मुज़फ्फरूल इस्लाम
घोसी,मऊ। बीएसपी के मण्डल क्वार्डिनेटर चन्द्रशेखर निवासी मखदुमपुर ने पत्रकार वार्ता कर क्षेत्र की घोसी मोहम्दाबाद गोहना रोड़ को लेकर मुखर होते हुए कहा कि मुख्यमंत्री से लगायत लोकनिर्माण से समस्या को अवगत कराने के बावजूद भी बरसात बाद यदि उक्त मार्ग नहीं बनता है तो जन सहयोग से आंदोलन किया जायेगा।ब्लाक के ग्राम पंचायत सोमारीडीह में एक भी विद्यालय नही होने से सर्व शिक्षा अभियान केवल हवा हवाई साबित हो रहा। कठिन सघर्षो में रहते हुए बीएसी द्वारा प्रदत्त पदों से रंज आकर पार्टी छोड़ने के दबाव को लेकर गबन का आरोपी न होने के बावजूद भी फर्जी फसाया गया।जबकि उच्च न्यायालय के वेल आर्डर से भी स्पष्ट है कि उक्त कम्पनी से मेरा कोई सम्बन्ध नहीं है। मिशन 2022 में प्रदेश में सर्वागींण विकास एवं जंगल राज खत्म करते हुए आयरन लेडी बहन कुमारी मायावती को मुख्यमंत्री बनाने हेतु हमसभी दृढ़ संकल्पित है।
Author: M Qaisar Siddiqui
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घोसी,ग्राम पंचायत सोमारीडीह में एक भी विद्यालय न होने से सर्व शिक्षा अभियान हो रहा है हवा हवाई साबित:चन्द्रशेखर
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घोसी,ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को सौंपा 3 सूत्री ज्ञापन
मुजफ्फरुल इस्लाम,घोसी,मऊ। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन घोसी द्वारा गुरुवार को पत्रकारों की सुरक्षा एवं जान माल की हिफाज़त को लेकर तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम तीन सूत्रीय ज्ञापन तहसील अध्यक्ष सुदर्शन कुमार के नेतृत्व में सौपा।जिमसें विगत दिनों गाजियाबाद में पत्रकार विक्रम जोशी की गोली मारकर निर्मम हत्या सहित इधर पत्रकारों पर हमले व फर्जी ढंग से मुकदमा में फँसाये जाने की घटनाओं से देश का चौथा स्तम्भ खतरे में है।तीन सूत्रीय ज्ञापन में पत्रकार विक्रम जोशी के हत्या में शामिल हमलावरों की तत्काल गिरफ्तारी के साथ राष्ट्र द्रोह का मुकदमा करते हुए फाँसी की सजा सुनाई जाय। 25 लाख रुपये मुआवजा के साथ नौकरी एवं परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित हो।पत्रकारों की सुरक्षा के साथ पत्रकारों के साथ कि जाने वाली किसी भी आपराधिक घटना का तत्काल संज्ञान ले कार्यवाही सुनिश्चित हो।ज्ञापन सौपने वालों में अरविंद राय,अशोक श्रीवास्तव, वायुनन्दन मिश्रा आदि शामिल रहे।
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मुख्यमंत्री गहलोत ने विधायकों को छोड़कर सत्ता सूख से संगठन व सांसदो को कभी तरजीह नही दी।
अशफाक कायमखानी।जयपुर।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने खिलाफ विधायको मे बगावत के सूर नही निकलने इसलिए सभी विधायकों को अपने अपने क्षेत्र के पंचायत-निकाय चुनाव की टिकट देने के अलावा पसंद के डिजायर प्रथा के मार्फत सरकारी कार्मिक लगाने के अतिरिक्त सभी तरह के विकास के काम उनकी मर्जी से होने की पूरी छूट दे कर उन्हें भरपूर सत्ता का सूख भोगने की परिपाटी जो 1998 मे डाली वो आज भी जारी कर रखी है। लेकिन अबकी दफा सचिन पायलट के विधायक-मंत्री बनकर सत्ता सूख भोगने की बजाय मुख्यमंत्री बनकर सत्ता अपने हिसाब से चलाने का दावा ठोके रखने का परिणाम यह निकला कि सत्ता के दो पावर सेंटर कायम होने के चलते विधायकों मे मुख्यमंत्री के प्रति आक्रोश लगातार पनपते जाने पर आज पायलट के नेतृत्व मे विधायकों ने राजस्थान मे नेतृत्व परिवर्तन की मांग को लेकर जो कदम उठाया है उससे सरकार लड़खड़ाने लगी है।मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने अब तक के सभी मुख्यमंत्री कार्यकाल मे संगठन के प्रदेश पदाधिकारियों सहित जिलाध्यक्ष व लोकसभा सभा सदस्य या कांग्रेस की तरफ से लोकसभा उम्मीदवार रहे नेताओं को सत्ता सूख से हमेशा कोसो दूर रखने की रणनीति को अपनाये रखा है। इन सब नेताओं के मुकाबले विधायकों को सत्ता पूरी तरजीह देकर सर्वेसर्वा बनाये रहने से कांग्रेस संगठन व नेताओं सहित आम कार्यकर्ताओं मे कांग्रेस की सरकार रहने के बावजूद जब इनकी छवनी जब एक पैसे मे भी नही चली तो उनमे उदासीनता आने से गहलोत के मुख्यमंत्री रहते आम विधानसभा चुनाव होने पर कांग्रेस हमेशा ओधे मुह गिरती आई है।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने नेतृत्व वाली सरकार मे केवल मात्र विधायकों को खूश करने का एक अलग तरह की परिपाटी का जो चलन शुरु कर रखा है जिसके तहत विधानसभा के दोसो कांग्रेस उम्मीदवारो को तो सत्ता मे पूरी तरजीह दी। वही दोसो के मुकाबले कांग्रेस के पच्चीस लोकसभा उम्मीदवारों को रत्ती भर भी तरजीह नही देने का ही परिणाम यह निकला कि आज संकट की घड़ी मे वो सभी पच्चीस उम्मीदवार किसी भी तरह की मुख्यमंत्री के फेवर मे भूमिका निभाते नजर नही आये। या फिर वो सभी भूमिका निभाने मे सत्ता संघर्ष के चले नाटक मे सक्षम नही हो पाये। अगर मुख्यमंत्री गहलोत विधायकों के साथ साथ लोकसभा का चुनाव लड़े कांग्रेस उम्मीदवारों व संगठन के ओहदेदारों को सत्ता सूख मे चाहे विधायकों से कम लेकिन उन्हें भी अहमियत देते तो वो सभी नेता आज उनकी ढाल बनकर संकट के दौर मे साथ खड़े नजर आते।
राजस्थान मे आम विधानसभा चुनाव के पहले होने के कारण अधिकांश लोकसभा उम्मीदवारों ने कांग्रेस के विधानसभा उम्मीदवारों को विजयी बनाने के लिये अपनी पूरी ताकत को झोंक कर कोशिश करने का परिणाम ही आया कि प्रदेश मे कांग्रेस की सरकार गठित हो पाई। इसके विपरीत गहलोत के नेतृत्व मे सरकार गठित होने के बाद जब लोकसभा चुनाव हुये तो उस चुनावों मे विधायक व विधानसभा उम्मीदवारों ने सत्ता के नशे मे सत्ता सूख मे अन्य को भागीदारी ना देने की मानसिकता के चलते लोकसभा चुनाव मे उदासीन रहकर काम किया बताते। अगर उक्त लोग अपने चुनाव की तरह लोकसभा उम्मीदवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर मेहनत करते तो प्रदेश मे बालाकोट-पुलवामा मामले के बावजूद 8-10 कांग्रेस से सांसद विजयी होते। एवं चुनाव हार का मंत अंतर भी निश्चित बहुत कम होता।
कुल मिलाकर यह है कि आठ विधानसभाओं पर बना एक लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाला उम्मीदवार भी अपनी कुछ ना कुछ राजनीतिक हेसियत जरुर रखता होगा। मुख्यमंत्री ने सरकार व अपना नेतृत्व बचाये रखने के लिये समर्थक विधायको को एक पखवाड़े से होटल मे बंद करके रख रखा है। जबकि सचिन पायलट सहित 19 कांग्रेस विधायक नेतृत्व परिवर्तन की मांग को लेकर राजस्थान के बाहर अज्ञात स्थान पर डेरा डाले हुयै है। ऐसे हालात मे मुख्यमंत्री की पहल व पसंद के मुताबिक पायलट को सभी पदो से हटाकर उनकी जगह नया प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया है। पायलट समर्थक दो मंत्रियों को भी मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। पूरी प्रदेश कांग्रेस कमेटी व उसके अग्रिम संगठनों को भी भंग कर दिया गया है। युवा-एनएसयूआई व सेवादल के प्रदेश अध्यक्ष बदल दिये गये है। फिर भी कांग्रेस सरकार पर आया संकट अभी टला नही है। बल्कि दिन ब दिन संकट पेचीदा होता जा रहा है।
