Author: Md Irshad Ayub

  • कन्हैया की जन मन गण यात्रा का निशाना – मोदी या तेजस्वी ?

    बिहार में इन दिनों कन्हैया कुमार की जण गण मन यात्रा चल रही है। कन्हैया की इस यात्रा का फलितार्थ उसके चाहने वाले बता रहे हैं की मोदी सरकार के द्वारा लाये गए नागरिकता संशोधन कानून का विरोध और साथ में बेरोजगारी , अशिक्षा और केंद्र सरकार की विभिन्न मोर्चों पर नाकामी को लोगों के बीच सामने लाना है। लेकिन वास्तविकता इतनी मात्र है ? मैं मानता हूँ ऐसा नहीं है। मैं ऐसा क्यों मानता हूँ , इसे समझने के लिए इस यात्रा के चरित्र ,मंच पर उठने -बैठने वाले लोग ,यात्रा को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने वाली दृश्य -अदृश्य ताकतें और इस यात्रा के साथ -साथ यात्रा कर रहे छिपे हुए निहितार्थों से होकर गुजरते हैं।

    इस यात्रा में आने वाले लोग या तथाकथित भीड़ कौन है ?
    कन्हैया की इस यात्रा में अब तक हुई सभाओं की पड़ताल करने पर यह देखा गया है कि औसतन 5000 लोगों की मौजूदगी रहती है। संयोगवश मधुबनी के जयनगर में हुई सभा का प्रत्यक्षदर्शी मैं भी था। 4 फरबरी को मैं जयनगर अपने निजी काम से गया था तभी नेशनल हाईवे के किनारे एक मैदान में लोगों के जमावड़े देखकर पता चला कि कन्हैया कुमार की सभा होने वाली है। मुश्किल से दो से ढाई हजार लोग होंगे। संयोगवश उसी दिन बिहार के छात्रों की इंटरमीडिएट की परीक्षा भी चल रही थी और वे लोग भी जयनगर के 3 -4 परीक्षा केंद्रों से निकल कर सड़क पर खड़े थे यह जानकर कि कन्हैया कुमार आने वाला है। इसलिए सोशल मीडिया पर चालाकी से अलग -अलग कोनों से खींची गयी तस्वीरों को डालकर भारी हुजूम दिखाने की कारीगरी उसकी पी आर टीम का हिस्सा है , कुछ और नहीं।
    अब बात करते हैं भीड़ की प्रकृति पर। इसकी सभा में आने वाले लोग कौन हैं ? शीशे की मानिंद साफ़ है कि कन्हैया की सभा में आये लोगों 70 -80 % मुस्लिम हैं। इसका कारण यह है कि सिर्फ बिहार में ही नहीं , देश भर में NRC ,CAA के विरोध में स्वतःस्फूर्त आंदोलन चल रहा है। अलग -अलग जगहों पर लोग महीना भर से ऊपर से लोग धरने पर बैठे हुए हैं जिसमें अधिकतर मुस्लिम हैं। और मीडिया के द्वारा कन्हैया की गढी हुई तथाकथित क्रांतिकारी और मोदी विरोध का चेहरा ऐसे में सभा के आसपास धरने पर बैठे लोगों को अनायास ही ले जा रहा है। आज मोदी CAA और NRC वापस ले ले और फिर सीपीआई के बैनर तले कन्हैया कोई सभा करे , लोग ढूँढ़ने से भी नहीं मिलेंगे। बाकी जो 20 % लोग उस सभा के हिस्सा बन रहे हैं , वह यूथ है। उस यूथ का कोई स्पेसिफिक चेहरा नहीं है। उस यूथ में वे लोग भी हैं जिसे कन्हैया में कनहैवा देशद्रोही दीखता है , वे लोग भी हैं जिसे कन्हैया में क्रांतिकारी दीख रहा है और वे बेरोजगार युवा भी जो कन्हैया के द्वारा बेरोजगारी के खिलाफ की गयी तक़रीर को सुनकर यह समझ बैठते हैं कि क्रांति अब आने ही वाली है और बेरोजगारी अब बीते दिनों की बात होगी।

    इस यात्रा का मंच कैसे सज रहा है ?

    यह सवाल भी लाजिमी है कि इस यात्रा के तहत हुई अलग -अलग सभाओं में कौन से चेहरे प्रमुखता से दीखते गए और वे किन मकसदों से जुड़े हुए हैं ? पूरी यात्रा में 3 तरह के लोगों के द्वारा मंच के इर्द -गिर्द जगह बनायी जा रही है या यूँ कहें कि ये ही लोग सभाओं के आयोजक और संचालक की तरह दीख रहे हैं। पहले किस्म के लोगों में मुस्लिम सोशल एक्टिविस्ट जो अलग -अलग जगहों पर NRC /CAA के विरोध में आंदोलन को संचालित कर रहे हैं। इस प्रकार आपको अररिया से कटिहार तक की सभाओं में जाहिद अनवर भी नजर आते हैं जो एक रिसर्च स्कॉलर तो हैं ही , NRC /CAA के विरोध में चल रहे आंदोलन के सीमांचल कोआर्डिनेशन कमिटी के प्रेजिडेंट भी हैं। वहीँ ओवैसी की पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इस्लाम भी दीखते हैं तो कदवा के कांग्रेसी विधायक शकील अहमद खान भी दृष्टिगोचर होते हैं । श्री खान हर तरह से मददगार हैं। इस तरह 40 -50 लोगों की टीम में वैसे मुस्लिम युवा , राजनेता या अन्य लोग हैं जिसे लगता है कि कन्हैया के साथ दीखती तस्वीर कहीं उसे कहीं से वैतरणी पार करा दे। इसमें से कई आनेवाले बिहार विधानसभा चुनाव के टिकटार्थी हैं , इससे इंकार नहीं किया जा सकता।

