Author: Millat Times Staff

  • अमित शाह बोले, सभी नागरिकों के लिए हो सकती है सिर्फ एक आईडी

    केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस और बैंक खाते के लिए भविष्य में अलग-अलग दस्तावेज के बजाय इन सभी चीजों के लिए एक कॉमन कार्ड जारी करने का विचार रखा है.

    इसके साथ ही उन्होंने 2021 में होनी वाली जनगणना के लिए मोबाइल ऐप के इस्तेमाल की बात कही है, जिससे जनगणना अधिकारियों को कागज और पेन लेकर नहीं घूमना होगा. शाह ने कहा कि यह जनगणना की प्रक्रिया में एक तरह से बड़े डिजिटल क्रांति के जैसा होगा.

    बीते सोमवार को दिल्ली में रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के नए दफ्तर का शिलान्यास करते हुए उन्होंने कहा, ‘आखिर हमारे पास आधार, पासपोर्ट, बैंक अकाउंट, ड्राइविंग लाइसेंस और वोटर कार्ड के लिए एक ही कार्ड क्यों नहीं हो सकता है. ऐसा सिस्टम होना चाहिए कि सभी डेटा को एक ही कार्ड में रखा जा सके. ऐसा संभव है. इसलिए डिजिटल जनगणना की जरूरत है.’

    बता दें कि पहाड़ी राज्य जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 1 अक्टूबर, 2020 से जनगणना की प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि शेष भारत में 1 मार्च, 2021 से जनगणना होगी.

    देश भर में 16 भाषाओं में जनगणना का काम होगा और इस पर कुल 12,000 करोड़ रुपये की लागत आने की संभावना है. अमित शाह ने कहा कि 2021 की जनगणना का डेटा भविष्य के भारत की योजना का आधार होगा.

    बता दें कि मार्च में सरकार ने बताया था कि देश की जनगणना इस बार दो चरणों में होगी. जनगणना 2021 का प्री-टेस्ट 12 अगस्त 2019 को शुरू हुआ था जो इस महीने के आखिर में खत्म होगा.

    शाह ने अपने भाषण में बताया कि जनगणना के काम में कुल 33 लाख लोगों की मदद ली जाएगी, जो घर-घर जाकर आंकड़े जुटाएंगे.

    शाह ने कहा, ‘जनगणना एक बोरिंग काम नहीं है. इसकी मदद से सरकार लोगों तक अपनी योजनाएं पहुंचा पाती है. नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) की मदद से सरकार को देश की समस्याएं हल करने में मदद मिलती है.’

    गृह मंत्री ने कहा कि इस तरह की प्रणाली भी होनी चाहिए जिसमें किसी व्यक्ति की मृत्यु होते ही यह जानकारी जनसंख्या आंकड़े में अपडेट हो जाए. उन्होंने कहा, ‘आधार, पासपोर्ट, बैंक खाते, ड्राइविंग लाइसेंस, और वोटर कार्ड जैसी सभी सुविधाओं के लिए एक ही कार्ड हो सकता है. इसकी संभावनाएं हैं.. input( the wire)

  • झारखंड में फिर से मॉब लिंचिंग, एक युवक की हत्या, दो की हालत गंभीर

    झारखंड के खूंटी जिले में गोकशी के शक में रविवार को भीड़ ने पीट-पीटकर एक युवक की हत्या कर दी जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए.

    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि खूंटी के जलटंडा सुआरी गांव में रविवार को सुबह लगभग 10 बजे के आसपास भीड़ ने इन लोगों पर उस वक्त हमला किया, जब ये लोग कथित तौर पर एक जानवर के शव से मांस निकाल रहे थे.

    छोटानागपुर रेंज के डीआईजी होमकर अमोल वेणुकांत ने बताया, ‘तीन गांव वाले कथित तौर पर प्रतिबंधित पशु को मारने के लिए ले जा रहे थे. इन गांव वालों की पहचान कलंतुस बारला, फिलिप होरो और फागु कछप के रूप में हुई है. अन्य ग्रामीणों ने इन लोगों को देखा और इनकी पिटाई करनी शुरू कर दी. हालांकि, सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें अस्पताल ले गई. इस बीच बारला ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया. अन्य दो की हालत गंभीर है.’

