Author: M Qaisar Siddiqui

  • बाबरी मस्जिद,मस्जिद थी और सदैव मस्जिद रहेगी।आक्रामक क़ब्ज़े से वास्तविकता नहीं परिवर्तित हो जाती।सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाया लेकिन न्याय को शर्मसार किया है:ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

    नई दिल्ली, 4 अगस्त 2020, आज जबकि बाबरी मस्जिद के स्थान पर एक मंदिर की आधारशिला रखी जा रही है, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अपने दीर्घकालिक स्टैंड को दोहराना आवश्यक समझता है कि शरीअत की रोशनी में जहां एक बार मस्जिद स्थापित हो जाती है वह क़यामत तक मस्जिद ही रहती है इसलिए बाबरी कल भी मस्जिद थी और आज भी मस्जिद है और इनशाअल्लाह भविष्य में भी रहेगी। मस्जिद में मूर्तियों को रख देने से, पूजा पाठ आरंभ करने से, लम्बे समय से नमाज़ पर प्रतिबंध लगा देने से मस्जिद की स्थिति समाप्त नहीं हो जाती।

    आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव हज़रत मौलाना मुहम्मद वली रहमानी ने एक प्रेस बयान में कहा कि यह हमेशा से हमारा स्टैंड रहा है कि बाबरी मस्जिद किसी भी मंदिर या किसी हिंदू पूजा स्थल को ध्वस्त करके नहीं बनाई गई थी। नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने भी पुष्टि की कि बाबरी मस्जिद के नीचे खुदाई में जो अवशेष मिले हैं वे बारहवीं शताब्दी की किसी इमारत के थे, बाबरी मस्जिद के निर्माण से चार सौ वर्ष पूर्व इसलिए किसी मन्दिर को ध्वस्त करके मस्जिद का निर्माण नहीं किया गया। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट तौर पर कहा कि 22 दिसंबर 1949 की रात तक बाबरी मस्जिद में नमाज़ होती रही है। सर्वोच्च न्यायालय का यह भी मानना है कि 22 दिसंबर 1949 को मूर्तियों को रखना अवैध था। सर्वोच्च न्यायालय यह भी मानता है कि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी की शहादत एक अवैध, असंवैधानिक और आपराधिक कृत्य था। अफ़सोस कि इन सभी स्पष्ट तथ्यों को स्वीकार करने के बावजूद कोर्ट ने अन्यायपूर्ण निर्णय सुनाया। मस्जिद की ज़मीन उन लोगों को सौंप दी जिन्होंने आपराधिक रूप से मूर्तियों को रखा और इसको शहीद किया।

    बोर्ड के महासचिव ने कहा “चूंकि सर्वोच्च न्यायालय देश की सर्वोच्च अदालत है इसलिए उसके अंतिम निर्णय को स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है हालांकि हम यह अवश्य कहेंगें कि यह एक क्रूरतापूर्ण और अन्यायपूर्ण निर्णय है जो बहुसंख्यकों के पक्ष में दिया गया।” सर्वोच्च न्यायालय ने 9 नवंबर 2019 को अपना फैसला सुनाया लेकिन इसने न्याय को अपमानित किया है। अल्हम्दुलिल्लाह भारतीय मुसलमानों के प्रतिनिधित्व व सामूहिक प्लेटफॉर्म ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य पक्षों ने भी अदालती लड़ाई में कोई कसर नहीं रखी। यहाँ यह कहना अत्यन्त महत्वपूर्ण है कि हिंदुत्व तत्वों का यह पूरा आंदोलन उत्पीड़न, धमकाने, झूठ पर आधारित था। यह एक राजनीतिक आंदोलन था जिसका धर्म या धार्मिक शिक्षाओं से कोई लेना-देना नहीं था। झूठ और उत्पीड़न पर आधारित कोई इमारत देर तक खड़ी नहीं रहती।

    महासचिव ने अपने बयान में आगे कहा कि स्थिति चाहे कितनी भी खराब क्यों न हो, हमें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और हमें अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। हमें विपरीत परिस्थिति में जीने की आदत बनानी चाहिए। स्थिति सदैव एक जैसी नहीं रहती है। अल्लाह तआला क़ुरआन में इरशाद फ़रमाता है { ये समय के उतार चढ़ाव हैं, जिन्हें हम लोगों के बीच प्रसारित करते रहते हैं} इसलिए हमें निराश होने की कदाचित आवश्यकता नहीं है और हमें स्वयं को स्थिति के सामने समर्पण नहीं करना है। हमारे समक्ष इस्तांबुल की आया सोफ़िया मस्जिद का उदाहरण इस आयत की मुंह बोलती तस्वीर है। मैं भारत के मुसलमानों से अपील करता हूं कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले और मस्जिद की भूमि पर मंदिर के निर्माण से हतोत्साहित न हों। हमें याद रखना चाहिए कि तौहीद (एकेश्वरवाद) का विश्व केंद्र और अल्लाह का घर काबा लंबे समय तक बहुदेववाद और मूर्तिपूजा का केंद्र रहा है। अन्ततः मक्का की विजय के बाद प्यारे नबी ﷺ के माध्यम से फिर से तौहीद का केंद्र बन गया। हमारी ज़िम्मेदारी है कि ऐसे नाज़ुक अवसर पर ग़लतियों से तौबा करें, अपने अख़लाक़ और चरित्र को संवारें, घर और समाज को दीनदार बनाएं और पूरे साहस के साथ प्रतिकूलता का सामना करने का दृढ़संकल्प लें।

  • हरियाणा:घासेड़ा पहुंचे आफताब आलम,मोब लिंचिंग पर सीएम से मांगा जवाब

    हरियाणा कांग्रेस विधायक दल के उप नेता व नूह से विधायक चौधरी आफताब अहमद व पीसीसी सदस्य व उनके अनुज महताब अहमद रविवार को घासेड़ा पहुंचे और मोब लिंचिग के पीड़ित लुकमान व उनके परिवार से मुलाकात की व उन्हें आश्वस्त किया कि उन्हें न्याय दिलाने के लिए वो प्रदेश सरकार से लड़ाई लड़ेंगें व दोषियों को सजा दिलाने का काम करेंगे।

    बता दें कि बीते शुक्रवार गुड़गांव में असामाजिक तत्वों की भीड़ ने मेवात के लुकमान पर लाठी डंडों व हथोडियों से हमला कर दिया था, जिस दौरान पुलिस भी वहां मौजूद थी।

    सीएलपी उप नेता आफताब अहमद ने पीड़ित के परिवार से कहा कि वो उनके साथ खड़े हैं और न्याय दिलाने में हर संभव सहयोग करेंगे। आफताब अहमद ने कहा कि पूरा इलाका पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है।

    सीएलपी उप नेता आफताब अहमद ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि गांधी ग्राम घासेड़ा के लुकमान पर गलत विचारधारा से प्रभावित लोगों द्वारा हमला ना केवल लुकमान के शरीर पर हमला है बल्कि गांधी की विचारधारा व देश के लोकतंत्र पर गोडसे वादी विचारधारा का हमला है। सबसे बड़ी हैरानी व शर्म की बात ये है कि पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में ये दुस्साहस हुआ है, जो प्रशासन व सरकार को भी सवालों के घेरे में लाता है।

    आफताब अहमद ने कहा कि जिस दिन
    ये मामला हुआ उसी दिन गांव के लोगों ने उनके संज्ञान में ये मामला लाया, आफताब अहमद ने पुलिस कमिश्नर के के राव से तुरंत बात की और कानूनी कार्रवाई करने की बात उनसे कहा, लेकिन एफआईआर में पूरी धाराएं तक नहीं लगाई हैं और ना ही सरकार ने पीड़ित का इलाज कहीं कराया, ये बहुत शर्मनाक है। उन्होंने पुलिस कर्मचारियों पर भी एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। आफताब अहमद ने कहा कि मुख्यमंत्री मेवात को जवाब दें कि पिछले छह सालों में ऐसे मामले मेवातियों से क्यूं हुए?

