Category: जम्मू-कश्मीर

  • जम्मू-कश्मीर के लिए 1350 करोड़ के पैकेज की घोषणा –

    जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने राज्य में अर्थव्यवस्था और कारोबार को मजबूती देने के लिए 1350 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की है.

    इस पैकेज की घोषणा पीएम नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत की गई है.

    पैकेज के तहत औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली में एक साल के लिए फिकस्ड डिमांड चार्जेस पर 50% की छूट दी गई है.

    इसके अलावा पर्यटन के कारोबार में लगे लोगों को भी आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी.

    पैकेज के मुताबिक अच्छी कीमत और भुगतान के विकल्प के साथ पर्यटन क्षेत्र में लोगों को वित्तीय सहायता के लिए जम्मू और कश्मीर बैंक द्वारा कस्टम हेल्थ-टूरिज़्म स्कीम बनाई जाएगी. इसके अलावा कर्ज़दारों के लिए मार्च 2021 तक स्टाम्प ड्यूटी में छूट दी गई है.

    हथकरघा और हस्तशिल्प उद्योगों में काम कर रहे लोगों के लिए क्रेडिट कार्ड स्कीम के तहत अधिकतम सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दी गई है.

    उन्हें पांच प्रतिशत की ऋण माफ़ी दी जाएगी. ये ऋण माफ़ी छोटे और बड़े दोनों कारोबारियों को मिलेगी. इस योजना में तकरीबन 950 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. यह धनराशि अगले छह महीनों के लिए इस वित्त वर्ष में उपलब्ध रहेगी.

    उपराज्पाल ने पैकेज की घोषणा करते हुए कहा, ”मैं समझता हूं कि आज तक कभी इतना बड़ा आर्थिक पैकेज नहीं बनाया गया था जिसमें वित्तीय और प्रशासनिक इकाइयों के माध्यम से कारोबारी समुदाय को राहत दी जा रही है. व्यापार होगा तो ना केवल जम्मू-कश्मीर की आम जनता को रोजगार मिलेगा बल्कि छोटे स्तर पर काम करके आजीविका चलाने वाले लोगों को भी राहत मिलेगी.”

    उन्होंने कहा, ”पहला चरण है आत्मनिर्भर भारत. आज संघ राज्य क्षेत्र ने जो निर्णय किया है ये दूसरा चरण है और इससे बहुत बड़ा तीसरा चरण अभी आने वाला है. यहां की नई औद्योगिक नीति भारत सरकार ने तैयार कर ली है, मैं उम्मीद करता हूं कि जल्दी उसकी घोषणा होगी.’

    सरकार ने यह भी कहा है कि बस ड्राइवर, कडंक्टर, ऑटो, टैक्सी ड्राइवर जिन्होंने अपना रोजगार खो दिया है उनकी भी मदद करने के लिए एक कार्य संरचना बनाई गई है.

    यह भी निर्णय लिया गया है कि हाउस बोट मालिकों और ट्रांसपोर्टर्स को मदद दी जाए. उनके पुराने हो चुके वाहन को बदलने और इंश्योरेंस में जो भी सहायता की जा सकती है, उसे लोगों तक पहुंचाया जाएगा.

    जम्मू और कश्मीर से पांच अगस्त 2019 को धारा 370 हटा दी गई थी. इसके बाद राज्य का पुनर्गठ करते हुए इसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था.