    डीआईजी का कहना है कि घटना के बारे में सटीक जानकारी नहीं है और मामले की जांच की जा रही है.

    उन्होंने कहा कि अभी तक इस मामले की किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया, कुछ लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है.

    गौरतलब है कि इस साल 18 जून को झारखंड के सरायकेला-खरसावां में बाइक चोरी के आरोप में भीड़ के हमले में 22 साल के तबरेज अंसारी की मौत हो गई थी.

    झारखंड में अकेले सितंबर में मॉब लिंचिंग की तीन घटनाएं हो चुकी हैं. 11 सितंबर को साहिबगंज जिले में बच्चा चोकी के शक में एक 70 साल के शख्स की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी जबकि तीन सितंबर को रामगढ़ जिले में पचास से अधिक लोगों की भीड़ ने एक शख्स को बुरी तरह से पीटा था, जिसने अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में ही दम तोड़ दिया था.

    वहीं, छह सितंबर को धनबाद के कागती पहाड़ी गांव में बच्चा चोरी की अफवाह में ही एक और शख्स की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी.

    मालूम हो कि झारखंड में बीते तीन सालों में चोरी, बच्चा चोरी और गोहत्या के आरोप में भीड़ हमले में 21 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, जनवरी 2017 से लेकर अब तक राज्य में जादू-टोने के शक में 90 से अधिक लोगों को मार दिया गया है.  input( the wire)

  • बलात्कार के आरोपी पूर्व भाजपा सांसद चिन्मयानंद गिरफ़्तार..

    बीजेपी नेता चिन्मयानंद (Chinmayanand) को लॉ की छात्रा से बलात्कार के आरोप में कोर्ट ने 14 दिन के लिए जेल भेज दिया है. इसी मसले में यूपी की विशेष जांच दल (SIT) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. एसआईटी प्रमुख नवीन अरोड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि चिन्मयानंद ने सारे आरोप कबूल कर लिए हैं. वायरल हुए वीडियो में खुद चिन्मयानंद हैं, यह उन्होंने स्वीकार किया. जिसपर बिना देरी के शुक्रवार को सुबह गिरफ्तार किया गया. वीडियो और ऑडियो की बारीकी से जांच की गई. SIT चीफ के मुताबिक चिन्मयानंद ने उनसे कहा कि मैं गलती पर शर्मिंदा हूं..

    बता दें कि उत्तर प्रदेश की विशेष जांच दल (SIT) की टीम ने चिन्मयानंद को उनके आश्रम से शुक्रवार की सुबह करीब 8 बजकर 50 मिनट पर गिरफ्तार किया. जिसके बाद चिन्मयानंद को कोर्ट में पेश किया गया. इस बीच राज्य यूपी के डीजीपी ने कहा कि चिन्मयानंद से फिरौती मांगने की कोशिश के आरोप में 3 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है..

    बताते चले कि चिन्मयानंद (Chinmayanand) के खिलाफ लॉ छात्रा ने 12 पन्नों की शिकायत की और SIT को दिए बयान में कई चौंका देने वाली बातें सामने आई. पीड़िता का कहना है कि चिन्मयानंद ने ब्लैकमेल कर रेप किया है. पीड़िता का हॉस्टल के बाथरूम में नहाने का वीडियो बनाया गया और उस वीडियो को वॉयरल करने की धमकी देकर एक साल तक रेप करता रहा. साथ ही पीड़िता ने बताया कि चिन्मयानंद ने शारीरिक शोषण का वीडियो भी बनाया है. input (NDTV).

  • गृह मंत्री अमित शाह बोले- जल्द ही पूरे देश में लागू करेंगे NRC

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि पूरे भारत में एनआरसी लाया जाएगा और सभी अवैध प्रवासियों को वैध तरीकों से देश से बाहर कर दिया जाएगा। अमित शाह ने यह भी कहा कि देश की जनता ने 2019 के आम चुनाव के फैसले के माध्यम से देशभर में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) लागू करने पर अपनी मुहर लगा दी है।