    कांग्रेस विधायक दल के उप नेता आफताब अहमद ने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार दोषियों पर कार्रवाई करे, पीड़ित परिवार को न्याय दे अन्यथा मेवात अब सरकार के खिलाफ आंदोलन की राह पर जाने की बात गंभीरता से सोच सकता है। क्योंंकि लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं। इस बीजेपी सरकार में गैर सामाजिक तत्व ऐसे कामों में लगे हैं जो आपसी भाईचारे को खराब करने की दिशा में होते हैं।

    नूह विधायक चौधरी आफताब अहमद ने कहा कि कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही है, मेवात में प्रदेश में सबसे अधिक गौ पालक हैं और मेवात के लोग अपने मवेशियों को अपने बच्चों की तरह ही प्यार करते हैं।

    आफताब अहमद ने कहा कि वो निजी रूप से भी और पूरा इलाका भी पीड़ित परिवार के साथ हर तरीके से खड़े हैं और मदद करेंगें।

    कांग्रेस विधायक दल के नेता आफताब अहमद ने मांग की है कि मोब लिंचिग के लिए कठोर से कठोर कानून बनाया जाए। इस दौरान गांधी ग्राम घासेड़ा के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

  • मुख्यमंत्री गहलोत समर्थक दस निर्दलीय विधायको के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जा सकता है।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    दलबदल कानून के तहत राजनीतिक दल से जीते विधायको को एक कानून के दायरे मे बांधते हुये विधायक काल पुरा करने तक उन्हें शर्तो से बांधा गया है। उसी तरह निर्दलीय विधायकों को भी कुछ शर्तों के तहत बांधा गया है। निर्दलीय विधायक किसी भी राजनीतिक दल मे शामिल नही हो सकता है।वह उस कार्यकाल मे निर्दलीय विधायक बने रहकर ही अपना कार्यकाल पुरा कर सकता है।

    राजस्थान के वर्तमान कुल तेराह निर्दलीय विधायको मे से दस निर्दलीय विधायक गहलोत घटक के समर्थन मे। उनको इस तरह की आजादी भी मिली हुई है कि वो किसी भी दल का समर्थन कर सकते है लेकिन किसी दल विशेष के पार्टी स्तर के कार्यक्रमो मे भाग नही लेने की शर्त उन पर लागू होना बताते है। जबकि संयम लोढा, महादेव सिंह, बाबूलाल नागर , राजकुमार, आलोक बेनीवाल, बलजीत यादव, कांतिलाल मीणा सहित सहित दस निर्दलीय विधायक मुख्यमंत्री निवास व होटल के बाड़ेबंदी मे आयोजित होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक मे शामिल श होने से प्रतीत होता है कि वो निर्दलीयों विधायक की बजाय अन्य दल की कार्यवाही मे हिस्सा लेकर वो किसी खास के विधायक होना अधिक पसंद कर रहे है।

    कुल मिलाकर यह है कि कांग्रेस विधायक दल की बैठको मे दस निर्दलीय विधायकों के शामिल होते रहने को लेकर कुछ लोग उनकी सदस्यता को खत्म कराने को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकता है।

  • बसपा विधायको के विलय प्रक्रिया की खामियां राजस्थान कांग्रेस सरकारी के गले की फांस बना।

    ।अशफाक कायमखानी।
    जयपर: कहते है कि जब किसी की चलती रहती है तो हाथी भी आसानी से निकल जाता है। लेकिन जब कानून के दावपेंच की उलझन मे कोई घटना उलझ जाये तो मानो किड़ी का भी बचकर निकलना मुश्किल हो जाता है।उसी तरह 2008 की तरह इस दफा भी गहलोत सरकार द्वारा बसपा के सभी छ विधायको के कांग्रेस मे मिलाने को लेकर अब जाकर विलय प्रक्रिया के कानून के दावपैच मे उलझना कांग्रेस के गले की फांस बनता नजर आ रहा है। जो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिये ना उगलते बन रहा है ओर नाही निगलते बन रहा है।
    राजस्थान के बसपा के सभी छ विधायको के कांग्रेस मे विलय को लेकर उठ रहे सवालो का जवाब मुख्यमंत्री गहलोत कोई कानूनी दलील से ना देकर राज्यसभा मे टीडीपी के चार सदस्यों के भाजपा मे शामिल होने का बार बार उदाहरण देकर अपना बचाव करते नजर आ रहे है। इस मसले पर कानून के अनेक जानकारों से बात करने पर अनेक रोचक तथ्य निकल कर आ रहे है। जिनके बाद लगता है कि उक्त मामले को लेकर जो माननीय सर्वोच्च न्यायालय का जजमेंट आयेगा वो एक अलग न नई नजीर बनेगी।
    बसपा के छ विधायको के विलय प्रक्रिया जैसे अनेक विवादो को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का जिन जिन लोगो ने अबतक दरवाजा खटखटाया है वो सभी व्यक्ति विशेष ने खटखटाया है। अब पहली दफा व्यक्ति विशेष की बजाय किसी राष्ट्रीय पार्टी ने अपने विधायको की विलय प्रक्रिया के विरोध को लेकर दरवाजा खटखटाया है। जिस मामले मे काफी जान बताते है। दुसरा पहलू यह है कि राष्ट्रीय पार्टी के विधायक अगर किसी अन्य दल मे शामिल होते है तो उनको पहले अलग पार्टी का विधीवत गठन करना होता है फिर पार्टी को चुनाव विभाग मे रजिस्ट्रड करके उसको राजनीतिक दल के रुप मे मान्यता दिलवाने के बाद पार्टी का किसी अन्य पार्टी मे विलय किया जा सकता है। उक्त प्रक्रिया को राजस्थान के सभी छ:बसपा विधायको ने अपनाया नही है।
    कुल मिलाकर यह है कि राजस्थान मे गहलोत सरकार के राजनीतिक संकट के भंवरजाल मे फंसने के बाद आपसी आरोप-प्रत्यारोप लगाने के अलावा विभिन्न मसलो को लेकर अदालत के दरवाजे तक विवाद पहुंच चुके है। जिनमे से बसपा विधायको के कांग्रेस मे शामिल होने का विवाद कांग्रेस की गले की फांस बनता नजर आ रहा है। अगर विधानसभा सत्र के पहले अदालत का अंतरिम आदेश बसपा विधायको को मतदान से अलग रखने का आता है तो गहलोत सरकार के लिये यह बडा झटका साबित हो सकता। वही मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय पार्टी के विधायको के किसी दूसरे मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल मे विलय करने के विरोध मे पार्टी द्वारा अदालत का दरवाजा खटखटाने को लेकर आने वाला जजमेंट भारत के राजनीतिक इतिहास मे एक नई नजीर बन सकता है।

  • अशोक गहलोत के अपने आपको मुख्यमंत्री बनाये रखने की जीद के चलते दर्ज रपट मे दफा 124-A की मामूली चूक से राजस्थान का खेल बिगड़ा।