     

  • नजरबंदी से रिहा हुए फारूक अब्दुल्ला ने 7 महीने बाद बेटे उमर से की मुलाकात तथा गुलाम नबी मिले फारुक अब्दुल्ला से

    श्रीनगर.श: नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला नजरबंदी से रिहा होने के एक दिन बाद अपने बेटे और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मिले। पिछले सात महीने में पिता और बेटे की यह पहली मुलाकात थी। रिहाई के बाद फारूक ने उमर से मिलने की इच्छा जाहिर की थी। इसके बाद जम्मू कश्मीर प्रशासन ने उन्हें श्रीनगर के उप जेल में उमर से मिलने की इजाजत दी। दोनों करीब एक घंटे तक साथ रहे। फारूक के साथ अब्दुल्ला परिवार के अन्य सदस्यों की भी उमर से मुलाकात हुई।

    उमर को 4 अगस्त की रात को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने से पहले हिरासत में लिया गया था। उन्हें 5 फरवरी से पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत हिरासत में रखा गया है। पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती समेत कई नेता अभी भी नजरबंद हैं।

    गुलाम नबी आजाद फारूक से मिलने पहुंचे

    कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद फारूक से मिलने शनिवार को उनके घर पहुंचे। मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि मेरे लिए यह बहुत खुशी की बात है। मैं फारूक अब्दुल्ला से सात महीने बाद मिला। इतने महीनों तक उन्हें हिरासत में रखा गया था। इन्हें हिरासत में रखने का कारण अभी तक मुझे पता नहीं है। जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करना यहां के लोगों की बेईज्जती है। इसे फिर से राज्य घोषित किया जाना चाहिए। जम्मू-कश्मीर तभी तरक्की करेगा जब यहां के नजरबंद नेताओं को रिहाई मिलेगी। यहां पर समुचित प्रक्रिया के मुताबिक चुनाव कराए जाएं।

    हमारी मंशा किसी को जेल में रखने की नहीं: जी किशन रेड्‌डी

    केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्‌डी ने शनिवार को हैदराबाद में फारूक की रिहाई के बारे में पूछे जाने पर कहा कि हमारी मंशा किसी को जेल में रखने की नहीं है। लेकिन, जम्मू-कश्मीर में राज्य को सही ढंग से चलाने के लिए कुछ लोगों को अंदर रखना पड़ा। सभी नजरबंद लोगों को जल्द रिहा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को भी मूलभूत सुविधाएं और विकास का अधिकार है। उन्हें समान अधिकार देने के लिए केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला किया। अब राज्य शांति के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

    रिहाई के बाद कहा था- मेरी आजादी अभी अधूरी

    शुक्रवार को रिहाई के बाद फारूक ने कहा था कि मेरी आजादी तब तक अधूरी है, जब तक उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती व अन्य नेताओं की रिहाई नहीं हो जाती। उम्मीद है भारत सरकार अब उन सभी को रिहा करेगी, जिन्हें राजनीतिक हिरासत में लिया गया था। मैं उन सभी का शुक्रिया करता हूं, जिन्होंने मेरी रिहाई के लिए दुआएं की हैं।

  • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा सवाल: जम्मू-कश्मीर में आखिर कब तक इंटरनेट सेवाएं बंद रखी जाएंगी

    सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में मौजूदा हालात को लेकर केंद्र और राज्य प्रशासन से जवाब मांगा है. कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन से पूछा कि आखिर आप कब तक जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंद लगाए रखेंगे. और आम लोगों के लिए कब तक इंटरनेट सेवाएं बंद रखी जाएंगी. कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन से पांच नवंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा है. कोर्ट के कड़े रुख के बीच केंद्र सरकार ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के हालात पर रोजाना नजर रखी जा रही है. अभी तक राज्य से 99 फीसदी प्रतिबंध उठाए जा चुके हैं. धीरे-धीरे ही सही लेकिन हालात सामान्य हो रहे हैं.

    कोर्ट में सरकार ने कहा कि राज्य में अभी इंटरनेट को इसलिए बंद रखा गया है ताकि सीमापार से होने वाली हरकतों को रोका जा सके. सरकार के इस जवाब पर वी रमना ने कहा कि बेंच के एक जज निजी कारणों से छुट्टी लेना चाहते थे लेकिन मैनें आने को कहा नहीं तो लोग कहते कि हम मामले को सुनना नहीं चाहते. उन्होंने कहा कि हमारी कोई निजी जिंदगी नहीं है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट कश्मीरी व्यवसायी मुबीन की याचिका पर सुनवाई कर रही था. कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन से चार हफ्तों में जवाब मांगा है.

    कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाए जाने को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के पास भेजीं थी .अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केन्द्र और जम्मू कश्मीर प्रशासन को नोटिस जारी किया था. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह अनुच्छेद 370 हटाए जाने की संवैधानिक वैधता की समीक्षा करेगा. अनुच्छेद 370 के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई पांच जजों की बेंच करेगी. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट को केंद्र सरकार ने बताया है कि जम्मू-कश्मीर हालात सामान्य हैं.

    सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाए जाने के राष्ट्रपति आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं के संबंध में केन्द्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन को नोटिस भी जारी किया था. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली पीठ केन्द्र की उस दलील से सहमत नहीं दिखी कि अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल और सॉलिसिटर जनरल के अदालत में मौजूद होने के कारण नोटिस जारी करने की जरूरत नहीं है.

    पीठ ने नोटिस को लेकर ‘सीमा पार प्रतिक्रिया’ होने की दलील को ठुकराते हुए कहा, ‘हम इस मामले को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के पास भेजते हैं.’ अटॉर्नी जनरल ने कहा कि इस अदालत द्वारा कही हर बात को संयुक्त राष्ट्र के समक्ष पेश किया जाता है. दोनों पक्ष के वकीलों के वाद-विवाद में उलझने पर पीठ ने कहा, ‘हमें पता है कि क्या करना है, हमने आदेश पारित कर दिया है और हम इसे बदलने नहीं वाले.’

    अनुच्छेद 370 रद्द करने के फैसले के खिलाफ याचिका अधिवक्ता एमएल शर्मा ने दायर की है, जबकि नेशनल कांफ्रेंस सांसद मोहम्मद अकबर लोन और न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) हसनैन मसूदी ने जम्मू कश्मीर के संवैधानिक दर्जे में केंद्र द्वारा किये गए बदलावों को चुनौती दी है. पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल, जेएनयू की पूर्व छात्रा शेहला रशीद और राधा कुमार जैसे प्रख्यात हस्तियों सहित अन्य भी इसमें शामिल हैं..INPUT(NDTV)

  • नजरबंदी के बाद फारूक और उमर पार्टी नेताओं से मिले,महबूबा से कल मिलेगा पीडीपी प्रतिनिधिमंडल

    श्रीनगर.जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बादनजरबंद फारूकऔर उमर अब्दुल्ला सेनेशनल कॉन्फ्रेंस केप्रतिनिधिमंडल ने रविवार को मुलाकात की। अब्दुल्ला कीपार्टी के नेताओं ने राज्यपाल सत्यपाल मलिक से इसके लिए अनुरोध किया था। उधर सोमवार को पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीपी) का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सोमवार को पार्टी प्रमुख महबूबा मुफ्ती से मुलाकात करेगा।

    मोदी सरकार ने 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 हटाकर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था। इस दौरान जम्मू-कश्मीर के कई बड़े नेताओं को नजरबंद कर दिया गया था। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों उनकी बेटी को मुलाकात की इजाजत दी थी।

    घाटी से एक-एक कर नेताओं को छोड़ा जाएगा: सलाहकार

    राज्यपाल मलिक के सलाहकार फारूकखान ने गुरुवार को कहा था कि हिरासत में लिए गए नेताओं को एक-एक करके छोड़ दिया जाएगा। इससे पहले उनका पूरी तरह से विश्लेषण किया जाएगा। जम्मू के कुछ नेताओं को दो महीने बाद बुधवार को रिहा किया गया था। घाटी में सुरक्षा बढ़ाने पर खान ने कहा था कि यह किसी आतंकी हमले की आशंका देखते हुए नहीं बल्कि एहतियात के तौर पर उठाया गया कदम है। पुलिस, सेना, बीएसएफ समेत सभी सुरक्षा बल अलर्ट पर हैं।(इनपुट भास्कर)