    उन्होंने रांची में एक कार्यक्रम में कहा, ‘हमने अपने चुनाव घोषणापत्र में देश की जनता से वादा किया था कि केवल असम में नहीं बल्कि पूरे देश में हम एनआरसी लाएंगे और देश की जनता का एक रजिस्टर बनाएंगे तथा बाकी (अवैध प्रवासियों) लोगों के लिए कानून के हिसाब से कार्रवाई होगी।’ गृह मंत्री ने कहा कि एनआरसी का पूरा विस्तार राष्ट्रीय नागरिक पंजी है, नाकि राष्ट्रीय असम पंजी। इसलिए यह पूरे देश में लागू होना चाहिए और मेरा मानना है कि देश की जनता की एक सूची होनी चाहिए..

    https://twitter.com/BJP4India/status/1174312684482748416

    जिनके नाम एनआरसी में नहीं, उन्हें भी मिल रहा मौका
    अमित शाह ने कहा कि असम में जिन लोगों के नाम एनआरसी में नहीं आए हैं, उन्हें विदेशी न्यायाधिकरणों के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। उन्होंने आगे कहा, ‘असम सरकार ने उन लोगों के लिए वकील मुहैया कराने की भी व्यवस्था की है, जो अपना पक्ष रखने के लिए वकीलों का शुल्क नहीं वहन कर सकते। लेकिन मेरा पुरजोर विश्वास है कि एक भी ऐसा देश नहीं है, जहां कोई भी जाकर बस सके। मैं आपसे पूछता हूं कि क्या आप अमेरिका में जाकर बस सकते हैं? आप नहीं बस सकते। तो फिर कोई भारत में कैसे आकर बस सकता है? सीधी सी बात है।’

    गृह मंत्री ने पूछा कि इसमें राजनीति कहां से आ गई। उन्होंने कहा, ‘अगर आप ब्रिटेन, नीदरलैंड या रूस जाकर बसने की कोशिश करते हैं तो कोई आपको अनुमति नहीं देगा। तो कोई भारत आकर कैसे बस सकता है। देश इस तरह नहीं चलते। समय की जरूरत है कि देश की जनता का एक राष्ट्रीय रजिस्टर बने।’
    आपको बता दें कि असम में अंतिम एनआरसी का प्रकाशन 31 अगस्त को किया गया था, जिसमें राज्य के 19 लाख निवासियों के नाम नहीं हैं।

  • प्रोटेस के बाद दबाव में आयी झारखंड पुलिस तबरेज़ अंसारी मामले में 302 का मुक़दमा दर्ज..

    झारखंड के सरायकेला में तबरेज अंसारी की मॉब लिंचिंग मामले में पुलिस ने बुधवार को अदालत में फिर से एक नया आरोपपत्र दाख़िल किया है. इसमें आरोपियों के खिलाफ फिर से हत्या की धारा 302 जोड़ दी गई है, जिसे आठ दिन पहले हटाकर धारा 304 में तब्दील किया गया था.

    एनडीटीवी के अनुसार, नए मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने सभी 11 आरोपियों पर फिर से धारा 302 का आरोप लगा दिया है. इससे पहले तबरेज़ की पत्नी शाइस्ता ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी और इंसाफ़ नहीं मिलने पर ख़ुदकुशी की धमकी दी थी.

    राज्य के पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि सरायकेला-खरसांवा की अदालत में पुलिस ने इन 11 आरोपियों के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दाखिल किए. इसके अलावा आज ही इस मामले के दो अन्य आरोपियों विक्रम मंडल और अतुलमहली के खिलाफ पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किए और उनके खिलाफ भी भारतीय दंड संहिता की अन्य धाराओं के साथ हत्या की धारा 302 के तहत मामला बनाया गया है..

    https://twitter.com/JharkhandPolice/status/1174343540068896769

    पुलिस ने बताया कि महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर (एमजीएमअस्पता) के विशेषज्ञों की राय मिलने के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ फिर से आरोप पत्र में 302 लगाने का निर्णय लिया गया, क्योंकि उनकी रिपोर्ट में कहा गया था कि तबरेज को दिल का दौरा उसे हड्डियों में लगी चोट और हृदय में खून एकत्रित होने के कारण पड़ा था.

    इससे पहले अपराध विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट में तबरेज की मौत का कारण सिर्फ दिल का दौरा पड़ना बताया गया था, जिसके आधार पर पुलिस ने इस मामले में पहले 11 आरोपियों के खिलाफ दाखिल आरोप पत्र में हत्या की धारा 302 के स्थान पर भारतीय दंड संहिता की धारा 304 लगाई थी. इस धारा का आशय था कि हत्या गैर इरादतन थी.

