Author: M Qaisar Siddiqui

  • जैसलमेर मे मुख्यमंत्री गहलोत ने मीडिया से बात करते हुये सवालों के जवाब दिये।

    अशफाक कायमखानी।जैसलमेर। राजस्थान।
    मुख्यमंत्री गहलोत ने राजस्थान मे पीछले एक महिने मे घटे राजनीतिक घटनाटक्रम व मची उथल फूथल को भूलकर आगे बढने की कहते हुये मीडिया के सवालो के जवाब दिये।

    सवाल- सर इस पूरे प्रकरण को कैसे देखें इसको, शाह की मात के तौर पर या लोटस को फेल करने के तौर पर?
    जवाब- फॉरेगेट एंड फॉरगिव, आपस में भूलो और माफ करो और आगे बढ़ो, देश के हित में, प्रदेश के हित में, प्रदेशवासियों के हित में और लोकतंत्र के हित में। डेमोक्रेसी खतरे में है। ये लड़ाई डेमोक्रेसी को बचाने की है, उसमें जो हमारे विधायकों ने इतना साथ दिया, 100 से अधिक विधायक एकसाथ रहना इतने लंबे समय तक, अपने आप में बहुत बड़ी बात है जो हिंदुस्तान के इतिहास में कभी नहीं हुआ होगा। तो ये डेमोक्रेसी को बचाने की लड़ाई है, आगे भी जारी रहेगी ये हमारी लड़ाई और बाकि जो एपिसोड हुआ है, एक प्रकार से भूलो और माफ करो की स्थिति में रहें, सब मिलकर चलें क्योंकि प्रदेशवासियों ने विश्वास करके सरकार बनाई थी हमारी। हमारी सबकी जिम्मेदारी बनती है कि उस विश्वास को बनाए रखें हम लोग और प्रदेश की सेवा करें, सुशासन दें और कोरोना का मुकाबला करें सब मिलकर। ये जीत जो है, ये जीत असली प्रदेशवासियों की जीत है। पूरे प्रदेशवासियों ने जो हमारे MLAs ने जो हौसला अफ़ज़ाई की टेलीफोन कर- करके, कोई चिंता नहीं, महीना-दो महीना लग जाए परवाह मत करो, जीत सरकार की होनी चाहिए, सरकार स्टेबल होनी चाहिए, उसके बाद में आप आओ हमारे घरों में। तो ये जो जज़्बा था पूरे प्रदेशवासियों का, उसकी जीत है ये। मैं उनको बधाई देता हूं, धन्यवाद देता हूं प्रदेशवासियों को और विश्वास दिलाता हूं कि जीत हमारी सुनिश्चित है, आने वाले वक्त में और दोगुने जोश से सब काम करेंगे, आपकी सेवा करेंगे।

    सवाल- सर आप जनता से कहते रहे ‘मैं थासूं दूर कोनी’, अब विधायकों को ये कहना पड़ा, अपने विधायकों?
    जवाब- ‘मैं थासूं दूर कोनी’ मैंने पहले भी कहा था, अब भी कह रहा हूं और विधायकों के आपस के अंदर संबंध अच्छे बने हैं। एक महीना साथ रहते हैं, तो आप समझ सकते हो कि कितने अंतरंग संबंध बने होंगे। सबने मिलकर एकजुट होकर संकल्प किया है कि हमें जाकर प्रदेशवासियों की सेवा करनी है, जो हमारा परम धर्म बनता है।

    सवाल- कई विधायक नाराज हैं?
    विधायकों की नाराजगी को हमने दूर करने का प्रयास किया है। उनकी नाराजगी होना स्वाभाविक है, जिस रूप में ये एपिसोड हुआ, उनको एक महीना रहना पड़ा, उससे नाराजगी होना स्वाभाविक था। उनको मैंने समझाया है कि देश और प्रदेश और प्रदेशवासियों के और लोकतंत्र को बचाने के लिए कई बार हमें कई बार सहन करना भी पड़ता है। हम सब आपस में मिलकर काम करेंगे । जो हमारे साथी चले गए थे वो भी वापस आ गए हैं। मुझे उम्मीद है कि सब गिले-शिकवे दूर करके सब मिलकर हम प्रदेश की सेवा करने का संकल्प पूरा करेंगे।

