Category: चुनाव

  • EVM:जगह जगह मिल रहे EVM मशीनों के कहानी का जाने क्या है सच

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:चुनाव ख़त्म होते ही और ख़ासकर सोमवार से देशभर में जगह-जगह ईवीएम मशीन मिलने की ख़बर आ रही है. विपक्षी नेताओं का आरोप है कि ज़िला प्रशासन दबाव में आकर मतगणना में ईवीएम बदलने की साज़िश रच रहा है.

    जगह-जगह ईवीएम और वीवीपैट से भरे ट्रक की जानकारी सोशल मीडिया पर दी जा रही है जिनमें दावा किया जा रहा है कि ईवीएम मशीनें बदली जा रही हैं. इस तरह की ख़बर बिहार और उत्तर प्रदेश के झांसी, चंदौली, ग़ाज़ीपुर, डुमरियागंज से आ रही थी.

    इस बारे में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी ने ट्वीट किया है कि ईवीएम मशीन की भरे हुए ट्रक पकड़े जा रहे हैं.

    वे लिखती हैं, ”देशभर के स्ट्रॉंग रूम्स के आसपास ईवीएम की बरामदगी हो रही है. ट्रकों और निजी वाहनों में ईवीएम पकड़ी जा रही है. ये कहाँ से आ रही है, कहाँ जा रही हैं? कब, क्यों, कौन और किसलिए इन्हें ले जा रहा है? क्या यह पूर्व निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा है? चुनाव आयोग को अतिशीघ्र स्पष्ट करना चाहिए.”

    चुनाव आयोग की प्रवक्ता शेफाली शरण ने सोशल मीडिया पर ईवीएम मुद्दे पर निर्वाचन अधिकारियों के बयान साझा किए हैं.

    उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ीपुर के ज़िला निर्वाचन अधिकारी ने ट्विटर पर एक वीडियो संदेश में कहा है कि मीडिया के ज़रिए ये ख़बर फैल रही है कि गाज़ीपुर में ईवीएम की निगरानी के लिए प्रत्याशियों को रोका गया.

    इस वीडियो में वे कहते हैं, ”इस सूचना के बारे में ये अवगत करवाना है कि ग़ाज़ीपुर में रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा ये व्यवस्था बनाई गई है कि प्रत्येक प्रत्याशी को स्ट्रॉंग रूम पर निगरानी रखने के लिए तीन कलेक्शन प्वाइंट परआठ-आठ घंटे में एक-एक व्यक्ति को पास जारी करने के लिए निर्धारित किया गया है. लेकिन कई जगहों पर कभी तीन तो कभी पांच लोगों को पास जारी करने की मांग की गई जिसके लिए प्रशासन ने असहमति जताई है.”

    झांसी के ज़िला निर्वाचन अधिकारी ने भी इस मामले में ट्विटर पर जानकारी दी है

    वे कहते हैं, “झांसी में एक ही पोलिंग पार्टी की रवानगी होती है, यहीं पर स्ट्रॉंग रूम बनते हैं और यहीं कलेक्शन प्वाइंट होता है. चूंकि गरोठा और मऊ काफ़ी दूर के विधानसभा क्षेत्र हैं तो कुछ पोलिंग पार्टियों को वहां से आने में विलंब हो गया था. कुछ पीठासीन अधिकारियों को अपने पत्र भरने में विलंब हो गया था. इसलिए स्ट्रॉंग रूम सील होते होते सुबह हो जाती है. यहां भी सुबह 7-7.30 तक सारी ईवीएम मशीन हमने स्ट्रॉंग रूम में रख दी थी. उनकी सीलिंग जेनरल ऑब्ज़र्वर और जो भी कैंडिडेट आए थे उनके सामने की गई थी, उन्हें इसके लिए सूचित किया गया था. सीलिंग करते समय वीडियो बनाई गई थी और सीसीटीवी कैमरा के सामने की गई थी.”

    ज़िला निर्वाचन अधिकारी आगे बताते हैं कि स्ट्रॉंग रूम उन ईवीएम और वीवीपैट के लिए बनाए गए हैं जिनका इस्तेमाल नहीं हुआ है. और इसका मक़सद ही है कि इस्तेमाल में आए हुए वीवीपैट और ईवीएम से अलग रखा जाए. ताकि कोई भी गड़बड़ी न हो. यहां जितनी भी विधानसभा सीटें थी उनके अनयूज़्ड ईवीएम का स्ट्रॉंग रूम बनाया गया है. जिन उम्मीदवारों को आपत्ति थी उनके सामने हमने ईवीएम को चेक करके भी दिखाया कि इनमें कुछ नहीं है, वीवीपैट के बॉक्स भी दिखाए कि उनमें भी कुछ नहीं है.

