सुप्रीम कोर्ट ने इल्तिजा जावेद को अपनी मां महबूबा मुफ्ती से मिलने की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा अपनी मां से निजी तौर पर मिल सकती है। इल्तिजा अपने हिसाब से मां से नीजि तौर पर मिलने की तारीख भी तय कर सकती हैं।
इल्तिजा जावेद ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। याचिका में इल्तिजा जावेद ने अपनी मां महबूबा मुफ्ती से मिलने की मांग की थी। उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि अधिकारियों को निर्देश दिया जाए ताकि वे अपनी मां से मिल सकें। इल्तिजा ने कहा था कि वह अपनी मां की सेहत को लेकर बेहद चिंतित हैं, क्योंकि उनकी उनसे एक महीने से मुलाकात नहीं हुई है। इल्तिजा की याचिका को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एसए नजीर की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर से धरा 370 हटाए जाने के बाद महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला समेत घाटी के कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था। अभी तक किसी भी नेता की रिहाई नहीं हुई है। इससे पहले महबूबा की बेटी इल्तिजा जावेद ने एक वॉयस मैसेज जारी किया था। इल्तिजा ने वॉयस मैसेज में कहा था, “मुझे भी हिरासत में लिया गया है, और धमकी दी गई है कि अगर मैंने मीडिया से बात की तो अंजाम भुगतने पड़ेंगे।”
इल्तिजा ने वॉयस मैसेज में कहा था कि उनके साथ अपराधी की तरह बर्ताव किया जा रहा है, और लगातार उनके ऊपर नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि आवाज उठाने वाले कश्मीरियों के साथ मैं भी जान का खतरा महसूस कर रही हूं। इल्तिजा ने कहा कि मेरे साथ ऐसा इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि मैंने मीडिया से पहले बात की थी, और बताया था कि घाटी में कर्फ्यू लगाए जाने के बाद से कश्मीरियों को किस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
(नवजीवन)
मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: योगी सरकार ने हाईकोर्ट में दाखिल किया हलफनामा: जिले का नाम बदला, शहर अब भी इलाहाबाद ही है
प्रयागराज: यूपी की योगी सरकार द्वारा संगम के शहर इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किये जाने के फैसले के खिलाफ दाखिल अर्जियों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है. सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना जजमेंट रिजर्व कर लिया है. चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच इस मामले में अगले हफ्ते अपना फैसला सुनाएगी. अदालत ने इस मामले में योगी कैबिनेट के मिनट्स और नोटिफिकेशन के सभी रिकार्ड तलब कर लिए थे.
योगी सरकार की तरफ से आज अदालत में जो दलीलें पेश की गईं, कोर्ट उससे संतुष्ट नहीं हुई. सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि नाम बदलने की प्रक्रिया भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि क़ानून व नियमों के आधार पर होती है. मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस गोविन्द माथुर और जस्टिस वाई के श्रीवास्तव की डिवीजन बेंच में हुई.
इलाहाबाद हेरिटेज सोसाइटी समेत बारह पूर्व अफसरों- जन प्रतिनिधियों व प्रोफेसरों द्वारा दाखिल की गई पीआईएल में यूपी रेवेन्यू कोड की उस धारा 6 को चैलेंज किया गया था, जिसके तहत इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किया गया है. अर्जी में कहा गया कि लोगों की आपत्ति के बिना ही जिला बदलने का अधिकार दिए जाने वाली रेवेन्यू कोड की यह धारा असंवैधानिक है. इसलिए इसे ख़त्म कर दिया जाना चाहिए और इसके तहत इलाहाबाद का नाम बदले जाने की प्रक्रिया को भी रद्द कर देना चाहिए.
याचिकाकर्ताओं की वकील सैयद फरमान अब्बास नकवी की तरफ से कोर्ट में यह भी दलील दी गई है कि रेवेन्यू कोड की जिस धारा के तहत नाम बदला गया है, उसमे भी प्रस्ताव के बाद लोगों से आपत्ति मंगाने और उसे दूर करने के पैंतालीस दिनों के बाद ही नाम व सीमा बदलने का नियम है, लेकिन योगी सरकार ने सिर्फ कैबिनेट बैठक से ही यह फैसला ले लिया.
गौरतलब है कि यूपी की योगी सरकार ने इसी साल सोलह अक्टूबर को कैबिनेट से प्रस्ताव पास कराने के बाद अठारह अक्टूबर को नोटिफिकेशन जारी कर इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया था. हालांकि नाम बदले जाने के फैसले के खिलाफ दाखिल एक अर्जी को हाईकोर्ट खारिज भी कर चुका है, लेकिन इस अर्जी को अदालत ने सुनवाई के लिए मंजूर करते हुए योगी सरकार से जवाब तलब कर लिया है. नाम बदले जाने के मामले में जैक सेवा ट्रस्ट, एडवोकेट सुनीता शर्मा और एडवोकेट शाहिद सिद्दीकी समेत पांच अन्य लोगों ने भी अर्जी दाखिल की हुई है.