Author: M Qaisar Siddiqui

  • बिहार में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल,39 अधिकारियों का तबादला,कई SDO भी बदले

    मुजफ्फर आलम। सीतामढ़ी
    बिहार सरकार के आदेश पर राज्य में बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। भारतीय प्रशासिनक सेवा के 2018 बैच के दस अधिकारियों की तैनाती की गई है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन्हें अनुमंडल पदाधिकारी के पद पर पदस्थापित किया गया है। बिहार प्रशासनिक सेवा के 39 अधिकारी भी बदले गए हैं। कुल 49 अनुमंडलों में नए अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) की तैनाती हुई है। सामान्य प्रशासन विभाग ने पदस्थापना और तबादले से संबंधित अधिसूचना रविवार को जारी कर दी। एसडीओ के पद पर तैनात वैसे पदाधिकारी जिनका कहीं और तबादला नहीं किया गया उन्हें सामान्य प्रशासन विभाग में योगदान के निर्देश दिए गए हैं।

    *10 आईएएस अफसर भी अनुमंडल पदाधिकारी के तौर पर तैनात*
    1- वैभव श्रीवास्तव को एसडीओ आरा सदर
    2- शेखर आनंद को एसडीओ बगहा
    3- निखिल धनराज को एसडीओ जहानाबाद
    4- नितिन कुमार सिंह को एसडीओ पटना सदर
    5- अनीता बैंस को एसडीओ मोहनिया
    6- अभिषेक रंजन को एसडीओ मधुबनी सदर
    7- आशुतोष द्विवेदी को एसडीओ मनिहारी
    8- विनोद दोहन को एसडीओ दानापुर
    9- श्रीमती साहिला को एसडीओ नरकटियागंज
    10- प्रतिभा रानी को एसडीओ जमुई

    *बिप्रसे के बदले गए अधिकारी*
    1- बेनीपट्टी के एसडीओ मुकेश रंजन को पटना सिटी,
    2- कहलगांव के भूमि सुधार उप समाहर्ता अनिल कुमार सिन्हा को मसौढ़ी,
    3- नवगछिया के एसडीओ मुकेश कुमार को पालीगंज,
    4- पूर्णियां सदर के भूमि सुधार उप समाहर्ता संजय कुमार सिंह को बिहारशरीफ,
    5- कृषि विभाग में उप सचिव राधा कांत को हिलसा,
    6- बिहार विकास मिशन में तैनात मनोज कुमार को सासाराम,
    7- मधुबनी सदर के एसडीओ सुनील कुमार सिंह को डेहरी,
    8- जमुई की अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी सीमा कुमारी को जगदीशपुर,
    9- बांकीपुर अंचल के कार्यपालक पदाधिकारी अमरेन्द्र कुमार को पीरो,
    10- मुजफ्फरपुर पूर्वी की अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी करिश्मा को टेकारी,
    11- मंझौल के एसडीओ दुर्गेश कुमार को अरवल,
    12- गया सदर के अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी अरुण कुमार सिंह को छपरा सदर,
    13- फुलपरास के अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी सुनील कुमार को सोनपुर,
    14- सहरसा के जिला आपूर्ति पदाधिकारी रामबाबू कुमार को महाराजगंज,
    15- एसडीओ बनमनखी राकेश कुमार को सीतामढ़ी सदर,
    16- वीरपुर के अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी नवीन कुमार को पुपरी,
    17- मढौरा के भूमि सुधार उप समाहर्ता इश्तेयाक अली को शिवहर,
    18- एसडीओ हवेली खड़गपुर संजीव कुमार को अरेराज,
    19- उपाधीक्षक पशु गणना बेबी कुमारी को जयनगर,
    20- एसडीओ समस्तीपुर सदर अशोक कुमार मंडल को बेनीपट्टी,
    21- सहरसा सदर के अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी रवीन्द्र कुमार को समस्तीपुर सदर,
    22- विक्रमगंज के अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी मो. जफर आलम को शाहपुर पटोरी,
    23- भागलपुर सदर के भूमि सुधार उप समाहर्ता ब्रजेश कुमार को रोसड़ा,
    24- किशनगंज के भूमि सुधार उप समाहर्ता मनीष कुमार को सुपौल सदर,
    25- दलसिंहसराय के अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी कुमार सत्येन्द्र यादव को वीरपुर,
    26- एसडीओ उदाकिशुनगंज शेख जियाउल हसन को त्रिवेणीगंज,
    27- दाउदनगर के भूमि सुधार उप समाहर्ता नीरज कुमार को मधेपुरा सदर,
    28- सारण के जिला पंचायतराज पदाधिकारी राजीव रंजन कुमार सिन्हा को किशनगंज,
    29- बक्सर के जिला पंचायतराज पदाधिकारी नवनील कुमार को बनमनखी,
    30- मुजफ्फरपुर पश्चिम के भूमि सुधार उप समाहर्ता सुरेन्द्र कुमार अलबेला को फारबिसगंज,
    31- जयनगर के एसडीओ शंकर शरण ओमी को कटिहार सदर,
    32- नगर विकास विभाग में उप निदेशक अखिलेश सिंह को नवगछिया,
    33- किशनगंज के भूमि सुधार उप समाहर्ता अमिताभ कुमार गुप्ता को हवेलीखड़गपुर,
    34- पकड़ीदयाल के भूमि सुधार उप समाहर्ता रणजीत कुमार को तारापुर,
    35- एसडीओ मसौढ़ी संजय कुमार को लखीसराय,
    36- एसडीओ तेघड़ा निशांत को शेखपुरा,
    37- एसडीओ शेखपुरा राकेश कुमार को तेघड़ा,
    38- नवगछिया के अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी मुकेश कुमार को मंझौल
    39- महनार के अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी अशोक कुमार गुप्ता को बखरी

  • आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के स्वच्छ,निष्पक्ष एवं सहभागितापूर्ण सफल संचालन हेतु 23 कोषांगों का हुआ गठन।