  • J&k:राज्यपाल के सलाहकार ने कहा-हिरासत में लिए गए हर नेता को पूरी जांच के बाद छोड़ा जाएगा

    श्रीनगर.जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 समाप्त होने के बाद हिरासत में लिए गए सभी नेताओं को एक-एक करके छोड़ दिया जाएगा। यह बात गुरुवार को राज्यपाल सत्यपाल मलिक के सलाहकार फारुख खान ने कही। उन्होंने कहा कि हिरासत में लिए गए हर नेता का पूरी तरह से विश्लेषण करने के बाद उन्हें छोड़ दिया जाएगा।जम्मू के कुछनेताओं को दो महीने बाद बुधवार को रिहा किया गया था।

    इसबीच घाटी में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इस परखान ने कहा कि यह किसी आतंकी हमले की आशंका देखते हुए नहीं बल्कि एहतियात के तौर पर उठाया गया कदम है।पुलिस, सेना, बीएसएफ समेत सभी सुरक्षा बल अलर्ट पर हैं।

    महबूबा, उमर समेत कुछ नेता हिरासत में

    खान ने कहा, ‘‘सीजफायर उल्लंघन को लेकर पाकिस्तान को पहले भी सबक सिखाया गया था।अगर जरूरत होगी तो आने वाले दिनों में भी उसे सबक सिखाया जाएगा।’’ हालांकि पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारुख अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला उन प्रमुख नेताओं में शामिल हैं, जो अभी तक हिरासत में हैं।

  • फारूक अब्दुल्ला की हिरासत पर कांग्रेस ने कहा, अखंडता की लड़ाई लड़ने वाले नेताओं को डाला जा रहा है जेल में

    कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) को जन सुरक्षा कानून (PSA) के तहत हिरासत में लिए जाने की निंदा करते हुए सोमवार को कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि भारत की एकता एवं अखंडता की लड़ाई लड़ने वाले नेताओं को जेल में डाला जा रहा है. पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं. यह देश का दुर्भाग्य है कि एक पूर्व मुख्यमंत्री और एक मुख्याधारा की पार्टी के नेता के साथ यह हुआ है.” उन्होंने कहा कि नेशनल कांफ्रेंस जम्मू-कश्मीर की सबसे पुरानी पार्टी है और उसने देश की एकता और अखंडता के लिए काम किया है. .

    आजाद ने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर में अगर आतंकवाद नहीं है तो वह जम्मू-कश्मीर की जनता, कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी के कारण हुआ है. भाजपा के कारण यह नहीं हुआ है.” गौरतलब है कि अब्दुल्ला को पीएसए के तहत हिरासत में लिया गया है. पीएसए के तहत किसी भी व्यक्ति को बिना किसी मुकदमे के दो साल तक हिरासत में रखा जा सकता है.

    वहीं उनकी हिरासत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में राज्यसभा सांसद वाइको ने याचिका दायर की है. सोमवार को याचिका पर CJI रंजन गोगोई, जस्टिस एस ए बोबडे और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की पीठ ने सुनवाई की और कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक सप्ताह का नोटिस देकर जवाब देने के लिए कहा गया है.  याचिका पर सुनवाई करते हुए सीजेआई रंजन गोगोई ने केंद्र सरकार से पूछा ‘क्या वो हिरासत में हैं?’ इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा हम सरकार से निर्देश लेंगे. वाइको के वकील ने कोर्ट से कहा कि फारुक अब्दुल्ला बाहर नहीं निकल सकते, कश्मीर में अधिकारों का हनन हो रहा है.