    वे बताते हैं कि कुछ उम्मीदवारों को इसलिए ऐसा भ्रम हुआ क्योंकि स्ट्रॉंग रूम सील होने में समय लगा क्योंकि प्रपत्र नहीं भरे गए थे. रिज़र्व अनयूज़्ड ईवीएम के लिए स्ट्रॉंग रूम भी चुनाव आयोग के निर्देश पर ही बनाए गए हैं.

    चुनाव आयोग का जवाब
    देशभर में ये मुद्दा चर्चा का विषय बनने के बाद चुनाव आयोग ने भी अपना बयान जारी कर स्पष्टीकरण दिया है.

    1. ग़ाज़ीपुर: उम्मीदवारों ने कंट्रोल रूम की निगरानी पर सवाल उठाए थे जिसे हल कर लिया गया है.

    2. चंदौली: कुछ लोगों ने आरोप लगाया था लेकिन ईवीएम प्रोटोकॉल के तहत सुरक्षित हैं.

    3. डुमरियागंज: ईवीएम प्रोटोकॉल के तहत सुरक्षित हैं. सभी आरोप अनावश्यक थे. डीएम और एसपी ने बातकर मामला हल कर लिया है.

    4. झांसी: राजनीतिक पार्टी के उम्मीदवारों की उपस्थिति में ईवीएम को सील किया गया है. यहां कोई समस्या नहीं है.

    जारी बयान में आगे कहा गया है कि दरअसल, इन सभी मामलों में सभी ईवीएम और वीवीपैट को राजनीतिक पार्टी के उम्मीदवारों के सामने सील किया गया था, जिसकी वीडियो भी बनाई और वहां सीसीटीवी कैमरा भी मौजूद थे.

    सीपीएएफ सुरक्षागार्ड भी वहां मौजूद थे. उम्मीदवारों को उस समय और उस प्वाइंट पर प्रत्येक उम्मीदवार का एक प्रतिनिधित्व 24×7 को निगरानी रखने की अनुमति है. इसलिए ये आरोप निराधार हैं.

  • नाथूराम गोडसे की जयंती मनाने के केस में हिन्दू महासभा के 6 कार्यकर्ता गिरफ्तार

    ‌मिल्लत टाइम्स,गुजरात:पुलिस ने नाथूराम गोडसे का जन्मदिन मनाने के मामले में सोमवार को अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।इनमें सेछह को गिरफ्तार कर लिया। उधर, कांग्रेस ने पुलिस आयुक्त को ज्ञापन देकरइनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

    पुलिस सब इंस्पेक्टर एमपी सोलंकी ने बताया कि लिंबायतइलाकेके सूर्यमुखी हनुमान मंदिर में विश्व हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने 19 मई कोगोडसे के 109वें जन्मदिन पर शाम 7 बजे 109 दीएजलाकर लड्‌डू बांटे और वीडियो भी बनाए। पुलिस ने शिकायत केबादहेमंत सोनार, मनीष कलाल, वाला मेर, हिरेन मशरू, विरल मालवी और योगेश पटेल को गिरफ्तार कर लिया।

    हिरेन मशरू ने कहा-नाथूराम गोडसे हमारे गुरु
    हिरेन मशरू ने कहा, “नाथूराम गोडसे हमारे गुरु हैं। उनका जन्मदिन मनाना हमारा संवैधानिक अधिकार है। मैं देश के बंटवारे के लिए गांधीजी को दोषी मानता हूं।”उधर, पुलिस आयुक्त सतीश शर्मा ने बताया कि महात्मा गांधी भारत के राष्ट्रपिता हैं, उन्हें देश में पूरी तरह मान-सम्मान मिलना चाहिए। उनके हत्यारे काे सम्मान देकर लोगों की भावनाओं को भड़काने और माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की गई है। आरोपियों के खिलाफकार्रवाई की जाएगी।

  • सभी ऐक्जिट पोल धारासाई होगें-तेईस मई के परिणाम के बाद यूपीए की सरकार बनना तय।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    हालांकि लोकसभा चुनाव के परिणाम आने मे अभी एक दिन शेष है। लेकिन प्रायोजित सभी तरह के ऐक्जिट पोल तेईस मई के परिणाम के दिन 1998 से लगातार अबके भी धारासाई होते सभी ऐक्जिट पोल की तरह साफ नजर आयेगा कि भारत मे मोदी सरकार की रवानगी व यूपीए सरकार बनने जा रही है।

