Author: Md Irshad Ayub

  • दरभंगा: राहत राशि वितरण सूची में गड़बड़ी को लेकर बाढ़ पीड़ितो ने विधायक एव मेयर के खिलाफ प्रदर्शन किया, आंदोलन के अगुवाई कांग्रेसी नेता जमाल हसन की

    दरभंगा/बिहार: दरभंगा नगर निगम का घेराव आज पुनः कांग्रेस सेवा दल के जिला अध्यक्ष डॉ जमाल हसन के नेतृत्व में किया गया जिसमें हजारों की संख्या में दरभंगा शहरी क्षेत्र के सभी वार्डों से लोगो ने भाग लिया एवं नगर आयुक्त एवं मेयर का घेराव कर अपनी मांग किया! दरभंगा सेवादल के जिला अध्यक्ष डॉ जमाल हसन ने बताया की पिछली बार भी 8 सितंबर को हजारों की संख्या में दरभंगा जिला कांग्रेस सेवादल और बाढ़ पीड़ितों ने नगर निगम का घेराव कर निगम को लिखित रूप में 72 घंटे के भीतर बाढ़ पीड़ितों के बीच बाढ़ राहत राशि ट्रांसफर करने को कहा था और उस आवेदन में स्पष्ट रूप में कहा गया था कि यदि नगर आयुक्त 72 घंटे के भीतर बाढ़ पीड़ितों के बीच बाढ़ राहत राशि ट्रांसफर नहीं करती है तो 72 घंटे के बाद नगर निगम का चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा जिसे आज 72 घंटा पूर्ण होने के बाद किया है!

    डॉ जमाल हसन ने बताया की नगर निगम के इस सौतेला व्यवहार में जहां एक वार्ड के कुछ बाढ़ पीड़ितों को राशन मिलता है और अधिकतर लोगों को नहीं मिलता है इसमें यहां के विधायक और मेयर की मिलीभगत है! यह लोग अपने खास लोगों को सभी सरकारी सुविधा दे कर आम जनता को ठगने का प्रयास करते हैं जो कि यहां की जनता को बर्दाश्त नहीं है इसलिए जनता की मांग पर हमने पुनः नगर निगम बंद किया क्योंकि नगर आयुक्त को इसके संबंध में 8 तारीख को ही आवेदन दे दिया गया था इसके बाद भी नगर आयुक्त इस कार्य को पूरा नहीं कर पाए साथ ही नगर विधायक और महापौर दोनों ने इस मामले में कोई भी संज्ञान नहीं लिया और ना ही बाढ़ पीड़ितों के बीच राहत राशि बांटे इस मामले में कोई भी पहल नहीं किया इन दोनों को सिर्फ चुनाव के वक्त जनता याद आती है और यह दोनों दरभंगा की जनता के साथ सौतेला व्यवहार कर रहे हैं!मोहल्ले वासियों का आरोप है कि उन वार्डो में और मोहल्लों में बाढ़ राहत की राशि भेजी जाती है जहां बाढ़ आती नहीं है, जहां बाढ़ आती है उस मोहल्ले वासियों को आज तक बाढ़ की राशि से वंचित रखा जाता है! क्या गरीबों के साथ यह भेदभाव नहीं है! ऐसा होगा तो आने वाले चुनाव में यहां के जनप्रतिनिधि को भी घेरा जाएगा! नगर निगम का घेराव करते हुए आम जनता ने नगर विधायक चोर है, मेयर चोर है का नारा लगाकर विरोध प्रदर्शन किया! उप नगर आयुक्त कमलनाथ झा से वार्ता के बाद उप नगर आयुक्त ने डॉ जमाल हसन से कहा कि प्रत्येक वार्ड जहां बाढ़ आया था वहां 5 सदस्यीय कमेटी बनाकर हमे बाढ़ पीड़ितों की सूची सौपे उसके बाद हम जांच कर बाढ़ राहत राशि ट्रांसफर करेंगे!

    नगर निगम बंद करने वालों में जिला उपाध्यक्ष संजीत पासवान, जिला महासचिव फैसल इमाम, सत्येंद्र ठाकुर जिला सचिव राजेश पासवान, मोहम्मद असगर, नगर उपाध्यक्ष रियाजुद्दीन कुरेशी, नगर सचिव तरुण ठाकुर, वार्ड 4 के सेवादल अध्यक्ष सज्जन साह,महिला सेवा दल जिला सचिव सैलो देवी, सहानी परवीन दिलीप साह, वार्ड 3 के समाजसेवी संतोष साह, मनोज साह सहित हजारों महिलाएं पुरुष मौजूद थे।

    प्रेस रिलीज़: फैसल इमाम,जिला महासचिव,दरभंगा जिला कांग्रेस सेवादल

  • पप्पू यादव ने दरभंगा में 200 बाढ़ पीड़ित परिवारों की आर्थिक मदद की, पूरे शहर को बाढ़ प्रभावित इलाका घोषित करने की माँग की

    जन अधिकार पार्टी लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय पप्पू यादव जी पूर्व से घोषित कार्यक्रम में आज दरभंगा के श्यामा रेसीडेंसी होटल पहुंचे जहां उन्होंने जिला अध्यक्ष डॉक्टर मुन्ना खान के साथ एक प्रेस वार्ता किया, उन्होंने सीधे तौर पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 15 सालों में सिर्फ प्रचार प्रसार किया गया मगर थोड़ा ट्रिपल कोई काम नजर नहीं आता नीतीश जी अच्छे इंसान हो सकते हैं लेकिन अच्छे मुख्यमंत्री नहीं मेरी सरकार अगर आती है तो नियोजित नाम का कोई शब्द नहीं होगा शिक्षक हो या कोई भी विभाग सब में परमानेंट नौकरी का प्रावधान होगा और जो नियोजित पर काम कर रहे हैं उनको परमानेंट करने का सबसे पहले काम किया जाएगा,नीतीश जी शिक्षा में,स्वास्थ्य में,
    कारोना महामारी में,बाढ़ में पूरे तौर पर विफल हैं, जिस विभाग का जो काम है और जिस विभाग में बहाली हुई है उसी विभाग में ही काम करना होगा उनसे कोई दूसरा काम नहीं लिया जाएगा,शिक्षक पढ़ने पढ़ाने के लिए बहाल किए गए हैं तो उनको सिर्फ बच्चों को पढ़ा कर बिहार के भविष्य के निर्माण के लिए प्रयोग किया जाएगा,उनसे कोई दूसरा काम करवा कर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं किया जाएगा, सुशांत सिंह राजपूत पर मैंने तो डेढ़ महीना पहले ही कह दिया था नीतीश बाबू अब जाके हैं क्योंकि वोट की राजनीति उन्हें करनी आती है।

