Category: आसाम

  • असम के लोकसंगीत सुरीली जिकिर अब हिंदी में भी उपलब्ध।शिल्पी वाजिदुर रहमान का प्रयास।ईद-उल-फितर के पहले किया जायेगा रिलीज।

    चाईजुर रहमान, गुवाहाटी, 21 मई:– असम के जातीय जीवन का अभिन्न अंग जिकिर अब राष्ट्रीय भाषा हिंदी में भी उपलब्ध होगा। गोलाघाट जिले के देरगांव के अनातार शिल्पी वाजिदुर रहमान ने पहली बार असमिया भाषा से हिंदी भाषा में जिकिर को अनुवाद करके राष्ट्रीय स्तर पर लाने की कोशिश की है। गौरतलब है कि असम के जातीय जीवन के प्रसिद्ध समाज संस्कारक तथा एकता, संप्रीति, भाईसारे का प्रतीक अजान फ़क़ीर ने जिकिर रचना की थी। अनुमानिक चोलवी शताब्दी में बगदाद से असम आये इस शख्सियत ने ईस्लाम की सार्वजनिन भाईसारे की वाणी से असम की हिन्दू-मुसलमान को एकता की डोर से बंधा था।

    असम की हिन्दू महिला से शादी करके यही बचे अजान फ़क़ीर का असली नाम शाह मिलन था। असम के शिवसागर जिले के सरागुरि सापरि में उसका मज़ार है। इस महान शख्सियत के नाम से असम सरकार हर वर्ष राज्य के लिए उल्लेखनीय अवदान देनेवाले ब्यक्ति कोे अजान पीर अवार्ड से सम्मानित करते है। अजान फ़क़ीर का नाम असम के जनजीवन के दो महान शख्सियत तथा महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव और श्रीमंत माधवदेव के साथ जोड़ा जाता है। इन्ही शख्सियत के नाम से ही असम को शंकर-माधव-अजान का देश कहा जाता है। ये महान शख्सियत अजान फ़क़ीर ने जिकिर और जारी रचना की थी। जिकिर एक तरह का गीत है जिसमे अल्लाह के गुनगान के जरिये एकता, भाईसारे, संप्रीति, मिलन का सन्देश दिया जाता है। हर किसी के दिल को शकुन देता जिकिर असम के लोकसंगीत में से अन्यतम है और इसे असम के संस्कृति का अभिन्न हिस्सा माना जाता है। अजान फ़क़ीर द्वारा रचित जिकिर में से एक बहुत ही अनोखा और लोकप्रिय जिकिर ‘मोर मनत भेद भाव नाइ ओ अल्लाह’ को हिंदी भाषा में पहली बार अनुवाद किया है अनातार शिल्पी वाजिदुर रहमान ने। असम के गोलाघाट जिले के देरगांव के रहनेवाले वाजिदुर रहमान ने इस अनोखा और सुरीली जिकिर का ऑडियो रिकॉर्डिंग करने के बाद अब वीडियो भी बनाया है। उन्होंने बताया की ईद-उल-फितर के पहले हिंदी भाषा में यह जिकिर रिलीज़ किया जायेगा। जिकिर में यास्मीन सुल्ताना के साथ कोई महिलाओ ने कंठदान दिया है। उल्लेखनीय है की अनतार शिल्पी वाजिदुर रहमान असम के जिकिर सम्राट रेकीबुद्दीन अहमद का भतीजा है।

  • अजमल सी० एस० आर० का लॉक डाउन से परेशान लोगों और ग़रीब रोज़दारों की सहायता का सिलसिला जारी

    हुजाई,4 मई 2020 (प्रेस रिलीज़): पूरी दुनिया में कोविद -19 महामारी और निरंतर लॉकडाउन से प्रभावित हर जगह समुदायों और अर्थव्यवस्थाओं के साथ एक अभूतपूर्व चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जिसका उद्देश्य उपन्यास कोरोनोवायरस के प्रसार पर अंकुश लगाना है। भारत भी कठिन समय और आर्थिक संकट से गुजर रहा है। मुख्य रूप से दिहाड़ी मजदूर, छोटे व्यापारी और ग़रीब किसान दाने दाने का मोहताज होगया है, और उससे बुरी दुर्दशा उन काम करने वालों कि है जो अपने वतन से दूर दुसरे क्षेत्रों में रोज़गार कि तलाश में निकले हुए थे।