    (इनपुट- ndtv)

  • एक कॉल करने के लिए एक हजार रुपये का खर्च और 40 किलोमीटर की दूरी का यात्रा कर रहे हैं कश्मीरी जनता

    मिल्लत टाइम्स,श्रीनगर:उत्तरी कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्र तलील में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है जिसके कारण स्थानीय नागरिकों को बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

    ‘हमें तलील से एक फोन कॉल के लिए गुरेज़ जाना पड़ता है, जिसके लिए हमें एक हज़ार रुपए अदा करने पड़ते हैं, इसलिए हम राज्यपाल से प्रार्थना करते हैं कि वह तलील में भी फोन की व्यवस्था कर दें ।’
    यह बात मीडिया प्रतिनिधि को कश्मीर जिले बंदी तलील में रहने वाले व्यक्ति ने बताया, जहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।

    दरअसल उत्तरी कश्मीर जिले बांड पुरा के सीमावर्ती क्षेत्र में गुरेज़ तलील में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
    गुरेज़ तलील क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध तो है, लेकिन सड़क, पुल और चिकित्सा सुविधाएं मौलिक अनुपलब्धता है।
    खराब सड़कों और आसपास खाई के कारण बच्चों के गिरने, डूबने का हमेशा खतरा लगा रहता है। स्थानीय निवासियों के अनुसार कई बार बच्चे खाई में गिरकर घायल हो चुके हैं।

    तलील निवासी जावेद अहमद डरा ने बताया कि मोदी सरकार के माध्यम से शुरू किया गया गैस कनेक्शन योजना का लाभ तो एक महीने के अंदर गुरेज़ के लोगों को मिला, लेकिन तलील के लोगों को इससे वंचित रखा गया।

  • कश्मीरःस्कूल तो खुले पर बच्चे नहीं आए

    समाचार एजेंसी पीटीआई ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि सोमवार को भारत प्रशासित कश्मीर के श्रीनगर में 190 सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को खोला गया है.

    श्रीनगर में मौजूद बीबीसी संवाददाता रियाज़ मसरूर ने बताया है कि शनिवार को सरकार ने कहा था कि सोमवार से आठवीं कक्षा तक सभी स्कूल खोले जाएंगे लेकिन रविवार शाम में कई जगहों पर पत्थरबाज़ी की घटनाओं के बाद सिर्फ़ पांचवीं कक्षा तक के स्कूल खोलने के आदेश दिए गए.

    उन इलाक़ों के स्कूल खोले गए थे, जहां की स्थिति सामान्य समझी जा रही थी और प्रतिबंध कमोबेश हटा लिए गए हैं.

    रियाज़ ने बताया कि आज श्रीनगर में सुबह सड़कों पर स्कूल बसें नज़र नहीं आईं और जब उन्होंने छात्रों के परिजनों से बात की तो उन्होंने बताया कि पांचवीं कक्षा तक के बच्चों की आयु 10 साल से कम ही होती है जिसके लिए स्कूल और बस ड्राइवर से संपर्क होना ज़रूरी है इसलिए उन्होंने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा है.

    वहीं श्रीनगर में मौजूद बीबीसी संवाददाता आमिर पीरज़ादा ने श्रीनगर के जाने-माने स्कूलों का दौरा किया.

    उन्होंने बताया, “हम श्रीनगर के जाने-माने स्कूलों में गए. जहां पहले हमें अंदर जाने नहीं दिया गया. सिक्यूरिटी गार्ड से बात करने पर स्कूल के अंदर घुस पाया, जहां हमारी बात वहां के शिक्षकों से हुई. शिक्षकों का कहना है कि शिक्षक तो स्कूल पहुंच गए हैं लेकिन बच्चे नहीं आए हैं.”

    आमिर को शिक्षकों ने बताया कि दो-तीन बच्चे आए थे, जब उन्होंने देखा कि कोई नहीं आया है तो वे भी घर वापस चले गए.

