Author: Millat Times Staff

  • सुप्रीम कोर्ट ने इल्तिजा को अपनी मां महबूबा से मिलने की दी इजाजत, धारा 370 हटने के बाद होगी पहली मुलाकात

    सुप्रीम कोर्ट ने इल्तिजा जावेद को अपनी मां महबूबा मुफ्ती से मिलने की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा अपनी मां से निजी तौर पर मिल सकती है। इल्तिजा अपने हिसाब से मां से नीजि तौर पर मिलने की तारीख भी तय कर सकती हैं।
    इल्तिजा जावेद ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। याचिका में इल्तिजा जावेद ने अपनी मां महबूबा मुफ्ती से मिलने की मांग की थी। उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि अधिकारियों को निर्देश दिया जाए ताकि वे अपनी मां से मिल सकें। इल्तिजा ने कहा था कि वह अपनी मां की सेहत को लेकर बेहद चिंतित हैं, क्योंकि उनकी उनसे एक महीने से मुलाकात नहीं हुई है। इल्तिजा की याचिका को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एसए नजीर की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर से धरा 370 हटाए जाने के बाद महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला समेत घाटी के कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था। अभी तक किसी भी नेता की रिहाई नहीं हुई है। इससे पहले महबूबा की बेटी इल्तिजा जावेद ने एक वॉयस मैसेज जारी किया था। इल्तिजा ने वॉयस मैसेज में कहा था, “मुझे भी हिरासत में लिया गया है, और धमकी दी गई है कि अगर मैंने मीडिया से बात की तो अंजाम भुगतने पड़ेंगे।”
    इल्तिजा ने वॉयस मैसेज में कहा था कि उनके साथ अपराधी की तरह बर्ताव किया जा रहा है, और लगातार उनके ऊपर नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि आवाज उठाने वाले कश्मीरियों के साथ मैं भी जान का खतरा महसूस कर रही हूं। इल्तिजा ने कहा कि मेरे साथ ऐसा इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि मैंने मीडिया से पहले बात की थी, और बताया था कि घाटी में कर्फ्यू लगाए जाने के बाद से कश्मीरियों को किस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
    (नवजीवन)

  • कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ खोला महास,कमलनाथ को याद दिलाया चुनावी घोषणा पत्र का वादा

    भोपाल, मध्यप्रदेश में कांग्रेस नेताओं के बीच चल रहा विवाद कम होने का नाम नहीं ले रहा है। मंत्री उमंग सिंघार से विवाद के बाद अब प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को एक बार फिर से कांग्रेस का वादा याद दिलाया है। उन्होंने शिक्षक दिवस के बहाने मुख्यमंत्री को कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र में किए वादों को पूरा करने की सलाह दी है।
    गुरुवार को दिग्विजय सिंह ने अपने ट्विटर पर लिखा, ‘शिक्षक दिवस पर सभी शिक्षकों को हार्दिक शुभकामनाएं। अतिथि शिक्षकों व अतिथि विद्वान शिक्षकों से कांग्रेस वचन पत्र में किए गए वादों को हमें पूरा करना है। मुझे विश्वास है माननीय मुख्य मंत्री कमल नाथ जी कांग्रेस वचन पत्र में किए गए हर वचन पूरा करेंगे।’मध्यप्रदेश की सत्ता पर काबिज होने से पहले कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में राज्य के अतिथि शिक्षकों को नियमित करने का वादा किया था। कांग्रेस ने कहा था कि वह सत्ता में आने के तीन महीने के अंदर शिक्षकों को नियमित करेगी। इससे पहले कांग्रेस कार्यालय में एक प्रेस कांफ्रेंस करके नियमित शिक्षकों की तरह अतिथि शिक्षकों को भी नियमित करने की घोषणा की थी। खुद दिग्विजय सिंह ने इसकी गारंटी ली थी। सिंह ने कहा था कि 90 दिनों के अंदर अतिथि शिक्षकों को नियमित किया जाएगा। मध्यप्रदेश की सत्ता पर काबिज हुए कांग्रेस को आठ महीने का वक्त गुजर चुका है लेकिन वह अभी तक अपना वादा पूरा नहीं कर पाई है। इसी कारण दिग्विजय ने शिक्षक दिवस के मौके पर कमलनाथ को इसकी याद दिलाई है।
    (अमर उजाला)