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UP:सीबीएसई बोर्ड में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्र छात्राओं को प्राइज़ लाफ़ अज़ीज़िया से सम्मानित किया गया
मुजफ्फरुल इस्लाम
घोसी,मऊ।स्थानीय नगर स्थित अजीजिया कोचिंग सेंटर में बुधवार को सामाजिक दूरी के साथ अजीजिया समारोह का आयोजन किया गया।जिमसें कोचिंग संस्थान में अध्यनरत उन प्रतिभाओं को जो सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन किया उन्हें प्राइड ऑफ अजीजिया अवार्ड से सम्मानित किया गया।संस्थान के छात्र अभिषेक यादव ने 92%,आबिद हुसैन,मो फराज, साहिल खान,हिमांशु मौर्य, अनुपम,अर्चिता सिंह ने 94%मार्क्स हासिल किया ।संस्थान के डाइरेक्टर अजीजुल्लाह अब्बासी ने प्रतिभाओं को अवार्ड देते हुए बताया कि इस वैश्विक महामारी में भी यह संस्थान आधुनिक एवं उच्च क्वालिटी लेवल केसाथ ऑनलाइन क्लासेज संचालित कर रहा है।बड़े शहरों जैसे आधुनिक सुविधाओं के साथ यह संस्थान सतत प्रयासरत रहता है कि इस क्षेत्र से प्रतिभाएं निकले जो पुरे देश मे नाम रोशन करें। यूट्यूब के साथ भी जुड़ कर लाभ लिया जा सकता है।
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राजस्थान:मुस्लिम समुदाय की बेटियों ने सीनियर (आर्ट) परीक्षा परिणाम मे कामयाबी का परचम लहराया।
सुरेय्या ने 98.80 व मुस्कान ने 95 व निमरा ने 95.60 प्रतिशत अं पाये।
।अशफाक कायमखानी।जयपुर।
मुस्लिम समुदाय के शैक्षणिक तौर पर पीछड़े माने जाने वाले कलंक को अब लड़को से कई गुणा आगे बढकर बेटियों के आ रहे परीक्षा परिणामो को देखकर लगता है कि बेटियों ने उस कलंक को मिटाने का अब निश्चय कर ही लिया है।हालही मे माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान के सीनियर कक्षा के परिणामों पर नजर दौड़ाये तो पाते है कि बडी तादाद मे मुस्लिम बेटियो ने 90-95 प्रतिशत अंक ही नही अनेको ने तो 95- से 99 प्रतिशत अंक से पास करते हुये नये कीर्तिमान बनाये। अनेक शिक्षक बताते है कि विज्ञान संकाय मे उक्त तरह के हायर नम्बर मिलते रहने देखा जाता रहा है। पर अब आर्ट विषय मे भी उक्त तरह के हायर अंक पाना बेटियों द्वारा कीर्तिमान कायम करना ही है।
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान द्वारा आज जारी सीनियर आर्ट विषय का परीक्षा परिणाम जारी करने पर प्रांत भर की हजारों मुस्लिम बेटियो ने अच्छे अंक लाकर जो समुदाय के माथे पर अशिक्षा का कलंक मिटाने की सफल कोशिश की है। उनमे से कुछ उदाहरणो पर नजर डालते है तो पाते है कि झालावाड़ जिले के पिड़ावा कस्बे की सरकारी बालिका स्कूल की छात्रा सुरेय्या खान ने 98.80 अंक पाये है। वही सीकर जिले के कासली गावं की बेटी मुस्कान खान ने 95.00 प्रतिशत अंक पाये है। एवं उसी की चचेरी बहन निमरा बानो ने 95.60 प्रतिशत अंक पाये है।
कुल मिलाकर यह है कि सीनियर आर्ट के आज आये परीक्षा परिणाम मे सुरेय्या, मुस्कान व निमरा नामक बेटियां मात्र उदाहरण के तौर पर देखी जा सकती है। हजारो बेटियां ऐसी है जिन्होने 90 प्रतिशत से अधिक अंक पाकर समुदाय के सामने एक नजीर पेश की है कि अगर समाज बेटियो की शिक्षा पर अधिकाधिक फोकस करके उनको भी सुविधाएं व गाईडेंस प्रदान करे तो वो वतन की खिदमात बेहतर ढंग से अंजाम देने को तैयार है।
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घोसी,तालाब में डूब ने से अधेड़ की हुई मौत
