Author: M Qaisar Siddiqui

  • भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की वकालत करने वाले जज को तुरंत इस्तीफ़ा देना चाहिए

    भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की वकालत करने वाले जज को तुरंत इस्तीफ़ा देना चाहिए

    जज जस्टिस सुदीप रंजन सेन

    मेघालय हाई कोर्ट के जज जस्टिस सुदीप रंजन सेन ने सफाई दी है कि भारत का संविधान धर्म निरपेक्षता की बात करता है और देश का बंटवारा धर्म, जाति, नस्ल, समुदाय या भाषा के आधार पर नहीं होना चाहिए.

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: जस्टिस सेन ने 14 तारीख को अपने आदेश से जुड़ी सफाई जारी की जिसमें उन्होंने लिखा, “धर्मनिरपेक्षता भारतीय संविधान के मूल स्तंभों में है और मेरे आदेश को किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ा या उसके संदर्भ में नहीं समझा जाना चाहिए.”

    इससे पहले 10 दिसंबर को नागरिकता सर्टिफिकेट जारी करने से जुड़े एक मामले की सुनवाई के बाद उन्होंने जो आदेश दिया उसमें उन्होंने लिखा था कि भारत को हिंदू राष्ट्र होना चाहिए था.

    आदेश में लिखा था, “आज़ादी के बाद भारत और पाकिस्तान का बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ था. पाकिस्तान ने स्वयं को इस्लामिक देश घोषित किया और इसी तरह भारत को भी हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए था, लेकिन ये एक धर्मनिरपेक्ष देश बना रहा.”

    जस्टिस सेन के आदेश को लेकर विवाद छिड़ा और कई हलकों में इसकी आलोचना हुई. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने कहा कि ये संविधान की अवधारणा के विपरीत है.

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    दलित नेता जिन्नेश मेवाणी और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी इसकी आलोचना की.
    जिन्नेश मेवाणी ने कहा कि इससे साफ संदेश मिल रहा है कि सिर्फ़ एक तबके के लोगों के लिए ही न्याय है. प्रशांत भूषण ने कहा कि इस तरह के बयानों से न्यायपलिका पर लोगों का भरोसा कम होगा.

    ऑल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुसलमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत विभिन्न संप्रदायों के लोगों से मिलकर बना एक देश है जो कभी इस्लामिक राष्ट्र नहीं बनेगा.

    इस मुद्दे पर संविधान विशेषज्ञ एजी नूरानी का कहना है कि जस्टिस सेन का आदेश भारत के संविधान का उल्लंघन है. पढ़िए, उनका नज़रिया –
    जस्टिस सेन ने 10 दिसंबर को दिए अपने आदेश में भारत के हिंदू राष्ट्र होने का समर्थन किया था. इसके बाद उन्होंने इस पर अपनी सफाई भी दी है लेकिन उनका आदेश दो तरीके से भारतीय संविधान का उल्लंघन है.

    पहला तो ये कि संविधान की प्रस्तावना में ही ये घोषणा की गई है कि भारत एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है. जस्टिस सेन के सामने हमेशा ही ये रास्ता खुला है कि वो अपने पद से इस्तीफ़ा दें और उसके बाद भारत के हिंदू राष्ट्र होने का समर्थन करें.

    एक महत्वपूर्ण पद पर आसीन होकर (एक बेंच का हिस्सा होते हुए) वो इस तरह की बात नहीं कर सकते क्योंकि अगर वो न्यायपालिका में किसी भी पद पर काम करना स्वीकार करते हैं तो वो पहले ये शपथ लेते हैं कि वो संविधान का पालन करेंगे.

    दूसरा ये कि उनका शपथ लेकर अपने पद पर काम करना उन्हें इस बात कि बाध्य करता है लोगों में भेदभाव ना करें और सभी से समान व्यवहार करें.

    जज की परिभाषा के आधार पर देखें तो अगर एक जज हिंदू राष्ट्र के हिमायती हैं तो वो पक्षपात कर रहे हैं.
    क्या ग़लत किया जज ने
    वो इस तथ्य से कतई अनजान नहीं हो सकते कि ये एक ऐसा मुद्दा है जिस पर राजनीतिक पार्टी बीजेपी और अन्य पार्टियों में मतभेद हैं. एक तरफ जहां बीजेपी हिंदुत्व की समर्थक है अन्य पार्टियां इसके विरुद्ध खड़ी हैं.