    दो दिन पहले विभिन्न तरह के जारी ऐक्जिट पोल के आंकड़ों की बहस मे ना जाकर भारत की राजनीति पर नजर रखने वालो का मानना है कि 2014 की तरह कमोबेश 2019 के लोकसभा चुनाव मे भी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की कोशिशों के चलते मोदी लहर नजर आती है। पर 2014 के लोकसभा चुनाव मे मात्र इकतीस प्रतिशत मत लेकर भाजपा ने स्पष्ट बहुमत पाया था। तब 2014 मे यूपीए व तीसरे मोर्चे के घटक अलग अलग रहकर चुनाव लड़कर एक दूसरे दल के उम्मीदवार को काट रहे थे। आज आसाम व बंगाल को छोड़कर बाकी सभी जगह यूपीए व तीसरा मोर्चा मीलकर या आपसी समझ बना कर चुनाव लड़ रहे है। यानि 2014 के चुनाव मे भाजपा के खिलाफ वाले 69 प्रतिशत मत किसी ना किसी रुप मे साथ रहकर या फिर आपसी समझ बनाकर चुनाव लड़ रहे है।

    2014 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले 2019 के चुनाव को अनेक रुप मे अलग पाते है। बिहार, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश सहित कुछ प्रदेशो मे कांग्रेस पहले अकेले व अब गठबंधन के साथ चुनाव लड़ रही है। केरल मे पहले की तरह गठबंधन के साथ चुनाव लड़ रहे है। 2014 के मुकाबले आज के चुनाव के समय राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ , पंजाब व कर्नाटक मे कांग्रेस की सरकार या सरकार मे भागीदार है। इसी तरह यूपी मे बसपा , सपा व लोकदल ने 2014 का लोकसभा चुनाव अलग अलग रहकर लड़ा था और आज तीनो दल गठबंधन करके चुनाव लड़े है।

    2014 के चुनाव के समय अन्ना आंदोलन व विभिन्न तरह के सरकारी स्तर पर भ्रष्टाचार होने की खबरो के चलते आम मतदाता एक दफा अच्छी उम्मीद को लेकर बदलाव की चाहत के साथ सरकार के खिलाफ मजबूती के साथ खड़ा होने के अलावा बेरोजगार-किसान व गरीब तबका उस समय मोदी के रुप मे एक उचित परिवर्तन मानकर मतदान किया था। 2014 के चुनाव मे मुस्लिम मतदाता उदासीन व अनेक दलो के उम्मीदवारों के मध्य बंटवारे की भेंट चढा हुवा था। दलित, आदिवासी मतदाताओं के बडे तबके का झुकाव भी 2014 मे भाजपा की तरफ साफ नजर आ रहा था। जबकि 2019 के चुनाव मे मुस्लिम बीना बंटे नीसाना साधकर सक्रियता के साथ मतदान करता नजर आया एवं दलित व आदिवासी मतदाताओं के बडे हिस्से का झुकाव भी भाजपा के बजाय यूपीए की तरफ नजर आ रहा था।

    यूपी मे भाजपा कम से कम पचास सीट खो रही है। एवं बिहार, झारखंड व गुजरात मे भी एनडीए को नूकसान उठाना तय है। बंगाल मे भाजपा की दो से तीन सीट हो सकती है। जबकि मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान , पंजाब, हरियाणा, व दिल्ली मे भी भाजपा को बडा नुकसान होने जा रहा है। दक्षिणी भारत मे भाजपा का कोई खास प्रभाव दशकों से नही है। फिर ऐक्जिट पोल , पोल मे ढोल बजाने वाली कहावत सिद्ध कर रहे है।

    राजस्थान के सम्बंध मे ऐक्जिट पोल कुल पच्चीस सीटो मे से कांग्रेस की दो सीट या फिर शून्य आने की बताते है। लेकिन चुनावों पर नजर रखने वाले बताते है कि बाडमेर, जालौर, जोधपुर, नागोर, सीकर, श्रीगंगानगर, अलवर, करोली-धोलपुर, टोंक-सवाईमाधोपुर, व दौसा सीटे आराम से कांग्रेस के खाते मे आती नजर आ रही है। जबकि भरतपुर व बीकानेर के अलावा पाली मे भी तगड़ा मुकाबला माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर यह है कि 2014 के लोकसभा चुनाव मे 31प्रतिशत मत पाकर भाजपा ने 282 सीट लेकर बहुमत पाकर सरकार बनाई थी। जबकि 2014 के चुनाव मे भाजपा के खिलाफ वाला 69 प्रतिशत मतदाता उस समय टूकड़ो टूकड़ो मे बंटा हुवा था। 2019 के चुनाव मे भारत का उस समय का 69 प्रतिशत मतदाता आज किसी ना किसी रुप मे एकजुट होकर मतदान करता नजर आया है। चुनाव परिणाम आने मे अभी एक दिन शेष है। लेकिन यह तय है कि ऐक्जिट पोल परिणाम के समय ओंधे मुहं गिरेते नजर आयेंगे।