    अशफाक कायमखानी।
    जयपुर: पार्टी मे पनपने वाले अपने कम्पिटिटर को योजनाबद्ध तरीके से राजनीतिक रुप से निपटाने के जादूगर के तौर पर मशहूर अशोक गहलोत अपने आपको प्रदेश मे सर्वेसर्वा बनाये रखने के लिये जो चाले आज तक चलते रहे है उनमे उनमे अक्सर सफल होते रहने से उत्साहित होने के कारण अबकी दफा अपने साथी तत्तकालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को राजनीतिक रुप से निपटाने की लम्बे समय से कोशिश करने के चलते उनके खिलाफ दर्ज रपट मे 124-A देश द्रोह लगवाने की मामूली चूक व पायलट के धेर्य व उठे कदम का आंकलन ठीक से नही करने की चूक के चलते मुख्यमंत्री गहलोत को आज यह मुश्किल हालात राजनीतिक जीवन मे पहली दफा देखने पड़ रहे है। मोजुदा राजनीतिक संकट मे उनकी कथित तौर पर अबतक बनाई जाती रही गांधीवादी छवि को भी भारी धक्का लगने के साथ ही उनके केवल स्वयं को मुख्यमंत्री पद पर बनाये रखने के लिये वो सबकुछ राजनीतिक रुप से करने की जीद पर अड़े रहने वाले एक अलग छवि के नेता के तौर पर प्रचलित करके उनको रख दिया है।

    मुख्यमंत्री गहलोत से मिलने के लिये मंत्रियो व उनके दल के विधायको को कई दिनो तक मशक्कत करनी होती थी। आज उपजे राजनीतिक संकट मे समय ने क्या पलटी मारी है कि बाड़ेबंदी मे बंद समर्थक विधायकों से वो स्वयं होटल जाकर साथ बैठ रहे है ओर होटल मे सो रहे है तथा मान मनुहार करने के अलावा उनके बताये कार्यो को हवा की तरह निपटाये जा रहे है। होटल की बाड़ेबंदी मे बंद विधायको की पसंद अनुसार रोजाना अधिकारियों की तबादला सूचीया आने की चर्चा आम जबान पर है। जिस आदेश केनिकलवाने के लिये विधायकों के दौड़ लगाते लगाते उनके जूते घिस जाया करते थे वोही आदेश अब होटल मे बंद विधायकों की पसंद अनुसार जारी हो रहे बताते है।

    राजनीतिक टिप्पणी कार बताते है कि एक पंखवाड़े पहले राज्यसभा चुनाव मे कांग्रेस के खाते मे 123 मत पड़ने के बाद अचानक मुख्यमंत्री गहलोत को पार्टी के अंदर अपने कम्पिटिटर पायलट को कुचलने के लिये महेश जौशी द्वारा ऐसीबी व एसओजी मे रपट विभिन्न धाराओं के साथ 124-A मे दर्ज करवाने की जल्दबाजी करने की जरूरत क्यो पड़ी। साथ ही सचिन पायलट व दो मंत्रियों को बरखास्त करने की जल्दबाजी से लगता है कि गहलोत ने यह सबकुछ करने का मन बहुत पहले से बना रखा था। लेकिन यह सबकुछ अब सूलह सफाई मे सबसे बडी बांधा बनता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री को सोचना चाहिये था कि सभी नेता ताकत से कुचले नही जा सकते है। कभी कभार कछुआ व खरगोश की दौड़ वाली कहानी की भी पुनरावृति होती है।

    मुख्यमंत्री गहलोत व दिल्ली हाईकमान मे उनके खास पदाधिकारी साथियो का समर्थन पाकर व दर्ज रपट के बावजूद जब पायलट खेमा दवाब मे आता नही दिखने के बाद जब विधानसभा सत्र मे पायलट समर्थक विधायकों द्वारा भाग लेने की घोषणा से हाईकमान के हाथ-पैर फूलने लगे है। सदन मे गहलोत खेमा हारे या सचिन पायलट खेमा हारे, तो उस स्थिति मे हारेगी तो कांग्रेस ही। राजस्थान मे अगर ऐसी नजीर पड़ती है तो वो नजीर कांग्रेस को अन्य प्रदेशो मे भी परेशान कर सकती है। ऐसे हालात को भांपकर दिल्ली के जो नेता पहले गहलोत से मिलकर पायलट खेमे को कुचलने की बात करते थे वो नेता ही अब बीच का रास्ता निकलने की भागदौड मे लगे हुये है। अगर समझोता होता है तो उस स्थिति मे एकदफा गहलोत को मुख्यमंत्री पद से हटना होगा ओर पायलट को भी पहले हट चुके पदो से अभी भी दूर होने पर हां करनी होगी। गहलोत के पास उपरी तौर पर 99 के बहुमत का आंकड़ा नजर आने मे काफी पोल होने का स्वयं गहलोत को भी अहसास है। वही हाईकमान भी उस खतरे का भलीभांति भांप चुका बताते है।

    कुल मिलाकर यह है कि अपनी आदत के मुताबिक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा पार्टी के अंदर मोजूद अपने कम्पिटिटर को कुचलने के लिये पावर का बेजा उपयोग करते हुये 124-A मे उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश का अहसास पायलट समर्थको को समय रहते होने के बाद उनके राजस्थान छोड़कर SOG व ACB की पहुंच से दूर चले जाने से गहलोत को काफी धक्का लगा है।आहूत विधानसभा सत्र मे पायलट समर्थक विधायकों के भाग लेने की घोषणा के बाद कांग्रेस नेताओं के हाथ-पैर फूलने लगे है। वो अब हर हाल मे बीच का रास्ता निकालने मे भागदौड करने लगे है। पर उस निकाले जाने वाले रास्ते पर गहलोत व पायलट का सहमत होना राजनीतिक संकट से कांग्रेस को उभारने के लिये काफी निर्भर करेगा।

  • जैसलमेर मे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मीडिया से खुलकर बात की।

    अशफाक कायमखानी।जैसलमेर।
    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जैसलमेर मे अपने समर्थक विधायको की बाड़ेबंदी करने के बाद आज मीडिया से बात करते हुये कहा कि ऐसे मौके पर हम आए हैं जब ईद भी है और राखी भी आ रही है, जो बहुत बड़े त्यौहार होते हैं। आप मजबूरी देखिए डेमोक्रेसी को बचाने के लिए क्या-क्या नहीं करना पड़ रहा है। देश के अंदर हालात बहुत गंभीर हैं पूरे मुल्क में, लोकतंत्र खतरे के अंदर है सभी तरह से। जो फैसले कर रही है भारत सरकार आप देख रहे हो क्या स्थिति बन गई है देश के अंदर और सरकारें एक के बाद एक चुनी हुई सरकारें जो हैं, चाहे वो मणिपुर हो, गोवा हो, अरुणाचल प्रदेश हो, कर्नाटक सबको मालूम है क्या हुआ, मध्यप्रदेश में क्या हुआ। इसलिए मैं बार-बार बोलता हूं हालात बड़े गंभीर हैं देश के, तो राजस्थान की जनता ने जो साथ दिया है हमारा आज घर-घर में चर्चा है कि चुनी हुई सरकार हमारे द्वारा, बीजेपी कौन होती है गिराने वाली? सरकार कांग्रेस की बनती है,