    अपने बयान के कारण वो आज उसी जगह पर हैं जिसके बारे में एक बार ब्रितानी जज जस्टिस लॉर्ड डैनिंग ने कहा था कि “मैदान में उतरे भी और फिर विवाद की वजह से उड़ रही धूल से अंधे भी हो गए.”

    उनके ख़िलाफ़ महाभियोग का प्रस्ताव लाया जाना चाहिए या नहीं ये और बात है लेकिन इसमें दोराय नहीं कि उन्होंने उन लोगों का भरोसा खो दिया है जो संविधान पर भरोसा करते हैं. हालांकि ये उम्मीद की जानी चाहिए कि उनके ख़िलाफ महाभियोग लाया जाएगा.

    मैं आपको एक उदाहरण देना चाहता हूं. 1981 में कोलंबिया की सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस टॉमस बर्गर को उनके पद से हटा दिया गया था. देश के वरिष्ठ 27 जजों वाली कनाडाई ज्यूडिशियल काउंसिल ने फ़ैसला सुनाया, “राजनीतिक मसलों से संबंधित ऐसे मामलों पर जस्टिस बर्गर का अपनी राय रखना अविवोकपूर्ण था जिन पर पहले ही विवाद है.”

    इस मामले का जिक्र कई बार अदालतों में किया जाता है.
    हिंदू राष्ट्र पर जस्टिस सेन का हालिया बयान इसी वाकये की श्रेणी में सटीक बैठता है. ख़ास कर इस बात को ध्यान में रखते हुए कि जस्टिस सेन ने ना तो इसके लिए सांकेतिक भाषा का इस्तेमाल क्या ना ही छिपे शब्दों में ऐसा कुछ कहा. उन्होंने साफ तौर पर अपने शब्दों में हिंदू राष्ट्र की हिमायत की.

    ‘राष्ट्र सर्वोच्च है और राष्ट्र का नाम हिंदू राष्ट्र है’
    क्या सनातन संस्था ‘उग्र हिंदुत्व’ की वर्कशॉप है?
    कनाडा के चीफ़ जस्टिस से जस्टिस टॉमस बर्गर के ख़िलाफ़ शिकायत कनाडा फेडेलर कोर्ट के एक दूसरे जज ने थी. ये जज कनाडाई ज्यूडिशियल कमिटी के चेयरमैन थे.

    जस्टिस सेन के बयान से नाराज़गी इस उदाहरण के मद्देनज़र समझी जा सकती है.
    न्यायपालिका से संबंधित क़ानून (जजेस एक्ट) के तहत कनाडाई ज्यूडिशियल काउंसिल का गठन किया गया था. ये दुर्भाग्य की बात है कि भारत में जजों के लिए इस तरह की कोई अनुशासनात्मक समिति नहीं है.

    और रह बात भारतीय जजों की तो वो अपनी ताकत, अथॉरिटी और सम्मान को ले कर कभी-कभी संवेदनशील हो जाते हैं.
    जस्टिस बर्गर ने खुद के बचाव की कोशिश की थी. उनका कहना था, “जो मैंने किया वो अपारंपरिक था लेकिन ये किसी भी मायने में राजनीति की तरफ इशारा नहीं था.”

    उनकी इस दलील को बेतुकी माना गया था और सभी ने से खारिज कर दिया था. उन्होंने कई मामलों का ज़िक्र करकते हुए इस पर लंबी दलील दी थी लेकिन उसे माना नहीं गया.

    ज्यूडिशियल काउंसिल ने इस मामले में जांच करने के लिए जीन जजों की एक समिति बनाई. इस समिति की रिपोर्ट मे कहा गया, “कानून के इतिहास से जो सिद्धांत उभरता है वो ये है कि राजनीतिक और क़ानूनी दायरे अलग हैं और इन्हें स्पष्ट रूप से अलग ही रहना चाहिए और संसदीय लोकतंत्र का इस मौलिक आधार का उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए.”

    क्या ये दलील भारतीय जज पर भी लागू नहीं की जानी चाहिए?
    सफ़ाई स्वीकार्य नहीं
    समिति का कहना था, “न्यायपालिका की स्वतंत्रता और शक्तियों को अलग करने के लिए किए गए लंबे संघर्ष का इतिहास ये बताता है कि न्यायाधीशों को राजनीतिक हस्तक्षेप से स्वतंत्र होना चाहिए. साथ ही राजनेताओं को न्यायिक हस्तक्षेप से स्वतंत्र होना चाहिए.”