  • ममता ने एग्जिट पोल्स को गप बताया,कहा-यह सिर्फ evm में गड़बड़ी का गेम प्लान

    मिल्लत टाइम्स,कोलकाता:लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद रविवार को आए एग्जिट पोल्स को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बकवास करार दिया। उन्होंने कहा कि मुझे एग्जिट पोल की गॉसिप पर भरोसा नहीं, यह सिर्फ ईवीएम में गड़बड़ी या उन्हें बदलने का एक गेम प्लान है। सभी विपक्षी दलों से अपील करती हूं कि एकजुट होकर लड़ाई लड़ें। 10 में से 9 एग्जिट पोल्स में एनडीए को स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमानजताया गया है।

    ममता ने सवाल उठाया- ”क्या दिल्ली की मीडिया ने विश्वसनीयता खो दी? तथाकथित एग्जिट पोल्स सिर्फ भ्रमित करेंगे। हम जनता के फैसले का इंतजार करेंगे। मोदीजी ने 7वें चरण के मतदान से पहले 300+ सीटों का दावा किया था। क्या पोल सर्वे के सभी आंकड़े इससे मिलते हैं? ईवीएम में गड़बड़ी?”

    उमर अब्दुल्ला ने कसा तंज
    जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तंज कसा- कोई भी एग्जिट पोल गलत नहीं हो सकता! अब टीवी बंद करने और सोशल मीडिया से दूर रहने का वक्त है। 23 मई के नतीजे दुनिया देखेगी।

    अमरिंदर बोले- एग्जिट पोल्स पूरी तरह सही नहीं होंगे
    पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि एग्जिट पोल्स की विश्वसनीयता पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। 50 साल की राजनीति में इस पर भरोसा करने की कोई वजह नहीं। मुझे लगता है कि कांग्रेस न सिर्फ पंजाब बल्कि देशभर में बेहतर प्रदर्शन करेगी।

    भाजपा एग्जिट पोल्स के अनुमान से बेहतर प्रदर्शन करेगी: राव
    भाजपा नेता जीवीएल नरसिम्हा राव ने कहा, ”हमें भरोसा है कि भाजपा एग्जिट पोल्स के अनुमानों से बेहतर प्रदर्शन करेगी। ज्यादतर में एनडीए को 300+ सीटें मिलने के आसार हैं। यह पोल सर्वे के यह नतीजे प्रधानमंत्री मोदी पर जनता का भरोसा दिखाते हैं।”

  • राजस्थान के माली मतदाताओं के मतदान पर टिकी सबकी निगाहें।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान की दोसो सदस्यों वाली विधानसभा मे मात्र एक माली विधायक अशोक गहलोत को कांग्रेस ने तीसरी दफा मुख्यमंत्री बनाने के बावजूद उनका सजातीय मतदाता कांग्रेस की तरफ बहुमत मे खींचा चला नही आया जिसकी उम्मीद की जा रही थी।

    हालांकि माली मतदाता को वैसे तो परम्परागत रुप से भाजपा के करीब माना जाता था। लेकिन अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री बनने के बाद राजनीतिक समीक्षक बडे प्रतिशत मे कांग्रेस की तरफ खींचा आने का अनुमान लगाकर कांग्रेस की लोकसभा सीट की ठीक ठाक जीतना मानकर चल रहे थे। पर मतदान के बाद ऐसा होना प्रतीत नही हो रहा है।

    कोई माने या ना माने लेकिन यह सत्य है कि राजनीति पर जातीयता की परत राजनीतिक दल व उनके नेता ही नही बल्कि आम मतदाता भी चढाने को कमोबेश हरदम तैयार रहते है। जबकि राजनीतिक समीक्षक व अखबारात के नूमाईंदे भी अपनी रिपोर्ट मे इस तरह का उल्लेख करते रहते है।