    प्रत्येक कोषांग में तेजतर्रार अधिकारियों एवं कर्मियों की हुई तैनाती।

    *प्रत्येक कोषांग के कार्य एवं दायित्व का भी हुआ निर्धारण।*

    *जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिलाधिकारी ने अधिकारियों एवं कर्मियों को अपने-अपने कोषांग के कार्यों का जवाबदेही से ससमय निष्पादन करने का दिया निर्देश।

    मुजफ्फर आलम, सीतामढ़ी
    आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के स्वच्छ निष्पक्ष सहभागितापूर्ण सफल आयोजन सुनिश्चित कराने हेतु जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिलाधिकारी ने 23 कोषांगों का गठन कर वरीय पदाधिकारी एवं नोडल पदाधिकारी सहित कर्मियों की तैनाती की गई है। सभी कोषांग को कार्य एवं दायित्व आवंटित करते हुए ससमय कार्यों
    के निष्पादन का निर्देश दिया गया है।

    कार्मिक कोषांग के वरीय नोडल पदाधिकारी के रूप में अपर समाहर्ता मुकेश कुमार तथा नोडल पदाधिकारी के रूप में निर्देशक डीआरडीए मुमुक्ष चौधरी को रखा गया है तथा उनके सहयोग के लिए कई अधिकारियों एवं कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की गई है।
    कार्मिक कोषांग का कार्य चुनाव के लिए कार्मिकों की आवश्यकता एवं उपलब्धता का आकलन कर सभी विभागों से कर्मियों की सूची प्राप्त कर डेटाबेस तैयार करना जिसके आधार पर माइक्रो ऑब्जर्वर ,पीठासीन पदाधिकारी, मतदान पदाधिकारी, मतदान पर्यवेक्षक ,मतगणना सहायक आदि की नियुक्ति पत्र निर्गत करना तथा तामिला कराना है।

    ईवीएम एवं वीवीपैट कोषांग के वरीय नोडल पदाधिकारी के रूप में अपर समाहर्ता मुकेश कुमार तथा नोडल पदाधिकारी के रूप में जिला साख्यिकी पदाधिकारी शशि कांत प्रकाश हैं तथा उनके सहयोग के लिए कई अधिकारियों एवं कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की गई है। इस कोषांग का कार्य है ईवीएम वीवीपैट की आवश्यकता एवं उपलब्धता का आकलन करना, सही भंडारण एवं सुरक्षित रखने की व्यवस्था करना है।

    स्वीप कोषांग के वरीय नोडल पदाधिकारी के रूप में उप विकास आयुक्त प्रभात कुमार तथा नोडल पदाधिकारी के रूप में निर्देशक डीआरडीए मुमुक्ष चौधरी हैं तथा उनके सहयोग के लिए कई अन्य अधिकारी एवं कर्मी की प्रतिनियुक्ति की गई है। इस कोषांग का कार्य जिला स्तरीय स्वीप प्लान तैयार करना ,मतदाता जागरूकता कार्यक्रम के तहत व्यापक जन जागरूकता के माध्यम से मतदाताओं को अपने मताधिकार के प्रयोग करने हेतु जागरुक एवं प्रेरित करना है। साथ ही मतदान की प्रक्रिया के तहत ईवीएम, वीवीपैट ,नोटा सहित कई अन्य उपयोगी विषयों के बारे में वोटर को जागरूक करना है।

    पीडब्ल्यूडी कोषांग के वरीय नोडल पदाधिकारी के रूप में उप विकास आयुक्त तथा नोडल पदाधिकारी के रूप में सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा कोषांग हैं तथा उनके सहयोग के लिए कई कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की गई है। पीडब्ल्यूडी कोषांग के द्वारा जिला स्तरीय पीडब्ल्यूडी कार्य योजना तैयार करना है। पीडब्ल्यूडी निर्वाचको के लिए हेल्पलाइन की व्यवस्था, जागरूकता कार्यक्रम तथा अन्य उपयोगी विषयों के बारे में सुविधा प्रदान करना तथा जागरुक एवं प्रेरित करना है।

    वाहन प्रबंधन कोषांग एवम सुगम के वरीय नोडल अधिकारी के रूप में अपर समाहर्ता राजस्व मुकेश कुमार तथा नोडल पदाधिकारी के रूप में जिला परिवहन पदाधिकारी महेश कुमार दासबहैं तथा उनके सहयोग के लिए कई अन्य अधिकारी एवं कर्मी तैनात हैं। निर्वाचन कार्य संपन्न कराने हेतु वाहनों की आवश्यकता एवं उपलब्धता का आकलन करना, वाहनों का अधिग्रहण करना, पंजी का संधारण करना है।

    प्रशिक्षण कोषांग के वरीय नोडल पदाधिकारी के रूप में अपर समाहर्ता सह जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी तथा नोडल पदाधिकारी के रूप में जिला भू अर्जन पदाधिकारी है। इनके सहयोग के लिए कई अन्य अधिकारी एवं कर्मी की प्रतिनियुक्ति की गई है। प्रशिक्षण कार्य का मूल कार्य जिला प्रशिक्षण कार्य योजना तैयार करना तथा चुनाव कार्य में प्रतिनियुक्त होने वाले सभी कर्मियों को समुचित प्रशिक्षण देना है।

    सामग्री प्रबंधन कोषांग के वरीय नोडल पदाधिकारी के रूप में अपर समाहर्ता सह जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी महेश कुमार दास तथा नोडल पदाधिकारी के रूप में डीसीएलआर पुपरी ललित कुमार सिंह है तथा उनके सहयोग के लिए कई अन्य अधिकारी एवं कर्मी की तैनाती की गई है। सामग्री प्रबंधन कोषांग का मुख्य कार्य चुनाव कार्य के लिए सामग्री की सूची तैयार करना तथा उपलब्धता सुनिश्चित कराना है।इसके लिए विधानसभा वार मतदान केंद्रों के लिए मतदान सामग्री का पैकेट तैयार करना तथा मतदान कर्मियों को सामग्री उपलब्ध कराना है।