    “इसके साथ ही ये महत्वपूर्ण है कि न्यायाधीशों की निष्पक्षता पर लोगों का विश्वास कायम रहे.”

    जस्टिस बर्गर के केस में रिपोर्ट में कहा गया कि उन्होंने राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषय पर अपने विचार व्यक्त करने के लिए अपने कार्यालय को इस्तेमाल किया.

    सार ये है कि इस ऐतिहासिक मामले का हर शब्द टिप्पणी करने वाले हाई कोर्ट के जज पर भी लागू होता है.
    रिपोर्ट में कहा गया, “जज का यह तर्क या बहाना स्वीकार्य नहीं है कि उसने अंतरात्मा के आधार पर कोई बात कही. हर राजनीतिक विषय पर जजों के अपने निजी विचार हो सकते हैं. अगर जस्टिस बर्गर के विचारों का स्वीकार किया जाए तो हो सकता है बाक़ी जज ऐसे बयान देने लगेंगे जो एक-दूसरे से अलग होंगे.”

    अगर जज एक-दूसरे से सार्वजनिक तौर पर बहस करने लगेंगे तो जनता के मन में उनके प्रति सम्मान पर क्या असर होगा?
    ऊपर से राजनेता और मीडिया ख़ामोश नहीं रहेंगे. वे भी अखाड़े में कूद पड़ेंगे जज को अपने बयान की सफ़ाई में इस तरह से उतरना पड़ेगा मानो वह ख़ुद उस विवादित विषय में एक पक्ष हों.

    ऐसे में इस मामले (मेघालय हाई कोर्ट के जज वाले) में अगर कुछ नहीं होता है तो न्यायिक स्वतंत्रता और मर्यादा को नुक़सान पहुंचेगा. ऐसा होने से रोकना है तो किसी को सुप्रीम कोर्ट जाना होगा और मांग करनी होगी कि ग़लती करने वाले इस जज के संबंध में उचित क़दम उठाए जाएं.

    सभी को करनी चाहिए आलोचना
    साथ ही बार एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया को बोलना चाहिए. अफ़सोस है कि मीडिया इस विषय पर ख़ामोश है. मीडिया, बार और बेंच को इसकी निंदा करनी चाहिए.

    अगर कोई जज किसी महत्वपूर्ण विषय पर अपनी अंतरात्मा की आवाज़ को अनसुना नहीं कर पा रहा है और उसे लगता है कि उसे इस विषय में बोनला चाहिए तो उसे जज के तौर पर बात नहीं करनी चाहिए.

    अगर वह चाहता है कि किसी तरह का विवाद खड़ा न हो तो उसे इस्तीफ़ा देना चाहिए और फिर अखाड़े में उतरना चाहिए ताकि बाद में न्यायपालिका के बजाय बात उसी पर आए.

    ऐसे में इन जज को शालीनता से पद छोड़ देना चाहिए. जो कुछ उन्होंने कहा है, उनके शब्दों ने उन्हें हाई कोर्ट बेंच में बने रहने लायक नहीं छोड़ा है.

    उन्होंने 14 दिसंबर को अपने बचाव में जो बातें कहीं, उनका भी कोई मतलब नहीं है. हिंदू राष्ट्र की वकालत करने का मतलब यह कहना है कि संविधान ग़लत है.

    ऐसा ही आरएसएस कहता है कि ये संविधान तो अंग्रेज़ी है और हमारा अपना स्वदेशी संविधान होना चाहिए.

    इस विषय में डॉक्टर बीआर आंबेडकर की वह बात याद आती है जो उन्होंने ‘पाकिस्तान ऑर पार्टिशन ऑफ़ इंडिया में लिखी थी- “हिंदू राष्ट्र बनना भारत के लिए विनाशकारी होगा.”

