Author: Millat Times Staff

  • मॉब लिंचिंग पर मोदी को पत्र लिखने वाले लोगों के समर्थन में उतरीं 185 हस्तियां

    इन लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखने वाले 49 हस्तियों को प्रताड़ित किए जाने की निंदा करते हुए पत्र के हरेक शब्द का समर्थन करते हुए अपने कथन वाले नए पत्र को साझा किया है.

    इन्होंने कहा, ‘इसलिए हम एक बार फिर उस पत्र को यहां साझा कर रहे हैं और सांस्कृतिक, अकादमिक और कानूनी समुदायों से भी ऐसा करने की अपील कर रहे हैं. हममें से अधिकतर लोग रोजाना मॉब लिंचिंग, लोगों की आवाज को चुप कराने और नागरिकों को प्रताड़ित करने के लिए अदालतों के दुरुपयोग के बारे में बोलेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला पत्र लिखने वाली 49 हस्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने पर सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र से जुड़ी हुईं 180 से अधिक हस्तियों ने इन आरोपों की निंदा कर उनका समर्थन किया है.

    न्यूजक्लिक की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, लेखक नयनतारा सहगल, नृत्यांगना मल्लिका साराभाई, इतिहासकार रोमिला थापर, लेखक आनंद तेलतुम्बड़े, गायक टीएम  कृष्णा और कलाकार विवान सुंदरम शामिल हैं.

    इस बयान में उन्होंने कहा, ‘हममें से अधिकतर लोग हर दिन मॉब लिंचिंग, लोगों की आवाज को चुप कराने और नागरिकों को प्रताड़ित करने के लिए अदालतों के दुरुपयोग के खिलाफ बोलेंगे.’

    मालूम हो कि बीते तीन अक्टूबर को बिहार की एक अदालत के आदेश पर फिल्म निर्देशक श्याम बेनेगल, निर्देशक अडूर गोपालकृष्णन, मणिरत्नम, इतिहासकार रामचंद्र गुहा, गायिका शुभा मुद्गल, अभिनेत्री और निर्देशक अपर्णा सेन सहित 49 हस्तियों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की गई थी. इन हस्तियों ने मॉब लिंचिंग की बढ़ रही घटनाओं को लेकर जुलाई में चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा था.

    एफआईआर राजद्रोह सहित भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की कई धाराओं के तहत दर्ज की गई. वह भी तब, जब सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस दीपक गुप्ता ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा कि सरकार की आलोचना करने पर राजद्रोह के आरोप नहीं लगाए जा सकते

    इन 185 हस्तियों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि 49 सहयोगियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई क्योंकि इन्होंने समाज के सम्मानित सदस्य के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया था.

    इन्होंने कहा, ‘इन्होंने (49 हस्तियों) ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर देश में मॉब लिंचिंग के बारे में चिंता जताई थी. क्या इसे राजद्रोह कहा जा सकता है? और क्या अदालतों का दुरुपयोग करके नागरिकों की आवाज को चुप कराना प्रताड़ना नहीं है

    इन लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखने वाले 49 हस्तियों को प्रताड़ित किए जाने की निंदा करते हुए पत्र के हरेक शब्द का समर्थन करते हुए अपने कथन वाले नए पत्र को साझा किया है.

    इन्होंने कहा, ‘इसलिए हम एक बार फिर उस पत्र को यहां साझा कर रहे हैं और सांस्कृतिक, अकादमिक और कानूनी समुदायों से भी ऐसा करने की अपील कर रहे हैं. हममें से अधिकतर लोग रोजाना मॉब लिंचिंग, लोगों की आवाज को चुप कराने और नागरिकों को प्रताड़ित करने के लिए अदालतों के दुरुपयोग के बारे में बोलेंगे..INPUT:(THE WIRE)

  • बिना चुनाव लड़े ही सरकार बनाने की स्थिति में आ चुकी है भाजपा: राम माधव

    भाजपा महासचिव राम माधव ने शनिवार को कहा कि वैश्विक राजनीति में बदलाव का दौर चल रहा है क्योंकि यह ‘निर्णय लेने वाले नेतृत्व’ का युग है, जिसमें लोगों की भलाई के लिए काम शुरू हो सका है और भारत में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यही हो रहा है.

    माधव ने कहा कि भाजपा अब तक इतना निपुण हो चुकी है कि ‘वह बिना चुनाव लड़े ही सरकार बना सकती है.’ आरएसएस के प्रचारक माधव ने कहा कि मोदी देश में सबसे लोकप्रिय नेता हैं, जो 2019 के लोकसभा चुनाव के केंद्र में रहे.

    इस साल हुए आम चुनावों के लिए भाजपा की चुनावी रणनीति पर पत्रकार संतोष कुमार की पुस्तक ‘भारत कैसे हुआ मोदीमय’ के विमोचन के दौरान माधव ने कहा कि भगवा दल की जीत का श्रेय संघ को भी मिलना चाहिए क्योंकि वह चुनाव से पहले देश भर में 3.5 लाख से ज्यादा गांवों तक पहुंचा.

    हालिया लोकसभा चुनावों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘इसमें कोई संदेह नहीं है कि पूरा चुनाव मोदीजी के इर्द-गिर्द केंद्रित था और वह देश के सबसे लोकप्रिय नेता हैं. नकारात्मक नहीं, सकारात्मक रूप से वैश्विक राजनीति में भी मजबूत निर्णय लेने वाले नेतृत्व की शुरूआत हो चुकी है.’