    आदर्श आचार संहिता कोषांग के वरीय नोडल पदाधिकारी के रूप में अपर समाहर्ता मुकेश कुमार तथा नोडल पदाधिकारी के रूप में शम्भू नाथ अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी हैं तथा उनके सहयोग के लिए कई अन्य अधिकारी एवं कर्मी की प्रतिनियुक्ति की गई है। इस कोषांग का कार्य चुनाव प्रचार के दौरान आदर्श आचार संहिता के निर्देशों का अनुपालन कराना।

    व्यय अनुश्रवण कोषांग के वरीय नोडल पदाधिकारी के रूप में उप विकास आयुक्त तथा नोडल पदाधिकारी के रूप में राज्य कर सहायक आयुक्त है इनके सहयोग के लिए कई अन्य अधिकारी एवं कर्मी की प्रतिनियुक्ति की गई है। इस कोषांग का मुख्य कार्य व्यय लेखा पंजी संधारण हेतु प्रपत्रों का संकलन कर जांच कार्य योजना तैयार करना तथा उम्मीदवारों के व्यय लेखा पंजी के संधारण हेतु आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण देना है।

    प्रेक्षक एवं प्रोटोकॉल कोषांग के वरीय नोडल पदाधिकारी के रूप में उप विकास आयुक्त तथा नोडल पदाधिकारी निर्देशक डीआरडीए है। कई अन्य अधिकारी एवं कार्य इस कार्य में लगाए गए हैं। इस कोषांग का कार्य प्रेक्षक के आगमन पर उनके आवासन एवं सुरक्षा आदि की व्यवस्था करना तथा संपर्क पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ति करना है।

    विधि व्यवस्था प्रबंधन कोषांग के वरीय नोडल पदाधिकारी के रूप में अपर समाहर्ता मुकेश कुमार तथा नोडल पदाधिकारी शम्भूनाथ,अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी है। इनके सहयोग के लिए कई अन्य अधिकारी एवं कर्मी की तैनाती की गई है। इसका कार्य मतदान हेतु विधि व्यवस्था संधारण के लिए दंडाधिकारी एवं सशस्त्र बलों की प्रतिनियुक्ति करना तथा अर्धसैनिक बलों की आवश्यकता एवं उपलब्धता का आकलन करना है।

    मीडिया एवं एमसीएमसी कोषांग के वरीय नोडल पदाधिकारी के रूप में उप विकास आयुक्त प्रभात कुमार तथा नोडल पदाधिकारी के रूप में जिला जनसंपर्क पदाधिकारी परिमल कुमार है। इनके सहयोग के लिए अन्य अधिकारी व कर्मी की प्रतिनियुक्ति की गई है। इस कोषांग का कार्य निर्वाचन संबंधी सूचनाएं प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से जारी करना तथा राजनीतिक दलों एवं अभ्यर्थियों द्वारा चुनाव प्रचार हेतु मुद्रित पंपलेट पोस्टर बैनर एवं अन्य साधन पर सतत निगरानी रखना है।

    लाइव वेबकास्टिंग/वीडियोग्राफी /आई टी / डैशबोर्ड कोषांग के वरीय नोडल पदाधिकारी अपर समाहर्ता सह जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी महेश कुमार दास तथा नोडल पदाधिकारी डायरेक्टर डीआरडीए है। जिला संपर्क केंद्र सह वोटर हेल्पलाइन /नियंत्रण कक्ष/ के वरीय नोडल पदाधिकारी के रूप में अपर समाहर्ता सह जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी एवम नोडल पदाधिकारी अवर निर्वाचन पदाधिकारी मनोज कुमार हैं।

    मतपत्र,पोस्टल बैलट पेपर कोषांग के वरीय नोडल पदाधिकारी के रूप में अपर समाहर्ता सह जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी एवं नोडल पदाधिकारी के रूप में जिला भू अर्जन पदाधिकारी है।

    बज्रगृह कोषांग के वरीय पदाधिकारी अपर समाहर्ता मुकेश कुमार एवम नोडल पदाधिकारी जिला कोषागार पदाधिकारी है।

    केंद्रीय पुलिस बल कोषांग के वरीय नोडल पदाधिकारी के रूप में उप विकास आयुक्त तथा नोडल पदाधिकारी विशेष कार्य पदाधिकारी मुमुक्ष चौधरी हैं।
    डी ई एम पी सेल के वरीय पदाधिकारी अपर समाहर्ता मुकेश कुमार,नोडल पदाधिकारी वरीय उपसमाहर्ता अविनाश कुमार है।
    कार्मिक कल्याण कोषांग के वरीय नोडल पदाधिकारी उप विकास आयुक्त तथा नोडल पदाधिकारी के रूप में जिला शिक्षा पदाधिकारी हैं।

    निर्वाचन / मतगणना कोषांग के वरीय नोडल पदाधिकारी अपर समाहर्ता मुकेश कुमार तथा नोडल पदाधिकारी बिनोद कुमार उप निर्वाचन पदाधिकारी है।

    श्रम संसाधन कोषांग के वरीय पदाधिकारी के रूप में उप विकास आयुक्त तथा नोडल पदाधिकारी के रूप मे श्रम अधीक्षक हैं।
    एकल खिड़की कोषांग के वरीय पदाधिकारी महेश कुमार दास, जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी है। इसके नोडल पदाधिकारी जिला भू अर्जन पदाधिकारी है।
    ए एम एफ(Assured minimum facility)कोषांग के वरीय नोडल पदाधिकारी उप विकास आयुक्त तथा नोडल पदाधिकारी निर्देशक डीआरडीए हैं

  • राजस्थान कांग्रेस विवाद को लेकर बनी तीन सदस्यीय हाईपावर कमेटी के जयपुर आने को लेकर गहलोत भारी पड़ रहे है।