    इस प्रेस वार्ता में युवा जिला अध्यक्ष चुनमुन यादव युवा कार्यकारिणी प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत सिंह, पुतुल बिहारी,एडवोकेट सुनील कुमार, अकलियत जिला अध्यक्ष चांद हामिद, प्रदेश छात्र कार्यकारणी अध्यक्ष दीपक झा,मोहन यादव आदि मौजूद थे, प्रेस वार्ता के बाद जदयू,आरजेडी, आप,भाजपा को छोड़कर इन लोगों ने जन अधिकार पार्टी लोकतांत्रिक की सदस्यता राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय पप्पू यादव जी के समक्ष ले लिया जिसमें आमतौर पर ज्योति शुक्ला, भारती सिंह,सियाराम पासवान,अरविंद कुमार, विसंबर यादव,अरविंद कुमार,मोहम्मद आलम, अभिषेक कुमार,अविनाश कुमार,मुरारी कुमार यादव, अवधेश यादव,राम नरेश यादव,गौरव दत्ता,शंकर कुमार राय,दिनेश साह, ललित जी,सतीश प्रसाद, सदस्यता दिलाने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू यादव डीएमसीएच पहुंचे ज्ञात हो कि बीते दिनों ढाई साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ था,उस बच्ची और उनके पूरे परिवार से मिले और उन्हें 25000/- की आर्थिक मदद किया और डॉक्टर बी एस प्रसाद से बात करते हुए भावुक हो गए और कहा कि इस बच्ची की ऑपरेशन में जो भी खर्च आएगा जन अधिकार पार्टी लोकतांत्रिक दरभंगा इकाई उठाएगी,मगर इस बच्ची का जान किसी भी हाल में बचना चाहिए, उसके बाद दरभंगा के बाजीदपुर होते हुए रत्नों पट्टी बाइक पर सवार होकर बाढ़ ग्रस्त इलाकों का दौरा करने पहुंचे और बाढ़ ग्रस्त परिवारों को लगभग दो लाख रुपए (₹200000) की आर्थिक मदद 200 परिवारों के बीच में 500-500 की आर्थिक मदद दिया और नगर अध्यक्ष पप्पू सरदार से कहा कि यहां अभिलम्ब खाना और दवा जन अधिकार पार्टी की ओर से पहुंचाने का प्रबंध करें,फिर वहां के बाद बाईक की सवारी करते हुए ही आजमनगर के चतरिया पहुंचे और वहां के मोहल्ले वासियों से मुलाकात करने के बाद जिलाधिकारी महोदय से मोबाइल से बात करके निवेदन किया की पूरे शहर को बाढ़ ग्रस्त घोषित कर देना चाहिए, बहुत बुरी स्थिति है शहरी इलाके में इसलिए इस पर कृपया ध्यान दें,

    प्रेस विज्ञप्ति- डॉक्टर मुन्ना खान, जिला अध्यक्ष जन अधिकार पार्टी लोकतांत्रिक दरभंगा

  • ज़ियाउल्लाह खान : प्रखर वक्त एवं समर्पित समाजसेवी

    14 अगस्त 1935 को सैनिटरी इंस्पेक्टर अब्दुर्रहीम खान साहब के घर जन्मे ज़ियाउल्लाह खान में समाजसेवा का जुनूर बचपन से ही था। 42 वर्ष की आयु में 20 नवंबर 1977 को वे सर्वप्रथम पटना नगर निगम अंतर्गत वार्ड 24 में बतौर पार्षद निर्वाचित हुए। परिसीमन उपरांत उन्होंने 1983 एवं 2002 में क्रमशः वार्ड 31 व वार्ड 50 का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 1990 से 2002 तक वे पटना के उप महापौर रहे। जनप्रतिनिधि होने का महत्त्व वो बख़ूबी समझते थे। यही कारण था कि न तो अधिकारियों के आगे झुके न ही कभी उनकी जी हुज़ूरी की। राजनीतिक प्रतिद्वंदिता को उन्होंने व्यक्तिगत संबंधों में कभी आड़े नहीं आने दिया। जनता का काम करवाने की उनमें अद्भुत प्रतिभा थी, साथ ही वे निगम कर्मचारियों के हक़ हुक़ूक़ों की लड़ाई में भी कभी पीछे नहीं रहे। वे प्रखर वक्ता भी थे। उनकी वाणी का ओज और प्राण श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता था। वे पक्के दोस्तपरस्त थे। उस ज़माने के पार्षदों में बैजनाथ गोप, जगदीश प्रसाद यादव एवं श्याम बाबू राय आदि कुछ उनके ऐसे ही दोस्त थे जो एक दूसरे पर जान छिड़कते थे। कसेरा टोली निवासी महेंद्र प्रसाद कसेरा भी उनके अनन्य मित्रों में से थे।

    खान साब शिकार के बड़े शौक़ीन थे। पर, शिकार के नियमों का अनुपालन करना वे कभी नहीं भूलते। कभी भी बैठे हुए परिंदों का शिकार उन्होंने नहीं किया। खाने खिलाने के भी वे बड़े शौक़ीन थे। लोगों से मिलना-जुलना और घूमना-फिरना उन्हें अत्यंत रुचिकर था। राजनीति को उन्होंने सर्वदा सेवा और मिशन समझा। यही कारण है कि उन्होंने सर्जना पर ध्यान दिया, अर्जन पर कभी नहीं। उन्हें झूठ से सख़्त नफ़रत थी।

    29 जुलाई 2020 की मनहूस सुबह 3 बजकर 20 मिनट पर पटना सिटी के कंघइया तोला स्थित अपने निवास स्थान पर “नम्मू चाचा” ने अंतिम सांस ली और इस तरह से गंगा-जमुनी तहज़ीब के पक्के हामी और निष्ठावान समाजसेवी की जीवन यात्रा का अवसान हो गया।