    इसके बाद आमिर एक दूसरे स्कूल भी गए, जहां के सिक्यूरिटी गार्ड ने बताया, “बच्चे स्कूल पहुंचे ही नहीं हैं. स्कूल बसें बच्चों को लाने तो गई थीं पर वो खाली लौट आईं.”

    समाचार एजेंसी पीटीआई ने भी बताया है कि कक्षाओं में शिक्षक तो पहुंचे लेकिन वहां छात्रों की संख्या बेहद कम थी.

    वहीं, एक अन्य समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया है कि घाटी में अभी भी हाई स्कूल, हायर सेकेंडरी स्कूल और सभी डिग्री कॉलेज बंद हैं लेकिन जम्मू में सभी स्कूल खुले हुए हैं.

    बीबीसी संवाददाता रियाज़ मसरूर के मुताबिक रविवार को श्रीनगर के अधिकतर इलाक़ों में पत्थरबाज़ी की घटनाएं हुईं जिनमें आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए.

    उन्होंने बताया कि प्रशासन ने भी कहा है कि कुछ हिंसक घटनाओं में पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे लेकिन उन्हें फ़र्स्ट एड देकर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, इसके अलावा प्रशासन ने कहा है कि उत्तरी कश्मीर में बीते 15 दिनों में कोई एनकाउंटर नहीं हुआ और न ही छापेमारी की घटना हुई है.

    रियाज़ ने बताया कि दक्षिणी कश्मीर से आए लोगों ने उन्हें बताया है कि प्रशासन हिंसा भड़काने वाले लोगों और पत्थरबाज़ों को गिरफ़्तार करने के लिए रोज़ाना छापेमारी कर रही है, उन्हें गिरफ़्तार किया जाता है या थानों पर बुलाया जाता है ताकि कोई प्रदर्शन न हो सके.

    बीबीसी संवाददाता ने बताया कि सोमवार के दिन को बहुत अहम समझा जा रहा है क्योंकि आज एक नए हफ़्ते की शुरुआत है और शांति की जो कोशिशें हो रही हैं उस पर सरकार के प्रवक्ता अपने बयान देंगे.

    “सरकार की कोशिशें हैं कि हालात सामान्य करने हैं और उसी के मद्देनज़र आज स्कूल खोले गए हैं. आज सरकार के प्रवक्ता बताएंगे कि कितने स्कूल खुले और हालात कितने सामान्य हो पाए.”

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    कश्मीर पर यूएन में चर्चा से किसको लगा झटका
    “प्रशासन चाहता है कि सड़कों पर स्कूल बसें दिखें. जहां तक कारोबारी सरगर्मियों की बात की जाए जो वह बिलकुल बंद हैं. कहीं भी कोई दुकान और बाज़ार नहीं खुल रहा है. साथ ही कमर्शियल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट बिलकुल बंद हैं!(इनपुट बीबीसी हिंदी)

  • कश्मीर:राज्यसभा नेता प्रतिपक्ष आजाद को श्रीनगर एयरपोर्ट पर रोका गया,डोभाल के लंच पर बोले थे-पैसे देकर किसी को भी साथ लाया जा सकता है

    मिल्लत टाइम्स,श्रीनगर:कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर को गुरुवार को श्रीनगर एयरपोर्ट पर रोक लिया गया। इससे पहले आजाद ने अजीत डोभाल के कश्मीरियों के साथ लंच करने पर कहा कि पैसे देकर किसी को भी साथ लाया जा सकता है।बुधवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने शोपियां (कश्मीर) में स्थानीय लोगों के साथ लंच किया था। उन्होंने वहां के हालातपर लोगों से बातचीत भी की।केंद्र सरकार ने डोभाल को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कश्मीर में सुरक्षा-व्यवस्था का जायजा लेने भेजा।