    बिना किसी देश का नाम लिए माधव ने कहा कि ऐसे मामले भी देखने को मिले हैं, जहां कमजोर नेतृत्व के कारण कुछ महीने में सरकार गिर गई https://twitter.com/Nirusher/status/1180553229001744385

    उन्होंने कहा, ‘एक मजबूत नेतृत्व…निर्णय लेने वाले नेतृत्व, जो किसी देश के लोग महसूस करते हैं कि वे उनके लिए कुछ अच्छा कर सकते हैं, इस तरह के नेतृत्व के दौर की शुरूआत हो गई है और लोकतांत्रिक देश बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं. भारत में भी ऐसे बदलाव हो रहे हैं. मोदीजी आज इसी तरह के एक नेता के तौर पर उभरे हैं.’

    विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जब एक सकारात्मक नेतृत्व उभरता है तो यह लंबे समय तक सत्ता में रहता है. ‘वे अब बखूबी कल्पना कर सकते हैं कि वे कब सत्ता में आएंगे.’

    उन्होंने कहा कि भाजपा का यह सौभाग्य है कि उसके पास ऐसा नेतृत्व है, जिसकी प्रवृत्ति वैश्विक राजनीति में शुरू हो चुकी है. साथ ही, पार्टी का नेतृत्व अमित शाह कर रहे हैं, जो हमेशा पार्टी को चुनाव लड़ने के लिए तैयार रखते हैं.

    उन्होंने कहा राजनीतिक विशेषज्ञ आम तौर पर कहते हैं कि राजनीति लोगों को बांटती है लेकिन भाजपा ने कामकाज के आधार पर राजनीति की नयी संस्कृति की शुरूआत की, जो हर किसी को जोड़ती है.input:(the wire)

  • इमरान खान के विमान में नहीं आई थी खराबी, सऊदी क्राउन प्रिंस ने वापस बुलाने का दिया था आदेश: रिपोर्ट

    पाकिस्तान की एक साप्ताहिक मैगजीन ‘फ्राइडे टाइम्स’ ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. मैगजीन के अनुसार सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान संयुक्त राष्ट्र यात्रा के दौरान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के कुछ कार्यकलाप से इतने नाराज हो गए थे कि उन्होंने इमरान को अमेरिका से स्वदेश वापस ला रहे विमान को बीच रास्ते से ही वापस लौटने का आदेश दिया था. संयुक्त राष्ट्र महासभा में शिरकत के लिए अमेरिका की यात्रा के दौरान इमरान पहले सऊदी अरब गए थे. वह सऊदी अरब से वाणिज्यिक विमान से अमेरिका जाना चाह रहे थे. लेकिन, बिन सलमान ने कहा कि यह नहीं हो सकता, इमरान उनके खास मेहमान हैं और वह उनके खास निजी विमान से अमेरिका जाएंगे. इमरान एमबीएस के विमान से अमेरिका गए थे. वापस इसी से लौट रहे थे जब यह बताया गया कि तकनीकी खराबी के कारण उनके विमान को बीच रास्ते से अमेरिका लौटना पड़ा और इमरान फिर वाणिज्यिक उड़ान से वापस लौटे थे.

    अब ‘फ्राइडे टाइम्स’ ने यह कहकर चौंकाया है कि कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं थी, यह एमबीएस की नाराजगी थी जिसकी वजह से इमरान के विमान को लौटना पड़ा. पाकिस्तान सरकार के प्रवक्ता ने ‘फ्राइडे टाइम्स’ की रिपोर्ट को खारिज करते हुए इसे सरासर गलत और इसे इमरान की ‘सफल यात्रा’ को संदेह के घेरे में लाने की कोशिश बताते हुए इस पर गहरा खेद जताया है

    फ्राइडे टाइम्स’ ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘हर हाल में इमरान खान के प्रशंसक बने रहने वालों ने न्यूयॉर्क से लौटने पर उनका विजेता हीरो जैसा स्वागत किया. यहां तक कि इनकी तरफ से सुझाव यह भी आया कि जिस वाणिज्यिक विमान से इमरान जेद्दा से इस्लामाबाद लौट रहे हैं, उसे इमरान के प्रति सम्मान जताने के लिए एफ-17 थंडर विमानों के घेरे में लाया जाना चाहिए.’ ‘फ्राइडे टाइम्स’ ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘इन समर्थकों को लगता है कि इमरान ने कश्मीर, इस्लामोफोबिया जैसे सभी खास मुद्दों पर धारदार तरीके से बात रखी. उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि (जब इमरान बोल रहे थे तब) हॉल आधा खाली पड़ा था और उन्होंने मान लिया था कि पाकिस्तान अलकायदा आतंकियों को प्रशिक्षित करता था. उन्हें इससे फर्क नहीं पड़ता कि भारत-पाकिस्तान संवाद की उम्मीद पहले से कहीं कम हो गई है और एक क्षेत्रीय मुद्दा इस्लामी पाकिस्तान और हिंदू भारत का मुद्दा बना दिया गया है.’