  • दरभंगा: कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ रही तेज़ी से, महापौर ने भी ज़िला प्रशासन से पूर्ण लॉक डाउन की माँग की

    मो नसीम अंसारी (मिल्लत टाइम्स,दरभंगा)

    दरभंगा मे कोरोना संक्रमण के तेजी से फैलने पर महापौर बैजंती देवी खेड़िया ने चिंता व्यक्त किया है। उन्होने कहा है कि अभी का समय नगर वासियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यदि अभी भी हम अपने आपको संक्रमित होने से नही रोक पाते हैं तो पिछले लगभग चार महीनो का किया हुआ संयम बेकार हो जाएगा और स्थिति विकराल रुप ले लेगी। महापौर ने लोगों से अपील की है कि वे अपने अपने घरों पर ही रहें। अत्यावश्यक होने पर ही मास्क पहनकर कहीं निकलें। आज के तिथि मे मास्क का प्रयोग और सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखना अत्यावश्यक है। महापौर ने आज जारी किए गये प्रेस विज्ञप्ति मे कहा है कि दरभंगा शहर मे जिस गति से संक्रमित लोगों की संख्या मे वृद्धि हो रही है उसको रोकने के लिए कुछ दिनो तक कंप्लीट लॉकडाउन का होना अति अनिवार्य है। उन्होने कहा कि इस आशय का प्रस्ताव हमने कल जिलाधिकारी के साथ बैठक मे दिया भी था। हम फिर से एकबार जिला प्रशासन से आग्रह करते हैं कि शहर मे कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जायें। साथ ही नागरिकों से भी विनम्र निवेदन है कि अपने जान की कीमत को समझें और सामने वाले की भी। घर मे रहकर इस विपरीत समय का सामना करें।

  • कोयला निजीकरण: मोदी सरकार बनाम हेमंत सरकार

    अफ्फान नोमानी

    देश की सर्वोच्च सरकारी कंपनी और धरोहर का निजीकरण के बाद अब मोदी सरकार के निशाने पर है मध्य भारत में स्थित कोयला खदान. मोदी सरकार ने कोयला खदान की निजी कंपनी के हाथों नीलामी के लिए सूची भी तैयार कर दिया है. इस सुची में मध्य भारत ( ओड़ीशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश व झारखंड ) और पश्चिम बंगाल के कुछ छेत्रों के कोयला खदान है.

    कोयला निजीकरण को लेकर मध्य भारत में मोदी सरकार के खिलाफ विरोध का स्वर तेज हो गया है. पश्चिम बंगाल में कोयला खदान के मजदूर लगातार तीन दिनों से भूख हड़ताल कर रहे है. झारखंड में कुल 22 कोयला खदानें है जो 103 वर्ग किलोमीटर में है। सभी 22 कोयला खदान के मजदुर यूनियन कोयला निजीकरण के खिलाफ विरोध जुलुस निकाल रहे है. झारखंड में कोयला निजीकरण मामले पर सीएम हेमंत सोरेन से लेकर सभी झामुमो, कांग्रेस व राजद के विधायक व नेता सहित अन्य पार्टी के नेता भी कोयला निजीकरण का विरोध कर रहे है.

    झारखंड कोयला खदान में एक ललमटिया भी है जो महागामा विधानसभा छेत्र में आता है. महागामा विधानसभा छेत्र के विधायक कांग्रेस के दीपिका पांडेय सिंह है जो कोयला निजीकरण मामला उठने के बाद शुरू से ही मोदी सरकार के निजीकरण नीति के खिलाफ सक्रीय दिख रही है. दुर्भाग्य से राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कोयला निजीकरण विरोध की खबरें सुर्खियों में नहीं है लेकिन स्थानीय मीडिया ( इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और वेब ) में प्रतिदिन कोयला निजीकरण विरोध की खबरें सुर्खियों में है. विधायक दीपिका पांडेय सिंह अपने कार्यकर्ता के साथ मजदुर यूनियन को लेकर कोयला निजीकरण के खिलाफ विरोध कर रही है.

    झारखंड में कोयला निजीकरण पर सियासत गरम है.इसी को लेकर निजीकरण विरोधी की प्रमुख चेहरा विधायक दीपिका पांडेय सिंह से वार्तालाप किया. बातचीत के दौरान दीपिका पांडेय सिंह ने कहा की ” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजना लोगों की कीमत पर कुछ उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए कोयला क्षेत्र का निजीकरण करने की है. भाजपा सरकार ने कुछ उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए इसके निजीकरण की योजना बनायी है. हम जनता के हित में निजीकरण के खिलाफ लड़ते रहेंगे. अगर कोयला निजीकरण हुआ तो सबसे पहले हमारे लाश से गुजरना होगा. क्योकि जल,जंगल, जमींन और झारखंड की सभी संपदा बचाना हम झारखंडवासी का मौलिक अधिकार है. और इसको बचाने के लिए हेमंत सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुकी है. झारखंड की हेमंत सरकार मोदी सरकार से क़ानूनी लड़ाई लड़ रही है. अभी तो सिर्फ 22 कोयला खदान छेत्रों में आंदोलन शुरू हुआ है, जरुरत पड़ी तो पुरे राज्य में जन आंदोलन होगा. लेकिन हम झारखंडवासी किसी निजी कंपनी को किसी भी कोयला खदान में घुसने नहीं देंगे. झारखंड की संपदा से झारखंडवासी का आर्थिक रूप से जुड़ाव है. जो कमाने खाने का एक मात्र जरिया है. अगर निजीकरण होता है तो उद्योगपति अपनी मर्जी चलाएगा जिससे बहुत संख्या में स्थानीय लोग बेरोजगार हो जायेगे. और हम ऐसा मजदूर वर्ग के हित में नहीं होने देंगे “.