    इस संकट कि घड़ी में जहाँ मुल्क के उदार लोग और दूसरी धार्मिक और सामाजिक संगठन गरीब और असहायों कि सहायता के लिए आगे आरही हैं, वहीँ उत्तरी और पूर्वी हिंदुस्तान का सबसे बड़ा सामाजिक संगठन अजमल सी० एस० आर० अपने दो संगठनों मर्कजुल मआरिफ़ और अजमल फाउंडेशन हुजाई के माध्यम से दिन रात गरीब और असहायों के प्रति अपनी सामाजिक सेवाओं का प्रतिपादन कर रही है। अजमल सी० एस० आर० के ये दोनों संगठन देश भर में और मुख्य रूप से उत्तरी और पूर्वी इंडिया में किसी भी आकस्मिक मुसीबत, आफत और दूसरी आवश्यक स्थिति में ये संगठन हमेशा सहायता करने से जानी और पहचानी जाती है।
    इस समय उपर्युक्त संगठन एक महीने से लगातार या उससे भी अधिक समय से बिना किसी धार्मिक भेद भाव के सभी ज़रुरतमंदों कि हर तरह कि आवश्यक कि पूर्ति करते हैं, और साथ साथ कोरोना वायरस से बचने के लिए मास्क और सेनेटाईसर्स पहुंचाने का कार्य करते हैं। अजमल सी० एस० आर० के सी० ई० ओ० और पार्लियामेंट के मेम्बर मौलाना बदरुद्दीन अजमल कासमी ने अपने प्रेस नोटिस में बताया कि हर जगह के आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवार से अधिक समस्या उन लोगों की है जो दुसरे क्षेत्रों से रोज़गार कि तलाश में आये हुए हैं और लॉक डाउन कि वजह से फंसे हुए हैं, इसलिए हमारी प्राथमिकता स्थानीय गरीबों और जरूरतमंद लोगों की मदद करने के साथ-साथ प्रवासियों का समर्थन करना है। मौलाना ने ये भी कहा है कि प्रवासी मजदूरों कि तलाश में हमें सरकारी अफसरों का भी सहयोग मिल रहा है, क्यूँ कि हुजाई सर्कल आफिसर के संकेत पर हमारे सेवक बंगाल से आये हुए उन सैंकड़ों मजदूरों तक पहुंच रहे हैं, जिनके पास अपने अस्तित्व के लिए भोजन भी नहीं है ।
    अजमल सीएसआर के संयुक्त सी ई ओ, पूर्व सांसद श्री सिराजुद्दीन अजमल ने कहा है कि रमजान उल मुबारक के पवित्र महीने के शुरू होजाने के बाद हम फिर से दो संगठनों पर कार्य कर रहे हैं।

    एक कार्य कोड-19 के कारण लॉक डाउन से परेशान और दुखी लोगों के लिये उनकी आवश्यकों कि पूर्ति करने का है, और दूसरा कार्य हर वर्ष कि तरह लाखों ग़रीब रोजेदारों तक ज़रुरियात के सामान रमजान फ़ूड किट पहुंचाने का है।
    श्री सिराजुद्दीन अजमल ने कहा कि इस भारी योगदान के लिए हम अपने सभी शुभचिंतकों का समर्थन प्राप्त कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अजमल ग्रुप का भी इस दुर्दशा में बड़ा साथ मिल रहा है। इसलिए, मैं उन सभी स्वयंसेवकों और सहायकों का धन्यवाद करता हूं, जो दोनों चरणों में अथक रूप से सेवाएं दे रहे हैं और मैं उनके लिए प्रार्थना करता हूं कि अल्लाह उन्हें बेहतरीन बदला दे।