    राजस्थान मे एससी व एसटी बीरादरी के अलावा माली ही ऐसी बीरादरी है जो कम-ज्यादा तादात मे सभी दोसो विधानसभा क्षेत्रो मे निवास करती है। अगर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अपना नेता मानकर बहुमत मे कांग्रेस के पक्ष मे मतदान करती तो राजस्थान की अधीकांश लोकसभा क्षेत्रो के परिणाम पर आज अलग चर्चा होती। जैसे विधानसभा चुनाव मे गुज्जर मतदाताओं ने सचिन पायलेट को नेता मानकर कांग्रेस के पक्ष मे बहुमत मे मतदान करके पहली दफा भाजपा से किसी गुज्जर को विधायक बनने नही देकर कांग्रेस की झोली भरकर रख दी। जबकि अब लोकसभा चुनाव मे गुज्जर मतदाता भी कांग्रेस की तरफ उतना खींचा हुवा नही चला आया जितना विधानसभा चुनाव मे आया था।

    हालांकि हो सकता है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पकड़ मे उनका बीरादरी मतदाता नही हो, क्योंकि आज हर मतदाता स्वतंत्र विचार रखने का आदि हो गया है। लेकिन एक मात्र विधायक को कांग्रेस ने तीन दफा मुख्यमंत्री बनाने के साथ साथ अनेक पदो से नवाजा तब माली मतदाताओं की यह बाते राजनीति मे चलती रहती है। कुछ लोगो की अगर पसंद यह हो कि राजस्थान मे अशोक गहलोत व केंद्र मे मोदी तब विरोधाभाष नजर आता है।

    कुल मिलाकर यह है कि राजस्थान मे हुये दो चरणो के मतदान मे मुस्लिम करीब करीब व एसटी काफी हद तक एवं एसटी करीब अस्सी प्रतिशत कांग्रेस के पक्ष मे खड़ी नजर आई। बाकी बिरादरियो के मतो मे बंटवारा नजर आ रहा है।

  • अमित शाह कल NDA नेताओं को रात्रिभोज देंगे,केंद्रीय कैबिनेट की बैठक भी होगी

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:23 मई को लोकसभा चुनाव नतीजों से पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह मंगलवार को दिल्ली में एनडीए दलों के नेताओं को रात्रिभोज देंगे। सूत्रों के मुताबिक, इसी दिन केंद्रीय मंत्रिपरिषद की बैठक भी होगी। रविवार को आए 10 में से 9 एग्जिट पोल्स में एनडीए को स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान जताया गया। भाजपा नेताओं को उम्मीद है कि नतीजे सर्वे के आंकड़ों से भी बेहतर होंगे। दूसरी ओर, यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने भी नतीजों के दिन सहयोगी दलों की बैठक बुलाई है।

    भाजपा महासचिव राम माधव ने कहा कि बंगाल के नतीजे राजनीतिक विशेषज्ञों के लिए चौंकाने वाले होंगे। हमें यहां भाजपा के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। नरेंद्र मोदी को बंगाल से काफी समर्थन मिला। बंगाल में इस बार हम 2014 में मिली उत्तरप्रदेश जैसी कामयाबी हासिल करेंगे। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही महागठबंधन पूरी तरह से फेल रहा। कई पार्टियों ने कोशिश की लेकिन एक भी राज्य में उन्हें कामयाबी नहीं मिली। अब मतदान के बाद भी कोशिश जारी है, लेकिन इसकी उम्मीद बहुत कम हैं।

    एग्जिट पोल्स पर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाएं

    कांग्रेस नेता शशि थरूर ने एग्जिट पोल्स को खारिज करते हुए कहा कि हमें असली नतीजों के लिए 23 मई का इंतजार करना चाहिए। पिछले दिनों ऑस्ट्रेलिया में 56 एग्जिट पोल्स गलत साबित हुए हैं। भारत में सरकार के डर से कोई चुनाव की सच्चाई नहीं बताता है।
    तेदेपा प्रमुख और आंधप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि एग्जिट पोल्स जनता की नब्ज पकड़ने में नाकाम रहे। एक बार फिर यह गलत साबित होंगे। उम्मीद है कि आंध्र में तेदेपा सत्ता में लौटेगी और केंद्र में गैर-एनडीए दलों की सरकार बनेगी।
    बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि मुझे एग्जिट पोल की गॉसिप पर भरोसा नहीं, यह सिर्फ ईवीएम में गड़बड़ी या उन्हें बदलने का एक गेम प्लान है। सभी विपक्षी दलों से अपील करती हूं कि एकजुट होकर लड़ाई लड़ें। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या दिल्ली की मीडिया ने विश्वसनीयता खो दी? तथाकथित एग्जिट पोल्स सिर्फ भ्रमित करेंगे। हम जनता के फैसले का इंतजार करेंगे।

    जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया- सभी एग्जिट पोल गलत नहीं हो सकते।अब टीवी बंद करने और सोशल मीडिया से दूर रहने का वक्त है। 23 मई के नतीजे दुनिया देखेगी।

    पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि एग्जिट पोल्स की विश्वसनीयता पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं। 50 साल की राजनीति में इस पर भरोसा करने की कोई वजह नहीं। मुझे लगता है कि कांग्रेस न सिर्फ पंजाब बल्कि देशभर में बेहतर प्रदर्शन करेगी।

    सोनिया ने 23 मई को बुलाई गैर-एनडीए दलों की बैठक
    यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने 23 मई को गैर-एनडीए दलों को बैठक के लिए बुलाया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस का मानना है कि भाजपा को इस बार बहुमत नहीं मिलेगा। इसी के मद्देनजर यूपीए प्रमुख ने सेक्युलर पार्टियों के नेताओं को निमंत्रण भेजा है। इनमें शरद पवार, द्रमुक प्रमुख एमके स्टालिन, राजद और टीएमसी के नेता शामिल हैं। इसके लिए कांग्रेस ने चार नेताओं की टीम बनाई है, जिसमें अहमद पटेल, पी.चिदंबरम, गुलाम नबी आजाद और अशोक गहलोत हैं।

    (इनपुट भास्कर)

  • राजस्थान मे पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की चुनाव परिणाम के बाद की रणनीति पर सबकी नजरे।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    भाजपा मे नरेन्द्र मोदी व अमीतशाह की जोड़ी ने एक एक करके सभी सीनियर नेताओं को चुनावी राजनीति से दूर करने के सफल प्रयोग के बाद लोकसभा चुनाव मे राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को एक तरह से प्रचार से पूरी तरह दूर रखे जाने से उपजे समीकरणों को लेकर तेईस मई के चुनाव परिणाम के बाद राजे द्वारा अपनाई जाने वानी रणनीति पर सबकी नजर टिकी हुई है।

    जीद की पक्की व आत्म विश्वास से सरोबार वसुंधरा राजे अपने राजनीतिक जीवन मे पहली दफा इन लोकसभा चुनाव मे शीर्ष नेतृत्व के सामने घूटने टेकती नजर आई। वरना उसने हर दम अपनी जीद के आगे पार्टी नेतृत्व को झूकाया है। इन लोकसभा चुनावो के परिणामो के बाद केंद्र मे अगर एनडीए की सरकार बनने का अवसर आता है तो राजे नितिन गडकरी के पीछे खड़ी नजर आती है या फिर मजबूरी मे मोदी व अमीतशाह की जोड़ी के पीछे? भाजपा मे रहने के बावजूद वसुंधरा राजे की छवि एक धर्मनिरपेक्ष नेता के तौर पर रहने के कारण अगर केंद्र मे एनडीए की सरकार नही बनती है तो राजे क्या अलग से राजस्थान मे अपनी क्षेत्रीय पार्टी बनाकर भाजपा व कांग्रेस को टक्कर देगी या फिर भाजपा मे ही रहकर अपनी खोई जमीन फिर पाने का साहस दिखायेगी। यह सब अगले दो तीन महिनो मे सामने आ पायेगा।

    नरेंद्र मोदी व अमीतशाह की जोड़ी वसुंधरा राजे को भाजपा के अन्य नेताओं की तरह दूध मे से मक्खी निकालने की तरह कोशिश करेगे तो राजे अपने मिजाज के अनुसार चुपचाप बैठने वाली नही है। लेकिन लोकसभा चुनाव प्रचार मे भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने राजे व उनके खास नेताओं को प्रचार से दूर रखते हुये उनकी इच्छा के विपरीत हनुमान बेनीवाल से समझोता करके उनको जरा इस बात का अहसास जरुर करवा दिया है कि राजस्थान भाजपा मे राजे ही सबकुछ नही है। इसके अतिरिक्त उक्त सब हालातो पर राजे व उनके समर्थकों की पूरी तरह चूप्पी साधने को तूफान के पहले की शांति माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर यह है कि लोकसभा चुनाव मे राजे को अलग थलग करने की शीर्ष नेतृत्व की कोशिश से शांत बैठी वसुंधरा राजे चुनाव परिणाम के बाद अपने विरोधियों पर हमलावर होती है या फिर बहती हवा मे बहती है। या फिर इसके एकदम उलट राजस्थान मे अलग से अपना क्षेत्रीय दल बनाकर राजनीति करती है। यह सब कुछ होते देखने के लिये तीन चार माह इंतजार करना पड़ सकता है।