    सवाल- सर आपका पत्र बहुत चर्चा में रहा, जो पत्र विधायकों को लिखा आपने?
    जवाब- पत्र पक्ष को विपक्ष को सबको लिखा था और मैं ये दावे के साथ कह सकता हूं कि उस पत्र का बड़ा इम्पैक्ट पड़ा। उसी कारण से बीजेपी के जो तीन-तीन प्लेन हायर किए उन्होंने एयरक्राफ्ट, गुजरात भेजने के लिए, मुश्किल से एक जा पाया, वो भी पूरा नहीं भरा हुआ था और उनका कल से कैंप लगना था क्राउन प्लाजा होटल के अंदर, मीटिंग थी, वहीं रहना था, बाड़ेबंदी हो रही थी, जो कहते थे हमें ‘बाड़ेबंदी क्यों कर रहे हो?’ ये क्या नौबत आ गई कि उनकी बाड़ेबंदी होने लग गई? उससे जो हालात बने हैं प्रदेश के सामने, पूरी तरह वो एक्सपोज़ हो गए। पूरा खेल उनका था, सरकार को टॉपल करने का षड्यंत्र था, जो उन्होंने कर्नाटक में भी, मध्यप्रदेश के अंदर भी जो कुछ भी किया, दुनिया जानती है और लोग पसंद भी नहीं करते हैं, वो ही षड्यंत्र राजस्थान का था जो पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है।

    सवाल- भाजपा जो आरोप लगा रही है, अशोक गहलोत इस पूरे प्रकरण पर क्या कहना चाहेंगे एक लाइन में, किसी की जीत, किसी की हार या क्या?
    जवाब- डेमोक्रेसी का हमारा जो, किसी की हार-जीत की बात नहीं होती है। उद्देश्य क्या है, सिद्धांत क्या हैं, नीतियां क्या हैं, कार्यक्रम क्या हैं हम लोगों के, उसपर हम लोग सोचते हैं, तो वो कांग्रेस के पक्ष में है। कांग्रेस का जो शानदार महात्मा गांधी के जमाने का इतिहास है, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, अंबेडकर साहब ने बनाया संविधान। 70 साल के बाद में भी हमारे यहां लोकतंत्र कायम रहा है और अब भी मैं कहना चाहूंगा, इस देश के अंदर लोकतंत्र आने वाली सदियों तक कायम रहे, ये हमारा सपना रहेगा जिंदगी का। उसको बचाने के लिए हम सब एकजुट रहेंगे और आप देखेंगे कि पूरा प्रदेश-पूरा देश एकजुट रहेगा। किसी कीमत पर जो मंसूबे हैं भारतीय जनता पार्टी के लोकतंत्र खत्म करने का, वो कभी पूरा नहीं होने देंगे। ये राहुल गांधी जी की भी सोच है, सोनिया गांधी जी की भी सोच है, हम सबकी सोच है, उसपर उनके नेतृत्व में चलेंगे और डेमोक्रेसी को बचाने के लिए कितना ही बड़ा संघर्ष करना पड़े, हम चूकेंगे नहीं और सत्य की जीत होती है, सत्यमेव जयते, सत्यमेव जयते, सत्यमेव जयते।

  • एसडीपीआई छपरा सारण टीम के द्वारा बाढ़ पीड़ितों के बीच बांटा गया राहत सहायता सामग्री