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    ढेड महीने पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व तत्तकालीन उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट मे मध्य खींची राजनीतिक तलवारों के बाद चले घटनाक्रमों के अंतिम पड़ाव पर सचिन पायलट की कांग्रेस मे वापसी होने के समय तय शर्तों मे से एक शर्त के अनुसार तीन सदस्यीय हाईपावर कमेटी के गठन होने के बाद जयपुर आकर मुद्दों की सुनवाई करने व कमेटी के जयपुर ना आकर दिल्ली मे ही सुनवाई करने को लेकर की जारी पायलट व गहलोत खेमे की कोशिश मे मुख्यमंत्री गहलोत खेमा भारी पड़ता नजर आ रहा है।

    हालांकि पायलट की वापसी के समय बनी सहमति को लेकर कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राजस्थान की कांग्रेस राजनीति मे घटे घटनाक्रमों व सरकार के कामकाज को लेकर अपने राजनीतिक सलाहकार व कांग्रेस के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अहमद पटेल, संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल व प्रभारी महामंत्री अजय माकन को मिलाकर तीन सदस्यीय हाईपावर कमेटी का गठन किया है। उक्त कमेटी के गठन होने के बाद सचिन पायलट की कोशिश के अनुसार उक्त कमेटी का जयपुर आकर आंकलन करने की भनक ज्योहीं मुख्यमंत्री गहलोत को लगी तो उन्होंने कमेटी का जयपुर आकर आंकलन करने की बजाय दिल्ली मे ही राजस्थान के नेताओं व विधायको को बूलाकर आंकलन करने का दवाब बनाया जिसमे अभी तक गहलोत भारी पड़ते नजर आ रहे है।

    राजस्थान को लेकर बनी तीन सदस्यीय हाईपावर कमेटी के जयपुर आकर सरकार के कामकाज व धड़ेबंदी का आंकलन करने के मुख्यमंत्री गहलोत सख्त खिलाफ बताते है। वो चाहते है कि वो कमेटी दिल्ली रहकर केवल पायलट समर्थक विधायको से ही मिलकर आंकलन करे। कमेटी के जयपुर आने से सरकार की स्थिति पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है उससे बागी हुये विधायको का मनोबल बढ सकता है। जबकि सचिन पायलट उक्त कमेटी का जयपुर आकर सुनवाई करने मे दम लगा रखा है।

    कुल मिलाकर यह है कि पीछले दिनो तीन सदस्यीय कमेटी का जयपुर आकर सूनवाई करने को लेकर घटे घटनाक्रमोंक्षके बाद लगता है कि मुख्यमंत्री गहलोत की कोशिशों का पलड़ा सचिन पायलट की कोशिशों पर भरी पड़ रहा है। कमेटी का जयपुर आकर आंकलन करने की सम्भावना क्षीण होती नजर आ रही है।

  • राजस्थान मे गहलोत-पायलट खेमे मे बंटी कांग्रेस मे शह व मात का खेल गति पकड़ने लगा।

    नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा के ग्रह क्षेत्र मे पहली दफा जाने पर अधिकांश विधायको व नेताओं के दूरी बनाने से गहलोत खेमे मे मायूसी
    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान मे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व सचिन पायलट खेमे मे कांग्रेस विधायको के बंटने पर करीब एक महीने तक चली विधायको की बाड़ेबंदी के बाद हाईकमान की पहल पर पायलट खेमे की कांग्रेस मे ससम्मान वापसी के बाद जब सचिन पायलट व उनके समर्थक विधायको के बाड़ेबंदी से आजाद होकर अपने अपने निर्वाचन क्षेत्र मे जाने पर भारी भीड़ का जमावड़ा हो रहा है वही गहलोत समर्थक विधायक अपने क्षेत्र मे चुपके से जाकर आ रहे है। गहलोत समर्थक कुछेक विधायको के पहले से कहकर अपने क्षेत्र मे जाने पर उनके कार्यक्रमों से भीड़ व कांग्रेस नेताओं ने दूरी बनाकर रखना ही उचित समझा। भीड़ व नेताओं की दूरी से उनके कार्यक्रम काफी फीके साबित हो रहे है।

    मुख्यमंत्री गहलोत खेमे के विधायक चुपचाप अपने क्षेत्र मे जा रहे है। गहलोत खेमे के शिक्षा मंत्री व नव नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा बाकायदा प्रैस रिलीज जारी करके अध्यक्ष बनने के बाद पहली दफा अपने ग्रह क्षेत्र सीकर गये तो उनके अलावा कांग्रेस के अन्य छ विधायको मे से पांच विधायको के अतिरिक्त लोकसभा उम्मीदवार ने उनके उक्त कार्यक्रम से पूरी तरह दूरी बना कर कांग्रेस नेताओं की आपसी खाई को ओर अधिक गहरी कर दिया है। डोटासरा के उक्त कार्यक्रम मे भीड़ भी अनुमान से काफी कम मुश्किल से जूट पाने से उनके दौरे का फीका रहने की चारो तरफ आम चर्चा बना हुवा है।। जबकि इसके विपरीत सचिन पायलट सहित विश्वेंद्र सिंह, रमेश मीणा व मुकेश भाखर के जयपुर से उनके निर्वाचन क्षेत्र तक गाडियों का भारी काफला साथ चला एवं निर्वाचन क्षेत्र मे काफी भीड़ स्वागत मे जमा होने से लगा कि जनसमर्थन अभी उक्त खेमे के पास ही है। इसके अतिरिक्त गहलोत खेमे के विधायक जोगेंद्र अवाना के अपने निर्वाचन क्षेत्र नदबई जाने पर कार्यक्रम मे उपस्थित लोगो ने सचिन पायलट जिंदाबाद के नारो से आसमान गुंजाये रखा।