    भारतीय जनता पार्टी की बनती है, कोई दिक्कत नहीं है। कभी परंपरा रही नहीं है कि हम उनकी सरकार को गिराने के लिए षड्यंत्र करें, हमने कभी नहीं किया, बल्कि रोका हमने, शेखावत जी के वक्त में हमने रोका, जो षड्यंत्र कर रहे थे उनकी अपनी ही पार्टी के, मैंने जाकर कहा गवर्नर साहब को, हम इसको लाइक नहीं करते हैं। प्रधानमंत्री जी को मैंने कहा नरसिम्हा राव जी को कि ये जो हमारी पार्टी के कुछ लोग लगे हुए हैं इन कामों में, ये लोकतंत्र के खिलाफ में हैं, हमारी परंपरा अलग रही है। फिर भी दुर्भाग्य से इस बार बीजेपी का खेल बहुत बड़ा है हॉर्स ट्रेडिंग का क्योंकि खून उनके मुंह लग चुका है कर्नाटक के अंदर, मध्यप्रदेश के अंदर, इसलिए वो प्रयोग यहां कर रहे हैं, पूरा गृह मंत्रालय इस काम में लग चुका है। धर्मेंद्र प्रधान जी की तरह कई मंत्री लगे हुए हैं, पीयूष गोयल जी लगे हुए हैं, कई नाम छुपे रुस्तम की तरह भी वहां पर हैं, हमें मालूम है। हम किसी की परवाह नहीं कर रहे हैं, हम तो लोकतंत्र की परवाह कर रहे हैं। हमारी लड़ाई किसी से नहीं है, राहुल गांधी जी ने कहा था एक बार गुजरात के अंदर कि विचारधारा आरएसएस की, बीजेपी की रहेगी देश के अंदर, हमें ऐतराज़ भी नहीं है। लड़ाई होती है लोकतंत्र में विचारधारा की, नीतियों की, कार्यक्रमों की होती है। लड़ाई ये नहीं होती है कि आप चुनी हुई सरकार को बर्बाद कर दो, उसको टॉपल कर दो, फिर लोकतंत्र कहां बचेगा? लड़ाई हमारी लोकतंत्र को बचाने के लिए है, व्यक्तिगत किसी के खिलाफ नहीं है। मोदी जी को चाहिए, प्राइम मिनिस्टर हैं वो, दो बार उनको मौका दिया है जनता ने, थाली बजवाई, ताली बजवाई, मोमबत्ती लगवाई, लोगों ने उनकी बात पर विश्वास किया, ये बहुत बड़ी बात है, उन प्रधानमंत्री को चाहिए, जो कुछ तमाशा हो रहा है राजस्थान के अंदर, उसको बंद करवाएं। हॉर्स ट्रेडिंग की रेट बढ़ गई है, जैसे ही डिक्लेयर हुआ विधानसभा का सत्र और रेट बढ़ा दी उन्होंने, आप बताइए क्या तमाशा हो रहा है? आज हर नागरिक का कर्त्तव्य है देश के अंदर-प्रदेश के अंदर, आप लोगों का भी कर्त्तव्य भी है मीडियावालों का भी, सच्चाई का साथ दो, इनको सबक ऐसा मिले राजस्थान से, आगे ये भविष्य में कोई गवर्नमेंट टॉपल इस रूप में करने की हिम्मत नहीं करें, ये मेरा मानना है।

    सवाल- दूसरे खेमे में वैसे तो शान्ति है पर ट्वीट पॉलिटिक्स हो रही है, गजेंद्र सिंह लगातार ट्वीट कर रहे हैं?
    जवाब- देखिए वो तो खाली झेंप मिटा रहे हैं, उनको इस्तीफा देना चाहिए खुद को ही, जो आदमी पकड़ा गया हो ऑडियो टेप के अंदर, सरकार को टॉपल करने के षड्यंत्र में शामिल हो और उनके खिलाफ पहले से ही कई मुकदमे चल रहे हैं, गरीबों का पैसा लूट लिया है राजस्थान के अंदर। गरीब चाहे किसी भी कौम का है, गांव-गांव में इंतज़ार कर रहा है कब मुझे पैसा वापस मिलेगा, जिस राज्य में गजेंद्र सिंह शेखावत साहब के जो दोस्त लोग हैं उन सबने मिलकर, इनका खुद का नाम भी आ रहा है, वो संजीवनी कॉपरेटिव सोसायटी नाम आ रहा है, कोर्ट ने भी आदेश जारी कर दिए हैं, अब मॉरल रूप से उनको इस्तीफा देना चाहिए और उनके ट्वीट में भी दम नहीं है।

    सवाल- सर कितने विधायकों का समर्थन है आपको?
    जवाब- 200 लोगों का।

    सवाल- इस बार कह रहे हैं कि अशोक गहलोत का स्वभाव बदला हुआ है, आमतौर पर कूल रहने वाले अशोक गहलोत अग्रेसिव हैं?
    जवाब- कहां मैं अग्रेसिव हूं, मैं बड़े प्यार से मोहब्बत से बात करता हूं, आदर करता हूं केंद्रीय मंत्रियों का चाहे वो किसी पार्टी के हों, उसमें कोई कमी नहीं है और मैं मुस्कुराता हूं तो मुझे गॉड गिफ्टेड है, मैं क्या कर सकता हूं?

    सवाल- सर माफ करने की प्रवृत्ति आपकी रही है। अगर उस खेमे से कुछ लोग आते हैं तो क्या माफ किया जाएगा आपकी तरफ से?
    जवाब- ये तो हाईकमान पर निर्भर करता है, हाईकमान अगर उनको माफ करती हैं तो मैं गले लगाऊंगा सबको, मेरा कोई प्रेशर पॉइंट नहीं है, मुझे पार्टी ने बहुत कुछ दिया है, विश्वास किया है मुझपर, मैं विभिन्न पदों पर रहा हूं, 3 बार केंद्रीय मंत्री रहा हूं, 3 बार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहा हूं, 3 बार AICC महामंत्री रहा हूं और 3 बार मैं मुख्यमंत्री बना हूं, मुझे क्या चाहिए? मैं जो कुछ कर रहा हूं सेवा के लिए कर रहा हूं, पब्लिक सेवा के लिए कर रहा हूं और जो हाईकमान तय करेगा मुझे किसी में ऐतराज़ नहीं है।

    सवाल- सतीश पूनिया ने सवाल उठाया है कि जयपुर से जैसलमेर शिफ्ट हो गए, इनको कहीं और ले जाते डर था तो?
    जवाब- क्या है कि ये लोग नए-नए नेता बने हैं, ये वसुंधरा जी से टक्कर लेना चाहते हैं। तो वसुंधरा जी से टक्कर लेने के लिए क्या है इनमें आपस में प्रतिस्पर्धा है, राठौड़ साहब में, पूनिया साहब के अंदर, गुलाबचंद कटारिया जी भले आदमी हैं, थोड़ा कम बोलते हैं, मीडिया के सामने आते हैं तब वो हमें गाली-गलौज करते हैं, तो इनमें कोई दम नहीं है किसी में भी और वसुंधरा जी पता नहीं वो कहां गायब हो गई हैं।

    सवाल- सर आप ये कह रहे हैं कि भाजपा का ये पूरा खेला षड्यंत्र है लेकिन ये भी बात कही जा रही है कि प्रदेश की भाजपा के शीर्षस्थ नेता कहीं न कहीं आपकी सरकार बचाने में आपके साथ में हैं?
    जवाब- आपकी जानकारी में है तो मुझे बताइए फिर मैं उनसे संपर्क करूं।