  • रानू मंडल की लोकप्रियता पर लता मंगेश्कर बोलीं- नकल सफलता का टिकाऊ साधन नहीं है…

    रानू मंडल की लोकप्रियता पर लता मंगेश्कर बोलीं- नकल सफलता का टिकाऊ साधन नहीं है…
    पश्चिम बंगाल की रानू मंडल की सफलता आसमान छू रही है. राणाघाट के रेलवे स्टेशन पर गाना गाकर अपना पेट पालने वाली रानू मंडल अब बॉलीवुड में भी जाना-माना चेहरा बन चुकी हैं. उनकी आवाज से प्रभावित होकर खुद बॉलीवुड सिंगर हिमेश रेशमिया ने भी उनसे फिल्म में गाना गाने का अनुरोध किया. रानू मंडल ने राणाघाट रेलवे स्टेशन पर रहते हुए लता मंगेशकर का ‘एक प्यार का नगमा है…’ गाना गाकर प्रसिद्धि हासिल की. हाल ही में उनकी इस प्रसिद्धि पर खुद लता मंगेशकर ने भी अपनी राय पेश की है. लता मंगेशकर ने रानू मंडल की तारीफ करने के साथ ही उनके लिए चिंता भी जताई.
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  • करतारपुर कॉरिडोर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच बनी ये सहमति

    नई दिल्ली: सूत्रों के मुताबिक करतारपुर कॉरिडोर कैसे काम करेगा इस पर भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच अटारी में हुई तीसरे दौर की बैठक में कुछ बिंदुओं पर सहमति बनी है. तीर्थयात्रियों को वीज़ा की ज़रूरत नहीं, OCI कार्ड वाले भी जा सकते हैं. धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा. प्रति दिन पांच हज़ार और उत्सवों पर इससे ज्यादा श्रद्धालुओं को इजाज़त मिलेगी. कॉरिडोर साल भर, हर दिन, खुला रहेगा. श्रद्धालु जत्थों में या अकेले जा सकते हैं.
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  • 23 वर्षीय महिला ने अपने ससुराल में फांसी लगाकर दी जान मृतक के पिता ने दहेज उत्पीड़न का लगाया आरोप

    मुजफ्फरुल इस्लाम,घोसी(मऊ)। स्थानीय कोतवाली क्षेत्र के अहमदपुर असना में एक 23 वर्षीय महिला ने अपने ससुराल में फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। प्राप्त जानकारी के अनुसार महिमा पुत्री रविन्द्र उर्फ़ बिंदु निवासी मुहम्मदपुर हसनपुर थाना घोसी की शादी 29 मई 2017 को कोतवाली थाना क्षेत्र के अहमदपुर असना निवासी मुकेश चमार(25 वर्ष) पुत्र राजदेव प्रसाद से हुई थी। मुकेश पेशा से प्लम्बर था। जो कि रोजी रोटी के लिए दिल्ली में कार्य कर अपने परिवार का जीवकोपार्जन करता था। कुछ ही दिन पूर्व मुकेश अपनी कार्य से छुट्टी लेकर अपने घर अहमदपुर असना गाँव आया था ।

    सोमवार की सुबह मुकेश किसी काम से घोसी आया था उसी उपरांत उसकी पत्नी महिमा ने फंखे के हुक में दुपट्टा के सहायता से फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मिली जानकारी के अनुसार मृतक की 8 माह की लड़की भी है। घटना की जानकारी होते ही परिवार जनों में शोक की लहर दौड़ गयी। उक्त घटना की जानकारी कोतवाली पुलिस को हुई तो मौके पर कोतवाली प्रभारी नीरज पाठक, उपनिरीक्षक विनोद दुबे अपने हमराहियों के साथ मौके पर पहुँच शव को कब्जे में लेकर मृतक के परिवारजनों को सूचित किया।