    मंच को दूसरे तरह के लोगों ने भी कब्जाया हुआ है। शिवहर जिले में हुई सभा में मंचासीन कुछ लोगों पर नजर डालिये। श्री नारायण सिंह जो जिला पार्षद भी हैं या रह चुके हैं। बड़े ठसक से मंच पर मौजूद हैं। उनकी छवि उस इलाके में किसी दबंग से कम नहीं। भाजपा से स्वाभाविक जुड़ाव है। शास्वत पांडेय भी दीखते हैं। जदयू के पूर्व विधायक मदन तिवारी भी नजर आ जाते हैं। सबके सब दक्षिण खेमे से हैं और उन्हें कन्हैया में अब सवर्णों का भावी तारणहार नजर आने लगा है। इसलिए वोट भले वो भाजपा को दें और दिलायें , लेकिन कन्हैया के लिए माहौल बनाने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। अब जब राजनीति में हैं तो इच्छा भी होगी कि कांग्रेस , सीपीआई या अन्य जगहों से टिकट दिलाने में कन्हैया मददगार हो तो मदद लेने और बदले में मदद देने में क्या ऐतराज हो। तो इधर भी टिकटार्थियों की लम्बी कतार है।
    टीम में तीसरे किस्म के लोग में सीपीआई की कल्चरल विंग इप्टा के लोग हैं। कमोबेश सभी सभाओं में यही पैटर्न है।

    आगामी बिहार विधानसभा चुनाव और जण -गण -मन यात्रा।

    कन्हैया से जब पत्रकार पूछता है कि आपकी इस यात्रा को क्या विधानसभा चुनाव की तैयारी समझा जाय ? वह सिरे से इंकार करता है और बेरोजगारी , गरीबी ,अशिक्षा, फलाना -ढिमकाना कहकर निकल लेता है। लेकिन यह सच नहीं है। सच यह है कि इस यात्रा के जरिये बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी और अपनी पार्टी का क्लेम और शेयर चाह रहा है जो बुरा नहीं है। ऐसे कई लोग यह कहते मिल जायेंगे जिसमें राजद के समर्थक अधिक हैं कि वह संघ और भाजपा द्वारा प्लांटेड है ताकि अधिक से अधिक मुस्लिम वोट्स को तीतर -बीतर कर सके। मैं फ़िलहाल यह नहीं मानता कि उसे संघ ने प्लांट किया है। लेकिन आगे बढ़ते हैं।
    कन्हैया का सारा फोकस मुसलमानों और दलितों में हैं। ज्यादा मुस्लिम वोट्स पर , उसमें भी खासकर मुस्लिम युवाओं पर। आंबेडकर और आरक्षण से दशकों तक छत्तीस का रिश्ता रखने वाली वामपंथी दलों ने अब चोला बदला या बदलने को मजबूर हुआ और लाल सलाम से चलकर नील सलाम तक पहँच गया। जय भीम और जय मीम गाये जाने लगे हैं। तो इसका साफ़ -साफ़ सन्देश है मुस्लिम और दलित वोटों में सेंधमारी कर राजद को समझौते की टेबल पर लाना और अपना अधिक से अधिक शेयर क्लेम करना। वामपंथी दलों की आखिरी उम्मीद अब कन्हैया से ही है जो बीते कई सालों से सत्ता और संसद की चासनी से महरूम है। कन्हैया में अब उसके अपनी बिरादिरी के लोगों को भी भविष्य नजर आने लगा है जो बीते 30 सालों से सत्ता से या तो दूर रहा है या सीधे तौर पर मजा न लेकर नितीश कुमार की मदद से मजा लेने को मजबूर हुआ। इसलिए दल चाहे भाजपा हो , जदयू हो या कांग्रेस हो , कान्हा की बिरादिरी के नेता कान्हा की अदा पर लहालोट हैं।