    एसडीपीआई छपरा सारण की टीम ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जाकर बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच सूखे खाने-पीने की सामग्री का किया वितरण जैसा कि आप सबको पता है ज़िला में कई क्षेत्र इन दिनों बाढ़ की परेशानियों से दो चार हैं इसी बीच एसडीपीआई छपरा सारण की टीम ने मढौड़ा क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंच कर खाने पीने के सूखे सामग्रियों का वितरण किया एसडीपीआई की टीम हमेशा लोगों की सहायता के लिए तत्पर रहती है चाहे बाढ़ हो भूकंप हो आग लगी हो या करोना से मृत्यु हुई हो इस दुख की घड़ी में एसडीपीआई की टीम लोगों की सहायता के लिए हमेशा उनके साथ खड़ी रहती है ठीक इसी प्रकार बाढ़ पीड़ितों के बीच जाकर उन्हें सुखा राशन वितरण किया और उनके हालचाल को जाना इस अवसर पर एसडीपीआई छपरा सारण के जिला अध्यक्ष डॉक्टर नौशाद अहमद ने कहा कि हम लोग आगे भी इस तरह के सहायता को लगातार जारी रखेंगे इस अवसर पर जिला अध्यक्ष डाॅक्टर नौशाद अहमद के साथ जिला महासचिव कामरान अंसारी, जिला सचिव एहसान अहमद,
    जिला सचिव सह प्रवक्ता इशतेयाक अहमद,रेयाजुददीन अहमद, मोहम्मद रहमतुल्लाह, दिलशाद आलम, आजाद ख़ान,
    मोहम्मद फजलुर्रहमान इत्यादि उपस्थित थे!

  • मुख्यमंत्री गहलोत व सचिन पायलट के मध्य छिड़े विवाद की जड़ राजद्रोह की धारा 124-A लगाना बताया जा रहा है!

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान की कांग्रेस सरकार मे कमोबेश सबकुछ ठीक ठाक चलते रहने के बावजूद जुलाई माह के मध्य मे राजस्थान की आला मुकाम रखने वाली इनवेस्टीगेशन ऐजेंसी SOG व ACB मे दो अलग अलग रिपोर्ट कांग्रेस नेताओं सहित अन्य नेताओं व कुछ अन्य लोगो के खिलाफ दर्ज होती है या मानो कि करवाई जाती है। जिन रिपोर्ट मे से जो SOG मे रिपोर्ट दर्ज हुई उसमे अन्य धाराओ के साथ राजद्रोह की धारा 124-A भी लगाई गई थी। जिसके धारा के भय के कारण सचिन पायलट व कुछ नेताओं को राजस्थान से करीब एक माह बाहर रहकर एक तरह से अण्डरग्राउण्ड होना पड़ा था। यहां तक कि एसओजी की टीम आवाज का नमूना लेने व जांच करने के नाम पर आरोपियों के छिपने के सम्भावित ठिकाने हरियाणा के मानेसर तक जाकर हरियाणा पुलिस तक एक तरह से भीड़ गई थी। उसके बाद न्यायालय मे मामला जाने पर राजद्रोह की धारा 124-A हटानी ही नही पड़ी बल्कि एसओजी ने तो उस रिपोर्ट पर एफआर भी लगा दी है।

    हालांकि एसओजी ने कांग्रेस मेन महेश जोशी की शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज करके अपने स्तर पर जांच करके पाया होगा कि जो रिपोर्ट उनके यहां लिखवाई गई थी या दर्ज की गई वो पुरी तरह सत्य से परे पाई गई होगी। तभी एसओजी ने उस रपट पर एफआर लगा कर भेजा है। लेकिन उक्त प्रकरण को लेकर जिस तरह से प्रदेश मे राजनीतिक अस्थिरता का माहोल बनाया गया व एसओजी की टीम का मानेसर सहित अन्य जगह जांच करने को लेकर जाकर आने मे सरकारी धन का खर्चा भी आया होगा। अब इसमे देखने वाली बात है कि उक्त रिपोर्ट एसओजी मे दर्ज क्यो ओर किसके इशारे पर हुई ओर जांच के नाम पर सरकारी धन का कितना खर्च आया होगा। फिर उस रिपोर्ट का परिणाम भी शुन्य आकर एफआर लगना। यह सबकुछ काफी सोचने पर मजबूर करता है।