    बता दें कि इस साल 18 जून को झारखंड के सरायकेला-खरसावां में बाइक चोरी के आरोप में भीड़ की पिटाई के एक सप्ताह बाद 22 वर्षीय तबरेज अंसारी की मौत हो गई थी. पुलिस ने उसकी पत्नी शाइस्ता की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत 13 नामजद लोगों में से 11 आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी. दो अन्य आरोपियों के खिलाफ अभी भी जांच जारी है.

    तबरेज पूना में वेल्डर का काम करता था और घटना के समय अपने गांव आया हुआ था. सरायकेला खरसांवा के पुलिस अधीक्षक कार्तिक एस ने उस समय बताया था कि इस मामले की जांच में पुलिस ने जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखी तो उसमें तबरेज की मौत हृदय गति रुकने के कारण हुई बताई गई थी.

    बता दें कि, अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) ने तबरेज की भीड़ द्वारा हत्या की कड़ी निंदा की थी और सरकार से इस तरह की हिंसा और भय के माहौल को रोकने के लिये ठोस कार्रवाई करने का अनुरोध किया था..

    input:( the wire)

  • अयोध्या मामले पर सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्षकार के वकील ने ऐसा क्या कह दिया कि SC से मांगनी पड़ी माफी..

    अयोध्या जमीन विवाद (Ayodhya Land Dispute Case) मामले में Supreme Court में गुरुवार को 27वें दिन की सुनवाई हुई. इस दौरान मुस्लिम पक्षकार की ओर से राजीव धवन ने कहा कि रामचबूतरा ही राम का जन्म स्थान था न कि गुम्बद. 1855 में हिन्दू-मुसलमानों के बीच दंगे फसाद होने के बाद अंग्रेजों ने विवादित ढांचे में रेलिंग बना दी थी. इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि हिन्दू गुम्बद के नीचे ही पूजा करते थे. इन्हीं दलीलों के साथ धवन ने कोर्ट में दिए गए रामसूरत तिवारी के बयान को ढुलमुल बताते हुए कहा कि 1995 में तिवारी ने 1935 में की गई अपनी पहली राम जन्मभूमि यात्रा के बारे में बताते हुए गर्भगृह में रामलला की तस्वीर और मूर्ति के दर्शन करने की बात कही थी, लेकिन जिरह में वो ये नहीं बता पाए कि वो किस दरवाजे से अंदर घुसे थे? यानी उनका बयान तथ्य पर आधारित नहीं है.

    सुनवाई के दौरान जस्टिस भूषण ने कहा कि हाईकोर्ट ने अपने फैसले में तिवारी के बयान पर भरोसा किया है तो आपके उस पर भरोसा नहीं करने का क्या तर्क है? इस पर धवन ने कहा कि मैं तो सिर्फ बयान के हवाले से बता रहा हूं, आप तो काफी आक्रामक हो गए! इस पर रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि 1855 में हिन्दू-मुस्लिम तनाव, धवन का ये बर्ताव दुर्भाग्यपूर्ण है. इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने फिर धवन को जस्टिस भूषण के सवाल का जवाब देने को कहा. इसके बाद धवन ने अपने अंदाज और जवाब पर सफाई देते हुए माफी मांग ली.. (input : ndtv)

  • दिग्विजय का BJP पर हमला- भगवा वस्त्र पहनकर मंदिरों में रेप हो रहा, ‘सनातन धर्म को जिन्होंने बदनाम किया उन्हें…

    वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर हमला बोला है. दिग्विजय सिंह के निशाने पर एक बार फिर भगवा और भाजपा हैं. भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा कि आज भगवा ड्रेस (Saffron Clothes) पहनकर लोग रेप कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिरों के भीतर भगवा ड्रेस पहनकर बलात्कार की घटनाए हो रही हैं. भगवा वस्त्र पहनकर लोग चूरन बेच रहे हैं. हमारे सनातन धर्म को जिन्होंने बदनाम किया है, उन्हें ईश्वर भी माफ नहीं करेगा. दरअसल, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का इशारा पूर्व बीजेपी सांसद स्वामी चिन्मयानंद (Swami Chinmayanand) की ओर था, जिनकी मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं. उनपर उनकी कॉलेज में पढ़ने वाले एक छात्रा ने ब्लैकमेल कर सालों तक रेप करने का आरोप लगाया है..

