नई दिल्ली : वाराणसी में 35 दिन बाद सोमवार को ज्ञानवापी मस्जिद मामले में सुनवाई हुई। आपत्ति के 52 में से 51 बिंदुओं पर मुस्लिम पक्ष के वकील ने दलीलें पेश की।
जिला जज डॉ. अजय कुमार विश्वेश की अदालत में केस मेरिट पर सुना गया। सबको सुनने के बाद 12 जुलाई को सुनवाई की अगली तारीख तय की गई है। 12 जुलाई को जब मुस्लिम पक्ष की जिरह पूरी हो जाएगी। इसके बाद हिंदू पक्ष अपने दलील पेश करेगा कि मुकदमा सुनवाई योग्य क्यों है।
वहीं, अंजुमन इंतेजमिया मसाजिद कमेटी के वकील अभय नाथ यादव अगली तारीख पर मुकदमे के खारिज होने के आधार को स्पष्ट करेंगे। लेककिन हमने कहा है कि ये बनाए रखने योग्य है। वहां पूजा करने की हमारी मांग कानूनी रूप से मान्य है।” इससे पहले 30 मई को मुस्लिम पक्ष ने केस को खारिज करने के लिए 39 पॉइंट पर दलीलें रखी थी।
जुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी का दावा है कि ज्ञानवापी परिसर में प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रॉविजंस) एक्ट, 1991 लागू होगा। यानी देश की आजादी के दिन धार्मिक स्थल की जो स्थिति थी, वही रहेगी। हिंदू पक्ष की महिलाओं का दावा है कि ज्ञानवापी में प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रॉविजंस) एक्ट, 1991 लागू नहीं होगा। वहां देश की आजादी के बाद वर्ष 1991 तक मां शृंगार गौरी की पूजा होती थी।
ज्ञानवापी परिसर में मस्जिद की देखरेख अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी करती है। उसके एडवोकेट अभय नाथ यादव ने मुकदमे की सुनवाई पर सवाल उठाए हैं। वह अपनी आपत्ति के 52 में से 39 बिंदुओं पर अपनी दलीलें पेश कर चुके हैं।
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