  • असम:समाजसेवी अस्मा बेगम का सराहनीय कार्य। लॉक डाउन के दौरान जानवरो को खिलाया खाना।

    चाईजुर रहमान, गुवाहाटी, 5 मार्च:पुरे बिश्व में कोरोना की कहर के चलते भारत में लॉक डाउन की घोषणा करने के बाद महानगर की फुटपाथ तथा भिन्न रस्ते, जगह में रहे जानवरो को भी खाने-पीने को लेकर बहुत दिक्कतो का सामना करना पर रहा है। गाय, बन्दर, कुत्ता जैसे जानवर, जो महानगर के फुटपाथ तथा भिन्न रस्ते, जगह में रहके खाने का जुगार करते थे अभी लॉक डाउन में सुनसान महानगर, बाजार में खाद्य की खोज में भटकता दिखाई दे रहे। गरीब, मजदुर जनता को तो सरकार व समाजिक संगठनों द्वारा खाद्य का मुहैय्या कराया जा रहा है लेकिन ऐसे जानवरो की खाने-पीने को लेकर भी चिंतित है प्रकृतिप्रेमी, पशुप्रेमी। गौहाटी के बिशिष्ठ समाजसेवी अस्मा बेगम ने ऐसे जानवरो को खाना मुहैय्या कराके एक अनमोल मिसाल रखे है। लॉक डाउन के इस दौरान उन्होंने गौहाटी में घूम घूम के जानवरो को खाना खिलाया।

    गौहाटी के उत्तर-पुर्बी गौहाटी, खालसा सेंटर, गुरुद्वारा फैंसी बजार आदि जगह के रस्ते, फुटपाथ में रहे गाय, कुत्ता, बन्दर आदि जानवरो को खाना खिलाया। इंटरनेशनल ह्यूमन राईटस आर्गेनाइजेशन, उत्तर-पूरब राज्य के Chairperson अस्मा बेगम ने संगठन की बैनरतले किये इस कार्य में उनके साथ मौजूद रहे मृण्मयी गौश्वामी, ओइनितम ओझा। अस्मा बेगम ने कहा की इस प्रकृति का हिस्सा है जानवर। जानवरो के बिना प्रकृति का सौन्दर्य सोच भी नही सकता। लॉक डाउन के दौरान भुग से पीड़ित जानवरो को खाना खिलाना भी मानवता का एक हिस्सा है। अस्मा बेगम की इस अनोखा कार्य को बहुत लोगो ने सराहा। असम पुलिस व डीजीपी भास्कर महंत ने सोशल मीडिया में फ़ोटो सह पोस्ट करके अस्मा बेगम और इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स आर्गेनाइजेशन, उत्तर-पूर्ब कमिटी का बहुत तारीफ की। डीआईजी,SSB; असम पुलिस, एसपी सिक्यूरिटी, स्पोर्ट्स डायरेक्टर और यूनिवर्सिटी साइंस एंड टेक्नॉलॉजि ने इस सराहनीय कार्य में सहयोग किया।

  • बजट में घोषित Indigenous मुस्लिम उन्नयन परिषद गोरिया मोरिया देशी जनगोष्ठी नाम से गठन करे। सामाजिक-आर्थिक पियल अप्रैल से शुरू करे सरकार–अल असम गोरिया मरिया देशी जरिया परिषद।

