Author: M Qaisar Siddiqui

  • राजस्थान:विधानसभा ने 15 विधायकों को जारी किए कारण बताओं नोटिस, समाप्त हो सकती सदस्यता

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के मध्य छिड़ी वर्चस्व की जंग मे अचानक घटे घटनाक्रम के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने 15 विधायकों को जारी किए कारण बताओं नोटिस।

    राजस्थान में कांग्रेस पार्टी द्वारा बागी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। इनमें सचिन पायलट सहित लगभग 15 विधायक शामिल हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार बागी विधायकों को अयोग्य घोषित करने की कार्रवाई शुरू की गई है, जिसके में पार्टी ने राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी से उनकी विधानसभा सदस्यता को समाप्त करने को कहा है। कांग्रेस की शिकायत पर अध्यक्ष ने इन बागी विधायकों को नोटिस भेजकर 17 जुलाई तक जवाब मांगा है।

    बताते है कि पार्टी ने सचिन पायलट पर कार्रवाई करते हुए उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से उन्हें मुक्त कर दिया है। इसके साथ ही उनके समर्थन में उतरे दो मंत्रियों- रमेश मीणा और विश्वेंद्र सिंह को भी उनके पद से मुक्त कर दिया गया है। अब उन बाकी विधायकों पर कार्रवाई की जा रही है, जो संभावित रूप से पायलट खेमे में बताये जा रहे है। पार्टी की ओर से कार्रवाई के बाद सचिन पायलट ने ट्विटर अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं। देखना यह है कि अब सचिन पायलट की क्या योजना है। वहीं दूसरी ओर इसके बाद अशोक गहलोत खेमे की भी हालत बहुत अच्छी नही बताई जा रही है। हो सकता है कि उनको फ्लोर टेस्ट का सामना करना पड़े।

  • पं नवल किशोर शर्मा व परशराम मदेरणा परिवार सहित अनेक मजबूत राजनीतिक परिवारों को हाशिये पर धकेलने वाले मुख्यमंत्री गहलोत पर पायलट भारी पड़ रहे है।

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    हालांकि 1998 मे राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बनने के बाद से पार्टी मे मोजूद उनके मुकाबले मजबूत लीडर्स को धीरे धीरे एक एक करके राजनीतिक तौर पर हाशिये पर धकेलने मे गहलोत कामयाब होते गये लेकिन मोजुदा कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट को हाशिये पर धकेलने की लाख कोशिश करने के बावजूद सचिन पायलट, मुख्यमंत्री अशोक की हर चाल को नाकाम करते हुये उन पर भारी चाहे ना पड़े लेकिन कमजोर भी नही पड़ रहे है।

    1998 मे राजस्थान कांग्रेस का बहुमत आने पर दिल्ली तिकड़म के बल पर अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री बनने के बाद गहलोत ने चालाकी व कूटनीति के साथ मिले हर अवसर का उपयोग करते हुये कांग्रेस मे मोजूद मजबूत राजनीतिक परिवारो को एक एक करके हाशिये पर धकेलने का काम सफलतापूर्वक अंजाम दिया। पं नवल किशोर शर्मा के बाद उनके पुत्र ब्रज किशोर शर्मा, परशराम मदेरणा के बाद भंवरी देवी के बहाने उनके पूत्र महिपाल मदेरणा व उसी के साथ रामसिंह विश्नोई के पूत्र मलखान सिंह विश्नोई , नाथूराम मिर्धा व रामनिवास मिर्धा परिवार के ज्योति मिर्धा-हरेंद्र मिर्धा व रिछपाल मिर्धा को राजनीतिक हाशिये पर आसानी से धीरे धीरे हाशिये पर ढकेलने मे गहलोत कामयाब हो चुके है। उक्त परिवार से एक दो विधायक जरुर बने है। जो एकदम नये होने के कारण वो किसी भी रुप मे गहलोत के लिये लम्बे समय तक चेलैंज नही हो सकते है।

    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी राजनीतिक कुटनीति व चालाकी से चाल चलने की कला के बल पर अपने उदय के बाद से कांग्रेस मे मोजूद हर राजस्थानी मजबूत राजनीतिक परिवार को हाशिये पर धकेलते हुये अपने राजनीतिक रास्ते को साफ सुथरा बनाने मे कामयाब रहे। पर अचानक यूपी के सारणपुर निवासी पूर्व केन्द्रीय ग्रह मंत्री राजेश पायलट के पूत्र जो राजनीति मे पावर लेकर पैदा हुये सचिन पायलट के राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बनकर आने के बाद से अशोक गहलोत ने उन्हें अध्यक्ष पद से हटाने के लाख जतन करने के बावजूद हटे नही ब्लकि इसके विपरीत पायलट अध्यक्ष पद के अलावा उपमुख्यमंत्री पद पर भी कायम हो गये।