    नीतीश की मुस्कुराहट और तेजस्वी की त्योरियाँ।

    स्वाभाविक है नितीश मंद -मंद मुस्कुरा रहे होंगे कान्हा की चपल चालों को देखकर। वर्तमान हालात में जब देश भर में NRC /CAA के विरोध में आंदोलन चल रहा है , यह तो तय है कि मुसलमानों का एक भी वोट जदयू और नितीश कुमार को नहीं जाने वाला जिन्हें इस समुदाय के अच्छे -खासे वोट मिल जाते थे । तब इनका वोट जायगा किसे ? स्वाभाविक है जदयू -भाजपा को हराने में जो सबसे ज्यादा सक्षम होगा उसे ही। और आज की तारीख में भी राजद ही वह दल है और मुसलमानों का एक मुश्त वोट राजद और सहयोगी दलों को ही जाना है। और यह स्थिति नितीश कुमार की पेशानी पर बल लाने के लिए काफी है। ऐसे में कान्हा जब मुसलमानों के घर सेंधमारी करेंगे तो नितीश जी का मुस्कुराना और तेजस्वी की त्योरियाँ चढ़ना लाजिमी है। नितीश बहुत सादगीपसंद और किफायती व्यक्ति हैं। वह बिना मतलब के न तो मुस्कुराते हैं , न गुस्सा होते हैं , न किसी को पुचकारते हैं। इसलिए यदा -कदा जब कान्हा को दुलार कर देते हैं तो उसके निहितार्थ हैं। पश्चिमी चंपारण में जब पुलिस कान्हा को रोकने और डिटेन करने गयी तो आनन -फानन में नितीश जी का अपनी पुलिस का फटकारना बस यूँ ही नहीं था। जब भाजपा और जदयू को यह लग जायगा कि कान्हा उसकी राजनीति के लिए खतरा है , अंदर करने में सेकंड भर की देर नहीं करेगी। लेकिन भाजपा को यह पता है कि कान्हा मुस्लिमों के घर जितना अधिक सेंध मारेंगे , राजद का उतना अधिक नुकसान होगा। ऊपर से कन्हैया को देशद्रोही का ख़िताब देकर उसे मिडिल क्लास हिन्दूओं को एक जगह रखने में उतनी ही अधिक सहूलियत होगी। और यह स्थिति राजद और तेजस्वी की राजनीति के लिए निश्चित तौर पर खतरे वाली है।

    लालबाबू ललित
    अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट

  • अररिया में प्रदर्शनकारियों ने कैंडल मार्च निकाल कर पुलवामा शहीदों को दी श्रद्धांजलि

    हम हैं भारत के द्वारा
    पुलवामा आतंकी हमले में शहीद सैनिकों को धरना स्थल पर दो मिंट का मौन रख कर याद किया गया एवं अररिया धरना स्थल से चांदनी चौक कैंडल मार्च निकाल कर श्रद्धांजलि दी गई!

    इस अवसर पर दिपक दास, अफ्फान क़ामिल, ज़ाहिद अनवर, प्रो रकीब अहमद, तौसिफ़ अनवर, आमिर रेजा, जिब्रान अंसारी, इख्वान क़ामिल, सब्यसाची सेन, अबुल खैर, तारिक़ अनवर, महमूद आलम, सिब्तैन अहमद, सब्बिरुल हक़, हम्माद, साजिद आलम, मुज़्ज़मिल जमाल, मीर मसूद, इब्रार आलम, काशिफ अनवर, बुशरा रहमान, रादिया तरन्नूम, रज़ी अनवर, साक़िब अनवर, हलचल अली, छोटे बाबू, गाजी खान सहित सेकड़ों की संख्या में महिला, पुरुष एवं युवा शामिल थे!

  • दिल्ली विधानसभा चुनाव: पूर्वांचल फैक्टर कितना असर डालेगा, तीस सीटों पर निर्णायक भूमिका में हैं

    दिल्ली का विधानसभा चुनाव हो और हिन्दीभाषी राज्य बिहार और उत्तर प्रदेश की चर्चा न हो यह असंभव सी बात है। यह कहावत है की दिल्ली का रास्तआ उत्तर प्रदेश से होकर गुज़रता है और यह कहावत बहुत हद तक सही भी है सत्ताधारी दल भाजपा और उसके गठबंधन के पास उत्तर प्रदेश और बिहार से ही अकेले 100 से अधिक सांसद हैं इसलिए पूर्वांचल मतदाता को ध्यान में रखना हर पार्टी चाहेगी आज चुनाव प्रचार का आख़िरी दिन बचा है। जितनी रैलियां होनी है वह आज तक ही होगी। क्योंकि 8 फरवरी को दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे और 11 फ़रवरी को मतगड़ना होगी।

    पूर्वांचल फैक्टर

    दिल्ली में पूर्वांचली वोटरों की संख्या के अलग-अलग आंकड़े सामने आते हैं. न्यूज़लॉन्ड्री को दिए एक इंटरव्यू में दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी बताते हैं कि दिल्ली में 43 प्रतिशत वोटर पूर्वांचल के रहने वाले हैं जनसत्ता अख़बार से जुड़े वरिष्ट पत्रकार मनोज मिश्रा जो खुद भी पूर्वांचल से आते हैं, बताते हैं, “दिल्ली में 26 से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों में 20 प्रतिशत वोटर पूर्वांचली हैं. वहीं 10 विधानसभा क्षेत्रों में वोटरों की संख्या 50 प्रतिशत से ज्यादा है. ऐसे विधानसभा क्षेत्र संगम विहार, बुराड़ी, किराड़ी, विकासपुरी और उत्तम नगर है.’’

    भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद पर मनोज तिवारी का होना।

    जहाँ भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी जो की भोजपुरी गायक से सांसद बन्ने तक का सफ़र तय किया है। और अभी वह दिल्ली में भाजपा की कमान संभाल रहे हैं। इसके पीछे बस एक ही वजह है की वह पूर्वांचल से आते हैं और दिल्ली विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं इसको देखते हुए भाजपा के दिल्ली इकाई में मनोज तिवारी के विरोध के बावजूद भाजपा ने विधानसभा चुनाव की कमान मनोज तिवारी के हांथों में दे रखी है। और चुनाव प्रचार में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और बिहार के उप मुख्यमंत्री को भी प्रचार की अहम ज़िम्मेदारी दी गई है। जिसका मुख्य कारण है पूर्वांचल के मतदाताओं की संख्या को ध्यान में रखा गया है। उत्तर प्रदेश और बिहार में अपनी सरकार होने का फ़ायदा उठाना चाहती है भाजपा तो भाजपा की तरफ़ से दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार की कमान वैसे तो प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के हांथों में है।