    चाईजुर रहमान, गुवाहाटी, 7 मार्च:– असम बिधानसभा के 2010-21 वर्ष की बजट अधिवेशन 2 मार्च से शुरू हुवा है। कल 6 मार्च को बित्तमंत्री हिमन्त बिश्व शर्मा ने सदन में बीजेपी नेतृत्ववाली असम सरकार की आखरी बजट पेश की। बजट में स्वास्थ्य, शिक्षा, नियुक्त, बिजली, आर्थिक मदद, सड़के अदि अनेक सुबिधाओं की घोषणा की है। एक प्रकार दिल्ली के अरबिंद केजरीअल सरकार की बजट का नक़ल असम सरकार की आखरी बजट में देखने को मिला। इधर बिरोधी दल कांग्रेस और एआईइउडीएफ ने 2020-21 की बजट को अगले 2021 वर्ष में होनेवाले असम बिधानसभा के निर्वाचन को मद्देनज़र रखते हुवे एक निर्वाचनमुखी बजट करार दिया है। वही इस बजट में असम की Indigenous मुसलमानो के लिए फिर से Indigenous मुस्लिम उन्नयन परिषद गठन करना और इस परिषद के लिए 100 कोड़ोर रुपये घोषणा किया गया। हलाकि पिछले 2019-20 वर्ष की बजट में भी असम की Indigenous मुसलमानो की सामाजिक-आर्थिक पियल करना, उन्नयन कॉर्पोरेशन गठन करना और 100 कोड़ोर रुपये का आर्थिक पैकेज घोषणा किया गया था।

    लेकिन यह घोषणा सरकार ने अबतक पूरा नही किया। इसके चलते सरकार की दुबारा इस घोषणा को लेकर असम की Indigenous मुस्लिम जनगोष्ठी गोरिया, मोरिया, देशी के लोगो के बीच स्वभाबिक रूप से ब्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिला। आज असम के बोंगाईगांव जिले के अभयापुरी में Indigenous मुसलमानो का बहुत बड़ा जातीय संगठन अल असम गोरिया मोरिया देशी जातीय परिषद ने एक पत्रकार सम्मेलन का आयोजन किया। पत्रकार सम्मेलन में संगठन के केंद्रीय सम्पादक अजीजुल रहमान ने पत्रकारो को सम्बोधित करते हुवे कहा की असम सरकार ने पिछले 2019-20 वर्ष की बजट में Indigenous मुसलमानो के लिए जो सामाजिक-आर्थिक पियल, उन्नयन कॉर्पोरेशन गठन और 100 कोड़ोर रुपये की आर्थिक पैकेज की घोषणा की थी उसे वास ्तब रूप दे। 2020-21 की बजट में Indigenous मुसलमानो के लिए असम सरकार ने Indigenous मुस्लिम उन्नयन परिषद गठन करना और 100 कोड़ोर रुपये का आर्थिक पैकेज की जो घोषणा की है उसपर अपना प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुवे उन्होंने कहा की असम की Indigenous मुसलमानो की खुद की ऐतिहासिक जनगोष्ठीय परिचय है औ र वे अपनी ऐतिहासिक पहचान से परिचित होना चाहते है, न की सिर्फ मुसलमान नाम से।

    सरकार ने बजट में Indigenous मुस्लिम उन्नयन परिषद गठन करने की जो घोषणा की है उस परिषद को गोरिया, मोरिया, देशी जनगोष्ठीय नाम से गठन करे। अजीजुल रहमान ने कहा की पिछले 11 फरवरी को असम सचिवालय में असम के संख्यालघु उन्नयन मंत्री रंजीत दत्त के साथ असम के Indigenous मुसलमानो की संगठनो की बैठक हुई थी। जिसमे सरकार द्वारा बजट में घोषित उन्नयन कॉर्पोरेशन को Indigenous मुस्लिम की नाम से नही बल्कि गोरिया, मोरिया, देशी जनगोष्ठीय नाम से गठन करने की बात किया गया था। और मंत्री रंजीत दत्त ने भी सहमति दी थी। साथ ही सामाजिक-आर्थिक पियल करने की भी बात बनी थी।

