार्यों का भूमिपूजन और करीब 194 करोड़ के कार्यों का लोकार्पण का कार्यक्रम था. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केन्द्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ-साथ राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी शिरकत की.

    कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और सिंधिया जौरा पहुंचे. वहां भी करीब 34 करोड़ रुपये के कार्यों का भूमिपूजन और 8 करोड़ के कार्यों का लोकार्पण किया गया. यहां कांग्रेस ने काले झंडे दिखाने की कोशिश की है. खुद भी भारी भीड़ में नेता कोरोना प्रोटोकॉल तोड़ते नजर आए. इस दौरान, सिंधिया की गाड़ी को लेकर भी विवाद हुआ क्योंकि वो  MP 03 सीरीज की गाड़ी में बैठे थे जिसका इस्तेमाल राज्य में पुलिस की गाड़ियों में होता है.

    वहीं उपचुनाव के मद्देनज़र प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamal Nath) ने आगर-मालवा जिले में स्थित प्रसिद्ध बगलामुखी देवी माता मंदिर में शनिवार को पूजा अर्चना करने के बाद कांग्रेस का चुनाव प्रचार अभियान शुरू किया था.

    दो दिन पहले, कांग्रेस ने 15 सीटों पर अपने प्रत्‍याशियों के नाम की घोषणा कर दी है. पार्टी अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने शुक्रवार को इन नामों को मंजूरी दी. सांवेर सीट से कांग्रेस ने प्रेमचंद गुड्डू को मैदान में उतारा है. वे संभवत: शिवराज कैबिनेट के सदस्‍य तुलसी सिलावट के खिलाफ मोर्चा संभालेंगे.

  • ‘आपराधिक अवमानना केस में अपील को बड़ी बेंच देखे’, प्रशांत भूषण ने SC दाखिल की रिट याचिका

    इस याचिका में कहा गया है कि अपील का अधिकार संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इसकी गारंटी भी है.

    Prashant Bhushan Contempt Case: प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में शनिवार को एक रिट याचिका दायर की गई. इस याचिका में मांग की गई है कि मूल आपराधिक अवमानना मामलों में सजा के खिलाफ अपील का अधिकार एक बड़ी और अलग पीठ द्वारा सुना जाए. यह याचिका वकील कामिनी जायसवाल के माध्यम से दायर की गई है. इस याचिका में कहा गया है कि अपील का अधिकार संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इसकी गारंटी भी है.

    याचिका में कहा गया है कि यह गलत सजा के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करेगा और वास्तव में बचाव के रूप में सत्य के प्रावधान को सक्षम करेगा.

    बता दें कि 3 अगस्त को प्रशांत भूषण के सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना मामले पर फैसला सुनाते हुए एक रुपये का जुर्माना लगाया था. फैसले के अनुसार 15 सितंबर तक जुर्माना नहीं दिए जाने की स्थिति में 3 महीने की जेल हो सकती है और तीन साल के लिए उन्हें वकालत से निलंबित भी किया जा सकता है.

    63 वर्षीय प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) ने यह कहते हुए पीछे हटने या माफी मांगने से इनकार कर दिया कि यह उनकी अंतरात्मा और न्यायालय की अवमानना होगी. उनके वकील ने तर्क दिया है कि अदालत को प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) की अत्यधिक आलोचना झेलनी चाहिए क्योंकि अदालत के “कंधे इस बोझ को उठाने के लिए काफी हैं.

     

  • Alt News के फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर पर किस मामले में FIR हुई है?

    ऑल्ट न्यूज़. फैक्ट चेकिंग वेबसाइट है. इसके को-फाउंडर मोहम्मद ज़ुबैर के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. एक एफआईआर रायपुर में हुई है और एक दिल्ली पुलिस के साइबर क्राइम सेल ने दर्ज की है. जुबैर पर आईटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है. नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) की शिकायत के बाद ये मामले दर्ज किए गए हैं. जुबैर पर आरोप है कि उन्होंने ट्विटर पर एक बच्ची को धमकाया और प्रताड़ित किया.

    दिल्ली साइबर क्राइम के डीसीपी अन्येश रॉय और रायपुर एसएसपी अजय यादव ने इंडियन एक्सप्रेस से एफफआईआर दर्ज किए जाने की पुष्टि की है.

    NCPCR के चेयरपर्सन प्रियांक कानूनगो ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि NCPCR ने 8 अगस्त को पोस्ट का संज्ञान लिया और जांच शुरू की. हमने ट्विटर से जानकारी मांगी. ट्विटर के जवाब से असंतुष्ट होकर हमके उनके प्रतिनिधि को तलब किया. ट्विटर को प्रासंगिक जानकारी साझा करने के लिए 10 दिनों का और वक्त दिया गया है. हमने पुलिस अधिकारियों को भी कारवाई के लिए कहा.

    जुबैर के किस ट्वीट पर शिकायत हुई?

    ट्विटर पर जगदीश सिंह नाम के शख्स के साथ बहस के बाद जुबैर ने उसकी प्रोफाइल फोटो पोस्ट करते हुए जवाब दिया था. जुबैर ने फोटो में मौजूद नाबालिग लड़की का चेहरा ब्लर कर दिया था. 6 अगस्त को किए गए इस ट्वीट में  उन्होंने लिखा था,

    हेलो जगदीश सिंह, क्या आपकी प्यारी सी पोती को आपके पार्ट टाइम नौकरी के बारे में पता है, जहां आप सोशल मीडिया पर लोगों को गाली देते हैं? मेरी सलाह है कि आप अपनी प्रोफाइल फोटो बदल लें.

    इसी ट्वीट को लेकर केस किया गया है कि ज़ुबैर ने एक नाबालिग की पहचान को इस तरह उजागर किया. उस ट्वीट की वजह से नाबालिक को ट्विटर पर प्रताड़ित किया गया.

    मामले पर ऑल्ट न्यूज़ ने क्या कहा?

    इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए जुबैर ने कहा कि यह एकदम ओछी शिकायत है. मैं कानूनी रूप से इसका जवाब दूंगा.

    ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा ने ट्विटर पर ऑल्ट न्यूज़ की तरफ से स्टेटमेंट जारी किया. ऑल्ट न्यूज़ ने कहा,

    कानूनी तंत्र का दुरुपयोग करते हुए ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को शिकार बनाया जा रहा है. ऑल्ट न्यूज़ जुबैर के साथ खड़ा है. जुबैर फेक न्यूज़ से लड़ने में सबसे आगे रहे हैं और उनका यह काम उन लोगों को नुकसान पहुंचाता है जिन लोगों ने भारतीय लोकतंत्र को नीचा दिखाने के लिए गलत जानकारी को हथियार बनाया हुआ है.