  • मप्र:कमलनाथ ने मुख्यमंत्री बनते हैं किसानों का कर्ज किया माफ शुरू हो गई अपने वादों को निभाने की शुरुआत

    मप्र:कमलनाथ ने मुख्यमंत्री बनते हैं किसानों का कर्ज किया माफ शुरू हो गई अपने वादों को निभाने की शुरुआत

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:मध्य प्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद कमलनाथ एक्शन में आ गए हैं। उन्होंने किसानों की कर्ज माफी वाली फाइल पर साइन कर दिए हैं। यह जानकारी न्यूज एजेंसी एएनआई ने दी। बता दें कि चुनाव से पहले कांग्रेस ने किसानों की कर्ज माफी करने का वादा किया था।


    इससे पहले सोमवार दोपहर को कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ ने सोमवार दोपहर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उन्हें शहर के जम्बूरी मैदान में एक भव्य समारोह में शपथ दिलाई

    कमलनाथ ने हिन्दी में शपथ ली और अकेले शपथ ग्रहण किया। उनके मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले मंत्रियों को बाद में शपथ दिलाई जाएगी। शपथ ग्रहण समारोह में राहुल गांधी, कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के मंच पर आते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हर्षोउल्लस के साथ जमकर नारे लगाये।

    शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित संप्रग के कई दिग्गज नेता मौजूद थे, जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी, पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी, द्रमुक नेता एम के स्टालिन, तेलुगू देशम पार्टी के प्रमुख और आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चन्द्रबाबू नायडू, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, लोकतांत्रिक जनता दल के नेता शरद यादव, बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता शरद पवार, प्रफुल्ल पटेल, नेशनल कांफ्रेस के नेता फारूख अब्दुल्ला, तृणमूल कांग्रेस के नेता दिनेश त्रिवेदी शामिल हैं। कार्यक्रम में बसपा प्रमुख मायावती और सपा प्रमुख अखिलेश यादव को भी आना था लेकिन किन्हीं कारणों से दोनों नहीं आ सके।

  • राजस्थान:अशोक गहलोत मुख्यमंत्री तथा सचिन पायलट उप मुख्यमंत्री बने’राज्यपाल कल्यान सिंह ने दिलाई शपथ

    अशोक गहलोत के अलावा मध्य प्रदेश मे कमलनाथ तो छत्तीसगढ़ मे भूपेश बघेल भी आज लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली : कांग्रेस के लिए आज अहम दिन है। आज कांग्रेस के तीन मुख्यमंत्री शपथ ले रहे हैं। सबसे पहले आज सुबह तकरीबन 11 अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री और सचिन पायलट ने उप मुख्यमंत्री के पद की शपथ ली।

    अशोक गहलोत और सचिन पायलट को राज्य के राज्यपाल कल्याण सिंह ने पद और गोपनियता की शपथ दिलाई। इसके बाद तकरीबन 1 बजे कमलनाथ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के पद की शपथ लेंगे। उसके बाद तकरीबन 4.30 बजे भूपेश बघेल में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के पद की शपथ लेंगे।

  • AIMIM ने तेलंगाना विधानसभा के लिए अकबरुद्दीन ओवैसी को चुना सदन का नेता,दी बड़ी जिम्मेदारी।

    एआईएमआईएम की कार्यकारी समिति ने पार्टी अध्यक्ष और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व में यहां पार्टी मुख्यालय, दारुल इस्लाम में अकबरुद्दीन को फ्लोर नेता के रूप में निर्वाचित किया.

    (AIMIM के कद्दावर नेता अकबरूद्दीन ओवैसी)

    मिल्लत टाइम्स,हैदराबाद: अखिल भारतीय मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने पांच बार के विधायक अपनी पार्टी के कद्दावर नेता अकबरुद्दीन ओवैसी को तेलंगाना विधान सभा में पार्टी के फ्लोर लीडर के रूप में चुना है. एआईएमआईएम की कार्यकारी समिति ने पार्टी अध्यक्ष और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व में यहां पार्टी मुख्यालय, दारुल इस्लाम में अकबरुद्दीन को फ्लोर नेता के रूप में निर्वाचित किया.

    अकबरुद्दीन ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में लगातार पांचवी बार चंद्रयान विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की. वो 1999 से लगातार इस सीट से चुनाव जीत रहे हैं. हाल के चुनाव परिणामों में सत्तारूढ़ टीआरएस ने कुल 119 सीटों में से 88 जीतकर अपनी सत्ता बरकरार रखी, जबकि कांग्रेस ने 19 सीटें और एआईएमआईएम 7 सीटें जीतीं.

    तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने 13 दिसंबर को दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. प्रदेश के राज्यपाल ई.एस.एल नरसिम्हन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.