    लेकिन 2020-21 की बजट में Indigenous मुस्लिम उन्नयन परिषद गठन की बात करने से उन्होंने अश्यर्य जाहिर करते हुवे पत्रकार सम्मेलन में कहा की सरकार असम की Indigenous मुसलमानो के लिए उन्नयन कॉर्पोरेशन या उन्नयन परिषद जो भी गठन करे उसे मुस्लिम नाम से नही बल्कि ऐतिहासिक गोरिया , मोरिया, देशी जनगोष्ठीय नाम से नामकरण करे। उन्होंने कहा की सरकार घोषणा में ही अपना कर्तब्य सीमित न रखे। वास्तब रूप देके गोरिया, मोरिया, देशी को प्राप्य अदा करे। अगले अप्रैल महीने से गोरिया, मोरिया देशी की सामाजिक-आर्थिक पियल को शुरू करने की मांग करते हुवे उन्होंने फिर कहा की अगर ऐसा नही हुवा तो अल असम गोरिया मोरिया देशी जातीय परिषद पुरे असम मे हड़ताल करेंगे। असम के Indigenous मुस्लिम गोरिया, मोरिया देशी सरकार बनाना और गिराने का क्षमता भी रखते है— अजीजुल रहमान ने पत्रकार सम्मेलन में कहा।

  • कामरूप (मेट्रो) सीजेएम कोर्ट ने शरजील को फिर भेजा चार दिनों की रिमांड पर।

    चाईजुर रहमान,गुवाहाटी, 24 फरवरी :– असम को भारत से अलग करने संबंधी देश विरोधी बयान देने के मामले में गिरफ्तार शरजील इमाम को दूसरी बार सोमवार को कामरूप (मेट्रो) की सीजेएम अदालत में पुलिस ने पेश कर पूछताछ के लिए 10 दिनों की रिमांड की मांग की थी। लेकिन, अदालत ने फिर से चार दिनों की ही फिर रिमांड पर शरजील को सौंपा है।
     
    उल्लेखनीय है कि शरलीज को गुवाहाटी पुलिस की क्राइम ब्रांच दिल्ली से मंगलवार को अपने जिम्मे लेकर ब्रह्मपुत्र मेल से गुवाहाटी शाम 7.50 बजे के आसपास गुवाहाटी रेलवे स्टेशन पर पहुंची थी। 20 फरवरी को ही कामरूप (मेट्रो) सीजेएम की अदालत में पेश कर पुलिस ने 14 दिनों की न्यायालय से पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की थी। लेकिन न्यायालय ने उसे महज चार दिनों की ही पुलिस रिमांड पर भेजा था।
     
    ज्ञात हो कि गुवाहाटी क्राइम ब्रांच ने शरजील के विरूद्ध देशद्रोह से संबंधित विभिन्न धाराओं प्राथमिकी दर्ज की है। गुवाहाटी के अलावा दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मणिपुर समेत अन्य कई राज्यों में शरजील के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है। शरजील को बिहार से दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

  • असम की Assamese Indigenous मुसलमानो की अर्थ-सामाजिक पियल।

    संख्यालघु मंत्री रंजीत दत्त के अध्यक्षता में असम सचिवालय में बिशेष बैठक।

    चाईजुर रहमान, गुवाहाटी, 11 फरवरी:– आसाम की Assamese Indigenous मुसलमानो की अर्थ-समाजिक हालात के ऊपर पियल (Census) के लिए आज असम सचिवालय में एक बिशेष बैठक का आयोजन किया गया। असम सरकार के संख्यालघु मंत्री रंजीत दत्त के अध्यक्षता में दिन के ग्यारह बजे ये बैठक सम्पन्न हुवा। Assamese Indigenous मुसलमानो की कुल 21 संगठनो ने इस बैठक में हिस्सा लिया।

    गौरतलब है की असम में लगभग 45 लक्ष Assamese Indigenous मुस्लिम है और ये लोग पिसले कोई अर्से से घुसपैठी मुसलमानो की वजह से अपनी संस्कृति, पहचान खोने की टडर में है। इसी के कारण Assamese Indigenous मुसलमानो ने कोई सालो से अपना संस्कृति, पहचान को बचाने के लिए संग्राम करते आ रहे है और सरकार से सुरक्षा की मांग करते रहे है। असम सरकार ने 2019-20 के वजट में Assamese Indigenous मुसलमानो की संस्कृति, पहचान, सुरक्षा के लिए 100 कोड़ोर रूपया का घोषित किया था। और इसके चलते Assamese Indigenous मुसलमानो की अर्थ-सामाजिक पियल (Census) के लिए इस साल 2 कोड़ोर रूपया धार्ज किया है।