    ‘फ्राइडे टाइम्स’ ने लिखा है, ‘इस यात्रा के कुछ अनचाहे नतीजे भी रहे. सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान न्यूयार्क में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की कूटनीति के कुछ पहलुओं से इतने अलग हो गए कि उन्होंने अपने निजी विमान को वापस बुलाकर और उसमें से पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को निकलवाकर बजाहिर इमरान को झिड़क दिया. वह (बिन सलमान) इस संभावना से खुश नहीं हो सकते थे कि इस्लामिक ब्लॉक का प्रतिनिधित्व संयुक्त रूप से इमरान खान, (तुर्की के राष्ट्रपति) रेसेप तैयप एर्दोगान और (मलेशिया के प्रधानमंत्री) महाथिर मोहम्मद करें और बिना उनकी (बिन सलमान की) पूर्व सहमति के पाकिस्तान, ईरान से पींगे बढ़ाए.’

    पाकिस्तान सरकार के प्रवक्ता ने ‘फ्राइडे टाइम्स’ की सूचना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे गलत बताया है. उन्होंने कहा, ‘सऊदी क्राउन प्रिंस की तरफ से इमरान के विमान को कनाडा से वापस अमेरिका बुलाने की खबर मनगढ़ंत है. पाकिस्तान और सऊदी

    अरब के शासकों के बीच बेहतरीन संबंध है. रिपोर्ट में प्रधानमंत्री की विश्व के नेताओं के साथ सफल बातचीत को कमजोर करने की कोशिश की गई है. तुर्की और मलेशिया के नेताओं से प्रधानमंत्री की मुलाकात पर अपने मन से नतीजा निकाल लिया गया है. इस रिपोर्ट का मकसद राजनैतिक लाभ के लिए भाईचारे वाला संबंध रखने वाले दो देशों के बीच के रिश्तों पर हमला करना है. हम इसे सिरे से खारिज करते हैं.’ input:(ndtv)

  • चिन्मयानंद मामला: रेप पीड़िता की गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन

    उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में पूर्व केंद्रीय मंत्री चिन्मयानंद पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली छात्रा की गिरफ्तारी के विरोध में दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्राओं और महिला संगठनों ने शनिवार को प्रदर्शन किया.

    इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों की छात्राओं और कुछ महिला संगठनों ने शनिवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर चिन्मयानंद कि विरोध में प्रदर्शन करते हुए जेल में बंद छात्रा के लिए इंसाफ की मांग की.

    23 साल की कानून की छात्रा ने चिन्मयानंद पर बलात्कार का आरोप लगया था, जिसके एक महीने बाद कथित तौर पर चिन्मयांनद को ब्लैकमेल करने और उनसे पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के आरोप में पीड़िता के खिलाफ ही मामला दर्ज किया गया.

    ऑल इंडिया वुमेन डेमोक्रेटिक एसोसिएशन की वाइस प्रेसिडेंट एस. पुनियावता ने कहा कि इस मामले में पीड़िता को बलि का बकरा बनाया गया और आरोपी को बचाया जा रहा है. हम सरकार से मांग करते हैं कि वह चिन्मयानंद को बचाना बंद करें और बलात्कार पीड़िता को रिहा करे.

    जामिया की चैताली ने कहा, ‘हम पितृसत्तात्मक ढांचे का विरोध कर रहे हैं. हम सत्ता और अधिकार के दुरुपयोग के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. आरोपी पर अभी तक बलात्कार का मामला भी दर्ज नहीं हुआ जबकि छात्रा ने गवाही और सबूत दे दिए हैं. यह कैसी जांच है.’

    मालूम हो कि चिन्मयानंद के वकील द्वारा छात्रा के खिलाफ मामला दर्ज कराने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने महिला को गिरफ्तार किया था. उसे 24 सितंबर को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था.

    छात्रा के पिता ने पहले कहा था कि पुलिस के पास उसकी बेटी के खिलाफ नाममात्र सबूत हैं और पुलिस कथित तौर पर चिन्मयानंद को बचाने की कोशिश कर रही है. चिन्मयानंद की गिरफ्तारी में छात्र की गवाही मुख्य था.

    पीपुल्स डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स यूनियन (पीडीएसयू) के सदस्य और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र जयदीप ने कहा कि आज न्याय का मतलब सिर्फ ताकतवर लोग हैं.

    उन्होंने कहा, ‘जिनके पास ताकत और पैसा है, न्याय सिर्फ उन्हीं के लिए है. एसआईटी मामले को भटकाने की कोशिश कर रही है और उसका पूरा ध्यान बलात्कार के बजाए उगाही पर है. मुझे उम्मीद है कि इस घटिया राजनीति से लड़की प्रभावित नहीं होगी और वह खुद के लिए खड़ी होगी.’

    जामिया मिलिया इस्लामिया में जेंडर स्टडीज की छात्रा रेखा सिंह ने कहा कि इस तरह की घटनाएं सिस्टम का हिस्सा बन चुकी हैं.

    गौरतलब है कि शाहजहांपुर स्थित स्वामी शुकदेवानंद विधि महाविद्यालय में पढ़ने वाली एलएलएम की छात्रा ने 23 अगस्त को सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड कर चिन्मयानंद पर शारीरिक शोषण तथा कई लड़कियों की जिंदगी बर्बाद करने के आरोप लगाने के साथ ही उसे तथा उसके परिवार को जान का खतरा बताया था.

    हालांकि छात्रा ने इस वीडियो में किसी का नाम नहीं लिया था, लेकिन छात्रा के पिता ने पुलिस में दर्ज अपनी शिकायत में कहा है कि वह चिन्यमानंद की ओर इशारा कर रही थी.