    कांग्रेस के लिए कितने महत्वपूर्ण हो सकते हैं कृति आज़ाद।

    उसी प्रकार कांग्रेस ने भी भाजपा के पूर्व सांसद और अब कांग्रेस के नेता कृति आज़ाद जो भारतीय क्रिकेट टीम का भी हिस्सा रह चुके हैं और पिछला 2019 का लोकसभा से पहले भाजपा से कांग्रेस में आए और झारखंड के धनबाद लोकसभा से चुनाव लड़ा जिसमें उनहें हार का सामना करना पड़ा था लेकिन उनकी भी अपनी राष्ट्रीय पहचान है। भले ही कृति आज़ाद अभी कांग्रेस में आए हैं लेकिन इनके पिता श्री भागवत झा आज़ाद बिहार के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं जो कांग्रेस के कद्दावर नेता थे। कृति आज़ाद भी दरभंगा से तीन बार लोकसभा सदस्य और दिल्ली के गोल मार्केट से विधानसभा के सदस्य भी रह चुके हैं। इसलिए कांग्रेस ने भी अपनी शुन्य को दूर करने के लिए और पूर्वांचल के मतदाताओं को ध्यान रखते हुए उनहें दिल्ली विधानसभा चुनाव का प्रमुख बनाया है। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती शिला दीक्षित जीनकी शादी उत्तर प्रदेश में कन्नौज में हुई थी और उनहोंने भी अपने को पूर्वांचल की कहकर हमेशा राजनीति की। लेकिन अभी कांग्रेस के पास शिला दीक्षित की मृत्यु के बाद कोई वैसा नेता नहीं है जो दिल्ली की जनता के पर अपना प्रभाव छोड़ सके। इसलिए कांग्रेस के पास खोने को कुछ नहीं है। कांग्रेस मैदान में अपने कुछ प्रत्याशीयों और राष्ट्रीय नेतृत्व के दम पर चुनाव लड़ रही है। इसलिए कांग्रेस की कोशिश है किसी भी तरह से अपना वोट प्रतिशत बढ़ाया जा सके और विधानसभा में अपने शून्य के नम्बर को समाप्त किया जा सके। जबकि 2013 तक पूर्वांचल के मतदाताओं साथ कांग्रेस के साथ था।

    अपने पांच साल के विकास और केजरीवाल का चेहरा।

    आम आदमी पार्टी को अपने पिछले पांच सालो के कामों पर भरोसा है। और अरविंद केजरीवाल का एक मज़बूत चेहरा है जबकि और किसी दल के पास अरविंद केजरीवाल को टक्कर देने के लिए कोई नेता नहीं है और अगर मुख्य विपक्षी पार्टी भापजा के प्रदेश अध्यक्ष जो की अरविंद केजरीवाल के सामने कहीं दिखाई नहीं देते हैं और अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की जनता को पिछले चुनाव में किया गया वादा बिजली, पानी, स्वास्थ्य, मोहल्ला क्लिनिक और सरकारी स्कूल जैसे बुनियादी वादे को पूरा कर के दिल्ली की जनता के बीच अपने भरोसे को मज़बूत किया है। अब केजरीवाल भी क्यों पिछे रहते पूर्वांचल के मतदाताओं की बात की जाए तो पिछले विधानसभा चुनाव में आप के 14 विधायक पूर्वांचल से आते थे। इस बार भी आप ने 12 प्रतयाशी पूर्वांचल से संबंध रखते हैं। आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, दिल्ली इकाई के पूर्व प्रमुख दिलीप पांडे और सरकार में मंत्री और वर्तमान दिल्ली इकाई के प्रमुख गोपाल राय भी पूर्वांचल से ही आते हैं। दिल्ली में अपने किए गए विकास और राजनीतिक समिकरण को बखूबी समझने वाले केजरीवाल को पूरी उम्मीद है की फिर से उनकी वापसी ज़रूर होगी । अब यह तो परिणाम ही बताएगा।

    Zain Shahab Usmani, Engineer, Columnist & Political Analyst. This is personal’s view of writer.

  • अंजना ओम कश्यप बदलीं, आजतक बदल रहा या शाहीनबाग की शाहीनों ने लाजवाब कर दिया ?

    अंजना ओम कश्यप से मेरी मुलाकात मोतीलाल नेहरू कॉलेज के एक सेमिनार में हुई थी। हालांकि उसके अलग-अलग सेशन में हम वक्ता थे लेकिन श्रोताओं के उनसे सवाल के उनके जवाब के बाद उन्हें काउंटर किया था मैंने। अंजना का वही फॉर्मूला जवाब था कि जो दर्शक देखना चाहता है मीडिया वही दिखाती है। बाद में खाना खाते हुए एक-दूसरे से और संवाद हुआ।

    हालांकि अंजना के जवाब में एक बात तो जरुर सच था कि कमोवेश मीडिया को उसके दर्शक प्रभावित करते हैं-कौन सा कार्यक्रम कितना देखा जाता है, इस स्तर पर। आज शाहीन बाग में उनकी रिपोर्टिंग यू ट्यूब पर उनकी दूसरी रिपोर्टिंग की तुलना में काफी ज्यादा लाइव देखी जा रही थी। तो क्या यह देखना ही अंजना और आजतक को बदल रहा है-यह अधूरा सत्य है, लेकिन सत्य तो है ही।