    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत SOG व ACB मे दर्ज रिपोर्ट के पक्ष मे अनेक तरह के दावे लगातार करते रहै है। अगर रिपोर्ट मे आरोपियों पर लगाये गये आरोप सही थे ओर उन पर 124-A का मामला बनता था तो उन पर मामला बनाया जाना चाहिए था। अगर इसमे वो दोषी थे तो उन्हें सजा तक पहुंचाने तक लेकर जाना चाहिए था। अन्यथा जनता मे संदेश जायेगा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी पार्टी के अंदर मोजूद विपरीत विचार रखने वालो को दवाब मे लाने के लिये उक्त तरह से पावर व सत्ता का गलत रुप मे उपयोग किया होगा। मुख्यमंत्री को इस मामले मे जनता के सामने पूरी तरह स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

    कुल मिलाकर यह है कि हमारी जांच ऐजेंसियों की बन चुकी उजली छवि व उनके अधिकारियों का वकार हर परिस्थितियों मे कायम रखने के लिये हर राजस्थानी का कर्तव्य बनता है। अगर कोई राजनेता व व्यक्ति अपने सत्ता के पावर के सहारे ऐजेंसियों की इंसाफाना छवि पर चोट करने की कोशिश करे तो उसके खिलाफ हर इंसाफ पसंद को संवेधानिक दायरे मे रहकर विरोध मे आगे आना चाहिए। पिछले एक महिने मे राजस्थान मे घटे राजनीतिक घटनाटक्रम के हर जिम्मेदार पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए ताकि आगे उक्त तरह की पुनरावृत्ति ना हो पाये। उक्त प्रकरण मे हुये खर्च की भरपाई निरर्थक शिकायत दर्ज कराने वाले व्यक्ति महेश जोशी की निजी आय से भरपाई होकर कड़ा संदेश जाना चाहिए।

  • सचिन पायलट का गुजर होना भी उनका कांग्रेस मे वापसी का बडा कारण बना।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    हालांकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की प्रभारी महामंत्री अविनाश पाण्डे को साथ लेकर आखिर तक सचिन पायलट की कांग्रेस मे वापसी के विरोध करते रहने के बावजूद दिल्ली मे मोजूद दिग्गज कांग्रेस नेताओं की पहल पर सचिन पायलट की गांधी परिवार के पूत्र-पूत्री की उपस्थिति मे ससम्मान वापसी मे उनका गूजर नेता होना भी एक अहम कारण माना जा रहा है।

    कांग्रेस का एक समय था जब पार्टी मे अवतार सिंह भडाना, रामवीर सिंह विधुड़ी व राजेश पायलट सहित कुछ अन्य गुजर राजनीतिक नेता समय समय पर हुवा करते थे। दिल्ली, यूपी, हरियाणा, राजस्थान व जम्मू काशमीर मे खासतौर पर गुजर मतदाताओं की एक बडी तादाद मोजूद है। जिनको साधने के लिये गुजर बिरादरी मे सामाजिक नेता तो ओर भी हो सकते है लेकिन बिरादरी मे वर्तमान समय मे कांग्रेस के पास सचिन पायलट ही लोकप्रिय गुजर राजनीतिक नेता है। जिसके नाम पर गुजर मतदाताओं को लुभाया जा सकता है। इसके विपरीत अशोक गहलोत मैनेजर अच्छे हो सकते है लेकिन उनके नाम पर उनकी बिरादरी के मत राजस्थान मे ही कांग्रेस को अच्छी तादाद मे कभी नही नही मिल पाये है। वही गहलोत के नाम से राजस्थान व उससे बाहर उनकी बिरादरी के मतो को साधना नामुमकिन बताते है।

    सचिन पायलट के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनकर राजस्थान आने के बाद तीन विधानसभा व दो लोकसभा के हुये उपचुनाव मे कांग्रेस उम्मीदवारों के जीतने मे गुजर मतदाताओ का कांग्रेस की तरफ आकर पायलट को अपना राजनीतिक नेता मानते हुये मतदान करना प्रमुख कारण रहा बताते। गुजर वेसे तो परम्परागत रुप से माली मतदाताओं की तरह गुजर भी भाजपा का मतदाता रहा है। लेकिन जबसे सचिन पायलट को अध्यक्ष बनाकर हाईकमान ने राजस्थान भेजा तब से आम गुजर मतदाता को लगा कि सचिन को मुख्यमंत्री बनाने के लिये सभी जगह कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष मे मतदान करना अनिवार्य है। 2018 के विधानसभा चुनाव मे गुजर मतदाताओं ने उक्त लाईन पर ही मतदान किया था।