    सवाल- सर प्रधानमंत्री को शिकायत की थी आपने उसका कुछ जवाब दिया प्रधानमंत्री जी ने, चिट्ठी भी लिखी थी आपने?
    जवाब- मैंने उनको बता दिया, जब असेंबली बुलाई नहीं जा रही थी तब मैंने अवगत करवा दिया, अब आगे तो वो उनके ऊपर है। एक मैं मांग करना चाहूंगा, आज ही मैंने तय किया है, प्रधानमंत्री जी को मैं एक पत्र भी लिखूंगा कि एक और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करो आप देश के मुख्यमंत्रियों के साथ में क्योंकि कोरोना के मरीज बढ़ रहे हैं देश के अंदर-प्रदेश के अंदर। प्रदेश में हमने बहुत शानदार व्यवस्था कर रखी है, आज जो संख्या मरीजों की बढ़ रही है पॉजिटिव केसेज़ की, चिंता करने की इसलिए आवश्यकता नहीं है। कई राज्य तो टैस्ट ही नहीं कर रहे हैं। पहले हमारे यहां पर सुविधा नहीं थी टैस्टिंग की, पुणे और दिल्ली भेजते थे हम टैस्टिंग के लिए, आज हमारे यहां 40 हजार टैस्ट पर डे हो सकते हैं, ये कैपेसिटी हो गई है। टैस्टिंग हमने इसलिए बढ़ाई है, एक थ्योरी है, अगर आप टैस्टिंग बढ़ाओगे, वहां तक पहुंचोगे जो आखिरी मरीज है या पॉजिटिव है, इलाज शुरु कर दोगे तो वो आगे नहीं फैलाएगा, इसलिए हमने टैस्टिंग बढ़ाई है। संख्या बढ़ रही है पर मृत्युदर 1 पर्सेंट से भी कम हो गई है यहां पर, देश के अंदर पहला राज्य राजस्थान है जहां पर मृत्युदर 1 पर्सेंट से कम हो गई है। रिकवरी रेट हमारे यहां शानदार है, डबलिंग रेट यहां अच्छी है, इलाज शानदार हो रहा है, हमारे यहां जो दवाइयां हैं, प्लाज्मा थैरेपी शुरु की है हमने जयपुर में, जोधपुर में, उदयपुर में, बीकानेर के अंदर वो बहुत कामयाब हुई है, सभी तरह से आज पूरे देश में दुनिया में राजस्थान की चर्चा हो रही है जो हमने मैनेजमेंट किए हैं। संख्या इसलिए बढ़ रही है क्योंकि हमने बहुत बड़ी तादाद में, 25 हजार के लगभग हम टैस्ट करवा रहे हैं, कई राज्य तो 10 हजार भी नहीं करवा पा रहे हैं। इसलिए हमने तो ऑफर किया है दूसरे राज्यों को, अगर आपको जरूरत है तो हम आपको 5 हजार टैस्ट पर डे राजस्थान में करके देगी सरकार, आपकी जनता के लिए देगी, हमें खुशी होगी।

    सवाल- सर जैसलमेर में विधायकों को लाए हैं?
    जवाब- आप सबको मालूम है, जब मैं आता हूं तो आपके चेहरे भी खिल जाते हैं, मेरा भी चेहरा खिल जाता है।

    सवाल- सर तनोट माता में आपकी गहरी आस्था है, क्या तनोट माता मंदिर भी ले जाएंगे?
    हमारे मेंबर्स कई पहली बार आए हैं जैसलमेर, सब तनोट भी जाएंगे, और जगह भी जाएंगे, वो उनपर निर्भर करता है। हमारे यहां उनकी तरह बंदिश नहीं है। टेलीफोन छीन लिए सबके, बात नहीं कर सकते, हमारे यहां टेलीफोन भी, आना-जाना भी सब जारी रखा।

  • मुसलमान देश के लिए हमेशा कुर्बानी देने को तैयार है : शाही इमाम पंजाब

    – लुधियाना की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में सोशल डिस्टेंस से ईद की नमाज अदा की गई

    लुधियाना 1 अगस्त (मेराज़ आलम ब्यूरो रिपोर्ट ) : करोना वायरस के संकट के मद्देनजर सोशल डिस्टेंस के साथ आज यहां फील्ड गंज चौक स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद समेत अन्य सभी मस्जिदों में ईद उल अजहा (बकरा ईद) कि नमाज अदा की गई। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री भारत भूषण आशू, लोकसभा सदस्य स. रवनीत सिंह बिट्टू, गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब के प्रधान सरदार प्रितपाल सिंह, विधायक सुरिंदर डावर, श्री राकेश पाण्डे, श्री संजय तलवार, श्री कुलदीप सिंह वैद, पूर्व कैबिनेट मंत्री श्री हीरा सिंह गाबडिय़ा ने बधाई संदेश भेजा। ईद के अवसर पर संबोधन करते हुए शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कहा कि आज का दिन हम अल्लाह के प्यारे नबी हजऱत इब्राहीम अलहिस्सलाम की याद में मानते हैं जिन्होंने इंसानों को यह सबक दिया कि अगर वक़्त आए तो अपनी जान से प्यारी चीज भी अल्लाह की राह में कुर्बान करने से ना घबराओ, शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान लुधियानवी ने कहा कि दीन-ए-इस्लाम की इसी प्रेरणा से भारत के मुसलमानों ने देश को आज़ाद करवाने के लिए अंग्रेजों से टक्कर लेते हुए हजारों कुर्बानियां दी थी।

    उन्होंने कहा कि आज भी अगर देश को जरूरत पड़ी तो मुसलमान कुर्बानी देने को तैयार है। शाही इमाम ने कहा की आज का दिन बरकत और रहमत वाला है, दुआ कबूल होती है और अल्लाह का हुक्म है कि ईद के दिन गरीबों और जरुरतमंदों की मदद की जाए। शाही इमाम ने नमाजियों से कहा कि आज ईद के दिन इस बात का ख्याल रखा जाए कि कोई भी पड़ोसी चाहे वह किसी भी धर्म का हो भूखा ना रहे।

    इस अवसर पर नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी ने कहा कि इस्लाम के पर्व इबादत और नेकी की राह दिखाते हैं हम साल भर रोजाना पांच नमाज अदा करते हैं और ईद के दिन छे नमाज अदा करते है। उस्मान लुधियानवी ने कहा कि कुर्बानी के इस दिन हम सब इस संकल्प को दोहराते हैं कि अगर देश और कौम को जरुरत पड़ी तो हम पीछे नहीं रहेंगे। इस अवसर पर पंजाब पुलिस की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किया गए थे। डीसीपी लॉ एंड आर्डर श्री अश्वनी कपूर, एडीसीपी 1 दीपक पारेख, एसीपी सेन्ट्रल सरदार वरियाम सिंह विशेष तौर पर उपस्थित रहे।

    ईद उल अजहा पर संबोधन करते हुए शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी।

    नमाज अदा करवाते नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उस्मान लुधियानवी।

    सोशल डिस्टेंस से अपनी बारी का इंतजार करते हुए नमाजी।
    नमाजियों को सैनिटाइजर कर बुखार चेक कर जामा मस्जिद में एंट्री करवाते प्रबंधक।