    छात्रा के पिता ने अपनी शिकायत में कहा था कि उनकी बेटी का यौन शोषण किया गया. इसके बाद भाजपा के पूर्व सांसद के खिलाफ आईपीसी की धारा 364 और 506 के तहत एफआईआर दर्ज की गई.. INPUT:(THE WIRE)

  • चिन्मयानंद को झटका, शाहजहांपुर की CJM कोर्ट ने 14 दिन के लिए बढ़ाई न्यायिक हिरासत

    लॉ स्टूडेंट से यौन शोषण के आरोप में जेल में बंद पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद (Swami Chinmayanand) की न्यायिक हिरासत की अवधि गुरुवार को 14 दिनों के लिए बढ़ा दी गई. चिन्मयानंद की सीजेएम (CJM) अदालत में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेशी हुई. अदालत ने चिन्मयानंद की पेशी की अगली तारीख 16 अक्टूबर तय की है. चिन्मयानंद के अधिवक्ता ओम सिंह ने बताया कि चिन्मयानंद को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया था. आज सीजेएम की अदालत में उनकी पेशी होनी थी, लेकिन सुरक्षा कारणों के चलते जेल से ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए उनकी पेशी हुई. अधिवक्ता ने बताया कि सीजेएम ओमवीर सिंह ने चिन्मयानंद की न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए और बढ़ा दी है.

    अधिवक्ता पूजा सिंह ने बताया कि चिन्मयानंद को मोतियाबिंद है और उनकी नजर कम हो रही है, क्योंकि मोतियाबिंद के कारण आंख के पास नस में तेज दर्द हो रहा है. पूजा सिंह ने कहा कि उन्होंने अदालत में भी इस बात को रखा है कि स्वामी पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हैं. ऐसे में जेल में उन्हें ‘ए’ क्लास की सुविधाएं मिलनी चाहिए परंतु उन्हें साधारण बंदियों की तरह भोजन और साधारण बंदियों की तरह फर्श पर लेटना पड़ रहा है. ओम सिंह ने बताया कि स्वामी और पीड़िता की आवाज के नमूने लेने के लिए विशेष जांच दल (SIT) ने सीजेएम की अदालत में अर्जी दी है जिस पर शुक्रवार को सुनवाई होनी है.

    उधर कलेक्ट्रेट में ‘जनता की आवाज’ नामक संगठन के कार्यकर्ताओं ने धरना दिया और चिन्मयानंद पर धारा 376 लगाने की मांग की. उन्होंने राज्यपाल के नाम भेजे गए ज्ञापन में आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार स्वामी का बचाव कर रही है.
    एलएलएम की एक छात्रा ने 24 अगस्त को वीडियो वायरल कर चिन्मयानंद पर यौन शोषण का आरोप लगाया था. इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने इस प्रकरण पर स्वत: संज्ञान लेते हुए पीड़िता को न्यायालय में तलब किया और मामले की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को एसआईटी के गठन का निर्देश दिया था. न्यायालय के निर्देश के बाद एसआईटी ने यौन शोषण के आरोपी चिन्मयानंद एवं रंगदारी मांगने के मामले में पीड़िता समेत चार लोगों को जेल भेज दिया. इसी मामले में स्वामी की न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए और बढ़ायी गई है.

  • Ayodhya Case : निर्मोही अखाड़े ने कहा- अब सुनवाई ‘टी-20’ जैसी हो गई, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई लताड़

    अयोध्या केस (Ayodhya Case) में सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद पर गुरुवार को 36वें दिन सुनवाई हुई. कोर्ट में निर्मोही अखाड़े की ओर से सुशील जैन ने कहा कि अब यह सुनवाई 20-20 जैसी हो गई है. इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आपको हमने साढ़े चार दिन दिए. यहां आपको जवाब देना है तो अब आप इसे 20-20 कह रहे हैं? तो क्या आपकी पिछली बहस टेस्ट मैच थी? सुशील जैन ने कहा कि हमारा दावा आंतरिक अहाते को लेकर है, क्योंकि बाहर तो हमारा अधिकार और कब्ज़ा था ही. हमने बाहर के पजेशन के लिए अर्ज़ी नहीं लगाई है क्योंकि वह तो पहले से ही हमारे पास था..

    अखाड़े के जवाब शुरू होने से पहले ही मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि जवाब में मेरा नाम गलत लिखा हुआ है. सुशील जैन ने कहा कि मेरी दलीलें और जवाब थोड़े पेचीदा हैं. इस पर जस्टिस नज़ीर ने हंसते हुए कहा कि आप चिंता ना करें आप हारते भी हैं तो आप जीतने वालों की तरफ ही होंगे. यानी कोर्ट का आशय था कि हिन्दू अखाड़ा और सेवायत होने की वजह से आपको भी लाभ मिल सकता है.

    हिन्दू पक्षकार श्री राम जन्मस्थान पुनरुत्थान समिति के पीए मिश्रा ने जवाब देते हुए भूमि की शास्त्रीय व्याख्या की. उन्होंने कहा कि इमारत भी भूमि की श्रेणी में आती है. लेकिन स्थान का मतलब देवता का भवन या धाम भी होता है. राजीव धवन ने कहा कि इस दलील का कोई मतलब नहीं क्योंकि भूमि की हिन्दू व्याख्या और शब्दकोश अलग है और मुस्लिम डिक्शनरी अलग.