    कुल मिलाकर यह है कि मुख्यमंत्री गहलोत की इच्छा के विपरीत राहुल गांधी व प्रियंका गांधी की पहल पर सचिन पायलट की कांग्रेस मे वापसी के अनेक कारणो मे एक प्रमुख कारण दिल्ली-यूपी-हरियाणा-राजस्थान व जम्मू काशमीर मे गुजर मतदाताओं की बहुलता होने पर उन मतो को साधने के लक्ष्य होना भी माना जा रहा है।

  • मुकीद आलम तीसरी बार चुने गए राष्ट्रीय जनता दल पंजाब के अध्यक्ष

    पार्टी के भरोसे को मैं टूटने नहीं दूंगा , पंजाब बॉडी का होगा जल्द ऐलान: मुकीद आलम

    लुधियाना पंजाब (मेराज़ आलम): राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की कार्यकारिणी की आज पटना में बैठक हुई जिसमें राजद की ओर से जारी की गई राष्ट्रीय अध्यक्ष की लिस्ट में आरजेडी पंजाब प्रदेश अध्यक्ष की कमान मुकीद आलम उर्फ मलकीत के हाथों में ही रहेगी ।
    उल्लेखनीय है कि मुकीद आलम पिछले 3 सालों से पंजाब के अध्यक्ष पद पर हैं।

    वहीं मुकीद आलम ने कहा कि पार्टी ने जिस यकीन के साथ मुझ पर फिर से भरोसा जाहिर किया है उसे मैं टूटने नहीं दूंगा। उन्होंने कहा कि पंजाब भर में लाखों की संख्या में बिहार के लोग बसते हैं जिनका पार्टी के प्रति उत्साह देखते हुए मुझे भी हौसला मिलता है। इस साल बिहार में विधानसभा

    चुनाव की तैयारी चल रही है पंजाब के वर्कर बिहार के इस चुनाव में मुख्य रोल अदा करेंगे उन्होंने कहा कि बहुत जल्द पंजाब बॉडी का भी एलान कर दिया जाएगा।
    वहीं पार्टी के प्रिंसिपल सेक्रेट्री अब्दुल बारी सिद्दीकी ने मुकीद आलम को तीसरी बार पंजाब प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई दी है और कहा है कि मुकीद आलम ने बहुत कम समय में राष्ट्रीय जनता दल को ऊंचाई पर पहुंचाया है।

  • बिहार में ओवेसी और मांझी के गठबंधन ने बढ़ाई राजनीतिक दलों की चिन्ता

    मोहम्मद फारूक सुलेमानी,
    दलित और अल्पसंख्यकों के मुद्दों को बेबाकी से रखने वाले और सविधान की दुहाई देने वाले एम आई एम के बड़े नेता असदुद्दीन ओवैसी का सियासी बवंडर उस समय और उबाल में आ गया जब दलित नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ओवैसी की एम आई एम से गठबंधन लगभग तय हो गया है ।

    गत विधानसभा चुनाव में बीजेपी सत्ता की ओर अग्रसर हो रही थी उस समय मोहन भागवत के आरक्षण हटाने के बयान को लालू ने खूब भुनाया था जिसका नतीजा यह हुआ कि राजद सत्ता पर काबिज हो गई।
    अब यहां दलित और मुस्लिम गठबंधन से आने वाली बिहार विधानसभा चुनाव में ओवेसी की एंट्री भी धमाकेदार होने वाली है । जितना राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा(हम) बिहार की 50 से अधिक सीटों पर सीधा प्रभाव है । जबकि एक दर्जन सीटों पर काबिज होना लगभग तय माना जा रहा है इधर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी बिहार के पूर्वांचल में एक दर्जन सीटों पर आसानी से जीत दर्ज होने का दावा कर रही है ।