    बता दें कि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में संतों का जमावड़ा हुआ था. इस समागम में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि वो नर्मदा और धर्म के नाम पर कथित भ्रष्टाचार की जांच कराएंगे. संतों को पट्टे देने पर भी विचार होगा. सरकार के निर्देश पर इस समागम के कर्ताधर्ता कम्प्यूटर बाबा बने. उन्होंने दावा किया गया कि इसमें प्रदेश भर के करीब 1000 संत शामिल हुए. सम्मेलन में सीएम कमलनाथ, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह भी मौजूद थे. लेकिन मंच पर कमलनाथ के जूते और दिग्विजय के बयान पर बीजेपी हमलावर हो गई.

    संतों को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा भगवा पहनकर लोग चूरन बेच रहे हैं, भगवा वस्त्र पहनकर मंदिर में बलात्कार हो रहा है, हमारे सनातन धर्म को जिन लोगों ने बदनाम किया है उन्हें ईश्वर भी माफ नहीं करेगा. सम्मेलन में  से 1000 से ज्यादा साधू जुटे, लेकिन बीजेपी को नजर आया तो मंच से मुख्यमंत्री कमलनाथ का जूता और दिग्विजय सिंह का बयान. बीजेपी प्रवक्ता राहुल कोठारी ने कहा संत समागम आप करते हैं बुलाकर संतों की बेज्जती करते हैं, साथ में कमलनाथ जूता दिखाकर संतों की ओर बैठते हैं इन्हें संतों का श्राप लगने वाला है.

    हालांकि समागम में पधारे साधू-संतों को दिग्विजय के बयान या जूते में कुछ गलत नहीं लगा. श्री महंत राम गिरिजी महाराज, बाबा डंडावाले ने कहा कि इसमें कुछ ग़लत नहीं है जो लोग भीख मांग रहे हैं, चूरन बेच रहे हैं सरकार उनको एक कानून बनाकर तीन साल तक गौशाला में रखे या ता गौसेवा करेंगे नहीं तो घर भाग जाएंगे. इस समागम पर खर्च मध्यप्रदेश सरकार की तिजोरी से भी हुआ है, वैसे सरकार को जनता के पैसे समागम में खर्चने पर कोई बुराई नहीं लगती, साधू चाहते हैं साल में कई बार ऐसे समागम आयोजित हों. धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के मंत्री पीसी शर्मा ने कहा हमारा धर्मस्व विभाग है, कुछ खर्चा सरकार करेगी कुछ बाहरी से होगा..

    वहीं कंप्यूटर बाबा ने कहा एक बार नहीं साल में कई बार समागम होता रहे, पूरा संत समाज सरकार के साथ खड़ा है. हो भी क्यों ना आखिर इस समागम के लिये सरकार ने भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी, रहने से लेकर खानपान तक के लिये खाद्य विभाग के अधिकारियों को ड्यूटी पर तैनात कर दिया. इस मौके पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि 35 साल पहले मैंने लोकसभा में कहा था कि आनंद विभाग बनाना चाहिए. उन्होंने संतों की मौजूदगी में कहा कि सरकार उद्योगपतियों को पट्टा दे सकती है तो मंदिर संचालक को क्यों नहीं. कांग्रेस दिमाग के अलावा दिल से भी सोचती है, कांग्रेस सरकार में किसी साधू को कुछ मांगने की जरूरत नहीं है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सन्त समागम ने मेरा 250 ग्राम खून बढ़ा दिया है..