    आज की इस बैठक में संख्यालखु मंत्री रंजीत दत्त ने Assamese Indigenous मुस्लिम गोरिया, मोरिया, देशी, सैयद, जोला, मैमल आदि समुदाय की जल्द से जल्द पियल (Census) होने की घोषणा की है। और ये पियल (Census) असम सरकार के राजह, गृह और संख्यालखु बिभाग द्वारा होने की पेशकश की। उल्लेखनीय है की इस पियल (Census) से असम की Assamese Indigenous मुसलमानो को सरकारी रिजर्वेशन मिलने की ओर एक अहम कदम कह जा सकते है। वही बैठक में Assamese Indigenous मुसलमानो के लिए एक कॉरपोरेशन बोर्ड गठन करने पर भी चर्चा किया गया।pp

  • NRC मुद्दे पर जमीयत उलेमा हिंद की याचिका पर भारत और असम सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस:मौलाना सैयद अरशद मदनी

    चार सप्ताह के अन्दर सरकार नोटिस का जवाब दे :- सुप्रीम कोर्ट

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:असम नागरिकता मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस दीपकगुप्ता की दो सदस्यीय बेंच ने भारत सरकार और असम सरकार को नोटिस देते हुए कहा कि “क्यो ना जमीयतउलेमा हिन्द NRC मुद्दे पर दी गयी दलीले स्वीकार कर लिया जाए और नोटिस का जवाब चार सप्ताह भीतरसरकारे दे”

    जमीयत उलेमा हिन्द ने जिन तीन बिन्दुओ को असंवैधानिक बताते हुए आपत्ति दर्ज की हैं वो निम्नलिखित हैं

    1:- NRC की अंतिम सूची आने के बाद जिन लोगो का नाम NRC में नही हैं उन्हें कानून द्वारा निर्धारित 60 दिनप्रमाणित कॉपी मिलने के बाद दिया जाए जिससे कि प्रभावित अपनी अपील दाखिल कर सके

    2:- अगर कोई व्यक्ति फॉरेन ट्रिब्यूनल में अपनी अपील दाखिल करता हैं और अगर व्यक्ति के रिकॉर्ड में कुछगलतियां पायी जाती हैं तो अपीलकर्ता को अपनी बात रखने का पूरा समय दिया जाए

    3:- अगर अपील की सुनवाई के दौरान डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को ये लगे कि अपीलकर्ता विदेशी है तो उसको सिर्फशक के आधार तुरंत गिरफ्तार करने के बजाय उसको पूरी बात रखने का मौका दिया जाए

    जमीयत उलेमा हिंद तरफ से दिए गए उपरोक्त बिन्दुओ पर विस्तार से बहस के बाद अदालत ने सरकार कोनोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा हैं

    जमीयत उलेमा हिन्द के अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कोर्ट के आदेश पर अपनी बात रखते हुए कहा किजिनके नाम NRC लिस्ट में किसी कारणवश नही शामिल हो सका उन्हें भी अपनी नागरिकता साबित करने कापूरा समय दिया जाए क्योंकि हिन्दुस्तान एक लोकतांत्रिक और न्यायपसंद देश हैं और यहाँ सभी को अपनी बातरखने का पूरा समय दिया जाना चाहिए.

  • पूर्व सैनिक सनाऊल्लाह को जमानत मिलने पर मिल्लत टाइम्स से कहा,न्याय व्यवस्था सभी के लिए समान हो