    कुल मिलाकर यह है कि हाईकमान ने पायलट की वापसी करके केसी वेणुगोपाल को जयपुर भेज कर गहलोत-पायलट के हाथ मिलाकर अखबारों मे फोटो प्रकाशित करवाने के बाद दोनो का दिल से मिलन होना जरूर मान लिया हो। पर ढेड महिले पहले दोनो नेताओं के मध्य खींची राजनीतिक खाई अब ऊपर से निचे तक गहरी होती नजर आ रही है। दोनो धड़ो मे शह व मात का खेल अब गति पकड़ता साफ नजर आ रहा है। विधायको मे चाहे गहलोत की पकड़ पायलट के मुकाबले काफी मजबूत हो लेकिन इसके विपरीत जनता मे गहलोत के मुकाबले पायलट की पकड़ काब काफी मजबूत होना देखी जा रही है। जनता को प्रभावित करने व भाषण से जनता का जेहन बदलकर बाजी पलटने मे गहलोत काफी फिसड्डी माने जाते है। जबकि जनता के मिजाज को समझकर भाषण कला से जनता को प्रभावित कर हारी हुई बाजी को जीत मे बदलने मे पायलट के मुकाबले गहलोत कही पर भी ठहरते नही पाते है।

  • कोरोना मामले में जमातियों को बदनाम किया गया;सरकार, पुलिस और एजेंसियां करें पश्चाताप:बॉम्बे हाईकोर्ट

    बांबे हाईकोर्ट और मरकज में भाग लेने वाले जमात के लोग।
    तबलीगी जमात वाले आपको याद हैं? आपको याद नहीं हैं तो हम बताते हैं कि इन्हीं पर यानी तबलीगी जमात की वजह से भारत के समस्त मुसलमानों पर कोरोना फैलाने का आरोप प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने लगाया था। बॉलीवुड ऐक्टर सुशांत सिंह राजपूत की खुदकुशी को रहस्यमय मौत बनाने वाले मीडिया की बहस से ठीक पहले टीवी डिबेट का हिस्सा कोरोाना फैलाने वाला तबलीगी जमात ही हुआ करती थी। बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार 21 अगस्त को एक ऐतिहासिक आदेश अपनी सख्त टिप्पणियों के साथ जारी किया।

    बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि कोरोना मामले में तबलीगी जमात में विदेश से आये जमातियों को बलि का बकरा बनाया गया। और मीडिया ने सोची समझी साज़िश के तहत तबलीगी जमात वालों को बदनाम किया। इसके साथ ही कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज सारे एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया। बता दें कि दिल्ली में तबलीगी जमात के निजामुद्दीन मरकज में कुछ विदेशी मुस्लिम आये थे। कोविड-19 फैलाने का आरोप इन्हीं पर लगा और धीरे-धीरे पूरे देश में मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने का यह हथियार बन गया था।
    हाईकोर्ट का यह फैसला शुक्रवार को आया था बावजूद इसके कथित मुख्यधारा के मीडिया में इस खबर को दबा दिया गया। किसी टीवी बहस में ज़िक्र तक नहीं हुआ। भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मोदी भक्त के तौर पर जाने जाने वाले अर्णब गोस्वामी, सुधीर चौधरी, अंजना ओम कश्यप, रोहित सरदाना जैसे पत्रकारों ने इस बड़ी खबर पर चुप्पी साध ली।
    हाई कोर्ट के जस्टिस टीवी नलवडे और जस्टिस एमजी सेवलीकर की बेंच ने कहा – भारत में इस संक्रमित बीमारी के जो ताजा आंकड़े और हालात हैं वे बता रहे हैं कि याचिकाकर्ताओं (विदेश से आए तबलीगी जमात) पर जो कार्रवाई की गई, वह नहीं ली जानी चाहिए थी। अभी भी समय है संबंधित लोग (सरकार, पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां) अपनी इस गलती पर पश्चाताप करें और इस संबंध में कुछ पॉजिटिव कदम उठाकर उस नुकसान की भरपाई करें।

    इस बात को गौर से पढ़िए। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि वीजा नियमों में यह कहीं नहीं लिखा है कि विदेश से आने वाला किसी धार्मिक स्थल पर नहीं जा सकता और न ही ऐसी किसी सामान्य धार्मिक गतिविधि में भाग ले सकता है। विदेश से आये जमाती जिन जिन शहरों में गये, उन्होंने अपनी आमद की जानकारी उस शहर की पुलिस को दी। उन्होंने कुछ भी छिपाने की कोशिश नहीं की। इस बात के तथ्य और सबूत मौजूद हैं कि हर शहर की पुलिस को पूरी जानकारी और सूचना थी कि विदेश से जमाती किस लिए आये हैं। उन्हें यह भी सूचना और जानकारी है कि इस मरकज में क्या होता है। वहां सब कुछ सार्वजनिक होता है और कोई भी जाकर वहां देख सकता है।

    कोर्ट ने कहा कि दिल्ली के मरकज में आये जमातियों के खिलाफ प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (यानी अखबार और टीवी न्यूज चैनल) ने बहुत बड़ा प्रचार अभियान चलाया। इससे यह संदेश गया कि भारत में कोविड19 फैलाने में विदेश से आये जमातियों का हाथ है।

    पाठकों को याद होगा कि जब नफरत फैलाने वाले टीवी चैनलों के दफ्तर में कई पत्रकार और वहां के कुछ कर्मचारी कोरोना की चपेट में आये, उसके बावजूद आज तक, जी न्यूज, रिपब्लिक, टाइम्स नाऊ, इंडिया टुडे जैसे चैनलों ने माफी नहीं मांगी। हालांकि उन्हें उस वक्त तक यह अच्छी तरह मालूम हो चुका था कि कम से कम जमाती उनके चैनलों में कोरोना फैलाने नहीं आये। खुद को देश का अग्रणी अखबार बताने वालों के संपादकों ने नफरत की इस आंधी को बढ़ावा दिया। दूर दराज के कस्बों से जमातियों की गिरफ्तारी बड़ी खबर बनाकर लगाई गई। कई अखबारों के दफ्तर भी कोरोना की चपेट में आये लेकिन किसी संपादक ने अभी तक जमातियों और मुसलमानों से नफरत की इन झूठी खबरों के लिए माफी नहीं मांगी।(इनपुट जनचौक)