  • जानिए मुसलमान कैसे और क्यों मनाते हैं ईद उल अजहा (बकरा ईद):खुर्रम मलिक

    कोरोना वायरस की वजह से आज पुरा विश्व एक अजीब सी परिस्थिति से गुज़र रहा है. और इस महामारी से झूझते हुए आज पूरे चार महीने गुज़र चुके हैं. और इस का असर हर ओर देखा जा सकता है. अबतक हमारे देश में इस की वजह से हज़ारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. हालात यह हो चुके हैं के देश में कोरोना केस की संख्या मोदी जी के जुमले की तरह 15 लाख पार कर चुका है.बीच में अनलाक की प्रक्रिया के तहत आम जीवन पटरी पर लौटती दिख रही थी और ऐसा लग रहा था के अब इस बीमारी से हमारा देश मुक्त हो जाएगा परंतु बढ़ते केस की वजह कर देश के कई राज्यों में फिर से लाक डाउन करना पड़ा. हमारे राज्य बिहार में भी ऐसा होता लग रहा है. यह बात अलग है के इस लेख को लिखे जाने तक ऐसी कोई आधिकारिक रिपोर्ट नहीं आई है के किया 1 अगस्त से फिर से 15 दिनों का लाक डाउन होगा या नहीं? लेकिन कोरोना वायरस की गंभीरता को देखते हुए ऐसा लगता है के ईद उल फ़ितर की तरह ईद उल अज़्हा की नमाज़ भी घरों में ही पढ़नी होगी .फिर से इस महामारी की वजह से स्कूल कॉलेज, बाज़ार बंद हैं वहीं दूसरी ओर मस्जिद मंदिर गिर्जा गुरुद्वारा भी बंद पड़े हैं. और ऐसे में मुसलमानों का पवित्र महीना ईद उल अज़्हा भी आ चुका है. और जैसा के सब को पता है के मौजुदा वक़्त कोरोना का है लेकिन ऐसे में ही नमाज़ भी पढ़नी है. तो जैसा के हमने ईद उल फ़ितर पर भी नमाज़ का तरीक़ा बताया था. इसी लिये ईद उल अज़्हा पर भी हम ने सोचा के आप लोगों को तरीक़ा बताया जाए. क्यों के ईद उल फ़ितर पर हमारे लेख को आप सब ने बहुत पसंद किया था.
    उम्मीद की जा रही है के 1 अगस्त शनिवार को मुसलमानों का पवित्र त्यौहार ईद उल अज़्हा मनाया जाएगा.

    ईद उल अज़्हा के दिन सुबह सवेरे उठना , मिसवाक(दतमन) करना, नहाना, खूशबू लगाना, अपनी हैसियत के हिसाब से अच्छा कपडा़ पहनना मुसतहब है.
    ईद की नमाज़ में अज़ान और तकबीर नहीं कही जाती है.
    घर में मिंबर की जगह कुर्सी इस्तेमाल कर सकते हैं. और अगर किसी को खु़तबा नहीं आता हो तो इस के बगै़र भी नमाज़ पढी़ जा सकती है…

    ईद की नमाज़ के लिये इमाम के अलावा तीन बालिग़ आदमी का होना ज़रूरी है. अगर य भी मुम्किन ना हो तो अलग से दो या चार रकत नफ़िल नमाज़ पढ़ना है.

    लेकिन सब से पहले इस के इतिहास पर कुछ बात कर लेते हैं.
    आखि़र किया है ईद उल अज़्हा का इतिहास?
    इस्लाम धर्म में इस का किया महत्व है और मुसलमान इसे क्यों मनाते हैं? आयिये जानते हैं.

    जैसा के हम सब जानते हैं कि यह पवित्र त्यौहार मुसलमानों के एक नबी हज़रत इब्राहीम अलैहिस सलाम की याद में मनाया जाता है. इतिहास में इस से जुड़ा एक बहुत ही मश्हूर क़िस्सा है के हज़रत इब्राहीम अo ने सपने में देखा के वह अपने बेटे हज़रत इसमाईल अलैहिस सलाम के गर्दन पर छुरी चला रहे हैं. यह बात आप ने अपने बेटे इसमाईल को बताई. और बेटे से राय पूछा तो बेटे ने कहा के अब्बा जान अगर ऐसा है तो यह अल्लाह का कोई हुकुम होगा. और आप को इस हुक्म पर अमल करना चाहिए. मैं तय्यार हूँ. फिर दोनों बाप बेटे एक सुनसान जगह पर गए. बेटे इस्माईल अo ने कहा के अब्बा जान आप अपनी आँखों पर कपडा़ बांध लीजिये किया पता आप को मेरी गर्दन पर छुरी चलाते वक़्त बेटे की मोहब्ब्बत बीच में आ जाए और आप इस वजह से आप अल्लाह के हुक्म को पूरा ना कर पाएं. और फिर बाप ने ऐसा ही किया .
    और जब क़ुर्बानी की जगह पर दोनों बाप नेटे पहुँचें तो बेटे इसमाईल अo आग्या का पालन करते हुए ज़मीन पर लेट गए और अपने पिता से कहा के आप मेरी गर्दन पर छुरी चलाएँ और अल्लाह के हुक्म को पूरा करें. तो इब्राहीम अo ने ऐसा ही किया. लेकिन जैसे ही बाप ने बेटे की गर्दन पर छुरी चलाई वैसे ही छुरी एक दुंबे( अरबमें एक जानवर) पर चली. और उस की क़ुर्बानी हो गई. बस अल्लाह को यही अदा पसंद आई और उसी दिन से मुसलमानों पर क़ुर्बानी वाजिब (ज़रूरी) कर दिया गया.
    इसी तरह अगर और बात करें तो इसलाम की दो ईदों में से एक ईद उल अज़्हा है. जो ज़िल हिज्जा की दस तारीख़ को मनाई जाती है. यह हज़रत इब्राहीम अo की अपने बेटे की क़ुर्बानी की अज़ीम यादगार है जिसे अल्लाह पाक ने रहती दुनिया तक इबादत के तौर पर ज़िंदा कर दिया आख़री नबी मुहम्मद साहब (सo अo वo) का फ़रमान है ” क़र्बानी के दिन इंसानों के आ’माल में से अल्लाह को इतना ज़ियादा महबूब अमल (कार्य) कोई नहीं जितना क़ुर्बानी के दिन क़ुर्बानी करना है”
    एक दूसरी जगह आप मुहम्मद साहब का फ़रमान है के “जो इंसान क़ुर्बानी की ताक़त रखता हो और फिर भी क़ुर्बानी ना करे, वह हमारी इबादत्गाह के क़रीब भी ना आए.
    क़ुरान ओ हदीस की रौशनी में यह बात साबित है के हर उस आक़िल (समझदार) बालिग़(व्यस्क) मुसलमान पर क़ुर्बानी वाजिब (ज़रूरी) है जिस के पास साढे़ बावन तोला चांदी या उस की क़ीमत का माल उस की ज़रूरयात से ज़ियादा हो. (यह माल चाहे सोना, चांदी या उस के ज़ेवर (गहने) हों. तिजारत (व्यापार) का माल या ज़रूरत से ज़ियादा घरेलु सामान हो, या ज़मीन हो)
    क़ुर्बानी का मक़सद सिर्फ़ जानवरों की क़ुर्बानी नहीं है, बल्कि इस का असल मक़सद यह है के इस क़ुर्बानी के नतीजे में हमारे अंदर फ़रमांबरदारी (आग्या का पालन) का जज़्बा पैदा हो जाए, और हम अल्लाह के हुकुम के आगे अपने जज़्बात और खा़हिशात को क़ुर्बान (त्याग) करने वाले बन जाएं.
    आज कल कुछ लोग क़ुर्बानी के बारे में में सही जानकारी ना होने की वजह कर ग़लत बयानबाज़ी करते हुए नज़र आते हैं.
    इसी लिये हमें अच्छी तरह जान लेना चाहिए के क़ुर्बानी के बदले उस की क़ीमत का सदक़ा करना या उस को ग़रीबों की ज़रूरयात पर ख़र्च कर देना हरगिज़ क़ुर्बानी का बदल नहीं हो सकता.
    लेकिन अभी कोरोना काल चल रहा है इस लिए क़ुर्बानी करने के साथ ही कुछ बातों का खा़स ख़्याल रखना होगा… जैसे के….
    सफ़ाई का खा़स ख़्याल रखें.
    शारीरिक दुरी बनाए रखें.
    क़ुर्बानी की बची हुई चीज़ें खाल, खू़न, और दूसरी गंदगी को ऐसी जगह पर ना डालें जिस से किसी को भी तकलीफ़ हो.
    माहौल को साफ़ सुथरा रखें.
    अपने साथ पुरी इंसानियत की भलाई, आपसी मोहब्बत और भाई चारा के लिये काम करें और साथ ही दुआ भी करें.