    भूमि के देवता होने की सात मौलिक शर्तों और व्याख्या पर मिश्रा के ताजा दस्तावेज कोर्ट ने खारिज कर दिए. कोर्ट ने कहा कि ये सब पहले क्यों नहीं बताया, जो अब कोर्ट के सामने लाए हैं. इस चरण में हम इसे स्वीकार नहीं कर सकते. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आप देवता की मूर्ति की पूजा करते हैं न कि अमूर्त चीजों की!  चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि आप यहां क्या संवैधानिक मसला बताना चाहते हैं. हम पांच जज बैठे हैं तो इसका मतलब ये नहीं कि ये संविधान पीठ है, ये सिर्फ पांच जजों की बेंच है. आम तौर पर ऐसे मुद्दों की सुनवाई दो जजों की बेंच करती है, लेकिन पांच जजों की बेंच इस मुद्दे की संवेदनशीलता और अहमियत को देखते हुए सुनवाई कर रही है.

    सीजेआई ने कहा कि यह पहली अपील है. हम यहां सिर्फ टाइटल सूट को सुनने बैठे हैं. अब नई-नई चीजें बताने का समय नहीं है. कोर्ट ने मिश्रा को बैठने को कहा और निर्मोही अखाड़े के सुशील जैन से अपना जवाब देने को कहा.

    इससे पहले हिंदू पक्षकार की ओर से नरसिंहन ने स्कन्दपुराण के अयोध्या महात्यम के श्लोक ‘तस्मात स्थानेषाणे रामजन्म प्रवर्तते. जन्मस्थाम इदं प्रोक्तं मोक्षादि फलसाधनम..’ उदधृत करते हुए कहा कि अयोध्या में राम जन्म स्थान की यात्रा मोक्षदाई है. मोक्ष हिन्दू दर्शन के चार पुरुषार्थों में से आखिरी है. नरसिंहन मने कहा कि यह अकेली जगह नहीं जहां मंदिर के साथ मस्जिद बनाई गई है. उनका मकसद रहा कि हम राम के अपनी श्रद्धा भूल जाएं. इतना होने के बावजूद हिंदुओं की आस्था यहां लगातार बनी हुई है..INPUT(NDTV)

  • मोदी-शी बैठक: चीनी राष्ट्रपति के स्वागत के लिए बैनर लगाने की मिली अनुमति, बॉलीवुड एक्टर ने किया यह ट्वीट

    मद्रास हाईकोर्ट ने अगले सप्ताह चेन्नई में पीएम नरेंद्र मोदी एवं चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच होने वाली अनौपचारिक बैठक के लिये तमिलनाडु और केंद्र सरकार को दोनों नेताओं के स्वागत में बैनर लगाने की बृहस्पतिवार को अनुमति दे दी. अदालत ने कहा कि दोनों गणमान्य एक महिला इंजीनियर की मौत के बाद सड़क किनारे बैनर लगाने पर प्रतिबंध लगाया था और उसके आदेशों को प्रभावी तरीके से लागू नहीं करने पर सरकार की खिंचाई की थी. न्यायमूर्ति व्यक्तियों के स्वागत में बैनर लगाये जाने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है. अदालत ने इससे पहले एम सत्यनारायणन और न्यायमूर्ति एन सेशासयी की खंडपीठ ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि ऐसे बैनरों को लगाने के संदर्भ में राज्य को मौजूदा सभी नियमों का पालन करना होगा. पीठ ने यह भी कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को इस तरह के बैनर लगाने की इजाजत नहीं होगी.

    राज्य सरकार ने मल्लपुरम में होने वाली मोदी और शी चिनफिंग की मुलाकात से पहले बैनर लगाने के लिये मंगलवार को अदालत से इस संबंध में अनुमति देने का अनुरोध किया था. मल्लपुरम यहां से 50 किलोमीटर दूर है जहां मोदी एवं चिनफिंग की 11-13 अक्टूबर को अनौपचारिक बैठक होने वाली है. दोनों नेताओं के बीच यह ऐसी दूसरी अनौपचारिक बैठक होगी. नगर निगम प्रशासन के आयुक्त और अधिकारियों की ओर से दायर याचिका पर हालांकि अदालत ने समूचे राज्य में ऐसे ढांचे लगाने की अनुमति नहीं दी. याचिकाकर्ता ने बताया था कि मोदी और चिनफिंग पर्यटन शहर में द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. याचिकाकर्ता ने कहा कि आगंतुक गणमान्य व्यक्तियों के स्वागत में बैनर लगाना विदेश मंत्रालय की परंपरा रही है. उसने बताया कि राज्य एवं केंद्र सरकारों ने शीर्ष गणमान्य अतिथियों के स्वागत में निश्चित स्थानों पर बैनर लगाने का प्रस्ताव दिया था, जिस पर याचिकाकर्ता ने अदालत से इस प्रस्ताव पर उपयुक्त आदेश देने का अनुरोध किया था.