    सवाल है मोदी सरकार के निशाने पर सबसे ज्यादा झारखंड के कोयला खदान ही क्यों है? वजह साफ़ है झारखंड की सभी 22 कोयला खदानें कुल मिलाकर 103 वर्ग किलोमीटर में है। सभी 22 कोयला खदानों में लगभग 386 करोड़ टन कोयले का भंडार है। इसलिए 22 कोयला खदानों से झारखंड के खजाने में आने वाली कुल राशि 90 हजार करोड़ के पार होगी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 जून को कोयला ब्लॉकों की ऑनलाइन नीलामी की प्रक्रिया शुरू की थी. लेकिन मोदी के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में हेमंत सरकार की दखल के बाद कोयला खदानों की नीलामी में पेच आ गया है. देश में कोयला क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ लाखों कोयला मजदूर हड़ताल पर हैं। इसमें वामपंथी संगठनों के अलावा आरएसएस से जुड़ी बीएमएस तक को भारी दबाब में शामिल होना पड़ा है. इस मामले के विभिन्न जानकर भी निजीकरण के खिलाफ है. माइंस मिनरल एंड पीपल के अध्यक्ष श्रीधर रामामूर्ति का कहना है की ” अगर कोयला का निजीकरण होता है तो निजी कंपनिया अंधाधुंध खनन करेंगी और कोल इंडिया जैसे सार्वजनिक छेत्र के उपक्रम को हाशिए पर पहुँचा देंगी “.
    मई के शुरूआत में जब कोयला निजीकरण विरोध हुआ तो 18 मई 2020 को बीसीसीएल ने केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री प्रल्हाद जोशी का बयान जारी किया. मंत्री ने कहा है कि कोल इंडिया का निजीकरण नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कंपनी के पास पर्याप्त कोयला भंडार है, जो देश में 100 वर्षों से अधिक तक बिजली बनाने के लिए पर्याप्त है। सरकार को कोल इंडिया पर गर्व है और आने वाले समय में इसे और मजबूत किया जाएगा।

    लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोयला ब्लॉकों की ऑनलाइन नीलामी की प्रक्रिया की खबर से 18 जून के बाद कोयला निजीकरण पर सियासत गर्म है. झारखण्ड, पश्चिम बंगाल,ओड़िसा और छत्तीसगढ़ में विरोध जारी है.

    सवाल है की क्या विदेशी कम्पनियों से खनन करा कर भारतीय जरूरतों की पूर्ति हो सकेगी? जब सरकारी कंपनी खनन करने में सक्षम है तो निजी कंपनी की जरुरत क्या है? गौरतलब हो कि 1973 में कोयला खनन के राष्ट्रीयकरण के बाद निजी कंपनियों के खनन की इजाजत नहीं थी। कोयला खनन की सरकारी कंपनियों की क्षमता पर्याप्त है और उनमें जरूरत के मुताबिक इजाफा की भी गुंजाइश है लेकिन सरकार का असली मकसद कोयला क्षेत्र में कॉरपोरेट्स के लिए लूट व अकूत मुनाफाखोरी के लिए बाजार तैयार करना है। भारत में महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन में कोयला का भंडार होना भारतीयों के लिए एक बड़ा वरदान है. और इसे बचाना राष्ट्र हित में है.

    अब देखना यह है राष्ट्र हित में इसे बचाने में कितना कामयाब हो पायेगी हेमंत सरकार.

    लेखक अफ्फान नोमानी रिसर्च स्कॉलर, लेक्चरर व स्तंभकार है

  • रिसर्च स्कॉलर व लेखक अफ्फान नोमानी की एमएलए दीपिका पांडेय से मुलाकात, पेश की अपनी किताब व विभिन्न मुद्दों पर हुई वार्तालाप

    रिसर्च स्कॉलर व लेखक अफ्फान नोमानी की एमएलए दीपिका पांडेय के बीच अहम मुलाकात हुई. लेखक नोमानी ने साइंस एंड टेक्नोलॉजी पर लिखी किताब एमएलए को पेश किया. लेखक नोमानी ने राज्य कि शिक्षा पॉलिसी व युवाओं के रोजगार, कोयला निजीकरण व मदरसा शिक्षक के रूके वेतन व खासकर साइंस एंड टेक्नोलॉजी पर आधारित रोड मेप पर चर्चा किया. जिसपर एमएलए दीपिका पांडेय ने सहमति जताते हुवे कहा कि शिक्षा व युवाओं के रोजगार पर हम काफी सीरियस है. अपने छेत्र में साइंस, लॉ,एग्रीकल्चर व मेडिकल इंस्टीटूशन कायम करना हमारा अहम विज़न है. होनहार व शिक्षित युवाओं का होना मेरे लिए गर्व की बात है. रही बात मदरसा शिक्षकों के रूके वेतन का तो माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मदरसों के शिक्षक के अनुदान भुगतान का प्रस्ताव कैबिनेट में रखने की स्वीकृति दे दी। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद राज्य के मदरसा के करीब 700 शिक्षक व शिक्षकेतर कर्मियों को अनुदान का भुगतान हो सकेगा। और कोयला निजीकरण मामले को लेकर माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे चुके है.

    हम क़ानूनी लड़ाई लड़ रहे है और जरूरत पड़ी तो जन आंदोलन भी होगा.

  • जन्मदिन मुबारक हो प्रिय अखिलेश यादव

    २०१२ का यूपी चुनाव जिसने भी देखा है उसे याद होगा कि कैसे अचानक एक नौजवान साइकिल से चलकर पूरा यूपी नाप डालता है। उस नौजवान की आँखों में तमाम नए सपने थे जो उसने संजोए थे अपने प्रदेश के लिए, अपनी पार्टी के लिए, मुल्क की जनता के लिए। आँखों में सुंदर स्वप्न और व्यवहार में गजब की आत्मीयता लिए वह युवक राजनीपदार्पण करतापर है और बहुत कुछ उलट-पलट कर रख देता है।

    समाजवादी विचारधारा पर खड़ी पार्टी जो उस वक्त प्रौढ़ावस्था की तरफ़ मुड़ चुकी होती है उसमें अखिलेश यादव का अविर्भाव एक प्रगतिशील, लिबरल और बहुत कुछ बड़ा करने के लिए आतुर युवा के तौर पर होता है।

    अखिलेश यादव वह शख़्सियत हैं जो अपने कर्मक्षेत्र में तमाम बड़े परिवर्तनों और अपने स्वभाव में अद्वितीय विनम्रता बरकरार रखने वाले राजनेता के तौर पर लोगों के दिलों में अमिट छाप छोड़ चुके हैं।