  • शिवम रॉय प्रभाकर की फिल्म’द थर्ड हैकर’की रिलीज डेट बढ़ सकती है आगे

    MT News Network:कोरोनोवायरस लॉकडाउन के कारण बॉलीवुड की बहुत सारी फिल्में स्थगित हो गई हैं। कोरोना वायरस ने न केवल फिल्मों की शूटिंग को प्रभावित किया बल्कि फिल्म निर्माताओं को अपनी फिल्में रिलीज करने में भी बहुत मुश्किल हो रही है।

    हाल ही में अभिनेता शिवम रॉय प्रभाकर (Shivam Roy Prabhakar) ने साझा किया कि कोरोनोवायरस लॉकडाउन के कारण उनकी फिल्म द थर्ड हैकर (The Third Hacker) कैसे पूरी तरह से शूट नही किया जा सका । उन्होंने बताया कि फ़िल्म का एक शूटिंग शेड्यूल रह गया था। लेकिन बाद में कोरोनोवायरस लॉकडॉन के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था।

    न्यूज़ वेबसाइट https://estradeherald.com के अनुसार, फिल्म 13 नवंबर को रिलीज होने जा रही थी क्योंकि निर्माता लक्ष्मण सिंह राजपूत (Laxman Singh Rajput) ने पहले ही रिलीज की तारीख की घोषणा कर दी थी। लेकिन फिल्म पूर्ण न हो पाने की वजह से इसे उस तारीख पर रिलीज नही किया जा सकेगा।

    फिल्म द थर्ड हैकर (The Third Hacker) सागर जोशी (Sagar Joshi) द्वारा निर्देशित है। फिल्म एक टीनएजर लड़के पर आधारित है जो एक इंजीनियर छात्र है। लड़का कंप्यूटर गेम का आदी है और बाद में वह कुछ कारणों से एथिकल हैकिंग की ओर मुड़ जाता है। फिल्म दिखाती है कि इंटरनेट गतिविधियां हमारे लिए कितनी खतरनाक हो सकती हैं।

  • राजस्थान मे भाजपा व कांग्रेस मे वर्तमान समय मे सबकुछ ठीक नही चलता नजर आ रहा

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान कांग्रेस के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व सचिन पायलट खेमे मे बंटने के बाद पार्टी की होती किरकिरी पर हाईकमान द्वारा समझदारी दिखाते हुये उचित ऐक्शन लेकर मसले को कुछ हद तक ऊपरी तोर सुलझा कर एक तरह उभाल शांत कर लेने का संकेत दिया है। लेकिन राजस्थान भाजपा के नेताओं मे आपसी टकराव धीरे धीरे उफान खाने से लगता है कि भाजपा जैसी अनुशासित पार्टी मे सर्वेसर्वा बनने के चक्कर मे सबकुछ ठीक नही चलता नजर आ रहा है।

    इसी 14-अगस्त को विधानसभा मे कांग्रेस सरकार द्वारा लाये गये विश्वास प्रस्ताव के पास होने के ऐनवक्त के पहले भाजपा के गोपीचंद मीणा, कैलाश मीणा, हरेंद्र नीमामा व गौतम मीणा नामक चार विधायको का अचानक सदन से गायब हो जाना एवं पूर्व मुख्यमंत्री राजे द्वारा भाजपा के पूर्व विधायक व सांसदो सहित नेताओं को फोन करके या करवा कर उनसे जयपुर उनके निवास पर मिलने आना को कहने से लगता है कि कांग्रेस मे गहलोत की तरह वसुंधरा राजे भी मुखीया बनने का मोह किसी किमत पर अभी भी छोड़ना नही चाहती है। जबकि भाजपा मे राजे के मुकाबले प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनीया व संघ समर्थक नेताओं का अलग बना धड़ा अब राजे से अधिक अपने को मजबूत मानकर आगामी चुनाव के लिये रणनीति बनाने मे लगा हुवा बताते है। राजनीति के पंडित कहते है कि गहलोत व राजे की पार्टी के प्रति निष्ठा होने का ठीक से आंकलन तब हो पायेगा जब उनकी पार्टी के सत्ता मे आने पर उनको मुख्यमंत्री बनाने से मना किया जायेगा। तब वो पार्टी के साथ रहते है या बगावत करके अलग धड़ा बनाकर दुसरो से मिलकर सत्ता का मुखीया बनने की कोशिश मे लगते है।

    उधर कांग्रेस मे सचिन पायलट के प्रति बिगड़े बोलो से बैकफुट पर आये मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सचिन पायलट की वापसी व प्रभारी महामंत्री अविनाश पाण्डे की विदाई करके अजय माकन को प्रभारी महामंत्री बनने के अलावा राजस्थान के सम्बंधित मामलो की सुनवाई करने के लिये तीन सदस्यीय हाई पावर कमेटी के गठन से गहरा धक्का लगा है। पायलट के वापस आने व कमेटी गठन से गहलोत काफी सकते मे आकर अपनी जबान पर लगता है कि चाहे कुछ समय के लिये ही सही पर ताला लगा लिया है। जबकि पायलट ने 19-अगस्त को साधारण विधायक की हेसियत से अपने निर्वाचन क्षेत्र टोंक की यात्रा करके प्रदेश भर की यात्रा की शुरुआत करने पर उन्हें मिले भारी जन समर्थन से गहलोत खेमे की एक दफा तो नींद उडा दी है। गहलोत की जनता मे कोई खास पकड़ नही होने के साथ साथ उन्हें कोई अच्छा वक्ता भी नही माना जाता है। गहलोत को अब तक दिल्ली हाईकमान को ढंग से मेनेज करने वाला नेता के तोर पर देखा जाता रहा जो अब वो पकड़ भी कमजोर होती दिख रही है।

    कुल मिलाकर यह है कि राजस्थान मे कांग्रेस व भाजपा मे वर्तमान समय मे सबकुछ ठीक चलता नजर नही आ रहा है। अशोक गहलोत व वसुंधरा राजे को उनकी ही पार्टी से मजबूत चेलैंज मिलने लगा है। वही सचिन पायलट भी अब तीसरे नेता के तौर पर प्रदेश मे उभरते नजर आने लगे है। अगर पायलट ने राजस्थान भर का दौरा इसी तरह जारी रखा तो उनको मिलते भारी जनसमर्थन से गहलोत खेमे की काफी हद तक नींद उड जाने के साथ साथ उनके द्वारा मनोनीत करवाये प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा की भी पद से हटने की खबर सूननी पड़ सकती है।