  • प्रेमी को पायलट बनाने के लिए प्रेमिका ने अपने हि घर को लुटा,अबतक आपने लड़की के लिए लड़कों को चोरी करते हि सुना होगा


    सांकेतिक तस्वीर

    मिल्लत टाइम्स, राजकोट:आपने वो गाना तो फिल्म तो जरूर देखी होदी ‘लव के लिए कुछ भी करेगा’। मगर आज के समय में जहां छोटी-छोटी बातों पर रिश्ते टूट जाते हैं, जहां गर्लफ्रेंड के शौक और जरूरते पूरी करने के लिए ब्वॉयफ्रेंड चोरी करने लगते हैं वहां किसी लड़की को अपने प्यार के लिए चोरी करने की बात कम ही सुनी होगी। वैसे कहते हैं कि प्यार की राह आसान नहीं होती है इसमें बहुत सारे त्याग करने पड़ते हैं।

    इस बात को गुजरात के राजकोट की रहने वाली एक लड़की ने सच साबित कर दिया है। उसने अपने दो साल से ब्वॉयफ्रेंड रहे हेत शाह की मदद के लिए अपने घर में चोरी की। लड़की का नाम प्रियंका परसाना है जिसने अपने प्रेमी को कमर्शियल पायलट का कोर्स करवाने के लिए चोरी की। पुलिस ने बंगलूरू से लड़के के पास से चोरी किए जेवरात और कैश बरामद कर लिए हैं।

    प्रियंका ने कथित तौर एक करोड़ रुपये मूल्य के कैश और जेवरात की चोरी की ताकि इससे बंगलूरू स्थित पायलट ट्रेनिंग एकेडमी की फीस जमा हो सके। उसने अपने घर को तहस-नहस भी कर दिया ताकि यह मामला चोरी का लगे। प्रियंका और हेत को शनिवार को पुलिस ने उस समय पकड़ लिया जब वह चोरी की योजना बनाकर उसे अंजाम दे रहे थे।

    पुलिस ने दोनों के पास से खोया हुआ कैश और ज्वैलरी बरामद कर ली है। प्रियंका भक्तिनगर के पॉश इलाके गीतांजलि पार्क में रहती है। वहीं हेत गीत गुरजारी सोसायटी का रहने वाला है। दोनों पिछले दो सालों से रिलेशनशिप में थे। दोनो चार्टर्ड अकाउंटेंट की पढ़ाई कर रहे थे और उनकी मुलाकात ट्यूशन क्लास के दौरान हुई थी।

    पुलिस के अनुसार प्रियंका का परिवार उस समय टूट गया जब उन्हें पता चला कि उनकी बेटी ने 29 नवंबर को अपने ब्वॉयफ्रेंड के लिए कैश और ज्वैलरी चुराई थी। प्रियंका के पिता द्वारा चोरी का केस दर्ज करवाने के 17 दिन बाद इसे सुलझा लिया गया। हालांकि बेटी के मामले में शामिल होने की बात पता लगने पर उसका परिवार एफआईआर वापस लेना चाहते हैं।

  • क्या फिर आएगा बिहार से सियासत में भूचाल?PK के साथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा।

    मिल्लत टाइम्स,पटना: बिहार की सियासत की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो नई बहस को जन्म दे सकती है. दरअसल बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष मदन मोहन झा और जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर की साथ की ये तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है.


    तस्वीर में प्रशांत किशोर व मदन मोहन झा

    कहते हैं कि तस्वीरें कभी झूठ नहीं बोलतीं, लेकिन कई बार तस्वीर का मतलब जो होता नहीं, वह भी निकाल लिया जाता है. अब इस तस्वीर का मतलब आने वाले दिनों में क्या निकलता है, देखना होगा. वैसे कयास कई सारे लगने लगे हैं. हालांकि आज की तारीख में जेडीयू एनडीए का अहम हिस्सा है और बिहार में बीजेपी के साथ मिलकर सरकार चला रहा है.

    जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर के साथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा की यह फोटो वायरल हो रही है. इस फोटो में मदन मोहन झा और प्रशांत किशोर बातचीत करते नजर आ रहे हैं. यह फोटो पटना एयरपोर्ट के वेटिंग रूम की है.