    मीडिया कभी भी वायनरी में नहीं होती। गोदी मीडिया और क्रान्तिकारी मीडिया की बाइनरी। पूंजी के नियंत्रण के भीतर जितनी ढील है उसी में वह कभी आजतक होगी तो कभी एनडीटीवी। हालांकि अंजना ओम होने और रवीश कुमार होने में बहुत फर्क होता है। अरुण पूरी के नेतृत्व वाले अन्य माध्यम-मसलन इंडिया टुडे, लल्लनटॉप आदि सीधे एकरूप पैकेज नहीं हैं-एक पैकेज जरूर हैं। क्रेता की रूचि के अनुरूप। (नोट: यहां मैं मीडिया की बात कर रहा जी न्यूज, रिपब्लिक टीवी जैसे मुखपत्रों की नहीं जो भाजपा के सांसदों की अपनी दुकान है।)

    लेकिन महाराष्ट्र चुनाव के बाद से आजतक थोड़ी-थोड़ी करवट ले रहा है, अपने ही हाउस के इंडिया टुडे जैसा हो रहा है, लल्लनटॉप जैसा नहीं। कुछ दिन पहले मैंने इस ओर इशारा किया था। इस बदलने के कारण ही ‘जेएनयू का स्टिंग’ हो गया या भाजपा के प्रवक्ताओं से आज थोड़े असुविधाजनक सवाल भी पूछे जा रहे हैं।

    आज जब अंजना शाहीनबाग गयीं तो लगभग एक पत्रकार थीं। इसके पहले दो लोग एजेंट की तरह शाहीनबाग में घुसने की निरर्थक कोशिश कर चुके हैं। आज कार्यक्रम का फॉरमेट कुछ ऐसा था कि बीजेपी खुद ब खुद बेनकाब होती गयी। बीजेपी के नेताओं के भाषण के क्लिप के साथ शाहीन बाग की दर्जन भर महिलाओं से रैंडम लिया गया इंटरव्यू और उनका जवाब बीजेपी को अपने फॉर्मेट में अश्लील और झूठा शक्ल देता रहा-पूरे कार्यक्रम में भाजपा को धराशायी किया। और इस कार्यक्रम की प्रस्तोता थीं खुद अंजना ओम कश्यप जिनकी पत्रकारिता/ऐंकरिंग पिछले दिनों समर्पित हो चुकी थी।

    आज की प्रस्तुति में अंजना ने स्त्री होने की संवेदना के साथ वैसे सवाल भी किये जिसे कोई गंजेडी मर्द पत्रकार अपने ठस्स के साथ नहीं कर सकता था। ऐसे गंजेडी मर्द पत्रकार शाहीनबाग से भगाये जाने के योग्य ही होते हैं। आखिर जनता का भी हक़ है कि किस पत्रकार से वो बात करे और किससे नहीं।

    रही बात औरतों के जवाब की। उन औरतों के जवाब से सीएए, एनआरसी सहित राजनीति के बारे बहुत कुछ सीखा जा सकता है। आजतक का कार्यक्रम सरकार और भाजपा में साम्प्रदायिक एजेंडे को ध्वस्त करे या न करे उसे पस्त जरूर करेगा। इस कार्यक्रम का इरादा जितना स्पष्ट था उतनी ही स्पष्टता से औरतों ने और उपस्थितों ने जवाब दिया।

    और थोड़ी राजनीतिक शर्म यदि पार्टी में बची होगी, जिसकी उम्मीद कम ही है, तो 500 रूपये पर प्रोटेस्ट में बैठने के प्रोपगंडा पर औरतों के जवाव को सुनकर वह पश्चाताप जरूर करेगी कि उसने यह मर्दवादी जुमला क्यों उछाला। वैसे अंजना ने भी क्या खूब बाइंड अप कमेंट बोला, ‘ ऐसा कोई नोट इस सरकार ने नहीं छापा है, जिससे इन महिलाओं को खरीदा जा सके।’

    Sanjeev Chandan ji के फेसबुक वॉल से ली गई है ये लेखक का निजी विचार है।

  • “शरजील इमाम, तुम इस देश में कन्हैया कुमार नहीं हो सकते” क्योंकि तुम मुसलमान हो!

    आजकल शरजील इमाम चर्चा में हैं। भाजपा की प्रतीक पॉलिटिक्स ने उसे देशद्रोह का ताजा प्रतीक बना दिया है, जबकि यही भाजपा सरकार आतंकवादी सप्लाई करने वाले देवेंदर सिंह पर देशद्रोह की धारा नहीं लगाती और न ही उसके आकाओं का कनेक्शन खंगालती है। वैसे सरकार, भाजपा और भाजपा के संबित जैसे प्रवक्ता वही कर रहे हैं जो उन्हें करना चाहिए, जो उनकी राजनीति के अनुरूप है। लेकिन हम क्या कर रहे हैं?