    अगर यहां के राजनीतिक समीकरण फिट बैठे तो कई राजनीतिक दलों की नींद उड़ा सकते हैं । ऐसे असदुद्दीन ओवैसी बिहार में फिलहाल वो दलित मुस्लिम और पिछड़ों पर उनकी गहरी नजर हैं , भाई अकबरुद्दीन ओवैसी को बिहार के विधानसभा चुनाव के प्रसार में अलग रखा जा सकता है क्योंकि अक्सर उनके भाई के बयान असदुद्दीन के लिए सिर दर्द भी बने हुए है। आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में जितेंद्र राम और असदुद्दीन की एक मंच पर संबोधित करना दलित मुस्लिम की नई राजनीतिक समीकरण को जन्म दे सकता है । राजनीति में कोई स्थाई दोस्त या दुश्मन नहीं होता ऐसी में ओवेसी की पार्टी से कई राजनीतिक पार्टियां भी गठबंधन का ऐलान कर सकती है , इसलिए लालू के बेटे तेजस्वी अपने बयानों को फूंक फूंक कर दे रहे हैं । उनका एक बयान राजद के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने में ओवैसी के लिए फायदेमंद हो सकता है । इसी ओवेसी के लिए बिहार में खोने के लिए कुछ भी नहीं है इसीलिए वह खुलकर बिहार में नीतीश कुमार को जमकर कोस रहे हैं । इधर बिहार के कई सामाजिक कार्यकर्ता वकील दलित नेता मुस्लिम धार्मिक गुरु खुलकर एम आई एम का दामन थाम रहे हैं । अगर ओवैसी की पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में रही तो कांग्रेस के पूर्व दिग्गज नेता और वर्तमान में एम आई एम के बिहार में सबसे बड़े नेता अख्तरुल इमान पर दांव खेला जा सकता है । हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि दलित नेता जितेंद्र मांझी को गठबंधन का मुख्यमंत्री का उम्मीदवार का ऐलान कर सकती है । ऐसे में अन्य राजनीतिक दलों का अल्पसंख्यक और दलित वोट बैंक मैे सैध लगना तय मानी जा रही है , ऐसे में इन राजनीतिक पार्टियों के लिए ओवैसी की एंट्री चिन्ता का बढा रही है । यह तो वक्त ही बताएगा कि बिहार में किसकी बहार होगी लेकिन यह तो तय माना जा रहा है कि औवेसी की एन्ट्री फ्रन्टफुट पर ही रहेगी।
    मोहम्मद फारुक सुलेमानी
    (युवा लेखक )

  • बाड़मेर में मुस्लिम परिवारों का कोई धर्म परिवर्तन नहीं हुआ:सुलेमानी

    बाडमेर:सिणधरी उपखंड के मोतीसरा राजस्व ग्राम में 50 मुस्लिम परिवारों के 250 लोगों द्वारा मुस्लिम धर्म से हिंदू धर्म बदलने की घटना को स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया( एमएसओ) ने सिरे से नकार दिया है । यह सभी परिवार पहले से ही हिंदू हैं और कंचन समाज से ताल्लुक रखते हैं । धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों ने खुद दावा किया है कि वह शुरु से ही हिंदू धर्म की रीति रिवाज और त्यौहारो को मनाते हैं।

    ऐसे में सवाल उठता है आखिर मुसलमान कैसे हुए?
    वही धर्म परिवर्तन करने वाली ढाडी समाज के जिला अध्यक्ष सुखदेव मालिया ने अपनी समाज में इस तरह की घटना को सिरे से नकार दिया है । मुस्लिम स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया के मोहम्मद फारूक सुलेमानी ने बताया कि इन परिवारों का आसपास कहीं भी मुस्लिम समाज से कोई ताल्लुक नहीं रहा है । धर्म परिवर्तन करने वालों के नाम हरजी राम , शुभम राम , मेघराज और जगन हैं ।
    . ऐसे में यह किसी भी मुस्लिम परिवार द्वारा हिंदू धर्म की परिवर्तन की खबर झूठी है , सिर्फ संप्रदाय की बात फैलाने के मकसद से माहौल खराब किया जाए है। एक हिंदू समाज का हिंदू में ही धर्म परिवर्तन सवालों के घेरे में है । मुस्लिम स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया के प्रदेश सचिव सुलेमानी ने यह भी आरोप लगाया अमन चैन शांति वाले प्रदेश में तथाकथित संगठन सांप्रदायिकता की फसल बोना चाहता है जिसको किसी भी हाल में कामयाब नहीं होने दिया जाएगा