    एक मुख्यमंत्री के तौर पर जिस रफ़्तार से उन्होंने यूपी जैसे बीमारू समझे जाने वाले राज्य को महज़ पाँच सालों में विकास के जिस पथ पर दौड़ाया है वह अविस्मरणीय है।

    जिस राज्य की सड़कें अपने गड्डों की वजह से पूरे देश में कुख्यात थीं वहाँ अखिलेश यादव महज़ १८ महिनों के अल्प समय में एक ऐसी सड़क बनाकर देते हैं जिसकी गुणवत्ता महज़ इस बात से समझी जा सकती है कि आपातस्थिति में उस पर लड़ाकू विमान तक उड़ान भर सकते हैं।

    एक ऐसा राज जहां कई-कई बच्चे स्नातक, परास्नातक होने के बाद भी निर्धनता की वजह से कंप्यूटर या लैपटॉप जानते तक नहीं थे वहाँ बारहवीं उत्तीर्ण करने के बाद हर बच्चे को लगातार पाँच साल hp के बेहतरीन लैपटॉप सरकार ने मुफ़्त देकर “ज्ञान की क्रांति” का मार्ग खोल दिया।

    राजधानी लखनऊ में HCL-IT City, Amul, Lulu Mall जैसी बड़ी कंपनियाँ खड़ी कर दी गईं जिससे रोज़गार सृजन किया जा सके। ना मालूम कितने ही नए अस्पताल बनाए गए और जर्जर हो चुके पुराने अस्पतालों का कायाकल्प किया गया।

    डायल१००, १०९० जैसी विश्वस्तरीय व्यवस्थाएँ नागरिकों को दी गईं जिनकी वजहों से एक समय अपराधों के लिए कुख्यात रहे राज्य में बेहतर क़ानून व्यवस्था को संभव किया गया। चार-चार ज़िलों में मेट्रो ट्रेन का DPR बनकर तैयार किया गया जिसमें से लखनऊ में को मेट्रो शुरु भी हो गई है।
    किसानों एवं लघु उद्योगों को सुदृढ़ करने के लिए नई मंडियाँ बनाने का काम किया गया जिससे उनकी उपज का बेहतर मूल्य उन्हें उपलब्ध कराया जा सके।

    लोहिया ग्राम योजना, लोहिया ग्रामीण बस सेवा के माध्यम से दूरदराज़ के इलाक़ों को मुख्य शहरों से जोड़ा गया। समाजवादी एंबुलेंस सेवा के माध्यम से बीमारु राज्य की बीमारी को दूर करने का रास्ता खोजा गया।

    पाँच साल के कार्यकाल में MBBS की सीटें दोगुनी की गईं, तमाम सरकारी दफ़्तरों की जर्जर हो चुकीं इमारतों को विश्वस्तरीय नईं इमारतों में स्थानांतरित किया गया जिससे सरकारी काम में तेज़ी एवं गुणवत्ता आई। इतिहास की अनमोल धरोहरों को संरक्षित किया गया जिसकी बानगी किसी भी पुरातात्विक महत्व वाली इमारत को देखकर समझी जा सकती है।

    जिस राज्य की प्रमुख पहचान वहाँ के महिलाओं के पिछड़ेपन को लेकर थी वहाँ उन्हें पढ़ने के लिए विद्याधन दिया गया। पिंक ऑटो देकर आत्मनिर्भर बनाया गया।

    एसिड अटैक से पीड़ित महिलाओं के लिए Sheroes Hangout जैसी शानदार पहल को हरी झंडी दिखाई गई। साहित्य, कला, सिनेमा, इतिहास, समाजसेवा और अन्य क्षेत्रों में काम कर रहे लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए “यशभारती” जैसा सम्मान दिया गया।

    सिनेमा को प्रोत्साहित करने के लिए कई तरह की पहल की गई जिसके फलस्वरूप अचानक से यूपी के शहर बॉलीवुड के रूपहले पर्दे पर छाने लगे।

    पर्यावरण प्रेमी अखिलेश यादव ने नदियों की सफ़ाई के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाई और उसे धरातल पर साकार करके भी दिखाया जिसका सबसे बढ़िया उदाहरण गोमती है। हर शहर में पार्कों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया गया उनमें ओपन जिम जैसी चीजें लगवाईं गईं, साइकिल पथ बनवाए गए जिससे सड़कों पर ट्रैफ़िक के भार को कम किया जा सके और साइकिल चलाने वाले स्कूल के विद्यार्थियों को और अन्य लोगों की सुरक्षा गारंटी दी जा सके।

    कुंभ मेले का अभूतपूर्व आयोजन किया जिसे UN जैसी वैश्विक संस्था ने सम्मानित किया। कुंभ की आयोजन समिति का अध्यक्ष श्री आज़म खान जी से करवाकर अखिलेश यादव ने पूरी दुनिया के सामने सांप्रदायिक संकीर्णता को नकार देने का अप्रतिम उदाहरण दिया ऐसी और भी बेहतरीन कामयाबियां हैं एक कुशल मुख्यमंत्री के तौर पर श्री अखिलेश यादव के हिस्से में पर वो सब फिर कभी।

    अब आते हैं दूसरे पहलू पर; एक संगठनकर्ता के तौर पर अखिलेश यादव।
    यहाँ भी अखिलेश पूरी तरह से सफल ही नज़र आते हैं। एक बूढ़ी हो चली पार्टी को वह अचानक से नौजवान करने के काम में जुट जाते हैं और इतनी मोहब्बत अपने हर एक युवा कार्यकर्ता के दिल में अपने ओजस्वी नेतृत्व से भर देते हैं कि यूपी के तमाम युवा अपने प्रिय नेता के नाम पर अपनी जवानी तक क़ुर्बान करने को तैयार हो जाते हैं। वो प्रेम जिसने भी देखा वह चकित रह गया, तमाम विपक्षी पार्टियों के नेताओं के दिलों पर अखिलेश की लोकप्रियता साँप की तरह लोटने लगी।

    हम उन दिनों सुदूर दक्षिण में थे हमनें खुद देखा है तिरुपति, चेन्नई से लेकर हैदराबाद तक के लोगों को अखिलेश यादव के बारे में उत्साहपूर्ण बात करते हुए।