    मृतक के परिवारजनों के आने के उपरांत कोतवाली प्रभारी नीरज पाठक ने शव को पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। तो वही मृतक के पिता ने दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए लड़के मां सितमी देवी, पिता राजदेव, पति मुकेश एवं बहन गुड़िया के खिलाफ कोतवाली में तहरीर दी। जिसमे कोतवाली ने उक्त चारो के खिलाफ धारा 498 A , 304 B एवं 3/4 डीपी एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत कर जांच शुरू कर दी।

  • यूपी:इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को कहा नाम भावनाओं के आधार पर नही बदला जाता

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: योगी सरकार ने हाईकोर्ट में दाखिल किया हलफनामा: जिले का नाम बदला, शहर अब भी इलाहाबाद ही है
    प्रयागराज: यूपी की योगी सरकार द्वारा संगम के शहर इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किये जाने के फैसले के खिलाफ दाखिल अर्जियों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है. सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना जजमेंट रिजर्व कर लिया है. चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच इस मामले में अगले हफ्ते अपना फैसला सुनाएगी. अदालत ने इस मामले में योगी कैबिनेट के मिनट्स और नोटिफिकेशन के सभी रिकार्ड तलब कर लिए थे.

    योगी सरकार की तरफ से आज अदालत में जो दलीलें पेश की गईं, कोर्ट उससे संतुष्ट नहीं हुई. सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि नाम बदलने की प्रक्रिया भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि क़ानून व नियमों के आधार पर होती है. मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस गोविन्द माथुर और जस्टिस वाई के श्रीवास्तव की डिवीजन बेंच में हुई.

    इलाहाबाद हेरिटेज सोसाइटी समेत बारह पूर्व अफसरों- जन प्रतिनिधियों व प्रोफेसरों द्वारा दाखिल की गई पीआईएल में यूपी रेवेन्यू कोड की उस धारा 6 को चैलेंज किया गया था, जिसके तहत इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किया गया है. अर्जी में कहा गया कि लोगों की आपत्ति के बिना ही जिला बदलने का अधिकार दिए जाने वाली रेवेन्यू कोड की यह धारा असंवैधानिक है. इसलिए इसे ख़त्म कर दिया जाना चाहिए और इसके तहत इलाहाबाद का नाम बदले जाने की प्रक्रिया को भी रद्द कर देना चाहिए.

    याचिकाकर्ताओं की वकील सैयद फरमान अब्बास नकवी की तरफ से कोर्ट में यह भी दलील दी गई है कि रेवेन्यू कोड की जिस धारा के तहत नाम बदला गया है, उसमे भी प्रस्ताव के बाद लोगों से आपत्ति मंगाने और उसे दूर करने के पैंतालीस दिनों के बाद ही नाम व सीमा बदलने का नियम है, लेकिन योगी सरकार ने सिर्फ कैबिनेट बैठक से ही यह फैसला ले लिया.

    गौरतलब है कि यूपी की योगी सरकार ने इसी साल सोलह अक्टूबर को कैबिनेट से प्रस्ताव पास कराने के बाद अठारह अक्टूबर को नोटिफिकेशन जारी कर इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया था. हालांकि नाम बदले जाने के फैसले के खिलाफ दाखिल एक अर्जी को हाईकोर्ट खारिज भी कर चुका है, लेकिन इस अर्जी को अदालत ने सुनवाई के लिए मंजूर करते हुए योगी सरकार से जवाब तलब कर लिया है. नाम बदले जाने के मामले में जैक सेवा ट्रस्ट, एडवोकेट सुनीता शर्मा और एडवोकेट शाहिद सिद्दीकी समेत पांच अन्य लोगों ने भी अर्जी दाखिल की हुई है.