    कभी शिवराज सरकार में मंत्री रहे कंप्यूटर बाबा ने निमंत्रण शिवराज सिंह को भी भेजा था लेकिन वो नहीं आये. बहरहाल कंप्यूटर बाबा वैसे तो दिग्विजय सिंह के लिये चुनाव से पहले धूनी रमाए बैठे थे लेकिन उन्हें चुनाव जिता नहीं पाए, अब देखना होगा इस मंच से दिग्विजय सिंह ने जो कहा है वो बाबा और सरकार के लिये क्या नतीजा लाएगा..  (INPUT: NDTV)

  • अयोध्या केस : राजीव धवन ने कोर्ट में पढ़ा मो. इक़बाल का शेर- ‘है राम के वजूद पे हिन्दोस्तां को नाज़…

    सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की 25वें दिन की सुनवाई जारी है. मुस्लिम पक्षकारों के वकील राजीव धवन अपना पक्ष रख रहे हैं. राजीव धवन ने कहा कि भगवान राम की पवित्रता पर कोई विवाद नहीं है. इसमें भी विवाद नहीं है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में कहीं हुआ था. लेकिन इस तरह की पवित्रता स्थान को एक न्यायिक व्यक्ति में बदलने के लिए पर्याप्त कब होगी? इसके लिए कैलाश पर्वत जैसी अभिव्यक्ति होनी चाहिए. इसमें विश्वास की निरंतरता होनी चाहिए और यह भी दिखाया जाना चाहिए कि निश्चित रूप से वहीं प्रार्थना की गई थी.

    सुनवाई के दौरान धवन ने अल्लामा इकबाल की शायरी का जिक्र कर राम को इमामे हिन्द बताते हुए उन पर नाज की बात की. लेकिन फिर कहा कि बाद में वो बदल गए थे और पाकिस्तान के समर्थक बन गए थे. सुनवाई के दौरान राजीव धवन ने कोर्ट में अल्लामा इक़बाल का मशहूर शेर भी पढ़ा, ‘है राम के वजूद पे हिन्दोस्तां को नाज़…अहल-ए-नज़र समझते हैं उस को इमाम-ए-हिंद.’

    इस पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने राजीव धवन से पूछा, तो क्या आप कह रहे हैं कि कुछ शारीरिक अभिव्यक्ति होनी चाहिए? क्या जगह को व्यक्ति बनाने के लिए मापदंडों को निर्धारित करना बहुत मुश्किल नहीं होगा? राजीव धवन ने इस पर जवाब दिया, कोई भी ग्रंथ ये बताने में सक्षम नहीं है कि अयोध्या में किस सटीक स्थान पर भगवान राम का जन्म हुआ था..

    साथ ही कोर्ट ने राजीव धवन से पूछा कि भगवान का स्वयंभू होना क्या सामान्य प्रक्रिया है? ये कैसे साबित करेंगे कि राम का जन्म वहीं हुआ या नहीं? धवन ने कहा कि यही तो मुश्किल है. रामजन्मस्थान का शिगूफा तो ईस्ट इंडिया कम्पनी ने 1855 में छोड़ा और हिंदुओं को वहां रामचबूतरा पर पूजा पाठ करने की इजाज़त दी गई.

    (input: ndtv)

  • फारूक अब्दुल्ला की हिरासत पर कांग्रेस ने कहा, अखंडता की लड़ाई लड़ने वाले नेताओं को डाला जा रहा है जेल में

    कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) को जन सुरक्षा कानून (PSA) के तहत हिरासत में लिए जाने की निंदा करते हुए सोमवार को कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि भारत की एकता एवं अखंडता की लड़ाई लड़ने वाले नेताओं को जेल में डाला जा रहा है. पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं. यह देश का दुर्भाग्य है कि एक पूर्व मुख्यमंत्री और एक मुख्याधारा की पार्टी के नेता के साथ यह हुआ है.” उन्होंने कहा कि नेशनल कांफ्रेंस जम्मू-कश्मीर की सबसे पुरानी पार्टी है और उसने देश की एकता और अखंडता के लिए काम किया है. .

    आजाद ने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर में अगर आतंकवाद नहीं है तो वह जम्मू-कश्मीर की जनता, कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी के कारण हुआ है. भाजपा के कारण यह नहीं हुआ है.” गौरतलब है कि अब्दुल्ला को पीएसए के तहत हिरासत में लिया गया है. पीएसए के तहत किसी भी व्यक्ति को बिना किसी मुकदमे के दो साल तक हिरासत में रखा जा सकता है.