    हम यहाँ आप को यह बताना चाहते हैं कि ईद उल अज़्हा की नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा किया है. सब से पहले तो हमें किसी भी नमाज़ की नियत करनी होती है. वैसे नियत दिल से होनी चाहिए. अगर ज़ुबान से बोल दिया तो और भी अच्छा है. नियत इस तरह करना है. नियत करता हूँ मैं नमाज़ ईद उल अज़्हा की वाजिब. छे ज़ाएद तकबीरों के साथ, वास्ते अल्लाह त’आला के. रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़. नियत के बाद तक्बीर ए तहरीमा (हाथों को कंधे तक उठाना है और फिर पेट पर बांध लेना) के बाद सना पढ़ना है उस के बाद दो और तक्बीर कही जाएगी. पहली तक्बीर के बाद हाथों को कंधे तक ले कर जा कर छोड़ देना है, फिर दूसरी बार भी ऐसा ही करना है. तीसरी तक्बीर के बाद हाथों को बांध लेना है और सुरह फ़ातिहा और उस के बाद कोई भी सुरह पढ़ना है. उस के बाद रुकु में जाना है फिर सज्दे में और इस तरह एक रकत पूरी करनी है.
    दूसरी रकत के लिये खड़े होंगे तो सब से पहले सुरह फ़ातिहा और फिर कोई सुरह मिलाएंगे और उस के बाद रुकु में जाने से पहले पहले तीन ज़ाएद तक्बीरें (अल्लाह हु अकबर) कहते हुए हाथ छोड़ देंगे और चौथी तक्बीर कह कर रुकु में जाएंगे और सजदा के साथ सलाम फेर कर नमाज़ मुकम्मल करेंगे.

    नमाज़ के बाद जो सब से अहम है वह है ईद का खु़त्बा। यह दो है. ईद उल अज़्हा का खु़त्बा यह है.

    पहला खु़त्बा…
    अल्लाह हु अकबर अल्लाह हु अकबर ला इलाहा इल्लाल्लाहु वल्लाहु अकबर अल्लाह हु अकबर वलिल्लाहिल हम्दु

    अल्हम्दु लिल्लाही रब्बिल आ लमीन वल आ’क़िब’तू लिल मुत्तक़ीन, वससलातु वससलामु अला सय्येदेना मुहम्मदिन व’अला आ’लिही व’अस’हाबिही अज्म’ईन, अम्मा बा’द
    फ़अ’ऊज़ु बिल्लाही मि’नश शैतान नि’र्रजीम, बिस्मिल्ला’हिर रहमान निर्रहीम,
    इनना आ’तै’नाका कल’कौसर, फ़सल्लिलि रब्बिका वन्हर, इनना शानि’अ’का हुवल अब’तर,
    व’अन आयेशा रज़ि’अल्लाह हु त’आला अन’हा ,
    अन्ना रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम, मा अ’मिला आद’मियुन मिन अमलि यौम’नहरि अहब्बा इलल्लाहि मिन इहराक़िद’दमि उन्नहु लयाति यौमल्क़यामति बिक़रूनिहा व’अश’हारिहा व’अज़’लाफ़िहा इनन’दमा ल’यक़’ऊ मिनल्लाहि बिमकानिन क़ब्ला अन’यक़’आ मिन’अल’अरज़ि फ़’तीबु बिहा नफ़सन,
    अल्लाह हु अकबर अल्लाह हु अकबर ला इलाहा इल्लाल्लाहु वल्लाहु अकबर अल्लाह हु अकबर वलिल्लाहिल हम्दु

    अल्लाहुम्मा इन्नी अ’ऊज़ु बिका मिनल बरसि वल’जुनूनि वल’जज़ामि व’मिन सैय्ये’इल अस्क़ाम.
    अल्लाह हु अकबर अल्लाह हु अकबर ला इलाहा इल्लाल्लाहु वल्लाहु अकबर अल्लाह हु अकबर वलिल्लाहिल हम्दु

    *दूसरा खु़तबा ….
    अल्लाह हु अकबर अल्लाह हु अकबर ला इलाहा इल्लाल्लाहु वल्लाहु अकबर अल्लाह हु अकबर वलिल्लाहिल हम्दु

    नह’मदुहु व’नस’त’ईनुहु व’नुसल्ली अला रसूलिहिल करीम. अम्मा बा’द
    फ़अ’ऊज़ु बिल्लाही मि’नश शैतान नि’र्रजीम, बिस्मिल्ला’हिर रहमान निर्रहीम,
    इननल्लाहा व’मलाइकतुहु यु’सल’लुना अलन’नबी, या अय्यु’हल’लज़ीना आ’मनू सल्लू अलैही व’सल्लिमु तस्लीमा.
    अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिन व’अला आलि मुहम्मदिन व’अ’लल खुलफ़ाई रा’शिदीन अल’मह’दिय्यीन. व’अ’ला अस’हा’बिहि अज’म’ईन. व’अ’ला मन त’बि’अ’हुम इला यौमिद दीन. इबाद’अल्लाह र’हि’म’कुमुल्लाह.
    इन्नल्लाहा या’मुरु बिल’अद’लि वल’इहसानि व’ई’ता’ई ज़िल’क़ुर्बा व’यन्हा अनिल फ़ह’शाइ वल’मुन’करि वल’बगई, य’इ’ज़ुकुम ल’अल’लकुम त’ज़क्करून. वल्ज़िकर
    अल्लाह हु अकबर अल्लाह हु अकबर ला इलाहा इल्लाल्लाहु वल्लाहु अकबर अल्लाह हु अकबर वलिल्लाहिल हम्दु

    अब थोडी़ बात क़ुर्बानी के तरीक़े पर भी कर ली जाये.
    आयिये जानते हैं कि क़ुर्बानी का सही तरीक़ा किया है?
    जानवर की गर्दन पर छुरी चलाते वक़्त ज़बह करने से पहले बिस्मिल्लाह अल्लाह हु अकबर पढे़
    ज़बह करते हुए यह आयते़ भी पढ़ना भी साबित है.
    इन्नी वज्जहतु वजहिया लिल्लज़ी फ़’त’रस समावाति वल’अर’ज़ि हनीफ़न वमा अना मिनल मुश्रिकीन .क़ुल इनना सलाती व’नुसुकी व’महयाया व’म’माती लिल्लाही रब्बिल आ लमीन. ला शरीका लका व’बि’ज़ा’लिक उमिरतु व’अना अव’व’लुल मुस्लिमीन.
    ज़बह करने के बाद यह दुआ पढे़.
    अल्लाहुम्मा तक़ब्बल निम्नी कमा त’क़ब’बल’ता मिन हबीबिका मुहम्मदिन सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम व’मिन खलीक़िका इब्राहीमा अलैहिस सलाम.

    जानवर को ज़बह करते वक़्त ऐसा जुमला कहना ज़रूरी है जो सिर्फ़ अल्लाह त’आ’ला के ज़िक्र और हमद ओ सना पर हो.