    विधानसभा व लोकसभा चुनाव मे टिकट बंटवारे के साथ साथ राज्य सभा चुनाव के लिये उम्मीदवार चयन को लेकर मुख्यमंत्री गहलोत के मुकाबले पायलट के बराबर मजबूत स्तम्भ की तरह खड़े होने से मुख्यमंत्री गहलोत असहज महसूस करने लगे थे। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री की दौड़ मे चाहे गहलोत आगे भले निकल गये पर वो पायलट को राजनीतिक तौर पर हाशिये पर धकेलने पर कामयाब नही हो पा रहे है।

    जब भारत के अनेक प्रदेशो मे भाजपा वहा कायम कांग्रेस सरकार को गिराने व कांग्रेस विधायकों से पाला बदलवाने व त्याग पत्र दिलवाले मे कामयाब होती जाने लगी तो राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उक्त अवसर का उपयोग सचिन पायलट को राजनीतिक हाशिये पर धकेलने मे करने के विकल्प तलासने मे करने लगे। मुख्यमंत्री गहलोत को उपमुख्यमंत्री पायलट को घेरने के लिये ढेड साल के कार्यकाल मे पहली दफा राज्यसभा चुनाव के बहाने मिला। मतदान के पहले इनडायरेक्ट रुप से खरीद फरोख्त के बहाने विधायकों की बाड़बंदी करके पायलट को निशाने पर लेने की कोशिश के बावजूद पायलट साफ बचकर निकल गये। इसके बाद भाजपा द्वारा विधायकों की खरीद फरोख्त करके सरकार गिराने की कोशिश पर SOG व ACB मे दर्ज महेश जोशी की शिकायत पर कार्यवाही करने पर 11-जुलाई को मुख्यमंत्री गहलोत द्वारा प्रैस कांफ्रेंस करके भाजपा नेताओं पर अनेक आरोप लगाते हुये फिर से पायलट को इनडायरेक्ट घेरने की कोशिश की है।

    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की 11-जुलाई की प्रैस कांफ्रेंस के बाद उनकी सरकार को समर्थन दे रहे तेराह निर्दलीय विधायको मे से ACB की प्राथमिकी मे दर्ज तीन निर्दलीय विधायक सुरेश टाक, सुखवीर, व ओम प्रकाश हुड़ला को कांग्रेस समर्थक विधायकों की सूची से हटा दिया गया है। जबकि मीडिया मे भांति भांति की खबरे चलने के बाद कांग्रेस विधायकों मे भी अविश्वास का माहोल बन गया है। देर रात तक सीएमआर से विधायकों को फोन करके उनकी लोकेसन जानी जा रही थी। वहीं कुछ विधायक व मंत्री मुख्यमंत्री से मिलकर विश्वास भी जताते नजर आये बताते।

    कुलमिलाकर यह है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के प्रैस कांफ़्रेंस करने के बाद भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनीया व भाजपा नेताओं ने भी प्रैस कांफ्रेंस करके गहलोत के आरोपो का जवाब दिया है। वही रालोपा नेता सांसद हनुमान बेनीवाल ने इसे अशोक गहलोत व वसुंधरा राजे द्वारा लिखित स्क्रिप्ट बताया है। लेकिन दिन भर घटे घटनाक्रम के बावजूद उपमुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट की चुप्पी होने को सबको असमंजस मे डाल रखा है। लगता है कि मुख्यमंत्री गहलोत का पायलट को राजनीतिक रुप से हाशिये पर धकेलने का लगाया ताजा दाव भी खाली जायेगा।

  • राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिये सीडब्ल्यूसी सदस्य रघुवीर मीणा का नाम सबसे आगे।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजनीति मे नेताओं व राजशाही मे बादशाहों द्वारा अपने आपको को सुरक्षित रखने के साथ भविष्य मे उनके लिये कोई तगड़ा चेलेन्ज खड़ा ना हो पाये तो उसके लिये वो हरदम प्रयास करते है कि उनके मुकाबले कोई काबिल या तेजतर्रार व्यक्ति कभी ऐसी जगह पदस्थापित ना पाये जहां से वो शख्स उछाला मार कर उनकी कुर्शी पर कब्जा करले। भारत की मोजुदा राजनीति मे भी हर नेता कोशिश तो यही करता है। लेकिन इतनी सावधानी के बावजूद भी कभी कभी गूरू गूड़ ही रह जाता ओर चेला शक्कर बन जाता है।