    3 जनवरी को शाहीनबाग में सावित्रीबाई फुले जयंती मनाने के लिए हम शरजील से मिले थे। कोई आधे घण्टे की मुलाकात थी। शरजील में हमने पाया कि वह मुसलमानों की राजनीति को वर्षों से, आजादी के दिनों से ठगा हुआ महसूस करता है। उसे कांग्रेस, गांधी, सीपीएम से लेकर आज के नेताओं और दलित नेताओं, जैसे बहन जी अथवा चन्द्र शेखर आदि से सवाल थे। वह चाहता था कि शाहीनबाग का प्रोटेस्ट भी राजनेताओं और आंदोलन को कैरियर की तरह लेने वालों से बचे। शरजील इमाम मुसलमानों की राजनीति को उसी तरह एक दिशा देना चाहता है जैसा किसी भी अस्मितावादी आंदोलन के लोग देना चाहते हैं। यानी सम्बद्ध समूह द्वारा सम्बद्ध समूह की राजनीति।

    बिहार के जहानाबाद के एक स्थानीय नेता का बेटा शरजील ईमाम यद्यपि एक अच्छा आंदोलन शाहीन बाग में खड़ा करने वाले शुरुआती लोगो में एक था लेकिन वह उतना टैक्टिकल नहीं था जितना ऐसे आंदोलनों के निरन्तर संचालन के लिए होना चाहिए। उसने और उसके साथियों ने जनता का मूड समझे बिना, सबको विश्वास में लिये बिना 3 जनवरी के पहले ही शाहीनबाग के प्रोटेस्ट को वापस लेने की घोषणा कर दी। फिर क्या था उसके इस जल्दबाज बयान के लिए उसे भाजपा और अमितशाह का एजेंट तक कहा गया-जोकि ऐसा था नहीं। शाहीनबाग के प्रोटेस्ट को हालांकि दूसरे लोगों ने संभाल लिया लेकिन शरजील की यह जल्दबाजी हमसबको अखरी। लेकिन मुझे बुरा लग रहा था कि उसे शाह का एजेंट कहा जा रहा था, जबकि वह इस आंदोलन के प्रति ईमानदार था। कई बार आप अनायास ही अनपेक्षित खेमे में या तो धकेल दिये जाते हैं या समझे जाते हैं।

    और अब! अब परसो से उसका वायरल वीडियो।वीडियो में कथित तौर पर वह आसाम से शेष भारत को काटने की बात कर रहा है। बस क्या था? शाहीनबाग जैसे आंदोलनों से व्यथित भाजपा को अपने अंदाज के डैमेज कंट्रोल का मौका मिल गया। उस वीडियो को मैंने पूरा सुना। वह आसाम को कतई अलग करने की बात नहीं कर रहा, अलग देश की बात नहीं कर रहा। वह आसाम का सम्पर्क आंदोलनों के जरिये शेष भारत से काटने की बात कर रहा है। उसकी अगली दो-तीन पंक्तियां यह सिद्ध कर देती हैं। लेकिन भाजपा को तो जैसे संजीवनी मिल गयी है। दाढ़ी बढ़ाया एक मुसलमान नौजवान इंडिया से आसाम को काटने की बात कर रहा-ऐसा बिम्ब भाजपाइयों के लिए कितना आह्लादकारी होता है! आई टी सेल के बारे में पता करिये, वीडियो मिलते ही वहां मिठाईया बंटी होगी।

    और हम, हम लिबर्ल्स। हाय। जब बात अपने से अलग लोगों की आती है तो हम जलेबी भी छीलकर खाते हैं। कन्हैया कुमार पर जब भाजपाइयों ने, संघियों ने देशद्रोह का माहौल बनाया तो कन्हैया अपना बेटा था। उसके हर उटपटांग जवाब, बयान के लिए हम तर्क तलाशने लगे। लेकिन शरजील इतना खुशनसीब कहाँ! उसे तो हम उसकी स्थापनाओं में सिद्ध करके रहेंगे। कोई मौका नहीं देंगे कि वह एक अतिरेक और जल्दबाजी से अलग भी सोचे। कन्हैया की जाति और उसके धर्म ने उसे ‘फिर भी पवित्र’ रखा। बिहार के जदयू खेमे के भूमिहारों और अन्य दलों के भूमिहारों के उस दौर के बयान गौर करने लायक हैं। भूमिहार ही क्यों सम्पूर्णता में सारे सवर्णों के बयान, प्रायः।

    पर शरजील, शरजील को यह सुविधा नहीं मिलेगी। ऊपर से उसने गलत अवसर पर अपने अतिरेकी अंदाज का भाषण दिया है। उसे आसानी से भाजपा-संघ देशद्रोही प्रतीक बना देंगे और हम ऐसा बनाने में उनका अपने पूर्वग्रहों और मूर्खताओं के साथ सहयोग ही कर रहे होंगें।

    Sanjeev Chandan की फेसबुक वाल से ली गयी है ये लेखक की निजी विचार है

  • अररिया में CAA-NRC और NPR के खिलाफ प्रदर्शन में लोगों ने गणतंत्र दिवस के मौके पर तिरंगा फहराया

    26 जनवरी, गनतंत्र दिवस के अवसर पर “हम हैं भारत” की ओर से अररिया धरना स्थल पर सुबह 11:30 में झण्डा फहरा कर धूम धाम से गनतंत्र दिवस मनाया गया!
    “हम हैं भारत” के अध्यक्ष दिपक दास ने झंडोत्तोलन किया, “हम हैं भारत” कोडिनेटर ज़ाहिद अनवर सहित कई लोगों ने धरना स्थल पर सभा को संबोधित करते हुए गनतंत्र दिवस और आजादी की लड़ाई के इतिहास को बताया और देश की आजादी के लिये अपना बलिदान देने वाले शहीदों को याद किया!