    क्या शानदार माहौल था यूपी में अखिलेश जी के नेतृत्व में। इतवार को बेख़ौफ़ लखनऊ वाले रात में “गंजिंग” करते थे। अधिकारी और सरकार में शामिल मंत्री फुर्सत के वक्त तनाव को कम करने के लिए क्रिकेट खेला करते थे। उन पलों ने यूपी के माहौल में सकारात्मकता भर दी थी जो विकास के लिए सर्वोत्तम बात थी।

    राजनेता के तौर पर भी अगर हम देखें तो पाएंगे अखिलेश यादव यहाँ भी विलक्षण रहे। कांग्रेस और बसपा के साथ किए गए उनके गठबंधन भले ही चुनावी मैदान में सफल ना हुए हों लेकिन इन गठबंधनों की वजह से सपा के तमाम नौजवान कार्यकर्ता के वैचारिक उथलेपन को दूर करने में कामयाबी ज़रूर मिली है।

    समाजवादी पार्टी के पोस्टर पर बाबा साहेब की तस्वीर का आना और सपा के कार्यकर्ताओं का गांधी को जानना इन गठबंधनों का ही नतीजा रहा जो निश्चित तौर पर एक उज्ज्वल भविष्य की ओर इंगित करता है और यह संभव हो पाया सिर्फ़ और सिर्फ़ अखिलेश यादव की गहरी दृष्टि और स्पष्ट आचरण की वजह से।

    हमारे लिए अखिलेश यादव दुनिया के उन बड़े विजनरी नेताओं की श्रेणी में खड़े होते हैं जो अपने शुभकर्मों से बंजर ज़मीन में भी विकास की फसल उगा सकते हैं।

    अखिलेश यादव एक आज्ञाकारी पुत्र के तौर पर, एक श्रेष्ठ पति के तौर पर, एक सुंदर पुरा के तौर पर और एक नेकदिल राजनेता के तौर पर जनता के सामने आते हैं और उसके दिलों पर राज करते हैं।

    संप्रदाय, जाति, भाषा जैसे तमाम मसलों से ऊपर उठकर सभी के हित में “काम के बोलने” की राजनीति करने वाले हरदिल अज़ीज़ टीपू भैया को जन्मदिन की बहुत बहुत मुबारकबाद।
    -पवन यादव

  • काफी संघर्ष के बाद जेल से रिहा हुई बहन सफ़ूरा ज़रगर को मुबारकबाद

    अफ्फान नोमानी

    जम्मू में जन्मी और दिल्ली में पली-बढ़ी ,जामिया मिलिया से सोशियोलॉजी में एमफिल कर रही व साथ ही जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी (जेसीसी) की मीडिया संयोजक सफ़ूरा ज़रगर, जामिया से जेल तक संघर्ष भरी दास्तां सब याद रखा जायेगा. सलाम तेरे साहस व हिम्मत को जिसने निरंकुश सत्ता की आँखों मे आँखें डालकर हमेशा लोकतंत्र व संविधान की आत्मा को जिंदा रखा. गर्भवती के बावजूद स्वतंत्र आवाज को बुलंद रखा. हक़ व इंसाफ के लिए अडिग रही व जुल्म व अन्याय के ख़िलाफ़ संघर्ष करना संघर्षशील साथियों के लिए मिसाल है.

    हमें याद है सीएए आंदोलन का संघर्ष भरा वो लम्हा जब जामिया से जेएनयू, जेएनयू से एएमयू व आईआईटी तक हर तरफ संविधान की रक्षा के लिए ,अपनी पहचान के लिए निरंकुश सत्ता के खिलाफ बिगुल बच चूका था. निरकुंश पुलिस की लाठी का स्वंतत्र आवाज पर प्रहार से पुरे मुल्क में कोहराम मच गया. सफ़ूरा जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी की मीडिया प्रभारी पद पर होते हुवे जाबांज नौजवानों को एक साथ लेकर मुहीम में जो परवान चढ़ा वो मुल्क के हर कोने में गूंज उठा. जो संगठन निरकुंश सत्ता के खिलाफ बोलने से घबराते थे उनका भी धीरे-धीरे स्वर तेज होने लगा. सत्ता में बैठी भाजपा सरकार ने घबराकर आनन-फानन में सीएए विरोधी कार्यकर्ता को गिरप्तार करना शुरू कर दिया. देश के विभिन्न भाजपा शासित राज्यों में खासकर सीएए विरोधी कार्यकर्ता को गिरप्तार किया गया. कई राज्यों में बहुत से सीएए विरोधी कार्यकर्ता पुलिस की अंधाधुन लाठी चार्ज से शहीद हो गए. वो जामिया ही है जहाँ की छात्रों द्वारा सीएए विरोधी मुहीम ने शाहीनबाग आंदोलन को जन्म दिया और एक शाहीनबाग की बुनियाद पर देश के विभिन्न जगहों पर शाहीनबाग का जन्म हुआ. नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध आंदोलन ने देश भर में इस कदर तूल पकड़ा की गैर भाजपा शासित राज्यों में सीएए के विरोध में बिल पास किया गया. केंद्र में बैठी भाजपा सरकार बैकफुट पर आ गयी थी लेकिन इसी बीच गहरी साजिश के तहत दिल्ली में दंगा हुआ. सैकड़ो निर्दोष लोग मारे गए. कई कंपनी, दुकान और घरों में आग जनी हुई और लोग अपने घरों से बेघर हो गए. लेकिन सरकार ने दिल्ली दंगा का निष्पक्ष जाँच कराने के बजाय दंगाई को खुली छूट मिली और दंगा पीड़ितों को मदद करने वाले एक विशेष समुदाय के लोगो को निशाना बनाया गया.

    मालूम हो कि इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस से यह सुनिश्चित करने को कहा था कि कोरोना और लॉकडाउन के चलते दिल्ली दंगा मामले की जांच धीमी नहीं पड़नी चाहिए, जिसके बाद हिंसा मामले में पुलिस 13 अप्रैल तक 800 से अधिक लोगों को गिरप्तारी हुई जिसमें 85% से ज्यादा एक विशेष समुदाय वर्ग के नौजवानों, व्यवसाय व शिक्षण संस्थानो से जुड़े लोगों को गिरप्तार किया गया. उसी कड़ी में जामिया के शोधार्थी छात्र सफ़ूरा ज़रगर, मीरान हैदर, आसिफ इकबाल तन्हा और एल्युमनी एसोसिएशन ऑफ जामिया मिलिया इस्लामिया के अध्यक्ष शिफाउर्ररहमान खान को गिरफ्तार किया गया.