    राजस्थान की कांग्रेस राजनीति मे भी प्रत्येक नेता अपने अपने स्वर्ण काल मे अपने आपके लिये संम्भावित मजबूत चेलैंज व जनाधार वाले नेता को उस महत्वपूर्ण पद पर पदस्थापित होने से रोकने की निचे निचे भरपूर कोशिश करता रहा है। अपवाद स्वरूप कोई मजबूत व जनाधार वाला नेता किसी महत्वपूर्ण पद पर पदस्थापित किसी तरह हो भी गया तो वो उस नेता के स्वयं की तिकड़म या अचानक हालात फेवर मे बनने की बदौलत ही सम्भव हो पाया है।

    अशोक गहलोत के 1998 मे पहली दफा मुख्यमंत्री बनने के लेकर आजतक मात्र सचिन पायलेट ऐसे प्रदेश अध्यक्ष बने है जिनके बनने मे अशोक गहलोत ही भुमिका नही रही ओर नाही अपने हिसाब से इनको हटा कर इनकी जगह दुसरे को अध्यक्ष बना पा रहे है। जबकि पायलट के अलावा अन्य बने प्रदेश अध्यक्षो को बदलवाने मे अशोक गहलोत को कोई खास कसरत नही करनी पड़ी थी। सबसे अधिक समय तक अध्यक्ष रहने का रिकॉर्ड कायम करने वाले सचिन पायलट को अब जाकर बदलने शीर्ष स्तर पर लगभग तय हो चुका है। पर इसके साथ यह भी है कि उनकी जगह नये बनने वाले अध्यक्ष के नाम पर गहलोत व पायलट दोनो का सहमत होना आवश्यक है। पहले की तरह मुख्यमंत्री गहलोत अकेले की पसंद से अब अध्यक्ष कतई नही बनेगा।

    राजनीतिक सुत्रोनुसार अध्यक्ष पद के लिये उपयुक्त नाम पर अब तक बनती दिख रही सहमति के हिसाब से सीडब्ल्यूसी सदस्य व पूर्व सांसद रघूवीर मीणा का नाम सबसे आगे बताते है। धड़ेबंदी से दूर माने जाने वाले मीणा के नाम पर शीर्ष नेतृत्व मे भी सहमति आसानी से बनने लगी है। अगर किसी वजह आदीवासी के अलावा अन्य बिरादरी के नेता को अध्यक्ष बनाने पर विचार शीर्ष स्तर पर होता है तो जाट बिरादरी मे मंत्री हरीश चोधरी, पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा व पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया का नाम चर्चा मे आ सकता है। महरिया के रास्ते मे उनके भाजपा छोड़कर कांग्रेस मे आने व उनका काफी तेज तर्रार होना उनके रास्ते का रोड़ा बन सकता है। इसके अतिरिक्त अन्य बिरादरियों के किसी नेता को अध्यक्ष बनाना नामुमकिन दिखाई दे रहा है।

    कुल मिलाकर यह है कि लम्बे समय तक राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष रहने का रिकॉर्ड कायम करने वाले सचिन पायलट का प्रदेश अध्यक्ष पद से हटना लगभग तय हो चुका है। उनकी जगह बनने वाले अध्यक्ष पद के अनेक नामो पर मंथन चल रहा जिनमे सबसे आगे पूर्व सांसद व सीडब्ल्यूसी सदस्य रघूवीर मीणा का नाम सबसे आगे बताते है। मीणा यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व स्टेट सरकार मे मंत्री भी रह चुके है।

  • राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिये सीडब्ल्यूसी सदस्य रघुवीर मीणा का नाम सबसे आगे।
    ।अशफाक कायमखानी।
    जयपुर।
    राजनीति मे नेताओं व राजशाही मे बादशाहों द्वारा अपने आपको को सुरक्षित रखने के साथ भविष्य मे उनके लिये कोई तगड़ा चेलेन्ज खड़ा ना हो पाये तो उसके लिये वो हरदम प्रयास करते है कि उनके मुकाबले कोई काबिल या तेजतर्रार व्यक्ति कभी ऐसी जगह पदस्थापित ना पाये जहां से वो शख्स उछाला मार कर उनकी कुर्शी पर कब्जा करले। भारत की मोजुदा राजनीति मे भी हर नेता कोशिश तो यही करता है। लेकिन इतनी सावधानी के बावजूद भी कभी कभी गूरू गूड़ ही रह जाता ओर चेला शक्कर बन जाता है।
    राजस्थान की कांग्रेस राजनीति मे भी प्रत्येक नेता अपने अपने स्वर्ण काल मे अपने आपके लिये संम्भावित मजबूत चेलैंज व जनाधार वाले नेता को उस महत्वपूर्ण पद पर पदस्थापित होने से रोकने की निचे निचे भरपूर कोशिश करता रहा है। अपवाद स्वरूप कोई मजबूत व जनाधार वाला नेता किसी महत्वपूर्ण पद पर पदस्थापित किसी तरह हो भी गया तो वो उस नेता के स्वयं की तिकड़म या अचानक हालात फेवर मे बनने की बदौलत ही सम्भव हो पाया है।
    अशोक गहलोत के 1998 मे पहली दफा मुख्यमंत्री बनने के लेकर आजतक मात्र सचिन पायलेट ऐसे प्रदेश अध्यक्ष बने है जिनके बनने मे अशोक गहलोत ही भुमिका नही रही ओर नाही अपने हिसाब से इनको हटा कर इनकी जगह दुसरे को अध्यक्ष बना पा रहे है। जबकि पायलट के अलावा अन्य बने प्रदेश अध्यक्षो को बदलवाने मे अशोक गहलोत को कोई खास कसरत नही करनी पड़ी थी। सबसे अधिक समय तक अध्यक्ष रहने का रिकॉर्ड कायम करने वाले सचिन पायलट को अब जाकर बदलने शीर्ष स्तर पर लगभग तय हो चुका है। पर इसके साथ यह भी है कि उनकी जगह नये बनने वाले अध्यक्ष के नाम पर गहलोत व पायलट दोनो का सहमत होना आवश्यक है। पहले की तरह मुख्यमंत्री गहलोत अकेले की पसंद से अब अध्यक्ष कतई नही बनेगा।
    राजनीतिक सुत्रोनुसार अध्यक्ष पद के लिये उपयुक्त नाम पर अब तक बनती दिख रही सहमति के हिसाब से सीडब्ल्यूसी सदस्य व पूर्व सांसद रघूवीर मीणा का नाम सबसे आगे बताते है। धड़ेबंदी से दूर माने जाने वाले मीणा के नाम पर शीर्ष नेतृत्व मे भी सहमति आसानी से बनने लगी है। अगर किसी वजह आदीवासी के अलावा अन्य बिरादरी के नेता को अध्यक्ष बनाने पर विचार शीर्ष स्तर पर होता है तो जाट बिरादरी मे मंत्री हरीश चोधरी, पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा व पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया का नाम चर्चा मे आ सकता है। महरिया के रास्ते मे उनके भाजपा छोड़कर कांग्रेस मे आने व उनका काफी तेज तर्रार होना उनके रास्ते का रोड़ा बन सकता है। इसके अतिरिक्त अन्य बिरादरियों के किसी नेता को अध्यक्ष बनाना नामुमकिन दिखाई दे रहा है।
    कुल मिलाकर यह है कि लम्बे समय तक राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष रहने का रिकॉर्ड कायम करने वाले सचिन पायलट का प्रदेश अध्यक्ष पद से हटना लगभग तय हो चुका है। उनकी जगह बनने वाले अध्यक्ष पद के अनेक नामो पर मंथन चल रहा जिनमे सबसे आगे पूर्व सांसद व सीडब्ल्यूसी सदस्य रघूवीर मीणा का नाम सबसे आगे बताते है। मीणा यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व स्टेट सरकार मे मंत्री भी रह चुके है।

  • मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र की हत्या नहीं होने देगी कांग्रेस

    भाजपा राजस्थान में सरकार गिराने की चालें चल रही है।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कहा कि भाजपा राजस्थान की चुनी हुई कांग्रेस सरकार को गिराने कु चाले चलकर लोकतंत्र की हत्या करने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा प्रदेश में कांग्रेस सरकार गिरने-गिराने की चर्चा के बीच गहलोत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कांग्रेस के अंदल यदि कोई गद्दार है तो उसे जनता माफ नहीं करेगी।
    उन्होंने कहा कि कोरोना की स्थिति के कारण देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था तबाह हो गई है। आज हर व्यक्ति का जीवन बचाना अनिवार्य है। विकास रुके नहीं, इसलिए वो चाहते हैं कि उद्योग धंधे चालू हों, अर्थव्यवस्था पटरी पर आए इसके लिए उनकी सरकार लगातार काम कर रही हैं।

    मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि हमने हर वर्ग को साथ लिया। भाजपा के नेताओं को भी साथ लिया। हालांकि वे टिप्पणी करते रहे। यह महामारी है। इसके लिए बीजेपी के लोगाें को समझना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी के नेताओं ने सारी हदें पार कर दी हैं। एक ओर हम मानवता बचाने में लगे हैं दूसरी ओर बीजेपी सरकार गिराने में लगी है। हम पूरी तरह कोरोना से लोगों को बचाने में लगे हैं। ये लोग सरकार कैसे गिरे, किस प्रकार से तोड़फोड करे मे लगे है। अब जो 2014 के बाद भाजपा में जो घमंड आ गया है। धर्म के नाम पर जाति के नाम पर, लोकतंत्र की हत्या करने में लगे हैं। विभिन्न प्रदेशों में जब जब भी इन्हें मौका लगा, गोवा या मणिपुर हो, वहां कांग्रेस की सरकारें बनने नहीं दी। इन लोगो के कारण एक एक्स सीएम को तो सुसाइड करना पड़ा।उत्तराखंड में भी जो देखा आप सबको पता है। महाराष्ट्र में तो इन्होंने कमाल ही कर दिया था । मेजोरिटी नहीं थी तब भी सुबह-सुबह सात बजे शपथ ले ली और मोदी ने ट्वीट कर दिया बधाई का। देवेंद्र फडनवीस ने तो ट्वीट कर दिया कि मोदी है तो मुमकिन है। हर प्रदेश में यही हाल है। मध्य प्रदेश में सबको मालूम है क्या किया । सोच ही कैसी है।

    गहलोत ने कहा कि वो राजस्थान के विपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया से उम्मीद करते है कि वे ऐसे नहीं होंगे। सतीश पूनिया या राजेंद्र राठौडृ हाे ये जो खेल खेल केंद्र के इशारे पर खेल रहे हैं ये सब तमाम बातें जनता के सामने आ गई हैं। ये 5 करोड़, 10 करोड़, सरकार गिराने आदि की जो बातें सामने आ रही हैं, यह शर्मनाक है।

    भाजपा वाले बेशर्म लोग है।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि बसपा को लेकर उनको आरोपित करते हैं। मैं बताना चाहता हूं बसपा राजस्थान मे पूरी तरह कांग्रेस मे मर्ज हुई है। लेकिन भाजपा ने जो खेल खेला है वह सबके सामने है। जिस प्रकार मध्य प्रदेश में जो घटनाएं हुई हैं, उसी तरह राजस्थान में करने की कोशिश की है। यह अच्छी बात है कि राजस्थान में अच्छी परंपरा रही है। बकरा मंडी में जैसे बकरे बिकते हैं, उस ढंग से विधायकों को खरीदकर भाजपा राजनीति करना चाहती है वह बेशर्माई की हद है। भाजपा के लोगो की तरफ बोलते हुये कहा कि ये इतने बेशर्म लोग हैं, तिकड़मी हैं। राजस्थान में हमने इनकी चाल चलने नहीं दी। हमने राज्य सभा चुनाव में सबक सिखाया। ये मानने वाले कहां हैं, बेशर्म लोग हैं। ये वापिस अपने असली चेहरे पर आ रहे हैं।

    हमारे नेताओं ने लोकतंत्र को बचाया है
    70 साल में कांग्रेस के नेताअेां ने देश के लोकतंत्र को बचाया है। इंदिरा गांधी चुनाव हार गई तो तुरंत मोरारजी भाई को सत्ता सौंप दी। ये वो लोग हैं जिन्होंने पूरे मुल्क के लोगों को डरा धमका रखा है। राहुल गांधी व सोनिया गांधी के सवालों का जवाब नहीं दे पाते हैं। अब ये कांग्रेस के नाम से डरते हैं।

    राजस्थान की सरकार स्थिर

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान में सरकार स्थिर रहेगी। ओर पांच साल चलेगी। राजस्थान सरकार अगला चुनाव जीतने की तैयारी में लग गई है। उसी तरह हम बजट दे रहे हैं। उसी तरह हम जीतने के लिए सरकार चला रहे हैं। पूरी राजस्थान की जनता से हमारा संपर्क है। मुझे खुशी है कोरोना के मैंनेजमेंट की चर्चा पूरे मुल्क में हो रही है। यह सबके लिए गर्व की बात है। इस माहौल में सरकार गिराने का प्रयत्न करना, ठीक नहीं। सबक जरूर सिखाएगी जनता। कांग्रेस के कोई विधायक गद्दारी करते हैं तो राजस्थान की जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी।

