मॉस्को से अचानक ईरान के लिए निकले राजनाथ सिंह, जानिए क्यों अहम है यह दौरा

मास्को में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में भाग लेने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अचानक ईरान पहुंचने वाले हैं। उन्होंने खुद इसकी जानकारी ट्वीट करके दी है। चीन से हालिया तनाव के बीच ईरान दौरे पर भारत के रक्षामंत्री का पहुंचना रणनीतिक लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। तेहरान के एक दौरे से राजनाथ चीन के साथ पाकिस्तान को भी साधने की कोशिश कर सकते है

मुजफ्फर आलम/मिल्लत टाइम्स

तेहरान:मास्को में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में भाग लेने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अचानक ईरान पहुंचने वाले हैं। उन्होंने खुद इसकी जानकारी ट्वीट करके दी है। चीन से हालिया तनाव के बीच ईरान दौरे पर भारत के रक्षामंत्री का पहुंचना रणनीतिक लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। तेहरान में राजनाथ सिंह अपने समकक्ष ईरानी रक्षा मंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। भारतीय रक्षा मंत्री के ईरान के अचानक दौरे से कई कयासों को बल मिलने लगा है। जानिए क्यों महत्वपूर्ण है राजनाथ सिंह का ईरान दौरा?

चाबहार पर होगी बातचीत?
पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के जवाब में भारत ईरान के चाबहार पोर्ट को विकसित कर रहा है। इस पोर्ट के रास्ते भारत न केवल अपनी सामरिक बल्कि आर्थिक हितों को भी साधेगा। चीन से बढ़ते तनाव और रिंग ऑफ पर्ल्स के खिलाफ इस पोर्ट की अहमियत काफी ज्यादा है। कुछ दिनों पहले ऐसी खबरें आईं थी कि चाबहार में निर्माण की धीमी गति को लेकर ईरान चिंतित है। ऐसे में भारत की बड़ी कोशिश ईरान की इन चिंताओं का समाधान करना होगा।
फेल होगा पाकिस्तान-चीन का मिशन ग्वादर
पाकिस्तान और चीन एक साथ मिलकर ग्वादर बंदरगाह को भारत के खिलाफ आर्थिक और सामरिक रूप से इस्तेमाल करने की तैयारी में हैं। ऐसे में चाबहार के जरिए भारत ग्वादर के ऊपर बैठा है और वहीं से चीन-पाकिस्तान की हर हरकत पर नजर रखे हुए है। इस बंदरगाह के कारण पाकिस्तान का व्यापारिक घाटा भी बढ़ रहा है क्योंकि मध्य एशिया के अधिकतर देश अब पाकिस्तान के ग्वादर को छोड़कर ईरान के चाबहार का उपयोग करने लगे हैं।

चीन-पाक को एक साथ साधने की तैयारी
दो फ्रंट पर युद्ध की तैयारी कर रहे चीन और पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारत ने भी कमर कस ली है। ईरान को साधकर भारत न केवल पाकिस्तान बल्कि चीन को भी तगड़ी चोट लगाने की तैयारी में है। चीन ने कुछ दिनों पहले ही ईरान के साथ अरबों डॉलर का सौदा किया था। इसमें न केवल रक्षा बल्कि व्यापार क्षेत्र के भी कई बड़े समझौते हुए थे। ऐसे में अगर भारत चीन के खिलाफ ईरान को मना लेता है तो यह बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जाएगी।

पाकिस्तान को तगड़ा झटका देगा भारत
ईरान और पाकिस्तान की सीमाएं आपस में जुड़ी हुई हैं। इस स्थिति में भारत ईरान को अपने पाले में करके पाकिस्तान को बड़ा झटका भी दे सकता है। वहीं, कट्टर शिया देश होने के कारण पाकिस्तान और ईरान के बीच संबंध अच्छे भी नहीं है। ऐसे में भारत को इसका फायदा हो सकता है। ईरान के रास्ते भारत व्यापार के नए आयाम स्थापित करने की तैयारी में है। इससे भारी दबाव से गुजर रही ईरानी अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

ईरान के रास्ते पश्चिम एशिया से व्यापार बढ़ाएगा भारत
चाबहार पोर्ट के ऑपरेशनल हो जाने से भारत अपना व्यापार अफगानिस्तान और ईरान से कई गुना बढ़ा चुका है। अब भारत की नजर इस बंदरगाह के जरिए रूस, तजकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, कजकिस्तान और उजेबकिस्तान से अपने व्यापार को बढ़ाना है। इस के जरिए हथियारों की खरीद के कारण रूस से बढ़ रहे व्यापार घाटे को भी कम करने में भारत को मदद मिल सकती है।

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