    इन छात्रों पर राजद्रोह, हत्या, हत्या के प्रयास, धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच नफरत को बढ़ावा देने और दंगा करने के अपराध के लिए भी मामला दर्ज किया गया . बड़ी तादाद में जेएनयू , एएमयू , बीएचयू व उस्मानिया यूनिवर्सिटी सहित अन्य यूनिवर्सिटी छात्र छात्रों को भी गिरप्तार किया गया.

    गिरफ्तार सीएए विरोधी कार्यकर्ताओं में सफ़ूरा ज़रगर का नाम ज्यादा सुर्ख़ियों में रही. 27 वर्षीय सफ़ूरा ज़रगर अपनी पहली गर्भावस्था के दूसरे तिमाही में 10 अप्रैल 2020 को गिरफ्तार किया गया था. सफ़ूरा ज़रगर की गिरफ्तारी उस समय सामने आई है जब कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए मोदी सरकार ने देशव्यापी लॉकडाउन कर रखा था. जो अपना रमजान के पहले दिन तिहाड़ जेल में बिताया. गर्भावस्था में सफुरा जर्गर की रमजान में गिरप्तारी की खबर ने एक विशेष समुदाय वर्गो के दिलों को झकझोर कर रख दिया. विभिन्न संगठनों के जिम्मेदार ,समाजिक कार्यकर्ता व वरिष्ठ पत्रकारों ने सफ़ूरा ज़रगर की रमजान में गिरप्तारी को अमानवीय करार देते हुवे दुःख प्रकट किया. सफ़ूरा ज़रगर निरंकुश सत्ताधारी पार्टी के आँखों की किरकरी की अहम वजह यह रही की जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी की मीडिया प्रभारी पद पर होते हुवे सभी जाबांज युवाओं को एकजुट किया और सत्ताधारी पार्टी के ख़िलाफ नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) विरोधी आंदोलन को तेज करने की कोशिश की और बहुत ही मुखर होकर नागरिक संशोधन कानून (सीएए) को देश के 180 मिलियन मुस्लिम अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करता है और देश के धर्मनिरपेक्ष संविधान के ख़िलाफ बताया. राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मीडिया में प्रकाशित होने के बाद केंद्र की सत्ता में बैठी सरकार को यह बात हजम नहीं हुई.

    अंतत: 10 अप्रेल 2020 को दिल्ली पुलिस ने गिरप्तार किया और बाद में अदालत में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कड़े आतंकवाद विरोधी कानून गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम 2019 ( UAPA ) के तहत कार्रवाई की. मामला गिरप्तारी से करवाई तक ही नहीं रुकता है बल्कि गिरप्तारी के बाद सोशल मीडिया पर गंदी मानसिकता व नफरती दक्षिणपंथी गिरोह ने उनकी शादी और गर्भावस्था को लेकर अश्लीलता, फूहड़ता ,सेक्सिस्ट ट्रोलिंग जो हो सकता था सफुरा के खिलाफ हर तरह के प्रोपेगैंडा का इस्तेमाल किया गया. घटिया मीम्स और सफूरा की तस्वीरों से छेड़छाड़ कर छवि खराब करने की कोशिश हुई. उनके गर्भ में पल रहे बच्चे के पिता की पहचान को लेकर आला दर्जे के झूठ गढ़े गए. जबकि सच्चाई यही है की सफुरा एक नेक और प्रतिष्ठित संस्थान में पढ़ाई करने वाली वर्त्तमान में शादीशुदा गर्भवती महिला है. काबिलेतारीफ बात यह है की हर तरह के प्रोपेगैंडा के बावजूद सफ़ूरा ज़रगर अडिग रही और मजबूती से क़ानूनी लड़ाई लड़ती रही.

    अंतत: लंबी क़ानूनी प्रक्रिया व संघर्ष भरी जिंदगी बिताने के 73 दिनों बाद आज दिनांक 23 जून 2020 गत मंगलवार को सफ़ूरा ज़रगर को दिल्ली हाईकोर्ट ने मानवीय आधार पर जमानत दे दी.

    काफी संघर्ष के बाद जेल से रिहा हुई बहन सफ़ूरा ज़रगर को मुबारकबाद. जिंदगी रहे सलामत ये दुआ है हमारी.

    लेखक अफ्फान नोमानी रिसर्च स्कॉलर व लेक्चरर है. इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं.

  • बिहार में एक और नेता कोरोना पॉजिटिव, रघुवंश प्रसाद के बाद बीजेपी विधायक एम्स में भर्ती

    मो नसीम अंसारी (मिल्लत टाइम्स, दरभंगा)

    राजद के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह के कोरोना संक्रमित होने के बाद अब भाजपा के एक विधायक भी इस महामारी के चपेट में आ गए हैं. दरभंगा के जाले से बीजेपी के विधायक जीवेश मिश्रा को कोरोना पॉजिटिव पाया गया है. यही नहीं जाले से बीजेपी विधायक जीवेश मिश्रा के ड्राइवर की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है.

    राजधानी पटना में कोरोना बहुत तेजी से फ़ैल रहा है. आम आदमी से लेकर पुलिसकर्मी, नेता और डॉक्टर सभी कोरोना की चपेट में आ चुके हैं. बता दें कुछ दिनों पहले राजद के दिग्गज नेता और राष्ट्रिय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे. जिनका इलाज एम्स में चल रहा है. वहीं अब एक और नेता इस बीमारी की चपेट में आ गए हैं. बताया जा रहा है कि दरभंगा के जाले से बीजेपी के विधायक जीवेश मिश्रा को कोरोना पॉजिटिव पाया गया है. यही नहीं जाले से बीजेपी विधायक जीवेश मिश्रा के ड्राइवर की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है. जीवेश मिश्रा को जांच के बात एम्स रेफर कर दिया गया है. और अब वे एम्स में आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट किए जा रहे हैं.