    पीछले माह राज्य सभा चुनाव के पहले भाजपा नेताओं द्वारा कांग्रेस व कांग्रेस समर्थक विधायकों को लालच देकर खरीदने की चर्चा के मध्य कांग्रेस के मुख्य सचेतक महेश जौशी ने ऐसीबी व एसओजी मे चूनी हुई सरकार को अस्थिर करने को लेकर शिकायत दी थी। उसके बाद एसओजी ने रिपोर्ट दर्ज करके जांच करने पर अनेक तरह के तथ्य सामने आ रहे है। निर्दलीय विधायक सुखवीर सिंह, सूरेश टांक व ओम प्रकाश हुड़ला द्वारा आदिवासी क्षेत्र के विधायको को लालच देकर पाला बदलवाने व अशोक सिंह व सीऐ मलानी को इस मामले मे एसओजी द्वारा गिरफ्तार करने के बाद राजस्थान मे राजनीतिक गरमाहट है। उक्त मामले मे लालच देकर पाला बदलवाने मे भाजपा नेताओं व उनके दलालो के सम्पर्क मे आने के मामले मे अनेक कांग्रेस व निर्दलीय विधायकों के नाम की चर्चा चल पड़ी है। उसमे शेखावाटी के भी तीन विधायक शामिल बताते है।

    कुल मिलाकर यह है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा आज प्रैस कांफ्रेंस करके भाजपा द्वारा राजस्थान सरकार को अस्थिर करने की लगातार कोशिश करने को लेकर प्रधानमंत्री मोदी व ग्रह मंत्री शाह के इशारे पर राजस्थान भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनीया,विपक्षी नेता गुलाब चंद कटारिया व सीनियर भाजपा विधायक राजेन्द्र राठोड़ पर आरोप लगाने व एसओजी द्वारा अशोक सिंह व मलानी नामक दो लोगो को गिरफ्तार करने के बाद राजनीति मे गरमाहट आ गई है। लगी इस आग की जद मे कोन कोन आते है यह आगे पता चलेगा। लेकिन इतना तय है कि इस आग मे बहुत नेताओं को अपना राजनीतिक केरियर स्वा करना होगा।

  • घोसी तहसील कैंटीन की बोली हुई निरस्त पुनः बोली 16 जुलाई को

    मुजफ्फर इस्लाम,घोसी,मऊ । स्थानीय तहसील परिसर में कैंटीन एवं कैंटीन से सटे दो दुकानों सहित साइकिल स्टैंड की बोली गुरुवार की तहसील मीटिंग हाल में सम्पन्न हुई। जिसमें अधिकतम बोली 40 हजार ही लग पाई। तहसीलदार सुबाष यादव ने ब्यापक प्रचार प्रसार एवं उम्मीद के अनुरूप बोली नहीं होने पर बोली निरस्त करते हुए पुनः 16 जुलाई को 11 बजे से कराने हेतु कहा। जबकि पिछले वित्तिय वर्ष की बोली 93000 हजार रुपये रही। वहीं नीरज कुमार राय ने उपजिलाधिकारी के यहाँ शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि तहसील प्रशासन की मिली भगत से बोली बिना ब्यापक प्रचार प्रसार एवं राष्ट्रीय अखबारों में निकाले ही कराई गई।जिसकी जाँच कराते हुए जनहित में कार्यवाही किया जाय।

  • उत्तर प्रदेश में कल रात 10 बजे से फिर लॉकडाउन

    आशिफ अली,मिल्लत टाइम्स( उत्तर प्रदेश )
    उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ते कोरोना मामले को देखते हुए फिर से लॉकडाउन दिनांक 10 जुलाई, 2020 की रात्रि 10 बजे से 13 जुलाई, 2020 को प्रातः 05 बजे तक की प्रतिबन्ध अवधि में ग्रामीण क्षेत्र में स्थित औद्योगिक कारखाने खुले रहेंगे। इन कारखानों में सोशल डिस्टेन्सिंग एवं अन्य स्वास्थ्य संबंधी प्रतिबन्धों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।प्रतिबंध अवधि में अंतरराष्ट्रीय एवं घरेलू हवाई सेवाएं जारी रहेंगी। हवाई अड्डों से गंतव्य तक जाने वालों के आवागमन व माल वाहक वाहनों के आवागमन पर कोई प्रतिबन्ध नहीं रहेगा। राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर परिवहन व इनके किनारे स्थित पेट्रोल पम्प एवं ढाबे पूर्ववत खुले रहेंगे। प्रदेश में रेलवे का आवागमन पूर्व की भांति यथावत जारी रहेगा। ट्रेन से आने वाले यात्रियों के आवागमन हेतु यथावश्यक बसों की व्यवस्था उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम द्वारा की जाएगी। इन बसों को छोड़कर परिवहन निगम की सेवाओं का प्रदेश के अन्दर आवागमन प्रतिबन्धित रहेगा।

    मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार द्वारा इस सम्बन्ध में जारी किए गए निर्देशों में उल्लिखित किया गया कि इस प्रतिबंध के दौरान प्रदेश के समस्त कार्यालय तथा सभी शहरी व ग्रामीण हाट, बाजार, गल्ला मण्डी, व्यावसायिक प्रतिष्ठान इत्यादि बंद रहेंगे। प्रतिबंध अवधि में समस्त आवश्यक सेवाएं यथा स्वास्थ्य एवं चिकित्सकीय सेवाएं, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पूर्व की भांति होगी। इन सेवाओं में कार्यरत व्यक्तियों, कोरोना वॉरियर, स्वच्छताकर्मी तथा डोर स्टेप डिलीवरी से जुड़े व्यक्तियों के आने-जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा।


  • राजस्थान मे अब सफाई कर्मचारी नाला-चेम्बर मे उतर कर सफाई नही करेगा।

    अशफाक कायमखानी ।जयपुर।
    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि जिस समर्पण भाव के साथ स्वच्छताकर्मियों एवं नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों ने कोराना काल मे काम किया है। उससे कोरोना संक्रमण के फैलाव को रोकने में सरकार कामयाब हो सकी हैं। कोरोना की जंग में शामिल डॉक्टर्स, नर्सिंगकर्मियों, आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं पुलिस सहित आप सबकी मेहनत से देश में राजस्थान का मान और सम्मान बढ़ा है। गहलोत ने आह्वान किया कि आगे भी इसी मनोयोग से कोरोना की लड़ाई में टीम भावना के साथ जुटे रहें।

    मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों एवं सफाईकर्मियों के साथ मुख्यमंत्री गहलोत संवाद कर रहे थे। प्रदेशभर के 196 नगरीय निकायों के करीब 1600 प्रतिभागी इस कार्यक्रम से सीधे जुड़े।

    पिछले करीब चार महीने से राजस्थान कोरोना को नियंत्रित करने में कामयाब रहने का मुख्यमंत्री ने बताते हुये कहा कि स्वच्छताकर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर शहर, गली-मोहल्ले एवं घर-घर को संक्रमणमुक्त रखने में बड़ी भूमिका अदा की है।सफाईकर्मियों को मास्क, दस्ताने, सैनिटाइजर सहित अन्य सुरक्षा सामग्री के लिए राज्य सरकार ने एक-एक हजार रूपए उपलब्ध कराए ताकि फ्रंटलाइन वर्कर के रूप में काम करते हुए वे संक्रमण से बचे रहें। इसके साथ ही राजस्थान पहला राज्य है, जिसने कोरोना की जंग में जुटे हुए सरकारी और गैर-सरकारी कार्मिकों की चिंता करते हुए उन्हें 50 लाख रूपए के बीमा कवर की सुविधा प्रदान की है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने सभी वर्गों एवं जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों का सहयोग लेकर उनके अनुभवों एवं नवाचारों का उपयोग करते हुए राजस्थान को इस लड़ाई में अग्रणी पायदान पर रखा। नगर निगमों के महापौर, सभापति, चैयरमेन, पार्षदों आदि जनप्रतिनिधियों से इस दौरान संवाद किया और उनसे सुझाव लिए। सफाई निरीक्षकों, जमादारों सहित अन्य स्वच्छताकर्मियों से मुख्यमंत्री ने सीधा संवाद करते हुए उनके अनुभव जाने और उनसे उनकी समस्याएं पूछी। इस दौरान कोरोना के प्रति आमजन में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए दो पोस्टरों का विमोचन भी किया। सभी जिला कलक्टरों एवं नगर निकाय अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे यह सुनिश्चित करें कि किसी भी स्वच्छताकर्मी को सीवरेज की सफाई के लिए चैम्बर में नहीं उतरना पड़े। यह काम पूरी तरह मशीनों से ही करवाया जाए। सीवरेज की सफाई के लिए चैम्बर में उतरने से मौत की कोई घटना नहीं होनी चाहिए।

    इस अवसर पर नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल, चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा, मुख्य सचिव राजीव स्वरूप, स्वायत्त शासन विभाग के सचिव भवानी सिंह देथा, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त निरंजन आर्य, प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा अखिल अरोरा, शासन सचिव श्रम नीरज के. पवन, सूचना एवं जनसम्पर्क आयुक्त महेन्द्र सोनी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • घोसी के भाई बहन ने बढ़ाया ज़िले का मान