    ज़बह करते वक़्त सिर्फ़ उर्दु में भी अल्लाह का नाम लिया जैसे के यह बोला के अल्लाह के नाम से ज़बह करता हूँ तो भी क़ुर्बानी हलाल हो जायेगी

    और नमाज़ में अल्लाह से दुआ करें के अल्लाह हमारे देश और दुनिया में इस कोरोना वायरस नामी महामारी को ख़तम कर दे और दुनिया में अमन चैन और शान्ती की फ़िज़ा बनी रहे.

  • उत्तर प्रदेश मे 240 गांव बाढ़ से प्रभावित साथ ही दो नदियां खतरे के निशान से ऊपर|

    आशिफ अली/मिल्लत टाइम्स( उत्तर प्रदेश )

    प्रदेश में दो नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इनमें शारदा नदी, लखीमपुर खीरी में अपने खतरे के निशान से 08 से.मी. ऊपर तथा सरयू नदी, बलिया में अपने खतरे के निशान से 16 से.मी. ऊपर बह रही है प्रदेश में बाढ़ के संबंध में निरन्तर अनुश्रवण किया जा रहा है। कहीं भी किसी प्रकार की चिंताजनक परिस्थिति नहीं है |

    वर्तमान में प्रदेश के 08 जनपदों की 17 तहसीलों के 240 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें बाराबंकी के 57, अयोध्या के 02, कुशीनगर के 09, गोरखपुर के 80, आजमगढ़ के 14, बस्ती के 07, संतकबीर नगर के 68 व सीतापुर के 03 गांव शामिल हैं | बाढ़ से 65,564 लोग प्रभावित हैं। बाढ़ से अब तक 07 जनपदों जिनमें बाराबंकी, बस्ती, गोण्डा, कुशीनगर, मऊ, संतकबीर नगर, सीतापुर में 8,408.6 हेक्टेयर बोया गया क्षेत्रफल प्रभावित हुआ है | प्रदेश के 06 जनपदों- बहराइच, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, कुशीनगर, श्रावस्ती, प्रयागराज में एनडीआरएफ की तैनाती की गई हैसाथ ही कुशीनगर, गोरखपुर, बलरामपुर, प्रयागराज, मुरादाबाद जनपदों में एसडीआरएफ तथा 05 जनपदों- बहराइच, बलरामपुर, बाराबंकी, गोण्डा, श्रावस्ती में पीएसी की तैनाती की गई है |
    यह जानकारी राहत आयुक्त, श्री संजय गोयल ने दी |


  • सीतामढ़ी:मिल्लत टाइम्स की ख़बर का असर,हरकत में आई प्रशासन,DM ने बैठक कर सभी प्रखंड स्तर पदाधिकारी को बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों के लोगों की समस्यायों का समाधान करने को कहा

    मेराज़ आलम ब्यूरो रिपार्ट

    सीतामढ़ी। सभी बीडीओ,सीओ, थानाध्यक्ष एवं प्रखंडो के नोडल पदाधिकारी अपने-अपने बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रो में जाकर लोगो से मिलकर उनकी समस्याओं की जानकारी लेगें,साथ ही चल रहे राहत कार्यो का फीड बैक भी लेगें।उक्त बातें डीएम अभिलाषा कुमारी शर्मा ने समाहरणालय स्थित परिचर्चा भवन में आयोजित बैठक में उपस्थित सभी पदाधिकारियो से कही। उन्होंने कहा कि संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी इसकी मॉनिटरिंग करेगे और तीन दिन बाद सभी अनुमंडल पदाधिकारी इससे संबधित रिपोर्ट के साथ जिलास्तरीय बैठक में भाग लेंगें। जिलाधिकारी ने कहा कि आमजनों को समस्याओं को पूरी गंभीरता के साथ सुनना एवम उसका समाधान करना ही आपका महत्वपूर्ण दायित्व है।

    (मिल्लत टाइम्स की टीम द्धारा बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में परेशान लोगों की दो‌‌ दिन पहले उठाई गई थी आवाज )
    बिहार में बाढ़ के पानी का कोहराम हजारों लोग बेघर, भूखे प्यासे रहने पर मजबूर सरकारी रीलीफ सिर्फ कागजों पर

    उन्होंने कहा कि बीडीओ,सीओ सहित सभी पदाधिकारी आमजनों के फोन को उठाये एवं उनकी समस्याओं को पूरी संवेदनशीलता के साथ सुने। डीएम ने कहा कि सभी पदाधिकारी अपने सरकारी नंबर को ही व्हाट्सअप नंबर रखे ताकि जब आपकी व्यस्तता के कारण आपसे बात नही हो पाती है तो आमजन या पदाधिकारी आपको सहझता के साथ व्हाट्सअप मैसेज कर सके। उन्होंने कहा कि जब भी मैं किसी पदाधिकारी को व्हाट्सअप मैसेज करती हूँ, तो हर हाल तुरंत उसका अनुपालन कर रिपोर्ट करे,अन्यथा जबाबदेही तय कर करवाई की जाएगी। डीएम अभिलाषा कुमारी शर्मा ने प्रखंडवार सभी बीडीओ,सीओ एवम राजस्व पदाधिकारियो से बाढ़ प्रभावित पंचायतो की स्थिति,तटबंधों की स्थिति,पॉलीथिन की उपलब्धता,ब्लीचिंग पाउडर की उपलब्धता,प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की स्थिति,राहत केंद्रों एवम सामुदायिक किचेन की व्यवस्था आदि का समीक्षा कर कई आवश्यक दिशा निर्देश भी दिया।

    जिलाधिकारी ने कहा कि सभी अधिकारी पूरी सावधानी के साथ अपने-अपने दायित्व का निर्वहन करे। यह सुनिश्चित करे की आपके कार्यालय में सभी लोग मास्क अनिवार्य रूप से पहने,सामाजिक दूरी का पालन करे,समय-समय पर हाथों को धोते रहे एवम कार्यालय को भी समय-समय पर सेनेटाइज करते रहे।उन्होंने कहा कि हमे कोरोना की परिस्थितियो में ही कार्य करना है,इसलिये डरकर नही बल्कि पूरी सजगता के साथ सभी सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए कार्य करे।उन्होंने बीडीओ सूप्पी एवम कार्यपालक एवं अधीक्षण अभियंता बाढ़ नियंत्रण सीतामढ़ी की प्रशंसा करते हुए कहा कि इनलोगो की तत्परता एवम अपने कार्य के प्रति जबाबदेही के कारण जमला-परसा सहित अन्य तटबंधों की स्थिति नियंत्रण में रही।

    डीएम ने बीडीओ सूप्पी द्वारा मास्क फोर्स अभियान को गति प्रदान करने एवम उसे आमजनों से जोड़ने हेतू किये गए प्रयासों की भी जमकर तारीफ किया। उन्होंने सीओ डुमरा अफ़शा परवेज,रुन्नीसैदपुर, बीडीओ डुमरा मुकेश कुमार की कार्यशैली एवं तत्परता की प्रशंसा करते हुए कहा कि इनलोगो ने आमजनों की समस्याओं पर गम्भीरता से लेकर उसका समाधान करने का प्रयास किया है। उक्त बैठक में एडीएम मुकेश कुमार,निदेशक डीआरडीए,मुमुक्ष चौधरी,डीपीआरओ परिमल कुमार,आपदा प्रभारी अविनाश कुमार सहित कई पदाधिकारी उपस्थित थे।

    नोट:मालूम हो की दो दिन पहले मिल्लत टाइम्स की टीम द्वारा सीतामढ़ी के कई बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में बाढ़ से परेशान लोगों की परेशानियों से मिल्लत टाइम्स की टीम ने प्रशासन और सरकार को अवगत कराई थी