  • मानसून और बाढ़ कि स्थिति से निपटने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने छह मुख्यमंत्रियों से बात की बेहतर तालमेल पर दिया जोर

    नई दिल्ली:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की. बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने बाढ़ की स्थितियों से निबटने के लिए राज्य सरकार की तैयारियों की समीक्षा की. इस बैठक में असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल के मुख्यमंत्री शामिल हुए. पीएम मोदी ने 6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों से चर्चा के दौरान राज्य और केंद्र की एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया। पीएम ने बाढ़ की अग्रिम चेतावनी के लिए एक स्थायी सिस्टम और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की बात कही। इस दौरान केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री हर्षवर्धन, गृह राज्‍य नित्‍यानंद राय और जी किशन रेड्डी के अलावा वरिष्‍ठ अधिकारी मौजूद रहे।

  • CAA & NRC पर इम्पार ने लोगों से मांगा सुझाव।

    सांसद रघु के राजू से मुलाक़ात कर के CAA & NRC की समस्याओं से उनको अवगत कराया और उसकी बारीकियां भी बताईं

    नयी दिल्ली: इम्पार ने NRC & CAA के बारे में मुस्लिम समुदाय की चिंताओं से अवगत कराने के लिए पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ विधायी नियमों पर संसदीय उपसमिति के अध्यक्ष और सांसद रघु के राजू से उनके आवास पर मुलाकात की। डॉ एमजे खान के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल ने सांसद महोदय को बताया कि किस तरह से आसाम में लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि किस तरह से बड़े पैमाने पर सभी समुदायों के लोगों को परेशानियों के साथ-साथ टॉर्चर और करेक्शन से गुजरना पड़ता है, क्योंकि डॉक्यूमेंट जमा करना कोई आसान काम नहीं है। ऐसे समय में जबकि भारत जैसे लोकतांत्रिक और महान देश में बाढ़ की वजह से लाखों लोग हर साल पलायन करते हैं। उनके पास डॉक्यूमेंट कहां होंगे ? और वह कैसे डोकोमेंट ला सकते हैं ?

    प्रतिनिधिमंडल ने सांसद को यह भी बताया कि 1.80 मिलियन लोग अपनी नागरिकता प्रमाणित करने में असमर्थ होंगे, जिसमें 1.20 मिलियन हिंदू समुदाय के लोग शामिल होंगे। प्रतिनिधिमंडल ने मिस्टर राजू से अनुरोध किया कि वह प्रतिनिधिमंडल और इंपार द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं से गृह मंत्रालय को अवगत कराएं और अगर एनआरसी CAA लाना जरूरी ही हो तो ऐसे कानून बनाए जाएं जो आसान हों और जिसमें लोगों के साथ भेदभाव की संभावना 0% भी ना हो, ताकि लोगों को अपनी नागरिकता प्रमाणित करने में किसी तरह की कोई दिक्कत या परेशानी ना आए।

    इम्पार के प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि मिस्टर राजू ने उनके द्वारा बताई गई समस्याओं को हमदर्दाना तरीके से न सिर्फ सुना बल्कि उन्होंने इस बात का आश्वासन भी दिया कि वह हर तरह से मदद करेंगे, जिससे लोगों को किसी तरह की कोई दिक्कत परेशानी ना आए। इम्पार ने यह भी कहा कि जल्द ही विस्तार से कम्युनिटी कंसर्न को लेकर के 1 नोट भी वह सांसद महोदय को सौंपेगा और उनसे अपेक्षा करेगा कि वह गृह मंत्रालय को इसे भेजें, ताकि गृह मंत्रालय इस पर संवेदनशील होकर के गौर करे।