मुजफ्फरुल इस्लाम,घोसी,मऊ। स्थानीय कोतवाली क्षेत्र के हाजी पुर मे सोमवार की रात स्पेयर्स पार्ट विक्रेता रामविनय सिंह पुत्र स्व० हिरामन सिंह उम्र 52 वर्ष की दरवाजे के सामने तालाब में डूब जाने से मौत हो गई । जानकारी के अनुसार रामविनय सिंह किसी निमंत्रण से बाइक द्वारा वापस घर लौट रहे थे। घर के पास ही खड़ंजे पर मोड़ होने के करण बाइक असन्तुलित होकर खड़ंजे से फिसल कर पोखरी में जा गिरी।अल सुबह घर के सदस्य ने पोखरे के किनारे उनकी बाइक एवं एक पैर का चप्पल देखा तो शोर मचाया । शोर सुनते ही गाँव के लोग इकट्ठे होकर शव को ढूढने प्रयास किया किन्तु शव मिलने में सफलता नहीं मिल सकी। पुलिस को सूचना देने के उपरांत मौके पर पहुँच पुलिस ने गोताखोरों के मदद से दो घंटे काफी मशक्कत के बाद शव को ढूढ़ निकाला। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।वहीं परिजनों का रो रो कर बुरा हाल हो रहा था।
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दरभंगा:रुमी साहब की मृत्यु या हत्या? डी एम के जांच के आदेश का स्वागत,एसडीपीआई
प्रेस विज्ञप्ति,दरभंगा बिहार
बिरदीपुर दरभंगा के जिला परिषद और मुस्लिम समाज के बड़े कद्दावर नेता श्री जमाल अतहर उर्फ रुमी साहब के घर एसडीपीआई और पाॅपुलर फ्रंट अॉफ इन्डिया के संयुक्त टिम ने परिवार वालों से मिलकर संवेदना व्यक्त की और परिजनों को सांत्वना दियाएसडीपीआई दरभंगा के जिला कमिटी सदस्य मोअज्जम मोखतार ने कहा हालात उस तरफ सोचने पर मजबूर कर रहा है के मृतक की मृत्यु हुई या हत्या? दरभंगा डी एम का इस सम्बन्ध में जांच का आदेश सराहनीय कदम है, लेकिन जांच बिना किसी प्रभाव के पुरी ईमानदारी से सोंपी जाए, जिस तरह कि खबर मिल रही है के मृतक रुमी साहब के कोरोना जांच की रिपोर्ट निगेटिव आइ है तो प्रशासन का मृतक रुमी साहब को जबरदस्ती आनन फानन में दफन करना भी प्रशासन पर सवाल खरा करता है, साथ ही ये डी एम सी एच के स्वास्थ्यकर्मि के बर्ताव का भी डी एम सी एच पर भी प्रश्न चिन्ह खरा करता है-और मृतक की हत्या किये जाने का अंदेशा व्यक्त करता है-इतने बड़े लिडर के साथ जो हुआ क्या उसमें राजनीतिक हस्तक्षेप है? इन सभी चीजों की छानबीन करने की जरूरत है अन्यथा ऐसा जांच नही हुआ तो सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी आॅफइंडिया मामले की सच्चाई व न्याय के लिए संघर्ष करेगी।
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी आॅफ इंडिया डी एम सी एच के डाक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा मृतक जमाल अतहर उर्फ रुमी के परिजनों के साथ मारपीट एवं 2 व्यक्ति को बंधक बनाए जाने के घटना की कड़े शब्दों में निंदा करती है और दोशियों पर जिला प्रशासन द्वारा अविलंब कार्यवाई की मांग करती है।
पाॅपुलर फ्रंट अॉफ इन्डिया मिथिलांचल के अध्यक्ष डाक्टर मोहम्मद महबूब आलम ने कहा कि डी एम सी एच में आए दिन मरीजों और उनके परिवारों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है और फिर डी एम सी एच के दबाव में प्रशासन हमेशा एकतरफा कार्रवाई करता है- डी एम सी एच में गिता देवी को गलत रक्त चढाए जाने के कारण उनकी मृत्यु हो जाना और अब तक मृतक के परिजनों को न्याय और नुकसान के भरपाई के लिए सहायता राशि ना दिया जाना बहुत दुख की बात है, वहीं दूसरी घटना डी एम सी एच में एक नौजात शिशु को आई सी यू में चूहा काट काट कर मौत के घाट उतार देता है और उलटा डी एम सी एच प्रशासन एवं स्वास्थ्यकर्मि पीडित परिवार के साथ दूर व्यवहार करने लगता है पाॅपुलर फ्रंट अॉफ इन्डिया डी एम सी एच प्रशासन एवं जिला प्रशासन पर मरीज और उनके परिजनों के लिए उत्तम स्वास्थ्य प्रबंध करने की मांग करती है
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घोसी,रोडवेज परिसर में भारी जल जमाव से जानलेवा बीमारियों का खतरा मंडराता हुआ