    विधायक और उनके ड्राइवर को दरभंगा से पटना एम्स के लिए रेफर कर दिया गया है. इस बात की पुष्ठि दरभंगा सिविल सर्जन ने की है. बीजेपी विधायक जीवेश मिश्रा के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग विधायक के संपर्क में आए लोगों को ट्रेस करने में लग गई है. बता दें जिस तरह से कोरोना का संक्रमण लगातार फ़ैल रहा है उससे आम नागरिक का पता नहीं लेकिन अब नेता भी असुरक्षित हैं.

    गौरतलब है कोरोना से रविवार को बिहार में पांच मौतें हुई हैं.दो बेगूसराय, एक पटना, एक जहानाबाद और एक गया के मरीज की जान गई है. पटना एम्स में दिल्ली के पासपोर्ट ऑफिसर विनय कुमार और जक्कनपुर थाने के होमगर्द जवान बिंदा यादव की मौत हो गई है. 44 साल के विनय जहानाबाद के मखदूमपुर के शीमेला गांव के थे. वहीं 51 साल के बिंदा मसौढ़ी के खरजामा गांव के थे. पटना के पहले जवान की काेराेना से माैत हाे गई. विनय हार्ट पेशेंट थे और 13 जून को पटना एम्स में भर्ती हुए थे. 15 को रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी. बिंदा शुगर के मरीज थे और 10 जून को एम्स में भर्ती हुए थे..

  • क्यों लालू प्रसाद यादव को बिहार में सामाजिक न्याय का मसीहा कहा जाता है?

    Zain Shahab Usmani

    भारतीय राजनीति के बहुचर्चित बिहारी नेता लालू प्रसाद यादव की उम्र 73 साल हो गई है। वो गोपालगंज ज़िले के फुलवरिया गाँव में एक गरीब यादव परिवार में जन्मे थे।

    स्कूलिंग के बाद पटना यूनिवर्सिटी में स्नातक और कानून की पढ़ाई के दौरान छात्र राजनीति में लालू ने कदम रखा। धीरे-धीरे उनकी सक्रियता बढ़ने लगी। पटना यूनिवर्सिटी के छात्र यूनियन का चुनाव जीतकर प्रेसिडेंट बन चुके लालू ने सक्रिय राजनीति में आने का संकेत दिया।

    जेपी आंदोलन में लालू और निखरे

    जब इंदिरा गाँधी का विरोध शुरू हो चुका था तब लालू यादव जेपी के साथ आंदोलन में शामिल हो चुके थे। फिर जब देशभर में इमरजेंसी लगी तो पूरे देश में नेताओं के साथ लाखों आंदोलनकारियों को भी जेल में बंद कर दिया गया। उन आंदोलनकारियों में लालू भी थे।

    जब इमरजेंसी खत्म हूई तो 1977 के लोकसभा चुनाव में जेपी की अगुआई में जनता पार्टी को जीत मिली। काँग्रेस पहली बार देश की सत्ता से बाहर हो गई। तब लालू प्रसाद यादव 29 वर्ष के युवा सांसद के तौर पर सारन लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर लोकसभा में पहुंचे।

    सक्रिय राजनीति में लालू का कद बढ़ता चला‌ गया

    लोकसभा चुनाव जीतने के बाद शुरू हुआ बिहार में लालू प्रसाद यादव का राजनीतिक सफर। सन् 1980 से सन् 1989 तक 2 बार बिहार विधानसभा के सदस्य रहे और विपक्ष के नेता के तौर पर ख्याति प्राप्त की।

    बिहार में सत्ता ने करवट ली और साल 1990 में लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री बन गए। देखते ही देखते सामाजिक न्याय के मसीहा के तौर पर लालू की छवि बन गई। बिहार की सत्ता में पिछड़ों का प्रतिनिधित्व बढ़ते ही पूर्ण रूप से बदलाव आ चुका था।

    कभी बिहार की जो राजनीति सवर्णों के इर्द-गिर्द घूमती थी, वह अब नए रूप में पिछड़ों और वंचितों के इर्द-गिर्द घूमने लगी। उसी सामाजिक न्याय के आन्दोलन का ही नतीजा है कि आज नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री हैं। एक समय ऐसा भी आया कि जीतन राम मांझी भी बिहार के मुख्यमंत्री बने। इस बदलाव के बाद बिहार में कई नेता उभरे।

    बिहार की राजनीति का वह 15 साल

    लालू प्रसाद यादव यादव सन् 1990 से लेकर 2005 तक अकेले अपने दम पर बिहार की सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने में कामयाब रहे। जिसका मुख्य कारण मुस्लिम-यादव गठजोड़ है।

    जिसके तहत ठोस जनाधार और अन्य पिछड़ी जातियों के सहयोग से अपनी चुनावी रणनीति बनाए रखने में लालू कामयाब होते रहे।

    आज भी है लालू के पास मज़बूत जनाधार

    आज भी लालू प्रसाद यादव के पास एक मज़बूत जनाधार है, जो बिहार के अंदर किसी दल या नेता के पास नहीं है। इसका उदाहरण 2004 के लोकसभा चुनाव के नतीजों में दिखाई दिया है।

    फिर 2015 के विधानसभा चुनाव में जब-जब लालू यादव कमज़ोर हुए और खुद को किंग मेकर के रूप में दर्शाया, तो यह साबित हो गया कि लालू यादव के पास मज़बूत जनाधार था और है।

    बात कहने का लालू का अपना खास अंदाज़

    अपनी बात कहने का लालू यादव का खास अंदाज़ है। रेलवे में कुल्हड़ की शुरुआत करने से लेकर चरवाहा स्कूल खोलने और दलितों की बस्तियों में जाकर बच्चों को अपने हाथों से नहलाने का लालू यादव का अंदाज़ हमेशा ही सुर्खियों में रहता है। अपने विरोधियों पर भी वो अलग ही तेवर में हमला करते रहे हैं।

    लालू ने अपने खास अंदाज़ के ज़रिये किसी को भी नहीं छोड़ा। वो मोदी, अमित शाह या फिर भाजपा सभी पर हमलावर दिखाई देते हैं। शायद ही देशभर में कोई भाजपा के विरोध में लालू प्रसाद यादव के बराबर आक्रमक हो।

    अब तक देशभर में लालू यादव की छवि एक मज़बूत सेक्युलर और भाजपा विरोधी नेता की रही है। लालू प्रसाद यादव को उनकी इसी छवि ने बिहार में सामाजिक न्याय का मसीहा बना दिया।