बिहार के नवादा डैम में मिली 150 साल पुरानी मस्जिद, जानें क्या है इसका इतिहास

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05 September 2022 (Publish: 02:01 PM IST)

नई दिल्ली (रुखसार अहमद)  बिहार के नवादा जिले में एक मस्जिद बरामद हुई है। यहां एक नदी थी जिसमें डैम बना हुआ था, पानी सूखने के कारण डैम के पास एक मस्जिद मिली। यह मस्जिद ऐसे वक्त में बरामद हुई है जो मस्जिदों को लगातार शहीद करने की खबरें आती हैं या फिर उन पर हिंदू अपने मंदिरों का दावा करते नजर आ रहे हैं।

इस मस्जिद को निकलने पर आप कुदरत का करिश्मा भी कह सकते हैं। यह मस्जिद बिहार के हरदिया गांव से बरामद हुई है। दरअसल बिहार के नवादा जिले में इन दिनों सूखा पड़ा है इस कारण कई नदियां सूख गई हैं, वहीं उनमें से एक नदी यह भी है जहां मस्जिद बरामद हुई है। रजौली ब्लॉक में एक नदी है जहां पर डैम था जहां पर यह मस्जिद मिली है। यह जो डैम का एरिया था पहाड़ी इलाका था पूरा का पूरा पानी से भरा हुआ था, उस दिन को हरदिया और फुलवरिया डैम भी कहा जाता है।

सूखा पड़ने के कारण डैम यह जो मस्जिद मिली है यह आज के दौर की बनी नहीं है यह मस्जिद 400 साल पुरानी मस्जिद है। बता दे डेढ़ सौ साल पहले एक गांव हुआ करता था, सैलाब आने के बाद गांव बह गया जितने लोग इस इलाके में रहते थे वहसब खाली कर के आसपास के इलाकों में जाकर रहने लगे थे। गांव जब डूब गया था तो किसी ने भी ध्यान नहीं दिया था, हैरानी इस बात की है कि डेढ़ सौ साल बाद भी यह मस्जिद ठीक-ठाक है मस्जिद टूटी नहीं है इसकी दीवारें खराब नहीं हुई है हालांकि थोड़ी कीचड़ है क्यों कितने साल से पानी में डूबी हुई थी।

इस मस्जिद में चाहे तो नमाज भी पढ़ी जा सकती है, लेकिन मुस्लिम इंतजामिया ने यहां नमाज़ पढ़ने की इजाजत नहीं दी है। इंतजामिया का कहना है कि आसपास दूर-दूर तक कोई गांव नहीं है। जिस कारण मस्जिद को आबाद करने का कोई फायदा नहीं है। डैम का इलाका पहाड़ी इलाका है, जहां आसपास जंगल है यहां कोई आबादी नहीं है मस्जिद को बनाने के की कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। इसलिए मस्जिद को आबाद करना मुनासिब नहीं है। हालांकि कुछ लोगों ने इंतजामिया से मस्जिद में नमाज पढ़ने की इजाजत मांगी लेकिन उन्होंने इजाजत नहीं दी।

इस साल बारिश कम होने के कारण फुलवरिया डैम का जल स्तर लगातार कम होता जा रहा है। आने वाले कुछ दिनों में बारिश नहीं हुई तो यहां बड़ा जल संकट हो सकता है। इस डैम का पानी ट्रीट कर 90 गांवों के लोगों तक पहुंचाया जाता है। जब जलाशय सूख जाएगा तो इन गांवों तक पानी पहुंचना बंद हो जायेग। जिससे बड़ी आबादी को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

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