    सांसद ने इम्पार के प्रतिनिधिमंडल को यह भी कहा कि वह विस्तार से एक प्रेजेंटेशन उन्हें दें, ताकि वह इसके बारे में आगे की कार्यवाही कर सकें। साथ ही उन्होंने इम्पार से कहा कि वह कमेटी के बाकी 15 मेंबरों से भी मुलाकात अलग-अलग करें और उन को कम्युनिटी की समस्याओं और चिंताओं से अवगत कराएं। साथ ही देशवासियों को जो परेशानियां आ सकती हैं या असम समेत देश के विभिन्न कोनों जैसे बाढ़ ग्रस्त इलाकों के जो अनुभव हैं, उससे कमेटी के बाकी 15 सदस्यों को अवगत कराएं। इंपार ने लोगों से अपील की है कि लोग बेहतर तरीके जो उनके मन और दिमाग में हैं उन को भेजें ताकि इंपार बाकी समिति के सदस्यों से मुलाकात करके उन्हें उनके बारे में अवगत कराए और बेहतरीन पेरजेंटेशन दे।

  • J&K के एलजी बदले:मनोज सिन्हा जम्मू-कश्मीर के नए उपराज्यपाल होंगे,राष्ट्रपति ने गिरीश चंद्र मुर्मू का इस्तीफा मंजूर किया

    नई दिल्ली
    मनोज सिन्हा पिछले साल यूपी की गाजीपुर सीट से लोकसभा चुनाव हार गए थे।

    गिरीश चंद्र मुर्मू केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर के पहले उपराज्यपाल थे, उन्होंने बुधवार को इस्तीफा दिया था
    चर्चा है कि मुर्मू को कैग बनाकर दिल्ली भेजा जा रहा है, क्योंकि मौजूदा कैग राजीव महर्षि इसी हफ्ते रिटायर हो रहे है

    पूर्व रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा (61) जम्मू-कश्मीर के नए उपराज्यपाल होंगे। राष्ट्रपति भवन ने यह जानकारी दी है। सिन्हा मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में रेल राज्य मंत्री और संचार राज्य मंत्री रह चुके हैं। हालांकि, पिछले साल गाजीपुर सीट से लोकसभा चुनाव हार गए थे। यूपी में 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद उनका नाम मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में भी चर्चा में आया था।

    गाजीपुर जिले के मोहनपुरा में जन्मे सिन्हा पूर्वी उत्तर प्रदेश के पिछड़े गांवों के विकास से जुड़े कामों में सक्रिय रहे थे। पॉलिटिकल करियर की शुरुआत छात्र राजनीति से हुई। 1982 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट चुने गए थे। 1989 से 1996 तक भाजपा की नेशनल काउंसिल के सदस्य रहे। 1996 में पहली बार लोकसभा पहुंचे। 2014 में उन्होंने तीसरी बार लोकसभा चुनाव जीता था।

    गिरीश चंद्र मुर्मू को कैग की जिम्मेदारी मिल सकती है
    राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गिरीश चंद्र मुर्मू का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। मुर्मू केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर के पहले उपराज्यपाल थे। उन्होंने बुधवार को इस्तीफा दे दिया था। 1985 बैच के आईएएस ऑफिसर मुर्मू गुजरात कैडर के अफसर हैं। सूत्रों के मुताबिक, मुर्मू को कॉम्पट्रॉलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया (कैग) बनाकर दिल्ली भेजा जा रहा है। फिलहाल राजीव महर्षि कैग हैं और वे इसी हफ्ते रिटायर हो रहे हैं।

    मुर्मू के अचानक इस्तीफे पर उमर अब्दुल्ला ने सवाल उठाए
    5 अगस्त यानी एक दिन पहले जब कश्मीर में धारा 370 हटने का एक साल पूरा हुआ, ठीक उसी दिन सोशल मीडिया और वॉट्सऐप ग्रुप्स पर अचानक मुर्मू के इस्तीफे की खबर वायरल हुई। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लेफ्टिनेंट गवर्नर से जुड़ी चर्चा अचानक कैसे शुरू हो गई?