    इस अवसर पर अफ्फान क़ामिल, तौसिफ़ अनवर, आमिर रेजा, जिब्रान अंसारी, मुजम्मिल जमाल, रवीश कुमार, रेहान सोनू, इख्वान क़ामिल, महमूद आलम, ओबैस यासीन, मीर रज्जाक, अशोक कुमार, सिब्तैन अहमद, सब्बिरुल हक़, साजिद आलम, आमिर फारुक, मीर मसूद, इब्रार आलम, लवली नवाब, नवाब रेजा, रगिब आलम, काशिफ अनवर, बुशरा रहमान, राना साजी, शमामा, रुख्साना, समा प्रवीण, जलीस, शदाब आलम, फैजान आलम, रमीज़, रज़ी अनवर, साक़िब अनवर, डा मुख्तार, शफीउलहुदा,शमसुल होदा मासूम, सहित सेकड़ों की संख्या में महिला एवं पुरुष शामिल हुए!

  • दरभंगा: CAA-NRC-NPR का विरोध, हजारों की संख्या में सड़कों पर उतरकर लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर प्रोटेस्ट किया

    आज दरभंगा में नागरिकता संशोधन कानून, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टरऔर राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के विरोध में हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और मानव श्रृंखला बनाकर विरोध दर्ज किया. इस दौरान लोगों ने हाथों में तिरंगा लेकर एनआरसी, एनपीआर के साथ ही सीएए का विरोध किया.

    दरभंगा में CAA-NRC और NPR के विरोध को लेकर मानव श्रृंखला बनाई गई. इमारत शरिया के आह्वान पर NPR-CAA-NRC के विरोध में पूरे बिहार सूबे में लाखो के तादाद में आकर लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर प्रोटेस्ट में हिस्सा लिया. इसकी शुरुआत किलाघाट के मदरसा हमीदिया के पास जिला मुहर्रम कमेटी में लोगो ने की. ये मानव श्रृंखला करामगंज होते हुए डीएम ऑफिस पर जाकर समाप्त हुई। ज्ञात रहे कि यह प्रोटेस्ट पिछले 7 दिनों से चल रही है ज़िला मोहर्रम कमेटी के पास जिसमें खास तौर कर बड़े पैमाने पर मुस्लिम औरतों शामिल रहती है.

    इस दौरान दोपहर 2 से 3 बजे तक करीब दो लाख से अधिक लोगों ने करीब 10 km किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाई. इस तरह के सैकड़ों मानव श्रृंखला पूरे बिहार में बनाई गई। इसका मकसद बिहार सरकार को बताना था किस तरह ये काला कानून (CAA) जो कि सामाजिक तौर पर विभाजनकारी और भेदभावपूर्ण है इस क़ानून को सरकार तुरंत वापस ले।

    शाहीन बाग की तर्ज पर दरभंगा में मुस्लिम महिलाओं ने CAA-NRC और NPR के खिला फ अनिश्चितकालीन धरना का आज सातवां दिन है

    महिलाओं ने कहा किसी सरकार में इतनी हिम्मत नहीं है कि हमारी गंगा – जमुनी तहजीब को मिटा सके और धर्म के नाम पर हमें बांट सके और ये भी कहा कि अगर ये कानून वापस नहीं लिया गया तो हर एक गली मोहल्लों में हज़ारों शाहीन बाग उठ खड़े होंगे।

    हालांकि हाथों में तिरंगा थामे धरने पर बैठे लोग न तो किसी सियासी पार्टी से जुड़े हुए हैं और न ही संगठन से।

    अफ़राद के हाथों में है अक़वाम की तक़दीर।
    हर फर्द है मिल्लत की मुक़द्दर का सितारा।।

  • जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों ने डाली ‘जामिया स्टडी सर्किल’ की बुनियाद

    (दिल्ली) आज दिनांक 24 जनवरी 2020 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रो ने जामिया के विरासत को संजोने के लिए जामिया स्टडी सर्किल की बुनियाद डाली. इस मौक़े पर एक संवाद का भी आयोजन किया गया, जिसमे बड़ी संख्या में छात्रों ने भाग लिया.

    जामिया स्टडी सर्किल के बारे में हिदायतउल्लाह बताते हैं के इसका मक़सद जामिया की उस विचारधारा को आगे बढ़ाना है, जिसके तहत जामिया की बुनियाद डाली गई थी. वो आगे बताते हैं के इस स्टडी सर्किल के ज़रिया जामिया के छात्रों को ना सिर्फ़ उनके विरासत से रूबरू कराया जाएगा, बल्के उनको देश विदेश के मौजूदा और पूर्व के हालात से भी रूबरू कराया जायेगा.

    आज ज़ाकिर हुसैन लाइब्रेरी की सीढ़ीयों पर छात्र इकट्ठा हुवे, और “मुल्क के वो सियासी हालात जिसमे जामिया की बुनियाद डाली गई” पर बात रखते हुवे जामिया के छात्र मुहम्मद उमर अशरफ़ ने कहा के जामिया आज पुरे विश्व में एक आंदोलन की जगह के तौर पर जाना जा रहा है. पर बहुत कम लोगों के ये पता है कि जामिया ख़ुद एक आंदोलन की देन है, ये ना सिर्फ़ असहयोग और ख़िलाफ़त आंदोलन कि पैदावार है, बल्कि इसके पीछे पैनएशिया मूवमेंट है, उन्होंने रूस तुर्की युद्ध, ग्रीस तुर्की युद्ध, रूस जापान युद्ध और इटली लिबिया युद्ध का उदहारण देते हुवे बताया के इस युद्ध भारत के लोगों ने एशिया के देशों का न सिर्फ़ ज़ुबान से साथ दिया बल्कि पैसे से भी मदद कि.