    मक्कल निधि मैयम के संस्थापक कमल हासन ने सरकार के इस कदम पर बुधवार को प्रतिक्रिया देते हुए मोदी एवं शी चिनफिंग के स्वागत में बैनर लगाने के लिये अदालत से मंजूरी का अनुरोध करने से संबंधित इस कदम की आलोचना की थी. अभिनेता से नेता बने हासन ने मोदी से ‘‘एक अगुवा के तौर पर कार्य करने” और ‘‘बैनर संस्कृति” को खत्म करने की अपील की. इससे पहले अदालत ने 23 वर्षीय इंजीनियर सुभाश्री की मौत के बाद अवैध होर्डिंग को लगाने के खिलाफ एक याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को फटकार लगायी थी. अवैध होर्डिंग के खिलाफ सख्त रुख दिखाते हुए अदालत ने हैरानी जतायी, ‘‘राज्य सरकार को सड़कों को खून से रंगने के लिये और कितने लीटर खून की जरूरत है

    https://twitter.com/ikamalhaasan/status/1179348935594430470

    27 सितंबर को हुई घटना के सिलसिले में पुलिस ने सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक के स्थानीय स्तर के एक पदाधिकारी जयगोपाल को पकड़ा था और उसके खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया. वह करीब दो हफ्ते से गिरफ्तारी से बच रहा था. अन्नाद्रमुक के पदाधिकारी द्वारा लगायी गयी अवैध होर्डिंग के नीचे से गुजर रही लड़की पर यह होर्डिंग गिर गयी थी जिससे वह सड़क पर गिर गयी, तभी एक लॉरी ने उसे कुचल दिया जिससे उसकी मौत हो गयी. यह होर्डिंग जयगोपाल.. INPUT:(NDTV)

  • पश्चिम बंगाल में एनआरसी लाने से पहले नागरिकता संशोधन विधेयक लाएंगे: अमित शाह

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि केंद्र राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का विस्तार पश्चिम बंगाल तक करेगा लेकिन इससे पहले सभी हिंदू, सिख, जैन, ईसाई और बौद्ध शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने के लिए नागरिकता (संशोधन) विधेयक पारित किया जाएगा.

    विवादास्पद एनआरसी पर एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस एनआरसी के बारे में लोगों को गुमराह कर रही है.

    उन्होंने कहा, ‘एनआरसी के बारे में बंगाल के लोगों को गुमराह किया जा रहा है. मैं सभी हिंदू, बौद्ध, सिख, जैन, ईसाई शरणार्थियों को आश्वस्त करता हूं कि उन्हें देश छोड़ना नहीं पड़ेगा, उन्हें भारतीय नागरिकता मिलेगी और उन्हें एक भारतीय नागरिक के सभी अधिकार मिलेंगे.’

    https://twitter.com/ANI/status/1178979318971555841

    इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक शाह ने तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘ममता दीदी कह रही हैं कि बंगाल में कोई एनआरसी नहीं होगी, लेकिन हम एक-एक घुसपैठिये की पहचान कर सभी घुसपैठियों को देश से बाहर किया जाएगा।’

    उन्होंने आगे कहा, ‘जब ममता बनर्जी विपक्ष में थीं. तब उन्होंने घुसपैठियों को निकालने की बात की थी, उन्होंने इसी मुद्दे पर स्पीकर के मुंह पर शॉल फेंक दिया था. अब जब वे घुसपैठिये उनका वोट बैंक बन गए हैं, तो वे उन्हें निकालना नहीं चाहतीं। मैं ममता दीदी को उनका 4 अगस्त 2005 को दिया गया भाषण याद दिलाना चाहूंगा जहां उन्होंने ऐसे घुसपैठियों को निकलने की बात की थी. लेकिन राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को देश हित से ऊपर नहीं रखा जाना चाहिए।’

    अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं से बंगाल के लोगों को नागरिकता संशोधन विधेयक के बारे में जागरूक करने को भी कहा.

    केंद्रीय गृहमंत्री ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की और जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जिक्र करते हुए कहा कि मुखर्जी के बलिदान के कारण ही आज पश्चिम बंगाल भारतीय गणराज्य का हिस्सा है.

    हालांकि अमित शाह के एनआरसी से जुड़े बयान को लेकर विपक्ष इस समय उन पर हमलावर है.

    माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने एनआरसी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताए जाने संबंधी गृह मंत्री अमित शाह के बयान को गैरजरूरी बताते हुए कहा है कि भारत में किसी आस्था को अलग थलग करने वाला कोई कानून वजूद में नहीं रह सकता है, इसलिए शाह को देश में विभाजन का पोषण करने वाली प्रवृत्ति को रोकना चाहिए.

    येचुरी ने बीते मंगलवार को शाह को विभाजन का पोषक नहीं बनने की नसीहत देते हुए कहा, ‘सभी आस्थाओं का मतलब सभी प्रकार की आस्थाएं हैं, इनमें यहूदी, पारसी, मुस्लिम, बौद्ध, जैन और हिंदूओं के अलावा सभी आस्थाओं को मानने वाले इसमें शामिल हैं. गृह मंत्री को विभाजन को बढ़ावा देने, देश को नुकसान पहुंचाने और भारतीयों का दिल दुखाने की कोशिशों को रोकना चाहिए..

    https://twitter.com/SitaramYechury/status/1179012322557194241

    येचुरी ने शाह द्वारा एनआरसी के मुद्दे पर कोलकाता में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए दिए गए उस बयान पर यह प्रतिक्रिया व्यक्त की जिसमें उन्होंने कहा है कि एनआरसी जो अभी असम तक सीमित है, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए यह पूरे देश के लिए जरूरी है और इसे देश भर में लागू किया जायेगा.

    येचुरी ने ट्वीट कर कहा, ‘जिन्ना और सावरकर द्वारा उठाए गए द्विराष्ट्र के सिद्धांत को भारत पहले ही नकार चुका है और यह हमारा संवैधानिक सिद्धांत है. जाति, संप्रदाय, लिंग, आस्था, खानपान, व्यवसाय और राजनीतिक आस्थाओं से परे हटकर सभी भारतीय भारत में समाहित हैं.’