    चुनावी रणनीतिकार के रूप में प्रशांत किशोर कांग्रेस के लिए पहले भी कई राज्यों में काम कर चुके हैं, लेकिन अब वे जेडीयू में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं. वैसे नीतीश कुमार के लिए भी 2015 में उन्होंने काम किया था और बिहार में महागठबंधन सरकार बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी.

  • विपक्ष ने किया पीएम पद के लिए राहुल का समर्थन,स्टालिन बोले-2019 में मोदी को मिलकर हराएंगे

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले रविवार को एक बार फिर विपक्ष की एकजुटता देखने को मिली। तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके नेता एम. करुणानिधि की मूर्ति के अनावरण के मौके पर यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, केरल के सीएम पी. विजयन समेत कई दिग्गज नेता मौजूद रहे।

    इस दौरान डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने प्रधानमंत्री पद के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की उम्मीदवारी का समर्थन करने का एलान किया। स्टालिन ने कहा कि राहुल गांधी में काबिलियत है कि वह फासिस्ट मोदी सरकार को हरा सकते हैं। मोदी सरकार ने पांच वर्षों के दौरान देश को 15 साल पीछे धकेल दिया है। अगर हम उन्हें दोबारा मौका देंगे तो देश 50 साल पीछे चला जाएगा। पीएम मोदी राजा की तरह व्यवहार करते हैं, इसलिए हम सब एक साथ आएं और मिलकर देश और लोकतंत्र को बचाएं।

    देश की संस्थाओं को बर्बाद नहीं करने देंगे: राहुल
    कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हम मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग और आरबीआई जैसे संस्थानों को बर्बाद नहीं करने देंगे। करुणानिधि ने देश की संस्थाओं की रक्षा की थी, लेकिन अब केंद्र में ऐसी सरकार है, जो तमिलनाडु और देश की आवाज को दबा रही है। हम लोग एक साथ मिलकर आने वाले चुनावों में भाजपा को हराने जा रहे हैं।

    ‘हम देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और भारत के विचारों को नष्ट करने वाली राजनीतिक शक्तियों से मिलकर लड़ेंगे। भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस और डीएमके के इरादे मजबूत हैं।’ – सोनिया गांधी, यूपीए अध्यक्ष

    ‘लोगों ने भाजपा सरकार को चुना और सभी संस्थाएं बर्बाद हो गईं। सरकार सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है। सीबीआई प्रमुख को हटा दिया जाता है। आरबीआई गवर्नर इस्तीफा देते हैं। संघवाद नष्ट हो गया।’ – चंद्रबाबू नायडू, मुख्यमंत्री, आंध्र प्रदेश

    सोनिया गांधी ने किया प्रतिमा का अनावरण
    इससे पहले, डीएमके मुख्यालय पर सोनिया गांधी ने करुणानिधि की कांस्य की प्रतिमा का अनावरण किया। इस दौरान अभिनेता रजनीकांत, भाजपा नेता और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा, पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणस्वामी समेत कई दिग्गज नेता और कलाकार मौजूद रहे।

  • निर्भया कांड की छठी बर्सी पूरे होने पर ममता ने कहा कि देश को महिलाओं के लिए बेहतर बनाए स्थान

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: निर्भया बलात्कार एवं हत्याकांड के छह वर्ष पूरे होने के मौके पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने देश को महिलाओं के लिए बेहतर स्थान बनाने की रविवार को अपील की। बनर्जी ने ट्विटर पर लोगों से महिलाओं के खिलाफ हिंसा खत्म करने की अपील की।


    न्होंने लिखा, ‘‘दिल्ली में हुए भयावह निर्भया हादसे के आज छह वर्ष पूरे हो गए। इस हादसे ने देश को हिला दिया था। एक समाज के तौर पर हमें देश को महिलाओं के लिए बेहतर स्थान बनाना चाहिए। महिलाओं के खिलाफ हिंसा को ‘ना’ कहें।’’

    गौरतलब है कि 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा के साथ 16 दिसम्बर 2012 को चलती बस में सामूहिक बलात्कार किया गया था और फिर उसे उसके पुरुष मित्र के साथ वाहन से सड़क पर फेंक दिया गया था। पीड़िता को बाद में इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया लेकिन वह बच नहीं पाई।