  • 10 में से 9 एग्जिट पोल्स के अनुसार,फिर एक बार मोदी सरकार

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:लोकसभा की 542 सीटों पर एग्जिट पोल्स आना शुरू हो गए। 10 एग्जिट पोल्स में से 9 में एनडीए को स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान जताया गया है। वहीं, यूपीए को पिछली बार से दोगुनी सीटें मिलने के आसार हैं। 5 एग्जिट पोल्स में एनडीए को 300 से ज्यादा सीटें मिलने का अनुमान है।पिछली बार एनडीए को 336, यूपीए को 60 और अन्य को 147 सीटें मिली थीं।

    उप्र : कुल 80 सीटें भाजपा+ महागठबंधन कांग्रेस
    एबीपी न्यूज            33              45        2
    इंडिया टुडे-एक्सिस   62-68     10-16      1-2
    इंडिया न्यूज-टुुुडेड।      40           2           2
    टाइम्स नाऊ-वीएमआर   58        20           2
    रिपब्लिक-सी-वोटर        38       40           2
    न्यूज 18।                   60-62   17-19     1-2
    न्यूज 24-चाणक्य।       65         13          2
    2014 के नतीजे          73        5(सपा)     2

    बंगाल : कुल 42 सीटें भाजपा तृणमूल अन्य
    रिपब्लिक-जन की बात 18-26  13-21  —
    रिपब्लिक-सी वोटर।      11।      29        2
    इंडिया न्यूज-पोलस्ट्रेट     14        26       2
    न्यूज नेशन                 10-12   26-28   1-2
    इंडिया टुडे-एक्सिस    19-23     19-22   0-1
    2014 के नतीजे         2             34        6

    बिहार : कुल 40 सीटें भाजपा+ राजद-कांग्रेस-रालोसपा
    इंडिया टुडे-एक्सिस     38-40              0-2
    इंडिया न्यूज-पोलस्ट्रेट     32                 8
    रिपब्लिक-जन की बात   28-31           8-11
    टाइम्स नाऊ-वीएमआर    30                 10
    न्यूज 24-चाणक्य           32                 8
    एबीपी।                        34                6

    बिहार में 2014 में एनडीए (भाजपा-लोजपा-रालोसपा) ने 31 सीटें जीती थीं। कांग्रेस ने राजद और राकांपा के साथ 7 सीटें जीती थीं। जदयू ने अलग चुनाव लड़ा था। उसे 2 सीटें मिली थीं। इस बार जदयू भाजपा के साथ और रालोसपा कांग्रेस-राजद के साथ है।

    मप्र : कुल 29 सीटें भाजपा।       कांग्रेस         अन्य
    न्यूज 18-आईपीएसओएस24-27    2-4        0
    न्यूज 24-टुडेज चाणक्य     27         2           0
    इंडिया न्यूज-पोलस्ट्रेट          21        8           0
    न्यूज नेशन                       22-24    5-7       0
    2014 के नतीजे                 27          2        0

    राजस्थान : कुल 25 सीटें।     भाजपा।      कांग्रेस
    न्यूज 18-आईपीएसओएस।      22-23      2-3
    न्यूज 24-टुडेज चाणक्य।           25           0
    इंडिया न्यूज-पोलस्ट्रेट।               24          1
    न्यूज नेशन।                          21-23       2-4
    रिपब्लिक-सी वोटर।               23-25      0-2
    2014 के नतीजे।                    25          0

    2014 के नतीजे
    कुल सीटें: 543, बहुमत: 272

    पार्टी               सीटें            वोट%
    भाजपा+         336           39%
    कांग्रेस+          60।             23%
    एआईएडीएमके37              3%
    तृणमूल           34।             4%
    बीजद।           20               2%
    अन्य।             56               29%

  • 10 में से 9 एग्जिट पोल्स के अनुसार,फिर एक बार मोदी सरकार

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:लोकसभा की 542 सीटों पर एग्जिट पोल्स आना शुरू हो गए। 10 एग्जिट पोल्स में से 9 में एनडीए को स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान जताया गया है। वहीं, यूपीए को पिछली बार से दोगुनी सीटें मिलने के आसार हैं। 5 एग्जिट पोल्स में एनडीए को 300 से ज्यादा सीटें मिलने का अनुमान है।पिछली बार एनडीए को 336, यूपीए को 60 और अन्य को 147 सीटें मिली थीं।

    उप्र : कुल 80 सीटें भाजपा+ महागठबंधन कांग्रेस
    एबीपी न्यूज 33 45 2
    इंडिया टुडे-एक्सिस 62-68 10-16 1-2
    इंडिया न्यूज-पोलस्ट्रेट 37 40 2
    टाइम्स नाऊ-वीएमआर 58 20 2
    रिपब्लिक-सी-वोटर 38 40 2
    न्यूज 18। 60-62 17-19 1-2
    न्यूज 24-चाणक्य 65 13 2
    2014 के नतीजे 73 5 (सपा) 2