    उन्होंने पश्चिम बंगाल पुलिस को तृणमूल कांग्रेस की कठपुतली पुलिस करार देते हुए कोलकाता पंहुचने पर शाह को काले झंडे दिखा रहे माकपा की राज्य इकाई के नेता पलाश दास सहित 17 नेताओं को हिरासत में लेने का आरोप लगाया.

    उन्होंने कहा कि शाह के आगमन पर विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे माकपा के 17 नेताओं को अभी भी हिरासत में रखा गया है. येचुरी ने भाजपा और तृणमूल कांग्रेस में मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि सत्तारूद्ध तृणमूल कांग्रेस ने सिर्फ भाजपा को विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति दी है. INPUT(THE WIRE)

  • कश्मीर मुद्दे पर सुनवाई के लिए समय नहीं, अयोध्या मामले की सुनवाई ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट

    भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों वाली बेंच ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर में जारी पाबंदी और मूलभूत सुविधाओं तक पहुंच की कमी को चुनौती देने वाली याचिकाओं एक संविधान पीठ के पास भेज दिया.

    द हिंदू के अनुसार, जस्टिस एनवी रमना की अगुवाई वाली संविधान पीठ 1 अक्टूबर को अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को खत्म करने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई शुरू करने वाली थी. अब यह पीठ जम्मू कश्मीर में जारी पाबंदी और अनुच्छेद 370 के खिलाफ दायर दोनों ही तरह की याचिकाओं पर सुनवाई करेगी.

    इन याचिकाओं में केंद्र सरकार के उस फैसले को भी चुनौती दी गई है जिसके तहत जम्मू कश्मीर की मौजूदा स्थिति को बदलते हुए उसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया है. अब यह देखना है कि क्या संविधान पीठ पहले पाबंदियों पर सुनवाई करेगी और कोई आदेश जारी करेगी.

    जम्मू कश्मीर में जारी पाबंदी को चुनौती देने वाली याचिकाओं को संविधान पीठ के पास भेजते हुए सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा, ‘हमारे पास इतने मामलों को सुनने का समय नहीं है. हमारे पास संविधान पीठ का मामला चल रहा है. इन याचिकाओं पर कश्मीर पीठ सुनवाई करेगी.’

    यहां संविधान पीठ मामले से मतलब अयोध्या मामले की सुनवाई से था, जिसमें सोमवार को लगातार 34वें दिन सुनवाई हुई.

    जम्मू कश्मीर में जारी पाबंदी के खिलाफ दाखिल याचिकाओं की सुनवाई कर रहे दोनों जज- सीजेआई रंजन गोगोई और जस्टिस एसए बोबडे, अयोध्या पीठ का भी हिस्सा हैं और इस पीठ के पास 18 अक्टूबर तक अयोध्या मामले की सुनवाई को खत्म की समयसीमा है. अयोध्या मामले में सोमवार से शुक्रवार को शाम पांच बजे तक सुनवाई हो रही है.

    पाबंदियों के खिलाफ दाखिल याचिकाओं का विरोध करते हुए केंद्र ने तर्क दिया कि यह कदम कठिन कारणों की वजह से उठाया गया और इससे जम्मू कश्मीर में 1990 से जारी मौत, आतंक और हिंसा की हजारों घटनाओं पर रोक लगी है.

    जम्मू कश्मीर में जारी पाबंदियों के कारण सुप्रीम कोर्ट में कई हैबियस कार्पस याचिकाएं दाखिल की गई हैं. इसमें युवा वकील मोहम्मद अलीम सैयद की याचिका है जो कि अपने बूढ़े मां-बाप के लिए परेशान हैं.

    माकपा नेता सीताराम येचुरी ने अपने पार्टी के सदस्य एमवाई तरीगामी से मिलने के लिए याचिका लगाई है. जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने अपनी मां से मिलने के लिए याचिका लगाई है.

    हालांकि, अदालत ने इन लोगों के स्वास्थ्य के बारे में बताने के लिए प्रशासन को निर्देश देने के बजाय याचिकाकर्ताओं को ही जम्मू कश्मीर जाकर कुछ परिस्थितियों में मिलने का आदेश दिया.

    अन्य याचिकाओं में राज्य में जारी पाबंदी में लोगों के हालात पर सवाल उठाए गए हैं. इनमें एक याचिका बाल अधिकार विशेषज्ञ एकांशी गांगुली और प्रोफेसर शांत सिन्हा द्वारा दाखिल की गई जिन्होंने जम्मू कश्मीर में बच्चों को गैरकानूनी तौर पर हिरासत में लिए जाने की पुष्टि करने की मांग की है.

    वहीं, एक अन्य याचिका में एक डॉक्टर ने राज्य में चिकित्सकीय सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया है. इसमें कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद की याचिका भी शामिल है.

    एक अन्य याचिका में कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन ने राज्य में मीडिया और संचार माध्यमों पर लगी पाबंदी को चुनौती दी है.

    उन्होंने याचिका में कश्मीर तथा जम्मू के कुछ जिलों में पत्रकारों और मीडियाकर्मियों की निर्बाध आवाजाही पर लगी पाबंदी में तुरंत ढील के लिए केंद्र और जम्मू कश्मीर प्रशासन को निर्देश दिए जाने की मांग की थी.