    हादसे के खिलाफ देश में व्यापक स्तर पर प्रदर्शन किए गए। सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर उनपर बलात्कार और हत्या का मामला चलाया गया। इन आरोपियों में से एक ने जेल में ही खुद को फांसी लगा ली थी, जबकि हादसे के समय उनमें से एक नाबालिग था जिसे सुधार गृह में अधिकतम तीन वर्ष की सजा दी गई।अन्य चार बाद में बलात्कार और हत्या के दोषी पाए गए। उन्हें बाद में मौत की सजा सुनाई गई, जिसपर अभी तामील नहीं हुई है।

  • बुलंदशहर हिंसा में फरार बजरंगदल आतंकियों की पुलिस ने फ़ोटो सहित पोस्टर चिपकाए।लोगों से सूचना देने की अपील

    मिल्लत टाइम्स, बुलंदशहर: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में भीड़ के हाथों एक पुलिस अधिकारी और एक युवक के मारे जाने के करीब 15 दिन बाद 22 अभियुक्तों के ख़िलाफ़ नोटिस जारी किया गया है. फ़िलहाल ये सब फ़रार हैं.

    इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक इनमें बजरंगदल के जिला संयोजक और मुख्य आरोपी योगेश राज का नाम भी शामिल है. नोटिस में इन सब को घोषित अपराधी बताया गया है और कहा गया है कि अगर इन लोगों ने एक महीने के अंदर सरेंडर नहीं किया तो उनकी संपत्ति ज़ब्त कर ली जाएगी.

    पुलिस द्वारा चिपकाया गया पोस्टर

    इस नोटिस को एक सप्ताह पहरी किया गया था, और अब इन्हें अभियुक्तों के घर के दरवाज़ों पर चिपका दिया गया है.

    बुलंदशहर में सार्वजनिक जगहों और आस-पास के ज़िलों में इनके पोस्टर भी लगा दिए गए हैं. इन पोस्टरों में अभियुक्तों की तस्वीरें और नाम-पता लिखा हुआ है.

  • कर्नाटक:मंदिर का प्रसाद खाने से 11 लोगों की मौत’दर्जनो की हालत गंभीर

    मिल्लत टाइम्स,कर्नाटक: कर्नाटक के चामराजनगर ज़िले में एक मंदिर का प्रसाद खाने से कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई है और लगभग एक दर्जन लोगों की हालत गंभीर है.

    मैसूरु और अन्य जगहों के अस्पतालों में क़रीब 70 लोग भर्ती बताए जा रहे हैं.
    यह घटना सुलावाड़ी गांव के किच्चुकुट्टी मारम्मा मंदिर की है.

    प्रसाद न खाने वाले लोगों में शामिल रहे मरिअप्पा नाम के एक व्यक्ति ने कहा, “हमें पूजा के बाद टमाटर और चावल खाने को दिए गए थे. चावल से बदबू आ रही थी. जिन लोगों ने इसे फेंक दिया, वे ठीक हैं लेकिन जिन लोगों ने इसे खाया, उन्हें उल्टियां शुरू हो गईं और पेट में दर्द होने लगा.”

    हालात ऐसे हैं कि इस प्रसाद को खाने वाले कौओं तक की मौत हो गई है.
    प्रसाद खाने के बाद कौओं की भी मौत हुई है
    तालुका पंचायत के सदस्य मणि ने कहा, “मंदिर में आसपास के गांवों से लोग आए हुए थे. इनमें ज़्यादातर लोग मरटाहल्ली और वड्डरहल्ली गांवों के थे.”

    ये गांव चामराज ज़िले के हानुर तालुका के रामपुरा के आसपास पड़ते हैं.
    क्या कहना है पुलिस का
    मैसुरू रेंज के आईजीपी एच.सी. शरत चंद्र ने बीबीसी हिंदी को बताया, “मरने वाले 11 लोगों में तीन महिलाएं हैं. हानुर, कोल्लेगल और मैसूरु के अस्पतालों में लगभग 70 लोगों को भर्ती किया गया है.”

    पीड़ित का हाल जानते मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी
    उन्होंने कहा कि अभी यह नहीं बताया जा सकता कि किसे किस अस्पताल में भर्ती किया गया है मगर 11 मरीज़ों की हालत गंभीर है.

    इस बीच पुलिस ने घटना स्थल से सैंपल लेकर फ़ॉरेंसिक लैब में जांच के लिए भेजे हैं. मगर जिस तरह से प्रसाद खाकर कौए भी मरे हैं, उससे आशंका जताई जा रही है कि कीटनाशक के कारण मौतों हुई हों