    बंगाल : कुल 42 सीटें भाजपा तृणमूल अन्य
    रिपब्लिक-जन की बात 18-26 13-21 —
    रिपब्लिक-सी वोटर 11 29 2
    इंडिया न्यूज-पोलस्ट्रेट 14 26 2
    न्यूज नेशन 10-12 26-28 1-2
    इंडिया टुडे-एक्सिस 19-23 19-22 0-1
    2014 के नतीजे 2 34 6

    बिहार : कुल 40 सीटें भाजपा+ राजद-कांग्रेस-रालोसपा
    इंडिया टुडे-एक्सिस 38-40 0-2
    इंडिया न्यूज-पोलस्ट्रेट 32 8
    रिपब्लिक-जन की बात 28-31 8-11
    टाइम्स नाऊ-वीएमआर 30 10
    न्यूज 24-चाणक्य 32 8
    एबीपी। 34 6

    बिहार में 2014 में एनडीए (भाजपा-लोजपा-रालोसपा) ने 31 सीटें जीती थीं। कांग्रेस ने राजद और राकांपा के साथ 7 सीटें जीती थीं। जदयू ने अलग चुनाव लड़ा था। उसे 2 सीटें मिली थीं। इस बार जदयू भाजपा के साथ और रालोसपा कांग्रेस-राजद के साथ है।

    मप्र : कुल 29 सीटें भाजपा कांग्रेस अन्य
    न्यूज 18-आईपीएसओएस24-27 2-4 0
    न्यूज 24-टुडेज चाणक्य 27 2 0
    इंडिया न्यूज-पोलस्ट्रेट 21 8 0
    न्यूज नेशन 22-24 5-7 0
    2014 के नतीजे 27 2 0

    राजस्थान : कुल 25 सीटें भाजपा कांग्रेस
    न्यूज 18-आईपीएसओएस 22-23 2-3
    न्यूज 24-टुडेज चाणक्य 25 0
    इंडिया न्यूज-पोलस्ट्रेट। 24 1
    न्यूज नेशन। 21-23 2-4
    रिपब्लिक-सी वोटर। 23-25 0-2
    2014 के नतीजे। 25 0

    2014 के नतीजे
    कुल सीटें: 543, बहुमत: 272

    पार्टी सीटें वोट%
    भाजपा+ 336 39%
    कांग्रेस+ 60 23%
    एआईएडीएमके37 3%
    तृणमूल 34 4%
    बीजद 20 2%
    अन्य 56 29%

  • चुनाव आयुक्त लवासा के विरोध के बाद मोदी को क्लीन चिट देने पर फिर से होगा विचार

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:चुनाव आयोग ने आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में नीति आयोग और प्रधानमंत्री कार्यालय को क्लीन चिट देने के मामले में फिर से विचार करने का फैसला किया है। आयोग ने चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के विरोध के बाद इस मामले पर फिर से विचार विमर्श करने का फैसला किया।
    पिछले सप्ताह चुनाव आयोग ने कांग्रेस के उस शिकायत का निपटारा किया गया था जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से चुनावी सभा के दौरान आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की बात कही गई थी। कांग्रेस ने अपनी शिकायत में कहा था कि महाराष्ट्र के लातूर, गोंदिया और वर्धा में चुनाव रैली से पहले पीएमओ की तरफ से सूचना एकत्रित करने में नीति आयोग का दुरुपयोग करने की बात कही थी।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में बातचीत करते हुए 12 मई को डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर संदीप सक्सेना ने पत्रकारों को बताया था कि चुनाव आयोग को कांग्रेस की शिकायत में कोई मेरिट नहीं दिखाई दी। संडे एक्सप्रेस को यह पता लगा कि चुनाव आयोग ने अपना फैसला चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के आग्रह के बावजूद दिया था।

    लवासा ने इस मामले में नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगने को कहा था कि क्या उन्होंने गोंदिया, वर्धा और लातूर के कलेक्टरों से सूचना मांगी थी। क्या इस सूचना का प्रधानमंत्री के दौरे के लिए प्रयोग किया गया था। पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस शिकायत को मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा और चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने शिकायत को खारिज कर दिया था।

    इन लोगों का मानना था कि अक्तूबर 2014 से पीएम को चुनावी यात्रा के साथ आधिकारिक यात्रा करने की छूट है। लवासा ने इस पर सवाल उठाए थे कि किस तरह से पूरे तथ्यों के अभाव के बावजूद फैसला लिया जा सकता है।

    (इनपुट जनसत्ता )