मुजफ्फरुल इस्लाम
घोसी,मऊ। स्थानीय नगर के मधुबन मोड़ स्थित रोडवेज परिसर का हाल इन दिनों किसी झील से कम नही है। बारिश से पूरे परिसर के 90 प्रतिशत हिस्से में जलजमाव होने के कारण बस स्टैंड से यात्रा करने वाले यात्रियों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मूलभूत सुविधाएं न के बराबर है। गंदगी का अंबार बैठने की मुक्कमल व्यवस्था को मुँह चिढा रही तो जल निकासी न होने से परिसर में भारी जल जमाव से जानलेवा बीमारियों के साथ दुर्गन्ध से आने जाने वालों को लोगों को गम्भीर बीमारी का खतरा बरकरार है। प्रधानमंत्री जी का स्वच्छ भारत अभियान के प्रति सरकारी तंत्र ही निष्क्रिय दिख रहा।जल निकासी की समुचित व्यवस्था को लेकर रोड़वेज के अधिकारी तनिक भी सचेत नहीं दिख रहे।नगर के आकिब सिद्दिकी, अधिवक्ता अनिल मिश्रा,अभय तिवारी, खुर्शीद खान,शिवम साहू,आदि ने कहा कि उक्त परिसर मात्र प्राइवेट स्टैंड बन चुका है।सरकारी बसें भी रोडवेज परिसर में न जाकर मुख्यमार्ग से ही निकल जाती है।ऐसे में यात्रियों को यात्रा करने हेतु परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जलजमाव की समस्या ज्यो की त्यों बनी हुई है।
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राजस्थान:सीबीआई को जांच के लिए अब राज्य सरकार से इजाजत लेनी पड़ेगी
आदेश से पहले जांच एजेंसी की टीम गहलोत समर्थक विधायक के घर पहुंची थी
सीबीआई जांच में राज्य सरकार की अनुमति जरूरी किए जाने के बाद पहले दी गईं कई अनुमतियां भी रद्द कर दी गई हैं।
राज्य सरकार अनुमति नहीं देती है तो सीबीआई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है
छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल सरकार और बंगाल में ममता सरकार पहले ऐसा ही आदेश जारी कर चुकी हैंराजस्थान के सियासी संग्राम के बीच अब केंद्र और राज्य सरकार के बीच भी घमासान शुरू हो गया है। राज्य सरकार ने एक आदेश जारी किया है कि सीबीआई को किसी जांच के लिए पहले उसकी इजाजत लेनी होगी। उसके बाद ही सीबीआई कोई एक्शन ले पाएगी। राज्य सरकार की सीनियर डिप्टी सेक्रेटरी रवि शर्मा ने यह आदेश जारी किया है। इससे ठीक पहले सीबीआई की टीम गहलोत समर्थक कांग्रेस विधायक कृष्णा पूनिया के जयपुर स्थित घर पहुंची थी।
राज्य सरकार के इस आदेश के बाद अब सीबीआई किसी केस में सीधे जांच नहीं कर पाएगी। राजस्थान सरकार के गृह विभाग ने यह आदेश जारी किया है। जानकारी अनुसार, परिस्थिति के आधार पर ही सरकार किसी केस में जांच की इजाजत देगी। इसके साथ राज्य सरकार की ओर से पहले दी गई जांच की कई मंजूरियां भी रद्द कर दी गई हैं।
केंद्र और राज्य के बीच टकराव हो सकता है
राज्य सरकार के इस फैसले को मौजूदा सियासी उठापटक से जोड़कर देखा जा रहा है। चर्चा है कि गहलोत सरकार को इस तरह की आशंका है कि केंद्र की भाजपा सरकार कांग्रेस विधायकों पर दबाव बनाने के लिए सीबीआई का इस्तेमाल कर सकती है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी पिछले दिनों जयपुर में आयकर विभाग की छापेमारी के बाद कहा था कि केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों को सक्रिय कर चुकी है।
छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल भी लगा चुका हैं ऐसे प्रतिबंध
सीबीआई को बिना अनुमति के आने से रोकने वाला राजस्थान कोई पहला राज्य नहीं है। इससे पहले छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार और पश्चिम बंगाल में ममता सरकार भी सीबीआई को आने से रोकने का आदेश जारी कर चुकी हैं।
अब सीबीआई क्या करेगी?