    मुजफ्फरुल इस्लाम
    घोसी(मऊ)स्थानीय नगर के डाक बंगला मोड़ के रहने वाले राजू वारसी के 11 वर्षीय पुत्र मोहम्मद अहमद ने Zee Tv द्वारा आयोजित सारेगामापा लिटिल चैम्प 2020 में टॉप 30 में आकर ज़िले का मान सम्मान बढ़ाया है। उल्लेखनीय है मोहम्मद अहमद उत्तर प्रदेश से इस प्रतियोगिता में टॉप 30 तक पहुँचने वाले न सिर्फ़ मऊ जनपद के बल्कि पूर्वांचल से पहले प्रतियोगी हैं। साथ ही श्री राजू आरसी की 14 वर्षीय पुत्री अलीशा नें भी इस वर्ष उत्तर प्रदेश संगीत नाट्य अकेडमी द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में दादरा ठुमरी(बाल वर्ग) में प्रथम पुरस्कार अर्जित करके प्रदेश का नाम रौशन किया। इन दोनों बच्चों पर पूरे जनपदवासियों को गर्व है। उल्लेखनीय है कि लॉक डाउन के चलते ये ख़बर मीडिया का हिस्सा नहीं बन सकी। श्री राजू वारसी आर्थिक रूप से बेहद कमज़ोर हैं और होम ट्यूशन के द्वारा घर का ख़र्च चलाते हैं और अपनी ख़राब आर्थिक हालात के कारण बच्चों के भविष्य के प्रति चिंतित भी हैं।

  • राजस्थान लोकसेवा आयोग द्वारा आयोजित विभिन्न परीक्षाओं के सफल प्रत्याशियों के साक्षात्कार का समय नजदीक।

    किसी भी समय चार सदस्यों की नियुक्ति के आदेश जारी हो सकते है।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    पीछले साल 25 व 26 जून को राजस्थान लोकसेवा आयोग द्वारा राजस्थान सीविल सेवा 2018 की आयोजित मुख्य परीक्षा का परीणाम आखिर कार कोर्ट के आदेश पर तकनीकी जांच के बाद जल्द जारी होकर सफल प्रत्याशियों के साक्षात्कार अगस्त या सितंबर मे शुरू होने की उम्मीद के बाद प्रशासनिक व सरकार के स्तर पर जारी हलचल से लगने लगा है कि राजस्थान लोकसेवा आयोग के खाली चल रहे चार सदस्य पदो पर नये सदस्यों की जल्द नियुक्ति के आदेश जारी हो सकते है।

    राजस्थान सीविल सेवा मे चयनित प्रत्याशियों के साक्षात्कार के अगस्त-सितंबर मे शूरू होने की सम्भावना के अतिरिक्त पुलिस सेवा के सब इंस्पेक्टर की लिखित परीक्षाओं मे चयनित होने वाले प्रत्याशियों के साक्षात्कार इसी दस जुलाई से शूरु हो रहे है। एवं जेएलओ पद के लिये लिखित परीक्षा मे चयनित प्रत्याशियों के साक्षात्कार की डेट भी जुलाई माह मे आने की सम्भावना जताई जा रही है।

    राजस्थान लोकसेवा आयोग मे भाजपा सरकार के समय नियुक्त चार सदस्यों मे अध्यक्ष दीपक उत्प्रेती व सदस्य राजकुमारी गुर्जर, रामू राम रायका व शिवसिंह राठौड़ वर्तमान समय मे पदस्थापित है। जबकि पीछली कांग्रेस सरकार के समय बने सभी सदस्य सेवानिवृत्त हो चुके है।

    राजस्थान लोकसेवा आयोग द्वारा राजस्थान सीविल सेवा परीक्षा 2018 की मुख्य परीक्षा पीछले साल 25-26 जून को आयोजित होने के बाद कानूनी उलझन मे फंसने के बाद आखिरकार हाल ही मे हाईकोर्ट के जारी आदेश अनुसार अगले महीने मे सफल प्रत्याशियों के साक्षात्कार शुरू होने की उम्मीद जताई जाने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर दवाब बढ गया है कि वो जल्द रिक्त चल रहे चार सदस्य पदो पर नये लोगो की नियुक्ति करे।

    लोकसेवा आयोग के सदस्यों के पद वैसे तो सवैधानिक पद होते है। लेकिन इन पदो पर नियुक्ति करते समय केण्डीडेट की योग्यता के अतिरिक्त राजनीति व बिरादरी संतुलन पर भी विशेष ध्यान रखा जाता है। वर्तमान सरकार के समय जल्द होने वाली सम्भावित उक्त नियुक्तियों मे भी जाट-मुस्लिम-एससी एसटी व मूल ओबीसी पर विशेष फोकस किये जाने की चर्चा है। वर्तमान अध्यक्ष दीपक उत्प्रेती के तीन माह बाद अक्टूबर मे रिटायर होने पर उनकी जगह अध्यक्ष पद पर पुलिस विभाग के आला अधिकारी की नियुक्ति होने की प्रबल सम्भावना जताई जा रही है।