    उनकी याचिका के मुताबिक, मीडियाकर्मियों को अपना काम करने देने और खबर करने के अधिकार के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 19(एक)(ए) और 19 (एक)(जी) तथा 21 तथा कश्मीर घाटी के बाशिंदों को जानने के अधिकार के तहत निर्देश दिए जाने की मांग की गयी थी.

    यह भी कहा गया था कि याचिकाकर्ता को पता नहीं है कि किस अधिकार और शक्ति के तहत आदेश जारी किया गया. इसमें कहा गया है कि संचार माध्यम कटने और पत्रकारों की आवाजाही पर सख्त पाबंदी की वजह से एक तरह से रोक लग गयी और मीडिया के प्रकाशन प्रसारण पर असर पड़ा है. इससे मीडिया के कामकाज पर एक तरह से पाबंदी लग गयी है.

    हालांकि, सरकार ने दावा किया कि आरोप गलत हैं और कश्मीर के लोगों पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है.

    16 सिंतबर को दिए एक हलफनामे में सरकार ने कहा था कि कश्मीर के 105 (88.57 फीसदी) पुलिस थानों में से 93 में, जम्मू में सभी 90 पुलिस स्टेशनों (100 फीसदी) में और लद्दाख के सभी 7 (100 फीसदी) पुलिस थानों में से धारा 144 के तहत लगाए गए प्रतिबंध हटा दिए गए हैं.

    इसमें कहा गया कि खाद्यान्न, एलपीजी सिलेंडर, पेट्रोल, डीजल आदि जैसी आवश्यक वस्तुओं का तीन महीने का भंडार सुनिश्चित किया गया है.

    अदालत को आंकड़े देते हुए सरकार ने कहा कि पिछले एक महीने में कश्मीर में 8,98,050 एलपीजी रिफिल और 6.46 लाख क्विंटल राशन उपभोक्ताओं में वितरित किए गए. इसमें कहा गया कि जम्मू और लद्दाख में 100 फीसदी जबकि कश्मीर में 97 फीसदी प्राथमिक, उच्च माध्यमिक और हाईस्कूल खुल रहे हैं. input(THE WIRE)

     

  • दो अक्टू बर से जामिया होगा प्लास्टिक फ्री , लगेगा 500 रुपये फाइन..

    प्रदूषण की एक बड़ी वजह प्‍लास्‍ट‍िक का इस्‍तेमाल भी है. इसका प्रयोग कम करने के ल‍िये सरकार लगातार नये कदम उठा रही है. इसी कड़ी में देश की सबसे प्रतिष्‍ठ‍ित यूनिवर्सिटीज में एक जामिया म‍िल्‍ल‍िया इस्‍लाम‍िया(जेएमआई) ने भी प्‍लास्‍ट‍िक के उपयोग पर एक बड़ा फैसला ल‍िया है. जामिया म‍िल्‍ल‍िया इस्‍लामिया(JMI) में अब प्‍लास्‍ट‍िक इस्‍तेमाल पर पूरी तरह रोक होगा और यह नियम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती 02 अक्टूबर, 2019 से लागू होगा.

    यूनिवर्सिटी ने सभी स‍िंंगल यूज प्‍लास्‍ट‍िक पर रोक लगाने का फैसला क‍िया है. ल‍िहाजा, जाम‍िया के कम्‍यून‍िटी सेंटर, सभी कैंटीन, दुकानों, कॉफी हाउस और हॉटल तक में प्‍लास्‍ट‍िक पर बैन होगा. बैन होने वाली प्‍लास्‍ट‍िक की वस्‍तुओं में वो चीजें शामिल होंगी, जो चौड़ाई में 50 माइक्रॉन से कम होंगी. इसमें प्‍लास्‍टि‍क बोतल, कप, ग्‍लास, पॉलिथ‍िन बैग और अन्‍य प्‍लास्‍ट‍िक आइटम शामिल हैं. यही नहीं थर्मोकोल से न‍िर्म‍ित वस्‍तुएं, जैसे क‍ि कप, ग्‍लास और प्‍लेटों पर भी रोक होगा.

    देना होगा मोटा फाइन:
    यूनिवर्स‍िटी के इस न‍ियम को ना मानने वाले लोगों को मोटा फाइन भरना होगा. नियमों का उल्‍लंघन करने वाले लोगों को 500 रुपये का फाइन देना होगा.

    बता दें क‍ि इस साल स्‍वतंत्रता द‍िवस 2019 के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्‍लास्टिक वस्‍तुओं के प्रयोग को रोकने को कहा था. पीएम मोदी ने कहा था क‍ि पर्यावरण की हो रही हानि को रोकने के ल‍िये प्‍लास्‍ट‍िक का इस्‍तेमाल ना करें.

    जामिया म‍िल्‍लि‍या इस्‍लाम‍िया:
    जामिया मिल्‍ल‍िया इस्लामिया यूनिवर्सिटी को मूल रूप से साल 1920 में अलीगढ़ में स्थापित क‍िया गया था. तब यह भारत का संयुक्त प्रांत था. इसके बाद साल 1988 में भारतीय संसद के एक अधिनियम द्वारा इसे केंद्रीय विश्‍वविद्यालय का रूप म‍िला. उर्दू में जामिया का अर्थ होता है ‘यूनिवर्सिटी’ और म‍िल्‍ल‍िया का तात्‍पर्य ‘राष्‍ट्र’ या ‘देश’ होता है. INPUT;(NEWS 18)