    वहीं उनकी हिरासत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में राज्यसभा सांसद वाइको ने याचिका दायर की है. सोमवार को याचिका पर CJI रंजन गोगोई, जस्टिस एस ए बोबडे और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की पीठ ने सुनवाई की और कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक सप्ताह का नोटिस देकर जवाब देने के लिए कहा गया है.  याचिका पर सुनवाई करते हुए सीजेआई रंजन गोगोई ने केंद्र सरकार से पूछा ‘क्या वो हिरासत में हैं?’ इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा हम सरकार से निर्देश लेंगे. वाइको के वकील ने कोर्ट से कहा कि फारुक अब्दुल्ला बाहर नहीं निकल सकते, कश्मीर में अधिकारों का हनन हो रहा है.

    (इनपुट- ndtv)

  • तबरेज मॉब लिंचिंग: पत्नी ने कहा-आरोपियों पर हत्या का मामला दर्ज करो नहीं तो कर लूंगी आत्महत्या

    बरेज अंसारी मॉब लिंचिंग (Mob Lynching) मामले में सोमवार को नया मोड़ आ गया. तबरेज की पत्नी एस परवीन ने धमकी दी है कि अगर आरो‌पियों पर हत्या (Murder) का मुकदमा नहीं दर्ज किया गया तो वो आत्महत्या (Suicide) कर लेंगी. शाइस्ता परवीन परिजन के साथ कलक्‍ट्रेट पहुंचकर डीसी ए दोड्डे से मुलाकात की. उन्‍होंने आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की है. शाइस्‍ता ने इस मामले में आवेदन देकर पोस्टमार्टम, विसरा और SIT रिपोर्ट की कॉपी मांगी है. डीसी ने उन्हें एसपी से मुलाकात कर इन रिपोर्ट्स की कॉपी लेने के लिए कहा है..

    शाइस्ता परवीन ने आवेदन में कहा कि तबरेज अंसारी की मौत ग्रामीणों की पिटाई और पुलिस और डॉक्टरों की लापरवाही के चलते हुई. ऐसे में आगे की कार्रवाई के लिए परिवार को पोस्टमार्टम, विसरा एवं एसआईटी रिपोर्ट की जरूरत है. उसने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी ने इस मामले में धारा 302 को हटाकर धारा 304 के तहत गलत ढंग से कोर्ट में चार्जशीट पेश की है. परवीन ने बताया कि इस सिलसिले में पहले भी आवेदन कर रिपोर्ट की मांग की गई थी लेकिन वह अब तक नहीं दी गई है.

    बता दें कि इस मामले में तब नया मोड़ आया जब चार्जशीट में सभी 11 आरोपियों के ऊपर से धारा 302 को हटाकर धारा 304 लगाई गई. तबरेज की पत्नी शाइस्ता ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि दबाव के चलते आरोपियों पर लगी धाराओं में बदलाव किया गया. हालांकि, जिले के एसपी एस कार्तिक ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद हत्या का मामला नहीं बनता था, इसलिए आरोपियों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर चार्जशीट फाइल की गई है.

    भीड़ ने पोल से बांधकर रात भर पीटा था
    गौरतलब है कि 17 जून की रात को तबरेज अंसारी झारखंड के जमशेदपुर में अपने रिश्तेदार के घर से सरायकेला-खरसावां स्थित अपने गांव कदमडीहा लौट रहा था. इस दौरान रास्ते में धातकीडीह गांव में ग्रामीणों ने चोरी के आरोप में उसे पकड़ लिया और पोल से बांधकर रात भर उसकी पिटाई की. कथित रूप से उससे ‘जय श्री राम’ और ‘जय हनुमान’ के नारे भी लगवाए गए. ग्रामीणों ने रात भर पीटने के बाद अगले दिन सुबह उसे पुलिस के हवाले कर दिया था.

    पुलिस ने घायल तबरेज का इलाज सदर अस्पताल में कराया, फिर शाम को उसे जेल भेज दिया गया था. इसके चार दिन बाद 22 जून की सुबह दोबारा तबरेज अंसारी को जेल से गंभीर हालत में सदर अस्पताल लाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. इस मामले में पुलिस ने फौरन कार्रवाई करते हुए 11 लोगों को गिरफ्तार किया था. साथ ही खरसावां थाना प्रभारी और सिनी ओपी प्रभारी को ड्यूटी में लापरवाही के लिए निलंबित कर दिया गया था. मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था

    input: news 18