    चाईजुर रहमान/मिल्लत टाइम्स,गुवाहाटी,13 जुन: असम मे विदेशी समस्या की समाधान के लिए एन आर ची का काम माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश और देखरेख मे चल रहे है। इस बिच भारतीय सेना का रिटायर्ड अफसर को विदेशी घोषित कर डिटेनशन कैम्प मे भेजा जाने पर पुरे असम मे माहोल गर्मी पर उठा। हालांकि सेना की मुख्य कार्यालय के हस्तक्षेप मे रिटायर्ड आर्मी अफसर को डिटेनशन कैम्प से मुक्त किया गया। गौरतलब है कि भारतीय सेना के रिटायर्ड कैप्टन सोना उल्लाह को बिदेशी न्यायाधिकरण द्वारा बिदेशी घोषित करार दिया गया था। पिछले 28 मई से 7 जुन तक उन्हे गोवालपारा डिटेनशन कैम्प मे रहना पड़ा।

    1987–2017 तक भारतीय सेना मे सेवा के दौरान सोना उल्लाह को राष्ट्रपति का मेडल भी मिला था।  डिटेनशन कैम्प से चुटने के बाद मिल्लत टाइम्स से हुई बातचीत मे उन्होंने कहा कि भारत की न्याय व्यवस्था सभी नागरिक के लिए समान होना चाहिए।

    मै भारतीय सेना मे था और मेरे पास मौका था इसलिए मुझे न्याय मिला एसा नही बल्की नागरिकता के लिए बिदेशी न्यायाधिकरण से जुॅज रहे निर्दोष और प्रकृत भारतीय को न्याय मिलना चाहिए। उन्होने कहा की डिटेनशन कैम्प मे सिर्फ दो फुट जगह पर रहने दिया जाता है और खाना-पीना का कोई अच्छा सुविधा नही है। इसका सुधार होना चाहिए।।

  • गुवाहटी में जू रोड स्थित मॉल के बाहर ग्रेनेड धमाका,6 लोग घायल

    मिल्लत टाइम्स/चईजुर रहमान,गुवाहटी:असम की राजधानी गुवाहटी में ग्रेनेड धमाके से हड़कंप मच गया। जू रोड स्थित एक मॉल के बाहर ग्रेनेट धमाके में छह लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। धमाके के बाद से घटना स्थल पर मौजूद पुलिस ने घेरा बंदी कर ली। धमाके में घायल व्यक्तियों को गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    गुवाहिटी पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने ग्रेनेड धमाके की जानकारी देते हुए कहा कि शहर के जू रोड स्थित मॉल के बाहर रात 8 बजे ग्रेनेड धमाका हुआ, जिसमें छह लोग घायल हो गए। मॉल के बाहर हुए धमाके की जांच की जा रही है।

  • I A मेमोरियल स्टेट लाईब्रेरी एवं एजुकेशनल रिसर्च सेंटर”द्वारा गरीब छात्रों मे स्कुल बैग और पौधा बितरण।लोगो ने की सराहना।

    चाईजुर रहमान,असम:-असम के शैक्षिक क्षेत्र मे काम करते आ रहे सामाजिक संगठन “मरहूम ईद्रिश आली मेमोरियल स्टेट लाईब्रेरी एवं एजुकेशनल रिचार्च चेन्टर” असम द्वारा बारपेटा जिला के भेल्ला मे गरीब मुस्लिम परिवार के तालेबा के बीच स्कुल बेग और पेड़ का पौधा वितरण किया गया। मरहूम वाचिकुर हुसैन के नाम पर आयोजित इस कार्यक्रम मे संस्था के संस्थापक तथा मिल्लत टाईम्स, असम के पत्रकार चाईजुर रहमान, रिटायर्ड फौजी आनोवार हुसैन, भेल्ला बाजार जामे मस्जिद के शाही इमाम हाफिज आब्दुल कालाम समेत बहुत सारे बिशिष्ट लोग मौजूद थे।

    कुल चलिश (40) प्राथमिक विद्यालय के छोटे छोटे तालेबा को स्कुल बेग और पेड़ का पौधा प्रदान किया गया। इसको लेकर बच्चो के बीच खुशी का लहर देखने को मिला। शाही इमाम आब्दुल कालाम के कुरान शरीफ तिलावत द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम मे तालेबा के माता-पिता अलावा स्थानीय बहुत सारे लोग उपस्थित रहे। लोगो ने कार्यक्रम की पर सराहना और तारीफ जाहिर की।