  • आज मुहर्रम का चांद नजर आया: शाही इमाम पंजाब

    लुधियाना 20 अगस्त (मेराज़ आलम) आज यहां लुधियाना की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में रुअते हिलाल (चांद देखने वाली) कमेटी पंजाब की मीटिंग शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी की अध्यक्षता में हुई। जिसमे देश भर से विभिन्न रूअते हिलाल कमेटियों की ओर से प्राप्त हुई जानकारी के अनुसार मुहर्रम उल हराम का चांद नजर आने की तसदीक की गई । शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने इस्लामी नववर्ष की बधाई देते हुए ऐलान किया कि 21 अगस्त को इस्लामी नववर्ष की एक तारीख है,और दस मुहर्रम उल हराम यौमे आशूरा का दिन 30 अगस्त दिन रविवार को होगा।

  • राजस्थान के मुस्लिम समुदाय मे भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों (IAS) के अन्य प्रदेशो से राजस्थान केडर मे आने से बदलाव देखा जा रहा है।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान के मुस्लिम समुदाय से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) मे सीधे तौर पर चयनित चंद अधिकारियों मे से किसी एक को भी अभी तक राजस्थान केडर एलाट नही हो पाया है। लेकिन 1976 मे गाजीपुर यूपी के नवाब खानदान से तालूक रखने वाले सलाऊद्दीन अहमद खान IAS सीधे तौर पर चयनित होकर राजस्थान केडर मे पदस्थापित होने के सालो साल बाद जम्मू काशमीर के कमरुल जमन चोधरी, फिर जम्मू काश्मीर के ही अतर आमिर व फिर केरल के मोहम्मद जुनेद राजस्थान केडर मे बतोर आईऐएस पदस्थापित होने के बाद राजस्थान मे शेक्षणिक व आर्थिक तौर पर पीछड़े मुस्लिम समुदाय मे भी भारतीय सिविल सेवा की परीक्षा देने का चलन जौर पकड़ने लगा है। चाहे अभ्यार्थी आईऐएस कभी कभार ही बन पा रहे हो लेकिन उक्त अधिकारियों की मोजूदगी मात्र से प्रभावित होकर जो युवक-युवती उक्त परिक्षाऐ दे रहे वो एलाईड सेवा मे जरूर स्थान पा रहे है।

    कल चोदाह आईऐएस की जारी सुची मे केरला के मलापुरम के रहने वाले मोहम्मद जुनेद को झालावाड़ उपखण्ड अधिकारी पद पर पदस्थापित होने के आदेश मिले है। जबकि इससे पहले इसी महीने जारी अन्य तबादला सूची मे अतर आमिर व कमर चोधरी को भी श्रीगंगानगर व उदयपुर पदस्थापित होने के आदेश मिले है।

    सीधे तोर पर चयनित आईऐएस अधिकारी सलाऊद्दीन अहमद खान राजस्थान मे पहले मुस्लिम पदस्थापित अधिकारी होने के बाद वो मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त होकर अब जयपुर मे ही अधिकांशतः निवास करते है। उनके सालो साल बाद सीधे तोर पर IAS चयनित होकर आये कमरुल जमा चोधरी, अतर आमिर, व मोहम्मद जुनेद अभी नये नये है। जिनमे से अभी किसी को भी जिला कलेक्टर पद पर रहने का अवसर नही मिल पाया है।

    भारतीय सिविल सेवा परीक्षा पास करके राजस्थान मे पदस्थापित होने वाले उक्त चारो अधिकारियों के अलावा राजस्थान प्रशासनिक सेवा व अदर सर्विसेज कोटे मे तरक्की पाकर भी अनेक मुस्लिम अधिकारी आईऐएस बने है। जिनमे वर्तमान मे हनुमानगढ़ कलेक्टर जाकीर हुसैन व झूंझुनू कलेक्टर उमरदीन खान भी है। उक्त दोनो वर्तमान जिला कलेक्टरस के अलावा जे.एम खान, एम.एस.खान, ऐ.आर खान, अशफाक हुसैन व शफी मोहम्मद कुरेशी भी भारतीय प्रशासनिक सेवा IAS अधिकारी रहे है। यह सभी जिला कलेक्टर पद पर पदस्थापित रह चुके है। इनके अलावा मोहम्मद हनीफ भी तरक्की पाकर भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी रहे है।

    कुल मिलाकर यह है कि उक्त उल्लेखित आईऐएस अधिकारियों के अलावा राजस्थान गठन के समय रियासतों के विलय के समय रियासतो से आईऐएस समान स्तर के छ मुस्लिम अधिकारी भी राजस्थान मे पदस्थापित रहे है जिनमे अलाऊद्दीन खिलजी व रहमत अली जाफरी जिला कलेक्टर भी रहे है। लेकिन अब सीवे तोर पर यूपीएससी द्वारा चयनित आईऐएस अधिकारियों के राजस्थान केडर मे पदस्थापित होने से राजस्थान के मुस्लिम समुदाय के युवाओं मे भारतीय सिविल सेवा की परीक्षा देने के प्रति लगाव बढने लगा है।

  • राजीव गांधी हर वर्ग की आवाज थे,देश के विकास के सूत्रधार थे:चौधरी आफताब अहमद

    हरियाणा कांग्रेस विधायक दल के उप नेता चौ. आफताब अहमद ने भारत रत्न स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के 75 वें जन्मदिन सदभावना दिवस पर खिराजे अकीदत पेश करते हुए उन्हें लेख समर्पित किया है:

    देश के छठे प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की 75 वीं सालगिरह पर देश उन्हें याद कर रहा है, और याद कर रहा है उनके उस दौर को भी जिसमें लोकतंत्र, संविधान, धर्मनिरपेक्षता, विकास सब का बोलबाला था। आज के दौर में भले ही लोकतंत्र, संविधान, धर्मनिरपेक्षता, विकास मौजूदा सरकार के लिए कोई खास अहमियत नहीं रखते हैं। लेकिन किसी भी मुल्क की तरक्की में इन सभी का होना बड़ा जरूरी है।

    स्वर्गीय राजीव गांधी सभी के आदर्श व्यक्ति हैं, वो आधुनिक भारत के निर्माता थे जिन्होंने कम्प्यूट्रीकृत युग का सपना देखा फिर उसे पूरा करने के लिए अपना जीवन न्याछौवर कर दिया। आज उन्ही के मेहनत और लगन से हम एक क्लिक पर ही सारे काम आसानी से कर सकते हैं । उनके योगदान को भारतवासी कभी भुला नहीं सकता। उनके द्वारा देश की उन्नति के कार्यो की जितना तारीफ की जाए वो कम है।आज ऐसे प्रधानमंत्री कहीं देखने को नहीं मिलते ये केवल दुर्भाग्य ही है।

    स्वर्गीय राजीव गांधी में परिस्थितियों को परखने, समझने और निर्णय लेने की अद्भुत क्षमता थी। इस महान् नेता की निष्छलता एवं प्राकृतिक सेवा की प्रवृत्ति ने भारत को दुनिया की एक सृदृढ़ शक्ति के रूप में स्थापित किया। भारत रत्न राजीव एक संवेदनशील, कोमल दिल के महान् नेता थे, जो उनके दिल में होता था वही जबान पर होता था, आज तो नेता केवल जुमलेबजी तक ही सीमित रह गए हैं। आज के भारत की कल्पना सिर्फ भाषण की लफ्फाजी नहीं थी बल्कि इसके परिप्रेक्ष्य में नीहित एक कल्पनाशीलता एवं नियोजन था, इस नियोजन को कार्यक्रम में परिवर्तित करने के लिए राजीवजी ने अपने जीवन को समर्पित कर दिया।

    देश में पंचायत राज की व्यवस्था, औद्योगिक क्रान्ति, हर हाथ को रोजगार, संचार युग की क्रान्ति, सूचना युग का भारत में प्रतिस्थापन हो, अन्र्तराष्ट्रीय स्तर पर भारत की मजबूत स्थिति जैसे क्रांतिकारी कदम एवं उनका क्रियान्यवन भारत के लिए वरदान साबित हुए हैं ।
    आज देश अगर दुनिया में एक मजबूत देश के रूप में जाना जाता है तो वो राजीव गाँधी की मेहनत का फल है।

    इंदिराजी की हत्या के बाद राष्ट्र की पूरी जिम्मेदारी राजीव गांधी के युवा और मजबूत कंधों पर आ गई। जब सारा देश जल रहा था उस समय देश को एक धेर्येशील मार्ग एवं सांत्वना की आवश्यकता थी, अचानक ही देश को एक प्रखर, उज्जवल, महाव्यक्तित्व से साक्षात्कार हुआ वे थे देश के नये प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी। राजीव जी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि ‘‘वह केवल मेरी मां ही नहीं हम सब की मां थी, हिंसा, घृणा व देश से इंदिरा जी की आत्मा को दुख पहुंचता था, आप शांत रहे और धैर्य से काम ले’’। उनके इन शब्दों का देश के नागरिकों पर जादुई असर हुआ, लोगों के आंसू थमने लगे। ये उनके व्यक्तित्व का ही प्रभाव था कि देश में नफरत की आंधी रूक सी गई।

    अमेरिका की पत्रिका ने राजीव जी को दुनिया का सबसे लोकप्रिय व्यक्तित्व का खिताब देते हुए लिखा था कि ‘‘राजीव गांधी पूरब के सूरज है जिनसे पश्चिमी सभ्यता और संस्कृति को एक सांस्कृतिक, वैचारिक प्रकाष प्राप्त होगा’’।उसी विदेशी अखबार ने उनके निधन पर लिखा था कि ‘‘पूरब का सूरज दोपहर से पहले ही अस्त हो गया’’।

    राजीव गांधी के मन मे यह विचार बसा हुआ था कि भारत के निर्माण और ऊर्जा में बढ़ोत्तरी के लिये युवाओं को प्रोत्साहन और जिम्मेदारी सौंपना जरुरी है, इसलिए उन्होंने तमाम अन्र्तविरोधों की दरकिनार करते हुए युवाओं को 18 वर्ष में मताधिकार का अधिकार प्रदान किया। युवाओं के लिए अनंत संभावनाओं का भण्डार विकसित करने के लिए देश में आई.टी. संस्कृति को बढ़ावा दिया था । आज आधुनिक टेक्नोलॉजी से हम विश्व की विकास दर से कदम मिला रहे है।
    उस वक़्त विपक्ष ने बैलगाड़ी से संसद पहुच कर राजीव जी के सपनो का उपहास उड़ाया था लेकिन उन्होंने परवाह न करते हुए आज देश को एक नए मुकाम पर पहुचाया है । आज बीजेपी सरकार के छह सालों के गलत फैसलों के कारण युवा बेरोजगार है, मंहगाई आसमान छू रही है, किसान मर रहे हैं, महिलाएं महफूज़ नहीं है, देश की जीडीपी लुड़क गई है।

    इस समय देश को राजीव जी की याद आती है जो एक मौन कर्मषील व्यक्तित्व के धनी थे, जिनके भाषण में सच और भोलापन था, कुटिलता बिलकुल नहीं थी, जो फैसलें लेने में निडर और निर्णयों को क्रियान्वित करने में देर नहीं करते थे। यह भारत का दुर्भाग्य ही है जब भी इस देश में गैर कांग्रेसी सरकारें बनी है भारत की तरक्की और अन्तराष्ट्रीय छवि में धूमिलता ही आई है।

    ( इस लेख के लेखक कांग्रेस विधायक दल के उप नेता, नूह विधायक चौधरी आफताब अहमद हैं )