अब सीबीआई को जांच के लिए राज्य सरकार की अनुमति लेनी होगी। अगर किसी मामले में सीबीआई जांच करना चाहती है, लेकिन राज्य सरकार अनुमति नहीं देती है तो ऐसी स्थिति में सीबीआई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है।
विधायक कृष्णा पूनिया के घर पर पहुंची सीबीआई
राजस्थान में सीबीआई के अाने पर रोक लगाने वाला आदेश सरकार की तरफ से जारी करने से पहले ही खबर आई थी कि सीबीआई कांग्रेस विधायक कृष्णा पूनिया के जयपुर में जालूपुरा स्थित घर पहुंची। पूनिया के फेयरमोंट होटल पर होने के कारण वे आवास पर नहीं मिलीं, जिसके कारण सीबीआई को खाली हाथ लौटना पड़ा। बताया जा रहा है कि सीबीआई एएसओ विष्णु दत्त शर्मा सुसाइड केस में पूछताछ के लिए पूनिया के घर पहुंची थी।(इंपुट भास्कर)
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मुख्यमंत्री गहलोत के बोल से आज पूरी कांग्रेस की क्षमता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया।
अशफाक कायमखानी।जयपुर।
प्रदेश मे पायलट-गहलोत के मध्य बंटती नजर आ रही कांग्रेस एवं रोजाना घटते राजनीतिक घटनाक्रमो के चलते राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज पत्रकारों से मिलतें हुये राजस्थान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सचिन पायलट पर आरोपो की झड़ी लगाते हुये उनको नकारा व निकम्मा तक बता दिया। निकम्मा व नकारा बताने के बाद कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर भी सवाल उठने लगे है कि कांग्रेस पार्टी के सविधान अनुसार किसी भी प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति करने से पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष व शीर्ष नेतृत्व कण्डीडेट की उपयोगिता व काबलियत का सो दफा आंकलन करके मनोनयन करता है। मुख्यमंत्री गहलोत ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट को नकारा व निकम्मा बताकर एक तरह से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की क्षमता पर ही गम्भीर सवाल खड़ा कर दिया है।मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आज पत्रकारों को सम्बोधित करते हुये अपनी छवि के विपरीत बोलते हुये काफी दवाब मे नजर आये। मुख्यमंत्री ने कहा कि वो राजस्थान मे मुख्यमंत्री बन कर आये है वो कोई बैंगन व सब्जी बेचने नही आये है।
कुल मिलाकर यह है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज की अपनी प्रैस कांफ्रेंस मे सचिन पायलट व भाजपा नेताओं पर अनेक गम्भीर आरोप लगाये है। शाम होते होते भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनीया ने मुख्यमंत्री को चैलेंज करते हुये कहा कि उनके स्वयं व राठौड़ के दिल्ली जाकर बागी विधायकों से मिलने का आरोप सरसर गलत है। चाहे तो इस मामले की सीबीआई जांच करा ली जाये। दुसरी तरफ गहलोत द्वारा पायलट पर लगाये आरोपों पर स्वयं सचिन पायलट ने ज्यादा कुछ नही कहा पर दुख होना बताया। पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह व हेमाराम चोधरी ने वीडियो जारी करके मुख्यमंत्री को घेरते हुये उनके द्वारा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट पर आरोप लगाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।