    बालकान युद्ध का उदाहरण देते हुवे उन्होंने आगे कहा जामिया के संस्थापकों में से डॉ मुख़्तार अहमद अंसारी ने 1911-12 मे हुए इस युद्ध मे तुर्की के समर्थन मे मेडिकल टीम की नुमाईंदगी की, जिसके बाद तुर्की ने 1 दिसम्बर 1915 को काबुल में राजा महेंद्र प्रताप कि अध्यक्षता में बनी आज़ाद हिंदुस्तान सरकार को मान्यता दे दी थी. इस सरकार की सरप्रस्ती जामिया की संग ए बुनियाद डालने वाले मौलाना महमूद उल हसन ने कि थी, इस सरकार के गृहमंत्री मौलाना ओबैदउल्ला सिंधी थे, जिन्होंने जामिया में पढ़ाया, इन लोगों का मक़सद ना सिर्फ़ भारत को आज़ाद करवाना था, बल्कि पुरे एशिया से साम्राज्यवादी ताक़त को बाहर निकलना था.

    इस मौक़े पर छात्रों से सलाह भी ली गई, जिसमे छात्रों बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया, देवांशी माहेश्वरी ने इस पहल का स्वागत करते हुवे कहा के ये छत्रों के द्वारा शुरू कि गई एक बहुत अच्छी पहल है, और इसी तरह विभिन्न मुद्दे पर संवाद होते रहनी चाहिए.

    जामिया के एम.सी.आर.सी के छात्र मुदस्सिर नज़र ने कहा के जामिया स्टडी सर्किल से ना सिर्फ़ छात्रों का बल्के समाज के कमज़ोर तबक़े का भी फ़ायदा होगा.

    एहसान उर रहमान के अनुसार छात्रों का काम ना सिर्फ़ परिक्षा पास कर नौकरी करना है, बल्कि समाज के विकास में भी सहयोग करना है.

    इस मौक़े पर अफ़ाक़ हैदर, नेहाल ज़ैदी, सलमान अहमद, आरिफ़ा, मदिहा आदि छात्र मौजूद थे.

  • शाहीन बाग की तर्ज पर दरभंगा में मुस्लिम महिलाओं ने CAA-NRC और NPR के खिलाफ संभाली मोर्चे की कमान

    देश में सी ए ए, एन पी आर और एन आर सी के खिलाफ महिलाओं की उठती आवाज़ के स्वर आज दरभंगा में भी सुनाई दिए। नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship amendment act) के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग़ की तर्ज पर दरभंगा की महिलाओं ने भी दरभंगा शहर के किला घाट के पास जिला मोहर्रम कमेटी के दफ्तर के सामने अनिश्चितकालीन धरना की शुरुआत की है

    महिलाओं ने कहा किसी सरकार में इतनी हिम्मत नहीं है कि हमारी गंगा-जमुनी तहजीब को मिटा सके और धर्म के नाम पर हमें बांट सके और ये भी कहा कि अगर ये कानून वापस नहीं लिया गया तो हर एक गली मोहल्लों में हज़ारों शाहीन बाग उठ खड़े होंगे।

    हालांकि हाथों में तिरंगा थामे धरने पर बैठे लोग न तो किसी सियासी पार्टी से जुड़े हुए हैं और न ही संगठन से।

    अफ़राद के हाथों में है अक़वाम की तक़दीर।
    हर फर्द है मिल्लत की मुक़द्दर का सितारा।।

  • CAA-NRC-NPR के खिलाफ नवादा के मोगलाखार कब्रिस्तान के निकट अनिश्चितकाल धरना प्रदर्शन शुरू हुआ

    आज 2 बजे की घोषणा के अनुसार, केंद्र सरकार के काले कानून के खिलाफ अनिश्चित काल के लिए मोगालाखार कब्रिस्तान के निकट धरना प्रदर्शन शुरू किया गया है जब तक वर्तमान सरकार कानून को वापस नहीं लेती है तब तक प्रदर्शन जारी रहे गा। जो कस्बों और बाहरी इलाकों से है। बड़ी संख्या में, विभिन्न धर्मों और लोगों के लोगों ने भाग लिया। देश में शांति और सद्भाव बनाने के लिए शांति पूर्ण धरना प्रदर्शन किया। नदीम हयात और उनके भागीदारी ने यह कार्यक्रम शुरू किया, और यह स्पष्ट है कि विरोध का कार्यक्रम किसी भी राजनीतिक दल के बैनर तले नहीं है। बल्कि सार्वजनिक स्तर पर रखा गया है। यह कार्यक्रम एनआरसी, सीएए, एनपीआर जैसे काला कानून को लेकर रखा गया है। नदीम हयात, शमीमुद्दीन, तारिक बाबा, जसीमुद्दीन वार्ड पार्षद, अलाउददीन, फखरुद्दीन, हाफिज अब्दुल्ला रिजवी, जहीर अनवर और अन्य के हाथों में तख्तियां और बैनर थे। क़मरुलबारी धमौलवी भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिए। इसके साथ हजारों लोग मौजूद थे।

    नवादा से मोहम्मद सुल्तान अख्तर की रिपोर्ट।