    एनएसए डोभाल ने शोपियां में सुरक्षा अधिकारियों से भी मुलाकात की। इस मौके परडीजीपी दिलबाग सिंह भी मौजूद थे। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, डोभाल ने शोपियां में उस इलाके के लोगों से भी बात की जहां बुरहान वानी को मारा गया था। इसके बाद पत्थरबाजी की घटनाएं भी बढ़ गई थीं।हालांकि यह क्षेत्र अब सामान्य है।

    जम्मू-कश्मीर और लद्दाखकेंद्र शासित प्रदेश होंगे

    पिछले दिनों घाटी में राज्यपाल शासन लगाए जाने के बाद सरकार ने सुरक्षा के लिहाज से 10 हजार सैनिकों को भेजा था। इसके बाद सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा दिया। विशेष राज्य का दर्जा वापस लिया गया। अब से जम्मू-कश्मीर और लद्दाखकेंद्र शासित प्रदेश होंगे।

    घाटी के नेता नजरबंद किए गए

    घाटी के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला औरउमर अब्दुल्ला को नजरबंद किया गया है। जबकिमहबूबा मुफ्ती को हिरासत में लिया गया था। हालांकि गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा मेंफारूख अब्दुल्ला को लेकर कहा था कि उन्हें न गिरफ्तार किया गया है न नजरबंद किया गया है। वे बिल्कुल ठीक हैं।

  • अनुच्छेद 370:केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर जल्द सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने के फैसले और जम्मू-कश्मीर में लागू प्रतिबंध को लेकर दायर याचिकाओं पर गुरुवार को तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया। पहली याचिका में कांग्रेस कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला ने राज्य में नेताओं को नजरबंदी, मोबाइल, इंटरनेट और अन्य सेवाओं पर लगे प्रतिबंध हटाने की मांग की थी। वहीं, दूसरी याचिका में वकील मनोहर लाल शर्मा ने शीर्ष अदालत से अनुच्छेद 370 को लेकर सरकार के फैसले पर सुनवाई की मांग की थी।

    जस्टिस एनवी रमना की बेंच में पूनावाला और शर्मा की याचिकाओं को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच के पास भेज दिया है। शर्मा ने अपनी याचिका में जम्मू-कश्मीर पर लिए फैसले को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान उन्होंने तर्क दिया- पाकिस्तान अनुच्छेद 370 से जुड़े फैसले को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में लेकर जाने वाला है, इसलिए याचिका पर तुरंत सुनवाई की जाए। इस पर बेंच ने पूछा- क्या यूएन भारत के राष्ट्रपति के आदेश या संविधान संशोधन में बदलाव कर सकता है?

    पूनावाला ने कहा- पूर्व मुख्यमंत्रियों को तत्काल छोड़ा जाए

    दूसरी याचिका में पूनावाला ने राज्य में कर्फ्यू और अन्य सेवाओं से प्रतिबंध को हटाने की मांग की थी। उनके वकील ने कहा कि हमें अनुच्छेद 370 के फैसले पर कुछ नहीं कहना, लेकिन जम्मू-कश्मीर में लगे प्रतिबंधों को हटाने का आदेश दिया जाए। वहां के नागरिक परिजन से बात करना चाहते हैं और मोबाइल सेवा पर रोक लगी है। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, फारूक और उमर अब्दुल्ला को तत्काल छोड़ा जाए। इसके साथ ही जमीनी हालात का पता लगाने के लिए एक पैनल का गठन जरूरी है।

    जम्मू-कश्मीर पर फैसलों को लेकर पाकिस्तान यूएन जाएगा
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के लिए संकल्प राज्यसभा में पेश किया था। इसके साथ ही राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में बांटने का विधेयक भी पेश हुआ। दो दिन चली बहस के दौरान मोदी सरकार के दोनों प्रस्ताव संसद से पारित हो गए। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद अब बंटवारे की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। पाकिस्तान भारत के फैसलों का विरोध कर रहा है और इन्हें लेकर संयुक्त राष्ट्र जाने की बात कह चुका है।(इनपुट भास्कर)